दो-तीन महीने ग्रहीय दृष्टि से खतरनाक !

Covid 19 astrology in hindi


जब तक हम विज्ञान की खोजों के हिसाब से हर परिस्थिति को नियंत्रित करने में समर्थ होते हैं, हमारा आत्मविश्वास काम करता रहता है। पर जब भी ऐसी स्थिति आती है, परिस्थितियाँ हमारे हाथ से निकलती महसूस होती है, लोगों को भाग्य, धर्म सब याद आने लगता है। पवन, अग्नि, जल, रोग की शक्ति के सम्मुख नतमस्तकता ही तो भारतीय संस्कृति में इनके साथ ही कण-कण को ईश्वर समझने को मजबूर करती आयी है। दो-चार महीनो में कोरोना ने विश्वभर में डर का माहौल बनाया है और भयभीत होने पर लोगों को ईश्वर और ज्योतिषी याद आते ही हैं, यह कोई नयी बात नहीं। हमने हमेशा कहा है कि सिर्फ विपत्ति आने पर ही भाग्य, धर्म, ज्योतिषी, ईश्वर को याद न करें, विज्ञान के साथ साथ हमेशा परंपरागत ज्ञान को भी समझते रहें, ग्रहों के प्रभाव को समझते रहें, पर लोगों को चकाचौंध ही चाहिए। चलिए, फिर भी जब जागे तब सवेरा ! 

grahon ka prabhav in hindi

अभी लगातार हमारे सामने लोगों के दो प्रश्न आ रहे हैं ---- पहला कि क्या आपने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी विश्वभर में आतंक वाली है ? दुसरा यह कि इसका खात्मा कबतक होगा ? गत्यात्मक ज्योतिष को समझ चुके हमारे क्लाइंट्स और पाठक तो अच्छी तरह समझते हैं कि ग्रहों के प्रभाव को घटना से नहीं समझाया जा सकता, ग्रहों के हिसाब से समय किसी मामलों के लिए ऋणात्मक होता है, वह आपके सामने किसी प्रकार की घटना उपस्थित कर सकता है। जैसे किसी का खास काल घर-गृहस्थी के मामलों के लिए ऋणात्मक हो तो पति या पत्नी की मृत्यु भी हो सकती है, तलाक भी हो सकता है, दिन-रात कीच-कीच भी हो सकती है। सभी परिस्थितियाँ ऋणात्मकता को ही सिद्ध करती है, इसलिए कोरोना यानि घटना की चर्चा न करके अच्छे-बुरे समय की चर्चा करना चाहूंगी। अगर आपने हमारे रिसर्च पर, पोस्ट पर ध्यान दिया होता, तो यह सब पूछने की नौबत नहीं आती। 

navagraha positions

अपने यूट्यूब चैनल पर हमने 27 अक्टूबर २०१२ को मैंने jyotish ka naya research .. fully scientific ... must watch एक वीडियो पोस्ट की थी,  अधिक नहीं बस 1943 views मिले हैं इस वीडियो को, ज्योतिष को अधिक देखने की लोगों को  जरूरत भी क्या थी ? लेकिन आप इसे एक बार ध्यान से देख लीजिए, खासकर अंतिम भाग २४:४० से अंत तक , जिन्हे वीडियो देखने की फुर्सत नहीं, वे इन चित्रों से भी समझ सकते हैं। लोगों में ग्रहों के प्रभाव के प्रति जागरूकता लाने के लिए इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन को हमारे कई कार्यक्रम में प्रोजेक्टर के माध्यम से  दिखाया जा चूका है-----

covid 19 astrology in hindi


all grah
इस चित्र के माध्यम से मैंने समझाया है कि ग्रह हमसे जितने नजदीक रहें, उतना बुरा होता है।

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इस चित्र के माध्यम से मैंने समझाया है कि ग्रह हमसे जितने दूर  रहें, उतना अच्छा  होता है। 

अच्छा या बुरा - पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने का समय 
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भारत के प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी जी की महत्वाकांक्षी योजना 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' में भी मैंने संक्षेप में इस वीडियो को पोस्ट किया था।

Gatyatmak jyotish research institute

अब मैं आपको गोचर में यानी अभी आसमान में ग्रहों की स्थिति की और लिए चलती हूँ। आपको अभी से २५ दिनों तक की सौरमंडल की फोटो दिखती हूँ, जहाँ तक के चित्र https://www.theplanetstoday.com/index.html# में उपलब्ध है, समय बढ़ने के साथ साथ आगे के चित्र भी आपको इसी वेबसाइट पर मिल जायेंगे ----

saur mandal ki photo
सभी चित्र में ऊपर तिथि अंकित है 

saur mandal ki photo
१५ मई को इसमें तीन ग्रह गुलाबी घेरे लिए हुए हैं, जो इनके वक्री होने का संकेत दे रहे हैं। 

saur mandal ki photo
पृथ्वी और सूर्य के ठीक निचे की और आने को प्रवृत्त हैं ग्रह 
saur mandal ki photo
saur mandal ki photo
पृथ्वी और सूर्य के और निचे की और आने को प्रवृत्त हैं ग्रह

grah kharab hone ke lakshan

ऊपर के चित्रों में आपको सौर-तल के ऊपर कोई भी ग्रह  दिखाई नहीं दे रहे होंगे।  सूर्य और पृथ्वी के ठीक सबसे निचे अधिकांश ग्रह जून-जुलाई में रहेगी, इस समय पूरे विश्व में सर्वाधिक चिंतनीय माहौल बनेगा।  यह पोस्ट आपको डराने नहीं, सावधान करने के लिए लिखा जा रहा है। कैसे भी हो घर में रहें, जान बचेगी तो सबकुछ होगा। सरकार ने गरीबों तक तीन महीने का राशन-पैसे-गैस पहुँचाने और सबको उनके घर में रहने की हिदायत दी थी, तो उस समय मुझे ग्रह-स्थिति देखकर सरकार का उपयुक्त कदम लगा था। हमें इसका विरोध न करके जिनको सुविधा नहीं मिल पा रही थी, उसका नाम लिस्ट में जोड़ते जाने की जरूरत थी। पर जिस भी कारण से सरकार ने फैसला बदला हो, सबकुछ खोलने के लिए नए गाइड-लाइन  जारी हो रहे हों, हमें उचित नहीं लग रहा है। इसलिए अपना ध्यान रखे, घर पर रहें ! सुरक्षित रहें !!

मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




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    समस्या का समाधान कैसे करें ? - 9

     

    Jyotish Upay

    एक सप्‍ताह बाद अपने रिश्‍तेदारी के एक विवाह से लौटी मेरी बहन ने कल एक प्रसंग सुनाया। उस विवाह में दो बहनें अपनी एक एक बच्‍ची को लेकर आयी थी। हमउम्र लग रही उन बच्चियों में से एक बहुत चंचल और एक बिल्‍कुल शांत थी। उन्‍हें देखकर मेरी बहन ने कहा कि इन दोनो बच्चियों में से एक का जन्‍म छोटे चांद और एक का बडे चांद के आसपास हुआ लगता है। वैसे तो उनकी मांओं को हिन्‍दी पत्रक की जानकारी नहीं थी , इसलिए बताना मुश्किल ही था। 

    पर हिन्‍दी त्‍यौहारों की परंपरा ने इन तिथियों को याद रखने में अच्‍छी भूमिका निभायी है , शांत दिखने वाली बच्‍ची की मां ने बताया कि उसकी बच्‍ची दीपावली के दिन हुई है यानि ठीक अमावस्‍या यानि बिल्‍कुल क्षीण चंद्रमा के दिन ही और इस आधार पर उसने बताया कि दूसरी यानि चंचल बच्‍ची उससे डेढ महीने बडी है। इसका अर्थ यह है कि उस चंचल बच्‍ची के जन्‍म के दौरान चंद्रमा की स्थिति मजबूत रही होगी। 

    ज्‍योतिष की जानकारी न रखने वालों ने तो इतनी छोटी सी बात पर भी आजतक ध्‍यान न दिया होगा। क्‍या यह स्‍पष्‍ट अंतर पुराने जमाने के बच्‍चों में देखा जा सकता था ? कभी नहीं , आंगन के सारे बच्‍चे एक साथ उधम मचाते देखे जाते थे , कमजोर चंद्रमा के कारण बच्‍चे के मन में रहा भय भी दूसरों को खेलते कूदते देखकर समाप्‍त हो जाता था। मन में चल रही किसी बात को उसके क्रियाकलापों से नहीं समझा जा सकता था।

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    ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए शुभ मुहूर्त्‍तों में जेवर बनवाने के बाद हमने संगति की चर्चा की है। हमने कहा कि एक कमजोर ग्रह या कमजोर भाववाले व्यक्ति को मित्रता , संगति , व्यापार या विवाह वैसे लोगों से करनी चाहिए , जिनका वह ग्रह या वह भाव मजबूत हो। आज के युग में जब लोगों का संबंध गिने चुने लोगों से हो गया है , ग्रहों को समझने की अधिक आवश्‍यकता हो गयी है। प्राचीन काल में पूरे समाज से मेलजोल रखकर हम अपने गुणों और अवगुणों को अच्‍छी तरह समझने का प्रयास करते थे , हर प्रकार का समझौता करने को तैयार रहते थे। 

    पर आज अपने विचार को ही प्रमुखता देते हैं और ऐसे ही विचारो वालों से दोसती करना पसंद करते हैं। यहां तक कि विवाह करने से पहले बातचीत करके सामनेवाले के स्‍वभाव को परख लेते हें , जबकि दो विपरीत स्‍वभाव हो और दोनो ओर से समझौता करने की आदत हो , तो व्‍यक्ति में संतुलन अधिक बनता है। पर अब हमें समझौता करना नागवार गुजरता है , अपनों से सही ढंग से तालमेल बना पाने वाले लोगों से ही संबंध बनाना पसंद करते हैं। ऐसी स्थिति में अपने और सामनेवालों के एक जैसे ग्रहों के प्रभाव से उनका संकुचित मानसिकता का बनना स्‍वाभाविक है।

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    इसके अलावे हमने ग्रहों के बुरे प्रभाव के लिए दान की चर्चा की है। हमलोग जब छोटे थे , तो हर त्‍यौहार या खास अवसरों पर नहाने के बाद दान किया करते थे। घर में जितने लोग थे , सबके नाम से सीधा निकला हुआ होता था। स्‍नान के बाद हमलोगों को उसे छूना होता था। दूसरे दिन गरीब ब्राह्मण आकर दान कए गए सारे अनाज को ले जाता था। वे लोग सचमुच गरीब होते थे। उन्‍हें कोई लालच भी नहीं होता था , जितना मिल जाता , उससे संतुष्‍ट हो जाया करते थे। 

    हालांकि गृहस्‍थ के घरों से मिले इस सीधे के बदले उन्‍हें समाज के लिए ग्रंथो का अच्‍छी तरह अध्‍ययन मनन करना ही नहीं , नए नए सत्‍य को सामने लाना था , जिसे उन्‍होने सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बिगडने के दौरान पीढीयों पूर्व ही छोड दिया था। पर फिर भी किसी गरीब को दान देकर हम अच्‍छी प्रवृत्ति विकसित कर ही लेते थे , साथ ही बुरे वक्‍त में मन का कष्‍ट भी दूर होता ही है।

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    आज हमलोग उतने सही जगह दान भी नहीं कर पाते हैं। हमारे यहां एक ब्राह्मण प्रतिदिन शाम को आरती के बाद वह थाल लेकर प्रत्‍येक दुकान में घूमा करता है , कम से कम भी तो उसकी थाली में हजार रूपए प्रतिदिन हो जाते हैं। सडक पर आते जाते मेरे सामने से वह गुजरता है , मुझसे भी चंद सिक्‍के की उम्‍मीद रखता है , पर मैं उसे नहीं देती , मेरे अपने पुरोहित जी बहुत गरीब हैं , उन्‍हे देना मेरी दृष्टि में अधिक उचित है। 

    जिस शहर में प्रतिदिन 12 से 14 घंटे काम करने के बाद एक ग्रेज्‍युएट को भी प्रतिमाह मात्र 2000 रू मिलते हों , वहां इसे शाम के दो घंटे मे 1000 रू मिल जाते हैं , उसको दिया जानेवाला दान दान नहीं हो सकता , पर आज ऐसे ही लोगों को दान मिला करता है। किसी भी क्षेत्र में पात्रता का हिसाब ही समाप्‍त हो गया है , इस कारण तो हर व्‍यक्ति ग्रहों के विशेष दुष्‍प्रभाव में है।

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    पर इन सब बातों को समझने के लिए यह आवश्‍यक है कि पहले हमें ग्रहों के प्रभाव को स्‍वीकार करना होगा। जिस तरह ऊपर के उदाहरण से मैने स्‍पष्‍ट किया कि चंद्रमा से बच्‍चे का मन प्रभावित होता हैं , उसी तरह बुध से किशोर का अध्‍ययन , मंगल से युवाओं का कैरियर प्रभावित होता हैं और शुक्र से कन्‍याओं का वैवाहिक जीवन। इसी प्रकार बृहस्‍पति और शनि से वृद्धों का जीवन प्रभावित होता है , इसलिए इन सारे ग्रहों की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए संबंधित जगहों पर दान करना या मदद में खडे हो जाना उचित है। इसमें किसी तरह की शंका नहीं की जा सकती , सीधे स्‍वीकार कर लेना बेहतर है। कल अन्‍य उपाय यानि  रंगों और पेड पौधों की वैज्ञानिकता पर बात की जाएगी !!

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      समस्या का समाधान कैसे करें ? - 10

       

      Jyotish Upay

      ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के उपायों की चर्चा के क्रम में विभिन्‍न रंगो के द्वारा इसे समायोजित करने की चर्चा की गयी है। इन रंगो का उपयोग आप विभिन्‍न रंग के रत्‍न के साथ ही साथ वस्‍त्र धारण से लेकर अपने सामानों और घरों की पुताई तक और विभिन्‍न प्रकार की वनस्‍पतियों को लगाकर प्राप्‍त कर सकते हैं। सुनने में यह बडा अजीब सा लग सकता है , पर इस ब्रह्मांड की हर वस्‍तु एक खास रंग का प्रतिनिधित्‍व करती है और इस कारण एक जैसे रंगों को परिवर्तित करनेवाली सभी वस्‍तुओं का आपस में एक दूसरे से संबंध हो जाता है। और यही ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को रोकने में हमारी मदद करता है।

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      किसी भी पद्धति के द्वारा उपचार किए जाने से पहले उसके आधार पर विश्‍वास करना आवश्‍यक होता है। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ का मानना है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक , मानसिक या अन्‍य परिस्थितियों की गडबडी में उस व्‍यक्ति के जन्‍त्‍मकालीन ग्रहों की ‘गत्‍यात्‍मक शक्ति’ की कमी भी एक बडा कारण होती हैं , इसलिए उन्‍हें दूर करने के लिए हमें ग्रहों के इस दुष्‍प्रभाव को समाप्‍त करना ही पडेगा , जो कि असंभव है। हमलोग सिर्फ उसके प्रभाव को कुछ कम या अधिक कर सकते हैं। जिस ग्रह से हम प्रभावित हो रहे होते हैं , उससे संबंधित रंगों का प्रयोग हमें समस्‍याओं से मात्र आसानी से लडने की शक्ति प्रदान करता है।

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      रंग हमारे मन और मस्तिष्‍क को काफी प्रभावित करते हैं। कोई खास रंग हमारी खुशी को बढा देता है तो कोई हमें कष्‍ट देने वाला भी होता है। यदि हम प्रकृति के अत्‍यधिक निकट हों , तो ग्रहों के अनुसार जिस रंग का हमें सर्वाधिक उपयोग करना चाहिए , उस रंग को हम खुद पसंद करने लगते हैं और उस रंग का अधिकाधिक उपयोग करते हैं। पर प्रकृति से दूर कंप्‍यूटर में विभिन्‍न रंगों के संयोजन से तैयार किए गए नाना प्रकार के रंगों में से एक को चुनना आज हमारा फैशन है और वह हमें ग्रहों के दुष्‍प्रभाव से लडने की शक्ति नहीं दे पाता। यही कारण है कि हमें कृत्रिम तौर पर रंगों की ऐसी व्‍यवस्‍था करनी होती है , ताकि हम विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रह सके। अब इस टॉपिक पर बहुत कुछ कह दिया , कहने को शायद कुछ नहीं , अनुभव की वृद्धि होने पर बाद में फिर कभी !! 

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        पूर्णिमा के दिन चाँदी का छल्ला बनवाएँ !

         

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        हमलोग जब भी ग्रहों के प्रभाव और ज्‍योतिष की चर्चा करते हैं , आम लोगों की जिज्ञासा किन्‍ही अन्‍य बातों में न होकर ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने के उपायों को जानने की ही होती है। इस विषय पर हमने 'क्‍या भवितब्‍यता टाली जा सकती है ?' शीर्षक से 11 आलेखों की एक पूरी शृंखला ही तैयार की है , जिसमें स्‍पष्‍ट किया गया है कि प्रकृति के नियमों को समझना ही बहुत बडा ज्ञान है , उपचारों का विकास तो इसपर विश्‍वास होने या इस क्षेत्र में बहुत अधिक अनुसंधान करने के बाद ही हो सकता है। अभी तो परंपरागत ज्ञानों की तरह ही ज्‍योतिष के द्वारा किए जाने वाले उपचारो को बहुत मान्‍यता नहीं दी जा सकती , पर ग्रहों के प्रभाव के तरीके को जानकर अपना बचाव कर पाने में हमें बहुत सहायता मिल सकती है। लेकिन फिर भी ज्‍योतिषियों द्वारा लालच दिखाए जाने पर लोग उनके चक्‍कर में पडकर अपने धन का कुछ नुकसान कर ही लेते हैं।

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        ग्रहों के अनुसार हो या फिर पूर्वजन्‍म के कर्मों के अनुसार, जिस स्‍तर में हमने जन्‍म लिया , जिस स्‍तर का हमें वातावरण मिला,  उस स्‍तर में रहने में अधिक परेशानी नहीं होती। पर कभी कभी अपनी जीवनयात्रा में अचानक ग्रहों के अच्‍छे या बुरे प्रभाव देखने को मिल जाते हैं , जहां ग्रहों का अच्‍छा प्रभाव हमारी सुख और सफलता को बढाता हुआ हमारे मनोबल को बढाता है , वहीं ग्रहों का बुरा प्रभाव हमें दुख और असफलता देते हुए हमारे मनोबल को घटाने में भी सक्षम होता है। वास्‍तव में , जिस तरह अच्‍छे ग्रहों के प्रभाव से जितना अच्‍छा नहीं हो पाता , उससे अधिक हमारे आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि होती है द्व ठीक उसी तरह बुरे ग्रहों के प्रभाव से हमारी स्थिति जितनी बिगडती नहीं , उतना अधिक हम मानसिक तौर पर निराश हो जाया करते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार हमारी मन:स्थिति को प्रभावित करने में चंद्रमा का बहुत बडा हाथ होता है। धातु में चंद्रमा का सर्वाधिक प्रभाव चांदी पर पडता है। यही कारण है कि बालारिष्‍ट रोगों से बचाने के लिए जातक को चांदी का चंद्रमा पहनाए जाने की परंपरा रही है। बडे होने के बाद भी हम चांदी के छल्‍ले को धारण कर अपने मनोबल को बढा सकते हैं।

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        आसमान में चंद्रमा की घटती बढती स्थिति से चंद्रमा की ज्‍योतिषीय प्रभाव डालने की शक्ति में घट बढ होती रहती है। अमावस्‍या के दिन बिल्‍कुल कमजोर रहने वाला चंद्रमा पूर्णिमा के दिन अपनी पूरी शक्ति में आ जाता है। आप दो चार महीने तक चंद्रमा के अनुसार अपनी मन:स्थिति को अच्‍छी तरह गौर करें , पूर्णिमा और अमावस्‍या के वक्‍त आपको अवश्‍य अंतर दिखाई देगा। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के वक्‍त यानि सूर्यास्‍त के वक्‍त चंद्रमा का पृथ्‍वी पर सर्वाधिक अच्‍छा प्रभाव देखा जाता है। इस लग्‍न में दो घंटे के अंदर चांदी को पूर्ण तौर पर गलाकर एक छल्‍ला तैयार कर उसी वक्‍त उसे पहना जाए तो उस छल्‍ले में चंद्रमा की सकारात्‍मक शक्ति का पूरा प्रभाव पडेगा , जिससे व्‍यक्ति के मनोवैज्ञानिक क्षमता में वृद्धि होगी। इससे उसके चिंतन मनन पर भी सकारात्‍मक प्रभाव पडता है। यही कारण है कि लगभग सभी व्‍यक्ति को पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के उदय के वक्‍त तैयार किए गए चंद्रमा के छल्‍ले को पहनना चाहिए। 

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          टोर्च, घड़ी, कैलेंडर जैसा उपयोगी गत्‍यात्‍मक ज्योतिष !

           

          Jyotish Upchar

          दो दिन पूर्व मेरे पिताजी ने अपने ब्‍लाग में 'घड़ी की तरह ही समय की जानकारी मनुष्‍य के लिए बहुत उपयोगी है' पोस्‍ट किया है , जिससे ज्‍योतिष के ज्ञान के फायदे बताए गए हैं , आप उसे पढकर इसे समझ सकते हैं , पर  इस बारे में संक्षेप में मैं जानकारी दे रही हूं। अंधेरे में चलनेवाले लगभग सभी राहगीर अपने गंतब्य पर पहुंच ही जाते हैं। बिना घड़ी पहने परीक्षार्थी परीक्षा दे ही सकते हैं। बिना कैलेण्डर के लोग वर्ष पूरा कर ही लेते हैं। किन्तु टॉर्च , घड़ी और कैलेण्डर के साथ चलनेवाले लोगों को ही यह अहसास हो सकता है कि उनका रास्ता कितना आसान रहा।वे पूरी अवधि में चिंतामुक्त रहें। इसी प्रकार का सहयोग गत्यात्मक ज्योतिष आपको प्रदान कर सकता है।

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          अतिसामान्य व्यक्ति के लिए घड़ी , कैलेण्डर या ज्योतिष शौक का विषय हो सकता है , किन्तु जीवन के किसी क्षेत्र में उंचाई पर रहनेवाले व्यक्ति के लिए घड़ी और कैलेण्डर की तरह ही भविष्य की सही जानकारी की जरुरत अधिक से अधिक है। यह बात अलग है कि सही मायने में भविष्यद्रष्टा की कमी अभी भी बनीं हुई है। गत्यात्मक दशा पद्धति संपूर्ण जीवन के तस्वीर को घड़ी की तरह स्प्ष्ट बतलाने की कोशिश करती है।ग्रह उर्जा लेखाचित्र से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कब कौन सा काम किया जाना चाहिए। एक घड़ी की तरह ही फलित ज्योतिष की जानकारी भी समय की सही जानकारी प्राप्त करने का साधन मात्र नहीं , वरन् अप्रत्यक्षत: बहुत सारी सूचनाएं प्रदान करके समुचित कार्य करने की दिशा में बड़ी प्रेरणास्रोत है। लोगों को यह भ्रम हटाना चाहिए कि फलित ज्योतिष की आवश्यकता विपत्ति या मुसीबत में पड़े लोगों के लिए ही है।

          jyotish upchar

           jyotish samadhan

          जीवन के किसी क्षेत्र में उंचाई पर रहनेवाला हर व्यक्ति यह महसूस करता है कि महज संयोग के कारण ही वह इतनी उंचाई हासिल कर सका है , अन्यथा उससे भी अधिक परिश्रमी और विद्वान व्यक्ति संसार में भरे पड़े हैं , जिनकी पहचान भी नहीं बन सकी है। उस बड़ी चमत्कारी शक्ति के लिए फुरसत के समय में उनका प्रयास बना होता है। ऐसे लोगों को फलित ज्योतिष की जानकारी से कई समस्याओं को सुलझा पाने में मदद मिलती है, किन्तु इसके लिए अपने उत्तरदायित्व को समझते हुए समय निकालने की जरुरत है। अपने कीमती जीवनशैली में से समय निकालकर इस विद्या के अनुसार लिखे गए इस ब्‍लाग में प्रकाशित लेखों को पढ़कर ज्ञान प्राप्त करें .  

          गत्यात्मक ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव को दूर करने से सम्बंधित उपायों के बारे में प्रकाशित पुस्तक को पढ़ने के लिए अमेज़ॉन के किंडल में  इस लिंक पर क्लिक करें !

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