प्राइवेट नौकरी कर रहे युवाओं की चिंता

विश्व में कोरोना वायरस प्राकृतिक आपदा बनकर आयी हो या ये मानवकृत आपदा हो, पूरा विश्व इसके विभीषिका से त्रस्त है। उच्च-मध्यम-निम्न वर्ग, धर्म और जाति-पाति नहीं देख रहा यह वायरस। कोई बीमार पड़ रहे हैं तो कोई मृत्यु का वरण भी, धन या पद की कोई मजबूती काम नहीं आ रही है। निम्नस्तरीय लोगों को अभी सरकारी मदद, समाजसेवी संस्थाओं की मदद मिल रही है, माहौल ठीक होने पर उन्हें बड़ा-छोटा काम भी मिल जायेगा। उच्चवर्गीय परिवार कोरोना के बाद के समाज की मांग के अनुरूप पूंजी के अनुरूप अपने रोजगार को बदल देंगे। गांव-शहर में बसे मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों को दो-तीन महीने घर में बैठकर या जरूरी काम करते हुए काटने में भी कोई दिक्कत नहीं, पर उनकी भविष्य की सम्भावनाएँ अनिश्चित लगती हैं।


corona side effects


सरकारी नौकरी कर रहे लोगों पर करियर और रोजी-रोटी की अनिश्चितता नहीं, पर इतने बड़े देश में आयी चुनौतियों को संभालने के क्रम में सरकारी दवाब का सामना तो करना ही पड़ रहा है। पर प्राइवेट नौकरी कर रहे घर-परिवार से अलग रह रहे युवाओं की चिंता भी कम नहीं, जिन्हे अपने नियोक्ताओं के लाभ की भी चिंता करनी है, कंपनी में बने रहने के लिए ऊपर आनेवाले हर आदेश का पालन कर खुद मेहनत करनी है, घर में सहायिकाओं के अभाव में खाने-पीने, साफ़-सफाई का ध्यान भी रखना है। इसके बाद भी यह तनाव बना ही हुआ है कि किसकी नौकरी बचेगी और किसकी नौकरी जाएगी ?


पूरे भारतवर्ष से दो तरह की खबरें रही है -- जहाँ किसी प्रदेश, किसी शहर और किसी गाँव से अच्छी व्यवस्था की, मतलब प्रशासन द्वारा खाने-पीने की व्यवस्था की गयी है. जरूरतभर अनाज बांटे गए हैं, पुलिस चुस्त बनी हुई है, लोगों को जमा होने नहीं दिया जा रहा है, सेनिटाइज़ेशन किया जा रहा है तो वहीं किसी प्रदेश, किसी शहर और किसी गाँव से बुरी व्यवस्था की खबर भी, लोग खाने-खाने को मुंहताज हैं, अनाज किसी को मिला किसी को नहीं, पुलिस आराम कर रही है, लोग जमा हो रहे हैं, सैनिटीजसन की तो कुछ चर्चा नहीं है। 

इससे एक निष्कर्ष तो निकलता है, अच्छी व्यवस्था करने वाला पूरा प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को देने में पैसे खर्च कर रहा है, बुरी व्यवस्था करनेवाला प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ नहीं ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को न बाँटकर पैसे बचा रहा है। बेईमानी के फल को भोगते हुए हमारे पूर्वजों ने देखा था, इसलिए हमेशा बच्चों को ईमानदारी की शिक्षा दिया करते थे। 

यह बात अलग है कि बाद में हमारे पाठ्यक्रम से नैतिक शिक्षा का विषय ही गायब कर दिया गया। कोरोना के इस भयंकर दौर में यदि कोई पैसे बचाकर ऊपर से नीचे तक इसे बाँटने जैसा भ्रष्टाचार करके यह सोच रहे हैं कि जनता की आह उन्हें नहीं लगेगी तो गलत सोच रहे, जनता की आह सबसे भारी होती है। इससे निष्कर्ष यही निकलता है कि देश मे स्वार्थियों की कमी नहीं है। नैतिक शिक्षा की बात भूल गए हो। बड़े बुजुर्गों द्वारा दीं गयी शिक्षा भूल गए हो पर आज प्रकृति की ताकत को तो पहचानो। आपत्तिकाल मे दूसरे के हिस्से के पैसे मत रखो नादानो !

जिस देश के गरीबों को आनेवाले समय मे खाने पीने, जरूरी व्यवस्था मे ही दिक्कत है, सफाई के लिए साबुन और सेनेटाइजर कहाँ से खरीद पाएंगे ? वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस पर गाय के गोबर, मूत्र और लकड़ी की राख़ का भी प्रयोग टेस्ट करना चाहिए. पिछली कई महामारियों मे, जब सर्फ़ सैनिटाइज़र का बनना शुरू भी नहीं हुआ था, यह रामबाण साबित हुआ था. प्लेग के बारे मे प्रसिद्द है कि जिनके घर मे गायें थी, उस के घर मे प्लेग नहीं फैला था. गावों मे अभी भी गोबर से घर आँगन लीपे और राख़ का उपयोग हाथ धोने और बर्तन मांजने मे किया जाता है. उम्मीद है, सरकार इसपर ध्यान देगी। 


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    कोविड की बीमारी में उम्र


    कोरोना के बहुत मारक होने की चर्चा कभी नहीं हुई है, विदेशों से भी जो संकेत आ रहे थे, उसके अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं थी, आज हमारे देश के केस को देखते हुए भी यही कहा जा सकता है, पर थॉयरॉइड, BP, न्यूमोनिया, हार्ट, किडनी, शुगर के पेशेंट जिस घर में हों, वहाँ रहनेवाले स्वस्थ व्यक्ति भी सावधानी से रहे, कोरोना से खतरा स्वस्थ लोगों को नहीं, पर पहले से कोई बीमारी रखने वालों को तो है, लापरवाही किया तो आप नहीं भुगतेंगे, आपके घर में रहनेवाले कमजोर भुगतेंगे ! आपका परिवार मजबूत है तो नहीं भुगतेगा पर पड़ोसी के परिवार में लोग कमजोर हुए तो भुगतेंगे !

    age factor in covid


    इसलिए न घबराओ, एक और माता आयी हैं ! जबतक टीका नहीं आ जाता, चेचक की तरह इलाज रखो, बच्चों बुजुर्गों की सारी व्यवस्था अलग रखें ! जरूरी कार्यों से बाहर निकलनेवाले अपनी सारी व्यवस्था अलग रखें ! अच्छे मास्क लगाएं, बाहर से आते ही चप्पल बाहर रखें, बहुत सावधानी से बिना किसी चीज को छुए बाथरूम जाएँ ! सबसे पहले हाथ धोयें, कपडे गरम पानी मे डुबोएं और सर से पैर तक अच्छे से सफाई करके नहाये ! बाहर से आनेवाले सामानो को मानकर चलें कि इसमें कोरोना है ! एक सप्ताह बाहर छोड़ दे या साबुन से धो लें ! गरम पानी मे 5 मिनट के लिए डाल दें ! उसके बाद ही उसका उपयोग करें ! चेन टूटेगा, हड़बड़ाहट न रखें ! भारत मे कोरोना का खास असर नहीं देखा जा रहा है ! सावधान रहेंगे तो कोरोना भी आउट और हम भी आउट हो पाएंगे !

    कोरोना के रिकवरी रेट पर मत जाइये, रिकवरी के पहले पूरे महीने जो झेलना पड़ेगा, उसे समझिए ! नादानी मत कीजिए ! कुछ दिनों जरूरी बातों के लिए ही बाहर निकलें ! घर मे रहेंगे तो एक साल पीछे जायेंगे ! बाहर निकले और कोरोना हुआ तो पूरे परिवार डिस्टर्ब होंगे ! कई साल पीछे जायेंगे ! परिवार मे कोई दुर्घटना हो गयी तो जीवनभर खुद को माफ़ न कर सकेंगे ! दूसरे क्या कर रहे हैं, नक़ल न कीजिए ! आप सही कीजिए, दूसरे नक़ल करेंगे ! कोरोना जहाँ फ़ैल जाता है, संभालना मुश्किल होता है ! जहाँ नहीं फैला है, वहाँ फैलने न दें !  अधिक से अधिक लोग पोस्ट को शेयर कीजिए ! ताकि लोग पढ़कर कुछ समझें, भीड़ न बनायें ! बिलकुल जरूरी काम से ही बाहर निकले लोग ! हर जगह भीड़ हो रही है !

    कोविड की बीमारी में उम्र मायने नहीं रखती, शरीर की आतंरिक शक्ति मायने रखती है, 95% लोगों के इस बीमारी से जीतने की शक्ति के पीछे स्वास्थ्यवर्धक खान-पान, शारीरिक श्रम करते रहना, कोई बीमारी न होना है, सलमान ख़ान की दबंग सीरीज की तीनों फिल्मों, पार्टनर, तेरे नाम, जय हो जैसी अनेक फिल्मों में उनके संगीतबद्ध हिट गाने देनेवाले मशहूर संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद के वाजिद ख़ान का आज सुबह 42 साल की उम्र में ही मुंबई के चेम्बूर में सुराना अस्पताल में निधन हो गया, उन्हें किडनी की बीमारी थी और उनका Covid-19 टेस्ट पॉजिटिव आया था, कोरोना से पहले भी कम उम्र के कई डॉक्टर्स, व्यवसायी की मौत हमलोग देख चुके हैं, किसी भ्रम में ना रहे, सुरक्षा में कोताही करके कोविड को फैलने का मौका न दें !

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      कोरोना के केसेज इतने न बढ़ते


      दो-तीन  महीने के पूरे घटनाक्रम को देखकर मालूम हो गया। ऊपरवाली सरकार जो चाहती है वो करवा लेती है। ऊपर से यमराज ने महामारी के रूप मे यमदूतों को भेज दिया तो बचना मुश्किल है। देश का इतना बड़ा लॉक डाउन का निर्णय कुछ काम न आया। गाँव -गाँव मे कोरोना को फैलने का मौका मिल गया। मजदूरों को समझा-बूझाकर बड़े बड़े अपने शहर मे रखकर तीन महीने के चावल-रोटी का खर्च न तो सरकार कर सकी और न उद्योगपति कर पाए। न क्रिकेट के खिलाडी और न फ़िल्म जगत ही, वोट के लिए घर घर पहुँच जाने वाले पक्ष या विपक्ष किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी नहीं।

      coronavirus increases


      आज दादाजी की बात बहुत याद आ रही है, 'घर की रोटी आधी भली !' महानगर बड़े लोगों के लिए होता है ! मजदूरों, सामान्य नौकरी पेशा करनेवालों के लिए नहीं होता ! अब चेत जाएँ गाँव के लोग ! आनेवाले दिनों मे देश मे ऐसी व्यवस्था लाने की जरूरत है कि लोग अपने घर से ही पढ़ाई, अपने घर से ही नौकरी कर सकें ! किराये या EMI के खर्चे न हो ! माता-पिता-पत्नी-बच्चों के साथ रह सके ! बहुत उच्च स्तर की पढ़ाई या नौकरी के लिए ही महानगर की आवश्यकता हो ! बाकी की अपने अपने जिले - राज्य के अंदर ही ! दसवीं पास करते ही बच्चों को बाहर भेजो ! ऐसी मजबूरी न बालकों न अभिभावकों के लिए उचित है ! आनेवाले समय मे सरकार के सामने बहुत बड़ी जवाबदेही होगी ! और गांववालों के सामने भी ! जो मजदूर महानगर मे बच जायेंगे, उनके लिए अच्छा ही अच्छा होगा !

      अनिश्चितता के कारण दूर दूर तक बाजार मे मांग की कमी है। लोग सिर्फ आवश्यक आवश्यता पर ही फोकस कर रहे हैं। हर क्षेत्र के उद्योगपति निराशा मे हैं, मकान मालिकों को इतना आत्मविश्वास कहाँ से आ रहा है कि उन्हें नए किरायेदार मिल जायेंगे। बसे बसाये पुराने किरायेदारों को निकाल भगा रहे हैं। सरकार ने अपने नुकसान की परवाह न करके थोड़े देर से ही सही, पर लॉक डाउन की घोषणा तो की। सरकार ने स्पष्ट बोल था कि ये तीन महीने हमें अपने घर के अंदर रहकर काटने हैं, जो समर्थ हैं अपने खाने पीने की व्यवस्था करें, गरीबों के खाने की व्यवस्था सरकार करेगी। जिनतक सरकार नहीं पहुँच पाए, उनतक समाज के लोग मदद करें। भीषण संकट की घडी है, व्यवसायी अपने एम्प्लाइज के खाने पीने की व्यवस्था करें। मकान मालिक किराया न लें, बैंक EMI न लें। 

      कोरोना से जंग सभी देशवासियों को मिलकर जीतना था। सरकार तीन महीने के लिए निम्न आय वाले परिवारों को खाने की व्यवस्था कर रही थी। मध्यम आय वाले तीन महीने के खाने की व्यवस्था खुद कर रहे थे। उच्च वर्ग सरकार को दान देकर भारत को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार कर रहे थे। सरकार के निर्देश के बावजूद बैंकों EMI लिया , मकान मालिकों ने किराया लिया। प्राइवेट स्कूल फीस लेने के लिए बेचैन हैं। कंपनी के मालिक एम्लॉईज के खाने-रहने की व्यवस्था नहीं पाए , उन्हें भी कोरोना के मामले मे देश का साथ नहीं देता हुआ माना जाना चाहिए। 

      यदि ये सब होता तो कोरोना के केसेज इतने न बढ़ते, गड़बड़ी कहाँ कहाँ आयी, आपलोग ध्यान दें। मैं तो इतना कहूंगी कि जनता ने इस लॉक डाउन को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन को, पुलिस को, डॉक्टर्स को, नर्सों को काफी दवाब आया। जो बाहर न निकले, वे भी सोसाइटी में पिकनिक मनाते दिखें। घर में किसी एक को सर्दी-बुखार हुआ तो किसी ने खुद से क्वैरेन्टाइन नहीं किया। पूरे घर, सोसाइटी में घूमते मिले। लोगों ने कोरोना की गंभीरता को नहीं समझा। मजदूरों को स्थायित्व का खतरा दिखा। फुर्सत में होम सिकनेस बना, रोज रोज भीड़ इकट्ठी करते रहें। 

      लॉक डाउन के तीसरे दिन से ही यत्र-तत्र जो भीड़ दिखी, वह इसी ओर इशारा करती है। हर जगह सिर्फ लाचारों की भीड़ नहीं थी, हठी की भी भीड़ थी। तीन महीने तो किसी तरह गुजारने थे, सबलोगों को घर में रहकर जीवन जी लेना था, कुछ भी खाकर। सब्जी, दूध की इतनी मारामारी क्यों, हमारे जनरेशन तक पहुँचने के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत की है हम भूल गए। संकट के समय जानवर भी एकजुटता को महत्व देते आये हैं, लेकिन हमें नहीं देनी थी । 

      कुल मिलाकर एक बात कही जा सकती है कि एकजुटता की कमी से भारत ने बहुत जगह हार मानी है, लोग माने न माने कोरोना काल का इतिहास भी एकजुटता की कमी का इतिहास बनेगा। उनके द्वारा की जानेवाली लापरवाही भविष्य में सबको कोरोना के चक्र में झोंकेगी, जबतक गलती का अहसास होगा, काफी देर हो चुकी होगी। एक बात यह भी है कि जिस देश मे जागरूकता इतनी कम हो कि हेलमेट और सीट बेल्ट भी फाइन के डर से पहनते हों, वहाँ जनता से कुछ उम्मीद करनी भी बेकार है. हमारे यहाँ अभी कोरोना नहीं आया है, यह बात देशभर मे हर जगह हर महीने फेल हो रही है, फिर भी अभीतक लोग यही बात कर रहे हैं.

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        आयुर्वेदिक दवाईयां और काढ़ा लीजिए

        Aayurvedik medicine


        कुछ दिन पहले तक दूर दूर से आ रही खबरे दिन ब दिन नजदीक पहुँचने लगी है, चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे विकास के कारण समाज से महामारी शब्द के अर्थ, उसके प्रभाव और उसकी सावधानियों की चर्चा गायब हो गयीं थी. यदि ऐसा न होता तो विदेश से आनेवाले नागरिकों के ने जो गलतियां की थी, कम से कम सरकार के अनाउंसमेंट के बाद भी हमारे नेता, आम नागरिक और मजदूरों ने इतनी बड़ी गलती न की होती. 

        दो महीने का लॉक डाउन बीमारी की चेन तोड़ने के लिए कम नहीं होता, पर लॉक डाउन में यत्र-तत्र भीड़ होते रहने के कारण चेन टूटनेवाली बात ख़त्म हो गयी।  सरकारी व्यवस्था की पोल खोलकर अब क्या होनेवाला? कम साधन में समस्या तो आएंगी, कमियाँ तो रहेंगी ही, भारत में केस बढ़ने नहीं चाहिए थे, हमें लॉक डाउन को सफल बनाना चाहिए था, इसमें बहुत सारे डिस्टर्बेंस आये, लोगों तक भी सही सन्देश नहीं पहुँचाया जा सका, टीवी चैनल्स भी उत्तरदायित्व का पालन नहीं कर सकें, एक पंक्ति में कहा जा सकता है, न तो सरकार और न ही विपक्ष की कार्यशैली सही रही, इतनी बड़ी विपत्ति में भी हम एकजुट नहीं रहे।

        aayurvedik medicine,


        अभी भी वक्त है, महामारी किसी को नहीं पहचानती, सावधानी ही एकमात्र उपाय है, ईश्वर सब शुभ करें ! नागरिकों से भी लॉक डाउन के दौरान और अभी भी जो भूलें हो रही हैं, उसमे उनके द्वारा दूरी का पालन नहीं किया जाना मुख्य है. पौष्टिक खाना, शरीर में पानी की प्रचुरता बनाये रखना, आयुर्वेदिक सावधानियां, योगा, चेहरे पर मास्क, हाथ पर नियंत्रण, कम से कम बाहर निकलना - इनका पालन सबसे आवश्यक हो गया है.

        दिल्ली और मुम्बई में तो अब कुछ नहीं हो सकता, लाख कोशिश कर ले अब जो करेगा ऊपरवाला ही करेगा....छोटे शहरों वाले समझदारी दिखाएँ तो बच सकते हैं ! भारत में कोरोना की ये हालत नही होने देनी चाहिए थी ! अब भी तो नहीं चेत रहे हैं लोग ! कुछ की गलतियों का खामियाजा सब भुगत रहें हैं ! पुलिस को इतना गंभीर हमने कभी नहीं पाया था, जितना कोरोनाकाल में वे गंभीर रहे , पर नतीजा वही ढाक के तीन पात ! शांति से घर में बैठना था दो महीने लोगों को ! झारखण्ड में भी सामुदायिक संक्रमण शुरू हो गया है !

        सरकार को दोष देने का अधिकार जनता को तबतक नहीं बनता, जबतक वो खुद को पार्टी और पॉलिटिक्स से अलग नहीं करे। जबतक हम खुद को जाति और धर्म, ऊँच और नीच से परे नहीं रखे, जबतक हम नेताओं के तलुए चाटेंगे, स्वार्थी बनकर भ्रष्टाचार का हिस्सा बनेंगे, पेड़ मीडिया की खबरों पर विश्वास करेंगे, हमें सबकुछ सहन करना होगा। फूट डालो और शासन करो, यह राजनीति का मूल मंत्र है, क्या हम एकजुट नहीं होकर इनको अपनी जिम्मेदारी अहसास नहीं करवा सकते ? 

        यदि हम एकजुट होकर जागरूक नागरिक बन जाएँ, ब्लॉक से लेकर केंद्र तक के गतिविधियों का हिसाब किताब रखें। हमारे आयकर का पैसा वेतन के रूप में खानेवाले जो भी अफसर, कर्मचारी जनता के लायक या उनका हितैषी नदिखे, उनका बॉयकॉट करें! गाँव से लेकर महानगर तक की हर स्तर की जनता की हर समस्या को समझें, समाधान निकालें । चरित्रवान और ईमानदार उम्मीदवारों को खड़ा करें, फिर राजनीति में भी या तो ईमानदार नेता रहेंगे या उन्हें ईमानदार बनने की मजबूरी होगी । एकजुट तो हमें ही होना होगा !

        पूरे देश को लगातार बंद रखने की बात अब नहीं सोची जा सकती।  कोरोना का हमारे जीवन में प्रवेश हो चुका, आनेवाले वर्षों में दूसरी बीमारियों से कोई मौत नहीं होगी, हर मौत के पीछे कोरोना होगा, और अफ़सोस करते हुए लोगों का वक्तव्य 'कई बीमारियों से ग्रस्त, कमजोर था/थी वो, कोरोना को नहीं झेल पाया/पायी', इसलिए घर से कम से कम निकलिए...शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाईये, आयुर्वेदिक दवाईयां और काढ़ा लीजिए, यही बचा सकता है सीनियर सिटिज़न को, जिसकी ओर मैं भी बढ़ रही हूँ। 


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          आध्यात्मिक गुरु के रूप में गत्यात्मक ज्योतिष

           

          Spiritual guru in india

          लगभग सभी ग्रंथों में जीवन को क्षणभंगुर माना गया है, पर यही जीवन मनुष्य को जीवन के कितने उतार-चढ़ाव दिखा देता है। नाना सुख, नाना व्याधियाँ, जब हम सुखी जीवन जी रहे होते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि अब हमारे जीवन में दुःख आएंगे ही नहीं। जब हम हमारे जीवन में दुःख आता है तो ऐसा महसूस होता है कि हमें सारा जीवन अंधकार में ही काटना होगा। पर हमारा जीवन ही नहीं, सुख और दुःख दोनों क्षणभंगुर हैं। सुख में हम अहंकारी न हो जाएँ और दुःख में हम निराश न हो जाएँ, इसलिए तो हमें सच्चे गुरु की आवश्यकता पड़ती है। पर आज हम गुरु किसे बनाते हैं ?

          Spiritual guru in india

          Top guru in India

          जिनके पास अट्टालिकाएं हों, १०-२० गाड़ियां हों, यानि सांसारिक तौर पर सफल लोगों को ही हम गुरु बनाते हैं, क्योंकि पैसों के बिना ज्ञान की कोई कीमत नहीं ! और मैंने कई बार उल्लेख किया है, शिक्षक हो, डॉक्टर हों या धर्मगुरु, उनके पैसे पर न जाएँ, शिक्षा, चिकित्सा और चमत्कार से कभी भी प्रभावित न हों, ज्ञान अर्जित करें। सुख में हमें किसी की जरूरत नहीं होती, आप पिकनिक मानते हुए, क्लब जाते हुए, मौज-मस्ती करते हुए समय को आसानी से काट सकते हैं। 

          पर चाहे आप कितने पैसे वाले, कितने रसूख वाले हों, दुःख के समय की शुरुआत होते ही आपके मनोबल, आपके धैर्य की परीक्षा शुरू हो जाती है, वह बल हमारे धर्म-ग्रंथों में बिखरा पड़ा है, महापुरुषों की सूक्तियों में भरा पड़ा है, प्रतिदिन ईमानदार लोगों की एक-एक पोस्ट में लिखा गया है। इनको इग्नोर करनेवालो को मुसीबत का दिन काटना बहुत कठिन हो जाता है। हमारे पोस्ट पढ़नेवालों में से कोई ऋणात्मकता से जूझ रहे हों तो अपने आसपास ध्यान दें, क्या आपसे दुखी कोई नहीं ? आपको अपना स्तर दिखाई दे जायेगा।

          Best guru in India

          भारतवर्ष में जितने भी संसाधन हैं, लोगों को संतोषजनक जीवन देने में समर्थ हैं ! उपजाऊ भूमि, पालतू पशु, पोखर, नदिया सब मिलकर मेहनती व्यक्ति की जरूरतें तो पूरी कर देती हैं ! जब पूरी नहीं हो पाती तो प्रकृति के नियम के तहत दूसरे देशों की तरह ही महामारी आबादी को काम कर देती है ! पेड पौधों को मालूम है कि उनके बीज में क्षमता है। इसलिए वे अपना फल दुनिया को दे देते हैं। एक मनुष्‍य है जिसे विश्‍वास ही नहीं कि उनके बच्‍चों में भी अपरिमित क्षमता मौजूद है। इसलिए वे उनके भविष्‍य की व्‍यवस्‍था में धन के संचय का क्रम बनाए रखते हैं। पर हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से लेना नहीं, जरूरतभर उपभोग करके सिर्फ देना सीखा था।  ईश्वर से प्रार्थना है, अनंत काल तक भारतवासियों का यही चरित्र बनाये रखे ! उन्हें लालच से दूर रखे !


          Adhyatmik guru in India 

          इतिहास गवाह है कि भारतवासी कभी भी दूसरे देशों के संसाधनों पर कब्जा करने नहीं गए, जहाँ भी गए उस देश के नियमों के हिसाब से रहे, उस देश से प्रेम किया ! प्रेम से बहुत कुछ जीता भी है ! अपने महत्वाकांक्षा के लिए आजतक किसी से लड़ने की आवश्यकता नहीं पडी ! जरूरत में कभी हम लड़े भी तो लंका जीतकर भी विभीषण को सौंपा, बँगला देश बंगाली मुसलमानो को ! यही ज्ञान हमारे साथ रहे तो हम अंदर से चैन से रहेंगे ! 

          भारत में विक्सित किया गया 'गत्यात्मक ज्योतिष' का ज्ञान आपको आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है, यही बताता है कि जो हमारे भाग्य में है, वह हमारे ही प्रयास से हमें ही मिलेगा ! जो मुझे नहीं मिल रहा, उसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है, प्रकृति हमारी परीक्षा ले रही है। समय आएगा, मुझे मेरा लक्ष्य मिलेगा, प्राकृतिक नियम के इस दृष्टिकोण के आते ही हमारा ध्यान इधर-उधर नहीं भटकता !

          'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर सटीक भविष्यवाणी, उचित परामर्श और समुचित उपचार के लिए संपर्क करें - 8292466723 , gatyatmakjyotishapp@gmail.com

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