horoscope tomorrow

 

Horoscope Tomorrow ( 6th & 7th  of July )

(For latest click here )


After research of 'Gatyatmak Jyotish' specially the research of 'Gatyatmak Gochar pranali',  by Mr Vidya Sagar Mahthaaccurate daily and yearly forecast can be done.

The ascendant of a person 

The ascendant of a person is very effective. Hence, all the prediction of 'Horoscope Tomorrow' is based on the ascendants. On account of the sunrise time planetary position, every day with his own certain ascendants has to get a certain result. 
A person can plan accordingly if he/she is previously informed about it. It does not matter if your routine is like common days' but if you are going to do something special, then pay attention to the planetary circumstances. Pay attention to the matter written about the sensational part of your life particularly in your daily 'Rashiphal'.

If you are not aware of your ascendant

then send your date of birth, time of birth, and place of birth on 8292466723 via SMS, you will be given information of your ascendant, but you will not succeed if you try to see that from Rashi. you must take interest in getting information about your day-to-day planetary effects. I am sure in around 80% matter you will be benefited a lot even without paying anything !

We have started Lagn Rashifal 

After a long time again we have started daily planetary Rashi-fal according to your ascendant through this column. People having been born with Cancer and Sagittarius Lagna or Chandra (Moon) Rashi- both will feel pleasant circumstances on the 4th & 5th of July 2020. But people having been born with Taurus Lagna and Chandra (Moon) Rashi- both will feel unpleasant circumstances. After 4th July the situation will be normal and after 6th July, It will be a pleasure some

horoscope tomorrow


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चन्द्र दोष के उपाय

 

चन्द्र दोष के उपाय

गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च के बाद 'हमलोग जब भी ग्रहों के प्रभाव और ज्‍योतिष की चर्चा करते हैं , आम लोगों की जिज्ञासा किन्‍ही अन्‍य बातों में न होकर ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने के उपायों, खासकर चंद्र दोष के उपाय को जानने की ही होती है। इस विषय पर हमने 'क्‍या भवितब्‍यता टाली जा सकती है ?' शीर्षक से 11 आलेखों की एक पूरी शृंखला ही तैयार की है , जिसमें स्‍पष्‍ट किया गया है कि प्रकृति के नियमों को समझना ही बहुत बडा ज्ञान है , उपचारों का विकास तो इसपर विश्‍वास होने या इस क्षेत्र में बहुत अधिक अनुसंधान करने के बाद ही हो सकता है। अभी तो परंपरागत ज्ञानों की तरह ही ज्‍योतिष के द्वारा ग्रहों के प्रभाव के तरीके को जानकर अपना बचाव कर पाने में हमें बहुत सहायता मिल सकती है। लेकिन फिर भी ज्‍योतिषियों द्वारा लालच दिखाए जाने पर लोग उनके चक्‍कर में पडकर अपने धन का कुछ नुकसान कर ही लेते हैं।



chandra dosh ke upay

ग्रहों के अनुसार हो या फिर पूर्वजन्‍म के कर्मों के अनुसार, जिस स्‍तर में हमने जन्‍म लिया , जिस स्‍तर का हमें वातावरण मिला,  उस स्‍तर में रहने में अधिक परेशानी नहीं होती। पर कभी कभी अपनी जीवनयात्रा में अचानक ग्रहों के अच्‍छे या बुरे प्रभाव देखने को मिल जाते हैं , जहां ग्रहों का अच्‍छा प्रभाव हमारी सुख और सफलता को बढाता हुआ हमारे मनोबल को बढाता है , वहीं ग्रहों का बुरा प्रभाव हमें दुख और असफलता देते हुए हमारे मनोबल को घटाने में भी सक्षम होता है। 

वास्‍तव में , जिस तरह अच्‍छे ग्रहों के प्रभाव से जितना अच्‍छा नहीं हो पाता , उससे अधिक हमारे आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि होती है , ठीक उसी तरह बुरे ग्रहों के प्रभाव से हमारी स्थिति जितनी बिगडती नहीं , उतना अधिक हम मानसिक तौर पर निराश हो जाया करते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार हमारी मन:स्थिति को प्रभावित करने में चंद्रमा का बहुत बडा हाथ होता है। धातु में चंद्रमा का सर्वाधिक प्रभाव चांदी पर पडता है। यही कारण है कि बालारिष्‍ट रोगों से बचाने के लिए जातक को चांदी का चंद्रमा पहनाए जाने की परंपरा रही है। बडे होने के बाद भी हम चांदी के छल्‍ले को धारण कर अपने मनोबल को बढा सकते हैं।

चंद्रमा पूर्णिमा के दिन अपनी पूरी शक्ति में

आसमान में चंद्रमा की घटती बढती स्थिति से चंद्रमा की ज्‍योतिषीय प्रभाव डालने की शक्ति में घट बढ होती रहती है। अमावस्‍या के दिन बिल्‍कुल कमजोर रहने वाला चंद्रमा पूर्णिमा के दिन अपनी पूरी शक्ति में आ जाता है। आप दो चार महीने तक चंद्रमा के अनुसार अपनी मन:स्थिति को अच्‍छी तरह गौर करें , पूर्णिमा और अमावस्‍या के वक्‍त आपको अवश्‍य अंतर दिखाई देगा। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के वक्‍त यानि सूर्यास्‍त के वक्‍त चंद्रमा का पृथ्‍वी पर सर्वाधिक अच्‍छा प्रभाव देखा जाता है। 

इस लग्‍न में दो घंटे के अंदर चांदी को पूर्ण तौर पर गलाकर एक छल्‍ला तैयार कर उसी वक्‍त उसे पहना जाए तो उस छल्‍ले में चंद्रमा की सकारात्‍मक शक्ति का पूरा प्रभाव पडेगा , जिससे व्‍यक्ति के मनोवैज्ञानिक क्षमता में वृद्धि होगी। इससे उसके चिंतन मनन पर भी सकारात्‍मक प्रभाव पडता है। यही कारण है कि लगभग सभी व्‍यक्ति को पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के उदय के वक्‍त तैयार किए गए चंद्रमा के छल्‍ले को पहनना चाहिए।

पूर्णिमा की अंगूठी 

वैसे तो किसी भी पूर्णिमा को ऐसी अंगूठी तैयार की जा सकती है , पर विभिन्‍न राशि के लोगों को भिन्‍न भिन्‍न माह के पूर्णिमा के दिन ऐसी अंगूठी को तैयार करें। 15 मार्च से 15 अप्रैल के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को मेष राशिवाले , 15 अप्रैल से 15 मई के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को वृष राशिवाले , 15 मई से 15 जून के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को मिथुन राशिवाले , 15 जून से 15 जुलाई के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को कर्क राशिवाले , 15 जुलाई से 15 अगस्‍त के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को सिंह राशिवाले , 15 अगस्‍त से 15 सितम्‍बर के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को कन्‍या राशिवाले , 15 सितम्‍बर से 15 अक्‍तूबर के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को तुला राशिवाले , 15 अक्‍तूबर से 15 नवम्‍बर के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को वृश्चिक राशिवाले , 15 नवम्‍बर से 15 दिसंबर के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को धनु राशिवाले , 15 दिसंबर से 15 जनवरी के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को मकर राशिवाले , 15 जनवरी से 15 फरवरी के मध्‍य आनेवाली पूर्णिमा को कुंभ राशिवाले तथा 15 फरवरी से 15 मार्च के मध्‍य आनेवाले पूर्णिमा को मीन राशिवाले अपनी अपनी अंगूठी बनवाकर पहनें , तो अधिक फायदेमंद होगा। इससे चन्द्र दोष के उपाय भी होते हैं।

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    नाक, मुंह और हाथों पर नियंत्रण


    Ways to control yourself from corona virus


    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह कोरोना वायरस के कम मरीज, कम मौतें देखने को मिली, प्रतिदिन के आंकड़े को भी देखें तो दिन-ब-दिन मामले कम हो रहे हैं, यहाँ तक कि धारावी में भी केस बहुत कम मिल रहे हैं। अब जो मामले आ भी रहे हैं, उसमे अधिक संख्या उत्तर मुंबई के रोगियों की है, जो प्रशासन के निर्देश के बावजूद कल तक बाजार में भीड़ लगा रहे थे। पुलिस ने मालाड, कांदिवली, बोरीवली और दहिसर के 27 इलाकों में सख्ती बढ़ा दी है. इन इलाकों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है. मुंबई में कोरोना से ठीक हो रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए भी कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं. कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों की संख्या मुंबई में कोरोना के एक्टिव मामलों की तुलना में ज्यादा है.

    Ways to control yourself from corona virus


    Coronavirus in Delhi and Mumbai


    इन दिनों वायरस संक्रमण के मामले दिल्ली में कोरोना मुंबई से भी ज़्यादा हो गए हैं. दिल्ली में सुबह के आँकड़ों के अनुसार अब कुल कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 70390 हो गई है जबकि मुंबई में संक्रमण के मामले 69528 हैं. दिल्ली में बीते 24 घंटों में संक्रमण के 3788 नए मामले सामने आए हैं. वहीं मुंबई में 24 घंटों में 1118 नए मामले मिले. हालांकि संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में दिल्ली मुंबई से पीछे है और स्थिति बेहतर है. दिल्ली में अब तक संक्रमण से कुल 2365 लोगों की मौत हुई है जबकि मुंबई में 3964 लोग अब तक संक्रमण की वजह से जान गंवा चुके हैं. फिर भी चिंतनीय तो है ही। दिल्ली में निश्चित तौर पर इस हालत के लिए प्रशासनिक लापरवाही के साथ लोगों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को दोष दिया जा सकता है। लॉक डाउन ख़त्म होते ही लोग इतनी तेजी से घूमते फिरते नजर आये, गलती किसी की होती है, भुगतना किसी और को पड़ता है।

    What is control yourself from corona virus

    वास्तव में, कोरोना वायरस का नियंत्रण न होना प्रशासनिक और व्यक्तिगत लापरवाही का ही परिणाम है। झारखण्ड में शुरूआती दौर में संक्रमण के मामले ३ स्थानों पर मिले थे। पहला रांची के हिंदपीढ़ी, जहाँ संक्रमण तेजी से हो रहा था, प्रशासनिक चुस्ती के कारण नियंत्रित किया जा सका। हिंदपीढ़ी का संपर्क पुरे रांची से काट दिया गया था, पर कुछ लोगों की व्यक्तिगत लापरवाही के कारण संक्रमण रांची के कई गाँवों में फैला। झारखण्ड में शुरुआती दिनों के और दो केस बोकारो जिले में ही थे, पर प्रशासनिक और लोगों की व्यक्तिगत चुस्ती से दोनों का परिणाम संतोषजनक रहा। पुरे गाँव को सख्ती से बंद कर दिया गया था, जो बीमारी को नहीं फैलने देने का एकमात्र उपाय है। बोकारो-रांची-जमशेदपुर के युवाओं का विदेशों से, बड़े शहरों से प्रतिदिन आना जाना लगा रहता है, बीमारी के दौरान भी वे बाहर से आये, पर क्वैरेन्टाइन के नियमों का अच्छी तरह पालन होने से बीमारी का फैलाव नहीं हो पाया था। इधर-उधर से आ रहे मजदूरों के कारण अभी भी कोरोना संक्रमितों के छिटपुट मामले निकल ही रहे हैं, इन दिनों इस वायरस से प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर लोग कैसे निबट रहे हैं, इसका पता तो एक महीने बाद यहाँ का माहौल बताएगा।

    Will you control yourself from corona virus

    कोरोना वायरस की कोई दवा नहीं है, यह लोगों तक न पहुंचे, बस इसका उपाय करना आवश्यक है। इसके लिए मुंह और नाक के बचाव के लिए मास्क और अपने हाथों पर नियंत्रण आवश्यक है। अभी के हालत में यह पूरे विश्व में हर स्थान पर किया जाना चाहिए।  पर जबतक एरिया रेड जोन घोषित नहीं हो जाता, प्रशासन के निर्देश के बावजूद लोग जागरूक नहीं होते। और रेड जोन घोषित होने के बाद कोरोना वायरस के प्रसार पर हमारा नियंत्रण नहीं रह जाता। इसलिए आवश्यक है कि अपने एरिया को रेड जोन बनने नहीं दिया जाये। मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहर लापरवाही की वजह से ही कोरोना वायरस का भीषण प्रकोप झेल रही है, अब कोरोना वायरस अपना रुख धीरे-धीरे छोटे शहरों की ओर कर रही है, उसके बाद गावों की ओर भी करेगी। लॉक डाउन खुलने के बाद पटना की एक शादी के दौरान गुडगाँव में रहने वाले दूल्हे की कोरोना से मौत और २२ लोगों का संक्रमित हो जाना, रायपुर में एक सैलून वाले के संक्रमण से १००-२०० लोगों का संक्रमण हो जाना, जैसी घटनाएं इसी ओर इशारा कर रही है। पर बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों में भीड़ कम है, गांव में और भी कम। इसलिए इन जगहों पर इसके नियंत्रण की काफी संभावना होगी। पर प्रशासनिक और व्यक्तिगत चुस्ती हर जगह आवश्यक है, सभी लोगों के सुरक्षित रहने के लिए बेहतर यही है कि हम अपने नाक, मुंह और हाथों पर इतना नियंत्रण रखें कि हमारा जोन रेड जोन नहीं बन पाए

    मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




    गत्यात्मक ज्योतिष  से जुड़े अन्य लिंक्स 



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        बुद्धिजीवी वर्ग और हमारा समाज

        Intellectual meaning in hindi

        पूरे शरीर का जितना प्रतिशत हिस्‍सा मस्तिष्‍क का होता है, समाज में उतना ही प्रतिशत बुद्धिजीवीयों का होता है ! बुद्धि के हिसाब से हमारे शरीर के अंग काम न करे तो अंजाम आप जानते ही हैं ! मस्तिष्‍क पूरे शरीर की चिंता न करे तो भी अंजाम की कल्‍पना कर सकते हैं ! पुराने युग मे राजा-महाराजा बुद्धिजीवियों यानि गुरुओं के चरण पखारा करते थे, पर आज समाज धन को महत्व देता है ,  बुद्धिजीवियों को महत्व देना शुरू कीजिए !

        intellectual meaning in hindi,

        Intellectuals and race

        हे बुद्धिजीवियों , आप भी अपनी बुद्धि का सार्थक प्रयोग करना सीखिए, चाहे आप जिस परिवार, जाति और धर्म के हों, अपने समाज के , आसपास के लोगों को विकसित बनाने के यत्न कीजिए ! अपने विचारों में जनकल्याण की भावना को जन्म दें।  मेरी इस बात से परिवार , समाज , देश और राष्‍ट्र के टूटने की वजह समझ जाइए, जिसके टूटने के बाद कोई सुखी नहीं होता !

        Quotes about intellectuals

        कोई भी विचार हर दृष्टिकोण से सही नहीं होता। इसलिए दस तरह के विचारों की कमी बेशी का विश्‍लेषण करने के बाद जो सर्वसम्‍मत विचार बनते हैं, वही मानने योग्‍य होते हैं। पर हम अपने विचार को ही सर्वश्रेष्‍ठ मानते हुए किसी और की बातों को सुनना भी नहीं चाहते, एकांगी विचारधारा सर्वमान्‍य नहीं हो सकती। इसलिए हमें एकांगी विचारधारा वालों के न तो लेख पढ़ने चाहिए और न ही पुस्तकें। किसी बात का बेवजह विरोध पर कूदने वाले भी अच्छे नहीं होते।

        The responsibility of intellectuals

        हमारे विद्वानों को अपनी मातृभाषा में लिखने के बाद ही क्रमशः हिंदी या अंग्रेजी में लिखना चाहिए। प्राइमरी तक के बच्चों के लिए क्षेत्रीय भाषा में ज्ञान देना अच्छा है, उसके बाद हिंदी और अंग्रेजी का नंबर आना चाहिए। हमारे बच्‍चों को अंग्रेजी इसलिए पढनी पडती है, क्‍योंकि आजतक हमारे देश के विद्वानों ने सिर्फ अंग्रेजी में ही अपने ज्ञान को अभिव्‍यक्ति दी है। जिस दिन हमारे देश के विद्वान हमारी भाषाओं में अपने ज्ञान को किताबों और भाषणों की शक्‍ल में अभिव्‍यक्ति देने लगेंगे, हमारे बच्‍चों को अंग्रेजी माध्‍यम में पढने की जरूरत नहीं पडेगी। हमारे जैसे छोटे लोगों को जितनी समझ है, काश महान कहें जाने वाले लोगों को भी होती तो हमारे देश की ऐसी दुर्दशा नहीं होती।

        Intellectuals and society

        प्राचीनकाल में ज्ञानी ब्राह्मण और साधुओं की यथोचित क़द्र होती थी। पेट पालने के लिए शारीरिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती थी। किसी के घर में पहुँच जाये, आदर सम्मान के साथ उनके खाने-पीने-रहने का इंतजाम किया जाता था। आज भले ही युग बदल गया हो, फिर भी बुद्धिजीवी वर्ग का गुजारा रॉयल्‍टी से होना चाहिए, यदि उन्हें अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए शारीरिक श्रम करना पड़ता है तो उस देश की तरक्‍की असंभव है। देश में ऐसी स्थिति बनाने के लिए व्‍यावसायिक वर्ग और आम जनता को पैसे से अधिक ज्ञान को महत्‍व देना होगा। 

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          धर्म और परंपरागत ज्ञान-विज्ञान

           

          धर्म क्या है ?


          धर्म क्या है - अलग अलग काल में अलग अलग देश में उनके विद्वानों, उनके नेताओं या उनके योद्धाओं द्वारा पूरे समाज को समुचित ढंग से चलाने के लिए अनिवार्य रूप से धारण करने के लिए कुछ नियमों की संहिता बनाई जाती है । इस संहिता की अधिकाँश बातें भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न होने से बचाती है। इसलिए ये बातें जनसामान्य को बड़ी आसानी से समझ में आ जाती हैं।

          चूँकि उन विद्वानों, नेताओं, योद्धाओं के अनुयायी बड़ी संख्या में होते हैं, बिना किसी प्रकार का तर्क किये हुए उनकी बातों को मानती रहती है। ये नियम उनके लिए धर्म हो जाते हैं, जिसका पालन उनकी संतानों के लिए भी अनिवार्य कर दिया जाता है। उन विद्वानों, नेताओं और योद्धाओं को धर्मगुरु भी मान लिया जाता है। धर्मगुरु की कमी से समाज को आगे नियम-पालन में कठिनाई नहीं आये, इसलिए समाज के वंश की वृद्धि के साथ धर्मगुरुओं के भी दुगुने-चौगुने शिष्य बनते रहते हैं।

          यह सब आज के संविधान की तरह का ही माना जा सकता है, पर जहाँ संविधान को सजा के भय से माना जाता है, वहीं धर्म आस्था से जुड़े होने के कारन माना जाता रहा है। संविधान में परिवर्तन की जगह धर्म में भी देश काल परिस्थिति के हिसाब से परिवर्तन की बात की गयी है। छोटे-छोटे परिवार या क्षेत्र के छोटे नियम को छोड़ दिया जाये तो हर बड़े क्षेत्र के बड़े धर्म को आप वहां की तात्कालीन परिस्थिति के हिसाब से सही पा सकते हैं। जरूर ये नियम प्रकृति के नियमो से तालमेल के बाद ही बनाये गए होंगे।

          Indian religion facts

          विज्ञान क्या है ??


          विज्ञान क्या है - वर्तमान काल में प्रकृति के नियमों के कार्य-कारण संबंधों को अच्छी तरह टेस्ट करने के बाद वैज्ञानिक जो भी निष्कर्ष निकालते हैं , वह विज्ञान है। इसका विकास एक एक सीढी निरंतर होता रहता है, इसमें अभी तक उपस्थित होते आये हर समस्या का समाधान होता है। पढ़े लिखे लोगों तक तो यह जर्नल के माध्यम से पहुँच जाता है। विकसित देशों में विज्ञान के प्रचार-प्रसार में दिक्कत नहीं आती है, पर अविकसित देश, जहाँ अधिकांश लोग पढ़े लिखे न हो, वहां तक ये नियम नहीं पहुँच पाते।

          वैज्ञानिकों के दिए गए सलाह में खर्च भी अधिक हैं, इसलिए जनसामान्य को यह आकर्षित नहीं कर पाता। विज्ञान ने हर रोग का उपाय ढूंढा, पर दैनंदिन कठिनाईयों से निबटने के लिए सार्वभौमिक नियम नहीं बनाये। विज्ञान की खोज को कहीं कहीं पैसे कमाने का भी बड़ा स्रोत समझकर सबकी जिंदगी से खिलवाड़ किया गया। वैज्ञानिकों ने कुछ सलाह भी दी तो सरकार ने उन नियमों को मानने के लिए कभी लोगों को प्रेरित किया कभी नहीं। कुल मिलाकर हर क्षेत्र के वैज्ञानिकों और सरकार के मध्य तालमेल का ऐसा अभाव रहा कि विज्ञान वरदान से अधिक अभिशाप बन गया है।

          धर्म की उपेक्षा 

          धर्म की उपेक्षा - इस वैज्ञानिक युग में सबसे बड़ी गलती हर देश ने जो की, वह यह है कि पढ़े लिखे लोगों ने धर्म या परंपरागत रूप से चल रहे ज्ञान-विज्ञान को अपना क्षेत्र नहीं चुना। जिन्होंने चुना भी, उन्हें सरकार इतना साधन नहीं दे पायी कि वे देश काल और परिस्थिति के हिसाब से बदल रहे धर्म, परंपरागत ज्ञान-विज्ञान का प्रचार-प्रसार धर्म गुरु बनकर कर सके। बिना तर्क समझाए विज्ञान के सभी नियमों को जनता द्वारा मनवा लेना बहुत आसान था। जीवन-शैली को बदलने में विज्ञान को धर्मगुरुओं द्वारा प्रचारित-प्रसारित किया जा सकता था। किसी भी देश की रीढ़ रहे धर्म को वैज्ञानिक और सरकार उपेक्षा भरी निगाह से देखते रहे और आज के आर्थिक युग में इस रीढ़ को विनष्ट करने का मौका व्यावसायिक दिमाग रखने लोगों को मिल गया। वे अपने मनमाने व्यवहार से जनता को लूटते, खसोटते और गलत निर्देश देते रहे। हर बड़े से छोटे जगहों में सैकड़ों उदहारण आपको मिल जायेंगे, जहाँ धर्म का वास्तविक स्वरुप खोया हुआ है और धर्म अधर्म बन गया है।

          निष्कर्ष

          निष्कर्ष - यदि एक लेखक का काम समस्या को दिखाना तो इसको सुलझाना भी है। सभी विषयों की तरह धर्म और परंपरागत ज्ञान-विज्ञान को भी आज के जमाने के अनुरूप विकसित बनाने के लिए उस तरह की रूचिवाले १२वीं तक की पढ़ाई में कुशाग्र रहे विद्यार्थियों को मौका दिया जाये। वे ग्रेजुएशन लें, मास्टर डिग्री लें, पीएचडी और M PHIL करें, आज् के ज़माने के हिसाब से उचित लग रहे सिद्धांतों को चुनचुनकर इकठ्ठा करें और सरकार की मदद से धर्मगुरु तथा आचार्य बनकर मानव जीवन की जीवनशैली को सुन्दर बनाने में मदद करें। याद रखें, धर्म को समाज से दूर नहीं किया जा सकता। उसे ज़माने के अनुकूल बनाया जा सकता है। आज इस क्षेत्र में बड़े बड़े विद्वानों की आवश्यकता है। और इसके लिए वैज्ञानिकों और सरकार को आगे आना होगा। अन्यथा विज्ञान कितना भी आगे निकल जाये, धर्म के नाम पर अधर्म को मानने वाले जाहिल लोग इस दुनिया में भरे रहेंगे।

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