ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?

गाँव का जीवन


दो साल पहले की बात है, मेरी मम्मी कुछ दिनों से बीमाऱ चल रही थी और हर प्रकार के टेस्ट के बाद स्पष्ट हो गया था कि उनके फेफड़े कमजोर हो चुके हैं ! इस बीमारी के लिए दिल्ली के पर्यावरण को दोष दिया जा सकता था, जहाँ वे 20 वर्षों से जीवन जी रही थी या फिर उनके कमजोर शरीर को या आस्तिक होने के नाते हम मान सकते हैं कि होनी को यही मंजूर था ! पर डॉक्टर ने अपनी ओर से सभी दवाओं के साथ उनको गाँव में कुछ समय व्यतीत करने का एक विकल्प भी दिया ! मम्मी का जीवन कुछ महीने बढ़ सकता था !



संस्कारी परिवारों में माँ-पापा तो बच्चों के लिए ईश्वर से कम नहीं, इसलिए सभी बच्चों ने उनके लिए हमारे अपने गाँव में सारी व्यवस्था करनी चाही ! गाँव में भी हमारे परिवार में लक्ष्मी और सरस्वती दोनों की विशेष कृपा रही है, जरूरत पड़ने पर गाँव हमें सहारा देने के लिए हर वक्त तैयार है ! पर मम्मी ने वहाँ अकेले या पापाजी के साथ रहने से मना कर दिया, उन्होंने स्पष्ट बोला कि जीवन एन्जॉय करने के लिए होता है ! बच्चे अपनी अपनी जिम्मेदारियों के कारण गाँव जा नहीं सकते, यदि सभी बच्चों से दूर अपना जीवन बढ़ाने के लिए मुझे गाँव में रहना पड़े तो ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?


जीवन जीने के लिए होता है


korona kaal ka jivan,


सच भी यही है, जीवन जीने के लिए होता है, चुनौतियों से लड़ने के लिए भी होता है, एन्जॉय करने के लिए भी होता है ! इस तरह घर में बंद रहकर जीवन जीना पड़े तो ऐसे जीवन से क्या लाभ? हमें पहले जैसा जीवन चाहिए ही ! पर वह हमें कुछ महीने के लॉक डाउन के पालन के बाद ही मिल सकता था, पर पहले दिन से ही जो जहाँ थे वहीँ से घर आने के लिए बेचैन हो गए ! जिनकी व्यवस्था उनके शहरों में हो सकती थी, वहाँ से देश के हर भाग में भेज दिया गया !


प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' 


इस तरह की गैर जिम्मेदाराना हरकत की वजह भी साफ है ! हर तरह की प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' आदि की चर्चा हमारे पाठ्यपुस्तकों, दैनिक बोलचाल और किस्सों-कहानियों से गायब हैं ! यदि कभी कभी आनेवाली इन समस्याओं को इन माध्यम से समझाया गया होता तो लोगो का इससे लड़ने का व्यवहार ही अलग होता ! बड़े-छोटे, अमीर-गरीब, विभिन्न धर्म, विभिन्न जाति, विभिन्न पार्टियां, सब एकजुट होकर इससे लड़ते !

लोग इस बात की शुक्र माने कि कोरोना से मौत की दर दो-तीन प्रतिशत ही है, हो सकता है यह .3% ही हो, क्योंकि टेस्टिंग कम हो रही हैं ! यदि अधिक होता तो आज संकट कितना बड़ा होता? खैर संकट छोटा है और थोड़ी सावधानी से रहा जाये तो कोरोना की चेन तोड़ी जा सकती है ! लम्बे समय तो ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है ! यदि कोरोना लम्बे समय तक रहा तो दुनिया में कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके लोग ही बचेंगे ! कमजोर लोग दुनिया से कूच कर जायेंगे ! अभी के माहौल का देखकर यही सत्य लग रहा है !

मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----





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    कोरोना को नियंत्रित किये जाने की कोशिश

    कोरोना को हराने के लिए 

    मैं डॉक्टर भी नहीं, वैज्ञानिक भी नहीं, फिर भी लगभग तीन महीने से मैं कोरोना के प्रति लगातार जागरूकता भरे लेख लिख रही हूँ ! शायद तब भारत में कोरोना के इक्के दुक्के मामले ही होंगे ! अपने पुराने लेखों में मैंने बाहर निकलने पर नियमित मास्क पहनने, हाथो पर अपना नियंत्रण रखने और बाहर से आये सामानो के प्रति जागरूकता बनाये रखने के बारे में लिखा करती थी ! साथ ही बाहर से घर में प्रवेश पर आवश्यक सावधानी और अपने घर में किसी को प्रवेश न देने के नियम का कड़ाई से पालन करना भी था ! कोरोना को हराने के लिए 1-2 महीने इतना कर लेना पर्याप्त था !


    हम सभी जानते हैं कि इन नियमों का पालन होता तो अभी तक कोरोना अपने पैर इतना न पसारता, और हमें अभी तक कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लिखना न पड़ता ! पर अभी भी बाहर 50% लोग मुंह और नाक में नहीं, गले में मास्क लगाए मिलेंगे आपको ! अब दूसरे मुद्दे पर आती हूँ, जिसमे कल एक पाठक ने लिखा कि कोरोना इतनी भी बड़ी बीमारी नही, इसके अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं ! इस बीमारी के प्रति अधिक हौवा फैलाया जाये तो लोग कोरोना मरीजों को लेकर घृणात्मक रवैया अपना रहे हैं, उनकी देखभाल नहीं हो पाती है !


    corona ko niyantrit karne ki koshish

    मारक नहीं पर संक्रामक


    अभी तक के आंकड़े यही बताते हैं कि कोरोना मारक नहीं है, आंकड़े 3% मृत्यु दर बताते है, पर टेस्टिंग की कमी को देखते हुए मैं इसे और कम करती हूँ, मृत्यु दर .3% भी हो सकता है ! यानि कोरोना 1000 लोगों तक पहुंचा तो 3 लोगों की मृत्यु कोरोना से निश्चित है ! भारत में एक मोहल्ले में भी 1000 से कई गुने लोग रहते हैं, आप अपने मोहल्ले में कोरोना फैला तो कोरोना से हुई मौत का अंदाजा लगा सकते हैं !


    क्योंकि कोरोना मारक कम है, पर संक्रामक तो है ही, और यदि कोरोना के प्रति लापरवाही रखी जाये तो यह देश के एक एक व्यक्ति तक पहुंचेगा ! अपनी संक्रामकता के कारण यह पूरे देश की जनसंख्या तक पहुँच जाये तो कितने लोग मौत के मुंह में समायेंगे, इसकी गणना की जा सकती है ! इसलिए कोरोना न फैले इसके इंतजामात तो करने ही होंगे !

    मौत के अधिकांश मामले 


    ये भी बात सही है कि मौत के अधिकांश मामले यानि 90% मामले वैसे हैं, जिन्हे कोई बीमारी थी, ऑपरेशन और उपचार के कारण वे स्वस्थ थे, लेकिन कोरोना के कारण उनकी मृत्यु हो गयी ! जांच की कमी से मैं मान रही हूँ, आज कोरोना 1 करोड़ लोगों तक पहुँच भी गया हो, ये संख्या 18, 000 हो गयी है ! कोरोना को वैसे ही बढ़ते छोड़ दिया जाये तो पूरे देश की जनसंख्या में मरनेवाले लोगों की संख्या 27 लाख हो जाएगी , जिनका इलाज हो सकता था, पर चिकित्सा विज्ञान की सारी उपलब्धियां, इतने दिनों का विकास, सबकुछ फेल हो गया, वे मौत के मुंह में समा गए !

    अब आते हैं, कोरोना से 10% स्वस्थ लोगों की मृत्यु पर, ये किसी के बेटे थे, किसी के पति थे, किसी के भाई थे, किसी की बहन थी ! ये अभी दो हज़ार हैं, पूरे देश तक कोरोना फ़ैल जाये, तो साढ़े पांच लाख स्वस्थ लोग भी कोरोना की चपेट से मरेंगे ! इससे कितने परिवारों तक सदमा पहुँचेगा, आप आसानी से समझ सकते हैं ! कोरोना न फैलता तो ये बच सकते थे, जो इन्हे कभी न भूलनेवाली त्रासदी दे गयी ! महामारी जब शुरुआती दौर में होती है तो, लोग इसे नहीं समझ पाते, पर सत्य यही होता है ! इसलिए इसके प्रसार पर रोक लगाना आवश्यक होता है !

    मरीजों की देखभाल 


    अब आती हूँ कोरोना मरीजों की देखभाल की बात पर, कुछ दिन पहले मैंने एक कहानी पढ़ी थी, जिसमे कोरोना काल में बूढ़े पिताजी को खांसते छींकते देखकर बेटे बहू ने ब्लड टेस्ट को भेजा, रिजल्ट आने तक उन्हें ऊपर छत पर बने घर, जिसमे पंखे, कूलर, बाथरूम तक भी थे, उसमे रहने को कहा, इसी बात पर बूढ़े पिताजी उदास हो gaye, दिनभर खाना नहीं खाये, शाम को पोते पोतियों को उन्हें घर में लाना पड़ा ! यह कहानी मुझे बिलकुल पसंद नहीं आयी, उस बूढ़े ने कभी घर में टीबी, चेचक , प्रसूति या सूतक के नियम नहीं पालन किये थे क्या? कोरोना को भी वैसा ही कुछ मान लेते !

    आप जितने सामाजिक होंगे, आपके अनुभव उतने अधिक होंगे ! मेरे कांटेक्ट का दायरा बड़ा है, मेरी दिनभर 10-20 लोगों से बात होती रहती है ! कुछ महिलाएं कोरोना को लेकर काफी गंभीर हैं, हेल्पर को हर महीने पैसे देने के बावजूद काम खुद कर रही है ! एक बताती है कि उसकी बचपन की दोस्त दरवाजे से ही लौट गयी, क्योंकि इसने उसे चप्पल बाहर उतारने को कहना बुरा लग गया ! एक बताती है कि एक मित्र उसके बीमाऱ पति को देखने आये, मुंह में मास्क लगाकर अंदर आने को कहने पर वे बाहर से ही लौट गए ! एक पड़ोसन के घर दो बच्चे आये, बच्चे बार बार खांस रहे थे, महिला ने उन्हें घर जाने को बोला, तबियत ठीक हो जाये तो आना ! पड़ोसी को बुरा लग गया ! मेरा भी अनुभव ऐसा ही है ! जबकि नियम का पालन करने से सिर्फ मैं नहीं आप भी सुरक्षित रहेंगे !

    व्यक्ति को भावुकता में नहीं, यथार्थवादी होकर कदम उठाने चाहिए ! सावधानी बरतनेवाले लोग, डॉक्टर की बात मानने वाले लोग, कानून का पालन करने वाले लोग वही करेंगे, जो करना चाहिए ! इस लेख के पहले पैराग्राफ में ही लिखा है कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए ! मरीजों को सबसे दूर तो रहना ही है, पर लोग छुप छुपकर बीमारी के प्रसार में भूमिका अदा कर रहे हैं ! थोड़ी सावधानी बरतने वाले लोगों से उन्हें दिक्कत हो रही है ! मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए, पर खुद को संभालते हुए ! पानी में डूबते हुए लोग बगल वाले को पकड़कर उसे भी डुबोने को तैयार रहते हैं, पर आप उससे खुद को बचाते हुए उनके बचाव का इंतजाम करते हो, आपका रवैया वैसा ही होना चाहिए !

    कोरोना मरीज और सस्पेक्ट


    कोरोना मरीजों से बाकी लोगों को बचाने के लिए दूसरे देशों में तो कोरोना मरीज और सस्पेक्ट दोनों की जिम्मेदारी सरकार की है ! भारत में भी शुरूआती दौर में यही होता है, पर संख्या बढ़ जाती है तो सरकार हाथ खड़े कर देती है ! भारतीयों की शारीरिक क्षमता के कारण भी सरकार कुछ निश्चिंत है, गंभीर मरीजों को ही अस्पताल जाना होता है, बाकी घर में रहकर स्वास्थय लाभ कर सकते हैं, क्वैरेन्टाइन में रहा सकते हैं ! लेकिन प्रशासन खुद पहले गली को, आजकल आपके बिल्डिंग को चिन्हित कर देती है, ताकि न आप बाहर जाए, न बाहर से कोई आये ! आपको सामान के लिए पड़ोसियों से मदद लेनी चाहिए, पर दूरी बनाये रखना आवश्यक है ! कोरोना पेशेंट भी मनोवैज्ञानिक तौर पर कमजोर हो जाते हैं, इसलिए बड़ी अपेक्षा कर बैठते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए !

    अभी कोरोना के संक्रमितों की संख्या कम है, गंभीर पीड़ितों की संख्या कम है, इसलिए मौत का प्रतिशत भी कम है, पर आंकड़ा बढेगा, गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ेगी तो इलाज की सुविधा और कम होती जाएगी, इससे मौत के प्रतिशत भी बढ़ेंगे ! मैंने ऊपर जितने आंकड़े बताये, देश में मौत उससे कहीं अधिक होगी ! इसलिए मुझे तो उचित लगता है कि कोरोना के प्रसार रोकने के यत्न करने चाहिए ! आपको क्या लगता है, अवश्य कमेंट करें ! इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि कोरोना काल में जहाँ तहँ हो रहे संबंधों की गड़बड़ी को कम किया जा सके ! कोई किसी की बात का बुरा न माने !

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      कोरोना मरीजों का इलाज

      कोरोना के मामले की सलाह


      कोरोना को लेकर लोगोँ में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तीन चार महीनों से मैं ज्योतिष की जगह कोरोना से सम्बंधित लेखन अधिक करने लगी हूँ, तो ज्योतिषीय सलाह लेने वाले हमारे क्लाइंट्स ज्योतिष के साथ साथ कोरोना के मामले की सलाह भी लेने लगे हैं ! वैसे अभी तक भारत में लापरवाहों की भीड़ अधिक है, जो कोरोना को फैलने-फैलाने का माध्यम बने हुए हैं !

      एक क्लाइंट ने कोरोना से बचने के लिए तीन महीनों से पूरी सावधानी से जीवन जीया है. पर उसके मोहल्ले के सभी लोग पहले की तरह ही मिलजुल रहे हैं ! संयोग से कोरोना उसके मोहल्ले तक नहीं पहुंचा है, इसलिए पड़ोसी मजाक भी उड़ा रहे हैं ! उसके पड़ोस में शादी है, सबका आना जाना चल रहा है ! मेरी क्लाइंट परेशान है, नहीं जाउंगी तो बुरा लग जायेगा ! मैंने बोला, जाने में कोई बुराई नहीं, पर प्रशासन की गाइडलाइन्स के हिसाब से सेनेटाइजर की व्यवस्था न हो, 50 से अधिक की भीड़ दिखे, सबके मुंह पर मास्क न दिखे, कुर्सियों या खड़े होने की जगह के मध्य छह फ़ीट का दूरी न हो तो कारण बताकर फ़ौरन वापस हो जाएँ !


      save grandparents from corona,

      कोरोना काल में सम्बन्ध

      सम्बन्ध साल, दो साल, चार साल के लिए खराब होता है, ठीक हो जायेगा ! नहीं ठीक होगा तो नए लोगों से सम्बन्ध बन जायेंगे, जीवनभर कोई अकेला नहीं रहेगा ! पर पूरी दुनिया को परास्त करने वाला कोरोना का खात्मा चेन तोड़कर ही होगा ! सिर्फ अपने लिए नहीं डरना है, चेन फैलने से रोकने के लिए डरना है ! जो नहीं समझते नहीं, नहीं समझेंगे, पर हम समझकर भी गलती नहीं करेंगे ! कल एक महिला ने बताया कि चप्पल बाहर उतारने को कहने पर उसकी मित्र दरवाजे से ही वापस चली गयी, कोरोना काल में चप्पल बाहर उतारने कहना इतनी बड़ी गलती है कि तुम बचपन की दोस्ती तोड़ दो ! इसकी क्या गारंटी है कि आपका चप्पल रास्ते में किसी कोरोना पॉजिटिव के थूक पर चढ़कर नहीं आया हो !


      यदि विदेशो से आ रही ख़बरों पर ही हम सावधान हो जाते तो आज दिल्ली और मुम्बई में जो कोहराम मचा है, वो नहीं होता ! इसके बाद भी यदि लोग नहीं समझेंगे, तो इसका अर्थ यही है कि आप एक एक अपार्टमेंट और एक एक गली तक कोरोना को पहुँचाने का इंतज़ार कर रहे हो ! पूरे भारतवर्ष से कई खबरें ऐसी आयी, जहाँ केवल एक व्यक्ति, चाहे वह ऑफिस का कर्मचारी हो, डॉक्टर हो, यहाँ तक कि एक दूल्हे ने भी 50-100 लोगों को संक्रमित किया ! उनमे से कम इम्युनिटी वाले 2-4 की तो मौत हो ही सकती है ! इस तरह एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी अच्छी इम्युनिटी के कारण कोरोना से खुद न भी मरे, पर 4 लोगों को मार सकता है ! पूरे भारतवर्ष की लापरवाही को मिलाया जाये तो करोड़ों हो जायेंगे !

      डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट


      कल बैंगलोर के एक अपार्टमेंट से खबर आयी कि एक यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट है, जिसने दो चार दिन पहले पूजा करवाई थी और पूरे अपार्टमेंट में प्रसाद बांटा था ! उसे भ्रम रहा कि वह कोरोना मरीजों का इलाज नहीं कर रहा है, इसलिए उसे कोरोना नहीं हो सकता ! अरे आपका कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव रह ही सकता है, जिसको चेक करने में आपको कोरोना हो गया हो ! आपने इस समय पूजा में लोगों को बुलाने की या नहीं आने पर घर घर प्रसाद पहुंचाने की भूल क्यों की? 

      पूरी बिल्डिंग सील की गयीं है, सबके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, कितने रिपोर्ट पॉजिटिव आएंगे, कितने कमजोर मौत के मुंह में जाएंगे, वह तो समय बताएगा, पर कोरोना काल में जब एक डॉक्टर के द्वारा ऐसी भूल होती है तो बाकी लोगों को सिखलाने में बहुत समय चाहिए, तबतक कोरोना भारत के गाँव की एक एक गली और एक एक अपार्टमेंट तक पहुँच चुका होगा, कमजोर इम्युनिटी वाले सारे लोग इस दुनिया को विदा कर चुके होंगे, भाग्यशालियों के ही दादा दादी, नाना नानी बच पाएंगे !
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        सावन का पहला सोमवार

         

        सावन का सोमवार का व्रत

        आज भी सावन का सोमवार का व्रत करने की हिम्मत नहीं हुई।  कुछ वर्षों से ऐसा ही हो रहा है , कभी काम की भीड और कभी तबियत के कारण सोमवारी व्रत नहीं कर पा रही हूं। हमारे धर्म में सावन महीने के सोमवार का बहुत म‍हत्‍व है। सावन के सोमवार को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। भारत के सभी द्वादश शिवलिंगों पर इस दिन खास पूजा-अर्चना की जाती है. कहा जाता है सावन के सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और दूध की धार के साथ भगवान शिव से जो मांगो वह वर मिल जाता है. यही कारण है कि इस व्रत को कुंवारी कन्‍याएं काफी उत्‍साहित होकर करती हैं।

        व्रत में अधिक नियम की जरूरत नहीं

        प्राचीन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं। सोमवारसोलह सोमवार और सौम्य प्रदोष। सोमवार के व्रत की चाहे जितनी भी सामग्रियां इकट्ठी कर ली जाएं , व्रत में अधिक नियम की जरूरत नहीं। भोले भाले शिव जी की पूजा का यह सोमवार व्रत भी बिल्‍कुल अपने मन मुताबिक किया जा सकता है। यही कारण है कि सावन का सोमवारी व्रत छोटी छोटी बच्चियां भी कर लेती हैं। हमारे गांव में सावन का सोमवारी व्रत लडकियों के लिए काफी उत्‍साह का त्‍यौहार होता था। गांव के पंडितों की मानने के कारण हमें काफी तैयारी करनी होती थी।


        sawan somwar vrat


        शनिवार का गांव में हाट

        शनिवार का गांव में हाट लगता था , इसलिए इस दिन से ही तैयारी शुरू हो जाती थी। पूजा के लिए कम से कम पांच प्रकार के फल तो होने ही चाहिए , सात हो जाए तो और बढिया । एक दो घर में मिल जाते , बाकी तो हमें खरीदने ही होते थे। अपने घर में दूध का इंतजाम न हो , तो ग्‍वाले के घर जाकर गाय के कच्‍चे दूध का इंतजाम करना होता। बाजार से भांग , कपूर आदि खरीदकर लाने होते। रविवार को सुबह सुबह अच्‍छी तरह नहाकर एक लोटे में जल , दूध और पुष्‍प लेकर मंदिर जाकर भगवान शिव और पार्वती जी पर चढाना होता था। उसके बाद दिनभर बिना प्‍याज लहसुन का शुद्ध खाना खाना होता था। 

        पूजा की तैयारी 

        हमारे गांव में भले ही सोमवार को शिवमंदिर का कपाट दो बजे के बाद ही खुलता था , सुबह से ही हमलोग पूजा की तैयारी में लग जाते थे। पूजा में कोई कमी न रह जाए , सुबह से ही बेलपत्र , धतुरे और धतूरे के फूल और अन्‍य फूल , जो हमारे बगीचे में नहीं होती , के लिए हमलोग भूखे प्‍यासे भटकते रहते। दो बजे के बाद स्‍नान कर हम पूजा का थाल सजाते। उसके बाद नए कपडे पहनकर शिवालय जाते।

         शिव परिवार को जलधारा , दूधदहीशहदशक्करघी से स्नान कराकरगंधचंदनफूलरोलीसिंदूर के साथ साथ धूप अगरबत्‍ती दिखाते हुए फलों का भोग लगाते। मंदिर में एक बूढी ब्राह्मणी होती , जो अस्‍पष्‍ट मंत्रों का उच्‍चारण करती जाती। शिव जी को अर्पित करने से पहले वे थोडा दूध अपने घर से लाई बाल्‍टी में जमा करती जातीं। प्रसाद तो हम उनके लिए अलग से ले जाते थे। मंदिर से बाहर निकलते ही प्रसाद के आस में बहुत महिलाएं और बच्‍चे खडे मिलते। उन्‍हें प्रसाद देकर हम वापस लौटते।

        तीन दिन का नियम

        दिनभर के भूखे प्‍यासे हम बच्चियों की सेवा के लिए सबकी मम्‍मी पूरी तैयारी में होती। हमारे गांव में सोमवारी व्रत में दिनभर में एक बार ही बिना नमक का शुद्ध खाना खाने का विधान है , यहां तक की चाय पानी भी एक ही बैठकी में ले लेना होता। छोटी छोटी बच्चियां भी पूजा से पहले तो नहीं, पूजा के बाद भी दुबारा पानी नहीं पीती। दूसरे दिन भी हमें सुबह सुबह खाने की आजादी नहीं थी , स्‍नानकर पहले शिव पार्वती जी की पूजा कर उनसे इजाजत लेकर ही खाने की छूट होती। इस तरह हमलोगों का तीन दिन का नियम चलता। पर तीसरे दिन हमारे लिए खाने पहने की विशेष व्‍यवस्‍था कि जाती।

        एक बार सावन के महीने में मामाजी के यहां थी , तो वहां महिलाओं को इतने नियम से सोमवारी का व्रत करते नहीं पाया। वहां सालोभर बिना प्‍याज लहसून के खाना बनता था , इसलिए रविवार को नियम से खाने की कोई जरूरत नहीं होती। सोमवार को दिनभर सबका फलाहार ही चलता , बस दोनो भाइयों के लिए खाना बनाने की जरूरत होती। वहां सुबह से ही शिवमंदिरों में भीड लगती थी , इसलिए सुबह ही सब पूजा कर लेते , पूजा के बाद प्रसाद और चाय ले लेते , फिर फलाहार तैयार करते।

        कुट्टू के आटे और सेंधा नमक

        भाइयों का खाना निबटाकर हमलोग तीन बजे के लगभग फलाहार करते। दिनभर पानी चाय की कोई मनाही नहीं थी। सबसे छोटी बहन तो फलाहार कर टिफिन में फलाहार लेकर स्‍कूल जाती आकर फिर दो तीन बार फलाहार ही करती। यानि जिसको जैसे इच्‍छा हो , वैसे खाओ पीओ। एक बार रांची में भी एक रिश्‍तेदार के यहां रूकने का मौका मिला , वहां भी ऐसे ही व्रत होते देखा। बहुत परिवारों में तो कुट्टू के आटे और सेंधा नमक का प्रयोग करते हुए पूरा फलाहार खाना बना लिया जाता है।

        हॉस्‍टल में चावल दाल

        ससुराल में एक बार सावन के सोमवारी व्रत को करने को पूरा घर तैयार हो गया। वहां सुबह पूजा करने के बाद चाय और पानी पीने के सहारे रहने की छूट है। दोपहर में मेरे पूछने पर कि लोग क्‍या क्‍या खाएंगे , दोनो भाइयों ने बिना प्‍याज लहसून के चावल दाल सब्‍जी बनाने को कहा। सोमवारी व्रत में चावल दाल ?? मैं तो चौंक गयी। इनलोगों ने बताया कि दिनभर के भूखे प्‍यासे इनलोगों की भूख फलाहार से शांत नहीं होती थी , इसलिए ये हॉस्‍टल में चावल दाल ही खाते आए हैं। इस रूप में सोमवारी का व्रत होते मैने पहली बार सुना। महिलाओं ने तो नहीं , पर सभी पुरूषों ने व्रत में दाल चावल खाए। भोले भाले शंकर बाबा की पूजा और व्रत हर जगह अलग अलग यानि मनमाने ढंग से ही होते आ रहे है , भोले बाबा को इससे कोई अंतर नहीं पडता। तभी तो कहा गया है , भगवान केवल भक्‍त भाव के भूखे होते हैं !!

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          horoscope tomorrow

           

          Horoscope Tomorrow ( 6th & 7th  of July )

          (For latest click here )


          After research of 'Gatyatmak Jyotish' specially the research of 'Gatyatmak Gochar pranali',  by Mr Vidya Sagar Mahthaaccurate daily and yearly forecast can be done.

          The ascendant of a person 

          The ascendant of a person is very effective. Hence, all the prediction of 'Horoscope Tomorrow' is based on the ascendants. On account of the sunrise time planetary position, every day with his own certain ascendants has to get a certain result. 
          A person can plan accordingly if he/she is previously informed about it. It does not matter if your routine is like common days' but if you are going to do something special, then pay attention to the planetary circumstances. Pay attention to the matter written about the sensational part of your life particularly in your daily 'Rashiphal'.

          If you are not aware of your ascendant

          then send your date of birth, time of birth, and place of birth on 8292466723 via SMS, you will be given information of your ascendant, but you will not succeed if you try to see that from Rashi. you must take interest in getting information about your day-to-day planetary effects. I am sure in around 80% matter you will be benefited a lot even without paying anything !

          We have started Lagn Rashifal 

          After a long time again we have started daily planetary Rashi-fal according to your ascendant through this column. People having been born with Cancer and Sagittarius Lagna or Chandra (Moon) Rashi- both will feel pleasant circumstances on the 4th & 5th of July 2020. But people having been born with Taurus Lagna and Chandra (Moon) Rashi- both will feel unpleasant circumstances. After 4th July the situation will be normal and after 6th July, It will be a pleasure some

          horoscope tomorrow


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