ईश्वर सबकी रक्षा करें !

Amitabh bachchan health condition

अमिताभ बच्चन जी का एक वीडियो

तीन महीने पहले की यह बात सबको याद ही होगी कि कोरोना की भयावहता को लेकर जनता को जागरूक करने और लॉक डाउन को सफल बनाने के लिए सरकार ने कुछ प्रभावशाली लोगों की मदद ली थी ! कई क्रिकेटर, फ़िल्मी नायक के वीडियो अक्सर टेलीविज़न पर दिख जाते थे, दो-चार वीडियो काफ़ी अच्छी लगी थी, उसमे अमिताभ बच्चन जी का एक वीडियो था, जिसमे उन्होंने अपने खोये काले चश्मे को लेकर हंगामा खड़ा किया था, अंत में सबने मिलकर इसे ढूंढा था !


amitabh bachchan health condition,

पर अंत में अमिताभ बच्चन चश्मे को न पहनकर चश्मे को संभालकर रखते हैं, ताकि लॉक डाउन के बाद पहन निकल सकें ! इस बात पर सारे कलाकार अपना सर पीट लेते हैं कि जब चश्मे का काम ही नहीं था, तो इन्होने इतनी मेहनत करवाई क्यों? इस वीडियो में सिर्फ यही सन्देश नहीं था कि लॉक डाउन में बाहर नहीं निकलना है, सन्देश यह भी था कि अपने अपने घर में रहकर भी आप कोई काम कर सकते हो ! इस वीडियो को बनाने के लिए कोई कलाकार घर से बाहर नहीं निकले थे ! सभी कलाकारों के अपने अपने घर में रहने के बावजूद यह वीडियो बना लिया गया था ! इसका स्क्रिप्ट किसने लिखा था, यह मुझे बिलकुल याद नही !

फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन covid + रिपोर्ट

कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले समझदार अभिनेता भी आज कोरोना से नहीं बच पाए ! कल शाम देशभर में यह खबर फ़ैल गयी कि फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन covid + रिपोर्ट आने के बाद नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं ! उन्होंने खुद शनिवार रात को ट्विटर के माध्यम से अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी फैंस को दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'मैं Covid-19 पॉजिटिव पाया गया हूं। ---- जितने भी लोग पिछले 10 दिनों में मुझसे मिले हैं, वे अपना टेस्ट करवा लें !" अमिताभ बच्चन जी का कोरोना से संक्रमित होने का मतलब है कि इससे कोई नहीं बच सकता ! यदि उनसे कुछ लापरवाही हुई हो तो बात अलग है ! कोरोना क्यों बढ़ रहा है, इसपर कल एक चित्र इंटरनेट पर मिला, इस पोस्ट के साथ संलग्न कर रही हूँ !



अभी महाराष्ट्र और ख़ासकर मुम्बई में पूरे देश में सबसे भयावह स्थिति है ! उनके घर में काफ़ी कर्मचारी होंगे, सबका बाहर आना जाना तो स्वाभाविक है ! हो सकता है, सभी कोरोना से बचने के लिए बने गाइड लाइन्स का पालन नहीं करते हों ! उनके सन्देश से यह भी स्पष्ट है कि वे लोगों से मिलते जुलते रहे ! ऐसी भी काम की क्या हड़बड़ी थी, जो उन्हें सबसे मिलना जुलना जरूरी लगा ! कुछ दिन तो इंतज़ार कर ही सकते थे !

दूसरी रिपोर्ट में उनकी बहू और पोती भी कोरोना पॉजिटिव

बाद में मालुम हुआ कि उनके बेटे अभिषेक बच्चन की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आयी है, उनकी पत्नी, बहू और पोती तक कोरोना में कोरोना नेगेटिव ! कुछ स्टॉफ अवश्य संक्रमित हुए होंगे, जिनकी वजह से अमिताभ बच्चन तक यह वायरस पहुँच पाया ! आज सुबह समाचार मिला कि अमिताभ बच्चन की हालत स्थिर है और उनमें Covid-19 पॉजिटिव संक्रमण के मामूली लक्षण पाए गए हैं। उन्हें हॉस्पिटल के आइसोलेशन वॉर्ड और अभिषेक बच्चन को जनरल वार्ड में रखा गया है ! बाद में दूसरी रिपोर्ट में उनकी बहू और पोती तक कोरोना पॉजिटिव आया !


मामूली लक्षण वाले मरीज शुरुआत से ही डॉक्टर की देख रेख में रहें तो सुनकर थोड़ी राहत हो जाती है, अभिषेक बच्चन की ओर से तो निश्चिंती है, पर अमिताभ बच्चन की उम्र और उनके स्वास्थ्य के अक्सर कमजोर रहने से थोड़ी चिंता तो हो ही जाती है ! ईश्वर सबकी रक्षा करें, प्रतिदिन ईश्वर से यही प्रार्थना है ! अमिताभ बच्चन सहित सभी कोरोना मरीजों के लिए  देशभर में जगह जगह पूजा पाठ शुरू हो गयी है !

मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




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    क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?

    क्या हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं ?


    कोरोना पर लिखें गए कल के लेख पर एक पाठक के कमेंट से आज के लेख की शुरुआत करती हूँ, जिन्होंने लिखा कि शहरों में भयावहता फैलाने वाले कोरोना का गाँव में कोई प्रभाव नहीं है ! गावों में कुछ केसेज आये भी तो ख़त्म हो गए, प्रसार नहीं हो पाया ! अपने अनुभव से इस बात को अभी मैं भी स्वीकार कर यही हूँ ! वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का भी मानना है कि विकसित देशों, जैसे अमेरिका, कनाडा यूरोपीय देशों की तुलना में भारत के महानगरों में ही कोरोना से लड़ने की क्षमता अधिक दिख रही है, तो गावों में रहे वालों लोगों पर निश्चित तौर पर यह क्षमता उससे अधिक होगी !


    झारखण्ड में भी कोरोना के बिलकुल शुरुआती तीन केस में हिंदपीढ़ी, राँची के बाद के दो तो हमारे 10-12 किमी के रेंज में थे ! बेरमो में बांग्ला देश से आयी महिला के माध्यम से और गोमिया में लॉक डाउन के दौरान वाराणसी से ट्रक में छुपकर आये मजदूर के माध्यम से कोरोना फैला था ! दोनों छोटे गाँव थे, चार छह लोगों में संक्रमण हुआ था ! बेरमो का केस तो सरकार की निगाह में था ही, पर गोमिया वाले केस में तो वृद्ध के मौत के कितने दिन बाद ही मजदूर की चोरी पकड़ी गयी थी ! लेकिन दोनों ही जगह दिल्ली और मुम्बई वाली हालत नहीं हुई !


    Our villages and corona



    अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा


    इसका पहला कारण यह हो सकता है कि गाँव में शहरों की तरह जीवन तंग नहीं है ! सबके घर खुले खुले होते हैं, सबका खाना प्राकृतिक होता है ! सभी मेहनती होते हैं, पैदल ही लम्बी यात्रा पर निकल पड़ते हैं ! या सब उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ! कोरोना काल में गावों में लोग इसकी चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध भी दिखे ! वैसे देखा जाये तो लॉक डाउन के दौरान दिल्ली, मुम्बई में भी केस अधिक नहीं बढ़ रहे थे ! लोग घर पर और प्रशासन रोड पर रहकर कोरोना की चेन तोड़ने को प्रतिबद्ध थे ! और हम इसी भ्रम में थे कि यूरोप अमेरिका की तुलना में हमारे देश में संक्रमण की गति बहुत धीमी है !


    पर अनलॉक किये जाने के बाद हमारा भ्रम टूटा ! समस्याएं बढ़ी हैं, सरकार ने भले ही जरूरी कार्यों के लिए ही अनलॉक किया हो, पर अधिकांश लोग अपने पुराने रूटीन में लौट आये हैं ! कुछ लोग कोरोना की भयावहता को कम आँक रहे हैं ! इसी में अनलॉक -1 में महानगरों का हाल बेहाल करने वाले देश को विश्व के तीसरे पायदान पर खड़े कर देने वाले कोरोना ने अनलॉक - 2 में छोटे शहरों की ओर रूख किया है ! छोटे शहरों में लगातार केसेज बढ़ने से प्रशासन जैसे ही लाचार होगा, छोटे शहर भी महानगरों की हालात में आएंगे ! उसके बाद ही गाँव की बारी आएगी ! इसलिए यह कह देना कि हमारे गाँव कोरोना से सुरक्षित हैं, अभी जल्दबाजी होगी !

    हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !


    हम प्रतिदिन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि कोरोना का प्रसार रुके, इससे हो रही मौत रुके, पर हमें चौकन्ना तो रहना ही होगा ! कोरोना काल बनकर निरंतर अपने मुंह को सुरसा की भांति बढ़ाता जा रहा है ! कोरोना गावों तक नहीं पहुंचा तो यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी ! पर लोगों के रवैये, गंभीरता की कमी को देखते हुए यह मान लेना कठिन है ! हर महामारी का अपना एक समय होता है, महानगरों और शहरों तक ही इसका समय समाप्त हो जाये, हम ऐसी आशा रख सकते है ! इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं, पर निश्चिंत तो नहीं रहा सकते ! आगे कोरोना के साथ ही जीवन जीना है, इसलिए हमें सावधान तो रहना ही चाहिए !

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      ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?

      गाँव का जीवन


      दो साल पहले की बात है, मेरी मम्मी कुछ दिनों से बीमाऱ चल रही थी और हर प्रकार के टेस्ट के बाद स्पष्ट हो गया था कि उनके फेफड़े कमजोर हो चुके हैं ! इस बीमारी के लिए दिल्ली के पर्यावरण को दोष दिया जा सकता था, जहाँ वे 20 वर्षों से जीवन जी रही थी या फिर उनके कमजोर शरीर को या आस्तिक होने के नाते हम मान सकते हैं कि होनी को यही मंजूर था ! पर डॉक्टर ने अपनी ओर से सभी दवाओं के साथ उनको गाँव में कुछ समय व्यतीत करने का एक विकल्प भी दिया ! मम्मी का जीवन कुछ महीने बढ़ सकता था !



      संस्कारी परिवारों में माँ-पापा तो बच्चों के लिए ईश्वर से कम नहीं, इसलिए सभी बच्चों ने उनके लिए हमारे अपने गाँव में सारी व्यवस्था करनी चाही ! गाँव में भी हमारे परिवार में लक्ष्मी और सरस्वती दोनों की विशेष कृपा रही है, जरूरत पड़ने पर गाँव हमें सहारा देने के लिए हर वक्त तैयार है ! पर मम्मी ने वहाँ अकेले या पापाजी के साथ रहने से मना कर दिया, उन्होंने स्पष्ट बोला कि जीवन एन्जॉय करने के लिए होता है ! बच्चे अपनी अपनी जिम्मेदारियों के कारण गाँव जा नहीं सकते, यदि सभी बच्चों से दूर अपना जीवन बढ़ाने के लिए मुझे गाँव में रहना पड़े तो ऐसा जीवन लेकर मैं क्या करूँ?


      जीवन जीने के लिए होता है


      korona kaal ka jivan,


      सच भी यही है, जीवन जीने के लिए होता है, चुनौतियों से लड़ने के लिए भी होता है, एन्जॉय करने के लिए भी होता है ! इस तरह घर में बंद रहकर जीवन जीना पड़े तो ऐसे जीवन से क्या लाभ? हमें पहले जैसा जीवन चाहिए ही ! पर वह हमें कुछ महीने के लॉक डाउन के पालन के बाद ही मिल सकता था, पर पहले दिन से ही जो जहाँ थे वहीँ से घर आने के लिए बेचैन हो गए ! जिनकी व्यवस्था उनके शहरों में हो सकती थी, वहाँ से देश के हर भाग में भेज दिया गया !


      प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' 


      इस तरह की गैर जिम्मेदाराना हरकत की वजह भी साफ है ! हर तरह की प्राकृतिक आपदा और 'महामारी' आदि की चर्चा हमारे पाठ्यपुस्तकों, दैनिक बोलचाल और किस्सों-कहानियों से गायब हैं ! यदि कभी कभी आनेवाली इन समस्याओं को इन माध्यम से समझाया गया होता तो लोगो का इससे लड़ने का व्यवहार ही अलग होता ! बड़े-छोटे, अमीर-गरीब, विभिन्न धर्म, विभिन्न जाति, विभिन्न पार्टियां, सब एकजुट होकर इससे लड़ते !

      लोग इस बात की शुक्र माने कि कोरोना से मौत की दर दो-तीन प्रतिशत ही है, हो सकता है यह .3% ही हो, क्योंकि टेस्टिंग कम हो रही हैं ! यदि अधिक होता तो आज संकट कितना बड़ा होता? खैर संकट छोटा है और थोड़ी सावधानी से रहा जाये तो कोरोना की चेन तोड़ी जा सकती है ! लम्बे समय तो ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है ! यदि कोरोना लम्बे समय तक रहा तो दुनिया में कोरोना के विरुद्ध एंटीबाडी बना चुके लोग ही बचेंगे ! कमजोर लोग दुनिया से कूच कर जायेंगे ! अभी के माहौल का देखकर यही सत्य लग रहा है !

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        कोरोना को नियंत्रित किये जाने की कोशिश

        कोरोना को हराने के लिए 

        मैं डॉक्टर भी नहीं, वैज्ञानिक भी नहीं, फिर भी लगभग तीन महीने से मैं कोरोना के प्रति लगातार जागरूकता भरे लेख लिख रही हूँ ! शायद तब भारत में कोरोना के इक्के दुक्के मामले ही होंगे ! अपने पुराने लेखों में मैंने बाहर निकलने पर नियमित मास्क पहनने, हाथो पर अपना नियंत्रण रखने और बाहर से आये सामानो के प्रति जागरूकता बनाये रखने के बारे में लिखा करती थी ! साथ ही बाहर से घर में प्रवेश पर आवश्यक सावधानी और अपने घर में किसी को प्रवेश न देने के नियम का कड़ाई से पालन करना भी था ! कोरोना को हराने के लिए 1-2 महीने इतना कर लेना पर्याप्त था !


        हम सभी जानते हैं कि इन नियमों का पालन होता तो अभी तक कोरोना अपने पैर इतना न पसारता, और हमें अभी तक कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लिखना न पड़ता ! पर अभी भी बाहर 50% लोग मुंह और नाक में नहीं, गले में मास्क लगाए मिलेंगे आपको ! अब दूसरे मुद्दे पर आती हूँ, जिसमे कल एक पाठक ने लिखा कि कोरोना इतनी भी बड़ी बीमारी नही, इसके अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं ! इस बीमारी के प्रति अधिक हौवा फैलाया जाये तो लोग कोरोना मरीजों को लेकर घृणात्मक रवैया अपना रहे हैं, उनकी देखभाल नहीं हो पाती है !


        corona ko niyantrit karne ki koshish

        मारक नहीं पर संक्रामक


        अभी तक के आंकड़े यही बताते हैं कि कोरोना मारक नहीं है, आंकड़े 3% मृत्यु दर बताते है, पर टेस्टिंग की कमी को देखते हुए मैं इसे और कम करती हूँ, मृत्यु दर .3% भी हो सकता है ! यानि कोरोना 1000 लोगों तक पहुंचा तो 3 लोगों की मृत्यु कोरोना से निश्चित है ! भारत में एक मोहल्ले में भी 1000 से कई गुने लोग रहते हैं, आप अपने मोहल्ले में कोरोना फैला तो कोरोना से हुई मौत का अंदाजा लगा सकते हैं !


        क्योंकि कोरोना मारक कम है, पर संक्रामक तो है ही, और यदि कोरोना के प्रति लापरवाही रखी जाये तो यह देश के एक एक व्यक्ति तक पहुंचेगा ! अपनी संक्रामकता के कारण यह पूरे देश की जनसंख्या तक पहुँच जाये तो कितने लोग मौत के मुंह में समायेंगे, इसकी गणना की जा सकती है ! इसलिए कोरोना न फैले इसके इंतजामात तो करने ही होंगे !

        मौत के अधिकांश मामले 


        ये भी बात सही है कि मौत के अधिकांश मामले यानि 90% मामले वैसे हैं, जिन्हे कोई बीमारी थी, ऑपरेशन और उपचार के कारण वे स्वस्थ थे, लेकिन कोरोना के कारण उनकी मृत्यु हो गयी ! जांच की कमी से मैं मान रही हूँ, आज कोरोना 1 करोड़ लोगों तक पहुँच भी गया हो, ये संख्या 18, 000 हो गयी है ! कोरोना को वैसे ही बढ़ते छोड़ दिया जाये तो पूरे देश की जनसंख्या में मरनेवाले लोगों की संख्या 27 लाख हो जाएगी , जिनका इलाज हो सकता था, पर चिकित्सा विज्ञान की सारी उपलब्धियां, इतने दिनों का विकास, सबकुछ फेल हो गया, वे मौत के मुंह में समा गए !

        अब आते हैं, कोरोना से 10% स्वस्थ लोगों की मृत्यु पर, ये किसी के बेटे थे, किसी के पति थे, किसी के भाई थे, किसी की बहन थी ! ये अभी दो हज़ार हैं, पूरे देश तक कोरोना फ़ैल जाये, तो साढ़े पांच लाख स्वस्थ लोग भी कोरोना की चपेट से मरेंगे ! इससे कितने परिवारों तक सदमा पहुँचेगा, आप आसानी से समझ सकते हैं ! कोरोना न फैलता तो ये बच सकते थे, जो इन्हे कभी न भूलनेवाली त्रासदी दे गयी ! महामारी जब शुरुआती दौर में होती है तो, लोग इसे नहीं समझ पाते, पर सत्य यही होता है ! इसलिए इसके प्रसार पर रोक लगाना आवश्यक होता है !

        मरीजों की देखभाल 


        अब आती हूँ कोरोना मरीजों की देखभाल की बात पर, कुछ दिन पहले मैंने एक कहानी पढ़ी थी, जिसमे कोरोना काल में बूढ़े पिताजी को खांसते छींकते देखकर बेटे बहू ने ब्लड टेस्ट को भेजा, रिजल्ट आने तक उन्हें ऊपर छत पर बने घर, जिसमे पंखे, कूलर, बाथरूम तक भी थे, उसमे रहने को कहा, इसी बात पर बूढ़े पिताजी उदास हो gaye, दिनभर खाना नहीं खाये, शाम को पोते पोतियों को उन्हें घर में लाना पड़ा ! यह कहानी मुझे बिलकुल पसंद नहीं आयी, उस बूढ़े ने कभी घर में टीबी, चेचक , प्रसूति या सूतक के नियम नहीं पालन किये थे क्या? कोरोना को भी वैसा ही कुछ मान लेते !

        आप जितने सामाजिक होंगे, आपके अनुभव उतने अधिक होंगे ! मेरे कांटेक्ट का दायरा बड़ा है, मेरी दिनभर 10-20 लोगों से बात होती रहती है ! कुछ महिलाएं कोरोना को लेकर काफी गंभीर हैं, हेल्पर को हर महीने पैसे देने के बावजूद काम खुद कर रही है ! एक बताती है कि उसकी बचपन की दोस्त दरवाजे से ही लौट गयी, क्योंकि इसने उसे चप्पल बाहर उतारने को कहना बुरा लग गया ! एक बताती है कि एक मित्र उसके बीमाऱ पति को देखने आये, मुंह में मास्क लगाकर अंदर आने को कहने पर वे बाहर से ही लौट गए ! एक पड़ोसन के घर दो बच्चे आये, बच्चे बार बार खांस रहे थे, महिला ने उन्हें घर जाने को बोला, तबियत ठीक हो जाये तो आना ! पड़ोसी को बुरा लग गया ! मेरा भी अनुभव ऐसा ही है ! जबकि नियम का पालन करने से सिर्फ मैं नहीं आप भी सुरक्षित रहेंगे !

        व्यक्ति को भावुकता में नहीं, यथार्थवादी होकर कदम उठाने चाहिए ! सावधानी बरतनेवाले लोग, डॉक्टर की बात मानने वाले लोग, कानून का पालन करने वाले लोग वही करेंगे, जो करना चाहिए ! इस लेख के पहले पैराग्राफ में ही लिखा है कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए ! मरीजों को सबसे दूर तो रहना ही है, पर लोग छुप छुपकर बीमारी के प्रसार में भूमिका अदा कर रहे हैं ! थोड़ी सावधानी बरतने वाले लोगों से उन्हें दिक्कत हो रही है ! मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए, पर खुद को संभालते हुए ! पानी में डूबते हुए लोग बगल वाले को पकड़कर उसे भी डुबोने को तैयार रहते हैं, पर आप उससे खुद को बचाते हुए उनके बचाव का इंतजाम करते हो, आपका रवैया वैसा ही होना चाहिए !

        कोरोना मरीज और सस्पेक्ट


        कोरोना मरीजों से बाकी लोगों को बचाने के लिए दूसरे देशों में तो कोरोना मरीज और सस्पेक्ट दोनों की जिम्मेदारी सरकार की है ! भारत में भी शुरूआती दौर में यही होता है, पर संख्या बढ़ जाती है तो सरकार हाथ खड़े कर देती है ! भारतीयों की शारीरिक क्षमता के कारण भी सरकार कुछ निश्चिंत है, गंभीर मरीजों को ही अस्पताल जाना होता है, बाकी घर में रहकर स्वास्थय लाभ कर सकते हैं, क्वैरेन्टाइन में रहा सकते हैं ! लेकिन प्रशासन खुद पहले गली को, आजकल आपके बिल्डिंग को चिन्हित कर देती है, ताकि न आप बाहर जाए, न बाहर से कोई आये ! आपको सामान के लिए पड़ोसियों से मदद लेनी चाहिए, पर दूरी बनाये रखना आवश्यक है ! कोरोना पेशेंट भी मनोवैज्ञानिक तौर पर कमजोर हो जाते हैं, इसलिए बड़ी अपेक्षा कर बैठते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए !

        अभी कोरोना के संक्रमितों की संख्या कम है, गंभीर पीड़ितों की संख्या कम है, इसलिए मौत का प्रतिशत भी कम है, पर आंकड़ा बढेगा, गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ेगी तो इलाज की सुविधा और कम होती जाएगी, इससे मौत के प्रतिशत भी बढ़ेंगे ! मैंने ऊपर जितने आंकड़े बताये, देश में मौत उससे कहीं अधिक होगी ! इसलिए मुझे तो उचित लगता है कि कोरोना के प्रसार रोकने के यत्न करने चाहिए ! आपको क्या लगता है, अवश्य कमेंट करें ! इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि कोरोना काल में जहाँ तहँ हो रहे संबंधों की गड़बड़ी को कम किया जा सके ! कोई किसी की बात का बुरा न माने !

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          कोरोना मरीजों का इलाज

          कोरोना के मामले की सलाह


          कोरोना को लेकर लोगोँ में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तीन चार महीनों से मैं ज्योतिष की जगह कोरोना से सम्बंधित लेखन अधिक करने लगी हूँ, तो ज्योतिषीय सलाह लेने वाले हमारे क्लाइंट्स ज्योतिष के साथ साथ कोरोना के मामले की सलाह भी लेने लगे हैं ! वैसे अभी तक भारत में लापरवाहों की भीड़ अधिक है, जो कोरोना को फैलने-फैलाने का माध्यम बने हुए हैं !

          एक क्लाइंट ने कोरोना से बचने के लिए तीन महीनों से पूरी सावधानी से जीवन जीया है. पर उसके मोहल्ले के सभी लोग पहले की तरह ही मिलजुल रहे हैं ! संयोग से कोरोना उसके मोहल्ले तक नहीं पहुंचा है, इसलिए पड़ोसी मजाक भी उड़ा रहे हैं ! उसके पड़ोस में शादी है, सबका आना जाना चल रहा है ! मेरी क्लाइंट परेशान है, नहीं जाउंगी तो बुरा लग जायेगा ! मैंने बोला, जाने में कोई बुराई नहीं, पर प्रशासन की गाइडलाइन्स के हिसाब से सेनेटाइजर की व्यवस्था न हो, 50 से अधिक की भीड़ दिखे, सबके मुंह पर मास्क न दिखे, कुर्सियों या खड़े होने की जगह के मध्य छह फ़ीट का दूरी न हो तो कारण बताकर फ़ौरन वापस हो जाएँ !


          save grandparents from corona,

          कोरोना काल में सम्बन्ध

          सम्बन्ध साल, दो साल, चार साल के लिए खराब होता है, ठीक हो जायेगा ! नहीं ठीक होगा तो नए लोगों से सम्बन्ध बन जायेंगे, जीवनभर कोई अकेला नहीं रहेगा ! पर पूरी दुनिया को परास्त करने वाला कोरोना का खात्मा चेन तोड़कर ही होगा ! सिर्फ अपने लिए नहीं डरना है, चेन फैलने से रोकने के लिए डरना है ! जो नहीं समझते नहीं, नहीं समझेंगे, पर हम समझकर भी गलती नहीं करेंगे ! कल एक महिला ने बताया कि चप्पल बाहर उतारने को कहने पर उसकी मित्र दरवाजे से ही वापस चली गयी, कोरोना काल में चप्पल बाहर उतारने कहना इतनी बड़ी गलती है कि तुम बचपन की दोस्ती तोड़ दो ! इसकी क्या गारंटी है कि आपका चप्पल रास्ते में किसी कोरोना पॉजिटिव के थूक पर चढ़कर नहीं आया हो !


          यदि विदेशो से आ रही ख़बरों पर ही हम सावधान हो जाते तो आज दिल्ली और मुम्बई में जो कोहराम मचा है, वो नहीं होता ! इसके बाद भी यदि लोग नहीं समझेंगे, तो इसका अर्थ यही है कि आप एक एक अपार्टमेंट और एक एक गली तक कोरोना को पहुँचाने का इंतज़ार कर रहे हो ! पूरे भारतवर्ष से कई खबरें ऐसी आयी, जहाँ केवल एक व्यक्ति, चाहे वह ऑफिस का कर्मचारी हो, डॉक्टर हो, यहाँ तक कि एक दूल्हे ने भी 50-100 लोगों को संक्रमित किया ! उनमे से कम इम्युनिटी वाले 2-4 की तो मौत हो ही सकती है ! इस तरह एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी अच्छी इम्युनिटी के कारण कोरोना से खुद न भी मरे, पर 4 लोगों को मार सकता है ! पूरे भारतवर्ष की लापरवाही को मिलाया जाये तो करोड़ों हो जायेंगे !

          डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट


          कल बैंगलोर के एक अपार्टमेंट से खबर आयी कि एक यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर की कोरोना पॉजिटिव रिजल्ट है, जिसने दो चार दिन पहले पूजा करवाई थी और पूरे अपार्टमेंट में प्रसाद बांटा था ! उसे भ्रम रहा कि वह कोरोना मरीजों का इलाज नहीं कर रहा है, इसलिए उसे कोरोना नहीं हो सकता ! अरे आपका कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव रह ही सकता है, जिसको चेक करने में आपको कोरोना हो गया हो ! आपने इस समय पूजा में लोगों को बुलाने की या नहीं आने पर घर घर प्रसाद पहुंचाने की भूल क्यों की? 

          पूरी बिल्डिंग सील की गयीं है, सबके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, कितने रिपोर्ट पॉजिटिव आएंगे, कितने कमजोर मौत के मुंह में जाएंगे, वह तो समय बताएगा, पर कोरोना काल में जब एक डॉक्टर के द्वारा ऐसी भूल होती है तो बाकी लोगों को सिखलाने में बहुत समय चाहिए, तबतक कोरोना भारत के गाँव की एक एक गली और एक एक अपार्टमेंट तक पहुँच चुका होगा, कमजोर इम्युनिटी वाले सारे लोग इस दुनिया को विदा कर चुके होंगे, भाग्यशालियों के ही दादा दादी, नाना नानी बच पाएंगे !
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