प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे - 1

 

Jyotish sikhe in hindi

विषय प्रवेश - मेरे द्वारा पत्र पत्रिकाओं में ज्‍योतिष से संबंधित जितने भी लेख छपे , वो सामान्‍य पाठकों के लिए न होकर ज्‍योतिषियों के लिए थे। यहां तक कि मेरी पुस्‍तक भी उन पाठकों के लिए थी , जो पहले से ज्‍योतिष का ज्ञान रखते थे। यही कारण है कि मैं ब्‍लॉग के पाठकों के लिए जनोपयोगी लेख लिखा करती हूं। इधर कुछ वर्षों से ज्‍योतिष में प्रवेश करने के लिए एक पुस्‍तक की मांग बहुत सारे पाठकों द्वारा की जा रही है , क्‍यूंकि इसके बिना वे मेरी प्रकाशित पुस्‍तक को समझने में समर्थ नहीं हैं।

वैसे तो ज्‍योतिष में प्रवेश करने के लिए बाजार में पुस्‍तकों की कमी नहीं , जिसका रेफरेंस मैं अपने पाठकों को देती आ रही हूं , पर अधिक वैज्ञानिक ढंग से पाठकों को ज्‍योतिष की जानकारी दी जा सके , इसलिए मैं खेल खेल में वैज्ञानिक ढंग से ज्‍योतिष की सामान्य जानकारी देने के लिए यह कोर्स तैयार किया, जिसका पीडीऍफ़ आप सबों के साथ साझा करूंगी! आप सबों का साथ मिले तो दुनिया के जान-जान तक ज्योतिषीय ज्ञान पहुंचाने का मेरा प्रयास अवश्‍य सफल होगा।

Aao jyotish sikhe in hindi

कोई भी कुंडली खोलकर आप जातक के जन्म के वक्त विभिन्न दिशाओ में मौजूद ग्रहों को समझ सकते हैँ!

राशि परिचय - हमारे लिए हमारी यह धरती कितनी भी बडी क्‍यूं न हो , पर इतने बडे ब्रह्मांड में इसकी स्थिति एक विंदू से अधिक नहीं है और इसके चारो ओर फैला है विस्‍तृत आसमान। हमारे ऋषि महर्षियों ने पृथ्‍वी को एक विंदू के रूप में मानते हुए 360 डिग्री में फैले आसमान को 30-30 डिग्री के 12 भागों में बांटा था। इन्‍ही 12 भागों को राशि कहा जाता है , जिनका नामकरण मेष , वृष , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्‍या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ और मीन के रूप में किया गया है। यह ज्‍योतिष का एक मुख्‍य आधार है और इन्‍हीं राशियों तथा उनमें अनंत की दूरी तक स्थित ग्रहों के आधार पर ज्‍योतिष के सिद्धांतों की सहायता से भविष्‍यवाणियां की जाती है।

    चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

पर हमेशा से जो ज्‍योतिष विरोधी हैं , वे ज्‍योतिष के इस मुख्‍य आधार को ही गलत सिद्ध करने की चेष्‍टा करते हैं। वे बेतुका तर्क करते हैं कि ज्‍योतिष पृथ्‍वी को अचल मानते हुए अपना अध्‍ययन शुरू करता है , जबकि पृथ्‍वी सूर्य के चारो ओर चक्‍कर लगाती है। विरोधी यह मानने की भूल करते हैं कि फलित ज्‍योतिष का विकास उस वक्‍त हुआ , जब लोगों को यह मालूम था कि पृथ्‍वी स्थिर है और सूर्य तथा अन्‍य तारे उसके चारो ओर चक्‍कर लगाती है।

लग्नकुंडली

हमारे ऋषि मुनियों पर यह इल्‍जाम लगाना बिल्‍कुल गलत है कि उन्‍हे सत्‍य की जानकारी नहीं थी। जब उनके द्वारा विकसित किए गए सिद्धांतों के आधार पर विभिन्‍न ग्रहों और खगोलिय स्थिति का एक एक घटी पल निकालना संभव हो चुका है , तब उनके बारे में कोई पूर्वाग्रह पालना उचित नहीं।

Kaise Jyotish sikhe in Hindi

सापेक्षिक गति की अवधारणा - इस विषय पर मेरे अपने कुछ तर्क हैं। हमारी अपनी नजर या दृष्टि हमारे शरीर को स्थिर मानकर ही आसपास की परिस्थितियों या दृश्‍यों का अवलोकण करती है, चाहे हमारा शरीर गतिशील ही क्‍यूं न हो। हम सडक पर किसी के साथ चल रहे हों और उसकी गति अधिक हो जाए तो हम अपने को पीछे मानने लगते हैं , यह जानते हुए कि हम पीछे नहीं हैं, अपने घर से काफी आगे बढ चुके हैं। विपरीत स्थिति में हम उसे पीछे मानेंगे , इसका अर्थ यह है कि हम अपने शरीर को स्थिर मानते हुए ही आसपास का जायजा लेते हैं। इसलिए तो भौतिक विज्ञान में भी सापेक्षिक गति की अवधारणा है।

किसी भी वस्‍तु की सापेक्षिक गति हमारी इसी सोंच का परिणाम है। इसी प्रकार हम गाडी में बैठे हों तो न सिर्फ पेड पौधों को गतिशील देख आश्‍चर्यित होते हैं , वरन् यह भी कह बैते हैं कि ‘अमुक शहर , अमुक गांव या अमुक मुहल्‍ला आ गया’, जबकि वो शहर , गांव या मुहल्‍लावहां पहले से होता है। इसी नियम के तहत् जब हमें ब्रह्मांड और आकाश में बिखरे अगणित तारों का अध्‍ययन करना होता है , तो हम पृथ्‍वी को स्थिर और आसमान के सभी राशियों और ग्रहों तारों को गतिशील मान लेते हैं , जो अज्ञानता नहीं मानी जा सकती है।



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    astro rashifal in hindi

    कैसा अंतर्विरोध है कि जिस ज्योतिष को लोग अंधविश्वास मानते हैं , उसी ज्योतिष की एक मामूली राशिफल पढने  के लिए आधी आबादी बेचैन भी रहती है , दुनिया भर के पत्र पत्रिकाओं में राशिफल का प्रकाशन और मेरे चिट्ठे पर सर्च इंजिन से ‘राशिफल’ ढूंढते हुए इतने सारे पाठकों का आना इसकी पुष्टि तो अवश्य करता है। परंतु बात यहीं पर ही समाप्त नहीं होती , राशिफल पढने के बाद अधिकांश लोग फिर इसकी बातों को हंसी मजाक में ही लेते हैं।

     इतने सर्च के बावजूद दुनिया भर के लोगों की इस मानसिकता का कोई अर्थ लगा पाना तो सचमुच बडा मुश्किल है।  दुनिया भर के लोगों को 12 भाग में विभाजित कर करोडो लोगों के लिए एक विशेष समयांतराल में एक जैसा भविष्यफल का लिखा जाना तो संदेह उत्पन्न करने के लिए काफी है ही , दूसरी ओर विभिन्न पत्रिकाओं में विभिन्न  पंडितों द्वारा एक ही राशिफल के लोगों के लिए अलग अलग गणना से ही लोगों का राशिफल से विश्वास उठ जाता है।

    गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में

    Astro rashifal in in Hindi & English 

    चंद्र या सूर्य राशिफल पर अधारित भविष्यवाणियों पर मेरा खुद भी विश्वास नहीं , इसलिए मैने जानने के लिए अपने पाठकों के लिए हिंदी में  ‘लग्न  राशिफल’ की शुरूआत की थी , इसे शुरू करने से पहले मैने इसकी वैज्ञानिकता के पक्ष में कुछ तर्क भी इस आलेख दिए थे।  इस भविष्यफल पर बिल्कुल संदेह नहीं किया जा सकता , पर अलग अलग लोगों के लिए इसके स्त‍र में अंतर होता है। इस लग्न राशिफल की चर्चा विभिन्न ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति के आधार पर की जाती है , वे ग्रह सभी लोगों पर प्रभाव डालते हैं , पर विभिन्न लग्नवालों के लिए संदर्भों में भिन्न्ता होती है।   

    अब इससे भी आगे बढ़कर हमारा एप्प किसी व्यक्ति के लग्न,  सूर्य और चंद्र को देखकर नहीं,  बल्कि  जन्मकालीन सभी ग्रहों और गोचर यानि अभी चल रहे ग्रहों में आपस के तालमेल को देखते हुए आपपर उनके पड़ने वाले ऋणात्मक,  धनात्मक या सामान्य ( Positive, Negative & Normal ) प्रभाव की चर्चा करेगा,  उन्हें हर कदम पर गाइड भी करेगा. साल के 365 दिनों में से अधिकांश आपके लिए सामान्य होता है,  पर कभी कभी अधिक धनात्मक या ऋणात्मक होता है,  उनकी सुचना आपको पहले से मिल जाये,  उसके उपाय के बारे में आपको पहले से जानकारी मिल जाये, आपको ( accurate Rashifal ) मिल पाए, इसका हमने इस एप्प को विकसित करने में पूरा प्रयास किया है।

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    ज्योतिष का सबसे रोचक विषय रहा है। पृथ्‍वी को केन्‍द्र में मानकर पूरे आसमान के 360 डिग्री को जब 12 भागों में विभक्त किया जाता है , तो उससे 30-30 डिग्री की एक राशी निकलती है। इन्हीं राशियों को मेष , वृष , मिथुन ............... मीन कहा जाता है। किसी भी जन्मकुंडली में तीन राशियों को महत्वपूर्ण माना जाता है। पहली वह राशी , जिसमें जातक का सूर्य स्थित हो, वह सूर्य-राशी के रुप में, जिसमें जातक का चंद्र स्थित हो, वह चंद्र-राशी के रुप में तथा जिस राशी का उदय जातक के जन्म के समय पूर्वी क्षितीज मे हो रहा हो , वह लग्न-राशी के रुप में महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक महीने तक जन्‍म लेनेवाले सभी व्‍यक्ति एक सूर्य राशि के अंतर्गत आते हैं , जबकि ढाई दिन तक जन्‍म लेनेवाले एक चंद्रराशि के अंतर्गत। आजतक 'आज का राशि भविष्य' बतलाने में चंद्र राशि का आधार लिया जाता रहा है।

    Daily rashifal in Hindi

    बाजार में लगभग सभी पत्रिकाओं में राशी-फल की चर्चा रहती है, कुछ पत्रिकाओं में सूर्य-राशी के रुप में  तथा कुछ में चंद्र-राशी के रुप में उल्लेख रहता है , किन्तु ये पूर्णतया अवैज्ञानिक होती हैं और व्यर्थ ही उसके जाल में लाखों लोग फंसे होते हैं। इसकी जगह लग्न-राशी से निकालने से पाठकों को अत्यधिक लाभ पहुंच सकता है , क्योंकि जन्मसमय में लगभग दो घंटे का भी अंतर हो तो दो व्यक्ति के लग्न में परिवर्तन हो जाता है, जबकि चंद्रराशी के अंतर्गत ढाई दिन के अंदर तथा सूर्य राशी के अंतर्गत एक महीनें के अंदर जन्मलेनेवाले सभी व्यक्ति एक ही राशी में आ जाते हैं। लेकिन चूंकि पाठकों को अपने लग्न की जानकारी नहीं होती है, और उनके पूछने पर कि ज्योतिषी लग्नफल की जगह राशी-फल निकालकर जनसाधारण के लिए सर्वसुलभ तो कर देते हें , पर इससे ज्योतिष की वैज्ञानिकता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।

    ' Aaj ka rashi bhavishya batao' इस प्रश्न का उत्तर किसी व्यक्ति के लग्न के आधार पर सटीक रुप सकता है , किन्तु इसकी तीव्रता में विभिन्न व्यक्ति के लिए अंतर हो सकता है। किसी विशेष महीनें का लिखा गया लग्न-फल उस लग्न के करोड़ों लोगों के लिए वैसा ही फल देगा , भले ही उसमें स्तर , वातावरण , परिस्थिति और उसके जन्मकालीन ग्रहों के सापेक्ष कुछ अंतर हो। जैसे किसी विशेष समय में 'आज का राशि भविष्य' किसी लग्न के लिए लाभ एक मजदूर को 25-50 रुपए का और एक व्यवसायी को लाखों का लाभ दे सकता है। इस प्रकार की भविष्यवाणी `गत्यात्मक गोचर प्रणाली´ के आधार पर की जा सकती है।

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    इससे भी आगे बढ़ते हुए गत्यात्मक ज्योतिष ने जन्मकालीन सभी ग्रहों और अभी आसमान में चल रहे ग्रहों के बीच तालमेल को देखते हुए आपके लिए दैनिक और वार्षिक भविष्यफल की व्यवस्था गत्यात्मक ज्योतिष एप्प के माध्यम से की है।  आप अपने  फ़ोन के प्लेस्टोर में जाएँ, सर्च बॉक्स में 'Gatyatmak Jyotish' टाइप करें।  आपको ऊपर जैसे आइकॉन का एक एप्प मिलेगा।  आप इसे इनस्टॉल करें, SignUp करें, पुरे वर्ष के आपके जीवन के विभिन्न मामलों का और प्रतिदिन का एक्यूरेट भविष्यफल आपको मिलेगा। दिसंबर तक के लिए यह सुविधा बिलकुल फ्री है।  जनवरी २०२१ के बाद ही आपको पेमेंट करने की आवश्यकता होगी। 

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      पहले जन्म या फिर भाग्य

       

      luck meaning in hindi

      गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार पहले जन्म या फिर भाग्य 

      पहले अंडा या मुर्गी , ये फैसला तो आज तक न हो सका है और न हो पाएगा , पर इसी तर्ज पर कुछ दिनों से एक महत्‍वपूर्ण विषय पर मैं चिंतन कर रही थी , जन्‍म के आधार पर भाग्‍य निश्चित होता है या भाग्‍य के निश्चित होने पर जन्‍म की तिथि निश्चित होती है। संयोग से उसी आसपास पापाजी भी बोकारो पहुंच गए , हमेशा की तरह ही इस बार भी मेरे प्रश्‍नों की झडी तैयार थी। 

      वर्षों के अनुभव और चार दिनों तक हुई गंभीर बहस के बाद हमलोग इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे कि बच्‍चे का स्‍वभाव और उसकी जीवन यात्रा पहले से तय होती है , उसी के अनुसार उसके जन्‍म लेने का समय तय होता है। दरअसल गर्भावस्‍था के दौरान ही बच्‍चे की मां और बच्‍चे की परिस्थितियों और जन्‍म के पश्‍चात बनने वाली बच्‍चे की जन्‍मकुंडलियों में समानता को देखते हुए हमने ऐसा समझा। 

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      अभी तक ज्‍योतिष शास्‍त्र ये मानता आया है कि भूण के बनने के हिसाब से बच्‍चों का भाग्‍य निश्चित नहीं होता , जन्‍म के बाद बच्‍चे जो प्रथम श्‍वास ग्रहण करते हैं, उसी वक्‍त ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों का प्रभाव किसी बच्‍चे पर  पडता है , जिससे उसका स्‍वभाव और उसकी जीवनयात्रा निश्चित होती है , जिसे जन्‍मकुंडली में देखा जा सकता है। इस आधार पर बालारिष्‍ट रोगों का कारक ग्रह चंद्रमा यदि जन्‍म के वक्‍त कमजोर हो , तो जन्‍म के बाद बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य में गडबडी आती है। पर अध्‍ययन के क्रम में कई कुंडलियों में हमने पाया कि जन्‍म के वक्‍त रहनेवाले कमजोर चंद्रमा के कारण या तो घर की आर्थिक स्थिति गडबड थी या माता पिता के द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही हुई , जिसके कारण गर्भावस्‍था के दौरान ही कई बच्‍चों  के शा‍रीरिक विकास में बाधा उपस्थित हुई थी ।

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       ऐसा महसूस करने पर हमलोगों ने खास विशेषतावाले 100 बच्‍चों की माताओं से बात चीत की। जन्‍मकुंडली के हिसाब से बच्‍चों के जिन जिन पक्षों को मजबूत होना चाहिए था , वे उनकी गर्भावस्‍था के दौरान उनकी माताओं के द्वारा महसूस किए गए। गर्भावस्‍था के दौरान लगभग सभी महिलाओं ने अपने व्‍यवहार में ये विशेषताएं पायी थी , जो उनके बच्‍चों में बाद में देखने को मिली। हमारे ग्रंथों में माता के व्‍यवहार का बच्‍चों पर प्रभाव के बारे में चर्चा है , पर हमने महसूस किया कि अलग अलग बच्‍चें के स्‍वभाव के हिसाब से माता के व्‍यवहार या स्‍वास्‍थ्‍य या मानसिक क्रियाकलापों में अंतर देखने को मिला। पर हमलोग इस प्रकार के रिसर्च के बिल्‍कुल प्रारंभिक दौर में थे , इसलिए इस निष्‍कर्ष को लेकर दावा नहीं कर सकते थे , चिंतन अवश्‍य बना हुआ था , पर यह भ्रम था या हकीकत , समझ में नहीं आ रहा था।

      पर यह भ्रम पिछले शनिवार यानि 23 अक्‍तूबर को हकीकत में बदल गया। घटना यह हुई कि कुछ दिन पहले ही बोकारो से मेरी एक महिला मित्र अपनी गर्भवती पुत्री के पास दिन पूरे होने के लगभग दिल्‍ली पहुंच गई थी। उसकी पुत्री एक दिन पहले से ही अस्‍पताल में भर्ती थी , इसकी खबर लगते ही मैने दो बजे आसपास उनसे बात की। वो काफी घबडायी हुई थी , बिटिया को पांच घंटे पूर्व ही लेबर रूम ले जाया गया था , पूरे परिवार के लोग जमा थे और अंदर से कोई खबर भी नहीं आ रही थी। जब भी भविष्‍य अनिश्चित सा लगता है , मुझसे लोग भविष्‍य के बारे में जानना चाहते हैं। माता पिता जानना चाह रहे थे कि इसमें कितनी देर हो सकती है।

      गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में

      फोन रखने के बाद मैने पंचांग निकाला , पूर्णमासी का दिन था और साढे पांच बजे से साढे सात बजे के मध्‍य चांद पूर्वी दिशा में उदय होने वाला था। उस वक्‍त बच्‍चे का जन्‍म हो , तो जन्‍मकुंडली में लग्‍नचंदा योग बनेगा , इस योग के बारे में कहा जाता है कि इसमें जन्‍म लेने वाला बच्‍चा पूरे परिवार का लाडला और प्‍यारा होता है। लग्‍नचंदा योग यदि पूर्णिमा के दिन बनें , तो इसकी बात ही अलग होती है। वैसे तो अपने माता पिता के लिए हर बच्‍चा प्‍यारा ही होता है , पर जिस बच्‍चे का जन्‍म होनेवाला था , वह दादाजी और नानाजी दोनो के घर का पहला बच्‍चा था , उसके अतिरिक्‍त लाड प्‍यार में कोई संशय नहीं था। मेरे मन से सारा भ्रम हट गया , इस बच्‍चे का जन्‍म साढे पांच से साढे सात के मध्‍य लग्‍नचंदा योग में ही हो सकता है , यही वजह है कि लेबर रूम में इतनी देर हो रही है।

      मेरा ध्‍यान दिल्‍ली की ओर ही लगा रहा , सात बजे सूचना मिली कि पंद्रह मिनट पहले बच्‍चे का जन्‍म हो चुका है , जच्‍चा और बच्‍चा दोनो ही स्‍वस्‍थ हैं , बच्‍चे का वजन 4 किलो है। मतलब एक निश्चित समय पर बच्‍चे का जन्‍म लेना तय था , और उसी ग्रहस्थिति के हिसाब से उसका पूरा विकास हो चुका था। 

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        मनीषा की मौत पर

         

        निर्भया या दामिनी की मौत पर लिखी गयी पोस्ट, मनीषा की मौत पर आज भी प्रासंगिक है !

        पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष का स्‍वागत करने के , व्‍यतीत किए गए वर्ष का मूल्‍यांकण करने और नए वर्ष के लिए अपने कार्यक्रम बनाने यानि हर व्‍यक्ति के लिए महत्‍वपूर्ण दिसंबर के उत्‍तरार्द्ध और जनवरी के पूवार्द्ध में पड रही कडाके की ठंड के मध्‍य देश एक अलग ही आग में जल रहा है । एक दुष्‍कर्म के एवज में अपराधियों को फांसी मिलने की मांग पर जनता अटल है , और सरकार अपनी जिद पर । 

        वैसे बहुत खुशी की बात है कि 23 वर्षीया बच्‍ची दामिनी को इंसाफ दिलाने के लिए सारा देश एक साथ उठ खडा हुआ है। वैसे ऐसी घटना कोई पहली बार हमारे देश में नहीं हुर्इ है , प्रतिदिन अखबारों में ऐसी घटनाएं नजर में आ ही जाती हैं , शारिरीक और भावनात्‍मक तौर पर कमजोर होने का फायदा कभी कोई उठा ही लेता है। 

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        पुराने जमाने में तो बच्चियां अभिभावकों के आसपास उनकी देख रेख में रहा करती थी । पर आज युग बदल चुका है , बचे भी तो वे कैसे ? शिक्षा दीक्षा काम काज सब उनके लिए भी आवश्‍यक है , पहले की महिलाओं की तरह चादर बुरके में घर आंगन में कैद तो नहीं रह सकती। हजारों महिलाएं अपने साथ हो रहे अन्‍याय को आज भी बेबसी से देख रही हैं।

        इसका मुख्‍य कारण यह है कि हमारे समाज में आजतक ऐसी व्‍यवस्‍था है कि इस मामले में शिकारी को नहीं शिकार को ही सजा दी जाती है। यही कारण है कि आजतक लडकियों की जीवनशैली को इस कदर बनाया जाता रहा कि वे किसी के शिकार होने से बचे। 

        यदि कभी किसी खास परिस्थिति में उनके साथ कोई हादसा हो भी गया तो इस बात को पचाना लडकियों या उसके परिवार वालों की मजबूरी होती है। दुनिया भर में प्रत्‍येक समाज और राष्‍ट्र में अपराध के हिसाब से दिया दोषी को दंड दिए जाने का नियम है। पर हमारे यहां आजतक ऐसे अपराध करने वाले समाज में सर उठाकर घूमते हैं। पर तरह तरह के सवालों , तानों से मासूम लडकियों का जीवन बेकार हो जाता है । 

        इसलिए आजतक प्रत्‍येक गांव शहरों में ऐसे मुद्दों को अभिभावकों द्वारा ढंककर ही रखा जाता है। यहां तक कि ऐसी अपराधों की जानकारी बच्चियों या घर की महिलाओं तक ही सीमित रह जाती है , घर के पुरूषों तक को ऐसे अपराधों का पता नहीं चल पाता।  बच्चियों  , उनके अभिभावकों की चुप्पियों का बलात्‍कारी नाजायज फायदा उठा रहे हैं।

        गिने चुने मामलों में ही ऐसी बातें सार्वजनिक होती है , जब घरवालों के नहीं, बाहरवालों के नजर में ऐसी घटनाएं आ जाती हैं। इस वक्‍त भी घरवालों के द्वारा नहीं , बाहरी लोगों के नजर में आ जाने से ही बलात्‍कारियों के विरूद्ध ऐसी आवाज उठी है , लाखों दामिनियां अभी भी सबकुछ झेलती जा रही हैं। 

        खैर दामिनी अब नहीं रही , इसलिए उसकी जिंदगी के बेकार होने का खतरा तो नहीं है । पर समाज को अपनी सोंच बदलने की आवश्‍यकता है , किसी निर्दोष को दोषी ठहराना कदापि उचित नहीं , यही अपराधियों की संख्‍या के बढने की मुख्‍य वजह है।

        यदि म को यह विश्‍वास होता कि उनके साथ हुए हादसे के प्रति समाज संवेदनशील रहेगा , उसकी मदद करेगा , तो ऐसे अपराध नहीं बढते , इसलिए किसी तरह के आंदोलन से पहले समाज के लोगों को अपनी मानसिकता बदलने की आवश्‍यकता है। 

        समाज में ऐसी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए कि अपराधी को अपना चेहरा छुपाना पडे , न कि उनके द्वारा सतायी गयी शारीरिक मानसिक तौर पर परेशान युवतियों को। उन्‍हें ससम्‍मान जीने का हक चाहिए , बिना भेदभाव के नौकरी और शादी विवाह के अवसर मिले। तभी ऐसे अपराधों में कमी हो पाएगी और दामिनी को न्याय मिल पायेगा ! 

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