खगोलशास्‍त्री भास्‍कराचार्य और पुत्री लीलावती

 

खगोलशास्‍त्री भास्‍कराचार्य और पुत्री लीलावती

ब्‍यूटी पार्लर आरंभ करने जा रही मेरी भांजी ने शायद पंडित या ज्‍योतिषी को भगवान ही समझ लिया , तभी तो उसने अपनी दुकान खोलने के लिए मुझे एक ऐसा मुहूर्त्‍त देखने को कहा , जिसमें खोलने पर उसकी दुकान में घाटे का कोई सवाल ही नहीं हो। ज्‍योतिष की सहायता से कोई दुकान खोलने या न खोलने या देर सवेर करने की सलाह दी जा सकती है , पर शकुन और मुहूर्त्‍त पर तो गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष बिल्‍कुल विश्‍वास नहीं करता , कई दिन पूर्व इसपर पापा जी के द्वारा एक पोस्‍ट भी किया जा चुका है , मुझे इस सोंच पर अचंभा हुआ।


उसने मुझे ही समझाते हुए कहा कि उसके शहर में एक पंडित है , जो ऐसा मुहूर्त्‍त निकाल‍कर देते हैं , जिससे आपके फर्म में घाटे की कोई गुंजाइश नहीं। पढे लिखे लोग भी कभी कभी ऐसे भ्रम में कैसे पड जाते हैं , जो अव्‍यवहारिक हो। ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव के रहस्‍य को हम ढूंढ भी लें , किसी के भाग्‍य को समझने में सफलता भी प्राप्‍त कर लें , पर इसे बदलने में सफलता प्राप्‍त करना संभव है भला ? इसी संदर्भ में मुझे विद्वान भास्‍कराचार्य और उनकी पुत्री लीलावती की कथा याद आ गयी , जिसे मैने उसे भी समझाया और आज आपको सुनाने जा रही हूं ...

Bhaskaracharya


भास्कराचार्य प्राचीन भारत के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री थे। उनका जन्‍म और पालन पोषण ही एक ऐसे घर में हुआ था , जहां स लोग ज्‍योतिषी थे। इनका जन्म 1114 ई0 में हुआ था। भास्कराचार्य उज्जैन में स्थित वेधशाला के प्रमुख थे. यह वेधशाला प्राचीन भारत में गणित और खगोल शास्त्र का अग्रणी केंद्र था। लीलावती भास्कराचार्य की पुत्री का नाम था। जब लीलावती का जन्‍म हुआ , तो उसकी जन्‍मकुंडली देखकर या उसके जन्‍म के समय आसमान में ग्रहों की खास स्थिति देखकर भास्‍कराचार्य परेशान हो गए।

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उसकी कुंडली में वैधब्‍य योग था, वह योग बडा प्रबल था और उसके घटित होने की शत प्रतिशत संभावना थी। वे दिन रात किसी ऐसे उपाय की सोंच में थे जिससे कि उसके वैधब्‍य योग को काटा जा सके। देखते ही देखते लीलावती सयानी हो गयी , विवाह योग्‍य होने पर उसका विवाह आवश्‍यक था , पर पिता उसके विधवा रूप की कल्‍पना कर ही कांप जाते। अंत में चिंतन मनन कर उन्‍होने एक उपाय निकाल ही लिया।


उस वर्ष विवाह का एक ऐसा विशेष मुहूर्त्‍त आने वाला था , जहां किसी भी कन्‍या का विवाह किए जाने से उसके अखंड सौभाग्‍यवती रहने की संभावना थी।भास्‍कराचार्य ने उसी मुहूर्त्‍त में लीलावती का ब्‍याह करने का निश्‍चय किया। मुहूर्त्‍त देखने के लिए उस समय घडी तो होती नहीं थी , आकाश में ग्र्रहों नक्षत्रों की स्थिति से ही समय का आकलन किया जाता था । ब्‍याह की पूरी तैयारी की गयी , लेकिन ऐन मौके पर कोई अति आवश्‍यक कार्य निकल आया। भास्‍कराचार्य के पास हर क्षण का हिसाब किताब हुआ करता था , पर उनके जाने से शुभ मुहूर्त्‍त में ब्‍याह होना मुश्किल था।

इसलिए काम पर जाने से पहले उन्‍होने एक यंत्र बनाया , एक बरतन में अपनी गणना के अनुसार जल डाला और उसके प्रवाह के लिए एक छिद्र बनाया। उस बरतन के पूरे जल के बह जाने के तुरंत बाद उस विवाह योग को शुरू होना था , परिवार के सब लोगों को समझाकर वे अपने काम पर चल पडें। पर बरतन के ढक्‍कन को उठाकर बार बार जल के स्‍तर को देखने के क्रम में लीलावती के गले के माले का एक मोती या कुछ और बरतन में गिर पडा और उससे जल का प्रवाह रूक गया। जल के प्रवाह में रूकावट आने से जल पूरा बह न सका और देखते ही देखते विवाह का मुहूर्त्‍त निकल गया। पिता के लौटने तक तो बहुत देर हो चुकी थी , मजबूरन किसी और मुहूर्त्‍त मे उसका विवाह करवाना पडा।


इस कहानी से सीख मिलती है कि सचमुच प्रकृति के नियमों को कोई नहीं बदल सकता। फिर वहीं हुआ , जो लीलावती की जन्‍मकुंडली में लिखा था, विवाह के एक वर्ष के अंदर ही उसके पति की मृत्‍यु हो गयी। लीलावती को अपने पिताजी के ज्ञान पर और ज्‍योतिष पर विश्‍वास होना ही था। वह पिता के साथ ही गणित और ज्‍योतिष के अध्‍ययन में जुट गयी। लीलावती के प्रश्‍नों का जबाब देने के क्रम में ही "सिद्धान्त शिरोमणि" नामक एक विशाल ग्रन्थ लिखा गया , जिसके चार भाग हैं (१) लीलावती (२) बीजगणित (३) ग्रह गणिताध्याय और (४) गोलाध्याय।

 ‘लीलावती’ में बड़े ही सरल और काव्यात्मक तरीके से गणित और खगोल शास्त्र के सूत्रों को समझाया गया है। यहां तक कि आजकल हम कहते हैं कि न्यूटन ने ही सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण की खोज की, परन्तु उसके 550 वर्ष पूर्व भास्कराचार्य ने पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को विस्तार में समझा दिया था।

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    🏡 Fourth House Astrology in Hindi | चतुर्थ भाव से सुख‑शांति का रहस्य 🌙✨

     

    🏡 Fourth House Astrology in Hindi | चतुर्थ भाव से सुख‑शांति का रहस्य 🌙✨ 


    भूमिका: चतुर्थ भाव क्या दर्शाता है?

    ज्योतिष में जन्मकुंडली के 12 भाव मानव जीवन के 12 महत्वपूर्ण पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें चतुर्थ भाव (Fourth House in Astrology) को जीवन का सुख‑केन्द्र माना गया है। यह भाव माता, मातृभूमि, घर, भूमि, चल‑अचल संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति और आंतरिक स्थायित्व से संबंधित होता है।

    इसी कारण प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने चतुर्थ भाव को व्यक्ति के आंतरिक संतुलन और जीवन में टिकाव का प्रमुख संकेतक माना।

    पारंपरिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव का महत्व 

    फलित ज्योतिष के अनुसार चतुर्थ भाव से निम्न विषयों का विचार किया जाता है:

    • माता और मातृसुख

    • घर, मकान और निवास

    • भूमि, खेत, फैक्ट्री, अचल संपत्ति

    • वाहन और सुविधा साधन

    • सुख प्रदान करने वाली छोटी बड़ी वस्तुएँ 

    • मानसिक शांति और स्थायित्व

    इसी आधार पर योगकारक ग्रहों का विज्ञान ग्रंथ में चतुर्थ भाव के स्वामी या इसमें स्थित ग्रहों को +2 अंक प्रदान किए गए हैं।

     गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि से चतुर्थ भाव 

    गत्यात्मक ज्योतिष मानता है कि किसी भाव का वास्तविक फल केवल योगकारकता से नहीं, बल्कि उसकी गत्यात्मक (Dynamic) और स्थैतिक (Static) शक्ति से निर्धारित होता है।

    यदि चतुर्थ भाव में स्थित ग्रह:

    • ऊर्जावान और संतुलित हों → जातक को स्थायी सुख, मानसिक शांति और सुरक्षित वातावरण मिलता है।

    • कमजोर या बाधित हों → घर, माता या संपत्ति होते हुए भी असंतोष और तनाव बना रहता है।

    ❌ परिमाणात्मक भविष्यवाणी क्यों संभव नहीं? 

    फलित ज्योतिष के द्वारा यह बताना संभव नहीं है कि:

    • मकान कितने मंज़िला होंगे

    • माता का रंग‑रूप या कद‑काठी कैसी होगी

    • वाहन कौन‑सा होगा (कार, ट्रैक्टर या बैलगाड़ी)

    • भूमि या संपत्ति किस स्थान की होगी

    क्योंकि ये सभी बातें युग, समाज, अर्थव्यवस्था और परिवारिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करती हैं, न कि केवल ग्रहों पर।

    🧠 गुणात्मक दृष्टिकोण: 

    स्थायित्व ही असली सुख चतुर्थ भाव का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है — स्थायित्व (Stability)।

    इतिहास पर दृष्टि डालें:

    • किसी युग में गुफा ही सबसे सुखद घर थी

    • कुछ जातियाँ ऋतु के अनुसार स्थान बदलने को विवश थीं

    • आज पक्का मकान भी कभी‑कभी तनाव का कारण बन जाता है

    • इसलिए सुख का अर्थ संसाधनों की संख्या नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली मानसिक शांति है।

    माता और चतुर्थ भाव का संबंध 

    माता से संबंध अच्छे हों तो जीवन में स्वाभाविक सुख‑शांति बनी रहती है।

    गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार:

    • जैविक माता होते हुए भी विचारों का टकराव कष्ट दे सकता है

    • सौतेली माता भी प्रेम और सुरक्षा दे सकती है

    इसलिए ज्योतिष माता के रूप नहीं, बल्कि मातृसुख की अनुभूति को मापता है।

    संपत्ति और वाहन: सुविधा या बोझ? 

    एक किसान के लिए बैलगाड़ी सुखद है, जबकि शहर में वही असुविधा बन सकती है। इसी प्रकार:

    • महँगी कार भी खर्च और तनाव बढ़ा सकती है

    • छोटा घर भी संतोष दे सकता है

    चतुर्थ भाव यह बताता है कि आपकी संपत्ति सहयोगी है या तनावकारी।

    समाज में स्तर और समय‑अंतराल

     फलित ज्योतिष द्वारा यह जाना जा सकता है कि:

    • संपत्ति से समाज में आपका क्या स्तर है

    • किस आयु में सुख बढ़ेगा या घटेगा

    • संपत्ति से जुड़े विषय कब अनुकूल या प्रतिकूल होंगे

    यह सब गत्यात्मक दशा‑काल के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है।

    ज्योतिष: एक सांकेतिक विज्ञान 

    ज्योतिष को यदि शाब्दिक रूप से लिया जाए तो भ्रम होता है।

    उदाहरण:

    • प्राचीन काल में मजबूत वाहन = हाथी, घोड़ा

    • आधुनिक युग में मजबूत वाहन  = बाइक, कार, ट्रैक्टर

    अमेरिका में काफी दिनों से लगभग हर व्यक्ति के पास वाहन है, अब भारतवर्ष में भी सबसे पास है । क्या सबका जन्म एक ही लग्न में हुआ? नहीं। यही प्रमाण है कि ज्योतिष संकेत देता है, वस्तु नहीं।

    निष्कर्ष 

    कुंडली का चौथा भाव  केवल मकान और वाहन की बात नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि जीवन में आप कितने स्थिर और मानसिक रूप से संतुलित हैं। गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार चतुर्थ भाव को समझना, वास्तविक सुख‑शांति को समझना है।

    ❓ FAQs – Google People Also Ask 

    Q1. चतुर्थ भाव किसका कारक है? 

    माता, घर, भूमि, वाहन, सुख‑शांति और मानसिक स्थायित्व।

    Q2. क्या चतुर्थ भाव कमजोर हो तो घर नहीं मिलता? 

    घर मिल सकता है, लेकिन संतोष और स्थायित्व की कमी रह सकती है।

    Q3. चतुर्थ भाव से माता का सुख कैसे देखें?

     चतुर्थ भाव की गत्यात्मक शक्ति और उसके स्वामी से मातृसुख देखा जाता है।

    Q4. क्या संपत्ति का समय बताया जा सकता है? 

    हाँ, गत्यात्मक दशा‑पद्धति से संपत्ति संबंधी समय‑अंतराल जाना जा सकता है।


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      ज्योतिष : पढ़ाई के बारे में

       

      क्या कहता है ज्योतिष : पढ़ाई के बारे में

      Education astrology in hindi   

      ज्योतिष में कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं। पढ़ाई और ज्योतिष फलित ज्योतिष मानव जीवन के पॉचवें पक्ष के रुप में बुद्धि, ज्ञान और संतान की चर्चा करता है, जिसके कारण प्रकृति में सभी पशुओं से मनुष्य का जीवन अलग है । यहाँ तक कि दो मनुष्यों के जीवन में अंतर लानेवाला यही भाव है। 

      यही कारण है कि योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक लेख में पांचवें भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को +6 अंक दिए गए हैं। लेकिन योगकारकता के हिसाब से अधिक ही सही पर गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी कमजोर या महत्वपूर्ण हो सकता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने ज्योतिष गणित सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 

      padhai ke bare me

      Ladka hoga ya ladki jyotish

      किन्तु इसके अंतर्गत किसी जातक को प्राप्त होने वाले ज्ञान या संतान पक्ष की व्याख्या नहीं की जा सकती। कोई व्यक्ति किस तरह के गुणों से युक्त है ? वह कितनी डिग्रियाँ प्राप्त कर चुका है ? वह किस क्षेत्र का विशेषज्ञ है ? उसके कितनी संताने हैं ? कितने लड़के या कितनी लड़कियॉ हैं ? संतान को कितनी डिग्रियाँ प्राप्त हो चुकी हैं ? संतान विवाहित हैं या अविवाहित ? इन सब प्रश्नो का जवाब कदापि नहीं दिया जा सकता, जिसका कारण स्पष्ट है। इसलिए यह पढ़ाई के बारे में कुछ भी नहीं बता सकता।

      विकसित प्रदेशों या परिवारों में जहॉ बच्चे स्कूली पढ़ाई करते हैं, अविकसित प्रदेशों या परिवारों के बच्चे अभी भी परंपरागत शिक्षाएं ही ले रहे होते हैं, जबकि दोनो तरह के बच्चों की जन्मकुंडली एक सी हो सकती हैं। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सामान्य परिवार के बच्चे किसी प्रकार की नौकरी या व्यवसाय में संलग्न होते हैं, जबकि अच्छे परिवार के बच्चे उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर निकलते हैं। इस तरह युवावस्था में प्रवेश करते ही अपने-अपने परिवार के स्तर के हिसाब से ही सभी जातक रोजगार में संलग्न हो जाते हैं । 

      padhai ke bare me

      पढ़ाई के बारे में जानकारी 

      ज्योतिष के अनुसार पढ़ाई के बारे में रोचक तथ्य - वैसा ही पुन: उनके बच्चों के साथ भी होता है ? क्या वास्तव में जन्मकुंडली के हिसाब से ही उनका जन्म वैसे परिवारों में होता है ? नहीं । इसलिए किसी भी व्यक्ति की जन्मकुंडली से उसके क्षेत्र या उससे संबंधित डिग्री प्राप्त करने के बारे में कुछ नहीं बतलाया जा सकता। आज प्रोफेशनल डिग्रियों के बिना मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पद प्राप्त नहीं किया जा सकता है, जो कि उच्चस्तरीय परिवारों के बच्चों को आराम से मिल जा रही है। क्या निम्न स्तर के परिवार के एक प्रतिशत बच्चे का जन्म उस अवधि में नहीं होता है, जो इन्हें इन डिग्रियों से युक्त करे ?

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       किन्तु बुद्धि, ज्ञान या संतान से संबंधित कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी भी परिस्थिति या परिवेश की मुहंताज नहीं, ये बातें हैं, जातक की आई क्यू या ध्यान संकेन्द्रण से संबंधित। हम अकसरहा किसी व्यक्ति के प्रकृतिप्रदत्त बुद्धि या प्रतिभा की बातें करते हैं, इसका पता जन्मकुंडली देखकर लगाया जा सकता है। कोई व्यक्ति बुद्धिमान है या नहीं ? उसमें सीखने की प्रवृत्ति है या नहीं ? अपनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा है या नहीं ? किसी ज्ञान को सीखने में वह आनंद का अनुभव करता है या कष्ट का ? अपने ज्ञान को प्राप्त करने में या संतान पक्ष के मामलों में उसका ध्यान संकेंद्रित है या नहीं ? अपने बुद्धि, ज्ञान या संतान पक्ष से संबंधित मामलों में वह कितना महत्वाकांक्षी है ? उसे ज्ञानप्राप्ति में सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं या और बाधाएं आ रही हैं ? 

      पढ़ाई और ज्योतिष

      इन सबकी चर्चा जन्मकुंडली देखकर की जा सकती है। ये बात अलग है कि बुद्धि और आई क्यू की मजबूती के बावजूद कोई गरीब परिवार का बच्चा उतनी उंचाई हासिल न कर सके, जितना कि औसत दर्जे के बुिद्ध और आई क्यू से युक्त अमीर परिवार का बच्चा।में पहले भी एक लेख में बता चुकी हूँ कि किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है, ताकि वे बड़े होकर परिवार की आमदनी बढ़ाएं, किन्तु एक ऑफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू को बढ़ाएगा। किसी जन्मपत्र में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी, बड़े व्यवसायी के लिए ऐयाश और एक ऑफिसर के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा। पढ़ाई के लिए मंत्र  है , मेहनत करके ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है।

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        व्हाट्सप्प के लिए एस्ट्रोलॉजी स्टेटस

         

        Astrology status for WhatsApp in Hindi

        गत्यात्मक ज्योतिष के विकास के बाद ज्योतिष शास्त्र के बारे में निम्न बातें कही जा सकती हैं , ये एस्ट्रोलॉजी कोट्स हमारे द्वारा ही लिखे गए हैं। :------

        Astrology status for WhatsApp in Hindi


        • भगवान दरअसल ब्रह्मांडीय महाशक्ति है, जिसे ज्योतिष शास्त्र के द्वारा ही समझा जा सकता है। 
        • जिस समय कल्प , व्याकरण , छन्द , निरुक्त आदि महज कुछ ही विधा थी , फलित ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता था।
        • लोगों को भविष्य को लेकर दिलचस्पी बनी रहती है, इसलिए भविष्य के विश्लेषण की अनेक विधियां प्रचलित हैं , पर एस्ट्रोलॉजी, यानि ज्योतिष, भविष्य को समझने की सबसे सटीक और वैज्ञानिक विधि है। 
        • सभी विधाएं भूतकाल और वर्तमान काल की जानकारी दे सकती है , भविष्य की सटीक जानकारी के लिए एकमात्र विधा फलित ज्योतिष ही है ।
        • पृथ्वी से ग्रह की दूरी के बदलने से गति में बदलाव आता है और गति के बदलने से विद्युत-चुम्बकीय परिवेश में स्वतः ही बदलाव आता है।
        • भौतिक विज्ञान में उल्लिखित सभी प्रकार की शक्तियां ही वस्तुतः ग्रहों की शक्तियां हैं।
        • हर व्यक्ति बदले हुए कोण से ब्रह्म की प्रतिछाया या प्रतीक है। ग्रह इस शरीर में ब्रह्म में ग्रंथि के रुप में होते हैं। वे समय-समय पर अपना फल प्रस्तुत करते हैं।
        • हमें जन्म के बाद और जीवनपर्यंत जिन परिस्थितियों का सामना करना पडता है , वह हमारा प्रारब्ध है , पर हम अपने सोंच , अपनी मेहनत और अपने क्रियाकलापों के द्वारा जो प्राप्त करते हैं , वह परिणाम होता है।
        • लोग समझते हैं कि ज्‍योतिष लोगों को काम न करने और आलसी बनने की सलाह देता है, जबकि सत्‍य यह है कि ज्‍योतिष हमें सही दिशा में काम करने की सलाह देता है !
        • जिस तरह एक बीज की बनावट को समझने के बाद उसकी खेती ओर उसका उपयोग करने में आपको आसानी होती है, उसी तरह अपनी और अपने बच्‍चों की जीवनशैली को समझने से आपको भविष्‍य के लिए कार्यक्रम बनाने में आसानी होती है !
        • कोई ज्‍योतिषी ठगी का काम करता हे तो उसमें ज्‍योतिष शास्‍त्र का क्‍या दोष? ठीक उसी तरह जैसे कोई डॉक्‍टर पैसे कमाने के लिए किसी की किडनी निकाल ले तो उसमें मेडिकल साइंस का क्‍या दोष ?
        • जन्‍मकुंडली की गणना से अपनी या किसी और की मृत्‍यु की भविष्‍यवाणी की तिथि बतला देना उसी प्रकार की अतिशयोक्ति है, जैसा एक डॉक्‍टर के द्वारा अमरत्‍व की दवा खिलाने का दावा हो सकता है। 
        • जन्मकुंडली से भविष्यवाणी करने की विधा को लेकर हंसा जा सकता है, इसलिए नहीं कि यह विज्ञान नहीं ! वरन इसलिए कि हम सभी ज्योतिषियों के मध्य एकता नहीं है !
        • हम सारे मनुष्य देखने में एक समान होते हुए भी अलग अलग प्रकार के बीज हैं , मनुष्य की कुंडली के ग्रहों को देखकर उसकी प्रकृति के बारे में , उसके विकास के बारे में , उसकी जीवन यात्रा के बारे में वैसी ही भविष्यवाणी की जा सकती है।
        • सही कहा गया है कि हमारा सब दांवपेंच हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाती है जब समय हमारे प्रतिकूल हो जाता है ! बडे से बडे दिग्गज भी प्रतिकूल समय में हार मानने लगते हैं !
        • किसी के जन्म कालीन ग्रहों के आधार पर जीवन ग्राफ खीचने की पद्धति विकसित करने वाले हमारे पिताजी का मानना है कि सबके जीवन में धनात्मक और ऋणात्मक समय बारी बारी से आते है ! धनात्मक समय का जितना सार्थक उपयोग किया जाए, ऋणात्मक समय में उतनी कम तकलीफ होगी !
        •  धनात्मक समय का जितना दुरूपयोग किया जाए, ऋणात्मक में मिलने वाली तकलीफ उतनी ही बडी होगी ! ऋणात्मक समय को जितने शांतचित्त से झेला जाए, धनात्मक में उतनी सफलता मिलेगी ! ऋणात्मक समय को बिना झेले अनुभवहीनता में व्यतीत करेंगे तो धनात्मक समय में कैसे सफलता मिलेगी।
        • गत्यात्मक ज्योतिष की घड़ी को जिसने भी समझ लिया, वह अधिक से अधिक काम कर सकता है। उसकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। उसे इस बात की पूरी जानकारी हो जाती है कि किस मौके पर कौन सा काम किया जाना चाहिए।

        • जन्म कालीन ग्रहों की गति और स्थिति से हर व्यक्ति विभिन्न शक्तियों और स्वभाव से संयुक्त है। उसकी कार्यशैली, संसाधन और गंतव्य भिन्न भिन्न हो सकते हैं, किन्तु एक ही सृष्टि होने की वजह से एक दूसरे का पूरक होना उसका सर्वोत्तम उपयोग है।

        अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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          एस्ट्रोलॉजी कोट्स

           

          According to Gatyatmak Jyotish Astrology quotes in Hindi

          गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च के बाद भी इसको पहचान दिलाने में दिक्कत को देखते हुए मन में उपस्थित भावों ने यत्र-तत्र डायरी में ऐसे अभिव्यक्ति की , ये एस्ट्रोलॉजी कोट्स हमारे द्वारा ही लिखे गए हैं। 

          • विडंबना ही है कि जो निरीक्षण, परीक्षण के बाद मिले तथ्‍य को जांचकर किसी बात को विज्ञान मानते है, वही बिना निरीक्षण, परीक्षण और तथ्‍य को जांचे बिना ज्‍योतिष को अंधविश्‍वास कहते हैं!
          • किसी ने कहा कि विज्ञान के जिस नियम को हम समझ नहीं पाते उसे चमत्‍कार कहते हैं, इसमें एक पंक्ति मैं जोडना चाहती हूं कि विज्ञान के जिस नियम को हम नहीं समझ पाते उसे अंधविश्‍वास भी कहते हैं।
          • ज्योतिष विज्ञान और अंधविश्वास के भंवर में फंसा है ! न तो अंधविश्वासी ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को स्वीकार पाते हैं, न वैज्ञानिक विज्ञान में ज्योतिष को समाविष्ट देख सकते हैं !
          Astrology quotes in Hindi
          • जीवन के भी कुछ अजब गजब  रहस्‍य हैं .. कभी कम प्रयास से ही किसी संयोग के कारण हम सफल हो जाते हैं .. कभी अधिक प्रयास के बाद भी किसी दुर्योग के कारण असफल .....
          • दूसरों को सफल नहीं देखने पर हम उनकी मेहनत में ही कोई कमी समझ लेते हैं, पर अपनी बारी आने पर समझ जाते हैं कि कोई शक्ति है ऐसी जो मनुष्‍य को आगे बढने नहीं देती, बल्कि बहुत समय निरंतर पीछे की ओर धकेल देती है !
          • कुछ गणितज्ञ अपने गणित की गति से , कुछ जादूगर अपने जादू से , कुछ तांत्रिक अपने तंत्र मंत्र से, कुछ कर्मकांडी अचूक कर्मकांडों से लोगों को भ्रमित कर ज्योतिष के क्षेत्र में भी अपना सिक्का् चलाना चाहते हैं।

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          • यदि समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को चोरी छुपे ज्‍योतिष की शरण में जाने की  मानसिकता न होती तो आजतक ज्‍योतिष को विज्ञान का दर्जा मिल गया होता ! जल में H2O क्‍यों है इसका कारण बताना नामुमकिन है,पर इसे अलग अलग किया जा सकता है!
          • ‘गत्यात्मक ज्योतिष’ के सूत्र किसी के जन्म कालीन ग्रहों की शक्ति निकालकर उसके जीवन के उतार चढाव का ग्राफ खींच देते हैं, जिसके हिसाब से कभी परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में होती हैं तो कभी हम परिस्थितियों के नियंत्रण में।
          • अच्छे ग्रहों का प्रभाव भी सच्चे लोगों अधिक और बुरे लोगों पर कम पड़ता है.... जबकि बुरे ग्रहों का प्रभाव झूठे लोगों पर अधिक और सच्चे लोगों पर कम पड़ता है...
          • पिछले माह और पिछले जन्म में किए गए कर्मों का फल आप इस महीने के वेतन और भाग्य के रूप में प्राप्त कर रहे हैँ...... पर प्राप्त संसाधन की बदौलत आगे के महीने या अगले जन्म को सार्थक बनाना आपके कर्म निश्चित करते है!

          • जन्म के बाद समय समय पर जीवन के समक्ष आनेवाली अच्छी और बुरी परिस्थितियां हमारा सौभाग्य या दुर्भाग्य है. अच्छी परिस्थितियों का फ़ायदा उठा पाना और बुरी परिस्थितियों से लड़कर निकल जाना हमारा पुरुषार्थ है ..अच्छी परिस्थितियों में निकम्में बने रहना और बुरी परिस्थितियों में भाग्य को कोसना --- दोनों ही आलस है !
          • यह विडंबना ही है कि हर व्‍यक्ति अपनी सफलता के वर्षों को , सफलता के मुद्दों को खुद के कर्म का फल मानता है .... असफलता के वर्षों को , असफलता के मुद्दों को ईश्‍वर के द्वारा दिया जाने वाला दंड ..... यदि सफलता और असफलता दोनो को ईश्‍वर का ही वरदान या दंड मान ले या फिर दोनो को अपने ही कर्म का अच्‍छा और बुरा फल तो कभी न हारे ... उसके हारने की वजह खुद का अहंकार है 
          • केवल नदी में गिरने मात्र से किसी की जान नहीं जाती , बल्कि जान तभी जाती है जब तैरना नहीं आता ..उसी प्रकार परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती , समस्या तभी बनती है जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता .. गत्यात्मक ज्योतिष आपको आने वाली परिस्थितियों से लड़ने का तरीका सिखाता है ......
          • डॉक्टर के पास आप बीमार पडने पर ही नहीं जाते, गर्भ में बच्चे के आने के बाद ही उससे सलाह लेकर काम करना आरंभ कर देते हैं ! कानून की मदद आप झंझट में पडने के बाद नहीं लेते, वरन् होश संभालने के बाद ही कानून का पालन करते हैं ! गुरू के संपर्क में तब नहीं जाते जब आप गुमराह हो जाते हैं, वरन् जीवन की शिक्षा पाने के लिए पहले से गुरू की सलाह लेते हैं ! फिर एक ज्योतिषी के पास जाने के लिए आप बुरे समय का इंतजार क्यों करते हैं?

          अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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