'गत्यात्मक ज्योतिष' की टीम

'गत्यात्मक ज्योतिष' की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य  

एक शोध-पत्र जमा करने में जीवन के कितने वर्ष गुजर जाते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि किसी भी विज्ञान के एक नए स्वरुप को जन्म दे पाने में कितना समय लगा होगा। हर क्षेत्र में हज़ारो-लाखो लोग नियमित काम करते हैं, तब जाकर एक-एक पाठ पूरा होता है। सही जन्म कुंडली गणना के लिए  ‘गत्यात्मक ज्योतिष’ के जनक श्री विद्या सागर महथा जी की ज्योतिषीय यात्रा आसान नहीं रही। ज्योतिष में निहित कमजोरियों को देखने की शुरुआत इन्होने 24 वर्ष की उम्र से ही शुरू कर दी थी। इसे समझने के लिए 12 वर्षों तक ज्योतिष के ग्रंथों का गंभीर अध्ययन किया। 12 वर्ष के बाद इन्होने ज्योतिष की कमियों और इनके सुधार के उपायों पर लिखना शुरू किया। 

पर सही जन्म कुंडली गणनाज्योतिष में सुधार की संभावनाओं पर इनका दिमाग हमेशा चलता रहा और जून 1981 में ईश्वर की विशेष कृपा से ग्रहों की शक्ति-निर्धारण का जो सूत्र उन्हें प्राप्त हुआ, वह ज्योतिष को एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक आधार देने में सक्षम था। पर सिर्फ आधार से ही रातोरात विज्ञान को विकसित नहीं किया जा सकता, नए नए अनुभव जोड़ते जाने थे इसमें। उन्होंने तो अपना पूरा जीवन इसे समर्पित किया ही किया, हम चार भाई बहनों ने भी इस विधा की हर बात समझनी और नए अनुभवों को जोड़ने में कोई कमी नहीं की। आज ज्योतिष के क्षेत्र में काम करते हुए विद्या सागर महथा जी को 55 साल हो गए हैं, संगीता पुरी 35 वर्षों से, अमर ज्योति 25 साल से, शालिनी खन्ना 20 साल से और अशेष कुमार 15 वर्षों से गत्यात्मक ज्योतिष’ को नए नए अनुभवों से समृद्ध कर रहे हैं। इस प्रकार हमारी टीम में ये सदस्य हैं। गत्यात्मक ज्योतिष की पूरी टीम को जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 




सही जन्म कुंडली गणना

विद्या सागर महथा 

ज्योतिष-वाचस्पति , ज्योतिष-रत्न , ज्योतिष-मनीषी , स्वर्ण-पदक विजेता।
ग्रहों के गतिज और स्थैतिज ऊर्जा को निकालने के सूत्र तथा स्वास्थ्य , धन , शिक्षा , दांपत्य-जीवन , सामाजिक-राजनीतिक स्थिति , संपत्ति और स्थायित्व से सम्बंधित धनात्मक/ऋणात्मक समय और उतार-चढ़ाव के जीवन-ग्राफ को प्रतिपादित करने के सूत्र के जनक।
बहुत से ज्योतिषीय पत्रिकाओं तथा कई अप्रकाशित और अप्रकाशित पुस्तकों के लेखक। 
ज्योतिष के महान विद्वान् और समय-विशेषज्ञ 
सही जन्म कुंडली गणना

संगीता पुरी 

गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा , इंटरनेट में 15  वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय , सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान , 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करते हुए एक पुस्तक की लेखिका , २०१६ में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान'  से इन्हे सम्मानित किया गया ।


सही जन्म कुंडली गणना

अमर ज्योति 

गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञ , ज्योतिष काउंसलर , प्रभावशाली ढंग से बुद्धिजीवी और हाई प्रोफाइल लोगों के जीवन-ग्राफ का विश्लेषण करते हुए गोचर को देखते हुए भविष्यवाणी करने में  सफल रहे हैं। 
सही जन्म कुंडली गणना

शालिनी खन्ना 

गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा , धनबाद में दैनिक हिन्दुस्तान पत्र की ज्योतिषीय काउंसलर , प्रसिद्ध समाज-सेविका , कुछ दैनिक और मासिक पत्रों में सटीक भविष्यवाणियां करने वाली अच्छी लेखिका , लाइफ-ग्राफ  पूरा विवरण में सूक्ष्म दृष्टि रखने में सफल। 

अशेष कुमार 

गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञ 

अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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    80 प्रतिशत से अधिक लोग अमला योग में

    Amla yog in Astrology

    'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' प्राचीन ज्‍योतिषीय ग्रंथों में वर्णित सारे योगों के प्रभाव की पुष्टि के लिए संभावनावाद के नियमों का सहारा लेता है। इसकी मान्‍यता है कि कोई भी राजयोग तभी राजयोग माना जा सकता है , ज‍ब कुल जनसंख्‍या के बहुत कम प्रतिशत कूंडली मे उस राजयोग के होने की पुष्टि हो। मैने गणित के संभावनावाद के नियम के अनुसार दुनियाभर के लोगों की जन्‍मकुंडली में गजकेशरी योग के होने की संभावना का आकलन किया था और बताया था कि 4/11 की संभाब्‍यता रखने वाला यह नियम गजकेशरी योग के फलों को देने की सामर्थ्‍य तबतक नहीं रख सकता , जबतक पूरी दुनिया में इतनी समृद्धि न आ जाए , जिससे लगभग 37 प्रतिशत लोग उसके फल को प्राप्‍त करने लायक न हो जाएं। ज्योतिष 

    Amla Yog in Astrology


    उसी योग की पुस्‍तक में दूसरे नंबर पर अमला योग की चर्चा की गयी थी। इस योग की परिभाषा देते हुए लिखा गया है कि लग्‍न से 10वें स्‍थान पर या चंद्रमा जिस राशि पर बैठा हुआ हो , उस राशि से दसवें स्‍थान पर शुभग्रह बैठे हों ,तो जन्‍मकुंडली मे अमला योग बनता है और इस योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति प्रसिद्ध , गुणवान और ख्‍याति प्राप्‍त करनेवाला होता है। ऐसा व्‍यक्ति पूर्ण सुखी जीवन व्‍यतीत करता है और संपूर्ण सुखों को भोगता है। ऐसा व्‍यक्ति चरित्रवान एवं सज्‍जन होता है।

    जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ज्‍योतिष में चंद्र, बुध, शुक्र, केतु और बृस्‍पति ये पांचो शुभग्रह माने जाते हैं। अमला योग के अनुसार इनमें से एक की भी उपस्थिति से मुनंष्‍य सुखी जीवन जी सकता है। लग्‍न से 10वें स्‍थान पर किसी एक शुभ ग्रह की उपस्थिति की संभावना 1/12 होगी, लेकिन इन पांचों में से किसी एक की संभावना 5/12 हो जाएगी। इसी प्रकार चंद्र राशिवाले स्‍थान से भी इन पांचों ग्रहों में से एक के होने की संभावना भी 5/12 होगी। इन दोनो प्रकार की संभावना में से किसी एक संभावना के बनने का चांस 10/12 होगा। इसका अर्थ यह है कि संभावनावाद के नियम के अनुसार कुल जनसंख्‍या का बडा भाग यानि 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्‍या अमला योग में जन्‍म ले सकती है।

    इस आधार पर इस योग की सत्‍यता को तभी स्‍वीकारा जा सकता है, जब पूरे विश्‍व का विकास इतना हो चुका हो कि 80 प्रतिशत से अधिक लोग प्रसिद्ध, गुणवान और ख्‍याति प्राप्‍त करनेवाले और पूर्ण सुखी जीवन व्‍यतीत करनेवाले हों। कम से कम आज के समय में, जब विश्‍व के 90 प्रतिशत से अधिक लोग कष्‍ट में जीवन यापन करने को बाध्‍य हों, इस योग की प्रामाणिकता का कोई तुक नजर नहीं आता।

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      राहु केतु के उपाय

      Rahu ketu ke upay

      जब भी किसी की कुंडली में बुरे ग्रहों के प्रभाव की चर्चा होती है तो मंगल और शनि के साथ ही साथ राहू और केतु का नाम भी आना स्‍वाभाविक होता है। यह अचरज की ही बात है कि मंगल और शनि जैसे भीमकाय ग्रहों और राहू केतु जैसे अस्त्तिवहीन ग्रहों के प्रभाव को परंपरागत ज्‍योतिष एक ही रूप में कैसे देखता आया है ? इस विराट ब्रह्मांड में पृथ्‍वी को स्थिर रखने पर सूर्य का बन रहा काल्‍पनिक पथ और सूर्य की परिक्रमा करता चंद्रमा का पथ दोनो ही राहू और केतु नाम के इन दो संपात विंदूओं पर एक दूसरे को काटते हैं । 

      Rahu ketu ke upay

      गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की माने तो सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दिन सूर्य , पृथ्‍वी और चंद्रमा के साथ ही साथ ये दोनो विंदू भी एक ही सीध में आ जाते हैं। हो सकता है , जब यह खोज नहीं हुई हो कि एक पिंड की छाया दूसरे पर पडने से सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण होता है , तब सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में इन दोनो संपात विंदुओं की ही भूमिका को मान लिया गया हो और इन्‍हें इतना महत्‍वपूर्ण दर्जा दे दिया गया हो।

      पर भौतिक विज्ञान में विद्युत चुंबकीय या गुरूत्‍वाकर्षण या फिर कोई और शक्ति क्‍यों न हो , किसी की भी उत्‍पत्ति पदार्थ के बिना संभव नहीं है और हमलोग ग्रह की जिस भी उर्जा से प्रभावित हों , राहू और केतु उनमें से किसी का भी उत्‍सर्जन नहीं कर पाते , इसलिए राहू और केतु से प्रभावित होने का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता। अपने 40 वर्षीय अध्‍ययन मनन में ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ ने सूर्य , चंद्रमा और अन्‍य ग्रहों की भिन्‍न भिन्‍न स्थिति के अनुसार उनकी शक्ति को पृथ्‍वी के जड चेतन पर महसूस किया है , पर राहू और केतु की विभिन्‍न स्थिति से जातक पर कोई प्रभाव नहीं देखा , इसलिए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ में इसकी चर्चा नहीं की गयी है। 

      राहू और केतु को छोडकर इनकी जगह यूरेनस , नेप्‍च्‍यून और प्‍लूटो के आंशिक प्रभाव को देखते हुए इसे अवश्‍य शामिल किया गया है। इस प्रकार गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार हमें प्रभावित करनेवाले ग्रहों की कुल संख्‍या नौ की जगह दस हो गयी है , जो इस प्रकार हैं ...... चंद्र , बुध , मंगल , शुक्र , सूर्य , बृहस्‍पति , शनि , यूरेनस , नेप्‍च्‍यून एवं प्‍लूटो। 'गत्यात्मक जन्मकुंडली' में राहु और केतु नहीं होते हैं, मनुष्य पर इनके प्रभाव की बात ही नहीं, तो फिर उपाय की बात तो हो ही नहीं सकती। 

      अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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        ज्योतिष शास्त्र क्या है ?

        ज्योतिष शास्त्र क्या है

        फलित ज्‍योतिष की विवादास्‍पदता के लिए जो मुख्‍य बात जिम्‍मेदार है , वह यह कि यदि भाग्‍य से ही हमें सबकुछ प्राप्‍त होना या न होना लिखा है तो फिर कर्म करने का क्‍या फायदा ? हमने हमेशा ही लोगों को समझाया है कि हमें जन्‍म के बाद और जीवनपर्यंत जिन परिस्थितियों का सामना करना पडता है , वह हमारा प्रारब्‍ध है , पर हम अपने सोंच , अपनी मेहनत और अपने क्रियाकलापों के द्वारा जो प्राप्‍त करते हैं , वह परिणाम होता है। जन्‍म के पूर्व और तुरंत पश्‍चात् सभी बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यवहार या माहौल में असमानता प्रारब्‍ध को सिद्ध करने के लिए काफी है। पर यह भी सच है कि हम पिछले जन्‍म के कर्म से अपने भाग्‍य में जो कुछ भी लेकर आते हैं और जन्‍मकुंडली के द्वारा उसे जानने का प्रयास करते हैं , उसे मेहनत से बढाया या घटाया जा सकता है और इसे हर स्‍तर तक ले जाया जा सकता है। इसमें प्रारब्‍ध का कोई वश नहीं , यह सिर्फ हालात पैदा करने भर के लिए उत्‍तरदायी है। 

        Jyotish shastra kya hai,


        मान लिया कोई व्‍यक्ति अपने भाग्‍य में काफी मजबूत शरीर लेकर आया है , पर वह उसपर और अधिक ध्‍यान दे , तो शरीर की मजबूती बढते हुए उसे किसी भी स्‍तर तक ले जाकर उसे इनाम पाने का हकदार बना सकती है। इसी प्रकार यदि वह भाग्‍य से कमजोर शरीर लेकर आया है , तो जहां सावधान रहने से उसकी कमजोरी उसे कम परेशान करेगी , वहीं सावधान न होने से यह अधिक तकलीफदेह हो जाएगी , उससे संबंधित महत्‍वाकांक्षा तो वह रख ही नहीं सकता है , क्‍योंकि महत्‍वाकांक्षा भी अपने शरीर की मजबूती को देखकर ही की जा सकती है। इसी प्रकार धन और संपत्ति का मामला है , भाग्‍य से धन और हर प्रकार की संपत्ति की प्राप्ति की एक निश्चित सीमा होती है , पर कर्म से उसे अनिश्चित की ओर ले जाया जा सकता है। 

        किसी किशोर में प्रकृति प्रदत्‍त प्रतिभा है , हर बात को सीखने समझने की प्रवृत्ति है , पर सामाजिक माहौल न मिल पाने से उसका बौद्धिक विकास ढंग से नहीं हो सकता है। आखिर पाकिस्‍तान के सभी बच्‍चों का जन्‍म तो भारत में जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों से अलग समय पर नहीं होता होगा ? उनकी जन्‍मकुंडली तो भारत के बच्‍चों से अलग नहीं होती होगी , पर क्‍या कारण हो सकता है कि बच्‍चे की प्रतिभा का या तो उपयोग ही नहीं हो रहा या फिर उपयोग गलत क्षेत्र में हो रहा है। यह उस देश की परिस्थितियों का दोष है , इसे कर्म से सुधारा जा सकता है। भारत के युवा अगर प्रतिभा में वैश्विक स्‍तर के हैं , तो वह यहां की शिक्षा प्रणाली के कारण हैं , सिर्फ भाग्‍य के कारण नहीं। इसी प्रकार जीवन जीने का अलग अलग ढंग पर भी विशेष क्षेत्र या युग का प्रभाव देखा जा सकता है। इसलिए कर्म करने से इंकार तो नहीं किया जा सकता। 

        लोगों का यह भी मानना है कि भविष्‍य सिर्फ आनंददायक ही नहीं होता , इसमें उलझनें भी होती है , कठिनाइयां भी होती हैं , तो क्‍यों न इसे अनिश्चित और रोमांचक ही रहने दिया जाए। इसे भी सही माना जा सकता है , पर फिर भी भविष्‍य की परिस्थितियों को जानना सबके लिए आवश्‍यक है , क्‍योंकि भविष्‍य में उपस्थित होनेवाली सफलताओं की जानकारी जहां वर्तमान कठिनाइयों से लडने की शक्ति देती है , वहीं भविष्‍य में उपस्थित होनेवाली कठिनाइयों की जानकारी अति आशावाद को कम कर , निश्चिंति को कम कर कर्तब्‍यों के प्रति जागरूक बनाती है। भविष्‍य इतना भी दृढ और निश्चित नहीं होता कि आपका रोमांच नहीं बने रहने दे , क्‍योंकि भविष्‍य को प्रभावित करने छोटा अंश ही सही , पर सामाजिक , राजनीतिक , आर्थिक , पारिवारिक परिवेश भी होता है और मनुष्‍य का खुद कर्म भी , इसलिए सबकुछ ईश्‍वर और ज्‍योतिषी पर न छोडकर कर्म करना मनुष्‍य का पहला कर्तब्‍य होना चाहिए।

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          सामाजिक कार्य भी करें

           हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे !!

          बीज तो हर दिमाग में होते हैं , पर समय पर ही उनकी देखभाल हो पाती है , अंकुरण हो पाता है , विकास के क्रम में उन्‍हें हर प्रकार का वातावरण मिल पाता है और वह छोटा सा बीज एक विशाल वृक्ष बन पाता है। आज के सामाजिक राजनीतिक हालत में अनेको दिमाग के बीज दिमाग में ही सोए पडे रह जाते हैं और अनेको प्रकृति की मार से मौत के मुंह में भी चले जाते हैं।

          samajik karya kya hai


           मैं आशा करती हूं कि हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे , ताकि हमारे चारो ओर विशाल ही विशाल वृक्ष नजर आए , सभी अपनी अपनी विशेषताओं की घनी पत्तियों से छांव , सुगंधित पुष्‍पों से वातावरण में सुगंध और मीठे फलों से लोगों को असीम तृप्ति प्रदान करे।

          प्रकृति के सहयोग प्राप्‍त होने से बहुत लोग मेहनत और आवश्‍यकता से बहुत अधिक प्राप्‍त कर रहे होते हैं , इन्‍हें अपने सामर्थ्‍य का उपयोग दूसरों की असमर्थता को दूर करने में करना चाहिए , क्‍यूंकि प्रकृति पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता कि आज वो आपका साथ दे रही है और संयोग से आपके काम बनते जा रहे हैं , तो कल भी आपकी यही स्थिति बातें कभी भी आपको किसी और की आवश्‍यकता पड सकती है।

          यदि आप लोगों की मदद की प्रवृत्ति विकसित करेंगे तो आगे भी लोग आपकी मदद को खडे रहेंगे! लेकिन किसी की मदद करते समय इस बात का भी ध्‍यान रखें कि उसे बार बार मदद करने की आवश्‍यकता न पडे , उसे इस प्रकार की मदद करें  कि आनेवाले दिनों में वो इतना मजबूत हो सके कि वो पुन: दो चार लोगों की मद कर उन्‍हें भी इस लायक बना सके कि वो दूसरों की मदद कर सके।

          अच्छी अच्छी ज्ञान की बाते 

          मेरे ख्‍याल से हमारी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिए कि वह आनेवाली पीढी को शारीरिक , आर्थिक , मानसिक , नैतिक और आध्‍यात्मिक दृष्टि से अधिक से अधिक मजबूत बनाती चली जाए। इनमें किसी का भी महत्‍व आनेवाले समय में कम नहीं होता है। इनकी मजबूती हमें हर परिस्थिति में खुशी से जीना सीखा देती है, जो मस्तिष्‍क में किसी प्रकार का तनाव कम करने में सहायक है। जीवन में कोई भी प्रतिभावान मिले, कोई भी उम्दा कलाकार मिले, कोई भी इन्नोवाटिव रिसर्च मिले, उन्हें आगे बढ़ाना हमारा सामाजिक दायित्व है! 

          प्रतिभावनो की तो हमारे देश में कमी नहीं, पर हमारे देशवासियों को इसका फायदा हमारे प्रयास से ही मिलेगा! आज के दौर में अधिकांश प्रतिभाएं हमें इंटरनेट पर दिखाई देती हैँ! इसलिए इंटरनेट में जो भी अपनी कला, ज्ञान और प्रतिभा से आपको आकृष्ट करें, उन्हें जरूर rate करें, उनके लिए reviews लिखें और share करें, क्योंकि उनके पास प्रतिभा है, पैसे नहीं कि वे बड़े बड़े व्यवसायियों के सामने खुद को स्थापित कर पाएँ! हमारा दायित्व सिर्फ हमारा परिवार ही नहीं होना चाहिए, सामाजिक और राष्ट्रीय भी होना चाहिए!

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