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ज्योतिष शास्त्र क्या है ?

ज्योतिष शास्त्र क्या है

फलित ज्‍योतिष की विवादास्‍पदता के लिए जो मुख्‍य बात जिम्‍मेदार है , वह यह कि यदि भाग्‍य से ही हमें सबकुछ प्राप्‍त होना या न होना लिखा है तो फिर कर्म करने का क्‍या फायदा ? हमने हमेशा ही लोगों को समझाया है कि हमें जन्‍म के बाद और जीवनपर्यंत जिन परिस्थितियों का सामना करना पडता है , वह हमारा प्रारब्‍ध है , पर हम अपने सोंच , अपनी मेहनत और अपने क्रियाकलापों के द्वारा जो प्राप्‍त करते हैं , वह परिणाम होता है। जन्‍म के पूर्व और तुरंत पश्‍चात् सभी बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यवहार या माहौल में असमानता प्रारब्‍ध को सिद्ध करने के लिए काफी है। पर यह भी सच है कि हम पिछले जन्‍म के कर्म से अपने भाग्‍य में जो कुछ भी लेकर आते हैं और जन्‍मकुंडली के द्वारा उसे जानने का प्रयास करते हैं , उसे मेहनत से बढाया या घटाया जा सकता है और इसे हर स्‍तर तक ले जाया जा सकता है। इसमें प्रारब्‍ध का कोई वश नहीं , यह सिर्फ हालात पैदा करने भर के लिए उत्‍तरदायी है। 

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मान लिया कोई व्‍यक्ति अपने भाग्‍य में काफी मजबूत शरीर लेकर आया है , पर वह उसपर और अधिक ध्‍यान दे , तो शरीर की मजबूती बढते हुए उसे किसी भी स्‍तर तक ले जाकर उसे इनाम पाने का हकदार बना सकती है। इसी प्रकार यदि वह भाग्‍य से कमजोर शरीर लेकर आया है , तो जहां सावधान रहने से उसकी कमजोरी उसे कम परेशान करेगी , वहीं सावधान न होने से यह अधिक तकलीफदेह हो जाएगी , उससे संबंधित महत्‍वाकांक्षा तो वह रख ही नहीं सकता है , क्‍योंकि महत्‍वाकांक्षा भी अपने शरीर की मजबूती को देखकर ही की जा सकती है। इसी प्रकार धन और संपत्ति का मामला है , भाग्‍य से धन और हर प्रकार की संपत्ति की प्राप्ति की एक निश्चित सीमा होती है , पर कर्म से उसे अनिश्चित की ओर ले जाया जा सकता है। 

किसी किशोर में प्रकृति प्रदत्‍त प्रतिभा है , हर बात को सीखने समझने की प्रवृत्ति है , पर सामाजिक माहौल न मिल पाने से उसका बौद्धिक विकास ढंग से नहीं हो सकता है। आखिर पाकिस्‍तान के सभी बच्‍चों का जन्‍म तो भारत में जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों से अलग समय पर नहीं होता होगा ? उनकी जन्‍मकुंडली तो भारत के बच्‍चों से अलग नहीं होती होगी , पर क्‍या कारण हो सकता है कि बच्‍चे की प्रतिभा का या तो उपयोग ही नहीं हो रहा या फिर उपयोग गलत क्षेत्र में हो रहा है। यह उस देश की परिस्थितियों का दोष है , इसे कर्म से सुधारा जा सकता है। भारत के युवा अगर प्रतिभा में वैश्विक स्‍तर के हैं , तो वह यहां की शिक्षा प्रणाली के कारण हैं , सिर्फ भाग्‍य के कारण नहीं। इसी प्रकार जीवन जीने का अलग अलग ढंग पर भी विशेष क्षेत्र या युग का प्रभाव देखा जा सकता है। इसलिए कर्म करने से इंकार तो नहीं किया जा सकता। 

लोगों का यह भी मानना है कि भविष्‍य सिर्फ आनंददायक ही नहीं होता , इसमें उलझनें भी होती है , कठिनाइयां भी होती हैं , तो क्‍यों न इसे अनिश्चित और रोमांचक ही रहने दिया जाए। इसे भी सही माना जा सकता है , पर फिर भी भविष्‍य की परिस्थितियों को जानना सबके लिए आवश्‍यक है , क्‍योंकि भविष्‍य में उपस्थित होनेवाली सफलताओं की जानकारी जहां वर्तमान कठिनाइयों से लडने की शक्ति देती है , वहीं भविष्‍य में उपस्थित होनेवाली कठिनाइयों की जानकारी अति आशावाद को कम कर , निश्चिंति को कम कर कर्तब्‍यों के प्रति जागरूक बनाती है। भविष्‍य इतना भी दृढ और निश्चित नहीं होता कि आपका रोमांच नहीं बने रहने दे , क्‍योंकि भविष्‍य को प्रभावित करने छोटा अंश ही सही , पर सामाजिक , राजनीतिक , आर्थिक , पारिवारिक परिवेश भी होता है और मनुष्‍य का खुद कर्म भी , इसलिए सबकुछ ईश्‍वर और ज्‍योतिषी पर न छोडकर कर्म करना मनुष्‍य का पहला कर्तब्‍य होना चाहिए।

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    गणित के जवाब में ‘=’ ‘>’ ‘<’ ‘=<’ ‘=>’

    ज्योतिष शास्त्र

    इसमें कोई शक नहीं कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ब्‍लागिंग की मदद से अपनी पहचान बना पाने में कामयाबी प्राप्‍त करता जा रहा है , पर कुछ दिनों से पाठकों द्वारा इसके द्वारा ज्‍योतिष शास्त्र के विज्ञान कहे जाने के विरोध में कुछ आवाजें भी उठ रही हैं। वैसे तो सबसे पहले मसीजीवी जी ने ज्‍योतिष शास्त्र को विज्ञान कहे जाने पर आपत्ति जतायी थी , पर अभी हाल में ज्ञानदत्‍त पांडेय जी के द्वारा यह प्रश्‍न उठाया गया तो मुझे काफी खुशी हुई , क्‍योंकि उनकी सकारात्‍मक टिप्‍पणियां हमेशा ही मेरा उत्‍साह बढाती आयी है। उनके बाद एक दो और पाठक भी इसी प्रकार के प्रश्‍न करते मिले हैं। आज उन सबके द्वारा उठाए गए प्रश्‍न का तर्कसंगत जवाब देना मैं उचित समझ रही हूं और शायद पहली बार हो रही इस प्रकार की सकारात्‍मक चर्चा करते हुए मुझे काफी खुशी भी हो रही है। मैं चाहूंगी कि इस प्रकार के और प्रश्‍न भी सामने आएं , मैं सबकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करूंगी।

    Ganit vishay

    सबसे पहले गणित विषय को ही लें। गणित में हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ ही नहीं होता है। इसमें किसी समीकरण का उत्‍तर ‘लगभग’ में होने के साथ ही साथ ‘>’ और ‘<’ या ‘=<’ और ‘=>’ में भी हो सकता है। कोई समीकरण ‘लिमिट’ में भी अपना जवाब देती है । सभी समीकरण एक सीधी रेखा का ही ग्राफ नहीं बनाती , पाराबोला और हाइपरबोला भी बना सकती है। गणित के संभावनावाद का सिद्धांत संभावना की भी चर्चा करता है। और चूंकि भौतिकी जैसा पूर्ण विज्ञान के भी सभी नियम गणित पर ही आधारित होते हैं , तो भला इसके भी हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ में कैसे दिया जा सकता है ? और बाकी विज्ञान जो भौतिकी की तरह पूर्ण विज्ञान न हो तो उसके प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में देना तो और भी मुश्किल है।

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    Signs of maths

    एलोपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में दिया जा सकता है , पर सबका दे पाना असंभव है , बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘लगभग’ और बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘संभावनावाद’ के नियमों के अनुसार दिया जा सकता है। पहले एक ही लक्षण देखकर चार प्रकार के बीमारी की संभावना व्‍यक्‍त की जाती है , जिससे पहले डाक्‍टरों को अक्‍सर दुविधा हो जाया करती थी , आज जरूर विभिन्‍न प्रकार के टेस्‍टों ने डाक्‍टरों का काम आसान कर दिया है , तो क्‍या पहले मेडिकल साइंस विज्ञान नहीं था ? अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिलने के बावजूद मौसम विज्ञान कहा जाता है , क्‍योंकि इस क्षेत्र में बेहतर भविष्‍यवाणी कर पाने की संभावनाएं दिखाई पड रही है। क्‍या भूगर्भ विज्ञान की भूगर्भ के बारे में की गयी गणना बिल्‍कुल सटीक रहती है ? नहीं , फिर भी उसे भूगर्भ विज्ञान कहा जाता है। संक्षेप में , हम यही कह सकते हें कि जरूरी नहीं कि वैज्ञानिक सिद्धांत हमें सत्‍य की ही जानकारी दे , जिन सिद्धांतो की सहायता से हमें सत्‍य के निकट आने में भी सहायता मिल जाए , उसे विज्ञान कहा जाता है।

    Jyotish science

    यदि ज्‍योतिष शास्‍त्र के नियमों की बात करें , तो इसके कुछ नियम बिल्‍कुल सत्‍य हैं , मौसम से संबंधित जिस सिद्धांत के बारे में कल चर्चा हुई , वह बिल्‍कुल सत्‍य है। ऐसा इसलिए है , क्‍योंकि इस नियम को स्‍थापित करने में ग्रहों को छोडकर सिर्फ भौगोलिक तत्‍वों का ही प्रभाव पडता है। र ज्‍योतिष के कुछ नियम सत्‍य के निकट भी होते हैं , और कुछ के बारे में तो सिर्फ संभावना ही व्‍यक्‍त की जा सकती है। ऐसा इसलिए होता है , क्‍योंकि उन नियमों पर सामाजिक , राजनीतिक , भौगोलिक या अन्‍य बहुत से कारकों का प्रभाव देखा जाता है । पर इसका अर्थ यह नहीं है कि ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान नहीं है।

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