stock market jyotish

Stock market Jyotish


प्राचीन काल से ही अज्ञानता जैसे शब्‍द से मानव जाति को सख्‍त नफरत रही है। शायद इसी कारण प्रकृति के उलझे हुए रहस्‍यों को न जान पाना उसके लिए एक भयंकर चुनौती बनी रही और उसने प्रकृति के सारी रहस्‍यों को सुलझाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी । इसका परिणाम हम सब अपने सामने देख रहे हैं। प्रकृति के एक एक रहस्‍यों को सुलझाती, उससे निबटने में सफलता प्राप्‍त करते हुए कंदराओं और गुफाओं में रहने वाली जनजाति आज एक अतिविकसित प्राणी के तौर पर संसार में अपनी उपस्थिति दर्शा रही है।  

किन्‍तु भूत और वर्तमान को सुलझा पाने में इसे जितनी ही अधिक सफलता मिलती जा रही है, भविष्‍य उतने ही घने अंधेरे के रूप में इसके सामने मुंह चिढा़ता खडा़ हो रहा है। कल क्‍या होगा? किसी को पता नहीं। इस दिशा में भी गुत्त्थियों को सुलझा पाने की शुरूआत हमारे ऋषि, महर्षियों और योगियों ने की थी, ताकि जिस तरह हम एक रोशनी लेकर अनजान पथ पर भी आगे बढ़ जाते हैं, एक सहारा लेकर इस जीवन पथ पर भी चलें और भविष्‍य को जान पाने के लिए ज्‍योतिष शास्‍त्र के रूप में एक विज्ञान को विकसित किया गया। पर कालांतर में जब सभी शास्‍त्रों का नवीनीकरण किया गया, इस शास्‍त्र को अंधविश्‍वास समझते हुए इसे उपेक्षित छोड़ दिया गया।  

Share market astrology in Hindi



Jyotish and share market in Hindi


वैसे तो हर क्षेत्र में ही देखा जाए, तो भविष्‍य बिल्‍कुल अनिश्चित है, क्‍योंकि आज के अनिश्चितता के दौर में जब आम आदमी का जीवन ही निश्चित नहीं, तो किस पैसे, किस संपत्ति, किस डिग्री, किस जान परिचय और किस सगे संबंधी पर आप भरोसा कर सकते हैं? पर आज की तिथि में जो सर्वाधिक अनिश्चित दिखाई पड रहा है, वह है पूरे विश्‍व का शेयर बाजार, जिसके बारे में बिना किसी आधार के एक दो घंटे बाद की भविष्‍यवाणी कर पाना भी काफी मुश्किल हो गया है। इसका मुख्‍य कारण यह है कि आज के बाजार में शेयरों की खरीद बिक्री की कोई मुख्‍य वजह नहीं रह गई है। लोगों की मन:स्थिति में होने वाले परिवर्तन के बल बूते पर बाजार में खरीद और बिक्री का दौर जारी है और चूंकि लोगों की मन:स्थिति को प्रभावित करने में ग्रहों की भूमिका होती है, इसलिए अप्रत्‍यक्ष तौर पर ही सही, अभी सिर्फ और सिर्फ ग्रहों का ही प्रभाव शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है।  

ग्रहों के पृथ्‍वी के जड़ चेतन पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष ही है और इसे सही ढंग से विकसित कर पाने की दिशा में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र' बोकारो द्वारा 20वीं सदी के अंतिम 40 वर्षों में बहुत बडा़ रिसर्च हुआ। ग्रहों की वास्‍तविक शक्तियों की खोज कर ज्‍योतिष को विज्ञान बना पाने सफलता मिलने से भविष्‍य को देख पाने के लिए एक तरह की रोशनी मिली, जो काफी हद तक स्‍पष्‍ट तो नहीं कही जा सकती, पर हमारे सामने भविष्‍य का एक धुंधला सा चित्र अवश्‍य खींच देती है। इसी के आधार पर अपने हिंदी ब्लॉग में शेयर बाजार (share market hindi blog) के बारे में 2008 के जनवरी से ही मै शेयर से संबंधित भविष्‍यवाणी करती आ रही हूं, जिससे देशभर के निवेशक फ़ायदा उठा रहे हैं। 

ग्रहों और नक्षत्रों के शेयर बाजार पर पडते प्रभाव की चर्चा करते हुए मैं पिछले कई वर्षों से मोल तोल डॉट इन पर आनेवसले सप्‍ताह के शेयर बाजार की भविष्‍यवाणी करते हुए कॉलम लिखती आ रही हूं। अत्‍यधिक व्‍यस्‍तता के कारण मैं वहां नियमित नहीं रह पायी , पर जो भी पाठक मेरे नियमित संपर्क में बने हुए हैं , उन्‍हें शेयर बाजार से सबंधित मेरी भविष्यवाणियों की सत्यता के बारे में पता है ।

what is the share market in Hindi Jyotish?

About stock market jyotish next week -अगले सप्ताह 19 अप्रैल 2021 को बाजार की शुरूआत कुछ मजबूती से हो सकती है , लेकिन उस दिन से दो-तीन दिनों की ग्रहस्थिति शेयर बाजार में गिरावट देनेवाली होगी । इसकी तुलना में 22 -23 की तिथियां शेयर बाजार के लिए थोड़ी सुखद होंगी, खासकर अंतिम दो घंटे बाजार में रिकवरी के चान्सेस दिखेंगे ।  लेकिन इसके बावजूद 26 अप्रैल तक बाजार में अनिश्चितता का वातावरण रहेगा। 30 अप्रैल तक बाजार में घटत-बढ़त का दौर चलता रहेगा। 

जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------


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'ज्‍योतिष दिवस' पर विशेष

 'ज्‍योतिष दिवस' पर विशेष 

वैसे तो कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठन 20-21-22 मार्च  में से किसी एक दिन, जिस दिन उत्तर की ओर विषुव होता है, को 'अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष दिवस' मनाते हैं, पर कुछ वर्ष पूर्व अखबार में पढने को मिला कि सरकार द्वारा इस वर्ष से नव संवत्सर को 'विश्व ज्योतिष दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। नवसंवत्सर को ज्योतिष दिवस मनाये जाने की परंपरा का हमारे ग्रंथों में उल्लेख है। माना जाता है कि इसी दिन ब्रम्हा ने सृष्टि का निर्माण किया था, प्रथम सूर्योदय के साथ प्रकाश का आविर्भाव हुआ था, काल गणना का आरम्भ हुआ था।  इसलिए भारत सरकार को 'ज्योतिष दिवस' को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाना चाहिए। 

जीवन के हर कमजोर संदर्भ को मजबूती देने के लिए उन्‍हें वर्ष के एक एक दिन निश्चित किए गए हैं तो ज्‍योतिष के लिए तो होने ही चाहिए। भविष्‍य को जानने की उत्‍सुकता तो सबमें होती ही है , खासकर बडे स्‍तर पर पहुंचे लोगों को। जीवन आपके हाथ में कभी नहीं होता , भले ही कुछ समय तक लोगों को ऐसा भ्रम होता रहता है। जिस दिन यह भ्रम टूटता है , उसी दिन से किसी अज्ञात शक्ति के प्रति लोगों का झुकाव बनने लगता है और लोग अंधविश्‍वास में फंसने लगते हैं। जिनका भविष्‍य अनिश्चित दिशा में जा रहा होता है , उनके लिए भविष्‍य की जानकारी फायदेमंद भी होती है। और चूंकि भविष्‍य को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष है , इसलिए जीवन में इसके महत्‍व को इंकार नहीं किया जा सकता। ज्‍योतिष ही सही जानकारी ही समाज से हर प्रकार के भ्रम का उन्‍मूलन कर अंधविश्‍वास को बढने से रोक सकती है। इसलिए इसके विकास की ओर ध्‍यान तो दिया ही जाना चाहिए। 

 बिना आधार के ज्‍योतिष शास्त्र इतने दिनों तक नहीं चल रहा, इसका एक वैज्ञानिक आधार है। इसके द्वारा किसी के जीवन के हर संदर्भ के बारे में सांकेतिक रूप से बात की जा सकती है, पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के अनुसार उनका सिर्फ गुणात्‍मक पहलू ही बताया जा सकता है , परिमाणात्‍मक पहलू बताना संभव नहीं । जातक के चारित्रिक विशेषताओं के साथ साथ हर पक्ष के सुख , दुख , महत्‍वाकांक्षा , कार्यक्षमता , आई क्‍यू के बारे मे साल , महीने और दिन तक की चर्चा करते हुए जातक की आगे बढती जीवनयात्रा को साफ साफ बताया जा सकता है। पर इस क्षेत्र में जितने ज्ञानी ज्योतिषी है, उससे अधिक व्यावसायिक बुद्धि रखनेवाले घुसकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले भी हैं। 

मुझे तो ज्‍योतिष के विकास के मार्ग में सबसे बडी बाधा दिखती है , लोगों का पूर्वाग्रह ग्रस्‍त होना , चाहे वे ज्‍योतिषी हों या वैज्ञानिक , परंपरावादी हों या अधुनिक विचारधारा के लोग , सबने ज्‍योतिष को लेकर कोई न कोई भ्रम पाल रखा है। जबतक आज के वैज्ञानिक युग के अनुरूप ज्‍योतिष की व्‍याख्‍या नहीं की जाएगी , ज्‍योतिष को उपयोगी या लोकप्रिय नहीं बनाया जा सकता।  विभिन्न ज्‍योतिष सम्‍मेलनों  में  मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी ने ज्‍योतिषियों से यही कहा था।

भौतिक विज्ञान में विभिन्‍न प्रकार की शक्तियों का उल्‍लेख है , हर शक्ति का शक्तिमापक ईकाई है , उसकी माप के लिए वैज्ञानिक सूत्र हैं , उपकरण हैं , अत: ये निकश्‍चत सूचना प्रदान करने में कामयाब हैं , पर फलित ज्‍योतिष के वैज्ञानिकों से पूछा जाए कि ग्रहशक्ति की तीव्रता को मापने के लिए उनके पास कौन सा वैज्ञानिक सूत्र या उपकरण हैं , तो इस प्रश्‍न का उत्‍तर ज्‍योतिषि नहीं दे सकते । और जबतक ज्‍योतिषियों के पास ग्रहों की शक्ति और उसके प्रतिफलन काल का एक प्रामाणिक सूत्र नहीं होगा , लोग इसे अनुमान मानते रहेंगे , अंधविश्‍वास मानते रहेंगे। 

उन्‍होने कहा था कि इक्‍कीसवीं सदी कंप्‍यूटर की होगी , इसकी बहुआयामी विशेषताएं तो जगजाहिर हैं , पर इसकी एक विशेषता यह भी होगी कि नकली और अव्‍यवस्थित नियमों की पोल बहुत आसानी से उद्घाटित कर सकता है। ग्रहों की शक्ति के दस बीस नियमों ,कई दशा पद्धतियों के साथ ही साथ गोचर के आधार पर भविष्‍यवाणी करने में कंप्‍यूटर भी समर्थ नहीं हो सकते। क्‍योंकि आम ज्‍योतिषी तो अनुमान का सहारा ले सकता है , पर एक कंप्‍यूटर नहीं लेगा ,हमें उसे सशक्‍त आधार देना ही होगा। 

ज्‍योतिष को उसकी कमजोरियों से छुटकारा दिलाने के लिए पूरे जीवन किए गए प्रयास के बाद समझ में आ ही गया कि ग्रहों की सारी शक्ति उसकी गति में है। उन्होंने गत्यात्मक ज्योतिष के अद्भुत सूत्र दिए। हमें बंदूक की एक छोटी सी गोली में शक्ति दिखाई पउती है , एक पत्‍थर का टुकडा लेकर हम अपने को बलवान समझते हैं , क्‍योंकि इन्‍हें गति देकर इनसे शक्ति उत्‍सर्जित करवाया जा सकता है। पर जब ग्रहों की शक्ति ढूंढने की बारी आती है तो ज्‍योतिषी उनकी गति पर ध्‍यान न देकर स्थिति पर होता है। इसके बाद इन्‍होने ग्रहों की शक्ति के लिए सूत्र का प्रतिपादन कर पूरे देश के ज्‍योतिषियों को ज्‍योतिष के वास्‍तविक स्‍वरूप को समझाया और कुंडली देखने का तरीका बताया । 

शरीर ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्‍व करता है और इसमें मौजूद ग्रंथियां ग्रहों के हिसाब से चलती हैं। इसलिए व्‍यक्ति के जीवन को निर्धारित करने में ग्रहों का हाथ है ,और इसे ज्‍योतिष के माध्‍यम से ही समझा जा सकता है। ज्‍योतिष को विकसित बनाने के लिए जहां एक ओर ज्‍योतिषियों को इसकी समस्‍त कमजोरियों को समझकर इसे सुलझाने की जरूरत है ,वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों को भी इसमें निहित सत्‍य को समझने की आवश्‍यकता है। तभी ज्‍योतिष का विकास हो सकता है , अन्‍यथा कितने 'ज्‍योतिष दिवस' आते जाते रहेंगे , न ज्‍योतिष और न ही ज्‍योतिषी को सम्‍मान मिलेगा। समाज उन्‍हें अंधविश्‍वासी न समझे , इसलिए भीड में लोग ज्‍योतिषी से बात करने से भी कतराते रहेंगे।

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर कुंडली निर्माण, सटीक भविष्यवाणी, उचित परामर्श और समुचित उपचार के लिए संपर्क करें - 8292466723, gatyatmakjyotishapp@gmail.com

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नए विक्रमी संवत् की ढेर सारी शुभकामनाएं !

 Vikram samvat kab prarambh hua

नए विक्रमी संवत् की ढेर सारी शुभकामनाएं ! 

आज अंग्रेजी कैलेण्‍डर के अनुसार काम करने की हमारी आदत हो गयी है। हिंदी तिथियों और महीनों का नाम भी हममे से बहुत लोग जानते नहीं होंगे। हमारे हिंदी कैलेण्‍डर का वर्ष संवत्‍सर कहलाता है। संवत्सर का अर्थ होता है ..  12 महीनों का समूह। इस संवत्‍सर के अनुसार ही हमारी काल गणना होती है। विक्रमी संवत के अनुसार, नव वर्ष की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तारीख से होती है । 

Vikram samvat kab prarambh hua

धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक कार्यो आदि में तिथियों का निर्धारण विक्रम संवत के अनुसार होता है। जहां अंग्रेजी कैलेण्‍डर में किसी तारीख से सिर्फ सूर्य की स्थिति का पता चलता है , हमारा अपना कैलेण्‍डर इसके साथ चंद्रमा की भी जानकारी देता है। हम किसी भी अंग्रेजी तिथि से दिन के माहौल का अंदाजा लगा सकते हैं , उस वक्त ठंढ का दिन रहा होगा, बारिश का मौसम या फिर गर्मी।  लेकिन किसी भी हिंदी तिथि से दिन के साथ साथ रात का अनुमान लगाने में भी मदद  मिलती है कि उस दिन चांदनी रात रही होगी या अमावस्या का घनघोर अँधेरा छाया होगा। इस तरह विक्रमी संवत अधिक वैज्ञानिक है। कहा जाता है कि विदेशियों के शासनकाल में इसे समाप्‍त कर दिया गया था , फिर से  विक्रम संवत की शुरुआत महाराजा विक्रमादित्य ने की थी। 

ब्रह्म पुराण के अनुसार, चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तारीख से ही सृष्टि का आरंभ हुआ है। शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है।संवत्सर शुक्ल से ही आरंभ माना जाता है क्योंकि कृष्ण के आरंभ में मलमास आने की संभावना रहती है जबकि शुक्ल में नहीं। विक्रम संवत की चैत्र शुक्ल की पहली तिथि से न केवल नवरात्रि में दुर्गा व्रत-पूजन का आरंभ होता है, बल्कि राजा रामचंद्र का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगद देव का जन्म, आर्य समाज की स्थापना, महान नेता डॉ. केशव बलिरामका जन्म भी इसी दिन हुआ था। 

2 अप्रैल 2022 को चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष के आरंभ के साथ ही विक्रम संवत् 2079 का आरंभ होगा। कई प्रदेशों में इस दिन का स्वागत कड़वे घूँट से किया जाता है। सबसे पहले नीम का रस पिया जाता है। इस मौसम में नीम में फूल भी आते है और कोमल पत्ते भी आते है। कुछ लोग इसके कोमल पत्ते चबाते भी है। यह तो सभी जानते है कि नीम एक अच्छी औषधि है। नीम की पत्तियों और फूलों का रस पीने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा के रोग नहीं होते। पहले ही दिन कड़वा घूँट पीने का अर्थ है कि जीवन सिर्फ़ मीठा ही नहीं है अनेक कड़वे अनुभव भी होते है जिन्हें झेलने के लिए हमें तैयार रहना है। इस तरह हम मानसिक रूप से दुःखों का सामना करने के लिए तैयार रहेंगें और नीम का रस पीकर हम निरोग भी रहेंगें।

 भारत के कई राज्‍यों में नए वर्ष का स्‍वागत करते हुए उत्‍सव मनाया जाता है। यह दिन जम्मू-कश्मीर में नवरेह,पंजाब में वैशाखी, महाराष्ट्र में गुडीपडवा, सिंधी में चेतीचंड,केरल में विशु,असम में रोंगलीबिहूआदि के रूप में मनाया जाता है। आंध्र में यह पर्व उगादि नाम से मनाया जाता है। सिंधी समाज इस दिन को बडे हर्ष और उल्लास के साथ उत्सव के रूप में मनाता है। इस दिन हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं कि नव वर्ष हर प्रकार से हमारे लिए कल्याणकारी हो। नया वर्ष आपके लिए बहुत खुशियां , बहुत सफलता से संयुक्‍त करे , आप सबों को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता !!

Indian religion facts

विश्‍वभर में सभी धर्म की स्‍थापना लोगों में उदारता विकसित करने के लिए ही हुई है। दुनिया के सभी धर्मों का उदय पशु को मनुष्‍य बनाने के लिए हुआ है , इसलिए उसमें जीवन जीने से संबंधित एक एक बात की चर्चा है , पर वही धर्म आज मनुष्‍य को पशु बनाने के लिए उद्दत है। धर्म को लचीला होना चाहिए , ताकि युग के साथ साथ नियमों में परिवर्तन किया जा सके। हमारे कुछ महापुरूषों ने कई पंथ चलाकर इस दिशा में प्रयास भी शुरू किया , पर हर वर्ग का सहयोग न मिल पाने से उनका प्रयास अधूरा ही रह गया।

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जहां परंपरागत ज्‍योतिष ग्रहों की किसी भाव में उपस्थिति और दृष्टि के हिसाब से ग्रहों की शक्ति का आकलन करता है , वहीं 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' में ग्रहों के शक्ति के निर्धारण के लिए सूर्य से उनकी को‍णात्‍मक दूरी और ग्रहों की गति का ध्‍यान रखा जाता है। वर्तमान में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' दृष्टि से धार्मिक क्रियाकलापों के लिए जिम्‍मेदार ग्रह बृहस्‍पति बहुत ही कमजोर स्थिति में है , क्‍यूंकि वह सूर्य के आमने सामने और अपेक्षाकृत कम शक्ति में है। धर्म और भाग्‍य का स्‍वामी ग्रह बृहस्‍पति जब भी आसमान में मजबूत होता है , वह धर्म का सकारात्‍मक पक्षों को दर्शाता है , जबकि आसमान में उसकी स्थिति कमजोर होती है तो उसकी कमजोरियों को झेलने को हमें बाध्‍य होना पडता है। 

बृहस्‍पति तो अभी कमजोर है ही , उसके साथ चंद्रमा की युति को भी 23 और 24 सितंबर को लगभग 5 बजे से 7 बजे तक पूर्वी क्षितिज पर आसमान में उदित होते देखा जा सकता है। 25 सितंबर के बाद बृहस्‍पति से चंद्र की दूरी के बढते जाने के साथ ही साथ बृहस्‍पति के प्रभाव का खात्‍मा होना चाहिए। आसमान में बृहस्‍पति की यही स्थिति इतनी बारिश के लिए भी जिम्‍मेदार है , जिसने कई प्रदेशों में लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इसलिए मैने तीन चार दिन पूर्व के आलेख में ही लिखा था कि कॉमनवेल्‍थ गेम को भीषण बारिश का सामना नहीं करना पडेगा।  पर इस योग के ठीक पहले आनेवाला बाबरी मस्जिद और रामजन्‍मभूमि के मामले का निर्णय धर्म के मामलों में कट्टर तौर पर जुडे लोगों को तनाव देनेवाला ही होगा

ईश्‍वर एक है , चाहे उसे राम कहा जाए रहीम , अल्‍लाह या गॉड ... ये तो कहनेवाले पर निर्भर है। आस्‍था आस्‍था की बात है , आज के युग में भी बडे रूप में मौजूद समस्‍याओं को समाप्‍त करनेवाले को हम भगवान या महात्‍मा ही मानते हैं , मानते ही रहेंगे। पर उनके नाम से अधिक महत्‍व उनके विचारों को दिया जाना चाहिए , तभी हम उनके सच्‍चे पुजारी माने जा सकते हैं। इस ख्‍याल से चाहे हम किसी भी धर्म के हों , बाबरी मस्जिद और राम जन्‍मभूमि के मामले का न्‍यायालय का विवेकपूर्ण निर्णय  को स्‍वीकारने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी धर्म देश , समाज या मानवता से ऊपर नहीं होता , हम भारत के नागरिक हैं और भारत की रक्षा के लिए हमें एकजुट रहना चाहिए। आइए अपने धर्म को भूलकर हम शपथ लें कि हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे , जिससे देश को थोडा भी नुकसान पहुंचे !

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    आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ??

    Bhakti me atishayokti

    1999 तक पूरे मनोयोग से ज्‍योतिष का अध्‍ययन करने के बाद  बोकारो में रहते हुए मैने लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह देने का काम शुरू कर दिया था। मैने पहले भी अपने एक आलेख में लिखा है कि 1998 से 2000 के समय में आसमान में शनि की स्थिति किशोरों को बुरी तरह प्रभावित करने वाली थी और उस दौरान अधिकांशत: टीन एजर बहुत ही परेशानी में अपने मम्‍मी पापा के साथ मेरे पास आते रहें। तब वे इतने परेशान थे कि मेरे समझाने बुझाने का भी उनपर कोई खास असर नहीं होता था। सामान्‍य तौर पर होनेवाले बुरे ग्रहों के प्रभाव को भी मैं सर्दी खांसी की तरह ही लेती हूं , जो जीवन की लडाई के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद करता है।

    Bhakti me atishayokti


    एक दिन एक अभिभावक मेरे पास आए , उनका टीन एजर बेटा घर छोडकर कहीं चला गया था। मैने उसके जन्‍म विवरण के आधार पर उसकी जन्‍मकुंडली बनायी , और आवश्‍यक गणनाएं की और बताया कि अप्रैल के बाद ही उसके घर लौटने की संभावना है। उस समय दिसंबर ही चल रहा था और अप्रैल आने में काफी समय बचे हुए था , मात्र 16 वर्ष का हर सुख सुविधा में पलने वाला बच्‍चा 4 महीने घर , शहर के बाहर कैसे काट सकता है , माता पिता उसकी आस ही छोड चुके थे। पर मैं जानती थी कि दो ढाई वर्षों तक चलनेवाला शनि भी लोगों को वर्ष पांच महीने अधिक परेशान किया करता है।

    मई माह में एक दिन अचानक वो सिन्‍हा दंपत्ति हमसे बाजार में मिले , उनकी पत्‍नी बहुत परेशान थी , मुझसे कहा कि आपका कहा समय भी समाप्‍त हो गया , बेटा तो नहीं आया। मैने कहा कि नहीं , मेरा दिया समय समाप्‍त नहीं हुआ है , मैने अप्रैल के बाद कहा है , जून तक आने की उम्‍मीद है , जून में न लौटे तब कुछ गडबड माना जा सकता है। उसके दो चार दिनों बाद ही उ प्र से सूचना मिली कि उनका बेटा सुरक्षित किसी चीनी के मिल में काम कर रहा है। अभी उसकी तबियत खराब है , मिल के मालिक ने पहले उन्‍हें फोन किया और फिर अपने एक कर्मचारी के साथ उसे बोकारो वापस भेज दिया।

    उस समय से उक्‍त दंपत्ति हर समस्‍या में नियमित तौर पर मेरी सलाह लेने लगे। धीरे धीरे मुझपर उनका विश्‍वास जमता चला गया। कभी‍ कभी उनके रेफरेंस से भी मेरे पास किसी और तरह की समस्‍या से जूझते लोग आते रहें। उसमें से कुछ लोग मेरे संपर्क में अभी भी हैं , कुछ नहीं भी , पर सिन्‍हा दंपत्ति का मुझपर अतिशय आस्‍था और प्रेम हैं , जिसका परिणाम अभी दो चार दिन पूर्व उनकी अतिशयोक्ति में देखने को मिला।  मेरे पास एक दंपत्ति आए , उनका बेटा खो गया है। उन्‍होने बताया "सिन्‍हा दंपत्ति ने हमें भेजा है , क्‍यूंकि उनके बेटे के खोने पर आपने उन्‍हें बता दिया था कि उनका बेटा ईख पेर रहा है। अब हमें भी बताइए कि मेरा बेटा कहां क्‍या कर रहा है ??"

    मैं तो चौंक पडी , इस तरह की बातें मैं न तो बताती हूं और न ही बताने का दावा करती हूं। किसी प्रकार के तंत्र मंत्र की सिद्धि करने वाले , जो भविष्‍य को नहीं , सिर्फ भूत को स्‍पष्‍ट देखा करते हैं , उनके लिए शायद यहां पर जबाब देना आसान हो , जैसा वे दावा करते हैं , पर ज्‍योतिष जो मूलत: समय की जानकारी देने वाला विषय है , भूत और वर्तमान को भी संकेत में देखा करता है और भविष्‍य को भी , अपनी विद्या के आधार पर इसका स्‍पष्‍ट जबाब मेरे पास न था । प्राचीन ऋषि महर्षियों की तरह दिव्‍य ज्ञान भी मेरे पास नहीं , इसलिए मैं लोगों में ग्रहों के प्रभाव का वैज्ञानिक सोच भरना चाहती हूं ,पर ऐसा नहीं हो पाता है । उस वक्‍त मैं सिर्फ यही सोंच रही थी कि आस्‍था और प्रेम किस हद तक अतिशयोक्ति को जन्‍म देते हैं ?

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