गुण मिलान टेबल/सारणी PDF DOWNLOAD

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(ONLINE JYOTISH MARRIAGE MATCHING)

हिन्दू परिवारों में माना जाता है कि ग्रहो और खगोलीय पिंड का हमारे जीवन पर अच्छा खासा प्रभाव पड़ता है, इसलिए वर-वधू के भाग्य की अनुकूलता को देखने के लिए विवाह के पूर्व कुंडली मिलान (MATCH MAKING KUNDALI IN HINDI) आवश्यक माना जाता है , ताकि विवाह के बाद जोड़े का दांपत्य जीवन कुशल-मंगल से कट सके। इस विषय पर पूर्व में भी मेरा एक लेख 'क्या कुंडली मिलाना आवश्यक है ?(KUNDALI MILAN IN MARRIAGE)' विद्वान् पाठकों के मध्य काफी लोकप्रिय हो चुका  है। 

हिन्दू पंडितों के अनुसार विवाह की प्रक्रिया के शुरुआत में ही अष्टकूट चक्र से वर-वधु की कुंडली मिलाने की परम्परा रही है। दोनों की कुंडली मिलाते वक्त जन्मकुंडली में वर्ण, वश्य , तारा, योनी ,ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी आदि से मिले स्कोर का कम से कम 18  गुणों का मिलना आवश्यक माना जाता है , अधिक से अधिक गुण मिले तो बहुत अच्छा। इसके लिए एक गुण मिलान टेबल (गुण मिलान सारणी ) का सहारा लिया जाता है। 

गुण मिलान टेबल PDF 

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Gun milan table

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GUN MILAN FOR MARRIAGE

ज्योतिष के सभी सॉफ्टवेयर कुंडली मिलान की सुविधा ऑनलाइन देते हैं, इसमें कोई गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है। ज्योतिष को नहीं जानने वाले भी इस सॉफ्टवेयर का उपयोग आराम से कर सकते हैं। लेकिन गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली मिलान का कार्य इतना भी आसान नहीं है कि आप सिर्फ इस गुण मिलान सारणी से देखकर समझ जाएँ। जब वर-वधु को प्रभावित करने में सभी ग्रहों की भूमिका होती है, तो उनके बीच के समझ को समझने के लिए सिर्फ चन्द्रमा के नक्षत्र और मंगल की स्थिति ही कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं ?

वर वधू गुण मेलापक सारणी

 (VAR VADHU GUN MILAN SARNI/CHART)

 पंडितों द्वारा कुंडली मिलाने में मंगल दोष की जाँच भी अलग से की जाती है। यदि दोनों कुंडलियों में मंगल संतुलित है, तो माना जाता है कि दंपत्ति को वैवाहिक सुख प्राप्त होंगे। मंगल के दोष को 'गत्यात्मक ज्योतिष'  इसलिए अधिक प्रभावी नहीं मानता , क्योंकि 12 राशि में से 5 राशि में मंगल होने से लोग मांगलिक हो जाते हैं, इस दृष्टि से कुल जनसँख्या के 5 /12 यानि 44% लोग मांगलिक होते हैं। मांगलिक होना बहुत बड़ी बात नहीं, गत्यात्मक दृष्टि से मंगल कमजोर हो तो विवाह में देर अवश्य होती है, यदि खास ग्रहस्थिति के कारण शादी जल्द हुई तो वह भी मुसीबत का कारण बनती है।  

KUNDALI MILAN BY NAME AND DATE OF BIRTH

जन्मदिन से कुंडली मिलान, नाम से कुंडली मिलान

आजतक समाज में ज्योतिष शास्त्र को लेकर बहुत ही भ्रम की स्थिति बनी हुई है, पढ़े-लिखे समझदार अभिभावकों को भी समझ में नहीं आता कि वे करें क्या ? कुछ वर्षों से गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च वाले तर्कपूर्ण आलेख समाज से भ्रम दूर करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। एक लेख में मैंने स्पष्ट किया था कि जन्मकुंडली के ग्रह लव मैरिज होने के संकेत देते हैं या नहीं ? 

गत्यात्मक दृष्टि से यह तो तय है कि तालमेल रखनेवाले प्रेमी-प्रेमिका की शादी से पहले गुण मिलान सारणी(GUN MILAN SARNI) से कुंडली मिलाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, दोनों के मध्य निश्छल प्रेम होने के बावजूद बहुत सारे अभिभावक और पंडित उनकी शादी न किये जाने के पक्ष में फैसला करते हैं। हालाँकि जहाँ समस्याएँ आती हैं, वहीँ समाधान भी होता है। गुण नहीं मिलने की स्थिति में पंडित कुछ ज्योतिषीय उपाय की व्यवस्था करवाते हैं।

    KUNDALI MILAN BY NAME (नामांक मिलान) 

    जन्म तिथि न होने की स्थिति में दोनों के नाम से भी मिलान किया जाता है। पंडितों का मानना है कि नाम के पहले अक्षर का महत्व बहुत अधिक होता है। इसलिए शादी से पहले वर-वधु नाम में बदलाव लाकर भी इस समस्या को सुलझा सकते हैं। प्रचलित नाम के उपयोग से या जन्मतिथि के उपयोग से सिर्फ कुंडली मिलान हो सकता है , पंडित मानते हैं कि दोनों के नाम का प्रभाव जीवन पर कुछ जरूर पड़ता है। पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' इससे भी इत्तेफाक नहीं रखता कि नाम को बदलकर ही आपस में शादी की जाये। 

    गाँवों में जब किसी के घर बच्चा पैदा होता था तो पंडित को बुलाकर उनकी सलाह से बच्चे का नामकरण किया जाता था । पंडित जन्म के समय के अनुसार चन्द्रमा के नक्षत्र के आधार पर नाम का पहला अक्षर बताते थे, जिससे बच्चे को नाम रखा जाता था, लेकिन आजकल कुंडली का नाम प्रचलित नाम नहीं होता, अभिभावक बिना किसी ज्योतिषी गणना के बच्चे के जन्म से पहले हीं या बाद में नाम रख लेते हैं। इसलिए इस नाम से कुंडली मिलान हमें तर्कसम्मत नहीं लगता । 

    ज्योतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

     MATCH MAKING KUNDALI FREE

    आपसी समायोजन की कमी के भाव और तलाक के बढ़ते मामलों ने आज इतना डर पैदा किया है कि  जिन परिवारों में कुंडली नहीं मिलाई जाती थी, वे भी अब मिलाकर शादी करना चाहते हैं। 21वीं सदी आ गयी है और चतुर्दिक विज्ञान का प्रभाव है। घर-घर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के बाद मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा घर-बैठे मिल जाने से कुंडली मिलान समाधान न होकर और बड़ी समस्या बन गयी है। क्योंकि किन्ही भी दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना काफी आसान हो गया है , पर इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं ।

    तार्किक बात की जाये तो मैं तो यही कहूंगी कि अपने परिवार, मित्र और रिश्तेदार के विवाहित जोड़ो की बायोडाटा लें, जिनकी बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और जिनकी काफी अच्छी निभ रही है या जिनकी कुंडली मिलाकर शादी हुई है और जिनकी नहीं निभ रही है , उन बायोडाटा को सॉफ्टवेयर में डालकर चेक करें। कम्प्यूटर और उसमें डाले गए इस प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। हमने तो यही समझा है, चेक करने के बाद आप भी पाएंगे कि वैवाहिक सुख कुछ तो भाग्य से आता है, कुछ आपसी समझ से आता है। 

    अगर कुंडली न मिले तो क्या करें ? 

    (AGAR KUNDALI NA MILE TO KYA KAREN)

     एक ज्योतिषी होने के नाते मेरा कर्तब्य है कि मै अभिभावकों को उचित राय दूं। मेरा उनसे अनुरोध हे कि वे पुरानी मान्यताओं पर ध्यान दिए बिना , कुंडली मेलापक की चर्चा किए बिना , अपने बच्चों का विवाह उपयुक्त पार्टनर ढूंढ़कर करें । बिना गुण मिलाये भी शादी हो सकती है। किसी मंगला और मंगली की शादी भी सामान्य वर या कन्या से निश्चिंत होकर की जा सकती है, मन में भ्रम न पालें।जिनकी कुंडली में वैवाहिक सुख है, वह मिलेगा ही. कुंडली को देखकर जब सभी भावों के बारे में सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है, तो किसी के वैवाहिक जीवन के बारे में भी बताया जा सकता है कि उनके जीवन में सुख है या नहीं ? 

    निष्कर्ष यही है कि यदि दोनों युवक युवती या दोनों परिवार एक दूसरे को अच्छे से जानते हों , सच्चा प्यार करते हों तो कुंडली न मिलने की स्थिति में विवाह से मुँह न मोड़ें। मतलब यह है कि दोनों पक्षों को सबकुछ पसंद है, दोनों पक्ष पूर्ण रूप से संतुष्ट है तो बेहतर हो कुंडली मिलाने को प्रोसेस ही छोड़ दिया जाये। हमारे यहाँ कहा ही गया है, अनजान सदा कल्याण ! जन्म-कुंडली नहीं मिलने पर भी शादी के बाद आपसी सहयोग के द्वारा आप अपने जीवन को सुखद बना सकते हैं। कोई समस्या आये तो एक दूसरे पर इल्जाम न लगाकर मिलकर समस्या से जुझा और उसका हल किया जा सकता है, मन को हमेशा मजबूत बनाये रखें। 

    अनजान परिवार, अनजान लड़के से रिश्ता करने जा रहे हों तो कुंडली से बहुत कुछ समझने, कुंडली मिलाने की बात हो सकती है, पर इसके लिए जानकार विद्वान् ज्योतिषी से संपर्क किया जाना चाहिए।  हमलोग सिर्फ चन्द्रमा और मंगल को ही नहीं , वैवाहिक सुख के लिए सभी ग्रहों , खासकर सातवे भाव को देखकर निर्णय लेते हैं। इस कार्य में हमारे केंद्र के 'गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञ' आपकी मदद कर सकते हैं। हमारे एप्प को डाउनलोड करें और हमसे  8292466723 पर संपर्क करें। 

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      सभी राशियों का साप्ताहिक फल

      SCORPIO RASHI KE BARE ME BATAYIYE



      SCORPIO RASHI KE BARE ME BATAYIYE

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      गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में

       राशिफल के हिसाब से चाहे स्वास्थ्य का मामला हो या धन का, करियर का मामला हो या संतान पक्ष का - राशि के हिसाब से १/१२ की आबादी पर सकारात्मक और १/१२ की आबादी पर ऋणात्मक प्रभाव देखा ही जायेगा। १०/१२ की स्थिति किसी भी दिन सामान्य रहेगी। 

      यह फल गोचर के ग्रहों पर आधारित है, इसलिए मनःस्थिति पर पूरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन बहुत बड़ी घटना नहीं होती है, जबतक जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों। गृह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए आप सफ़ेद रंग का वस्त्र धारण करें। गोचर पर आधारित  अपने ग्रह-फल को समझने के लिए हमारा गत्यात्मक ज्योतिष एप्प डाउनलोड करें। इसमें आपपर पड़नेवाले एक एक गोचर के ग्रहों का पॉजिटिव- प्रभाव आपको लिखा मिलेगा। 

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        मानव-जीवन में नैतिक मूल्यों का पतन न होने दें

        Moral values meaning in hindi

        आप सबों ने सुना ही होगा, गेहूँ के साथ घुन पीसता है और फूलों के साथ कीड़े मकोड़े भगवान् को अर्पित किये जाते हैं। आप जिस भी परिवार, समाज, जाति, धर्म, जिला, राज्य, देश - के अंग हैं, उससे आपकी पहचान अलग नहीं होती। आज रामायण सीरियल का प्रसंग है, मिथिला की बालिका सीता जी के दुःख से दुखी है और कह रही है कि वह मिथिला के एक एक दीवाल पर लिखेगी कि मिथिला की बेटियों की शादी अयोध्या में न की जाये। और ऐसा ही हुआ, मिथिला के लोग श्रीराम को ईश्वर का रूप मानकर पूजा तो करते हैं, पर बेटियों की शादी अयोध्या में करना नहीं चाहते। 

        unity is strength

        जंगल के पशु समझते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर किसी भी समस्या का समाधान मुश्किल है, सभी बड़ी समस्याओं का मुकाबला मिलजुलकर करते हैं। प्राचीन काल से हम मनुष्यों ने भी प्रकृति की बड़ी बड़ी चुनौतियों से आपस में मिलजुलकर निबटा है। पर इस सदी के आरम्भ में हम भ्रम में आ गए, देश, राज्य, समाज, परिवार को छोड़कर अपने अस्तित्व पर मिथ्याभिमान हो गया। कोरोनावायरस ने फिर ऐसी स्थिति को जन्म दिया है, इसकी चेन को तोड़ने के लिए हमें मिलजुलकर काम करना चाहिए। पर ऐसे समय में भी कुछ स्वार्थभरा काम कर रहे हैं, कई क्षेत्रों में कानून का पालन हो रहा है, कई क्षेत्रों में बिलकुल नहीं। उस क्षेत्र में कुछ गड़बड़ हुई तो आगे चलकर परिणाम सबके लिए घातक होंगे।

        naitik mulyon ka patan

        २५-५० साल की मानव की जीवनशैली पर गौर कीजिए, हर काम को पैसे में आंकने की आदत आयी है। सबने खुद को पैसे कमाने की मशीन बना लिया है। डॉक्टर हॉस्पिटल में सामान्य इलाज कर रहे थे, प्राइवेट प्रैक्टिस पर विशेष । शिक्षक स्कूलों में सामान्य पढाई करवा रहे थे, ट्यूशन में विशेष मेहनत करते थे। मजदूर किसी का काम करने में लापरवाही कर रहे थे, ठेका लेने पर पूरी मेहनत करते थे। सरकारी कर्मचारी बिना पैसों के किसी पेपर पर हस्ताक्षर कर दे, यह संभव ही नहीं था। सामान या सेवा की कमी क्या हुई, नंबर सिस्टम की धज्जियाँ उड़ जाती थी। भ्रष्टाचारियों की कमी नहीं, सारे सामान ब्लैक में मिलने शुरू हो जाते थे। हालाँकि ऑनलाइन व्यवस्था होने से बहुत जगहों पर पारदर्शिता आयी, पर पैसों के लिए लोगों को मौके की तलाश रही। इस तरह हर जरूरत को पूरी करने में समर्थ साधन 'पैसा' कब साध्य बन गया, पता भी न चला। समाज में बढ़ती हुई पैसों की जरूरत ने सारे नैतिक मूल्यों को तहस-नहस कर दिया।


        moral values

        naitik mulya in hindi


        नागरिक ही समाज और देश की इकाई होते हैं। ये एकजुट हो जाएँ, तो भ्रष्टाचारियों को अपनी आदत छोड़नी पड़ती है। अच्छे-अच्छे लोगों ने नैतिक मूल्यों स्थापित करने की पहल भी की , पर समाज क्या किया, इसे रोकना छोड़ सभी उनका अंधानुकरण करने लगें। मेहनत तो भारी लगता है, पैसों से सब सुविधाएँ मिल जाती हैं, पैसों के लिए सारे नियम ताक पर रख दिए हमने। हमने विलासिता पूर्ण जीवन जीने के लिए सुविधाएँ एकत्रित कर लीं, बड़े-बूढ़ों की सीख पर बहस करनी शुरू कर दी, उन्हें वृद्धाश्रम तक का रास्ता दिखा दिया। अंत में मिला क्या ? लोगों का एक दूसरे पर विश्वास समाप्त हुआ, समाज अविश्वास के भयानक जाल में घिर गया। सब सुख प्राप्त कर पर्यावरण खराब करके हमने कई तरह की बीमारी को जन्म दिया, बीमारी की वजह से जीभ का स्वाद छोड़कर रोटी-चावल अपनाना पड़ा, रोज जिम जाने की आदत डालनी पडी। मेहनत तो करनी ही पड़ेगी, ईश्वर ने तो गरीब और अमीर में कोई फर्क नहीं बनाया है।

        moral values in hindi

        आज कोरोना वाइरस ने हमें सीखा दिया है कि भोजन, वस्त्र, आवास के साथ जीवन जीने के मूल्यों की जानकारी ही हमारी मुख्य आवश्यकता है, जिसके लिए हमारा स्वावलम्बी होना आवश्यक है। विकास को कभी भी विनाश का रास्ता नहीं बनने देना चाहिए। किसी भी युग में किसी भी समाज में यदि असामाजिक तत्व उपस्थित होते हैं तो महात्मा भी होते हैं। समाज की एक इकाई होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य होना चाहिए कि हम तन, मन, धन और दिमाग, जो भी हमारे पास है, लगाकर असामजिक तत्वों को समाप्त करें और समाज को अच्छे विचार देनेवालों का प्रचार-प्रसार करें। नहीं तो गेहूं के साथ घुन पीसते ही रहेंगे, आप चाहकर भी खुद को इससे अलग नहीं कर सकते। अभी भाई समय है, आईये समाज में सकारात्मक विचारों का प्रचार प्रसार करे, नकारात्मक मुद्दों का खात्मा करें।


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          भविष्य को देखने-समझने-उपाय की विधाएँ

          Jyotish shastra in Hindi

          मनुष्य भूतकाल के अनुभव  की परिस्थितियों के हिसाब से  विश्वास नहीं रखता, भविष्य को समझने में  माथापच्ची  है।  आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है, भविष्य को समझने के लिए ज्योतिष शास्त्र के इतने सिद्धांत यूँ  ही नहीं बन गए। 

          शारीरिक बनावट के आधार पर

          1. सामुद्रिक विद्या भी भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे की रेखा सहित संपूर्ण शरीर की बनावट का अध्ययन कर व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को बताया जाता है।
          1. अंगूठे के आधार पर भविष्य-कथन की विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसके अनुसार अँगूठे की छाप लेकर उस पर उभरी रेखाओं का अध्ययन कर बताया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा होगा।
          1. हस्तरेखा ज्योतिष तो काफी प्रचलित और मान्य है, हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के अलावा, हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि का अध्ययन कर व्यक्ति का भूत और भविष्य बताया जाता है

          शकुन पद्धति के आधार पर

          1. टैरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना भविष्य या भाग्य जानने के लिए टैरो कार्ड के जानकार के पास जाता है तो वह जानकार एक कार्ड निकालकर उसमें लिखा उसका भविष्य बताता है।
          1. आपने  पिंजरे के तोते से कार्ड निकलवाकर भविष्य निकालते भी देखा होगा।
          1. बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन पर लगी मशीन में भी एक रुपए का सिक्का डालकर भविष्य देखा जाता है।
          1. किसी मेले में एक कम्प्यूटर भी आपके भविष्य को बताने के लिए तैयार कर  रखा जाता  है।

          चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

          पशु-पक्षी  के आधार पर

          1. पंच पक्षी सिद्धान्त एक भारतीय पद्धति है,  इसके अंतर्गत आने वाले पाँच पक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। इसमें आपका जन्मविवरण माँगा जाता है, उस आधार पर आपका पक्षी निकाला जाता है, उसी के आधार पर भविष्य बताया जाता है।
          1. चीनी ज्योतिष पशुओं के नाम - चूहा, बैल, चीता, बिल्ली, ड्रैगन, सर्प, अश्व, बकरी, वानर, मुर्ग, कुत्ता और सुअर - के आधार पर प्रत्येक वर्ष एक पशु के नाम किया जाता है और वह पशु आपके लिए कैसा होगा, देखकर पुरे वर्ष का राशिफल निकाला जाता है।

          Jyotish Shastra hindi


          क्षेत्रीय ज्योतिष

          1. नाड़ी ज्योतिष :- दक्षिण भारत में बहुत अधिक प्रचलित विद्या है, मन जाता है कि ताड़ के पत्तों में सबका भविष्य लिखा होता है। 

          1. इसके अलावा कई देशों  की अपनी अलग ज्योतिष धारणाएँ हैं, पर्शियन, माया, हेलेनिस्टिक, इस्लामिक, सेल्टिक, बेबिलोनी आदि , जिनके हिसाब से भी भविष्यवाणियाँ की जाती हैं ।

          जन्मसमय के अभाव में

          1. अंक विद्या - ने भी बाजार में जगह बनायी। जन्मतिथि के आधार पर ० से ९ तक का मूलांक निकालना और उसके आधार पर भविष्य की जानकारी देना तो पूरी दुनिया को ९ भाग में बाँट देना है, पर सहजता भी कभी कभी लोकप्रिय हो जाती है।
          1. प्रश्नकुंडली -  इस पद्धति में जिज्ञासु को प्रश्न पूछना होता है, प्रश्न पूछने के समय को आधार मानकर कुंडली बनाई जाती है और पूछे गए प्रश्न का उत्तर निकाला जाता है।

          उपाय के ज्योतिष (Jyotish shastra Hindi)

          1. लाल किताब -इसमें भी कुंडली देखने की जरूरत नहीं होती, आपके सभी समस्या के लिए कुछ न कुछ उपाय बता दिया जाता है। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर हाल  इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित किया गया।

          1. वास्तुशास्त्र  - कुछ दिनों से मकान बनाने के विज्ञान को भाग्य देखने के काम में लाया जाने लगा, भाग्य बनाने के लिए न जाने कितने मकानों को बेवजह  जाने लगा। 
          1. फेंगशुई के टोटके - भाग्य को बदलने के लिए चीन से कई टोटके आने लगे, देश के अंधविश्वासियों को कुछ फ़ायदा हुआ या नहीं, भारत के बाजार ने चीन को बना दिया। 
          1. मुहूर्त  - काम के शुरुआत में देखा जाता है,  मान्यता है कि अच्छे मुहूर्त में काम की शुरुआत होने से काम सफल होता है। 
          1. कर्मकांड - भी ग्रहों के प्रभाव से  बचने की  विधा है।  माना जाता है कि ख़ास देवता के पूजन, खास पेड़ों की पूजा और दीप प्रज्वलन आदि के द्वारा हम ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। 

          वैदिक ज्योतिष

          1. जन्मकुंडली - यदि वेद को सबसे पुराना ग्रन्थ माना जाये तो  वैदिक ज्योतिष शास्त्र को भी भविष्य की सबसे पुरानी विधि मानी जानी चाहिए। वेद में ज्योतिष के दो भाग थे - गणित ज्योतिष शास्त्र और फलित ज्योतिष शास्त्र। गणित ज्योतिष में आसमान के ग्रह , नक्षत्रों, उनकी गति का अध्ययन किया जाता था।  इन्ही ग्रहों की चाल का पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव का अध्ययन फलित ज्योतिष में किया जाता था।

          1.  नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र - जन्मकुंडली के राशि और नक्षत्र के आधार पर बच्चों के नाम रखे जाने की परंपरा थी। जन्मकुंडली नहीं होने की स्थिति में उसी नाम के आधार पर बच्चों का भविष्य देखा जाता था। यहाँ तक की जन्म कुंडली मिलान भी वर-वधु के नक्षत्र से  था। 
          गत्यात्मक ज्योतिष 
          आज के आधुनिक जीवनशैली में ज्योतिष को गत्यात्मक बनाने वाली इस विधा ने बुद्धिजीवियों को भी ज्योतिष पर विश्वास दिलाने को तैयार है। यह विधा किसी के भी जन्मतिथि और जन्मसमय से उसके पुरे जीवन के उतार चढ़ाव को समझ जाती है। इसके वैज्ञानिक अंदाज दिन ब दिन लोगों के मध्य लोकप्रिय हो रहे हैं। 

          अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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            फलित ज्योतिष : सांकेतिक विज्ञान

            jyotish kya hai ?

            पूरे विश्व में लगभग दो घंटे में पैदा होनेवाले बच्चे की संख्या 300 से अधिक होती है , जिनकी जन्मकुंडली एक जैसी होती है। लेकिन उनमें से सभी एक जैसी उंचाई हासिल नहीं करते। उंचाई हासिल करने के लिए परिस्थिति और मेहनत के साथ-साथ प्रेरक तत्वों का भी काफी महत्व है। बहुत से ज्योतिषी किसी जन्मकुंडली में राम , कृष्ण , बुद्ध , महावीर , इंदिरा गॉधी या महात्मा गॉधी जैसों की कुंडली का कोई एक योग दंखकर ही कह उठते हैं–`अरे , तुम्हारी कुंडली में तो —————योग है। यह ग्राहकों को खुश करने की चाल होती है। एक योग में पैदा होनेवाले सभी बच्चों में से कोई मजदूर तो कोई कलर्क , कोई ऑफिसर तो कोई व्यवसायी और कोई मंत्री के घर पैदा होता है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व-निर्माण में आर्थिक , शैक्षणिक और अन्य वातावरण ग्रह से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। 


            jyotish kya hai

             jyotish vidya

            बदलते युग के साथ-साथ ग्रह के प्रभाव में भी परिवर्तन होता है। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत संतान पक्ष है , तो मातृ प्रधान युग के लिए तथा आज के युग में एक वेश्या के लिए लड़की का संकेतक हो सकता है , जबकि पितृप्रधान युग में वही योग लड़के की अधिकता का संकेतक होगा। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग है , तो वह प्राचीनकाल में घोड़े , हाथी आदि का संकेतक था , किन्तु आज वह स्कूटर , मोटरसाइकिल और कार का संकेतक है। किसी जन्मकुंडली में असाध्य रोग से ग्रस्त होने का योग है , तो वह किसी युग में व्यक्ति को टी बी का मरीज बनाता था , उसके बाद कैंसर का और आज वही योग उसे एड्स का मरीज बना देता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में उत्तम विद्या का योग हो तो वह प्राचीनकाल में किसी प्रकार की विद्या की जानकारी देता था , उसके बाद बी ए और एम ए की डिग्री तथा आज वह एम बी ए और एम सी ए जैसी डिग्री दिलाने में सहायक होता है।

            jyotish gyan

            वातावरण में परिवर्तन भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन ले जाता है। किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है , ताकि वे बड़े होकर परिवार की आमदनी बढ़ाएं , किन्तु एक ऑफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू की वृद्धि करेगा। किसी जन्मपत्री में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी , बड़े व्यवसायी के लिए ऐयाश और ऑफिसर के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा। । किसी किसान के पुत्र की कुंडली में उत्तम विद्या का योग होने से वह ग्रज्युएट होगा , किन्तु किसी ऑफिसर के पुत्र का वही उत्तम योग उसे आई ए एस बना सकता है। किसी किसान के लिए उत्तम मकान का योग उसे पकके का दोमंजिला मकान ही दे सकता है , किन्तु एक बड़े व्यवसायी का वही योग उसे एक शानदार बंगला देगा। किसी कुंडली में बाहरी स्थान से संपर्क का योग किसी ग्रामीण को शहरी क्षेत्र का , किसी शहरी व्यक्ति को महानगर का तथा महानगर के व्यक्ति के लिए विदेश के भ्रमण का कारण बन सकता है। किसी कुडली में ऋणग्रस्तता का योग एक साधारण व्यिक्त् को 500-1000 का तथा बड़े व्यवसायी को करोड़ों का ऋणी बना सकता है।

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            अलग अलग देश और प्रदेश के अनुसार भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन आता है। किसी विकसित देश में किसी महिला का प्रतिष्ठा का योग उसे प्रतिष्ठित नौकरी देगा , जबकि भारत के ग्रामीण क्षेत्र की महिला को सिर्फ अच्छा घर-वर ही प्रदान कर सकता है। किसी लड़की की कुंडली में दृष्ट हल्का कमजोर पति पक्ष भारत में सिर्फ परेशानी देनेवाला होगा , जबकि अमेरिका जैसे देश में वह तलाक देने और दिलानेवाला होगा। आज भले ही हम अपने को विज्ञान के युग का समझकर ज्‍योतिष पर हंसे या उसे नकारे , पर वास्‍तव में ज्‍योतिष एक सांकेतिक विज्ञान है और यह मनुष्‍य के स्‍वभाव , बनावट और परिस्थितियों का पूरा पूरा संकेत देता है। ग्रह मानव मन और मस्तिष्‍क तक का नियंत्रक है। यह मानव मस्तिष्‍क को वैसा ही व्‍यवसाय , वैसी ही नौकरी और घरवर चुनने के लिए प्रेरित करता है , जैसा उसे उसकी जन्‍मपत्री के अनुसार मिलना चाहिए ।

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            आज इस क्षेत्र में नए नए आविष्‍कार की आवश्‍यकता है। इस क्षेत्र का विकास तब ही होगा , जब कुछ पढे लिखे लोगों का ध्‍यान इस ओर आकर्षित होगा और वे अपना कुछ समय इस प्राचीन गौरवपूर्ण विज्ञान को समर्पित कर पाएंगे । विश्‍वविद्यालय को भी इस क्षेत्र में काम करनेवालों को सम्‍मानित करना पडेगा , जिस दिन ऐसा हुआ ज्‍योतिष विज्ञान की दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति शुरू हो जाएगी । हमने ज्योतिष को आज के युग के अनुरूप विक्सित किया है।  हमारा ज्योतिष सॉफ्टवेयर किसी के पुरे जीवन के उतर-चढ़ाव का ग्राफ खिंच सकता है।  उसके जीवन में विभिन्न मामलों का सुख-दुःख प्रतिशत में बता सकता है। इससे  बढ़कर हमारा एप्प है जो आपके ऊपर प्रतिदिन के ग्रहों का प्रभाव भी बतला सकता है। हमारे इस प्रयास ने ही ज्योतिष को विज्ञान का दर्जा दे दिया है। 

            अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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