ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान (ओशो)

Osho Jyotish Vigyan

बहुत ही विवादास्‍पद विषय है ज्‍योतिष .. कुछ इसे विज्ञान मानते हैं .. तो कुछ धर्म से जोडकर देखते हैं .. कुछ अविकसित मानते हैं .. तो कुछ पूरा अंधविश्‍वास ही .. ओशों के शब्‍दों में जानिए .. आखिर क्‍या है ज्‍योतिष ??

ज्‍योतिष के बारे में लिखे गए ओशो के आलेख में से कुछ महत्‍वपूर्ण पंक्तियां ......

ऋग्वेद में, पंचानबे हजार वर्ष पूर्व ग्रह-नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी, उसका उल्लेख है। इसी आधार पर लोकमान्य तिलक ने यह तय किया था कि ज्योतिष नब्बे हजार वर्ष से ज्यादा पुराने तो निश्चित ही होनेचाहिए।

जीसस से छह हजार वर्ष पहले सुमेरियंस की यह धारणा कि पृथ्वी पर जो भी बीमारी पैदा होती है, जोभी महामारी पैदा होती है, वह सब नक्षत्रों से संबंधित है। अब तो इसके लिए वैज्ञानिक आधार मिल गएहैं।
osho jyotish vigyan

जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों के बीच जो संगीत की व्यवस्था होती है वह उस मनुष्य के प्राथमिक, सरलतम, संवेदनशील चित्त पर अंकित हो जाती है। वही उसे जीवन भर स्वस्थ और अस्वस्थ करती है।

कास्मिक केमिस्ट्री कहती है कि पूरा ब्रह्मांड एक शरीर है। उसमें कोई भी चीज अलग-अलग नहीं है, सब संयुक्त है। इसलिए कोई तारा कितनी ही दूर क्यों न हो, वह भी जब बदलता है तो हमारे हृदय की गति को बदल जाता है।

ज्योतिष कोई नया विज्ञान नहीं है जिसे विकसित होना है, बल्कि कोई विज्ञान है जो पूरी तरह विकसित हुआ था और फिर जिस सभ्यता ने उसे विकसित किया वह खो गई। और सभ्यताएं रोज आती हैं और खो जाती हैं। फिर उनके द्वारा विकसित चीजें भी अपने मौलिक आधार खो देती हैं, सूत्र भूल जाते हैं, उनकी आधारशिलाएं खो जाती हैं।

हम जानते हैं कि चांद से समुद्र प्रभावित होता है। लेकिन हमें खयाल नहीं है कि समुद्र में पानी और नमक का जो अनुपात है वही आदमी के शरीर में पानी और नमक का अनुपात है--दि सेम प्रपोर्शन। और आदमी के शरीर में पैंसठ प्रतिशत पानी है; और नमक और पानी का वही अनुपात है जो अरब की खाड़ी में है। अगर समुद्र का पानी प्रभावित होता है चांद से तो आदमी के शरीर के भीतर का पानी क्यों प्रभावित नहीं होगा?

अमावस के दिन दुनिया में सबसे कम लोग पागल होते हैं, पूर्णिमा के दिन सर्वाधिक। चांद के बढ़ने के साथ अनुपात पागलों का बढ़ना शुरू होता है। पूर्णिमा के दिन पागलखानों में सर्वाधिक लोग प्रवेश करते हैं और अमावस के दिन पागलखानों से सर्वाधिक लोग बाहर जाते हैं। अब तो इसके स्टेटिसटिक्स उपलब्ध हैं।

पक्षी एक-डेढ़ महीने, दो महीने पहले पता करते हैं कि अब बर्फ कब गिरेगी। और हजारों प्रयोग करके देख लिया गया है कि जिस दिन पक्षी उड़ते हैं, हर पक्षी की जाति का निश्चित दिन है। हर वर्ष बदल जाता है वह निश्चित दिन, क्योंकि बर्फ का कोई ठिकाना नहीं है। लेकिन हर पक्षी का तय है कि वह बर्फ गिरने के एक महीने पहले उड़ेगा, तो हर वर्ष वह एक महीने पहले उड़ता है।

जापान में एक चिड़िया होती है जो भूकंप आने के चौबीस घंटे पहले गांव खाली कर देती है। साधारण गांव की चिड़िया है। उस गांव के लोग समझ जाते हैं कि भाग जाओ। चौबीस घंटे का वक्त है, वह चिड़िया हट
गई है, गांव में दिखाई नहीं पड़ती। इस चिड़िया को कैसे पता चलता होगा?


मनुष्य अकेला प्राणी है जगत में जिसके पास बहुत सी चीजें हैं जो उसने बुद्धिमानी में खो दी हैं; और बहुत सी चीजें जो उसके पास नहीं थीं उसने बुद्धिमानी में उनको पैदा करके खतरा मोल ले लिया है। जो है उसे खो दिया है, जो नहीं है उसे बना लिया है।

असल में वही चीज अंधविश्वास मालूम पड़ने लगती है जिसके पीछे हम वैज्ञानिक कारण बताने में असमर्थ हो जाएं। वैसे ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक है। ज्योतिष कहता यही है कि इस जगत में जो भी घटित होता है उसके कारण हैं। हमें ज्ञात न हों, यह हो सकता है। आज तक आप जो हैं वह बीते हुए कल का जोड़ है। ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक चिंतन है।

भविष्य एकदम अनिश्चित नहीं है। हमारा ज्ञान अनिश्चित है। हमारा अज्ञान भारी है। भविष्य में हमें कुछ दिखाई नहीं पड़ता। हम अंधे हैं। भविष्य का हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता। नहीं दिखाई पड़ता है इसलिए हम कहते हैं कि निश्चित नहीं है। लेकिन भविष्य में दिखाई पड़ने लगे...और ज्योतिष भविष्य में देखने की प्रक्रिया है!


विज्ञान बहुत धीमी गति से चलता है। जब तक तथ्य पूरी तरह सिद्ध न हो जाएं तब तक इंच भी आगे सरकना उचित नहीं है। प्रोफेट्स, पैगंबर तो छलांगें भर लेते हैं। वे हजारों-लाखों साल बाद जो तय होगी, उसको कह देते हैं। विज्ञान तो एक-एक इंच सरकता है।

स्विस पैरासेलीसस नाम का एक चिकित्सक, उसने एक बहुत अनूठी मान्यता स्थापित की। और वह मान्यता आज नहीं कल सारे मेडिकल साइंस को बदलने वाली सिद्ध होगी। अब तक उस मान्यता पर बहुत जोर नहीं दिया जा सका, क्योंकि ज्योतिष तिरस्कृत विषय है--सर्वाधिक पुराना, लेकिनसर्वाधिक तिरस्कृत, यद्यपि सर्वाधिक मान्य भी।
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    16 टिप्‍पणियां:

    Udan Tashtari ने कहा…

    ये इतमिनान वाला आलेख है..बुकमार्क करके रखने योग्य..कल ट्रेन में छानेंगे. :)

    ललित शर्मा ने कहा…

    बुकमार्क कर लिया है
    अब फ़ुरसत में पढेंगे

    बहुत बढिया
    धन्यवाद्

    vandana gupta ने कहा…

    काफ़ी अच्छी जानकारी मिली……………॥शुक्रिया।

    अन्तर सोहिल ने कहा…

    ओशो को तो मैं नियमित पढता हूं जी
    मगर आपके लेख भी मिलते रहें तो
    अच्छा लगेगा

    प्रणाम

    राज भाटिय़ा ने कहा…

    संगीता जी गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष तो सच मै एक विद्धया है, या कहले एक बहुत पहले का विग्याण, इस के सामने आज का विग्याण तो नग्न है,

    Asha Lata Saxena ने कहा…

    A nice piece of writing.
    Asha

    रोमेंद्र सागर ने कहा…

    मैं हैरान था कि अभी तक अपने ओशो रजनीश कि इस छोटी सी मगर अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक का उल्लेख अपनी किसी चर्चा में कैसे नहीं किया ! आज इसे आपके ब्लॉग पर देख अच्छा लगा ! कोई भी व्यक्ती यदि ज्योतिष को मात्र अंधविश्वास मानकर उसकी अवहेलना करता है तो उसे यह छोटी सी पुस्तक अवश्य पढ़ लेनी चाहिए !

    बधाई ...और ढेरों शुभकामनायें !

    Gyan Dutt Pandey ने कहा…

    विश्वास और अन्धविश्वास के बीच कितना फासला होता है। शायद एक ही सिक्के के दो पहलू होते हों।

    सर्वदा शंकालु हो कर भी नहीं जिया जा सकता!

    प्रवीण ने कहा…

    .
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    आदरणीय संगीता जी,

    हम आपके ब्लॉग पर ओशो के शब्दों में क्यों जानें ज्योतिष को ? कौन ओशो ? पहले स्वयं को आचार्य फिर भगवान और अंत में ओशो घोषित करने वाले महानुभाव जिनके कम्यून में 'संभोग से समाधि तक' पहुंचाया जाता है...जो ससम्मान निष्काषित हुऐ दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र से ?

    आपके कुछ 'शब्द' इस प्रकार हैं:-

    ***इस तरह 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की प्रामाणिकता में तभी संदेह किया जाना चाहिए, जब 6 अप्रैल और 18 मई के अलावे भी किसी दिन बारिश होती है।

    ***मैं 20 वर्षों से लगातार आजमा रही हूं .. मुझे आजमाने की आवश्‍यकता नहीं .. आप आजमा कर देखें .. 6 और 7 अप्रैल को बारिश न होने पर मैने लिखा कि यदि इतने महत्‍वपूर्ण योग में बारिश नहीं हुई .. तो अब बारिश के कारण भीले ही यत्र तत्र लोगों की परेशानी बढे .. पर किसी क्षेत्र में इसके कारण गर्मी से राहत वाली बात नहीं दिखती है .. और भीषण गर्मी वाले क्षेत्रों में अभी तक बारिश नहीं हुई है .. इतने तापमान के बावजूद .. अब मेरी दी गयी दूसरी तिथि यानि 18 मई को ही बारिश हो .. तो भी क्‍या आप ग्रहयोगों को सामान्‍य ही कहेंगे ??


    आज ७ मई को बारिश हो रही है चहुं ओर, और तापमान है:- Maximum temperatures are below normal by 4-12°C over most parts of Haryana, by 6-10°C over most parts of Uttar Pradesh, by 5- 9°C over Uttarakhand, by 3-10°C over Punjab, by 3-5°C over Jammu & Kashmir and Himachal Pradesh and by 2-5°C over some parts of Orissa, Jharkhand and Chhattisgarh.
    कुछ प्रकाश डालिये... प्राकृतिक संतुलन इतना क्यों गड़बड़ कर रहा है ?

    अब जब इतना कन्फयूजन है तो विवाद तो होगा ही!

    Vinashaay sharma ने कहा…

    अच्छी जानकारी मिली,अब मेरे क्म्पुटर की विन्डो ठीक हो गयी है ।

    hem pandey ने कहा…

    'असल में वही चीज अंधविश्वास मालूम पड़ने लगती है जिसके पीछे हम वैज्ञानिक कारण बताने में असमर्थ हो जाएं।'

    - यही ज्योतिष के साथ हो रहा है.

    Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

    पूरा ज्ञान का पिटारा ..बढ़िया है.
    _______________
    पाखी की दुनिया में- 'जब अख़बार में हुई पाखी की चर्चा'

    arvind ने कहा…

    काफ़ी अच्छी जानकारी .बधाई ...और ढेरों शुभकामनायें

    जीवन का उद्देश ने कहा…

    बहुत सुन्दर लेख परन्तु यह अंधविश्वास का मामला है। यघपि यह सत्य होता तो ज्‍योतिष के बताए हुइ सम्पूर्ण खबर सच होता।

    Unknown ने कहा…

    ओशो ने यह भी तो कहा है कि १०० में से ९९ धोखाधडी़ है | वह १ % ज्योतिष कौन सा है ?? और शायद ओशो ने आज के कुंडली शास्त्र को ध्यान में रखकर ही बात कही है

    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

    उपयोगी जानकारी। अच्छे लिंक।
    दूसरों के ब्लॉग पर भी टिप्पणी दिया करो।