वैदिक अंक ज्योतिष

Ank vidya

अब हम कुछ देर के लिए न्यूमरोलॉजी या वैदिक अंक ज्योतिष की चर्चा करें। अंकविज्ञान के ज्ञाता विश्व के लोगों को 9 अंकों के आधार पर चारित्रिक विशेषताओं की दृष्टि से 9 भागों में बॉट देते हैं। ऐसा करने से प्रत्येक अंक में लगभग करोड़ों व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व होता है । एक अंक के अंतर्गत आनेवाले इतने सारे लोगों के गुण-दोष कभी भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं। स्मरण रहे , एक तिथि में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्तियों का मूलांक एक ही होगा। न्यूमरोलॉजी के अनुसार उन सभी व्यक्तियों के गुण-दोष एक जैसे होंगे , किन्तु फलित ज्योतिष इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता , क्योंकि लग्न बदलने के साथ ही भावाधिपत्य बदल जाने से ग्रहों के कार्य-कलाप के पहलू बदल जाते हैं , अत: भिन्न भिन्न लग्नों के सभी जातकों की चारित्रिक विशेषताएं बदल जाती हैं। एक दिन में बारह लग्न होते हैं। जब कोई व्यक्ति मूलांक के अनुसार उसके जीवन में घटित होनेवाली घटनाओं को मिलाना आरंभ करता है तो उसे लगता है कि उस व्यक्ति के साथ घटित होनेवाली सारी महत्वपूर्ण घटनाएं उसी मूलांक के समानांतर या सापेक्ष घटती चली गयी है , किन्तु बात वैसी नहीं होती । दरअसल मूलांक के अनुसार घटनेवाली किन्ही दस घटनाओं का चयन न्यूमरोलोजिस्ट अपनी सुविधानुसार कर देते हैं , जबकि महत्वपूर्ण घटनाओं की संख्या 90 के आसपास होती है। प्रत्येक अंक में घटित होनेवाली घटनाओं की संख्या दस के आसपास होती है।


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वैदिक अंक ज्योतिष को आधार मानकर किसी के जीवन की विशेष घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती , बुद्धि-विलास या माथापच्ची की बात भले ही हो जाए। अंकों को ग्रहों के गुण-दोष का कोई वैज्ञानिक आधार प्राप्त नहीं है। वैदिक अंक ज्योतिष में किसी खास तिथि का एक ही मूलांक होता है , जबकि फलित ज्योतिष मे एक तिथि में बारह लग्नों के अनुसार जातक की चारिति्रक विशेषताओं का उल्लेख किया जाता है। इसके बावजूद बुिद्धजीवी हम ज्योतिषियों से एक प्रश्न किया करते हैं- एक लग्न में हजारो लोग पैदा होते हैं , क्या सबकी मंजिल एक होती हैं ? तब इसके जवाब में ज्योतिषी नवमांश , षट्यांश या इससे भी सूक्ष्म नदीस्टोलॉजी की चर्चा करने का प्रयास करते हैं , चाहे सच्चाई जो भी हो या सुननेवाले को संतुष्टि हो या न हो। इतना तो मानना ही पड़ेगा कि फलित ज्योतिष में लग्न पर आधारित चर्चा काफी वैज्ञानिक है , फिर भी इससे सूक्ष्म फलित की तलाश है । इसकी तुलना में वैदिक अंक ज्योतिष काफी स्थूल है और एक तिथि पर आधारित मूलांक का वैज्ञानिक पक्ष कितना मजबूत हो सकता है , यह निस्संदेह विचारणीय है।

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