गणित ज्योतिष के गत्यात्मक सूत्र

Ganit jyotish

ज्योतिष की नयी शाखा ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ सिर्फ नाम से ही गत्‍यात्‍मक नहीं है , इसका नामकरण ऐसा किया गया है क्‍योंकि इसके द्वारा भविष्‍यवाणी करने का मुख्‍य आधार ग्रहों की गति ही है। सौरमंडल में भले ही सूर्य स्थिर हो और पृथ्‍वी उसकी परिक्रमा करती हो , पर फलित ज्‍योतिष पृथ्‍वी को स्थिर मानकर उसके सापेक्ष ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करता है। 

Jyotish math in hindi

गणित ज्योतिष के अनुसार पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से उसके सापेक्ष ग्रहों की गति में प्रतिदिन भिन्‍नता देखी जाती है, यहीं से हमें फलित ज्योतिष सूत्र मिले। यूं तो गणित ज्‍योतिष के सूर्य सिद्धांत में ग्रहों की इन गतियों की विभिन्‍नता की चर्चा हुई है , पर इसके अनुसार फलित पर प्रभाव पडने की चर्चा कहीं नहीं हुई। फलित पर ग्रहों की विभिन्‍न ग्रहों की गतियों का भिन्‍न भिन्‍न तरह के प्रभाव को देखते हुए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा’ ग्रह गति का निम्‍न प्रकार से वर्गीकरण और गणित ज्योतिष के हिसाब से फलित ज्योतिष सूत्र दिया गया है ....

Ganit jyotish sutra


Grah Gati ka Gyan

1. अति‍शीघ्री गति ... ग्रह वास्‍तविक तौर पर पृथ्‍वी से अधिक दूरी पर तथा सूर्य से कम की कोणात्‍मक दूरी पर हो तो ग्रह अतिशीघ्री स्थिति में होते हैं। बुध सूर्य से 0 डिग्री से 9 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा 2 डिग्री प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो अतिशीघ्री अवस्‍था में होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से 0 डिग्री से 30 डिग्री के मध्‍य हो तो अतिशीघ्री होते हैं। 'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 80 से 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है। 

2. शीघ्री गति ... अतिशीघ्री की तुलना में जब ग्रहों की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से और इनकी गति सामान्‍य से कुछ अधिक हो , तो ग्रह शीघ्री कहे जाते हैं। बुध सूर्य से 9 डिग्री से 24 डिग्री की दूरी पर तथा 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र 15 डिग्री से 40 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर और 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो शीघ्री अवस्‍था का होता है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की दूरी सूर्य से 30 डिग्री से 75 डिग्री के मध्‍य हो तो ये शीघ्री अवस्‍था के होते हें। 'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 60 से 80 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है। 

3. सामान्‍य गति ... इस समय ग्रह पृथ्‍वी से औसत दूरी पर होते हैं । सूर्य से बुध की कोणात्‍मक दूरी लगभग 27 डिग्री और शुक्र की सूर्य से कोणात्‍मक दूरी 45 डिग्री होती है , जबकि मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 90 डिग्री की दूरी पर सामान्‍य गति में होते हैं।   'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 40 से 60 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है। 

4. मंदगति ... विभिन्‍न ग्रह वक्री होने के पूर्व और मार्गी होने से पश्‍चात् इस दशा से गुजरते हैं। बुध 10.12 दिन पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने से 10;12 दिन पश्‍चात तक मंद गति में होता है। शुक्र वक्री होने से डेढ महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से डेढ महाने बाद तक मंद गति में होता है। बृहस्‍पति वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है। मंगल वक्री होने से दो महीने पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से दो महीने बाद तक मंद गति में होता है। शनि वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 30 से 40 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है। 

5. वक्री गति .... पृथ्‍वी से सापेक्षिक गति कम होने से ग्रह वक्री गति में देखे जाते हैं। इस समय पृथ्‍वी से ग्रहों की वास्‍तविक दूरी बहुत कम होने लगती है। बुध सूर्य से 18 कोणात्‍मक डिग्री की दूरी पर और शुक्र सूर्य से लगभग 30 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर स्थित हो तो वे वक्री होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 120 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर वक्री स्थिति में आते हैं। 'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 10 से 30 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है

6. अतिवक्री गति ... इस समय ग्रहों की वास्‍तविक दूरी पृथ्‍वी से निकटतम होती है। वक्री स्थिति में सूर्य से 0 से 9 डिग्री के मध्‍य बुध और वक्री स्थिति में सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री के मध्‍य शुक्र हो तो ऐसी स्थिति बनती है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 150 डिग्री से 180 डिग्री की दूरी पर अतिवक्री अवस्‍था में होते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' ऐसे ग्रहों को 0 से 10 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति देता है

ग्रहों की इन भिन्‍न भिन्‍न गति के कारण उनकी गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति का आकलन और उसके जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा अगले पोस्‍ट कुण्डली देखने का तरीका इन हिंदी  में की गयी है । 


इस वर्ष आसमान में दो चार महीनो से सभी ग्रहों की गति कम हुई है, सारे ग्रह पृथ्वी के निकट आ गए हैं। छह जुलाई को सभी ग्रहों की स्थिति नीचे चित्र में दिखाई जा रही है , इसलिए अभी कोरोना जैसी बड़ी मुसीबत पूरे विश्व को परेशान  कर रही है। नवंबर के बाद धीरे धीरे सारे ग्रह पृथ्वी से दूर होने लगेंगे, समस्या काफी कम हो जाएंगी। फोटो इस वेबसाइट से ली गयी है।

ज्योतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

ज्योतिषियों के लिए ----

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    भारत में श्रमिक दिवस

    Labour day kab manaya jata hai

    ये भी कोई पूछनेवाली बात है ? 1 मई 1886 से शुरुआत हुई है श्रमिक दिवस को मनाये जाने की। आधिकारिक तौर पर इसे मनाते हुए 132 साल हो गए, पर क्या बदला है ? कुछ टेक्निकल जानकारों को छोड़ दिया जाये, तो कल इनकी जो हालत थी, आज भी वही है। क्या इसके लिए जवाबदेह सिर्फ पूंजीवादी व्यवस्था है ? नहीं, मुझे तो लगता है कोई भी उनके शुभचिंतक नहीं। पता नहीं, ईश्वर ने उन्हें कौन सा जज्बा दिया है कि हर वक्त समाज की मदद के लिए एक मजबूत स्तम्भ बन जाते हैं वे।

    Labour day kab manaya jata hai



    लॉक डाउन में भी सबसे अधिक प्रभावित होनेवाला हमारा श्रमिक वर्ग ही है। इस समय पूरे भारतवर्ष से दो तरह की खबरें रही है -- जहाँ किसी प्रदेश, किसी शहर, किसी गाँव, किसी कंपनी,  किसी व्यक्ति द्वारा अच्छी व्यवस्था की, मतलब प्रशासन, समाज सेवियों,  कंपनियों,  पूंजीपतियों,  मंदिरों,  गुरुद्वारों के द्वारा  खाने-पीने की व्यवस्था की गयी है. जरूरतभर अनाज बांटे गए हैं, पुलिस चुस्त बनी हुई है, लोगों को जमा होने नहीं दिया जा रहा है, सेनिटाइज़ेशन किया जा रहा है तो वहीं किसी प्रदेश, किसी शहर और किसी गाँव से बुरी व्यवस्था की खबर भी, लोग खाने-खाने को मुंहताज हैं, अनाज किसी को मिला किसी को नहीं, पुलिस आराम कर रही है, लोग जमा हो रहे हैं, सैनिटीजसन की तो कुछ चर्चा नहीं है। इससे एक निष्कर्ष तो निकलता है, अच्छी व्यवस्था करने वाला पूरा प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को देने में पैसे खर्च कर रहा है। 

     बुरी व्यवस्था करनेवाला प्रदेश, शहर या गाँव केंद्र द्वारा दी गयी जिम्मेदारियाँ नहीं ले रहा है, जनता को भेजी गयी सुविधाओं को न बाँटकर पैसे बचा रहा है। बेईमानी के फल को भोगते हुए हमारे पूर्वजों ने देखा था, इसलिए हमेशा बच्चों को ईमानदारी की शिक्षा दिया करते थे। यह बात अलग है कि बाद में हमारे पाठ्यक्रम से नैतिक शिक्षा का विषय ही गायब कर दिया गया। कोरोना के इस भयंकर दौर में यदि कोई पैसे बचाकर ऊपर से नीचे तक इसे बाँटने जैसा भ्रष्टाचार करके यह सोच रहे हैं कि जनता की आह उन्हें नहीं लगेगी तो गलत सोच रहे, जनता की आह सबसे भारी होती है। इतना तो कहा ही जा सकता है कि देश मे स्वार्थियों की कमी नहीं है। नैतिक शिक्षा की बात भूल गए हो, बड़े बुजुर्गों द्वारा दीं गयी शिक्षा भूल गए हो पर आज प्रकृति की ताकत को तो पहचानो। आपत्तिकाल मे  दूसरे के हिस्से के पैसे मत रखो  नादानो !

    समाजवादी व्यवस्था में विकास नहीं होता, विकास के लिए पूंजीवाद आवश्यक है। आज के युग में पूंजीवादी व्यवस्थाकी आवश्यकता है, पर इसमें जो गड़बड़ी है वह यह कि लाभ को अधिकतम करने के लिए श्रमिकों का शोषण हो जाता है। यदि किसी उत्पादन या सेवा में लगे सभी कारकों, पूंजी, भूमि, श्रम,साहस और व्यवस्थापक के मध्य बराबरी का भुगतान हो तो आज के युग के लिए सबसे बड़ी सामाजिक व्यवस्था होगी।
    एक काम की बात और, शारीरिक मजदूरों की और तो सबका ध्यान जाता है, इसके विकास के लिए लोग प्रयत्नशील भी है, न्यूनतम मजदूरी भी तय कर दी गयी है। पर बौद्धिक मजदूरों की हालत भी आज अच्छी नहीं, कहीं कहीं तो शारीरिक श्रम की तुलना में मानसिक श्रम का मूल्य कम है। लाचारी काम पैसों में ही पढ़े लिखे लोगों को श्रम करने को मजबूर करती है। सरकार का ध्यान उनकी और भी जाये, क्योंकि बुद्धिजीवियों की आर्थिक स्थिति ख़राब हो तो समाज पर बहुत ख़राब प्रभाव पड़ता है।

    श्रमिक दिवस की अनंत शुभकामनाये !!

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      अगले सप्ताह मीन राशि वाले

      Agle saptah meen rashi walon ko kya Karna chahie ?

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       अन्य ग्रहों की तरह ही पृथ्वी भी एक ग्रह है और भूमण्डल में होने वाले किसी भी परिवर्तन को ग्रहों के फल में ही जोड़कर देखा जायेगा। अभी भी चाहे स्वास्थ्य का मामला हो या धन का, करियर का मामला हो या संतान पक्ष का - राशि के हिसाब से १/१२ की आबादी पर सकारात्मक और १/१२ की आबादी पर ऋणात्मक प्रभाव देखा ही जायेगा। १०/१२ की स्थिति किसी भी दिन सामान्य रहेगी। 

      agle saptah meen rashi walon ko kya karna chahie ?

      भाग -2 

      ७-८-९ मई )


      यह फल गोचर के ग्रहों पर आधारित है, इसलिए मनःस्थिति पर पूरा प्रभाव पड़ेगा। ५ मई से शुरुआत होनेवाले सप्ताह में ग्रह-स्थिति अच्छी नहीं है, आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पद सकता है, पर मीन राशिवालों के लिए कुछ खास गड़बड़ है, इसलिए उन्हें सावधानी बरतने की आवश्यकता है। खासकर ७-८-९ मई को कुछ कठिनाई उपस्थित हो सकती हैं, मीन राशि वालों में ही मेष लग्न वाले धन, भाई-बंधु, संतान, पढ़ाई-लिखाई, रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, घर-गृहस्थी की कमजोरी, वृष लग्न वाले स्वास्थ्य , धन, भाई-बंधु, संतान, पढ़ाई-लिखाई, रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, मिथुन लग्न वाले खर्च, बाहरी सम्बन्ध, स्वास्थ्य , धन, भाई-बंधु, संतान, पढ़ाई-लिखाई, कर्क लग्नवाले लाभ, खर्च, बाहरी सम्बन्ध, स्वास्थ्य , धन, भाई-बंधु, संतान, सिंह लग्नवाले करियर, राजनीति, लाभ-खर्च, बाहरी सम्बन्ध, स्वास्थ्य , धन, भाई-बंधु, कन्या लग्नवाले भाग्य, लाभ-खर्च, बाहरी सम्बन्ध, स्वास्थ्य , धन, तुला लग्नवाले रूटीन, भाग्य, करियर, लाभ-खर्च, बाहरी सम्बन्ध, स्वास्थ्य , वृश्चिक लग्न वाले घर-गृहस्थी, रूटीन, भाग्य, करियर, लाभ-खर्च, बाहरी सम्बन्ध, धनु लग्नवाले रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, घर-गृहस्थी, रूटीन, भाग्य, करियर, लाभ, मकर लग्न वाले पढ़ाई-लिखाई, संतान, रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, घर-गृहस्थी, रूटीन, भाग्य, पिता , करियर, कुम्भ लग्नवाले माता, पढ़ाई-लिखाई, संतान, रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, घर-गृहस्थी, रूटीन, भाग्य और मीन लग्न वाले भाई-बंधु , माता, पढ़ाई-लिखाई, संतान, रोग-ऋण-शत्रु जैसे झंझट, घर-गृहस्थी, रूटीन आदि मामलों की तकलीफ उपस्थित होगी ।

      भाग -1 

      ( २-३ और ४ मई )


      कल से एक सप्ताह आसमान में विभिन्न ग्रहों की जो स्थिति बन रही है, उसमें चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थिति मजबूत बनी रहेगी, जिसके कारण अधिकांश लोग माहौल से खुश रहेंगे। पर मीन राशिवाले कुछ अधिक ही अनुकूल माहौल  प्राप्त करेंगे। खासकर २-३ और ४ मई  मंगल, शनि और बृहस्पति का बहुत ही शुभ प्रभाव उनपर पड़नेवाला है, ५-६-७ मई उसकी तुलना में थोड़ा सामान्य रहेगा। मीन राशिवाले लोगों में ही मेष लग्न वाले स्वास्थ्य,माता पक्ष, स्थायित्व, भाग्य, खर्च, करियर, जीवनशैली और लाभ के मामलों की मजबूती , वृष लग्न वाले भाई-बंधू पक्ष, घर-गृहस्थी, रूटीन, भाग्य, करियर और लाभ-खर्च के मामलों की  मजबूती , मिथुन लग्न वाले धन-कोष, घर-गृहस्थी, रूटीन, झंझट, लाभ,  करियर की  मजबूती , कर्क लग्नवाले स्वास्थ्य, झंझट, घर-गृहस्थी, रूटीन, संतान, करियर और भाग्य की  मजबूती , सिंह लग्नवाले खर्च, संतान पक्ष, झंझट, माता, स्थायित्व, घर-गृहस्थी और रूटीन की  मजबूती , कन्या लग्न वाले लाभ के वातावरण, माता, स्थायित्व , संतान, झंझट, भाई-बंधी, जीवनशैली और घर-गृहस्थी की  मजबूती , तुला लग्नवाले करियर, भाई-बंधू, माता, स्थायित्व, धन, घर-गृहस्थी, संतान, और झंझट की  मजबूती , वृश्चिक लग्न वाले भाग्य, धन, भाई-बंधू, माता, स्थायित्व, संतान पक्ष की  मजबूती , धनु लग्नवाले रूटीन, स्वास्थ्य, धन, भाई-बंधू, माता, संतान, खर्च, स्थायित्व की मजबूती , मकर लग्नवाले घर-गृहस्थी, माता, स्वास्थ्य, धन, माता, स्थायित्व, लाभ और भाई-बंधू की मजबूती , कुम्भ लग्नवाले किसी प्रकार के झंझट, पिता, करियर, भाई-बंधू, धन-लाभ, खर्च और स्वास्थ्य की मजबूती , मीन लग्नवाले संतान पक्ष, स्वास्थ्य, भाग्य, धन, लाभ-खर्च और करियर से सम्बंधित मजबूती प्राप्त करेंगे। जन्मकालीन ग्रहों के हिसाब से कोई मामले कम और कोई अधिक ख़ुशी  देनेवाले बन सकते हैं। लेकिन बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं होती है, जबतक जन्मकालीन ग्रह भी मजबूत न हों।  

      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        गत्‍यात्‍मक क्यों है ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’

         

        फलित ज्योतिष सूत्र

        ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ सिर्फ नाम से ही गत्‍यात्‍मक नहीं है , इसका नामकरण ऐसा किया गया है क्‍योंकि इसके द्वारा भविष्‍यवाणी करने का मुख्‍य आधार ग्रहों की गति ही है। सौरमंडल में भले ही सूर्य स्थिर हो और पृथ्‍वी उसकी परिक्रमा करती हो , पर फलित ज्‍योतिष पृथ्‍वी को स्थिर मानकर उसके सापेक्ष ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करता है। पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से उसके सापेक्ष ग्रहों की गति में प्रतिदिन भिन्‍नता देखी जाती है, यहीं से हमें फलित ज्योतिष सूत्र मिले। यूं तो गणित ज्‍योतिष के सूर्य सिद्धांत में ग्रहों की इन गतियों की विभिन्‍नता की चर्चा हुई है , पर इसके अनुसार फलित पर प्रभाव पडने की चर्चा कहीं नहीं हुई। फलित पर ग्रहों की विभिन्‍न ग्रहों की गतियों का भिन्‍न भिन्‍न तरह के प्रभाव को देखते हुए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा’ ग्रह गति का निम्‍न प्रकार से वर्गीकरण और फलित ज्योतिष सूत्र दिया गया है ....

        falit jyotish sutra

        1. अति‍शीघ्री गति ... गत्यात्मक ज्योतिष के फलित ज्योतिष सूत्र के अनुसार ग्रह वास्‍तविक तौर पर पृथ्‍वी से अधिक दूरी पर तथा सूर्य से कम की कोणात्‍मक दूरी पर हो तो ग्रह अतिशीघ्री स्थिति में होते हैं। बुध सूर्य से 0 डिग्री से 9 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा 2 डिग्री प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो अतिशीघ्री अवस्‍था में होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से 0 डिग्री से 30 डिग्री के मध्‍य हो तो अतिशीघ्री होते हैं।

        2. शीघ्री गति ... अतिशीघ्री की तुलना में जब ग्रहों की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से और इनकी गति सामान्‍य से कुछ अधिक हो , तो ग्रह शीघ्री कहे जाते हैं। बुध सूर्य से 9 डिग्री से 24 डिग्री की दूरी पर तथा 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र 15 डिग्री से 40 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर और 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो शीघ्री अवस्‍था का होता है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की दूरी सूर्य से 30 डिग्री से 75 डिग्री के मध्‍य हो तो ये शीघ्री अवस्‍था के होते हें।

        3. सामान्‍य गति ... इस समय ग्रह पृथ्‍वी से औसत दूरी पर होते हैं । सूर्य से बुध की कोणात्‍मक दूरी लगभग 27 डिग्री और शुक्र की सूर्य से कोणात्‍मक दूरी 45 डिग्री होती है , जबकि मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 90 डिग्री की दूरी पर सामान्‍य गति में होते हैं।

        4. मंदगति ... विभिन्‍न ग्रह वक्री होने के पूर्व और मार्गी होने से पश्‍चात् इस दशा से गुजरते हैं। बुध 10.12 दिन पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने से 10;12 दिन पश्‍चात तक मंद गति में होता है। शुक्र वक्री होने से डेढ महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से डेढ महाने बाद तक मंद गति में होता है। बृहस्‍पति वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है। मंगल वक्री होने से दो महीने पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से दो महीने बाद तक मंद गति में होता है। शनि वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है।

        5. वक्री गति .... पृथ्‍वी से सापेक्षिक गति कम होने से ग्रह वक्री गति में देखे जाते हैं। इस समय पृथ्‍वी से ग्रहों की वास्‍तविक दूरी बहुत कम होने लगती है। बुध सूर्य से 18 कोणात्‍मक डिग्री की दूरी पर और शुक्र सूर्य से लगभग 30 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर स्थित हो तो वे वक्री होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 120 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर वक्री स्थिति में आते हैं।

        6. अतिवक्री गति ... इस समय ग्रहों की वास्‍तविक दूरी पृथ्‍वी से निकटतम होती है। वक्री स्थिति में सूर्य से 0 से 9 डिग्री के मध्‍य बुध और वक्री स्थिति में सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री के मध्‍य शुक्र हो तो ऐसी स्थिति बनती है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 150 डिग्री से 180 डिग्री की दूरी पर अतिवक्री अवस्‍था में होते हैं।

        इस तरह फलित ज्योतिष सूत्र के अनुसार ग्रहों की इन भिन्‍न भिन्‍न गति के कारण उनकी गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति का आकलन और उसके जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा अगले पोस्‍ट में की जाएगी।

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          गणित के जवाब में ‘=’ ‘>’ ‘<’ ‘=<’ ‘=>’

          ज्योतिष शास्त्र

          इसमें कोई शक नहीं कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ब्‍लागिंग की मदद से अपनी पहचान बना पाने में कामयाबी प्राप्‍त करता जा रहा है , पर कुछ दिनों से पाठकों द्वारा इसके द्वारा ज्‍योतिष शास्त्र के विज्ञान कहे जाने के विरोध में कुछ आवाजें भी उठ रही हैं। वैसे तो सबसे पहले मसीजीवी जी ने ज्‍योतिष शास्त्र को विज्ञान कहे जाने पर आपत्ति जतायी थी , पर अभी हाल में ज्ञानदत्‍त पांडेय जी के द्वारा यह प्रश्‍न उठाया गया तो मुझे काफी खुशी हुई , क्‍योंकि उनकी सकारात्‍मक टिप्‍पणियां हमेशा ही मेरा उत्‍साह बढाती आयी है। उनके बाद एक दो और पाठक भी इसी प्रकार के प्रश्‍न करते मिले हैं। आज उन सबके द्वारा उठाए गए प्रश्‍न का तर्कसंगत जवाब देना मैं उचित समझ रही हूं और शायद पहली बार हो रही इस प्रकार की सकारात्‍मक चर्चा करते हुए मुझे काफी खुशी भी हो रही है। मैं चाहूंगी कि इस प्रकार के और प्रश्‍न भी सामने आएं , मैं सबकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करूंगी।

          Ganit vishay

          सबसे पहले गणित विषय को ही लें। गणित में हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ ही नहीं होता है। इसमें किसी समीकरण का उत्‍तर ‘लगभग’ में होने के साथ ही साथ ‘>’ और ‘<’ या ‘=<’ और ‘=>’ में भी हो सकता है। कोई समीकरण ‘लिमिट’ में भी अपना जवाब देती है । सभी समीकरण एक सीधी रेखा का ही ग्राफ नहीं बनाती , पाराबोला और हाइपरबोला भी बना सकती है। गणित के संभावनावाद का सिद्धांत संभावना की भी चर्चा करता है। और चूंकि भौतिकी जैसा पूर्ण विज्ञान के भी सभी नियम गणित पर ही आधारित होते हैं , तो भला इसके भी हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ में कैसे दिया जा सकता है ? और बाकी विज्ञान जो भौतिकी की तरह पूर्ण विज्ञान न हो तो उसके प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में देना तो और भी मुश्किल है।

          jyotish shastra kya hai

          Signs of maths

          एलोपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में दिया जा सकता है , पर सबका दे पाना असंभव है , बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘लगभग’ और बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘संभावनावाद’ के नियमों के अनुसार दिया जा सकता है। पहले एक ही लक्षण देखकर चार प्रकार के बीमारी की संभावना व्‍यक्‍त की जाती है , जिससे पहले डाक्‍टरों को अक्‍सर दुविधा हो जाया करती थी , आज जरूर विभिन्‍न प्रकार के टेस्‍टों ने डाक्‍टरों का काम आसान कर दिया है , तो क्‍या पहले मेडिकल साइंस विज्ञान नहीं था ? अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिलने के बावजूद मौसम विज्ञान कहा जाता है , क्‍योंकि इस क्षेत्र में बेहतर भविष्‍यवाणी कर पाने की संभावनाएं दिखाई पड रही है। क्‍या भूगर्भ विज्ञान की भूगर्भ के बारे में की गयी गणना बिल्‍कुल सटीक रहती है ? नहीं , फिर भी उसे भूगर्भ विज्ञान कहा जाता है। संक्षेप में , हम यही कह सकते हें कि जरूरी नहीं कि वैज्ञानिक सिद्धांत हमें सत्‍य की ही जानकारी दे , जिन सिद्धांतो की सहायता से हमें सत्‍य के निकट आने में भी सहायता मिल जाए , उसे विज्ञान कहा जाता है।

          Jyotish science

          यदि ज्‍योतिष शास्‍त्र के नियमों की बात करें , तो इसके कुछ नियम बिल्‍कुल सत्‍य हैं , मौसम से संबंधित जिस सिद्धांत के बारे में कल चर्चा हुई , वह बिल्‍कुल सत्‍य है। ऐसा इसलिए है , क्‍योंकि इस नियम को स्‍थापित करने में ग्रहों को छोडकर सिर्फ भौगोलिक तत्‍वों का ही प्रभाव पडता है। र ज्‍योतिष के कुछ नियम सत्‍य के निकट भी होते हैं , और कुछ के बारे में तो सिर्फ संभावना ही व्‍यक्‍त की जा सकती है। ऐसा इसलिए होता है , क्‍योंकि उन नियमों पर सामाजिक , राजनीतिक , भौगोलिक या अन्‍य बहुत से कारकों का प्रभाव देखा जाता है । पर इसका अर्थ यह नहीं है कि ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान नहीं है।

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