धर्म, आध्यात्म और अंधविश्वास

 

Adhyatmik Vichar

हर प्रकार के ज्ञान में एक बारीक अंतर होता है। सबसे पहले मैं आध्‍यात्‍म को परिभाषित करना चाहूंगी। अपने शरीर की आवश्‍यकताओं की पूर्ति कर हर व्‍यक्ति सुख का अनुभव करते हैं , इस कारण इसे प्राप्‍त करने के लिए लगभग सारे व्‍यक्ति मेहनत करना चाहते हैं। इसके बाद मनुष्‍य के लिए उसके परिवार का स्‍थान आता है , जिन्‍हे सुख सुविधा देने में अपने सुख का कुछ त्‍याग करने में भी संतोष का अनुभव होता है। इस कारण उसके लिए भी मेहनत करने को कुछ को छोडकर सब तैयार रहते हैं। 

इसके आगे बढते हुए थोडे लोग अपने मुहल्‍ले , अपने समाज , अपने गांव से बढते हुए अपने राष्‍ट्र के लिए भी जीवन उत्‍सर्ग करने में पीछे नहीं हटते। उससे आगे भी कुछ लोग विश्‍व बंधुत्‍व की भावना से ओत प्रोत होते हैं , तो कुछ विश्‍व के समस्‍त चर अचर के कल्‍याण से भी आगे पूरे ब्रह्मांड के लिए अपने कार्यक्रम बनाया करते हैं। अपने स्‍वार्थ का त्‍याग करके अपने मन और मस्तिष्‍क के सोंच को व्‍यापक बनाना ही ‘आध्‍यात्‍म’ है । जब कोई व्‍यक्ति अपनी आत्‍मा के साथ विश्‍वात्‍मा, समस्‍त जड चेतन और ब्रह्मांडीय शक्ति को जोडने में समर्थ होता है, तो वस्‍तुत: वह आध्‍यात्मिकता की चरम सीमा को प्राप्‍त करता है।

what is gyan in hindi

अपने मस्तिष्‍क की बनावट के कारण सामान्‍यतया मनुष्‍य स्‍वार्थी होता है , अपने सुखों का परित्‍याग नहीं कर पाता , इसलिए ‘आध्‍यात्‍म’ के स्‍तर तक पहुंचे व्‍यक्ति को स्‍वयं महात्‍मा का दर्जा मिल जाता है , वैसे उनकी संख्‍या बहुत कम होती है। अपने विश्‍व कल्‍याण के लक्ष्‍य को पूरा करने के लिए उनलोगों के द्वारा मनुष्‍य के समक्ष नियमों की संहिता बनाकर पेश की जाती हैं। इसमें जन्‍म से मृत्‍यु तक मनुष्‍य के जीवन यापन के ऐसे तरीके की चर्चा होती हैं , जिससे उसका शारीरिक , मानसिक और नैतिक विकास सही हो सके। 

प्रकृति की एक एक वस्‍तु एक एक व्‍यक्ति में किसी न किसी प्रकार की विशेषता छुपी हुई है , जिनके समुचित उपयोग के लिए खास नियम बनाए जाते हैं। विभिन्‍न कर्मकांडों के माध्‍यम से उनका पालन कर व्‍यक्ति अपने स्‍वार्थों को त्‍याग कर विश्‍व के समस्‍त चर अचर के कल्‍याण से भी आगे पूरे ब्रह्मांड की सुरक्षा करने में समर्थ हो पाता है। इन्‍हीं नियमों की संहिता को ‘धर्म’ का नाम दिया जाता है, ताकि इन नियमों के पालन में मनुष्‍यों के द्वारा कोई लापरवाही न बरती जाए। इसके अनुसार विभिन्‍न काल और देश में भिन्‍न भिन्‍न प्रकार के ‘धर्म’ का विकास हुआ।

adhyatmik vichar

gyan kya hai

मानव का धर्म मानवीय गुण है , खुद पर संयम रखने के लिए हमें व्रत रखना चाहिए। इसके अलावे प्रकृति के जिन वस्‍तुओं से हमें सुख की प्राप्ति होती है , उनके प्रति श्रद्धावनत होना चाहिए। विवाह के सुअवसर पर गवाही के लिए बडी संख्‍या में लोगों की उपस्थिति होनी चाहिए , पति पत्‍नी अपने रिश्‍तों को आसानी से तोड न सके , इसके लिए बंधन बनाए गए। लेकिन जब धर्म के मूल उद्देश्‍य मानवता और सच्‍ची भक्ति को भूलकर लोग कर्मकांडों को ही सत्‍य समझ बैठते हैं , तो वहीं से भ्रम या अंधविश्‍वास की उत्‍पत्ति होती है। 

यहीं से विभिन्‍न धर्म के मध्‍य टकराव का भी आरंभ होता है , मेरा धर्म अच्‍छा और मेरा धर्म बुरा कहने की शुरूआत होती है। सिर्फ वेशभूषा के आधार पर नकली गुरूओं को असली मानकर उनकी बातों पर विश्‍वास करना ‘अंधविश्‍वास’ है। वे गुरू नहीं ठग होते हैं , जो आजतक धर्म को गलत ढंग से परिभाषित कर लोगों को गुमराह करने का काम करते आए हैं। मूर्तियों का दूध पीना इसी तरह ठग गुरूओं द्वारा गुमराह किए जाने वाले कार्यों में से एक है। उनसे लोगों को सावधान कराना हमारा धर्म है , पर इसके कारण हम अपने सच्‍चे ‘धर्मगुरूओं’ या धर्म पर इल्‍जाम लगाना जायज नहीं।

what is vigyan

‘जादू टोना’ तो मनुष्‍यों के मनोरंजन के लिए विकसित की गयी मात्र एक कला है , जिसकी जानकारी समाज के किसी एक वर्ग को दी गयी। इसके भेद को खोल देने से उस खेल की रोचकता समाप्‍त हो जाती , इसलिए इसे गुप्‍त रखा गया। पर ठग इसका भी फायदा उठाने से नहीं चूकते और भोलेभाले जनता को जादू टोने के कारनामें दिखाकर अपने को गुरू बनाकर उन्‍हें बेवकूफ बनाते है। अंत में मैं यही कहना चाहती हूं कि कोई भी क्षेत्र बुरा नहीं होता , आज युग ही बुरा हो गया है। 

इस कारण हर क्षेत्र में लोग अंधविश्‍वास का नाजायज फायदा उठा रहे हैं और भोले भाले लोग इसका शिकार बन रहे हैं। आज के नेता , आज के डॉक्‍टर , आज के वकील , आज के शिक्षक ... किसपर हम विश्‍वास करें वो हमारी समझ में नहीं आता , अंधविश्‍वास से हम कहीं भी हम फंस सकते हैं। जरूरत है भ्रष्‍टाचार को समाप्‍त करने की , दिखावे को समाप्‍त करने की , सुविधाभोगी वातावरण को समाप्‍त करने की। तभी विश्‍व का कल्‍याण किया जा सकता है।

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    कर्म और प्रयोग से हमें 'ज्ञान' नहीं मिलता है

     

    Gyan kya hai

    गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च के बाद हमें ज्ञान को समझने का मौका मिला है। विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं या किसी भी वस्तु के बारे में विस्तृत ज्ञान को ही विज्ञान कहते हैं । आजकल हम ‘विज्ञान’ शब्द का अर्थ उस ज्ञान से लेते हैं , जो प्रयोग और परीक्षण से सिद्ध हो चुका है। इसका इतना अधिक विकास हुआ है कि हम पृथ्वी से चन्द्रमा और मंगल तक की रिसर्च कर रहे हैं। 

    विज्ञान ने आज पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है विज्ञान के माध्यम से मानव के जीवन को कई ऐसी सुविधाएं मिली हैं , जिसके माध्यम से वह दिन प्रतिदिन प्रगति करता जा रहा है । विज्ञान के माध्यम से हम लोगों को नए नए आयाम प्राप्त हो रहे हैं. विज्ञान के माध्यम से हम चंद्रमा पर भी पहुंच चुके हैं । विद्यार्थियों तक इस ज्ञान को सिखलाने के लिए लाखों स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज चल रही हैं। विज्ञान ने आज पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है विज्ञान के माध्यम से मानव के जीवन को कई ऐसी सुविधाएं मिली हैं, जिसके माध्यम से वह दिन प्रतिदिन प्रगति करता जा रहा है । 

    Gyan ka mahatva

    ज्ञान विज्ञान की तरह अंधाधुँध दौड़ नहीं लगाता, जहाँ सबको अपनी अपनी प्रकृति से समझौता करना होता है, जिससे प्रकृति समझौता करना पड़ता है।ज्ञान प्रकृति के कण-कण और जन-जन की खूबियों को समझते हुए विकास में उसका योगदान चाहता है। इसका मुख्य अर्थ मानवीय मूल्यों के अनुरूप चिंतन करना है। यह दृष्टिकोण ही शरीर तथा मन को प्रेरणा प्रदान करता है। हम रुचिकर, हितकर, उपयोगी एवं आवश्यक मुद्दों को समझकर अपनी विचारधारा और कार्यशक्ति को मोड़ देते हैं। मेरा मानना है कि इतने वैज्ञानिक युग में होने के बावजूद धन , कर्म और प्रयोग से 'सबकुछ' हासिल करने के बाद भी उसे हासिल करने के मुख्‍य उद्देश्‍य को पूरा करने का सभी दावा नहीं कर सकते। 


    Gyan kya hai

    Gyan vigyan

    जैसे विज्ञान के द्वारा आज शरीर की कद, काठी और वजन तक को नियंत्रित करने के साधन उपलब्‍ध है पर वे दावे के साथ अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य नहीं दे सकते। अथाह धन को प्राप्‍त करने के कितने कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं पर वे धन का संतोष नहीं दे सकते। मनचाहे जीन को एकत्रित करके मनचाहे संतान पा सकते हैं पर उन्‍हें सुपात्र नहीं बना सकते। आज अपनी पसंद के अनुसार पात्र चुनकर विवाह करने की आजादी है पर सुखी दाम्‍पत्‍य जीवन नहीं पाते। पैसों के बल पर लोग नौकर इकट्ठे कर सकते हैं पर सच्‍चा सेवक मिलना सबको मुमकिन नहीं।

    पलंग पर गद्दों का अंबार लगा सकते हैं पर नींद लाना वश की बात नहीं। नाना व्‍यंजन जुटा सकते हैं पर बीमारी हो या भूख नहीं लगे तो कैसे खा सकते हैं ? हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की औषधि मिल सकती है पर चैन कैसे मिले। मास्‍टर क्‍या पूरा स्‍कूल ही बनवा सकते हैं पर किसी को अकल नहीं दे सकते आप। पैसों के बल पर बडे से बडे गुरू आपके सम्‍मुख खडे हो जाएंगे पर ज्ञान पाना संभव नहीं। किताबें क्‍या, पूरी लाइब्रेरी मिल सकती हैं पर विद्या प्राप्‍त करना इतना आसान नहीं। पिस्‍तौल या अत्‍याधुनिक हथियार मिल सकते हैं आपको, पर कुछ करने के लिए साहस जुटाना बहुत मुश्किल है। 

    जीवन के विभिन्‍न मोडों पर अनगिनत साथी मिल सकते हैं पर कोई असली मित्र नहीं हो सकते। आप हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति प्राप्‍त कर सकते हैं पर सुख शांति नहीं पा सकते। सैकडों भाई बंधु प्राप्‍त कर सकते हैं पर उनमें से कोई भी सहयोगी नहीं हो सकता। भ्रमण के लिए टिकट खरीद सकते हैं आप पर भ्रमण का आनंद ले पाना सबके वश में नहीं। कुर्सी मिल सकती है पर प्रतिष्‍ठा नहीं और इसी तरह विज्ञान प्राप्‍त कर सकते हैं पर ज्ञान नहीं !!

    vaidik gyan

    इसका कारण यह है कि स्‍वास्‍थ्‍य, संतोष, दाम्‍पत्‍य जीवन, नींद, सुपुत्र, भूख, चैन, अमृत,अकल, विद्या, साहस, मित्र, शांति, सहयोगी, प्रतिष्‍ठा, भ्रमण का आनंद और ज्ञान प्राप्ति आपके वश में नहीं होती। इनको हासिल करने के लिए आपको अपने जन्‍मकालीन ग्रहों पर निर्भर रहना पडता है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन में ये सभी मुद्दे समय सापेक्ष होते हैं और कभी कमजोर तो कभी मजबूत दिखाई देते रहते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो अपने मजबूत समय में तरक्‍की करनेवाले दुनिया के एक से एक दिग्‍गज अपने कमजोर समय में लाचार होते क्‍यूं देखे जाते ? 

    और एक से एक कमजोर व्‍यक्ति मजबूत समय में दुनिया के लिए आदर्श कैसे बन जाते हैं ? इसलिए ज्‍योतिष की चर्चा इन्‍हीं संदर्भों में की जानी चाहिए। जन्‍मकुंडली के निर्माण से लेकर भृगुसंहिता तक के भविष्‍य कथन में हमारे पूज्‍य ऋषि , महर्षियों ने इसी तरह सांकेतिक तौर पर ही ज्‍योतिष की विवेचना करने की कोशिश की थी। ज्योतिष 'समय' और 'चारित्रिक विशेषताओं' की बात करता है। अब समझ में आ गया होगा कि ज्ञान क्या है ?

    Brahma Gyan Kya hai

    ब्रह्म ज्ञान क्या है ? - जब प्रकृति के नियमों को समझने के बाद व्यक्ति संसार का मोह त्यागकर खुद को उसके आगे समर्पित कर देता है तो इसे ब्रह्मज्ञान कहते हैं।

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      बाबा नागेश्वर नाथ का दर्शन और पूजन

      baba Nageshwar dham 

      बाबा नागेश्वर नाथ के दर्शन और पूजन से भक्‍तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं !!


      पिछली बार गांव गयी तो सीतामढी जिले के एक प्रखंड पुपरी में स्थित बाबा नागेश्‍वर नाथ धाम जाने का मौका मिला। शहर के बाजार के बीचोबीच एक छोटे से प्रांगन में स्थित इस मंदिर की महत्‍ता दूर दूर तक फैली हुई है। कहते हैं कि लगभग 40 वर्ष पूर्व यहां एक खेल का मैदान था। कुछ बच्‍चे मैदान में खेल रहे थे कि छोटा सा कंचा पेड के नीचे एक दरार में फंस गया। बच्‍चे ज्‍यों ज्‍यों इस कंचे को निकालने की कोशिश करते , यह और नीचे गहरे चला जाता। बच्‍चों ने खुरपी लाकर वहां से कंचा निकालना चाहा तो अंदर से पत्‍थर टकराने की आवाज आयी। उस आवाज की दिशा में खोदते हुए बच्‍चों ने जब अच्‍छी खासी मिट्टी निकाल ली , तो वहां एक शिवलिंग मिला । इसे संयोग ही कह सकते हैं कि जिस बच्‍चे को यह मिला , उसका नाम नागेश्‍वर था । खबर पूरे कस्‍बे तक आग की तरह फैली , सबने इनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया। इस तरह यह माना जाने लगा कि इस स्‍थान पर बाबा नागेश्वर नाथ के रूप में शंकर भगवान ने स्‍वयं को यहां स्‍थापित किया है , तो इसकी महत्‍ता निर्विवाद होनी ही थी। माना जाता है कि बाबा नागेश्वर नाथ के दर्शन और पूजन से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

      baba Nageshwar dham



      baba Nageshwar dham


      सावन के महीने में शिव शंकर की भक्ति में रमे शिव भक्तों की भक्ति यहां देखते ही बनती है। लाल पीले परिधान में कहीं कांवर लेकर जाते, तो कहीं बोल बम की जयकार लगाते ओम नम: शिवाय का जाप के साथ जलाभिषेक करते पूरे दिन विभिन्न नदी घाटों से जल लेकर पहुंचते है और बाबा नागेश्वर नाथ महादेव का जलाभिषेक करते हैं।

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        हमारी काल गणना अधिक सटीक है !!

         

        Which panchangam is best

        प्राचीन काल से ही लोगों को यह समझ में आ गया था कि आसमान के ग्रह नक्षत्रों की चाल एक समान है , इसलिए ‘समय’ की जानकारी के लिए इसे सटीक आधार के रूप में मान्‍यता दी गयी। आसमान में सूर्य की स्थिति के आधार पर ग्रामीण दिन के प्रहर के और नक्षत्रों और तारों की स्थिति के आधार पर रात के प्रहर का आकलन करते थे। इसी प्रकार चंद्रमा के आकार को देखकर महीने के दिनों की गिनती करते थे। वसंत के महीने से ही चन्द्रमा के पूर्ण स्वरुप को देखते हुए एक एक माह का अंत करते गए, इस तरह वसंत के शुरुआत से दूसरे साल तक चैत्र, बैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद (भादो) , आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष (अगहन), पौष, माघ , फाल्गुन जैसे 12 महीने बने। इस विषय पर पिछले दिन मैने पोस्‍ट लिखा था और अधिकमास की गणनाका कारण बतलाया था , तो कुछ पाठकों को ऐसा महसूस हुआ कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर अधिक वैज्ञानिक हैं और इसी कारण हमें अपने पंचांग को उसके अनुरूप बनाने के लिए 13 महीने का एक कैलेण्‍डर बनाना पडता है।

        vikram samvat 2021 calendar

        उन पाठकों को मैं जानकारी देना चाहूंगी कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर का यह 2009 वां वर्ष चल रहा है , जबकि हमारे भारतीय विक्रमी संवत् का 2066 वां वर्ष चल रहा है । यानि कैलेण्‍डर के रूप में भी देखा जाए तो हम अंग्रेजी कैलेण्‍डर से 57 वर्ष आगे चल रहे हैं और गणना के ख्‍याल से देखा जाए तो हम और भी कितने आगे रहे होंगे , इसका अनुमान भी करना मुश्किल है । वैसे जो भी हो , सभी ग्रहों की चाल को देखते हुए इस प्रकार के कैलेण्‍डर को भले ही आमजनों के मध्‍य लोकप्रियता न मिल पायी हो , पर हमारे ऋषि महर्षियों के विलक्षण प्रतिभा को तो सिद्ध कर ही देती है । हमारे ऋषि मुनियों को सौर वर्ष और चंद्र वर्ष दोनो की जानकारी थी , तभी तो वे इस प्रकार का समायोजन कर सके थे।


        Which panchangam is best


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        अंग्रेजी कैलेण्‍डरों का सौरवर्ष सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्‍वी पर आधारित है , 1 जनवरी को इस पथ पर पृथ्‍वी जहां पर स्थित होती है , वहां से वर्ष की शुरूआत की जाती है , जबकि 31 दिसम्‍बर को अंत। इसके विपरीत, हमारा सौर वर्ष का आकलन पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए आसमान के 360 डिग्री में चलते हुए सूर्य पर आधारित था। इस 360 डिग्री को 12 भागों में यानि 30-30 डिग्री में विभाजित कर उसमें सूर्य की स्थिति के आधार पर एक सौर मास का आकलन होता था। इसका आरंभ सूर्य के मेष राशि में प्रवेश यानि 14 अप्रैल से शुरू होकर 13 अप्रैल को समाप्‍त होता है । हमारे देश में अनेक त्‍यौहार लोहडी , बैशाखी , मकर संक्रांति आदि सूर्य के खास राशि प्रवेश के आधार पर भी मनाए जाते रहे हैं।

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        इस प्रकार हमारे पंचांग के अनुसार की गयी यह गणना जटिल होने के बावजूद अधिक वैज्ञानिक मानी जा सकती है। यदि किसी व्‍यक्ति का अपना जन्‍म अंग्रेजी तिथि और जन्‍म समय बताए तो उससे आप सिर्फ उसके जन्‍म के समय के ऋतु को जान सकते हैं , पर वह हमारे पंचांगों के अनुसार अपनी जन्‍म तिथि और जन्‍मसमय बतलाए , तो आप न सिर्फ मौसम , वरन रात के अंधेरे-उजाले का भी अनुमान लगा सकते हैं , इसी प्रकार अंग्रेजी त्‍यौहारों की चर्चा हो , तो हमें सिर्फ उस मौसम की ही जानकारी मिल सकती है , पर हिन्‍दी त्‍यौहारों की चर्चा हो रही है तो सूर्य के साथ ही साथ चंद्रमा की भी स्थिति हमारी समझ में आ जाती है।

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          'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार करने में देर

           Bhrigu samhita janam kundali in hindi


          गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च के बाद ज्योतिष के हर क्षेत्र में गत्यात्मकता आ सकती है।  पिछले कई आलेखों में मैने भृगु ज्योतिष के बारे में आपको जानकारी देने का प्रयास किया है , पिछली कडी में मैने बताया था कि किस प्रकार मेरे द्वारा तैयार की गयी 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' नष्‍ट हो गयी। पर 144 शीटोंवाले एक्‍सेल प्रोग्राम का बच जाना मेरे लिए काफी राहत भरा था , जिसके द्वारा किसी भी 'गत्‍यात्‍मक समय भृगुसंहिता' तैयार की जा सकती थी। पर पहले की तुलना में कुछ अच्‍छा तैयार करने की सोंच के कारण ही चार पांच वर्ष व्‍यतीत हो जाने पर भी मैं उस दिशा में काम न कर सकी।

          Bhrigu Samhita

          Bhrigu samhita kundli bhagya
          एक्‍सेल में बने प्रोग्राम से मेरे मनोनुकूल काम होते न देख मैने प्रोग्रामिंग सीखने का निश्‍चय किया। सी++ सीखने के लिए मुझे जितना समय देना पडता या जितना ध्‍यान लगाना पडता , शायद मैं नहीं दे सकती थी। उसकी तुलना में विज्‍युअल बेसिक काफी आसान था , इसलिए मैने विज्‍युअल बेसिक सीखने के लिए इंस्‍टीच्‍यूट में एडमिशन ले लिया। इसे सीखते सीखते ही घर पर ज्‍योतिष के 'गत्‍यात्‍मक सिद्धांतों' के आधार पर एक साफ्टवेयर भी तैयार करने लगी , ताकि इसे बनाने में कोई समस्‍या हो , तो कंप्‍यूटर के जानकारों से पूछा जा सके। 
          पर ज्‍योतिष के सिद्धांत इतने आसान भी नहीं कि वे समस्‍याओं को तुरंत हल कर पाते , मुझे ही स्‍वयं दिन रात जगकर इस काम को अंजाम देना पडा और कामभर प्रोग्रामिंग किया हुआ मेरा साफ्टवेयर कुछ ही दिनों में तैयार हो गया , जो अभी भी सिर्फ जन्‍मतिथि , जन्‍मसमय और जन्‍मस्‍थान के आधार पर जातक के जीवनभर के उतार चढाव का ग्राफ के साथ ही साथ कई तरह की भविष्‍यवाणी करने में भी समर्थ है।
          Bhrigu samhita kundli faladesh


          विज्‍युअल बेसिक सीखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि एम एस वर्ड के मेल मर्ज की तुलना में विज्‍युअल बेसिक द्वारा और अच्‍छे ढंग से 'गत्‍यात्‍मक भृगु संहिता' को तैयार किया जा सकता है। इस कारण मेल मर्ज द्वारा फिर से बनाए जानेवाले भृगुसंहिता के काम में रूकावट आ गयी और नए तरह की भृगुसंहिता को बनाने की दिशा में सोंच बनीं। 
          पर कोई काम अनायास जितनी तेजी से हो जाता है , अधिक तैयारी के क्रम में उतनी ही देर लगती है। पहले से बने हुए उस एक्‍सेल शीट को भी पापाजी के द्वारा संपादित कराने की इच्‍छा थी , पर न तो उनका मेरे यहां लम्‍बी अवधि के लिए आना हो पा रहा है और न ही मैं उनके यहां जा पा रही हूं, जो कि देर होने का मुख्‍य कारण है।
          Bhrigu samhita kundli guruji


          पुस्‍तक के रूप में जो 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार हुई थी , उसमें व्‍यक्ति के ग्राफ के अनुसार किसी एक ग्रह के हिसाब से उसकी उम्र के आधार पर भविष्‍यवाणी की जाती थी। पर मेरे मनोनुकूल अब जो भृगुसंहिता बनेगी , उसे साफ्टवेयर ही समझा जाए और इसमें अपना जन्‍मविवरण डालने के बाद यह उम्र के साथ नहीं , वरन् ईस्‍वी के साथ भविष्‍यवाणी कर सकेगी। वैसे मेरे अभी बने प्रोग्राम में भी इसकी सुविधा है , पर वह विस्‍तृत में न होकर संक्षेप में है। 

          हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाने पर पुरे जीवन के उतार-चढ़ाव के साथ साथ इस प्रोग्राम की भविष्यवाणियाँ भी आपको दी जाती हैं। आगे मेरा जो कार्यक्रम है , उसमें भाषा ऐसी सरल रहेगी कि लोगों का अपनी जीवनयात्रा के बारे में , आनेवाली परिस्थितियों के बारे में पहले से ही सबकुछ समझ में आ जाएगा और इस आधार पर अपने समय से तालमेल बिठाते हुए वे अपनी आगे की योजना बना पाएंगे।

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