हिंदी में हनुमान चालीसा

 

Hanuman chalisa in hindi(हनुमान चालीसा पाठ हिंदी मै)

Shree hanuman chalisa lyrics

दोहा --

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।

Hanuman chalisa in hindi

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।

तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राज पद दीन्हा।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

लंकेस्वर भए सब जग जाना।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।

तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।

जनम-जनम के दुख बिसरावै।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। 

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।


Hanuman chalisa english lyrics

Doha  

Sri Guru Charan Saroj Raj Nij Man Mukur Sudhari, 

Baranau Raghuvar Bimal Jasu Jo Dayaku Ohal Chari II

Buddhiheen Tanu Janike Sumarau Pavan Kumar, 

Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi Harau Kalesh Vikar II

Hanuman Chalisa:

Jai Hanuman gyan gun sagar
Jai Kapis tihun lok ujagar
Ram doot atulit bal dhama
Anjaani putra Pavan sut nama

Mahabir Bikram Bajrangi
Kumati nivar sumati ke sangi
Kanchan varan viraj subesa
Kanan kundal kunchit kesa

Hath vajra aur dhvaja viraje
Kaandhe moonj janeyu saje
Shankar suvan kesri nandan
Tej pratap maha jag vandan

Vidyavan guni ati chatur
Ram kaj karibe ko aatur
Prabu charitra sunibe ko rasiya
Ram Lakhan Sita man basiya

Sukshma roop dhari siyahi dikhava
Vikat roop dhari lank jarava
Bhima roop dhari asur sanghare
Ramachandra ke kaj sanvare

Laye Sanjivan Lakhan jiyaye
Shri Raghuvir harashi ur laye
Raghupati kinhi bahut badai
Tum mam priye Bharat hi sam bhai

Sahas badan tumharo yash gaave
Asa kahi Shripati kanth lagaave
Sankadhik Brahmadi Muneesa
Narad Saarad sahit Aheesa

Yam Kuber Digpaal jahan te
Kavi Kovid kahi sake kahan te
Tum upkar Sugreevahin keenha
Ram milaye rajpad deenha

Tumharo mantra Vibheeshan maana
Lankeshwar bhaye sab jag jana
Yug sahastra jojan par Bhanu
Leelyo tahi madhur phal janu

Prabhu mudrika meli mukh mahee
Jaladhi langhi gaye achraj nahee
Durgam kaj jagath ke jete
Sugam anugraha tumhre tete

Ram dwaare tum rakhvare
Hoat na agya binu paisare
Sub sukh lahae tumhari sar na
Tum rakshak kahu ko dar naa

Aapan tej samharo aapai
Teenhon lok hank te kanpai
Bhoot pisaach nikat nahin aavai
Mahavir jab naam sunave

Nase rog harae sab peera
Japat nirantar Hanumant beera
Sankat te Hanuman chudavae
Man kram vachan dhyan jo lavai

Sab par Ram tapasvee raja
Tin ke kaj sakal Tum saja
Aur manorath jo koi lavai
Soi amit jeevan phal pavai

Charon jug partap tumhara
Hai persidh jagat ujiyara
Sadhu Sant ke tum rakhware
Asur nikandan Ram dulhare

Ashta sidhi nav nidhi ke dhata
As var deen Janki mata
Ram rasayan tumhare pasa
Sada raho Raghupati ke dasa

Tumhare bhajan Ram ko pavai
Janam janam ke dukh bisraavai
Anth kaal Raghuvir pur jayee
Jahan janam Hari Bakht Kahayee

Aur Devta chit na dharahi
Hanumanth sehi sarve sukh karehi
Sankat kate mite sab peera
Jo sumirai Hanumat balbeera

Jai Jai Jai Hanuman Gosayin
Kripa karahu Gurudev ki nyahin
Jo sat bar path kare kohi
Chutahi bandhi maha sukh hohi

Jo yah padhe Hanuman Chalisa
Hoye siddhi sakhi Gaurisa
Tulsidas sada hari chera
Keejai nath hridaye mein dera

Doha  

Pavan tanay sankat harana, Mangal moorati roop I
Ram Lakhan Sita sahit, Hridaya basahu sur bhoop II

Hanuman chalisa sunna hai

हिन्दू धर्म में हनुमानचालीसा का इतना महत्व है कि भारततवर्ष के लगभग सभी गायकों ने इसे गया है।  इंटरनेट पर कोई ऐसा मंच नहीं मिलेगा , जहाँ हनुमानचालीसा मौजूद नहीं। नीचे लिंक दिए जा रहे हैं , आप अपनी मनचाही आवाज में हनुमान चालीसा सुन सकते हैं। 

जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

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    जन्म की तारीख से भविष्य की जानकारी

     

    Astrology in Hindi by date of birth and time

    (जन्म की तारीख से भविष्य की जानकारी)

    आप सभी जानते हैं कि ज्योतिष में ज्योतिष में Ascendant क्या होता है? जन्मसमय के अभाव में जातक के लग्न को निकालना मुश्किल होता है, इसलिए भविष्यफल में कठिनाई आती है। इस लेख में आपको जानकारी मिलेगी कि जन्मसमय न होने पर भी हमलोग सिर्फ जन्मतिथि से  ( Horoscope by date of birth) कैसे  जन्मकुंडली ( jyotish in hindi by date of birth ) बनाते और भविष्य का सटीक आकलन कर पाते हैं। इसलिए जिनके पास अपने जन्म का सटीक समय न हो , सिर्फ जन्मतिथि हो , वे हमारी सर्विस ले सकते हैं। 

    भविष्य को समझ पाने के विज्ञान और कला 'ज्योतिष' की गणना बहुत ही सूक्ष्म मानी जाती है और इस कारण जन्म की तिथि के साथ साथ साथ जन्म के समय के घटी-पल (घंटा-मिनट-सेकंड) तक को जानना आवश्यक होता है। उसी के आधार पर जन्मकुंडली बनायीं जाती है , जिससे स्पष्ट होता है कि जीवन के विभिन्न मामलों के सुख-दुःख के लिए कौन से ग्रह उत्तरदायी हैं और किन समयावधियों में इनका प्रभाव अच्छा या बुरा पड़ेगा। (Astrology in hindi by date of birth and time) जन्म-समय न होने की स्थिति में इसके निर्धारण में समस्या उपस्थित होती है। 


    Horoscope by date of birth in hindi

    Kundli without birth time in Hindi

    पर गत्यात्मक ज्योतिष ने जन्मसमय न होने की स्थिति में भविष्य का आकलन करने की एक विधा विकसित की हैं। किसी खास तिथि को दिनभर जन्म लेने वालों की सूर्य राशि और चंद्र राशि एक ही होती है, सिर्फ लग्न बदलता है।  गत्यात्मक ज्योतिष चंद्रकुंडली को किसी जातक के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानता है।  इसके अलावा ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति भी हमलोग सूर्योदय के हिसाब से निकालते हैं।  इसलिए जन्मसमय न होने की स्थिति में इन बल को निकालने में भी कोई दिक्कत नहीं आती। (jyotish in hindi by date of birth)

    इस क्रम में में आपकी पूर्व में घटी घटनाओं की आपसे कुछ चर्चा करनी होती है और आपके जन्मकालीन  ग्रहों से तालमेल बिठाना होता है। जन्मसमय न होने की स्थिति में निराश होने की आवश्यकता नहीं , क्योंकि हमलोग चंद्रकुंडली और ग्रहों के  देखते हुए जातक के बारे में सटीक भविष्यवाणी कर सकते हैं। 

    'अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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      ज्योतिष में ascendant क्या होता है?

       

       Ascendant meaning in astrology in Hindi


      सामान्य बोलचाल की भाषा में Ascendant का अर्थ चढ़ाव या आगे की ओर अग्रसर होना है! ज्योतिष में Ascendent का शाब्दिक अर्थ लग्न होता है! पूर्व में आप एक लेख हिंदी में जोडिएक का अर्थ में पढ़ चुके हैं कि आसमान में मौजूद 30 -30  डिग्री की कुल 12 राशियों में से लग्न वह राशि होती है, जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय आसमान में पूर्वी क्षितिज पर उदित होती है! जन्मसमय के अभाव में किसी जातक का लग्न नहीं निकला जा सकता, इस कारण जन्मसमय न होने की स्थिति में भविष्य का आकलण चंद्रकुंडली और ग्रहों की शक्ति के आधार पर खींचे गए जीवन ग्राफ से की जाती है। 

      ज्योतिष शास्त्र में लग्न-राशि को जातक के व्यक्तित्व के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। यह कुंडली का प्रथम भाव होता है , जिससे जातक के शरीर, व्यक्तित्व , आत्मविश्वास आदि का पता चलता है। इस राशि का स्वामी लग्नेश और इस भाव में मौजूद ग्रहों की शक्ति से ही किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आकलन किया जा सकता है। किसी भी कुंडली में लग्न की स्थिति सबसे ऊपर होती  है। यदि लग्न में ही चंद्र की स्थिति हो तो जातक की एक ही लग्नकुंडली और चंद्रकुंडली  होती है। 

      Ascendant meaning in astrology in Hindi

      Ascendant planet meaning in hindi

      चूँकि सूर्य 15 अप्रैल से 15 मई के मध्य सबसे पहली राशि मेष में होता है , इसलिए इस दौरान  सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मेष होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद वृष  लग्न, चार घंटे बाद मिथुन , छह घंटे बाद कर्क , आठ घंटे बाद सिंह - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  15 मई से 15 जून के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न वृष होता है , लग्न में सूर्य होता है , अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मिथुन लग्न, चार घंटे बाद कर्क , छह घंटे बाद सिंह , आठ घंटे बाद कन्या  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

      15 जून  से 15 जुलाई के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मिथुन होता है , लग्न में सूर्य होता है , अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कर्क  लग्न, चार घंटे बाद सिंह  , छह घंटे बाद कन्या  , आठ घंटे बाद तुला - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 जुलाई से 15 अगस्त के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कर्क होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद सिंह लग्न, चार घंटे बाद कन्या , छह घंटे बाद तुला , आठ घंटे बाद वृश्चिक  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   

      Ascendent in Hindi Astrology

       15 अगस्त से 15 सितम्बर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न सिंह होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कन्या  लग्न, चार घंटे बाद तुला , छह घंटे बाद वृश्चिक, आठ घंटे बाद धनु   - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   15 सितम्बर से 15 अक्टूबर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कन्या  होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद तुला लग्न, चार घंटे बाद वृश्चिक  , छह घंटे बाद धनु , आठ घंटे बाद मकर - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

      लग्नकुंडली

       15 अक्टूबर  से 15 नवंबर  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न तुला  होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद वृश्चिक लग्न, चार घंटे बाद धनु , छह घंटे बाद मकर , आठ घंटे बाद कुम्भ  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   15 नवंबर से 15 दिसंबर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न वृश्चिक होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद धनु  लग्न, चार घंटे बाद मकर , छह घंटे बाद कुम्भ , आठ घंटे बाद मीन - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

      Ascendent in Hindi Astrology

      15 दिसंबर  से 15 जनवरी के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न धनु होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मकर लग्न, चार घंटे बाद कुम्भ  , छह घंटे बाद मीन  , आठ घंटे बाद मेष - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 जनवरी  से 15 फरवरी  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मकर होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कुम्भ  लग्न, चार घंटे बाद मीन , छह घंटे बाद मेष , आठ घंटे बाद वृष  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।     

      15 फरवरी से 15 मार्च  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कुम्भ होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मीन लग्न, चार घंटे बाद मेष , छह घंटे बाद वृष , आठ घंटे बाद मिथुन   - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 मार्च से 15 अप्रैल  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मीन होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मेष लग्न, चार घंटे बाद वृष, छह घंटे बाद मिथुन  , आठ घंटे बाद कर्क - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   


      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        कुंडली के छठे भाव की परिभाषा

         

        6th house in Astrology in Hindi

        ज्योतिष में लग्न निर्धारण के बाद कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं।  मानव जीवन के छठे पक्ष के रुप में जीवन में आनेवाले हर प्रकार के झंझट और उसे हल करने की क्षमता को महत्वपूर्ण माना गया है । कुंडली में मनुष्य का छठा भाव किसी प्रकार के झंझट से संबंधित होता है। ये झंझट कई प्रकार की हो सकतीं हैं। बचपन में शरीर में किसी प्रकार की बीमारी झंझट का अहसास देती है। बड़े होने के बाद रोग , ऋण और शत्रु -- तीन प्रकार के झंझटों से इंसान को जूझना पड़ सकता है।

        यही कारण है कि योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक में छठे भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को -3 अंक दिए गए हैं। लेकिन योगकारकता के हिसाब से कम ही सही पर गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने गणित ज्योतिष के अद्भुत गत्यात्मक सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 

        6th house in Astrology in Hindi

        परंपरागत ज्योतिष में छठे भाव को लेकर ऋणात्मक चिंतन का कारण भी स्पष्ट है। इन तीनों संदभो को हम प्राचीन काल के अनुसार देखे तो हम पाएंगे कि इन तीनों ही स्थितियों में मनुष्य का जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण हो जाता था। यदि वह किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हो जाता था तो उसका अच्छी तरह इलाज नहीं हो पाता था। उसकी मौत लगभग निश्चित ही होती थीं। इलाज के बाद भी वह जीवनभर कमजोर ही बना होता था। स्वास्थ्य की कमजोरी उसके जीवन को विकास नहीं दे पाती थी ,क्योंकि उस समय सफलता प्राप्त करने के लिए शारीरिक मजबूती का विशेष महत्व था।

        इस कारण सबकी ही तरह इन सबकी भी वस्तुनिष्ठ विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति के जीवन में कैसे झंझट आएंगे ? रोगग्रस्तता होगी तो कौन सी होगी ? ऋणग्रस्तता होगी तो कितने की होगी ? शत्रुता किससे होगी ? ग्रहों के हिसाब से अन्य भावों की कमजोरी या मजबूती को , छठे भाव के स्वामी या उनमे स्थित ग्रहों को देखते हुए भले ही देखते हुए भले ही झंझट के किस्म का और उससे जीत का आकलन किया जा सकता है , पर परिमाणात्मक आकलन तो संभव ही नहीं है।

        Loan due to 6th house weakness

        इसी प्रकार ऋणग्रस्तता प्राचीन समाज के लिए अभिशाप थी। लोग जो कुछ भी खेत में उगा लेतें , खाकर अपना भरण-पोषण करते। अन्य किसी जरुरत के लिए वे वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग करते। किन्तु अन्य किसी जरुरत के लिए कभी उन्हें ऋण लेने की आवश्यकता पड़ गयी तो उन्हें महाजन के पास जाना होता था । ऐसी हालत में उनके चंगुल में इनकी कई पीढ़ियॉ फंस जाती थी , क्योंकि उस समय ऋण लेने में ब्याज की दर बहुत अधिक होती थी । चक्रवृद्धि ब्याज के रुप में मूलधन बढ़ता ही जाता था और चाहकर भी कोई इस चंगुल से निकल नहीं पाता था , कभी कभी कई पीढियां इस दलदल में फंसी रह जाती थी।

        योगकारक ग्रह

        Enemy due to 6th house weakness

        इसी प्रकार उस समय शत्रु की स्थिति भी बहुत बुरी होती थीं। आज की तरह कमाई के लिए लोग अलग-अलग साघनों पर निर्भर नहीं रहते थे। साथ ही मिल-बैठकर किसी समस्या का समाधान नहीं निकाला जाता था। किसी व्यक्ति से शत्रुता बढ़ाना गंभीर स्थिति में पहुंचना होता था। मार-पीट में लोग फंसे ही रह जाते थे और जीवनभर की कमाई मुकदमों में चल जाती थी। यही कारण हैं कि प्राचीनकाल में लोग रोग,ऋण शत्रु जैसे झंझटों में पड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए हमारे पुराने ज्योतिषियों ने भी इन भावों में ग्रहों की स्थिति को बुरा माना होगा।

        positivity of 6th house astrology

        किन्तु आज समाज की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है। काफी असाध्य रोगों पर काबू पाया जा चुका है। इन रोगों से ग्रसित होने पर झंझट भले ही बढ़े , किन्तु जान संकट में नहीं पड़ती है। इसलिए छठे भाव में ग्रहों की स्थिति अच्छी हो तो उसे बुरा नहीं समझना चाहिए। गत्यात्मक दशा पद्धति के अनुसार यदि ग्रह छठे भाव में गतिज और स्थैतिक उर्जा से संपन्न हो तो जातक किसी भी प्रकार के झंझट को सुलझाने की शक्ति रखता है। वह सफल डॉक्टर होकर रोगी का उपचार कर सकता है ,न्यायाधीश होकर झगड़ों को सुलझा सकता है और प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी हो सकता है।


        आधुनिक युग में ऋणग्रस्तता की परिभाषा भी बदल गयी है। आज किसी भी व्यवसायी को उचित दर पर ऋण प्राप्त हो जाता है। यदि वह सही व्यवस्थापक हो तो अपनी पूंजी से कई गुणा अधिक पूंजी प्राप्त कर उसका प्रवाह कर सकता है। इस प्रकार उसकी कमाई ब्याज-दर से बहुत अधिक होती है और व्यवसायी अपने व्यवसाय में निरंतर वृद्धि महसूस करता है। इसलिए अभी ऋणग्रस्तता की मात्रा से व्यक्ति के स्तर की पहचान होती है। जो 50000 के ऋण से ग्रस्त है वह छोटा व्यवसायी तथा जो 5000000 के ऋण से ग्रस्त है वह बड़ा व्यवसायी है ।

        6th house in astrology in Hindi

        इसलिए कहा जा सकता है कि छठे भाव में स्थित गत्यात्मक और स्थैतिक शक्तिसंपन्न ग्रह जातक के सफल व्यवसायी और प्रभावशाली व्यक्ति होने की सूचना देते हैं। छठा भाव प्रतियोगिता से संबंधित भी होता है इस कारण प्रतियोगिता में भी सफलता की उम्मीद ऐसे ग्रहों से की जा सकती है। हॉ यदि ग्रह गत्यात्मक या स्थैतिक दृष्टि से कमजोर हो तो अवश्य कोई बीमारी या कुछ झंझटों में फंसे होने की स्थिति बन सकती है। ऐसा केवल उस ग्रह के दशाकाल में ही होता है जो छठे भाव मे कमजोर होकर विद्यमान होते हैं।

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          सायन और निरयण क्या है?

           

          Zodiac meaning in Hindi in Astrology

          पृथ्वी पर रहते हुए हम जब आसमान को निहारते हैं , आसमान में मौजूद तारे, ग्रह-नक्षत्र, सूर्य, चंद्र पूर्व दिशा से उदित होते हुए पश्चिम की ओर अस्त होते दिखाई देते हैं।  पृथ्वी के अपने अक्ष में पश्चिम से पूर्व की ओर की घूर्णन गति के कारण हमें ऐसा प्रतीत होता है। आसमान के पूर्व से पश्चिम की ओर जाती गोल 360 डिग्री की यह  चौड़ी पट्टी  ही भचक्र या राशिचक्र कहलाती है। 

           Zodiac signs hindi and english

          इस राशिचक्र को ही अंग्रेजी में Zodiac  कहा जाता है।  Zodiac को 30 -30  डिग्री के 12  भागों बाँटा गया है, जिन्हे 12  राशि कहा जाता है।  इनके नाम क्रमशः मेष (Aries) , वृष (Taurus) , मिथुन(Gemini) , कर्क(Cancer) , सिंह(Leo) , कन्या(Virgo) , तुला(Libra) , वृश्चिक(Scorpio) , धनु(Sagittarius), मकर(Capricorn) , कुम्भ(Aquarius) और मीन(Pisces) हैं। 0 से 30 डिग्री के मेष से शुरू करते हुए 330  से 360  डिग्री के मीन राशि में राशिचक्र का अंत हो जाता है। 

          Zodiac meaning in Hindi

          Astrology zodiac signs in Hindi

           हालाँकि भचक्र के आरम्भ को लेकर  भारतीय और पाश्चात्य विद्वानों में मतभिन्नता है , भारतीय ज्योतिषी निरयण अंश को मानते हैं और १५ अप्रैल को सूर्य आसमान के जिस विन्दु पर होता है , उसे राशिचक्र का शुरूआती  डिग्री मानते हैं , जबकि पाश्चात्य विद्वानों के हिसाब से २२ मार्च  को सूर्य जिस विन्दु पर होता है , वह राशिचक्र का शुरूआती विन्दु है। 

          Zodiac signs in Hindi by date of birth

          यही  कारण है कि सूर्य के आधार पर अपना Zodiac Sign निश्चित करने में लोगों को असुविधा होती है।  भारतीय पंडितों के हिसाब से १५ अप्रैल  से १५ मई  तक जन्म लेने वाले लोग मेष राशि में , १५ मई से १५ जून  तक जन्म लेने वाले लोग वृषभ राशि में , उसके बाद के एक-एक महीने में क्रमशः मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु, मकर , कुम्भ और मीन राशि में आ जाते हैं। जबकि पाश्चात्य ज्योतिषियों के हिसाब से  22 मार्च से 22 अप्रैल तक जन्मलेने वाले मेष राशि में  आ जाते हैं, पुनः 22 अप्रैल के बाद जन्म लेनेवाले वृष, उसके बाद के महीने में क्रमशः मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर और कुम्भ सूर्य राशि में। 

          Zodiac sign by name

          जोडिएक की जिस राशि में चन्द्रमा मौजूद होता है , उसके नक्षत्रों के आधार पर हमारे नाम रखे जाते हैं। यदि उस आधार पर हमारा नाम रखा गया हो तो नाम के आधार पर हम अपना जोडिएक sign निश्चित कर सकते हैं।  पर बिना किसी ग्रहीय स्थिति को देखे यूँ ही नाम रख दिया गया हो तो आप नाम के आधार पर अपना जोडिएक sign निश्चित नहीं कर सकते हैं। 


          Zodiac sign Lagna

          ज़ोडियक में और जो राशि सबसे महत्वपूर्ण है, वह किसी व्यक्ति का लग्न है। इस लेख में  लग्न के बारे में जानकारी दी गयी है। 

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