वृष लग्नवालों के लिए लग्न-राशिफल 2025

 Vrish rashifal 2025 in hindi

वृष लग्नवालों के लिए लग्न-राशिफल 2025

'गत्यात्मक ज्योतिष' के अनुसार सभी लोग अपने जन्मकालीन ग्रहों के अलावा गोचर के ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति से प्रभावित होते हैं , लग्न के हिसाब से सभी भाव के स्वामी की स्थिति की मजबूती और कमजोरी की चर्चा हमारे वार्षिक लग्न-राशिफल में की जाती है। वृष लग्नवालों के लिए —---

vrish rashifal 2025 in hindi


  1.  2025 में 1 जनवरी से 24 फरवरी तक घर गृहस्थी का वातावरण अच्छा नहीं दिखाई देगा, ससुराल पक्ष का तनाव उपस्थित हो सकता है। प्रेम संबंध में भी कुछ दूरी बनेगी।  बेवजह के उपस्थित खर्चों से परेशानी होगी, बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से तकलीफ होगा। 

  2.  9 जनवरी से 3 मार्च तक स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

  3. 5 फरवरी से 3 मार्च तक रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा , जिससे समय पर सारे कार्यों को अंजाम दिया जा सकेगा। काफी महत्वपूर्ण लाभ की संभावना है, इसे प्राप्त करने के लिए प्रयास बनेगा। कार्यक्रमों के प्रति गंभीरता बनी रहेगी। 

  4. 24 फरवरी से 21 अप्रैल तक ससुराल पक्ष का महत्व बढेगा , ससुराल पक्ष के किसी कार्यक्रम में तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। कोई बडा खर्च उपस्थित होगा, बाह़य संबंध मजबूत होंगे, पर बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से  तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। 

  5.  1 मार्च से 14 मार्च तक खासकर 13 -14 मार्च को स्वास्थ्य काफी गडबड रहेगा,आत्मविश्वास की कमी बनेगी, व्यक्तित्व कमजोर दिखाई देगा।  कुछ झंझट उपस्थित होंगे, पर झंझटों को सुलझाने में प्रभाव की कमजोर स्थिति के कारण दिक्कत आएगी। 

  6.  वृष लग्न के साथ तुला राशि भी हो तो, 8 से 16 मार्च  तक धन की स्थिति मजबूत होगी, इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा। बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे, संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। 

  7.  वृष लग्न के साथ सिंह राशि भी हो तो, मार्च से 7 अप्रैल तक खासकर 25 मार्च के आसपास धन की स्थिति कमजोर दिखाई देगी, इसे मजबूत बनाने का हर प्रयास बेकार होगा। अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई का वातावरण कमजोर रहेगा, इस कारण किसी प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना कठिन रहेगा।  संतान के अन्य किसी पक्ष से से संबंधित माहौल भी कमजोर बना रहेगा।

  8.  वृष लग्न के साथ तुला राशि भी हो तो, 11 अप्रैल से 22 अप्रैल तक धन की स्थिति मजबूत होगी, इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे, संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

  9.  13 अप्रैल से 7 जून तक स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा।

  10. 18 जून से 14 जुलाई भाग्य, भगवान, धर्म. ये यब चिंतन के विषय बने रहेंगे। किसी धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रहेगी। आध्यात्म की ओर भी ध्यान जाएगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिखाई देगा, कर्मक्षेत्र में भी बडी जबाबदेही मिल सकती है। प्रतिष्ठा बढने वाली कोई बात हो सकती है। 

  11. वृष लग्न के साथ कुम्भ राशि भी हो तो,4 जुलाई से 19 जुलाई तक धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

  12. 14 जुलाई से 29 नवंबर तक खासकर 21 सितम्बर के आसपास संयोग के न बन पाने से कोई असफलता दिखाई पड सकती है। किसी धार्मिक क्रियाकलापों के बाद भी निराशा ही बनेगी।  पिता पक्ष काफी कमजोर बना रहेगा, कर्मक्षेत्र में भी परेशानी रहेगी। प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है। 

  13. वृष लग्न के साथ धनु राशि भी हो तो, 19 जुलाई से 11 अगस्त तक खासकर 1 अगस्त के आसपास धन की स्थिति कमजोर दिखाई देगी, इसे मजबूत बनाने का हर प्रयास बेकार होगा। अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई का वातावरण कमजोर रहेगा, इस कारण किसी प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना कठिन रहेगा।  संतान के अन्य किसी पक्ष से से संबंधित माहौल भी कमजोर बना रहेगा।

  14.  वृष लग्न के साथ कुम्भ राशि भी हो तो, 11 अगस्त से 20 अगस्त तक धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। 

  15. 17 अक्टूबर से 12 नवंबर तक रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा , जिससे समय पर सारे कार्यों को अंजाम दिया जा सकेगा।  काफी महत्वपूर्ण लाभ की संभावना है, इसे प्राप्त करने के लिए प्रयास बनेगा। कार्यक्रमों के प्रति गंभीरता बनी रहेगी। 

  16. वृष लग्न के साथ मिथुन राशि भी हो तो,30 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

  17. वृष लग्न के साथ मेष राशि भी हो तो, 10 नवंबर से 29  नवम्बर तक खासकर 20 नवंबर के आसपास  धन की स्थिति कमजोर दिखाई देगी, इसे मजबूत बनाने का हर प्रयास बेकार होगा। अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई का वातावरण कमजोर रहेगा, इस कारण किसी प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना कठिन रहेगा। संतान के अन्य किसी पक्ष से से संबंधित माहौल भी कमजोर बना रहेगा।

  18. 10 नवंबर से 31 दिसंबर तक रूटीन काफी अस्त व्यस्त रहेगा और किसी घटना का प्रभाव जीवनशैली पर बुरे ढंग से पडेगा।  लाभ के कमजोर रहने से तनाव बनेगा। लक्ष्य की ओर बढने में बाधा उपस्थित होगी। 

  19. 29 नवंबर से 17 दिसंबर  तक भाग्य , भगवान , धर्म . ये सब चिंतन के विषय बने रहेंगे। किसी धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रहेगी।  आध्यात्म की ओर भी ध्यान जाएगा।  किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिखाई देगा, कर्मक्षेत्र में भी बडी जबाबदेही मिल सकती है। प्रतिष्ठा बढने वाली कोई बात हो सकती है 

  20. वृष लग्न के साथ मिथुन राशि भी हो तो,2 दिसंबर से 8 दिसंबर  धन की स्थिति मजबूत होगी , इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  बुद्धि ज्ञान के मामलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे , संतान पक्ष के मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। 


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मेष लग्नवालों के लिए लग्न-राशिफल 2025

 Mesh Rashifal 2025

मेष लग्नवालों के लिए लग्न-राशिफल 2025

'गत्यात्मक ज्योतिष' के अनुसार सभी लोग अपने जन्मकालीन ग्रहों के अलावा गोचर के ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति से प्रभावित होते हैं , लग्न के हिसाब से सभी भाव के स्वामी की स्थिति की मजबूती और कमजोरी की चर्चा हमारे वार्षिक लग्न-राशिफल में की जाती है। मेष लग्नवालों के लिए —---

Mesh Rashifal 2025


1. 2025 में 1 जनवरी से 24 फरवरी तक स्वास्थ्य गडबड रहेगा, आत्मविश्वास की कमी बनेगी, व्यक्तित्व कमजोर दिखाई देगा। रूटीन काफी अस्त व्यस्त रहेगा और किसी घटना का प्रभाव जीवनशैली पर बुरे ढंग से पडेगा। 

2. 9 जनवरी से 3 मार्च तक धन की स्थिति मजबूत होगी, इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा। ससुराल पक्ष का महत्व बढेगा , ससुराल पक्ष के किसी कार्यक्रम में तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। 

3. 5 फरवरी से 3 मार्च तक भाग्य, भगवान, धर्म. ये सब चिंतन के विषय बने रहेंगे। किसी धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रहेगी। आध्यात्म की ओर भी ध्यान जाएगा। कोई बडा खर्च उपस्थित होगा, बाह़य संबंध मजबूत होंगे , पर बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से  तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। 

4.  24 फरवरी से 21 अप्रैल तक स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गुणों को मजबूती देने के कार्यक्रम बनेंगे, स्मार्ट लोगों का साथ मिलेगा। रूटीन काफी सुव्यवस्थित होगा , जिससे समय पर सारे कार्यों को अंजाम दिया जा सकेगा। 

5. 1 मार्च से 14 मार्च तक खासकर 13 -14 मार्च को धन की स्थिति कमजोर दिखाई देगी, इसे मजबूत बनाने का हर प्रयास बेकार होगा। घर गृहस्थी का वातावरण अच्छा नहीं दिखाई देगा, ससुराल पक्ष का तनाव उपस्थित हो सकता है। प्रेम संबंध में भी कुछ दूरी बनेगी।

 6.  मेष लग्न के साथ तुला राशि भी हो तो, 8 से 16 मार्च तक भाई , बहन , बंधु बांधवों का महत्व बढेगा , उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

7.  मेष लग्न के साथ सिंह राशि भी हो तो, 12 मार्च से 7 अप्रैल तक खासकर 25 मार्च के आसपास भाई.बहन,बंधु बांधवों से विचार के तालमेल का अभाव बनेगा, सहकर्मियों से भी संबंध में गडबडी आएगी।  कुछ झंझट उपस्थित होंगे, पर झंझटों को सुलझाने में प्रभाव की कमजोर स्थिति के कारण दिक्कत आएगी। 

8.  मेष लग्न के साथ तुला राशि भी हो तो,11 अप्रैल से 22 अप्रैल तक भाई, बहन, बंधु बांधवों का महत्व बढेगा , उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

9.  13 अप्रैल से 7 जून तक धन की स्थिति मजबूत होगी, इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा। घर गृहस्थी का महत्व बढेगा, ससुराल पक्ष के किसी कार्यक्रम में तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। 

10.  18 जून से 14 जुलाई तक किसी सामाजिक कार्यक्रम में पिता पक्ष का महत्व दिखाई देगा, कर्मक्षेत्र में भी बडी जबाबदेही मिल सकती है। प्रतिष्ठा बढने वाली कोई बात हो सकती है। काफी महत्वपूर्ण लाभ की संभावना है, इसे प्राप्त करने के लिए प्रयास बनेगा। कार्यक्रमों के प्रति गंभीरता बनी रहेगी। 

11.  मेष लग्न के साथ कुम्भ राशि भी हो तो,4 जुलाई से 19 जुलाई तक  भाई, बहन, बंधु बांधवों का महत्व बढेगा, उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

12. 14 जुलाई से 29 नवंबर तक खासकर 21 सितम्बर के आसपास पिता पक्ष काफी कमजोर बना रहेगा, कर्मक्षेत्र में भी परेशानी रहेगी। प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है, लाभ के कमजोर रहने से तनाव बनेगा। लक्ष्य की ओर बढने में बाधा उपस्थित होगी 

13. मेष लग्न के साथ धनु राशि भी हो तो, 19 जुलाई से 11 अगस्त खासकर 1 अगस्त के आसपास भाई-बहन, बंधु-बांधवों से विचार के तालमेल का अभाव बनेगा, सहकर्मियों से भी संबंध में गडबडी आएगी। कुछ झंझट उपस्थित होंगे, पर झंझटों को सुलझाने में प्रभाव की कमजोर स्थिति के कारण दिक्कत आएगी। 

14. मेष लग्न के साथ कुम्भ राशि भी हो तो, 1 अगस्त से 20 अगस्त तक  भाई , बहन , बंधु बांधवों का महत्व बढेगा, उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

15.  17 अक्टूबर से 12 नवंबर तक भाग्य, भगवान, धर्म,  ये सब चिंतन के विषय बने रहेंगे। किसी धार्मिक क्रियाकलाप में व्यस्तता रहेगी! आध्यात्म की ओर भी ध्यान जाएगा!  कोई बडा खर्च उपस्थित होगा, बाह़य संबंध मजबूत होंगे, पर बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से  तालमेल बनाने की आवश्यकता पड सकती है। 

16.  मेष लग्न के साथ मिथुन राशि भी हो तो, 30 अक्टूबर से 10 नवम्बर  तक भाई, बहन, बंधु बांधवों का महत्व बढेगा, उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 

17.  मेष लग्न के साथ मेष राशि भी हो तो, 10 नवंबर से 29  नवम्बर तक खासकर 20 नवंबर के आसपास  भाई-बहन, बंधु-बांधवों से विचार के तालमेल का अभाव बनेगा, सहकर्मियों से भी संबंध में गडबडी आएगी।  कुछ झंझट उपस्थित होंगे, पर झंझटों को सुलझाने में प्रभाव की कमजोर स्थिति के कारण दिक्कत आएगी। 

18.  10 नवंबर से 31 दिसंबर तक संयोग के न बन पाने से कोई असफलता दिखाई पड सकती है। किसी धार्मिक क्रियाकलापों के बाद भी निराशा ही बनेगी।  बेवजह के उपस्थित खर्चों से परेशानी होगी, बाहरी व्यक्ति या बाहरी स्थान से तकलीफ होगी । 

19.  17 अक्टूबर से 12 नवंबर तक धन की स्थिति मजबूत होगी, इसे मजबूत बनाने के कार्यक्रम भी बनेंगे। संपन्न लोगों से विचार विमर्श होगा।  काफी महत्वपूर्ण लाभ की संभावना है , इसे प्राप्त करने के लिए प्रयास बनेगा। कार्यक्रमों के प्रति गंभीरता बनी रहेगी। 

20.  मेष लग्न के साथ मिथुन राशि भी हो तो, 2 नवंबर से 8 दिसंबर तक  भाई , बहन , बंधु बांधवों का महत्व बढेगा , उनके कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाने की आवश्यकता पड सकती है।  प्रभावशाली लोगों से संबंध की मजबूती बनेगी। कुछ झंझटों को सुलझाने में अपने प्रभाव का पूरा उपयोग करना होगा। 



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बेटी पर कुछ सुंदर लाइनों का संग्रह

बेटी पर कुछ सुंदर लाइनों का संग्रह 

बेटी पर कुछ सुंदर लाइनों


  • “बेटा भाग्य से होता है पर बेटी सौभाग्य से होती हैं।
  • बेटा अंश हैं तो बेटी वंश हैं, बेटा आन हैं तो बेटी शान हैं.
  • बेटी ही असली जीवन की पूँजी है जो कभी धोखा नहीं देग
  • एक सभ्य समाज का निर्माण सिर्फ बेटियां ही कर सकती हैं।
  • बेटे तो एक घर चलाते हैं, बेटियां दो-दो घरों को स्वर्ग बनाती हैं।
  • बेटियां जिस घर भी जाती है, उस घर को हमेशा स्वर्ग बना देती हैं।
  • बेटे पिता की ज़मीन बांटते हैं और बेटियां पिता का दुख बांटती हैं।
  • हर परिवार की बेटी का सम्मान करना, हर नागरिक का दायित्व हैं।
  • हर बेटी की यही कहानी है, शादी के बाद कई नये रिश्तें निभानी है.
  • बेटी जन्म पर रोक न लगाओ, बेटी पैदा होने की खुशिया मनाओ!”
  • बेटियां तो बाबुल की रानियां होती हैं, मीठी-प्यारी कहानियां होती हैं।
  • पूरे घर की “जान” होती हैं बेटियाँ, दो कुलों की “मान” होती है बेटियाँ
  • मत समझो बेटी को भार, क्योंकि बेटी है भगवान का अनोखा उपहार’
  • बेटियों को किसी धन दौलत की नहीं बल्कि इज़्ज़त की जरूरत होती है।
  • जरूरी नहीं रौशनी चिरागों से ही हो, बेटियां भी घर में उजाला करती हैं।
  • यदि समाज को शिक्षित करना है तो सबसे पहले बेटियों को शिक्षित करो।
  • शाख़ है न फूल अगर तितलियां न हो, वो घर भी कोई घर है जहां बच्चियां न हो।
  • वह बेटी ही होती हैं जो नफरत की बजाय हमेशा, प्यार बाटने में ही जुटी रहती है।
  • माँ की जान, पिता की होती है ये लाड़ली, कोई नहीं कर सकता बेटियों की बराबरी
  • मानवता का खून जो कोख में बहाओगे, बेटियां नहीं होंगी तो बहू कहाँ से लाओगे।
  • लक्ष्मी का वरदान हैं बेटियां, सरस्वती का मान हैं बेटियां, धरती पर भगवान हैं बेटियां
  • किसी परिवार को ईश्वर की तरफ से दिया गया सबसे बहुमूल्य उपहार होता हैं “बेटी”।
  • जो व्यक्ति बेटियों को बोझ समझता हैं, वह असल में समाज के लिए खुद बोझ होता है
  • माँ-बाप का हमेशा ख्याल बेटियां रखती है, फिर क्यों परी-सी बेटी कोख में ही मरती है.
  • हर परिवार के कुल को बढ़ाती है बेटियां, फिर भी पैरों तले कुचल दी जाती है बेटियां।
  • बेटियों को जैसे संस्कार मिलते हैं , वैसे ही देश के नागरिक और समाज का निर्माण होता है ।
  • देवी का रूप, देवों का मान हैं बेटियां, परिवार के कुल को जो रोशन करें, वो चिराग हैं बेटियां।
  • जो समाज एक बेटी का सम्मान करना नहीं जनता, वह समाज हमेशा अनपढ़ ही कहलाता है।
  • खुद की बहन-बेटी को इज्जत से देखने वाले, दूसरों के बहन-बेटियों की इज्जत के बनों रखवाले।
  • ”जागरूक बनिए, सोच बदलिये और यही है सही, जो पैसे मांगते है उन्हें भीख दीजिय, बेटी नहीं।
  • दहेज़ जैसे बुरे रस्मों-रिवाज और यह दुनियादारी, वरना किस माँ-बाप को अपनी बेटी नहीं होती है प्यारी।

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  • बेटी पर कुछ सुंदर लाइनों

सप्ताह के 7 दिनों के नाम हिंदी में)

 

week name in Hindi


Weekly Name in English

(सप्ताह के 7 दिनों के नाम अंग्रेजी में) /  (सप्ताह के 7 दिनों के नाम हिंदी में)

Monday (मंडे)                                                     सोमवार (Somvaar)

Tuesday (ट्यूसडे)                                                मंगलवार (Mangalvaar)

Wednesday (वेडनेसडे)                                        बुधवार (Budhvaar)

Thursday (थर्सडे)                                                गुरुवार (Guruvaar)

Friday (फ्राइडे)                                                   शुक्रवार (Shukrvaar)

Saturday (सैटरडे)                                               शनिवार (Shanivaar)

Monday (सन्डे)                                                   रविवार (Ravivaar)


week name in Hindi

भाग्य बारे में पढ़ें --


(सप्ताह के सातो दिनों का ज्योतिषीय आधार)
(week name in Hindi with jyotish base)

ज्योतिष के अनुसार सप्ताह के 7 दिनों का अपना एक अलग ही महत्व है। सप्ताह के सातों दिनों के नामकरण के पीछे भी ग्रहों की स्थितियां है। इनका विस्तार से इस लेख में वर्णन किया गया है। 

1. सोमवार (Monday)

सप्ताह का पहला दिन सोमवार होता है और इस दिन से सप्ताह की शुरुआत होती है। ज्योतिष के अनुसार ‘सोमवार’ दिन का नाम चंद्रमा ग्रह के नाम पर रखा गया है। सोमवार के दिन को भगवान शिव का माना जाता है और इस दिन इनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

2. मंगलवार (Tuesday)

सप्ताह का दूसरा दिन मंगलवार का दिन होता है। इस दिन का ‘मंगलवार’ नाम मंगल ग्रह के नाम पर रखा गया है। ज्योतिष के अनुसार यह दिन हनुमानजी का दिन होता है और इस दिन भगवान हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

3. बुधवार (Wednesday)

मंगलवार के दिन के बाद बुधवार सप्ताह का तीसरा दिन होता है। ज्योतिष के अनुसार  ‘बुधवार’ नाम बुध ग्रह के नाम पर रखा गया हैं।  यह दिन भगवान गणेश जी का दिन माना जाता है और इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

4. गुरूवार (Thursday)

बुधवार के बाद गुरूवार सप्ताह का चौथा दिन होता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन का ‘गुरूवार’ नाम वृहस्पति ग्रह के नाम पर रखा गया है। इस दिन को भगवान विष्णु का दिन माना जाता है और इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग माँस-मछली खाने से परहेज करते हैं। 

5. शुक्रवार (Friday)

गुरूवार के दिन के बाद अगला दिन सप्ताह का पांचवा दिन शुक्रवार आता है। इस दिन का ‘शुक्रवार’ नाम शुक्र ग्रह के नाम पर रखा गया है।  इस दिन को माँ दुर्गा का दिन माना जाता है और इस दिन भगवान माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। 

6. शनिवार (Saturday)

शुक्रवार के बाद अगला दिन सप्ताह का छठा दिन शनिवार होता है। इस दिन का ‘शनिवार’ नाम शनि ग्रह के नाम पर रखा गया है। इस दिन को शनि देव और हनुमान जी का दिन माना जाता है और इस दिन भगवान शनि देव और हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

7. रविवार (Sunday)

शनिवार के बाद अगला दिन सप्ताह का 7वां तथा अंतिम दिन रविवार आता है। इस दिन का ‘रविवार’ नाम सूर्य के नाम पर रखा गया है। इस दिन को भगवान सूर्य का दिन माना जाता है और इस दिन भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की जाती है।

रविवार का दिन सभी लोगों के लिए आराम का दिन होता है, क्योंकि पूरे विश्व में इस दिन छुट्टी रहती है। आजकल बहुत सारे जगहों पर सप्ताह के पांच दिनों को काम के लिए रखते हुए शनिवार और रविवार दोनों ही दिनों को छुट्टियों का दिन रखा गया है।

जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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    कम समय में प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

     

    कम समय में प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

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    गत्यात्मक ज्योतिष को अच्छी तरह समझने के लिए ज्योतिष के बेसिक्स का ज्ञान आवश्यक है। आज एक बार फिर से पहली कड़ी और  पिछली कडी को आगे बढा रही हूं। हमारा सामना अक्‍सर कुछ वैसे लोगों से होता है , जो ऐसे तो कभी ग्रहों या ज्‍योतिष पर विश्‍वास नहीं करते , पर जब कभी लंबे समय तक चलने वाली किसी विपत्ति में फंसते हैं , ज्‍योतिष पर अंधविश्‍वास ही करने लगते हैं। ऐसी हालत में उनकी परेशानियां दुगुनी तिगुणी बढने लगती है ,अपनी समस्‍याओं में त्‍वरित सुधार लाने के लिए वे उस समय हम जैसों की अच्‍छी सलाह भी नहीं मानते।

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    ज्ञान हर प्रकार के भ्रम का उन्‍मूलन करती है , ज्‍योतिष को जानने के बाद आप स्‍वयं सही निर्णय ले सकते हैं। यही सोंचकर मै अधिक से अधिक लोगों को खेल खेल में ज्‍योतिष सीखलाने की बात सोंच रही हूं , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्‍य सफलता देगा। वैसे लोगों को मेरी मदद हो जाएगी, जो सोचते हैँ कि ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

     ज्योतिष में में पृथ्‍वी के सापेक्ष पूरे भचक्र का अवलोकण किया जाता है , साथ ही सूर्य के उदाहरण से समझने में सफलता मिली कि विभिन्‍न पिंड पृथ्‍वी सापेक्ष अपनी स्थिति के अनुरूप ही पृथ्‍वी पर प्रभाव डालते हैं।

      चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

    पहले ही लेख में चर्चा की गयी है कि पृथ्‍वी को स्थिर मानकर पूरे आसमान के 360 डिग्री को 12 भागों में बांटने से 30 - 30 डिग्री की 12 राशियां बनती है। आमान के 0 डिग्री से 30 डिग्री तक को मेष , 30 डिग्री से 60 डिग्री तक को वृष , 60 डिग्री से 90 डिग्री तक को मिथुन , 90 डिग्री से 120 डिग्री तक को कर्क , 120 डिग्री से 150 डिग्री तक को सिंह , 150 से 180 डिग्री तक को कन्‍या , 180 से 210 डिग्री तक को तुला , 210 से 240 डिग्री तक को वृश्चिक , 240 से 270 डिग्री तक को धनु , 270 डिग्री से 300 डिग्री तक को मकर , 300 से 330 डिग्री तक को कुंभ तथा 330 से 360 डिग्री तक को मीन कहा जाता है।

     

    योगकारक ग्रह

    हमारे ऋषि महर्षियों द्वारा आसमान के 0 डिग्री एक आधार को लेकर निश्चित किया गया था , पर कुछ ज्‍योतिष विरोधी हमारे ऋषि महर्षियों द्वारा आसमान के अध्‍ययन के लिए किए गए इस विभाजन को भी अवास्‍तविक मानते हैं , पर मेरे अनुसार यह विभाजन ठीक उसी प्रकार किया गया है , जिस प्रकार पृथ्‍वी के अध्‍ययन के लिए हमने आक्षांस और देशांतर रेखाएं खींची हैं।


    जिस प्रकार भूमध्‍य रेखा से ही 0 डिग्री की गणना की जानी सटीक है तथा देशांतर रेखाओं  की शुरूआत और अंत दोनो ध्रुवों पर करना आवश्‍यक है , उसी प्रकार आसमान में किसी खास विंदू से 0 डिग्री शुरू कर चारो ओर घुमाते हुए 360 डिग्री तक पहुंचाया गया है , हालांकि यह विंदू भी ज्‍योतिष में विवादास्‍पद बना हुआ है , जिसका कोई औचित्‍य नहीं। पृथ्‍वी की घूर्णन गति के कारण 24 घंटों में ये बारहों राशियां पूरब से उदित होती हुई पश्चिम में अस्‍त होती जाती है।
     

    यूं तो ये बारहों राशियां और इनमें स्थित ग्रह हमारे लिए महत्‍वपूर्ण हैं , पर तीन राशियां सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण होती हैं। पहली, जिस राशि में बालक के जन्‍म के समय सूर्य होता है , वो उसकी सूर्य राशि कहलाती है। दूसरी, जिस राशि में बालक के जन्‍म के समय चंद्रमा होता है , वो उसकी चंद्र राशि कहलाती है। तीसरी, जिस राशि का उदय बालक के जन्‍म के समय पूर्वी क्षितिज पर होता है, वह बालक की लग्‍न राशि कलाती है।


    एक महीने तक सूर्य एक ही राशि में होता है , इसलिए एक महीने के अंदर जन्‍म लेने वाले सभी लोग एक सूर्य राशि में आ जाते हैं। ढाई दिनों तक चंद्रमा एक ही राशि में होता है , इस दौरान जन्‍म लेने वाले सभी लोग एक ही चंद्र राशि में आते हैं। दो घंटे तक एक ही लग्‍न उदित होती रहती है , इस दौरान जन्‍म लेने वाले सभी बच्‍चे एक ही लग्‍न राशि में आ जाते हैं। हमारे लेखों को पढ़कर ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त करें, कही भटकने और पूछने की आवश्यकता ही नहीं कि 
    ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

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