गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?

 

Gatyatmak Jyotish kya hai ?

फलित ज्‍योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों की अवस्‍था और उनकी गति के अनुसार ही मनुष्‍य के जीवन में पड़नेवाले ग्रहों के प्रभाव का बारह बारी वर्षों के विभाजन को गत्‍यात्‍मक दशापद्धति कहते हैं। इसमें प्रत्‍येक ग्रहों के प्रभाव को अलग अलग 12 वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है। जन्‍म से 12 वर्षों तक चंद्रमा , 12 से 24 वर्षों तक बुध , 24 से 36 वर्षों तक मंगल , 36 से 48 वर्षों तक शुक्र , 48 से 60 वर्षों तक सूर्य , 60 से 72 वर्षों तक बहस्‍पति , और 72 से 84 वर्ष की उम्र तक शनि का प्रभाव मानव जीवन पर पडता है। प्रत्‍येक ग्रह अपने दशाकाल में अपना फल अपने सापेक्षिक गत्‍यात्‍मक शक्ति के अनुरूप ही अच्‍छा या बुरा प्रदान करते हैं। इस दशा पद्धति में सभी ग्रहों की एक खास अवधि में निश्चित भूमिका रहती है। विंशोत्‍तरी दशा पद्धति की तरह एकमात्र चंद्रमा का नक्षत्र ही सभी ग्रहों को संचालित नहीं करता।

इस पद्धति के जन्‍मदाता श्री विद्यासागर महथा , एम ए , ज्‍योतिष वाचस्‍पति , ज्‍योतिष रत्‍न , पेटरवार , बोकारो निवासी हैं , जिन्‍होने इस पद्धति की नींव सन 1975 जुलाई में रखी। इस दशा पद्धति का संपूर्ण गत्‍यात्‍मक विकास 1987 जुलाई तक होता रहा। 1987 जुलाई के बाद अब तक हजारो कुंडलियों मे इस सिद्धांत की प्रायोगिक जांच हुई और सभी जगहों पर केवल सफलताएं ही मिली। अभी गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष किसी भी कुंडली को ग्रहों की शक्ति के अनुसार लेखाचित्र में अनायास रूपांतरित कर सकता है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन की सफलता , असफलता , सुख , दुख , महत्‍वाकांक्षा , कार्यक्षमता और स्‍तर को लेखाचित्र में ईस्‍वी के साथ अंकित किया जा सकता है। जीवन के किस क्षेत्र में किसकी अभिरूचि अधिक है और जीवन के किस भाग में इसका प्रतिफलन होगा , इसे ग्राफ खींचने के बाद अनायास ही बतलाया जा सकता है। जीवन का कौन सा भाग स्‍वर्णिम होगा और कौन सा काफी कष्‍टप्रद , यह ग्राफ देखकर ही बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक वर्ग आसानी से समझ सकेंगे। जीवन में अकसमात उत्‍थान और गंभीर पतन की सूचना भी इस ग्राफ से ज्ञात की जा सकती है।

Jyotish hindi

इस दशापद्धति के विकास के क्रम में ही ग्रहों की शक्ति को मापने के लिए गति से संबंधित कुछ सूत्रों की खोज की गयी है , जो ग्रहों की सम्‍यक शक्ति का निरूपण करती है। ग्रहों के स्‍थान बल , दिक बल , काल बल , नैसर्गिक बल दुक बल चेष्‍टा बल और अष्‍टकवर्ग से भिन्‍न एक गत्‍यात्‍मक शक्ति को महत्‍व दिया गया है। यह हर हालत में ग्रहों की सही शक्ति का आकलन करता है। 1975 के ज्‍योतिष मार्तण्‍ड के जुलाई अंक में प्रकाशित ‘दशाकाल निरपेक्ष अनुभूत तथ्‍य’ लेख में पहली बार दर्शाया गया था कि प्रत्‍येक ग्रहों का 12 वर्ष तक मुख्‍य रूप से प्रभाव बना रहता है और चंद्र , बुध , मंगल , शुक्र , सूर्य, बुहस्‍पति , शनि , यूरेनस , नेप्‍च्‍यून और प्‍लूटो बारी बारी से संपूर्ण जीवन का प्रतिनिधित्‍व कर लेते हैं।

सन 1981 में गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति के जन्‍मदाता श्री विद्यासागर महथा जी पहली बार यह अहसास हुआ कि प़ृथ्‍वी से निकट रहनेवाले प्रत्‍येक आकाशीय पिंड अपने दशाकाल में जातक को प्रतिकूल परिस्थितियों का बोध कराता है। विलोमत: प़ृथ्‍वी से अतिदूरस्‍थ् ग्रह जातक को अनुकूल परिस्थितियों का बोध कराते हैंा यानि इनके पास अधिक दायित्‍व नहीं होने देते। और इस तरह प़ृथ्‍वी से अतिदूरस्‍थ और निकटस्‍थ् ग्रह अपने दशाकाल में भिन्‍न भिन्‍न ही परिणाम प्रस्‍तुत करते हैं। किसी भी ग्रहों के दशाकाल के मध्‍यकाल में इस प्रभाव को स्‍पष्‍ट देखा जा सकता है। 18वे वर्ष में बुध , 30 वें वर्ष में मंगल , 42 वें वर्ष में शुक्र , 54 वें वर्ष में सूर्य , 66 वें वर्ष में बृहस्‍पति और 78 वें वर्ष में शनि अपना फल विशेष तौर पर प्रदान करते हैं। वक्र या ऋणात्‍मक ग्रहों का परिणाम दायित्‍व संयुक्‍त होता है , जबकि शीघ्री और सकारात्‍मक ग्रह उल्लिखित वर्षों में दायित्‍वहीनता का बोध कराते हैं।

Gatyatmak jyotish kya hai

ग्रहों की एक ऐसी भी स्थिति होती है , जब न तो वे पृथ्‍वी के निकट होते हैं और न ही बहुत अधिक दूरी बनाए होते हैं , बल्कि वे पृथ्‍वी से औसत दूरी पर होते हैं। बुध और शुक्र पूर्वी या पश्चिमी क्षैतिज पर सर्वोच्‍च उंचाई पर होते हुए प्रतिदिन 1 डिग्री की गति बनाते हैं । चंद्रमा , मंगल , बुहस्‍पति , शनि आदि ग्रह सूर्य से 90 डिग्री की औसत दूरी पर होते हैं। ऐसी स्थिति में इनके पास कार्यक्षमता और दायित्‍वबोध सबसे अधिक होता है। जब चंद्रमा औसत से कम प्रकाशमान हो और शेष ग्रह मार्गी या वक्र होने के आसपास हो , तो जातक को अति महत्‍वपूर्ण दायित्‍व और कर्तब्‍यबोध से अवगत कराता है। यदि सापेक्षिक ग्रह धनात्‍मक हो , तो कर्तब्‍यपरायणता के साथ उन्‍हें जबर्दस्‍त सफलता मिलती है और सापेक्षिक ऋणात्‍मक गति में होने से इन्‍हीं ग्रहों के कारण जातक को कर्तब्‍यपरायणता के बावजूद असफलता ही हाथ लगती है।


इस गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति का जो लेखाचित्र तैयार होता है , वह वस्‍तुत: आकाश में स्थित ग्रहों की स्थिति , सूर्य और पृथ्‍वी सापेक्ष उनकी दूरियों और गतियों का सम्‍यक चित्रण है। आकाश में सूर्यतल से नीचे दिखलाई पडनेवाले ग्रह पृथ्‍वी के कम निकट और कम गतिवाले या वक्र होते हैं । इसके विपरीत आकाश में सूर्यतल से उपर दिखलाई पडनेवाले ग्रह पृथ्‍वी से अधिक दूर और अधिक गतिवाले होते हैं। एकमात्र चंद्रमा ही हर समय पृथ्‍वी से समान दूरी पर होने के बावजूद सूर्य के निकट आने पर कम प्रकाशमान और अधिक दूरी पर रहने से अधिक प्रकाशमान होता है। कम प्रकाशमान चंद्रमा को ग्राफ में मध्‍य में और अधिक प्रकाशमान चंद्रमा को ग्राफ में उपर दिखलाया जाता है। अन्य वक्री ग्रहों को ग्राफ में नीचे , सामान्‍य ग्रहों को ग्राफ में मध्‍य में और अति‍शीघ्री ग्रहों को ग्राफ में उपर दिखलाया जाता है। यह ग्राफ व्‍यक्ति की परिस्थ्तियों को दर्शाता है। जातक अपने ग्राफ के अनुसार ही अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थ्‍ितियां प्राप्‍त करते हैं। उनका ग्राफ ही उनकी कार्यक्षमता और महत्‍वाकांक्षा को निर्धारित करता है। वे जीवन के प्रत्‍येक उत्‍थान और पतन अपने ग्राफ के अनुसार हीप्राप्‍त करते हैं। यह दशापद्धति ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करने में पूर्ण सक्षम है। पाठक अपने जन्‍म वर्ष को छ: वर्ष के अपवर्तांक से जोडते चले जाएं , इसकी वैज्ञानिकता स्‍वत: प्रमाणित हो जाएगी ।

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    मेष लग्‍न की कुंडली

     

    Mesha lagna me grahon ka fal

     कल के लेख से यह स्‍पष्‍ट हुआ कि आसमान के 0 डिग्री से 30 डिग्री तक के भाग का नामकरण मेष राशि के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मेष माना जाता है। मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का प्रतिनिधित्‍व करता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर माता पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति की मजबूत स्थिति से मेष लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इन पक्षों की कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 

    Mesh lagna me Surya ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान और संतान का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मेष लग्‍न के जातक अपने बुद्धि ज्ञान या संतान पक्ष का सहयोग प्राप्‍त करना चाहते हैं। नाम यश फैलाने के लिए इनका सर्वाधिक ध्‍यान अपनी बुद्धि , ज्ञान और संतान की स्थिति को मजबूती देने में बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने पर बुद्धि , ज्ञान और संतान की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने पर इनकी कमजोरी से इनकी कीर्ति घटती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 


    Mesha lagna characteristics

    Mesh Lagna details in hindi

    Mesh lagna me mangal ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल प्रथम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर और जीवन का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के शरीर , व्‍यक्तित्‍व को मजबूती देने में जीवनशैली की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है , जीवनशैली सुखद दिखाई पडती है , विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर जीवनशैली कष्‍टकर बनी होती है, स्‍वास्‍थ्‍य की कमजोरी नजर आती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

    Mesh lagna me shukra ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र द्वितीय और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के धन कोष तथा घर गृहस्‍थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धन कोष का मेष लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी से गहरा संबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर धन कोष की स्थिति कमजोर होकर मेष लग्‍नवालों के घर गृहस्‍थी का वातावरण गडबड बनाते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर धन कोष की स्थिति मजूबत होकर घर गृहस्‍थी का वातावरण बढिया बनाते है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

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    Aries ascendant house lords

    Mesh lagna me budh ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध तृतीय और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई बंधु , झंझट तथा प्रभाव से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों का इनमें आपस में सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर इनके झंझटों को सुलझाने और प्रभाव की बढत में भाई , बंधु बांधव की भमिका अहम होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर प्रभाव की मजबूती से बंधु बांधव सहयोगियों की कमी नहीं होती , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर प्रभाव की कमजोरी होने पर भाई बहन बंधु बांधव किनारा कर लेते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

    Mesh lagna me brihaspati ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य , धर्म , खर्च और बाहरी संदर्भ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मेष लग्‍न के जातकों के भाग्‍य से खर्च और खर्च से भाग्‍य प्रभावित होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत रहने पर भाग्‍य की प्रचुरता से खर्च शक्ति और बाह्य संदर्भों में मजबूती आती है , देश विदेश घूमने फिरने में दिलचस्‍पी बनती है तथा खर्च शक्ति और बाह्य संदर्भों की मजबूती से भाग्‍य मजबूत होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमी खर्च शक्ति और बाहरी संदर्भों को कमजोर तथा खर्चशक्ति की की कमजोरी भाग्‍य को कमजोर बनाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

    Mesh lagna me shani ka fal

    मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि दशम और एकादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के पिता पक्ष , प्रतिष्‍ठा पक्ष और हर प्रकार के लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के पिता पक्ष , सामाजिक , राजनीतिक स्थिति का लाभ से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर मेष लग्‍नवाले लाभ की मजबूती से पद प्रतिष्‍ठा की मजबूती महसूस करते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर ये लाभ की कमजोरी से सामाजिक राजनीतिक मामलों की कमजोरी महसूस होती रहती है। इसी प्रकार पिता और सामाजिकता के मजबूत होने से लाभ की मजबूती तथा उनके कमजोर होने से लाभ की कमजोरी झेलनी पडती है ।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

    ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए  यहाँ क्लिक कर सकते हैं। लेकिन ग्रह कमजोर है या मजबूत, इसका पता आंशिक तौर पर हमारे योगकारक ग्रहों का प्रभाव  लेख से मालूम हो सकता है, पर ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी के लिए हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाना आवश्यक है!


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      वृष लग्‍न की कुंडली

       

      Vrish lagna me grahon ka fal

      इस वीडियो में आप वृष लग्न होने पर विभिन्न भावों के फलाफल के बारे में समझ पाएंगे। आसमान के 30 डिग्री से 60 डिग्री तक के भाग का नामकरण वृष राशि के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न वृष माना जाता है। वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र तृतीय भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव , सहयोगी आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृष लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले ये सारे संदर्भ ही होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर भाई बंधुओं की मजबूत स्थिति से वृष लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर भाई बंधु की कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है।


      Vrish lagna me

      Vrish lagna me surya ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए वृष लग्‍न के जातक मातृ पक्ष , मातृभूमि के लिए काम करना चाहते हैं। नाम यश फैलाने के लिए इनका सर्वाधिक ध्‍यान अपनी संपत्ति और स्‍थायित्‍व की स्थिति को मजबूती देने में भी बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने पर संपत्ति की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने पर संपत्ति की कमी से इनकी कीर्ति घटती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

      Vrish lagna me mangal ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल सप्‍तम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्‍थी और खर्च का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के घर गृहस्‍थी के वातावरण में खर्च की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर वृष लग्‍नवाले खर्च शक्ति की प्रचुरता से घर गृहस्‍थी में सुख ही सुख महसूस करते है , विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर खर्चशक्ति की कमी के कारण वृष लग्‍नवाले के घर गृहस्‍थी का वातावरण कष्‍टकर बना होता है। घर गृहस्‍थी का वातावरण सुखद हो तो खर्च की प्रचुरता दिखाई देती है , विपरीत स्थिति में खर्च का संकट।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

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       Vrish lagna me shukra ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र प्रथम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व तथा रोग , ऋण या शत्रु जैसे किसी प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए किसी प्रकार के झंझट का वृष लग्‍न के जातक के स्‍वास्‍थ्‍य और आत्‍म विश्‍वास से गहरा संबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर उपरोक्‍त में से कोई झंझट उपस्थित होकर इनके स्‍वास्‍थ्‍य मे गडबडी लाते हैं , आत्‍म विश्‍वास में कमी आती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर हर प्रकार के झंझट सुलझे हुए होते हैं और इनका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है , आत्‍मविश्‍वास की प्रचुरता बनी होती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

      Vrish lagna me budh ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के धन , कोष , बुद्धि , ज्ञान और संतान से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिण्‍ इस लग्‍न के जातकों का इनमें आपस में सहसंबंध होता है। इनके बौद्धिक या संतान पक्ष के विकास में साधन की भूमिका अहम् होती है , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर आर्थिक मजबूती से इनका काम आसानी से होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर धनाभाव में खुद के या संतान पक्ष के मानसिक विकास में अच्‍छी खासी बाधाएं आ जाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

       Vrish lagna me guru ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति अष्‍टम और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के लाभ और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृष लग्‍न के जातकों के लाभ से जीवनशैली और जीवनशैली से लाभ प्रभावित होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर लाभ की प्रचुरता से जीवनशैली में मजबूती आती है तथा जीवनशैली की मजबूती से लाभ मजबूत होता है। लेकिन जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर रहने पर लाभ की कमी जीवनशैली को कमजोर तथा जीवनशैली की कमजोरी लाभ को कमजोर बनाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है।    

      Vrish lagna me shani ka fal

      वृष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि नवम और दशम भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के पिता पक्ष , प्रतिष्‍ठा पक्ष और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के भाग्‍य के साथ कैरियर या सामाजिक राजनीतिक स्थिति का आपस में संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर भाग्‍य के साथ देने से यानि किसी प्रकार के संयोग के बनने से पद प्रतिष्‍ठा की मजबूती तथा जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर भाग्‍य के न साथ देने से इसकी कमजोरी महसूस होती रहती है। इसी प्रकार पिता और सामाजिकता के मजबूत होने से भाग्‍य की मजबूती तथा उनके कमजोर होने से भाग्‍य की कमजोरी झेलनी पडती है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है।  

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        मिथुन लग्‍न की कुंडली

         

        Mithun lagna me grahon ka fal

        आसमान के 60 डिग्री से 90 डिग्री तक के भाग का नामकरण मिथुन राशि के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मिथुन माना जाता है। मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र धन भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के संसाधन , कोष और पारिवारिक स्थिति का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मिथुन लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले ये सारे संदर्भ ही होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर धन की मजबूत स्थिति से मिथुन लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर धन की कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 


        Mithun lagna personality

         Mithun lagna me grahon ka fal

        मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य तृतीय भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई , बहन ,बंधु , बांधव का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मिथुन लग्‍न के जातक भाई बंधु की स्थिति मजबूत बनाने और अनुयायियों की संख्‍या बढाने पर जोर देते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने पर नाम यश फैलाने के लिए इन्‍हें भाई बंधु का पूरा सहयोग मिलता है , इनकी मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने पर की कमी से इनकी कीर्ति घटती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

        Mithun lagna me mangal ka fal

        मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल षष्‍ठ और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझट और लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के लाभ में झंझट की संभावना बनती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर मिथुन लग्‍नवाले झंझटों को दूर करने की क्षमता से लाभ को मजबूत कर प्रभाव को बढाते है , पर विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर झंझट ही झंझट दिखाई देने से लाभ प्राप्ति में बाधाएं आती हैं , जो प्रभाव को कमजोर बनाती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

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        Mithun lagna me shukra ka fal

        मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र पंचम और द्वादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मिथुन लग्‍नवालों को अपनी पढाई लिखाई से लेकर संतान पक्ष की पढाई लिखाई या अन्‍य मामलों में अपेक्षाकृत अधिक खर्च की आवश्‍यकता पडती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत होने पर खर्चशक्ति मजबूत होकर अपने या संतान के बौद्धिक विकास या संतान के अन्‍य प्रकार के कार्यों में बाधाएं नहीं आने देती , पर विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर होने पर खर्चशक्ति कमजोर होकर इसमें कठिनाई उपस्थित करती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

        Mithun lagna me budh ka fal

        मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध प्रथम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , माता , हर प्रकार की से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिण्‍ इस लग्‍न के जातकों के स्‍वास्‍थ्‍य और आत्‍मविश्‍वास को मजबूती देने में मातृ पक्ष या हर प्रकार की संपत्ति का हाथ होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत होने पर स्थायित्‍व की स्थिति मजबूत होती है , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति मौजूद होती हैं , जिनसे इनका आत्‍मविश्‍वास बढता है और स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा बना होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर होने पर मातृ पक्ष का तनाव या किसी प्रकार की संपत्ति की कमी या स्‍थायित्‍व की कमी इनके आत्‍मविश्‍वास पर बुरा प्रभाव डालती है , जिससे स्‍वास्‍थ्‍य में गडबडी आती है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

        Mithun lagna me guru ka fal

        मिथुन लग्न और कैरियर - मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्‍थी , पद प्रतिष्‍ठा और उसके सामाजिक राजनीतिक स्थिति का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मिथुन लग्‍न के जातकों के घर गृहस्‍थी पक्ष का सामाजिक वातावरण पर प्रभाव देखा जाता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर जीवनसाथी या ससुराल पक्ष कमजोर होकर प्रतिष्‍ठा पर क्‍या , कानूनी झगडे तक पहुंचा देते है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर ये पक्ष मजबूत होकर प्रतिष्‍ठा में बढोत्‍तरी करते हैं , कैरियर में भी सुख मिलता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

        Mithun lagna me shani

        मिथुन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि अष्‍टम और नवम भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जीवनशैली और धर्म या भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के जीवनशैली का धर्म या भाग्‍य से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत होने से मिथुन लग्‍नवाले धार्मिक और परंपरागत जीवन जीते हैं , पर इनके जीवनशैली में अंधविश्‍वास का समावेश नहीं होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मिथुन लग्‍नवाले परंपरावादी और कट्टर जीवनशैली पर विश्‍वास रखते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

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          कर्क लग्‍न की कुंडली की विशेषताएँ

           

          Karka Lagna predictions in Hindi

          आसमान के 90 डिग्री से 120 डिग्री तक के भाग का नामकरण कर्क राशि के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न कर्क माना जाता है। कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र प्रथम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍विश्‍वास आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कर्क लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले ये सारे संदर्भ ही होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य की मजबूत स्थिति से कर्क लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य की कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 


          Karka Lagna predictions in Hindi

          Kark lagna ka bhavishya

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष , परिवार का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए कर्क लग्‍न के जातक धन की स्थिति को मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। नाम यश फैलाने के लिए इन्‍हें धनार्जन के सिवा कोई उपाय नहीं दिखता। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने पर धन कोष की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने पर धन की कमी से इनकी कीर्ति घटती है।  'त्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

          Karka lagna in hindi

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल पंचम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता , पद प्रतिष्‍ठा तथा सामाजिक राजनीतिक स्थिति का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के प्रतिष्‍ठा का अपने या संतान पक्ष के बुद्धि ज्ञान से  सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर  बुद्धि ज्ञान की स्थिति मजूबत होकर अपनी प्रतिष्‍ठा के साथ साथ संतान पक्ष से भी प्रतिष्‍ठा में बढोत्‍तरी की संभावना बनाती है । विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर न तो समाज में अपनी पहचान बनाने में कामयाबी मिलती है और न ही संतान से सुख प्राप्‍त हो पाता है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

          'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' पर आधारित प्रतिदिन, प्रतिमाह और प्रतिवर्ष जीवन के हर मामले के भविष्यफल को समझने के लिए इस एप्प को इनस्टॉल करें !

          Kark lagna me shukra ka fal

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति और लाभ के वातावरण का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कर्क लग्‍नवालों के लाभ के वातावरण में स्‍थायित्‍व की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति की स्थिति मजबूत होकर लाभ का वातावरण तैयार कर देती हैं , पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर उनका स्‍थायित्‍व कमजोर होता है और लाभ प्राप्ति में कठिनाई आती हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

          Karka Lagna me budh ka  fal

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई बहन , बंधु बांधव और खर्च से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के खर्च में भाई बहन से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर भाई बंहन बंधु बांधव के मजबूत होने पर खर्च की व्‍यवस्‍था होती रहती है , या खर्च शक्ति के बने होने पर भाई बहन बंधु बांधव से संबंध बना होता है। पर विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर खर्च शक्ति की कमी ऐसे संबंधों को कमजोर बनाती है या ऐसे संबंधों के कमजोर होने से खर्च शक्ति में कमी आती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

          Kark lagna me guru ka fal

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझटों और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कर्क लग्‍न के जातकों के झंझटों के निबटारे में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत रहने पर किसी प्रकार के संयोग से इनके  झंझट दूर हो जाते हैं , जबकि जन्‍मकुंडली या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर रहने पर किसी दुर्योग के उपस्थित होने से इनके झंझट और उलझते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

          Karka lagna shani

          कर्क लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि सप्‍तम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के घर गृहस्‍थी और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के जीवनशैली का घर गृहस्‍थी के वातावरण से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर इस लग्‍नवाले लोगों के घर गृहस्‍थी का वातावरण मनोनुकूल होता है , जिससे ये अपने जीवन से संतुष्‍ट होते हैं। इसके विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर घर गृहस्‍थी के वातावरण में समस्‍याएं ही समस्‍याएं होती हैं , जिससे इनका जीवन प्रभावित होता है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

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