भारत में ज्योतिष का अध्ययन

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लोगों को भविष्य को लेकर दिलचस्पी बनी रहती है, इसलिए भविष्य के विश्लेषण की अनेक विधियां प्रचलित हैं , पर एस्ट्रोलॉजी, यानि ज्योतिष, भविष्य को समझने की सबसे सटीक और वैज्ञानिक विधि है। एस्ट्रोलॉजी आसमान के ग्रहों-नक्षत्रों का अध्ययनकरते हुए उनका पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा करता है। यह काल-गणना का शास्त्र है, विभिन्न समयांतराल में ग्रहों के अच्छे या बुरे प्रभाव की चर्चा करता है।

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भारतवर्ष में वैदिककालीन ग्रंथो में ही एस्ट्रोलॉजी की चर्चा है, इसका महत्व इस बात से सिद्ध होता है कि ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता था। राजा-महाराजाओं के दरबार में ज्योतिषियों को शामिल रखने की जो परम्परा थी, वह अभी तक चल ही रही है। यहाँ अधिकांश शुभ कार्य मुहूर्त देखकर ही किये जाते हैं। भारत में ज्योतिष का अध्ययन लगभग 8 हज़ार सालों से चल रहा है, इसलिए विद्वान मानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र का उदय भारत में ही हुआ था।

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बहुत लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि ज्योतिष के ग्रन्थ हिन्दुओं के होते हैं, इसलिए यह हिन्दुओं से सम्बन्ध रखता है।  पर ऐसी कोई बात नहीं, यह एक विज्ञान है और विज्ञान के सभी नियमों का धर्म  से कोई सम्बन्ध नहीं होता। हमारे पास सभी धर्मों के लोग आते हैं और अपनी जन्मकुंडली विश्लेषित करवाते हैं।

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Astrology by date of birth

जिस समय बच्चे का जन्म होता है, उस वक्त का दिन और समय नोट कर लिया जाता है और बाद में पंडितों से जन्मकुंडली बनवायी जाती है। बच्चे के जन्म के पूरे दिन की चंद्रकुंडली एक समान होती है, जन्म-समय न होने की स्थिति में चंद्र कुंडली से भी भविष्यफल निकाला जा सकता है। पर जन्म-समय हो तो बच्चे की लग्नकुंडली बन जाती है। 

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पंडित एस्ट्रोलॉजी के द्वारा जो जन्मकुण्डली बनाते है, वह मुख्यतया जन्मकालीन तिथि और समय में ग्रहों की गति और स्थिति पर आधारित होती है। जन्मांग चक्र में १२ खाने आसमान के ३६० डिग्री को १२ भाग में बांटकर निकाले जाते।  इन १२ भागों में उस समय जहाँ जो ग्रह मौजूद होते हैं, वही उस ग्रह को रखा जाता है।

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कुंडली में ग्रहों की स्थिति को देखकर भविष्यफल कहा जाता है।  कुंडली के १२ खाने जीवन के १२ सन्दर्भों के बारे में जानकारी देते हैं।  जिस भाव का स्वामी या उसमे मौजूद ग्रह मजबूत हों, तो जीवन के वे मामले मजबूत होते हैं, यदि किसी भाव का स्वामी और उसमे ग्रह कमजोर हो तो जीवन के वे  कमजोर हो जाते हैं। इन ग्रहों का प्रतिफलन जीवन के किस काल में होगा, इसकी जानकारी भी जन्मकुंडली से हो जाती है।

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अनिश्चितता के इस युग में सबको अपना भविष्य जानने की इच्छा होती है। ज्योतिष आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप किसी भी शहर में रहते हों, आपके आसपास कोई न कोई ज्योतिषी मिल ही जायेंगे। लेकिन जन्मकुंडली बनाने का काम कोई भी ज्योतिषी कर सकता है, पर फलित कथन के लिए ज्योतिषी को अनुभवी होने की आवश्यकता होती है। भविष्य का निर्णय करते ज्योतिषी के पास पहुंचना चाहिए। कुछ  उपाय के नाम पर लूट भी मचा रखी है, इसलिए लोग ज्योतिषियों के पास जाने से डरते हैं।

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आज के ऑनलाइन युग में किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श लेना मुश्किल नहीं रह गया है। आज अपने क्लाइंट्स को ईमेल से रिपोर्ट भेजने और फ़ोन से बात करने की सुविधा बहुत सारे ज्योतिषियों ने दे रखी है। आप दूसरे देश और शहर के ज्योतिषियों से भी कुंडली-विमर्श  करवाकर कंसल्टेशन ले सकते हैं। हमारे यहाँ पूरे जीवन के उतार चढ़ाव का स्पष्ट ग्राफ, जीवन के सभी मामलों के पाई चार्ट के साथ साथ विस्तार में भविष्यफल लिखकर दिया जाता है। ऐसा जीवन ग्राफ पूरे विश्व में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' की सेवा लेने के लिए भी आप gatyatmakjyotishapp@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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भारत में ज्योतिष का अध्ययन भारत में ज्योतिष का अध्ययन Reviewed by संगीता पुरी on May 18, 2020 Rating: 5

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