अन्य विधाएँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अन्य विधाएँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

योगकारक ग्रहों का विज्ञान

Grah vigyan kya hai

स्‍नातक के दौरान विशेष तौर पर 'खगोल शास्‍त्र' का अध्‍ययन करने के पश्‍चात फलित ज्योतिष के प्रति अध्‍ययन में रूचि जाने के बाद मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी  ने ज्‍योतिष के प्राचीन शास्‍त्रों का गहन अध्‍ययन किया। फलित ज्‍योतिष के बहुत सारे सूत्रों को उन्‍होने खगोल शास्‍त्र के नियमों के अनुकूल पाया , पर इसके कुछ नियम इन्‍हें बिल्‍कुल नहीं जंचे। खासकर ग्रहों की शक्ति निर्धारण का सूत्र इन्‍हें बिल्‍कुल अप्रामाणिक महसूस हुआ। प्राचीन कालीन ज्‍योतिष की पुसत्‍कों में ग्रहों की शक्ति के निर्धारण के लिए स्थानबल , दिक्बल , कालबल , नैसर्गिक बल , चेष्टाबल , दृ‍ष्टि‍बल , आत्मकारक , योगकारक , उत्तरायण , दक्षिणायण , अंशबल , पक्षबल आदि की चर्चा की गयी है। इनसे संबंधित हर नियमों और को बारी बारी से हर कुंडलियों में जॉच की , पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इसी कारण ग्रहों की वास्‍तविक शक्ति के निर्धारण में इन्‍होने पूरी ताकत लगा दी। ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के बारे में जानकारी के बाद ही इन्हे चैन मिला। 

गत्यात्मक ज्योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी ने 1981 में ग्रहों के गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति के निर्धारण से पूर्व  भी इन्‍होने विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए योगकारक और अयोगकार ग्रहों का उल्‍लेख करते हुए तात्‍कालीन महत्‍वपूर्ण ज्‍योतिषीय पत्रिका 'ज्‍योतिष मार्तण्‍ड' में अपना लेख प्रकाशित किया था , इसमें उन्‍होने किसी भी कुंडली के विभिन्‍न भावों को अलग अलग शक्ति प्रदान की थी , जिसे इस चित्र के द्वारा स्‍पष्‍ट किया जा सकता है .....


Grah vigyan kya hai

 Grah Vigyan kya hai

इस तालिका के हिसाब से जो ग्रह प्रथम भाव के स्‍वामी हों , उन्‍हें +5 अंक , द्वितीय भाव के स्‍वामी हों , उन्‍हें +1 अंक , तृतीय भाव के स्‍वामी को -2 अंक , चतुर्थ भाव के स्‍वामी को +2 , पंचम भाव के स्‍वामी को +6 , षष्‍ठ भाव के स्‍वामी को -3 , सप्‍तम भाव के स्‍वामी को +3 , अष्‍टम भाव के स्‍वामी को -1 , नवम भाव के स्‍वामी को +7 , दशम भाव के स्‍वामी को +4 , एकादश भाव के स्‍वामी को -4 तथा द्वादश भाव के स्‍वामी को 0 अंक दिए जाते हैं। विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए योगकारक और अयोगकारक ग्रहों का फलाफल इसके हिसाब से तय किया जाता है। 

मेष लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +2 अंक मिलते हैं , बुध तीसरे और छठे भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2-3)= -5 अंक , मंगल प्रथम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5-1) = +4 , शुक्र द्वितीय और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+3) = +4 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को पंचम भाव के स्‍वामी होने के नाते +6 , बृहस्‍पति को नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (+7+0) = +7 , तथा शनि को दशम और एकादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (+4-4) = 0 अंक मिलते हैं।

What is yogkarak grah

इसी प्रकार वृष लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा तृतीय भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -2 अंक मिलते हैं , बुध द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+6)= +7 अंक , मंगल द्वादश और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0+3) = +3 , शुक्र प्रथम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5-3) = +2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को चतुर्थ भाव के स्‍वामी होने के नाते +2 , बृहस्‍पति को अष्‍टम और एकादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (-1-4) = -5 , तथा शनि को नवम और दशम भाव के स्‍वामी होने के नाते (+7+4) = +11 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार मिथुन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +1 अंक मिलते हैं , बुध प्रथम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5+2)= +7 अंक , मंगल एकादश और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3-4) = -7 , शुक्र द्वादश और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0+6) = +6 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को तृतीय भाव के स्‍वामी होने के नाते -2 , बृहस्‍पति को सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+3+4) = +7 , तथा शनि को अष्‍टम और नवम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-1+7) = +6 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार कर्क लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा प्रथम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +5 अंक मिलते हैं , बुध द्वादश और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (0-2)= -2 अंक , मंगल दशम और पंचम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+4) = +10 , शुक्र एकादश और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2-4) = -2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को द्वितीय भाव के स्‍वामी होने के नाते +1 , बृहस्‍पति को षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी होने के नाते (-3+7) = +4 , तथा शनि को सप्‍तम और अष्‍टम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-1+3) = +2 अंक मिलते हैं।

Yogkarak grah ka fal

इसी प्रकार सिंह लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा द्वादश भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे 0 अंक मिलते हैं , बुध एकादश और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1-4)= -3 अंक , मंगल नवम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+7) = +9 , शुक्र दशम और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2+4) = +2 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को प्रथम भाव के स्‍वामी होने के नाते +5 , बृहस्‍पति को पंचम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+6-1) = +5 , तथा शनि को षष्‍ठ और सप्‍तम भाव के स्‍वामी होने के नाते (-3+3) = 0 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार कन्‍या लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा एकादश भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -4 अंक मिलते हैं , बुध दशम और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+5+4)= +9 अंक , मंगल अष्‍टम और तृतीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1-2) = -3 , शुक्र नवम और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+7+1) = +8 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते 0 , बृहस्‍पति को चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+2+3) = +5 , तथा शनि को पंचम और षष्‍ठ भाव के स्‍वामी होने के नाते (+6-3) = +3 अंक मिलते हैं।

Yogkarak grah Meaning

इसी प्रकार तुला लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा दशम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +4 अंक मिलते हैं , बुध नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+7+0)= +7 अंक , मंगल सप्‍तम और द्वितीय भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+1) = +4 , शुक्र अष्‍टम और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1+5) = +4 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को एकादश भाव के स्‍वामी होने के नाते -4 , बृहस्‍पति को तृतीय और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होने के नाते (-2-3) = -5 , तथा शनि को चतुर्थ और पंचम भाव के स्‍वामी होने के नाते (+2+6) = +8 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार वृश्चिक लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा नवम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +7 अंक मिलते हैं , बुध अष्‍टम और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-1-4)= -5 अंक , मंगल षष्‍ठ और प्रथम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3+5) = +2 , शुक्र सप्‍तम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+0) = +3 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को दशम भाव के स्‍वामी होने के नाते +4 , बृहस्‍पति को द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+1+6) = +7 , तथा शनि को तृतीय और चतुर्थ भाव के स्‍वामी होने के नाते (-2+2) = 0 अंक मिलते हैं।

Yogkarak grah kya hain

इसी प्रकार धनु लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -1 अंक मिलते हैं , बुध सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+3+4)= +7 अंक , मंगल पंचम और द्वादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+0) = +6 , शुक्र षष्‍ठ और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3-4) = -7 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को नवम भाव के स्‍वामी होने के नाते +7 , बृहस्‍पति को प्रथम और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होने के नाते (+5+2) = +7 , तथा शनि को द्वितीय और तृतीय भाव के स्‍वामी होने के नाते (-2+1) = -1 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार मकर लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +3 अंक मिलते हैं , बुध षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-3+7)= +4 अंक , मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2-4) = -2 , शुक्र पंचम और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6+4) = +10 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को अष्‍टम भाव के स्‍वामी होने के नाते -1 , बृहस्‍पति को तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (-2+0) = -2 , तथा शनि को प्रथम और द्वितीय भाव के स्‍वामी होने के नाते (+5+1) = +6 अंक मिलते हैं।

What is yogkarak grah

इसी प्रकार कुंभ लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे -3 अंक मिलते हैं , बुध पंचम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+6-1)= +5 अंक , मंगल तृतीय और दशम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2+4) = +2 , शुक्र चतुर्थ और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+7) = +9 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को सप्‍तम भाव के स्‍वामी होने के नाते +3 , बृहस्‍पति को ,द्वितीय और एकादश भाव का स्‍वामी होने के नाते (+1-4) = -3 , तथा शनि को प्रथम और द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (+5+0) = +5 अंक मिलते हैं। 

इसी प्रकार मीन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा पंचम भाव का स्‍वामी होता है , इसलिए इसे +6 अंक मिलते हैं , बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+2+3)= +5 अंक , मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (+1+7) = +8 , शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है , इसलिए इसे (-2-1) = -3 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को षष्‍ठ भाव के स्‍वामी होने के नाते -3 , बृहस्‍पति को प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होने के नाते (+5+4) = +9 , तथा शनि को एकादश और द्वादश भाव के स्‍वामी होने के नाते (-4+0) = -4 अंक मिलते हैं।

उपरोक्‍त चार्ट तो ग्रहों के स्‍वामित्‍व के आधार पर बनाया गया है , इसके अतिरिक्‍त जन्‍मकुंडली में जिस भाव में ग्रह की उपस्थिति हो , इसके अंक को भी जोडा जाना चाहिए। उनका मानना था विभिन्‍न लग्‍नवाले इस प्रकार प्राप्‍त अंक के अनुसार विभिन्‍न ग्रहों का फलाफल प्राप्‍त करते हैं। 'गत्‍यात्‍मक' ढंग से ज्‍योतिष के विकास के बावजूद भी उपरोक्‍त नियम की उपेक्षा नहीं की जा सकती। अच्‍छे ग्रहीय शक्ति वाले ग्रह भी अयोगकारक हुए तो जातक को अच्‍छे फलाफल से युक्‍त नहीं कर पाते हैं , जबकि कम ग्रहीय शक्ति वाले ग्रह भी योगकारक हुए तो जातक को शुभ फलाफल प्रदान करते हैं। ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!


कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    हमें अन्धविश्वास क्यों नहीं करना चाहिए ?

     

    Andhvishwas story in Hindi

    मैं दस बारह वर्ष पूर्व की एक सच्‍ची और महत्‍वपूर्ण घटना का उल्‍लेख करने जा रही हूं। बोकारो रांची मुख्‍य सडक के लगभग मध्‍य में एक छोटा सा गांव है , जिसमें एक गरीब परिवार रहा करता था। उस परिवार में दो बेटे थे , बडे बेटे ने गांव के रोगियों के उपचार में प्रयोग आनेवाली कुछ जडी बूटियों की दुकान खोल ली थी। बचपन से ही छोटे बेटे के आंखों के दोनो पलक सटे होने के कारण वह दुनिया नहीं देख पा रहा था। गरीबी की वजह से इनलोगों ने उसे डाक्‍टर को भी नहीं दिखाया था और उसे अंधा ही मान लिया था। पर वह अंधा नहीं था , इसका प्रमाण उन्‍हें तब मिला , जब 16-17 वर्ष की उम्र में किशोरावस्‍था में शरीर में अचानक होनेवाले परिवर्तन से उसकी दोनो पलकें हट गयी और आंखे खुल जाने से एक दिन में ही वह कुछ कुछ देख पाने में समर्थ हुआ। 

    उसके शरीर में अचानक हुए इस परिवर्तन को देखकर परिवार वालों ने इसका फायदा उठाने के लिए रात में एक तरकीब सोंचा। खासकर बडे बेटे ने अपनी जडीबूटियों की दुकान को जमकर चलाने के लिए यह नाटक किया। सुबह होते ही छोटा बेटा पूर्ववत् ही लाठी लिए टटोलते टटोलते गांव के पोखर में पहुंचा और थोडी देर बाद ही हल्‍ला मचाया कि उसकी आंखे वापस आ गयी है । पूरे गांव की भीड वहां जमा हो गया और पाया कि वह वास्‍तव में सबकुछ देख पा रहा है। जब लोगों ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि अभी अभी एक बाबा उधर से गुजर रहे थे , उन्‍होने ही उसपर कृपा की है । उन्‍होने कहा है कि न सिर्फ तुम्‍हारी आंख ठीक हो जाएगी, तुम अब जिनलोगों को आशीर्वाद दे दोगे , वे भी ठीक हो जाएं

    hamen andhvishwas kyon nahin karna chahie

    पूरा गांव आश्‍चर्य चकित था , इस चमत्‍कार भरे देश में ऐसा चमत्‍कार होते उन्‍होने सुना तो जरूर ही होगा , पर देखने का मौका पहली बार मिला था। पूरे गांव के लंगडे , लूले , अंधे, काने , पागल बच्‍चों को ले लेकर अभिभावक आने लगें, बडे भाई की जडी बूटी जमकर बिकने लगी। परिवार वाले तो इतने में ही खुश थे , पर ईश्‍वर को तो इन्‍हें छप्‍पर फाडकर देना था। यह खबर आग की तरह फैली और दूर दूर से लोग अपने अपने परिवार के लाचारों को लेकर आने लगे। उसके दुकान की जडी बूटी कम पडने लगी , फिर नीम वगैरह की सूखी डालियों का उपयोग किया जाने लगा , पर भीड थी कि बढती जा रही थी । मौके की नजाकत को समझते हुए बडे बडे बरतनों में नीम की पत्तियों उबाली जाने लगी , उस जल को बोतल में भरकर बेचने के लिए गांव भर के बोतलों को जमा किया गया । 

    समाचार पत्रों में इस बात की खबर लगातार प्रकाशित होने लगी , शीघ्र ही भीड को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तक की व्‍यवस्‍था करनी पडी । एक डेढ महीने के अंदर उस बच्‍चे की महिमा इतनी फैल चुकी थी कि कि पुलिस की मार से बचने के लिए लोग दूर से ही गांव में रूपए पैसे फेक फेककर वापस चले जाते थे। जिस गांव में आजतक एक गाडी नहीं गुजरती थी , उस गांव में बडी बडी गाडियां आकर खडी हो गयी। इधर आसपास की बातों को तो छोड ही दिया जाए , कलकत्‍ता जैसे दूरस्‍थ स्‍थानों से भी बहुत बडे बडे व्‍यवसायी और सरकारी अधिकारी तक इस ‘महात्‍मा’ का दर्शन करने को आ पहुंचे। इतने दिनों तक उस परिवार के अतिरिक्‍त गांव के अन्‍य लोगों ने भी कुछ न कुछ व्‍यवसाय कर पैसे कमाए। लेकिन बाद में रोगियों की स्थिति में कोई सुधार न होने से उसकी पोल खुली और जनता ने उसके नाटक को समझा , तबतक उनलोग लाखों बना चुके थे।

    andhvishwas story in hindi

    andhvishwas kya hai

    इसी प्रकार गया में चार हाथोंवाले बच्‍चे को जन्‍म देने के बाद उनके मातापिता दो ही दिनों में भक्‍तों के द्वारा मिलनेवाले चढावे से ही लखपति हो गए। 48 घंटे तक ही जीवित रहे इस बच्‍चे को लोगों ने भगवान विष्‍णु का अवतार माना। भारत में अंधविश्‍वास इस हद तक फैला है कि यहां असामान्‍य बच्‍चों को जन्‍म देनेवाले मांबाप उस बच्‍चे का इलाज भी नहीं करवाना चाहते । एक माता पिता के सामने डाक्‍टर मिन्‍नते करते रह गए और उन्‍होने बच्‍चे को सामान्‍य बनाने के लिए डाक्‍टरों को कोशिश ही नहीं करने दी। जनता के अंधविश्‍वासों का ये लोग पूरा फायदा उठाते हैं। जब आज के पढे लिखे युग में इस प्रकार की घटनाएं भारतवर्ष में आम हैं , तो पुराने युग के बारे में क्‍या कहा जा सकता है। समाज से इस तरह के अंधविश्‍वासों को दूर करने के लिए बहुत सारे लोग और संस्‍थाएं कार्यरत हैं , पर सवाल है कि जनता के अंधविश्‍वास को समाप्‍त किया जा सकता है .

    Superstition in india in hindi

    यह दुनिया विविधताओं से भरी है। यहां फूल हैं तो कांटे भी , प्रेम है तो घृणा भी , मीठास है तो कडुवाहट भी , गर्मी है तो सर्दी भी , आग है तो पानी भी और किसी का भी खात्‍मा कर पाना असंभव है। कभी कभी कोशिश का और उल्‍टा परिणाम निकलता है। हमने फूलों के सुगंध को भी महसूस की और कांटे को भी बाड लगाने में प्रयुक्‍त किया। फल के मीठास को भी महसूस किया और कडुवाहट को भी बीमारी ठीक करने मं उपयोग में लाने की कोशिश की। मैं हर वक्‍त अपने ऋषि मुनियों के दूरदर्शिता की दाद देती हूं , उन्‍हें ये मालूम था कि आम जनता से यह अंधविश्‍वास दूर नहीं कर सकते । इसलिए जनता के इसी अंधविश्‍वास का सहारा लेकर उन्‍हें जीवन जीने का एक ढंग बनाया। स्‍वर्ग और नरक के बहाने बनाकर जनता को अच्‍छे कामों की ओर प्रवृत्‍त करने की कोशिश की। चेचक के होने पर रोगी के लिए जो आवश्‍यक सावधानी बरतनी थी , उसे धर्म का नाम देकर करवाया। 

    भले ही हम इस कोण से न सोंच पाएं , पर किसी मरीज के मनोवैज्ञानिक चिकित्‍सा के लिए झाड फूंक कीवैज्ञानिक पद्धतिका ही उन्‍होने सहारा लिया था । बरसात के तुरंत बाद साफ सफाई के लिए कई त्‍यौहारकी परंपरा शुरू की गई। उनके द्वारा सभ्‍य जीवन जीने के लिए आवश्‍यक सभी जरूरतों की पूर्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए गए। 'बट', 'पीपल' जैसे महत्‍वपूर्ण पेडों को भी सुरक्षित रखने के लिए इन्‍हें धर्म से जोड दिया गया। सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण जैसे सुंदर प्राकृतिक नजारे को दिखाने के लिए उन्‍हें गांव के किनारे नदियों या तालाबों में ले जाया जाता रहा । ग्रहण के तुरंत बाद उतनी एकत्रित भीडों तक के अंधविश्‍वास का उन्‍होने भरपूर उपयोग किया। 

    उनके द्वारा नदियों , तालाबों की गहराइयों में जाकर एक एक मुट्ठी मिटृटी निकलवाकर नदियों तालाबों की गहराई को बढाया जाता रहा । प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जगहों में एक सुंदर मंदिर का निर्माण कर जनता को तीर्थ के बहाने उन सुंदर नजारों का अवलोकण कराया गया। प्राचीन ज्ञान में क्‍या सही है और क्‍या गलत , इसपर लाख विवाद हो जाए , मैं बहुत बातों को यदि अंधविश्‍वास मान भी लूं । फिर भी यदि धर्म के नाम पर स्‍वार्थ से दूर होकर सर्वजनहिताय जनता के अंधविश्‍वास का कोई उपयोग ही किया गया , तो उसमें मैं कोई बुराई नहीं समझती। पर आज चूंकि हर क्षेत्र स्‍वार्थमय है , लोगों के अंधविश्‍वास का उपयोग स्‍वार्थ के लिए किया जा रहा है , इसलिए यह चिंताजनक तो है ही।

    अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

      प्रश्न कुंडली कैसे बनाये ?

      प्रश्न कुंडली कैसे बनाये ?(Prashna kundli kaise banaye)

      बहुत सारे ज्योतिषी मूल कुंडली के अभाव में प्रश्नकुंडली से ही यजमानों की समस्याओं को समझने की चेष्‍टा करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान भी करते हैं! यजमानो के प्रश्न पूछने के समय को वे प्रश्न का जन्मकाल मानते हैँ, उस समय की जन्मकुंडली बनाकर उस जन्मकुंडली में प्रश्न का उत्तर तलाशते हैँ! 

      मूल कुंडली के अभाव में प्रश्नकुंडली की विवेचना भलमनसाहत के साथ ही साथ एक सद्प्रयास की बात हो सकती है , किन्तु इसके माध्यम से वस्तुत: उद्देश्य-पूर्ति में कामयाबी भी मिलती होगी , इसपर हमें संदेह है। इस प्रकार की प्रक्रिया अपनाकर ज्योतिशी किसी न किसी प्रकार की उलझन में ही फंसते चले जाते हैं।

       जब हजारों वर्षों के प्रयास से आजतक फलित ज्योतिष का जितना विकास हुआ है , उससे मूल कुंडली की ही सही व्याख्या और घटनेवाले घटनाओं के सही समय की जानकारी नहीं दी जा सकती है , तो प्रश्नकुंडली से क्या सही कहा जा सकता है , यह सोंचनेवाली बात हो सकती है ? 

      प्रश्न कुंडली फलादेश (Prashna kundli faladesh)

      मूल कुंडली किसी भी व्यक्ति के समग्र चरित्र , विचारधाराओं , मूल प्रवृत्तियो , संस्कार , कार्यक्षमता , मंजिल , संसाधन और सुख-दुख का परिचायक होती है। जन्मकालीन ग्रहों की स्थिति और गति सर्वदा प्रकृति के भिन्न और अनोखे स्वरुप का ही प्रतिनिधित्व करती है। प्रकृति या शिव का स्वरुप प्रतिक्षण बदलता है। प्रकृति का स्वरुप शाश्वत होते हुए भी अनंतस्वरुपा है। एक बार जो दिखाई पड़ा , उसे पुन: देख पाना काफी कठिन है। अत: प्रश्नकुंडली के द्वारा व्यक्ति की मूल कुंडली की व्याख्या या मौलिक विशेषताओं का एक अंश भी सही चित्रण कर पाना काफी कठिन होगा।

      प्रश्नकुंडली बनाकर ज्योतिशी निश्चित रुप से अपने उद्देश्य पूर्ति में 12 लग्नों के बीच के एक लग्न का चयन कर लेते हैं और उसे ही उस जातक की नियति समझ बैठते हैं , फिर वही संभावना और लॉटरी की चर्चा हो गयी , जिससे आजतक फलित ज्योतिश गुमराह होते हुए कश्टकर परिस्थितियों से गुजर रहा है। लॉटरी से संबंधित भाग्यफल जैसा कि मैने पहले ही कहा है , आहत और व्याकुल मन की शांति के लिए अस्थायी राहत प्रदान करने वाला हो सकता है , किन्तु किसी भी हालत में पक्की और स्थायी भविष्‍यवाणी का सशक्त आधार नहीं हो सकता।

      प्रश्न कुंडली कैसे देखें ?(Prashn Kundali kaise dekhen )

      लेकिन इसके बावजूद गोचर से सम्बंधित प्रश्नो के जवाब देने में प्रश्नकुंडली महत्वपूर्ण रोल अदा कर  सकती है। जन्म कुंडली न होने की स्थिति में बहुत सारे ज्योतिषी जॉब के लिए परेशां युवकों को प्रश्नकुंडली से सलाह देते नजर आते हैं, जो हमारी दृष्टि में सही नहीं है।  जॉब कब होगी , कहाँ होगी , इसका अनुमान प्रश्नकुंडली से नहीं किया जा सकता।  लेकिन यदि जॉब में कोई समस्या चल रही हो , गलत स्थान पर ट्रांसफर हो गया हो , किसी प्रकार का इल्जाम लग गया हो , उसके उपस्थित होने के समय देखकर , उस समय की कुंडली बनाकर समस्या के समाधान को समझा जा सकता है। 

      प्रश्नकुंडली में विवाह (Prashna kundli for marriage)

      इसी तरह प्रश्नकुंडली से किसी की शादी-विवाह का समय निकालना संभव नहीं है। यदि बात कहीं गंभीर तौर पर बनने के बाद रुकावट आ गयी हो, सबकुछ अच्छा होने के बाद वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी आ गयी हो तो उस समय की प्रश्नकुंडली बनाकर परेशानी के अंत के समय क अनुमान संभव है। इसका अर्थ यही है कि जन्मकुंडली न होने की स्थिति में किसी भी मामले में समस्या के उपस्थित होने की कुंडली बनाकर समस्या के समाधान का समय बताया जा सकता है, लेकिन जन्मकुंडली की तुलना में इसकी सत्यता का प्रतिशत कुछ कम होगा। 

      prashn kundali kaise banaye ?

      प्रश्न कुंडली बनाने की विधि (prasn kundli kaise dekhe)

      गत्यात्मक ज्योतिष मानता है कि प्रश्न पूछने के समय को नहीं, वरन वास्तव में घटना उपस्थित होने से आपके मस्तिष्क में जिस समय कोई प्रश्न आता है, किसी समय खास परिस्थितिया उपस्थित होती हैँ, उस समय को प्रश्नकुंडली बनाने के लिए लिया जाये, तो गोचर के प्रभाव से किस समय खास परिस्थितिया उपस्थित हुई, जिनके करण किसी के मन में कोई प्रश्न आया तो इसका समाधान कब हो सकता है, इसके बारे में संभावना व्यक्त की जा सकती है।

       पर आजतक प्रश्नकुंडली बनाने का आधार भी गलत लिया जाता रहा है। प्रश्नकुंडली में प्रश्न पूछने का समय नहीं लेकर कुंडली नहीं बनानी चाहिए। प्रश्न के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों के उपस्थित होने का समय लिया जाना चाहिए!

      'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर कुंडली निर्माण, सटीक भविष्यवाणी, उचित परामर्श और समुचित उपचार के लिए संपर्क करें - 8292466723, gatyatmakjyotishapp@gmail.com

      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        वैदिक अंक ज्योतिष

        Ank jyotish in Hindi

        अंक ज्योतिष का जादू - अब हम कुछ देर के लिए न्यूमरोलॉजी या वैदिक अंक ज्योतिष की चर्चा करें। अंकविज्ञान के ज्ञाता विश्व के लोगों को 9 अंकों के आधार पर चारित्रिक विशेषताओं की दृष्टि से 9 भागों में बॉट देते हैं। ऐसा करने से प्रत्येक अंक में लगभग करोड़ों व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व होता है । एक अंक के अंतर्गत आनेवाले इतने सारे लोगों के गुण-दोष कभी भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं। स्मरण रहे , एक तिथि में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्तियों का मूलांक एक ही होगा। 

        न्यूमरोलॉजी के अनुसार उन सभी व्यक्तियों के गुण-दोष एक जैसे होंगे , किन्तु फलित ज्योतिष इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता , क्योंकि लग्न बदलने के साथ ही भावाधिपत्य बदल जाने से ग्रहों के कार्य-कलाप के पहलू बदल जाते हैं , अत: भिन्न भिन्न लग्नों के सभी जातकों की चारित्रिक विशेषताएं बदल जाती हैं, क्योंकि एक दिन में बारह लग्न होते हैं। फिर कैसे माना जा सकता है कि अंक ज्योतिष का जादू लोगों के जीवन पर पड़ता है। 

        जब कोई व्यक्ति मूलांक के अनुसार उसके जीवन में घटित होनेवाली घटनाओं को मिलाना आरंभ करता है तो उसे लगता है कि उस व्यक्ति के साथ घटित होनेवाली सारी महत्वपूर्ण घटनाएं उसी मूलांक के समानांतर या सापेक्ष घटती चली गयी है , किन्तु बात वैसी नहीं होती , अंक ज्योतिष का जादू कोई नहीं होता। दरअसल मूलांक के अनुसार घटनेवाली किन्ही दस घटनाओं का चयन न्यूमरोलोजिस्ट अपनी सुविधानुसार कर देते हैं , जबकि महत्वपूर्ण घटनाओं की संख्या 90 के आसपास होती है। प्रत्येक अंक में घटित होनेवाली घटनाओं की संख्या दस के आसपास होती है, ऐसी स्थित में अंक ज्योतिष का जादू  सकता। 


        ank jyotish

        Mulank bhagyank namank

        वैदिक अंक ज्योतिष को आधार मानकर किसी के जीवन की विशेष घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती , बुद्धि-विलास या माथापच्ची की बात भले ही हो जाए। अंकों को ग्रहों के गुण-दोष का कोई वैज्ञानिक आधार प्राप्त नहीं है। वैदिक अंक ज्योतिष में किसी खास तिथि का एक ही मूलांक होता है , जबकि फलित ज्योतिष मे एक तिथि में बारह लग्नों के अनुसार जातक की चारिति्रक विशेषताओं का उल्लेख किया जाता है। इसके बावजूद बुिद्धजीवी हम ज्योतिषियों से एक प्रश्न किया करते हैं- एक लग्न में हजारो लोग पैदा होते हैं , क्या सबकी मंजिल एक होती हैं ? 

        तब इसके जवाब में ज्योतिषी नवमांश , षट्यांश या इससे भी सूक्ष्म नदीस्टोलॉजी की चर्चा करने का प्रयास करते हैं , चाहे सच्चाई जो भी हो या सुननेवाले को संतुष्टि हो या न हो। इतना तो मानना ही पड़ेगा कि फलित ज्योतिष में लग्न पर आधारित चर्चा काफी वैज्ञानिक है , फिर भी इससे सूक्ष्म फलित की तलाश है । इसकी तुलना में वैदिक अंक ज्योतिष काफी स्थूल है और एक तिथि पर आधारित मूलांक का वैज्ञानिक पक्ष कितना मजबूत हो सकता है , यह निस्संदेह विचारणीय है। Gatyatmak Jyotish Shastra Book पढ़ने के लिए इस लिंक और इस लिंक पर क्लिक करें। 

        अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

        कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

          फेंगशुई के टोटके

          Feng shui tips in hindi

          फेंगशुई चीन की एक धार्मिक किताब 'टायो' पर आधारित है.जो बताता है कि ऊर्जा का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक होता है। यह जल और वायु पर आधारित शास्त्र है , जिसके बारे में मान्यता है कि यह घर में मौजूद वास्तुशास्त्र के दोषों को दूर करता है। इन दिनों बाजार में फेंगशुई तरह तरह की वस्तुएँ मिलती हैं , जिनके बारे में दावा किया जाता है कि ये घर में संमृद्धि लाती हैं। फेंगशुई पौधों , फेंगशुई कछुआ , फेंगशुई हाथी , क्रिस्टल पिरामिड , मछलियों का जोड़ा , लॉफिंग बुद्धा , विंड चाइम , बांस के पौधे सहित सैकड़ों फेंगशुई वस्तुएँ आज बाज़ारों और घरों की शोभा बढ़ा रही हैं।

          बढ़ती आबादी के कारण गरीबी और भुखमरी से मरते हुए लोगों को भले ही रोटी की व्यवस्था में फेंग-शुई के सामान बनाने के कुटीर उद्योगों में बनाए जानेवाले सभी आइटमों की कुछ भूमिका हो सकती है, लेकिन चीन के लोगों के लिए फेंगशुई की वस्तुओं के जिन गुणों पर खुद चीन के लोगों को जितना विश्वास नहीं है, अंधाधुंध लाभ कमाने के लिए फैलाए गए इन प्रचारों पर भारतीयों को अंधविश्वास हो गया है कि मरीज के कमरे में कछुआ रखने से वह ठीक हो जाता है, लाल धागे से बंधे सिक्के घर में रखने से तिजोरी खाली नहीं होती, लॉफिंग बुद्धा रखने से घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, विंडचाइम से घर की किस्मत बदलती है, एज्युकेशन टावर रखने से बच्चों का पढ़ाई पर ध्यान-संकेन्द्रण बढ़ता है, सुनहरी मछलियॉ धन के आवाजाही को बढ़ावा देती हैं।

          feng shui tips in hindi

          Feng shui tips for wealth in hindi

          यही कारण है कि आज सारे भारतवर्ष में लगभग छोटे-छोटे दुकानों से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक सभी इन प्रकार के सामानों से भरे पड़े हैं। सजावट और कला की दृष्टि से देखा जाए, तो इन कलात्मक वस्तुओं को खरीदकर कलाकारों को सम्मान देनें या उससे अपने घर के सुंदरता की बढ़ोत्तरी करने में कोई हर्ज की कोई बात नहीं है, किन्तु धन-गुण-ज्ञान की बढ़ोत्तरी या फायदे की दृष्टि से जो भी चौगुना या पॉचगुना मूल्य चुकाकर इन्हें खरीदते हैं, उन्हें पछतावे के अलावा कुछ भी नहीं मिल पाता है, न तो बिना दवा के मरीज ठीक हो सकता है, न बिना व्यावसायिक और प्रबंधकीय ज्ञान के तिजोरी भरी रह सकती है, न बिना सुबुद्धि के घर का कष्ट दूर हो सकता है, न बिना पढ़े पढ़ाई पर ध्यान-संकेन्द्रण बनता है और न ही बिना मेहनत के घर की किस्मत बदल सकती है। यदि मात्र एक-दो इस प्रकार के सामान से इतना फायदा हो, तो जिन देशों में लाखो-लाख इस प्रकार के सामान बन रहे हैं, वे देश तुरंत ही धन-वैभव-सुख-शांति में नंबर 1 क्यो नहीं हो जाते हैं ? क्या इस बात का जबाब किसी के पास है ?

          अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

          कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

            झाड़-फूँक करने वाला भगत

            Jhad phoonk karne wala

            गलती हर इंसान से होती है , किन्तु सही इंसान वही माना जाता है , जो बार-बार एक ही गलती न करे , वरन् एक बार की गयी गलतियों से सीख लेकर अपने व्यक्तित्व को सुधारने का प्रयास करता रहे। किन्तु कभी-कभी इसमें बड़ी-बड़ी बाधाएं आती हैं , इंसान की छोटी-मोटी गलतियों को तो समाज माफ कर देता है , किन्तु उससे यदि कोई बड़ी गलती हो जाती है , तो चाहे वह अपने जीवन को पश्चाताप की अग्नि में झोंक भी क्यों न दे, समाज उसे हेय दृष्टि से ही देखता है। 

            इसके कारण उसका जीवन नरक समान ही हो जाता है। उसकी भविष्य में सामान्य जीवन जी पाने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। इस कारण उसे कभी आत्महत्या कर अपने जीवन का अंत करना होता है तो कभी विक्षिप्त होकर पूरी जिंदगी गुजारने को बाध्य होना पड़ता है।

            Jhad phoonk karne wala

            इस समस्या को दूर करने के लिए ही हमारे ज्ञानी और गुणी लोगों के द्वारा झाड़-फूंक द्वारा इलाज किए जाने का स्वांग रचा जाता था। इस विधि के द्वारा जहॉ एक ओर शैतान के नाम पर व्यक्ति को मार-पीट और यातना देकर उसके किए की सजा भी दी जाती थी , ताकि भविष्य में वह कोई गलती करने का दुस्साहस न करे , वहीं दूसरी ओर समाज के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि इसने जो गलती की , वह इसके द्वारा नहीं वरन् इसके शरीर में विद्यमान शैतान के द्वारा किया गया था , ताकि भविष्य में वह समाज के बुरी दृष्टि का शिकार न हो और उसका आत्मविश्वास बढ़ सके। 

            लेकिन कालांतर में अंधविश्वास समझते हुए इसका वैज्ञानिक स्वरुप विलुप्त हो गया और समाज के निचले तबकों के लिए यह एक अभिशाप के रुप मौजूद हो गया और अभी तक इसका यही स्वरुप हम देख सकते हैं।

            कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

              वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का नक्शा

              Vastu shastra ke anusar ghar ka naksha

              वास्तुशास्त्र मकान के शिल्प की प्राचीनतम विधा है , जो घर के हर कार्य के लिए सही दिशा निर्देशित करती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का नक्शा ऐसा होता है , जो आपको प्रकृति  अनुरूप जीवनशैली में मदद करता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार आपके घर में पूजा का स्थान, भण्डार कहाँ होना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार बैठक , सोने का कमरा ,घर में टॉयलेट कहाँ  होना चाहिए। 

              इन दिनों वास्तुशास्त्र की अनुगूंज हर जगह सुनाई पड़ रही है। बड़े लोग जब लम्बे काल के लिए अपने कार्यक्रमों में विफल होते चले जाते हैं, तब वे अपने कार्यक्रमों, सूझ-बूझ, संगति, समय या संसाधनों के समन्वयन पर दृष्टिपात न कर अपने आवास को, अपने पहनावे को, अपने हस्ताक्षर को दोषपूर्ण समझना शुरु कर देते हैं और उन्हें सुधारने में लग जाते हैं। एक ओर बुरे समय की मार, तो दूसरी ओर इस प्रकार के सुधार का कार्यक्रम — व्यक्ति को लाखों का मूल्य चुकाना पड़ता है।

              वास्तुशास्त्र के जानकार की शुल्क भी अभियंता की तरह ही होती है। जो व्यक्ति अपने आवास की तोड़-फोड़ में लाखो का नुकसान कर रहे होते हैं, वे भला वास्तुशास्त्रवेत्ता को हजारो क्यों नहीं दे सकते हैं ? इस मनोविज्ञान की जानकारी भी उन्हें खूब होती है और इसका फायदा उठाने से वे नहीं चूकते।

              वैवाहिक मामलों के लेख 

              Easy Vastu tips

              वास्‍तुशास्‍त्र के नियम हर प्रकार से अनुकूलित मकान का नक्‍शा अवश्‍य तैयार कर देते हैं , जहां दिशा के अनुसार हर प्रकार की व्‍यवस्‍था रहती है , ताकि आपको घर में धूप , हवा , पानी आवश्‍यकता के अनुरूप मिल पाए और इससे आपका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहे , आप अनाज का संचय अधिक दिनों तक कर सके , किसी प्रकार के दुश्‍मन से बचे रह सकें। पर उसका भाग्‍य से भी संबंध होता है , यह भ्रम न पाले। 

              vastu shastra ke anusar ghar ka naksha

              Vastu shastra

              समय जब अच्छा होता है, तो लक्ष्मी का आगमन होता है, यश की वृद्धि होती है, घर का निर्माण हो जाता है, नौकरी मिल जाती है, समाज में पद-प्रतिष्ठा मिलती है, रत्न-जटित मुकुट सिर पर चढ़ जाता है, पत्नी, बाल-बच्चे सब सुख देनेवाले होते हैं, आत्मविश्वास की बढ़ोत्तरी होती है, व्यक्तित्व आकर्षक हो जाता हैं किन्तु जब समय बुरा होता है, तो लक्ष्मी रुठ जाती है, उसका आगमन अवरुद्ध हो जाता है, यश में कमी हो जाती है, घर गिरने लगता है, उसमें तोड़-फोड़ होने लगता है, उसका रख-रक्षाव ठीक से नहीं हो पाता, समाज से तिरस्कृत होना पड़ता है, रत्न-जटित मुकुट सिर से उतर जाता है, जिन रत्नों को आप शुभ या प्रगतिसूचक मानते हैं, वे स्वत: गिर जातेहैं ,गुम हो जाते हैं, पत्नी, बाल-बच्चे या सभी नजदीकी कष्ट के कारण बन जाते हैं।

              उत्साह के साथ मकान का निर्माण हो रहा हो, तो समझ लीजिए आपका समय अच्छा है, परंतु किसी प्रकार की विवशता में पड़कर आप मकान के नक्शे को बदलने के लिए तोड़-फोड़ कर रहे हों, तो इस अनावश्यक कार्यवाही को ही आप किसी बुरे ग्रह की प्रेरणा समझें। 

              अपने अनुभव से मैं इतना बता सकती हूँ कि घर या जमीन खरीदते वक्त ध्यान रखें कि उसका दक्षिण हिस्सा खुला खुला रहे। तभी आपको जाड़े में धूप की प्रचुरता और गर्मी के दिनों में धुप से बचाव हो सकता है। आज के दौर में आप किसी भी जमीन पर इतना यकीन नहीं कर सकते कि  वहाँ आपके मकान से ऊँचा मकान नहीं बन सकता। इसलिए आपके लिए बेहतर यही होगा कि दक्षिण के हिस्से में सड़क हो,  आपकी बालकनी और कुछ खिड़कियाँ इस दिशा में अवश्य हो। आज फ्रिज और AC  के दौर में मकान के लिए अधिक वास्तु देखने की आवश्यकता नहीं। 

              अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

              कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

                हस्त रेखा शास्त्र

                Hast rekha in Hindi

                हस्तरेखा शास्त्र भविष्‍य कथन की एक बहुत ही प्राचीन और विश्‍वसनीय विधा मानी जाती है। चूंकि सभी लोगों के पास जन्‍म विवरण भी मौजूद नहीं होता है , इसलिए हर युग में हस्‍तरेखा की उपयोगिता बनी हुई है। हस्तरेखाओं से मनुष्य की चारित्रिक विशेषताओं और उसकी प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला जा सकता है। कुछ घटनाओं के संबंध में काफी हद तक सही भविष्यवाणी की जा सकती है, किन्तु हस्तरेखा शास्त्र के साथ सबसे बड़ी कमजोरी है, घटनाओं के साथ समय का उल्लेख न कर पाना।

                दरअसल ज्योतिषी समय विशेषज्ञ ही होते हैं। यदि घटनाओं के साथ घटित होनेवाले समय का उल्लेख नहीं कर सके, तो उस घटना को जानने का महत्व काफी कम हो जाता है। जीवनरेखा कटी हुई हो, दुर्घटना के संकेत मिल रहें हों, तो व्यक्ति किस उम्र में सावधानी बरते, कारण 10 सेमी की रेखा 100 वर्षों की कहानी कह रही है। विभिन्न रेखाएं कहॉ से शुरु हों और कहॉ पर खत्म हों, जिसके आधार पर समय का सही सही निर्धारण किया जा सके, इसका कोई निश्चित विश्वसनीय सूत्र नहीं निकल सका है। ( हस्तरेखा शास्त्र )

                Hast rekha in Hindi


                Hast rekha astrology in Hindi

                जीवन रेखा का प्रारंभ ऊपर से तथा भाग्य रेखा का प्रारंभ नीचे से । किसी भी रेखा को यदि कोई दूसरी रेखा काट रही हो, तो उसका अर्थ अच्छा नहीं है, इसकी भविष्यवाणी तो की जा सकती है, परंतु विश्वासपूर्वक घटना के काल का निर्धारण काफी कठिन काम होगा। हस्तरेखाओं में बड़ी रेखाओं से ज्यादा महत्व पैनी और सूक्ष्म रेखाओं का है, यहॉ तक कि कैपिलरीज का महत्व और अधिक है। पर्वत कितने ऊंचे हैं किधर झुकाव है, हथेली के विभिन्न भागों की ऊंचाई-निचाई को समझने के लिए कंटूरलाइन को समझना, हथेली की कठोरता और कोमलता को समझना, रेखाओं के रंग को समझना, इस तरह बहुत जटिलताएं हैं।

                इन जटिलताओं को सरल करने की दिशा में बहुत कम काम होने से जटिलताएं ज्यो की त्यों बनी हुई हैं। अत: विश्वासयुक्त तिथियुक्त भविष्यवाणियॉ कर पाना काफी कठिन काम है। आकाश की तरह ही ग्रहों से संबंधित फल-कथन कर पाने में फलित ज्योतिश की सीमाएं असीम है , जबकि हस्तरेखा से भविश्य-कथन बंद मुट्ठी की तरह ही सीमित हो जाती है। किसी प्रकार की सिद्धी प्राप्त करने के बाद हथेली देखकर जन्मकुंडली का निर्माण कर भले ही दूसरे को चमत्कृत किया जा सके, पर वैज्ञानिक विधि से हस्तरेखाओं का रुपांतरण कुंडली के रुप में बिल्कुल असंभव है। ( Hast rekha Astrology in Hindi)

                अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

                कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

                  काश अबतक इलाज की अन्य पद्धतियों को भी विकसित किया गया होता !!

                  2009 की बात है , शनिवार और रविवार को बच्‍चों की छुट्टियों की वजह से नींद देर से ही खुलती है । हां , कभी कभार फोन की घंटी नींद अवश्‍य तोड दिया करती है। ऐसे ही एक शनिवार भोर की अलसायी हुई नींद के आगोश में थी कि अचानक फोन की घंटी बजी। फोन उठाकर जैसे ही मैने ‘हलो’ कहा , वैसे छोटी बहन की दर्दनाक आवाज कानों में पडी , ‘दीदी , मुझे बचा लो , ये लोग मेरी जान ले लेंगे।’ मेरे तो होश ही उड गए , विवाह के दस वर्षों तक सबकुछ सामान्‍य रहने के बाद ससुराल में इसके जीवन में कौन सा खतरा आ गया। अपने को बहुत संभालते हुए पूछा , ‘क्‍या हुआ , पूरी बात बताओ ’ तब उसने जो बताया , वह लगभग शून्‍य हुए दिमाग को काफी राहत देनेवाली थी। दरअसल गर्मी की वजह या अन्‍य किसी वजह से कई दिनों से उसके शरीर के कई जगहों पर फोडे निकल गए थे , कुछ काफी बडे भी हो गए थे। शाम को डाक्‍टर ने बडे फोडों को जल्‍द आपरेशन करा लेने की सलाह दी थी। रात में इनलोगों में लंबी बहस चली थी , बहन के पति और श्‍वसुर डाक्‍टर की सलाह मान लेने को कह रहे थे और बहन एक दो दिन इंतजार करना चाह रही थी । सुबह सुबह अपनी हार को नजदीक पाकर उसने घबडाकर मुझे फोन लगा दिया था। अपनों का कष्‍ट देखना बहुत मुश्किल होता है , उसकी समस्‍या को हल करने के लिए मैने जैसे ही अपना दिमाग खपाया , एक उपाय नजर आ ही गया।

                  किसी भी फोडे के लिए आयुर्वेद की एक दवा है ‘एंटीबैक्‍ट्रीन’ , मैने बहुत दिन पूर्व उसका प्रयोग किया था और उसके चार छह घंटे के अंदर उसके प्रभाव से प्रभावित होकर कई बार दूसरों को भी उसके उपयोग की सलाह दी थी , जिसमें से किसी को भी उस दवा पर संदेह नहीं रह गया था। अगर फोडा शुरूआती दौर में हो तो , यह दवा उसे दबा देती है और यदि फोडा पक चुका हो , तो यह दवा उसके मवाद को बहा देती है , यानि फोडा किसी भी हालत में हो , उसका मुंह हो या नहीं , इसका उपयोग किया जा सकता है। बाद में घाव भी इसी दवा से ठीक हो जाता है , इसलिए मैने उसके पति से एक दिन का समय मांगा और बहन को उसी दवा के प्रयोग की सलाह दी। और मेरी आशा के अनुरूप ही रात में उसकी खनकती हुई आवाज कानों में पडी। फोडा बह चुका था , पाठक कभी भी बहुत कम कीमत की इस दवा की परीक्षा ले सकते हैं। एलोपैथी की कडी दवाओं या आपरेशन से बचने के लिए इस प्रकार के बहुत उपाय आयुर्वेद में हैं , जिनके बारे में या तो लोगों को जानकारी नहीं है या फिर वे विश्‍वास नहीं कर पाते।

                  कई बार छोटे बच्‍चों के कब्‍ज को लेकर अभिभावक की पारेशानी को देखकर डाक्‍टर लगातार एलोपैथी की दवा चलाते हैं । मैने ऐसे कई बच्‍चों को छोटी हर्रे घिसकर पिलाने की सलाह दी है और उससे बच्‍चों को फिर एलोपैथी की दवा की जरूरत नहीं रह गयी है। तुलसी , अदरक का रस और मधु को साथ मिलाकर बच्‍चों को पिलाने से सर्दी ठीक हो जाती है , बडे भी इसका काढा पीकर सर्दी ठीक कर सकते हैं। बडे पत्‍ते वाली तुलसी , जो कि घर में नहीं लगायी जाती , वह कुछ बीमारियों में बहुत कारगर होती है। मेरी एक भांजी के पैर में घुटने के नीचे कुछ दाने हो गए , कभी कभी नोचने भी लगे , देखते ही देखते बढने भी लगे। हमने एलोपैथी के चर्मरोग विशेषज्ञ को दिखाया , उसकी कई दवाएं चली , पर कम अधिक होता रहा , जड से नहीं मिटा। हारकर हमने होम्‍योपैथी के डाक्‍टर से दिखाया। पहले सप्‍ताह की दवा से उसने बीमारी बढने की उम्‍मीद की , वह सही रहा , पर दूसरे सप्‍ताह से बीमारी में जो कमी होनी चाहिए थी , वह नहीं हुई और पहले से बडी समस्‍या देखकर हमलोग और घबडा गए। 

                  कुछ दिन बाद हमारे गांव से एक व्‍यक्ति आए , उन्‍होने देखा और अपनी दवाई सुझा दी , और उनकी दवाई से पूरा इन्‍फेक्‍शन समाप्‍त । दवाई का नाम सुनेंगे , तो आप चौंक ही जाएंगे , दवा थी , गाय के ताजे दूध का फेन। एक महीने में बीमारी समाप्‍त हो गयी। बचपन से बिल्‍कुल स्‍वस्‍थ रहे मेरे बडे बेटे को 12 वर्ष की उम्र के बाद सालोभर सर्दी खांसी रहने लगी , पांच छह वर्षों तक एलोपैथी की दवा चलाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ , डाक्‍टर कहा करते थे कि ध्‍यान दें , इसे किस चीज से एलर्जी है , उससे दूर रखें , पर इतने दिनों तक हमें कुछ भी समझ में न आया , जितनी सावधानी बरतते , सर्दी खांसी उतनी ही अधिक परेशान करती थी। अंत में हारकर हमलोगों ने होम्‍योपैथी की दवा चलायी , और छह महीने में एलर्जी जड से दूर। हर वक्‍त टोपी , मफलर , मोजे में अपने को पैक रखने वाले और हर ठंडा खाना से वंचित रहनेवाले उसी बेटे को आज कहीं भी किसी परहेज की जरूरत नहीं होती है। ऐसी अन्‍य बहुत सारी घटनाएं हैं , जिसके कारण एलोपैथी से इतर पद्धतियों पर भी मेरा भरोसा बना हुआ है।

                  एलोपैथी के साइड इफेक्‍ट के कारण उत्‍पन्‍न होने वाली बहुत सी सारी शारीरिक समस्‍याओं के बावजूद भी इलाज की सर्वोत्‍तम पद्धति के रूप में अभी एलोपैथी का नाम ही लिया जा सकता है । एलोपैथी की सफलता को देखते हुए मै भी इसे स्‍वीकारती हूं , वैसे इसका सबसे बडा कारण इस मद में किया जानेवाला खर्च है , इससे इंकार नहीं किया जा सकता । पर छोटी छोटी बीमारियों के लिए ही सही , जहां पर हमारी ये देशी दवाएं कारगर है , वहां एलोपैथी का प्रयोग किया जाना क्‍या उचित है ? लोग ये जानते हैं कि सरदर्द हो , तो दर्दनिवारक गोली लेनी है , पर ये क्‍यूं नहीं जानते कि फोडा होने पर ‘एंटीबैक्‍ट्रीन’ का प्रयोग करना है। ताज्‍जुब की बात है कि यहां की इतनी सटीक देशी दवाइयों की जानकारी यहीं के ही लोगों को मालूम नहीं है। शिक्षा का मतलब अपनी सभ्‍यता, संस्‍कृति और ज्ञान को भूल जाना नहीं होता , पर आजतक ऐसा ही होता आया है , जो हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था को दोषपूर्ण तो ठहरा ही देता है। युग बदलने के साथ ही साथ हर पद्धति का विकास किया जाना अधिक आवश्‍यक है , जब तक हर क्षेत्र का समानुपातिक विकास न हो , एक क्षेत्र की अंधी दौड में हमें शामिल नहीं होना चाहिए।