‏إظهار الرسائل ذات التسميات hindi blogger. إظهار كافة الرسائل
‏إظهار الرسائل ذات التسميات hindi blogger. إظهار كافة الرسائل

कोरोना केसेज क्यों लगातार बढ़ते रहें ?

Are covid cases increasing in india


बहुत गंभीर बातें लिखी जा रही हैं, कृपया राजनीतिक रंग देने की कोशिश न करें। सरकार ने अपने नुकसान की परवाह न करके थोड़े देर से ही सही, पर लॉक डाउन की घोषणा तो की। सरकार ने स्पष्ट बोल था कि ये तीन महीने हमें अपने घर के अंदर रहकर काटने हैं, जो समर्थ हैं अपने खाने पीने की व्यवस्था करें, गरीबों के खाने की व्यवस्था सरकार करेगी। जिनतक सरकार नहीं पहुँच पाए, उनतक समाज के लोग मदद करें। भीषण संकट की घडी है, व्यवसायी अपने एम्प्लाइज के खाने पीने की व्यवस्था करें। मकान मालिक किराया न लें, बैंक EMI न लें। यदि ये सब होता तो कोरोना के केसेज इतने न बढ़ते, गड़बड़ी कहाँ कहाँ आयी, आपलोग ध्यान दें। 

Why covid cases rising in india

मैं तो इतना कहूंगी कि जनता ने इस लॉक डाउन को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन को, पुलिस को, डॉक्टर्स को, नर्सों को काफी दवाब आया। जो बाहर न निकले, वे भी सोसाइटी में पिकनिक मनाते दिखें। घर में किसी एक को सर्दी-बुखार हुआ तो किसी ने खुद से क्वैरेन्टाइन नहीं किया। पूरे घर, सोसाइटी में घूमते मिले। लोगों ने कोरोना की गंभीरता को नहीं समझा। मजदूरों को स्थायित्व का खतरा दिखा। फुर्सत में होम सिकनेस बना, रोज रोज भीड़ इकट्ठी करते रहें। लॉक डाउन के तीसरे दिन से ही यत्र-तत्र जो भीड़ दिखी, वह इसी ओर इशारा करती है। हर जगह सिर्फ लाचारों की भीड़ नहीं थी, हठी की भी भीड़ थी। तीन महीने तो किसी तरह गुजारने थे, सबलोगों को घर में रहकर जीवन जी लेना था, कुछ भी खाकर। सब्जी, दूध की इतनी मारामारी क्यों, हमारे जनरेशन तक पहुँचने के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत की है हम भूल गए।
Are covid cases increasing in india


Why covid cases increasing in india

संकट के समय जानवर भी एकजुटता को महत्व देते आये हैं, लेकिन हमें नहीं देनी थी । कुल मिलाकर एक बात कही जा सकती है कि एकजुटता की कमी से भारत ने बहुत जगह हार मानी है, लोग माने न माने कोरोना काल का इतिहास भी एकजुटता की कमी का इतिहास बनेगा। उनके द्वारा की जानेवाली लापरवाही भविष्य में सबको कोरोना के चक्र में झोंकेगी, जबतक गलती का अहसास होगा, काफी देर हो चुकी होगी। एक बात यह भी है कि जिस देश मे जागरूकता इतनी कम हो कि हेलमेट और सीट बेल्ट भी फाइन के डर से पहनते हों, वहाँ जनता से कुछ उम्मीद करनी भी बेकार है. हमारे यहाँ अभी कोरोना नहीं आया है, यह बात देशभर मे हर जगह हर महीने फेल हो रही है, फिर भी अभीतक लोग यही बात कर रहे हैं। 

Recovery rate of coronavirus

कोरोना के रिकवरी रेट पर मत जाइये, रिकवरी के पहले पूरे महीने जो झेलना पड़ेगा, उसे समझिए ! नादानी मत कीजिए ! कुछ दिनों जरूरी बातों के लिए ही बाहर निकलें ! घर मे रहेंगे तो एक साल पीछे जायेंगे ! बाहर निकले और कोरोना हुआ तो पूरे परिवार डिस्टर्ब होंगे ! कई साल पीछे जायेंगे ! परिवार मे कोई दुर्घटना हो गयी तो जीवनभर खुद को माफ़ न कर सकेंगे ! दूसरे क्या कर रहे हैं, नक़ल न कीजिए ! आप सही कीजिए, दूसरे नक़ल करेंगे ! कोरोना जहाँ फ़ैल जाता है, संभालना मुश्किल होता है ! जहाँ नहीं फैला है, वहाँ फैलने न दें ! सरकार ने पहले दिन ही हाथ खड़े कर दिए थे ! उनसे कुछ उम्मीद नहीं कीजिए ! जब लॉक डाउन का पालन ही नहीं हुआ तो अब सरकार को गाली देने से कुछ नहीं होगा ! अधिक से अधिक लोग पोस्ट को शेयर कीजिए ! ताकि लोग पढ़कर कुछ समझें, भीड़ न बनायें ! बिलकुल जरूरी काम से ही बाहर निकले लोग ! हर जगह भीड़ हो रही है !

मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----




कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    एक और माता आयी हैं !

    indian coronavirus

    पिछले माह हमारे देश में कोरोना को लेकर खास भय नहीं था, लेकिन उसी वक्त मैंने सावधानी से जुडी यह पोस्ट लिखी थी। कुछ लोगों से सराहना भी मिली तो कुछ लोगों ने यह बोला कि इतना कर पाना संभव नहीं है। हमारे गांव की परम्परा से दूर रहे लोगों को कोई भी सावधानी भारी लगती है, जो उनके जीवन का हिस्सा होना चाहिए था। मेडिकल सुविधाओं को देखकर २५ वर्षों के अंदर हमारे जीवनशैली में आयी हिम्मत एक कोरोना जैसे सूक्ष्मजीव से ही कम हो गयी है, जबकि कोरोना जैसी कई अन्य बीमारियों के आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे समय में अपनी पुरानी जीवनशैली में लौट आना बहुत आवश्यक है।

    syptoms of coronavirus

    मेरी मम्मी उस युग के हिसाब से बहुत पढ़ी-लिखी, पर धर्मपरायण और परम्परागत विचारों वाली महिला थी। अपनी जीवनशैली में उन्होंने परंपरागत और नवीनतम दोनों ही प्रकार के विचारों को समाविष्ट किया हुआ था। साफ़ सफाई में जितना उपयोग गोबर का होता, उतना ही डेटॉल और फिनायल का भी। उनके लिए रसोईघर तो बहुत ही शुद्धता वाली जगह थी, नहाये-धोये बिना कोई अंदर नहीं जा सकता था। चाहे कितना भी प्यासा हो, बिना हाथ-पैर को धोये खुद से पानी भी नहीं ले सकता था। लेकिन कोई बच्चा हाथ-पैर नहीं धो रहा हो तो वे रसोई से पानी निकालकर दे देती, सारा काम खुद करती। पैसे लेने देने पर, मोबाइल छू लेने पर, दरवाजे की बाहर की कुण्डी छू लेने पर भी हाथ धोकर रसोई में जाने की आदत का पालन उन्होंने बड़े होते हम बेटियों से भी करवाया और उनके अंतिम वक्त तक तीनों बहुएँ भी यह सब करती रहीं।

    indian coronavirus

    How to check coronavirus


    मैं जब ससुराल आयी तो अपने घर से भी अधिक नियम थे, बाहर से आने पर चप्पल घर बाहर उतारने पड़ते। काम से आने, ट्रैन या हॉस्पिटल से आने पर कपडे बदलने या नहाने पड़ते। यदि चाय- पानी पीने स्थिर होने के लिए थोड़ी देर बैठना भी हो तो आप प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ सकते थे, सोफे पर नहीं। ६-७वी कक्षा में पढ़ने वाली मेरी भतीजी को कभी भी स्कूल से आने के बाद स्कूल ड्रेस घर में टांगते नहीं देखा, वह दूसरे दिन पहनने के लिए बाथरूम के ही कोने में टांग देती थी। यह सब बिलकुल सामान्य दिनों का रूटीन था, इसका एक असर मैंने साफ़ देखा था की जहाँ दूसरे अभिभावक काम से आते ही अपने बच्चे को गोद में उठा लेते थे, उनकी तुलना में हमारे बच्चे को सर्दी-खाँसी यहाँ तक कि पूरे मोहल्ले के बच्चे को मीज़ल्स हुआ पर हमारे बच्चों को काफी बड़े होने पर।

    incubation period of coronavirus

    कोरोना जैसी बीमारियों का हल भी हमारी पुराने जीवनशैली में ही है, साफ़-सफाई से ही इससे बचा जा सकता है। कोरोना का प्रकोप जिस तरह बूढ़ों पर अधिक देखा जा रहा है, उनको सुरक्षित रखने के लिए, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। आज इसलिए फेसबुक पर भी पोस्ट लिखी हूँ, भारतीयों, मत घबराओ, एक और माता आयी हैं ! जबतक टीका नहीं आ जाता, चेचक की तरह इलाज रखो, बच्चों बुजुर्गों की सारी व्यवस्था अलग रखें ! जरूरी कार्यों से बाहर निकलनेवाले अपनी सारी व्यवस्था अलग रखें ! अच्छे मास्क लगाएं, बाहर से आते ही चप्पल बाहर रखें, बहुत सावधानी से बिना किसी चीज को छुए बाथरूम जाएँ ! कपडे गरम पानी मे डुबोएं और सर से पैर तक अच्छे से सफाई करके नहाये ! बाहर से आनेवाले सामानो को मानकर चलें कि इसमें कोरोना है ! एक सप्ताह बाहर छोड़ दे या साबुन से धो लें ! गरम पानी मे 5 मिनट के लिए डाल दें ! उसके बाद ही उसका उपयोग करें ! चेन टूटेगा, हड़बड़ाहट न रखें ! भारत मे कोरोना का खास असर नहीं देखा जा रहा है ! सावधान रहेंगे तो कोरोना भी आउट और हम भी आउट हो पाएंगे !

    मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----



    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।


      'गत्यात्मक ज्योतिष' का जीवन-ग्राफ

       

       Life graph maker

      भारतवासियों के चरित्र को धर्म के द्वारा जितना सकारात्मक स्वरुप दिया गया, उतना किसी और तरीके से संभव ही नहीं था। पर अभी इनका उलटा ही स्वरुप दिखाई दे रहा है। अच्छे वक्त में लोग इसे नहीं मानते , पर थोड़ा बुरा वक्त आते ही धर्म और ज्योतिष की खोज आरम्भ करते हैं। धर्म और ज्योतिष आधुनिक विज्ञान की चीज नहीं , इसलिए किसी के द्वारा इन दोनों विषयों में प्राप्त किया गया अनुभव विचारणीय नहीं होता। धर्म और ज्योतिष से सम्बंधित सकारात्मक विचार आपके पास है , तो वह प्रगतिशीलों को नहीं पचता। 

      यदि धर्म और ज्योतिष से सम्बन्धिक ऋणात्मक विचार आपके पास है , तो वह अंधविश्वासियों को नहीं पचता। इसलिए आप अपने अनुभव समाज में साझा करने की कोशिश ही नहीं करते, ऐसे में फ़ायदा उन्हें मिलता है , जो धर्म और ज्योतिष को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ रहे होते हैं। नुकसान ऐसे लोगों को होता है , जो धर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में ईमानदारी से अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। हमारे पिताजी ने अपना पूरा जीवन ज्योतिष की सेवा में लगाया और ज्योतिष की एक नयी शाखा विकसित की।

      Ups and downs in life meaning

      'गत्यात्मक ज्योतिष' का ऐसा जीवन-ग्राफ , जिसको ५०,००० से ऊपर लोगों ने सही माना है , हमने समाज को ज्योतिष के मामले की ठगी से बचने , ज्योतिष के प्रति जागरूक करने और ज्योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए एक व्यवस्था आरम्भ की है , जिसके द्वारा दुनिया भर के अधिक से अधिक लोगों को ये ग्राफ्स पहुंचाए जा सकें। इस महती कार्य में आप सबों का भी योगदान होना चाहिए। सबके जीवन-भर की परिस्थिति इस ग्राफ के हिसाब से ही चलती है। आपके जीवन के बड़े समयांतराल के सकारात्मक या ऋणात्मक होने की जानकारी यह ग्राफ देता है .. इस ग्राफ से आपका मालूम होगा कि पुरे जीवन में आपका अच्छा और बुरा समयांतराल कब होगा। 

      इस ग्राफ से आपके अच्छे और बुरे ग्रह तथा उनके कारन जीवन का कौन सा पहलु प्रभावित होगा , इसको समझ पाएंगे। 
      life graph maker

      life graph maker

      'गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में और जानकारी प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें :-------

      'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर 4 तरह के ग्राफ, चार्ट सहित सटीक समय-युक्त भविष्यवाणियों के 15 पन्नों की जन्मकुण्डली को प्राप्त करने के लिए संपर्क करें - gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        कोरोना वायरस से बचाव के तरीके

         Instructions for covid 19

        लॉक डाउन -२ शुरू हो गया आज, इसके अलावा कोई चारा न था।  कोरोना महामारी ने पूरे विश्व के सभी लोगों को अपने अपने घर में बैठने के हालात पैदा कर दिए हैं।  इससे कई प्रकार की परेशानियाँ खड़ी हुई हैं, पर कोरोना के देश में तीसरे, चौथे या पांचवे लेवल पहुँच जाने से तुलना की जाये तो ये सारी परेशानियाँ काफी छोटी हैं। लॉक डाउन ने लोगों को यह समझाने में मदद की है कि कोरोना जैसी बीमारी को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए, पर अभी भी बहुत सारे लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं।  फलस्वरूप अभी भी ऐसी गलतिया जारी हैं, जो लॉक डाउन के दौरान नहीं होनी चाहिए थी। पूरा विश्व इस बात पर सहमत है कि इस बीमारी के चेन को ख़त्म करना ही इस बीमारी की सबसे बड़ी दवा है, इसके समक्ष अर्थव्यवस्था को भले ही कुछ नुकसान सहना पड़े। पर ऐसा कितने दिन हो सकता है ?
        instructions for covid 19

        कुछ सावधानी बरतने की सलाह देते हुए किसी दिन ऑफिस भी खुलेंगे, बाजार भी, रेल और गाड़ियाँ भी।  अभी तो कोरोना वायरस से बचने के लिए टीका बनाने में बहुत समय है, तबतक सावधानिया बरतना ही सबसे बड़ा उपाय है। कोरोना छूत की खतरनाक बीमारी तो है, पर छूत की अन्य बीमारियों में लक्षण दिखने के बाद ही संक्रमण का खतरा था, पर यह बीमारी लक्षण से पहले ही संक्रमण ले आती है। वैसे तो सरकार पूरा ध्यान दे रही है, पर हमलोग अभी से हम अपनी जीवनशैली में ये आदतें डाल लें तो बहुत अच्छा रहेगा :---------

        1. पूरे घर के पायदान और सभी वस्तुओं की कवर हटा दें, उनके अंदर कोरोना के छुपे रहने की संभावना बनेगी। प्रतिदिन इनकी साफ़-सफाई मुश्किल होती है। 
        2. प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें, सतह चिकना हो तो वैसे सामान रख सकते हैं, पर जालीदार या डिज़ाइन वाला होने से  यह अच्छी तरह साफ़ नहीं होता। 
        3. घर के परदे उतार दें या बिलकुल साइड कर दें, ताकि बाहर से आये व्यक्ति को बाथरूम जाते वक्त इसका स्पर्श न हो। 
        4. बाहर से आनेवाली वस्तुएँ - राशन, फल और साग सब्जियाँ बार बार न मंगवाएं।  इसे महीने में दो बार या तीन बार एक ही दिन मंगवाएं। 
        5. घर के अंदर आनेवाले सभी सदस्य चप्पल-जुत्ते बाहर उतार दें। ऐसे चप्पल-जूत्ते पहने, जिन्हे साबुन के पानी या डेटोल पानी से साफ़ किया जा सके। 
        6. गैस सिलिंडर, राशन आदि को घर के एक कोने में ३-४ दिन तक छोड़ दें, उसके बाद ही  सेनेटाइज़ करके घर में रखें। 
        7. सब्जियों-फल को एक-दो चम्मच नमक या मीठे सोडे वाले पानी में डुबोकर १५ मिनट छोड़ दें। फिर अच्छी तरह धोकर छानकर निकाल लें।  
        8. दूध के पैकेट को साबुन से साफ़ करके ही उपयोग करें। 
        9. जिस दिन बाहर से सामान आये, उस दिन पूरे घर, किचेन  की सफाई अच्छी तरह करें। 
        10. बाहर से आनेवाले आपकी घंटी या गेट नहीं छुएँ, ऐसी व्यवस्था रखें। प्रतिदिन इसे सनीटाइज़  करें। 
        11. घर के बाहर की सफाई करनेवाले झाड़ू से घर के अंदर की सफाई न करें। 
        12. ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन का उपयोग करें, यदि किसी को पैसे  हो तो पैसों को घर के कोने में एक बैग में टांगकर रखें।  लें-दें के बाद हाथ को अच्छी तरह धोएं। 
        13. हाथ धोते वक्त सभी जगह नल की टोटियों में भी साबुन लगा दिया करें, क्योंकि उसे घर के सभी व्यक्ति छूते हैं। 
        14. अपनी कलाई में डिज़ाइन वाली चूड़ियां न पहने, जिसमे वायरस के घुसने का ख़तरा हो। 
        15. प्रतिदिन कपडे धोने की आदत डालें। बाथरूम में एक बाल्टी में सर्फ का घोल रखें, ताकि नहाने जानेवाले सभी व्यक्ति उसमे अपने उतारे हुए कपडे सावधानी से डाल दे। अंत में उसे वाशिंग मशीन में धोकर धुप में सुखाये। संभव हो तो सभी कपड़ों को डेटोल से अंतिम बार धोएं। 
        16. सुबह मुंह-हाथ धोते वक्त फेसवाश भी अच्छी तरह करें। 
        17. बाहर से आये सामानों को व्यवस्थित करने के बाद घर की सफाई करके स्नान करके ही रसोई में जाएँ। खाना बनाने, खिलाने तक कोई भी दुसरा काम न करें। 
        18. बाहर से आये सामान को व्यवस्थित करने, रसोई बनाने या अन्य काम करने का समय अलग अलग करें, यह नहीं कि खाना बनाते हुए किसी का फ़ोन उठा लिया, किसी को पैसे दे दिए। 
        19. बाहर से लाये गए किसी भी सामान पर भरोसा न करें, उन्हें निकालने, सब्जियों को छीलने-काटने के बाद भी हाथ और वह जगह अच्छी तरह धोएं।  
        20. रसोई में नक्काशी  वाले बर्तन का उपयोग बंद करना होगा।  यदि उपयोग करें तो प्रतिदिन उसे गर्म पानी से धोये। 
        21. किचेन में उपयोग होनेवाले हर सामान को प्रतिदिन गरम पानी और साबुन से धोने की आदत डालनी होगी।  
        22. खाना गर्म बनाने और खाने-खिलाने की आदत डालें। 
        23. किचेन में चाय बनाने भी आएं तो सबसे पहले हाथ अच्छे से धोएं। 
        24. सुबह उठने,  बाहर से आने और कुछ भी खाने-पीने से पहले बच्चों से हाथ धुलवाने की आदत बनानी होगी। 
        25. सबसे बड़ी आदत जो हमें खुद में और बच्चों में विकसित करनी होगी, वह अपना मुंह-नाक-आँख  कभी भी नहीं छूना है । 
        26. खांसी और छींक का क्या है, जरूरी नहीं यह आये तो हमारे सामने टिश्यू पेपर हो, ऐसी स्थिति में कपडे का गला उठाकर अपना मुँह-नाक इसके अंदर करके हम छींक सकते हैं। बच्चों को भी ऐसा ही सिखाएं। 
        27. आप स्वयं भी न तो कहीं भी थूके और न ही किसी को थूकने दें। सरकार को थूकनेवालों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। 
        हर वक्त मन को खुश रखें, मन के हारे हार है मन के जीते जीत।  चुनौतियाँ आयी हैं तो जाएंगी भी !


        मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----


        कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

          छुआछूत : किसी युग का विज्ञान

          What makes someone an untouchable in india

          युगों युगों से मानव-जाति को खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस से जूझना पड़ता है - पूरी दुनिया के हर देश की हर क्षेत्र की टीमें एक छोटे से वायरस कोरोना की महामारी से लड़ने में व्यस्त है। कहते हैं, इससे पहले प्लेग की महामारी 1918 से 1920 के मध्य आयी थी। इन दोनों महामारियों के मध्य का दशक 1960 से 1970 के मध्य का है, जिस समय मैंने होश सम्भाला था। वह दशक मेडिकल के क्षेत्र में आज की तरह विकसित नहीं था, कई बीमारियाँ लोगों को मौत के मुँह में धकेल देती थी। हालाँकि देखा जाये तो आज का मेडिकल साइंस पुरानी बीमारियों से लड़ने में भले ही समर्थ हो गया हो, पर आज भी कई बड़ी बड़ी बीमारियां इसे चुनौती देती ही रहती है। हाल-फिलहाल बीमारी होने की चिंता से बेफिक्र लोग सावधानी कम बरत रहे थे, पर पुराने समाज ने इसलिए लोगों ने अपने जीवनशैली को इस ढंग से बनाया हुआ था कि बीमारियों से कम जूझना पड़े। जिस साफ सफाई और क्वैरेन्टाइन से आज कोरोना से जंग जीतने की कोशिश आज मेडिकल साइंस कर रहा है, वह मैंने होश सँभालते ही देखा था।


          what makes someone an untouchable in india

          corona aur saf-safai ki aadat


          साफ़-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है - सबके घर में दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहाने-धोने तक की व्यवस्था घर से बाहर होती थी। बिना नहाये-धोये खाना बनाना या खाना - दोनों की मनाही थी। शाम को बाहर से काम करके घर लौटे बड़े-बुजुर्ग और खेलकर आये बच्चे - सभी मुँह, हाथ-पैर धोकर ही अंदर आते थे। नहाने से पहले ही हर दिन सुबह-सुबह घर-द्वार-गौशाले, सारे बर्तन और कपडे की सफाई करना जरूरी था। रसोई और खाने की जगह प्रतिदिन गाय के गोबर से लीपा जाता। आँगन, द्वार पर गोबर के घोल का छींटा डालकर झाड़ू लगाई जाती। अमीर लोग सहायक-सहायिकाओं से करवाते, गरीब खुद करते, लेकिन सफाई का पूरा ख्याल करते थे। WHO ने हाथ धोने का जो तरीका बताया है, हमारी या उससे पहले की पीढ़ी को बचपन में माता-पिता द्वारा अवश्य ही सिखाया गया होगा। आज के ज़माने के साबुन, हैंडवाश तो नहीं थे, पर लकड़ी की राख से हम उँगलियों की पोरों, अंगूठो और हाथ के ऊपरी-निचले भागों को आराम से साफ़ किया करते थे। धोने के बाद भी चप्पल घर से बाहर रखते, खासकर रसोई में तो चप्पल ले जाने की अनुमति ही नहीं थी। हो सकता है, उस वक्त तक भी पहले वाले कुछ नियम गायब हो गए होंगे, लेकिन बाद में तो काफी तेजी से ये नियम समाप्त होते चले गए।

          Corona aur khane-pine kee adat

          लोगों को खाने-पीने की आदतें सुधारनी होगी - घर में काम पर किसी को रखने में यह ध्यान दिया जाता था कि उनके समाज के लोगों का खाना-पीना क्या है ? रसोई में आने की अनुमति अपने घर के लोगों के अलावा ब्राह्मणों को ही थी।  गरीब ब्राह्मणों की महिलाएं घर में खाना बना सकती थी, भोज वगैरह में गरीब ब्राह्मण पुरुष इस कार्य को संभालते थे। शाकाहारी परिवारों में शाकाहारी ब्राह्मण और मांसाहारी परिवारों में मांसाहारी ब्राह्मण इस कार्य को सँभालते। अधिकांश मांसाहारी परिवारों में मांसाहार के चूल्हे, बर्तन, हंसिया आदि अलग रखे जाते। प्रतिदिन का खाना उसमे नहीं बनता था। कारण चाहे जो भी हो, माँसाहार में भी मछली और बकरे का ही प्रचलन समाज में अधिक था, इसलिए इसका भक्षण करनेवाले समाज का आँगन तक प्रवेश था। वे हमारे घर-आँगन-द्वार-गौशाले की सफाई कर सकती थी, हमारे बर्तन और कपडे धो सकती थे। हमारे आँगन में खाना खा सकती थी। मुर्गे और अन्य चीजें खानेवालों को घर में प्रवेश नहीं था, यहाँ तक कि घर के मर्द होटल, पिकनिक में मुर्गा खा लें, महिलायें मुर्गे से छू  भी जाएँ तो स्नान करने के बाद ही घर में आ सकते थे। ऐसे चीजों को खानेवालों का आँगन में प्रवेश वर्जित था, ये खेत में काम कर सकते थे। बीमारी को जन्म देनेवाले बहुत रिस्क वाले पेशे वाले लोगों से तो  समाज में पूरा परहेज किया जाता रहा। हो सकता है, इन सबसे भी कभी-कभी बीमारी फैली हो, उन्हें जानकारी हो।

          coronavirus and intouchability

          क्या छुआछूत किसी युग का विज्ञान  रहा है ? - इतने परहेज और साफ़-सफाई के बावजूद बीमारी तो हर घर में दस्तक दे ही देती थी।  पर किसी एक में बीमारी का लक्षण दीखते ही उसे पूरे परिवार या समाज से अलग कर दिया जाता था, खासकर संक्रमण वाले बीमारी से बचने के लिए तो अवश्य ही ऐसा किया जाता था। कुत्ते, साँप आदि के काटने पर भी ऐसा ही किया जाता था। उन्हें अलग बर्तन में खाना दिया जाता था, उनके कपडे-बिस्तर अलग से धोये जाते थे। अलग से नहलाया जाता था, साथ खेलने तक की अनुमति नहीं होती थी। जिस तरह बीमारी होने के बाद लोगों को अलग रखा जाता था, उसी तरह रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी रखनेवालों को भी सबसे अलग रखा जाता। उनका सोना-जागना-स्नान-हर कार्य का समय होता, उनके लिए विशेष पौष्टिक और रोग-प्रतिरोधक क्षमता युक्त खाना बनता। माहवारी के दिनों में महिलाओं, प्रसूता और नवजात को काफी दिनों तक परिवार से अलग सुरक्षित रखा जाता था। आज के युग में कोरोना बीमारी ने हमारे देशवासियों को यह ज्ञान दिया है कि अस्पृश्यता समाज के लिए अभिशाप नहीं, वरदान था। क्या अस्पृश्यता उस युग का विज्ञान था ? मुझे तो ऐसा लगता है, आपको ?

          मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----



          कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

            एप्प : लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति

            jyotish app in hindi



            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा . लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


            1. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित किसी मामले की तकलीफ से थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में  ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो इनकी तकलीफ के बावजूद भी  मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, लाभ, लक्ष्य, मंजिल के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम करवाए जा सकते हैं।

            5. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

            6. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।'

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है ।

            12.'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग लाभ, लक्ष्य, मंजिल के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना एप्प के लिए कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें। 

            16. 'लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. ' लाभ, लक्ष्य, मंजिल  - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलापकी स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए लाभ, लक्ष्य, मंजिल से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर थोड़े सावधान रहें।



            एप्प : कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति की स्थिति

            jyotish app in hindi



            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


            1. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित किसी मामले की तकलीफ से थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो इनकी तकलीफ के बावजूद भी मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति- इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके कामकरवाए जा सकते हैं।

            5. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

            6. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है ।

            12.'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना एप्प के लिए कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिनकैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें। 

            16. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. 'कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीतिकी स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति को लेकर थोड़े सावधान रहें।

            एप्प : भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति

            jyotish app in hindi



            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


            1. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कोई बुरा परिणाम आकर खुद के भाग्य को कोसने जैसा वातावरण जैसा थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो इनकी गड़बड़ी के बावजूद भी भाग्य के प्रति आस्था से मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम।

            5. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर परभाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

            6. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो भाग्य साथ नहीं देता , आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है ।

            12.'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें। 

            16. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. 'भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलापकी स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप को लेकर थोड़े सावधान रहें।


            इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।



            बहुत ख़ुशी की बात है कि हमारा एप्प users के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। तभी तो बिना किसी प्रचार के कम डाउनलोड के बावजूद दो महीनों में ही प्लेस्टोर में jyotish ढूंढने पर यह 15वें स्थान में आ जाता हैं। ज्योतिष एप्प्स के मध्य बेस्ट रेटेड एप्प (4.9) बन गया है। बहुत सारे यूजर इसे प्रतिदिन खोलकर इसके अनुरूप काम को अंजाम भी देने लगे हैं। लेकिन इतने दिनों में आज कई फ़ोन ऐसे आ गए , जिसमे यूजर ने बताया कि एप्प में कल उनके रिजल्ट में सबकुछ सामान्य लिखा हुआ था, पर दिनभर असामान्य और ऋणात्मक घटनाएं हुईं। उन्होंने बताया कि गत्यात्मक ज्योतिष एप्प पर दो-तीन महीने के विश्वास के कारण उन्होंने एप्प अनइंस्टाल करने की बजाय हमें फ़ोन करने को उचित समझा।


            एप्प में कई बार इस तरह के सामान्य रिजल्ट लिखे होते हैं .......

            इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।

            इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।

            इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।


            मैंने अपने कई लेखों में समझाया है कि यह गत्यात्मक ज्योतिष का बिलकुल बेसिक एप्प है। जब भी ऐसी बातें लिखी हो, तो उसका भावार्थ यह मन जाना चाहिए।

            12.'स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'


            भावार्थ - जिस दिन भी स्वास्थ्य के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग इन मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना कुछ मुश्किल हो सकता है।


            बहुत ख़ुशी हो रही है कि आप सभी इस एप्प को समझने में इतनी मेहनत कर रहे हैं। भरोसा दिलाते हैं कि एप्प अभी बिलकुल शुरूआती स्थिति में है , फिर भी पॉजिटिव लिखा हो तो नेगेटिव होने या नेगेटिव लिखा हो तो पॉजिटिव होने जैसा कंट्राडिक्शन नहीं आएगा। पर जहाँ सामान्य की चर्चा वहीँ है , जहाँ हमें एप्प को यह समझने में दिक्कत आयी है कि ये समय धनात्मक होगा या ऋणात्मक। आपलोग एप्प पर इसी तरह भरोसा बनाये रखेंगे तो एक-दो साल में इस तरह की समस्या भी दूर हो जाएगी। अभी सिर्फ इतना किया जा सकता है की जब भी ऐसी तिथि रहेगी, हम यूजर को नोटिफिकेशन के माध्यम से सूचित करने की कोशिश करेंगे।


            #GatyatmakJyotishApp

            एप्प : रूटीन, जीवन-शैली की स्थिति

            Jyotish app in Hindi



            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन रूटीन, जीवन-शैली की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। रूटीन, जीवन-शैली के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि रूटीन, जीवन-शैली के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


            1. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी रूटीन, जीवन-शैली के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिनभर कोई परेशानी से जीवन बाधित रहने जैसा थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रुटीन की गड़बड़ी होते हुए भी मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो कई दिनों से इन मामलों में चल रही किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. 'रूटीन, जीवन-शैली - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, रूटीन, जीवन-शैली के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम, कुछ प्रयोग शुरू किये जा सकते हैं।

            5. 'रूटीन, जीवन-शैली - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर रूटीन, जीवन-शैली की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

            6. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रूटीन, जीवन-शैली की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'रूटीन, जीवन-शैली - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रूटीन, जीवन-शैली की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनने की संभावना होती है ।

            12.'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'रूटीन, जीवन-शैली - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग रूटीन, जीवन-शैली के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके रूटीन, जीवन-शैली के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन रूटीन, जीवन-शैली को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें।

            16. 'रूटीन, जीवन-शैली - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. 'रूटीन, जीवन-शैली - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए रूटीन, जीवन-शैली को लेकर थोड़े सावधान रहें।



            एप्प : रोग, ऋण और शत्रु, प्रभाव की स्थिति

            Click here to install and see what is Tomorrow horoscope in Hindi (Complications)

            Read More about our app

            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।

            Tomorrow horoscope in Hindi


            1. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो इनमें से किसी एक के कारण थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में  ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की गड़बड़ी होते हुए भी मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम, कुछ प्रयोग शुरू किये जा सकते हैं।

            5. 'परोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।


            6. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके सुखदायक माहौल के बनाने की संभावना होती है ।

            12.'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें।

            16. 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभावसे सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. ''रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए 'रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव को लेकर थोड़े सावधान रहें।


            एप्प : पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति

            Click here to install and see what is Todays horoscope in Hindi (Education)

            Read More about our app

            आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के मामलों में इन 17 में से कोई स्थिति आपको लिखी मिल सकती है। लगभग सभी प्रकार की स्थिति और उनके भावार्थ को इस लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के मामलों पर पड़नेवाले ग्रह के प्रभाव को समझा जा सके।


            Todays horoscope in Hindi

            1. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों की स्थिति कमजोर होने के कारण मन में थोड़ी निराशा आ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के मामलों की ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो उनसे वाद-विवाद या उनके सहयोग की कमी के कारण थोड़ा मनोवैज्ञानिक दवाब बन सकता है।

            2. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों की कमजोरी भी मन को निराश करने में सफल नहीं होनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में  ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की गड़बड़ी होते हुए भी मन की मजबूती बनी रहती है।

            3. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों की किसी परेशानी से थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन  मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की किसी कमजोरी से थोड़ी राहत मिल जाती है।

            4. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इनसे सम्बंधित मामलों का बहुत अच्छा वातावरण बना रहना चाहिए । ऐसे मौकों का फायदा उठाया जाना चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो, पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के लिए बहुत ही अच्छा समय चलता रहता है। इस समय इन मामलों के कुछ रुके काम, कुछ प्रयोग शुरू किये जा सकते हैं।

            5. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी- इनसे सम्बंधित मामलों का सुखदायी माहौल दिखाई पड़ना चाहिए ।'

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं होती है ।

            6. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - ये मामले दुःख या असफलता देनेवाले रह सकते हैं।'

            7. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - ये मामले कष्ट या विफलता प्रदान कर सकते हैं।'

            8. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - ये मामले निराशा या तकलीफ देनेवाले रह सकते हैं।

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए उनकी कमजोरी को लेकर सतर्क बने रहें।

            9. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।'

            10. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - ये मामले उम्मीद भरे या जीत देनेवाले बने होने चाहिए।'

            11. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी  - ये मामले सुख या सफलता देनेवाले बने होने चाहिए।

            भावार्थ -  जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति अच्छी दिखाई पड़ती है, इसलिए इस दिन उनके साथ सुखदायक माहौल के बनाने की संभावना होती है ।

            12.'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों के किसी कार्यक्रम की ओर सामान्य ध्यान बना होना चाहिए।'

            13. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों में सामान्य तौर की व्यस्तता बनी होनी चाहिए ।'

            14. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इनसे सम्बंधित मामलों में क्रियाशीलता बनी रहनी चाहिए।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो दिल और दिमाग पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के मामलों की ओर चला जाता है, पर परिस्थितियाँ धनात्मक होंगी या ऋणात्मक, यह समझना कुछ मुश्किल हो सकता है।

            15. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों की कोई समस्या दिखाई पड़ सकती है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए किसी रंग के वस्त्र धारण करें। किसी की मदद के लिए कुछ दान निकालें।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन आपके पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी के लिए अधिक बुरा होता है, इनसे सम्बंधित हर बुरी स्थिति के लिए स्वयं को तैयार रखें। इस दिन पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी को लेकर कोई खास कार्यक्रम न बनायें। दिनभर के अपने सामान्य कार्यक्रम को जारी रखें।

            16. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इनसे सम्बंधित मामलों के अच्छे वातावरण में कोई बाधा दिखाई पड़ सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलो  के बारे में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो वह दिन सामान्य तौर पर पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी से सम्बंधित किसी कमजोरी को उपस्थित करनेवाला हो सकता है।

            17. 'पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी - इन मामलों की स्थिति कमजोर दिखाई दे सकती है।'

            भावार्थ - जिस दिन भी इन मामलों में ऐसी स्थिति लिखी गयी हो तो सामान्य तौर पर पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति गड़बड़ दिखाई पड़ती है, इसलिए पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी को लेकर थोड़े सावधान रहें।