मीन लग्न कुंडली विश्लेषण

Meen Lagna ki kundli in hindi

मीन लग्न में चन्द्रमा का प्रभाव

(Meen Lagna me Chandra)

आसमान के 3...30 डिग्री से 360 डिग्री तक के भाग का नामकरण मीन राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मीन माना जाता है। मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ यही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की बुद्धि तीक्ष्‍ण होती है  , इन्‍हें संतान पक्ष का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , जो मन को खुश रखता है। जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर बुद्धि और सूझ बूझ की कमी और संतान पक्ष के सुख में कमी इनके मन को दुखी करते हैं। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 

मीन लग्न में सूर्य का प्रभाव

(Meen Lagna ki kundli me surya)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु या अन्‍य प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मीन लग्‍न के जातक किसी प्रकार के झंझट को हल कर प्रभाव बढाने में विशेष दिलचस्‍पी रखते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनके झंझट को हल करने का तरीका उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें हर प्रकार के झंझट से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

Meen Lagna ki kundli in hindi

मीन लग्न में मंगल का प्रभाव

(Meen Lagna ki kundli me Mangal)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के धन की स्थिति को मजबूत बनाने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है , किसी प्रकार के संयोग से संसाधन प्राप्‍त करते तथा किसी दुर्योग से संसाधनहीन होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर भाग्‍य के साथ देने से इनका धन कोष मजबूत बना रहता हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमजोरी धन कोष को कमजोर बनाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' पर आधारित प्रतिदिन, प्रतिमाह और प्रतिवर्ष जीवन के हर मामले के भविष्यफल को समझने के लिए इस एप्प को इनस्टॉल करें !

मीन लग्न में  शुक्र का प्रभाव

(Meen Lagna ki kundli me Shukra)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍नवालों की जीवनशैली का भाई बहन बंधु बांधव का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मीन लग्‍नवाले भाई , बहन , बंधु और बांधव का सुख प्राप्‍त करते हैं , उनकी जीवनशैली को सुखमय बनाने में भाई बंधु की भमिका होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो भाई बहन बंधु बांधव से संबंधित जबाबदेहियों के कारण उनकी जीवनशैली कमजोर दिखाई पडती है,  इनसे सहयोग की कमी से तनावग्रस्‍त रहते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

मीन लग्न में बुध का प्रभाव

(Meen Lagna me Budh)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और घर गृहस्‍थी का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी का उनकी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंध बना होता हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को मातृ पक्ष का भरपूर सहयोग मिलता है , हर प्रकार की संपत्ति इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण को सुखमय बनाती हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर जातक का मातृ पक्ष के विचारों से तालमेल नहीं होता , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट का कारण बनकर घर गृहस्‍थी के माहौल को बिगाडती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

मीन लग्न में बृहस्पति का प्रभाव 

(Meen lagna ki Kundli mein Brihaspati)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , पिता पक्ष , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने घटाने में पिता की भूमिका बनती है , उनके व्‍यक्तित्‍व का समाज में एक पहचान बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मीन लग्‍न के जातक को पिता का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , प्रकृति की ओर से स्‍वस्‍थ शरीर प्राप्‍त करते हैं , अपने आत्‍मविश्‍वास से समाज में अच्‍छी पहचान बनती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मीन लग्‍नवाले जातक को पिता का सहयोग नहीं मिलता , स्‍वास्‍‍थ्‍य की गडबडी भी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है और उनकी पहचान में बाधा उपस्थित करती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

मीन लग्न में शनि का प्रभाव 

(Meen Lagna me Shani)

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि एकादश और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के लाभ और खर्च में बडा संबंध होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को नियमित लाभ होता रहता है , जिससे खर्च की दिक्‍कत नहीं आती , हर प्रकार के संबंधों का निर्वाह भी ये आसानी से कर लेते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मीन लग्‍नवालों के लाभ में कमी खर्चशक्ति को कमजोर बनाती है , बाह्य संदर्भों को कमजोर करने में सहायक होती है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए  यहाँ क्लिक कर सकते हैं।  लेकिन ग्रह कमजोर है या मजबूत, इसका पता आंशिक तौर पर हमारे योगकारक ग्रहों का प्रभाव  लेख से मालूम हो सकता है, पर ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी के लिए हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाना आवश्यक है!

यदि आप जानना चाहते हों कि आपके सभी ग्रह कितने-कितने गत्यात्मक शक्ति संपन्न हैं, तो अपनी जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान हमें 8292466723 पर व्हाट्सप्प करें, इसके लिए 250/- सेवा-शुल्क  निर्धारित किया गया है।  


कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

    ज्योतिष में केमद्रुम योग

     

    Kemadrum Yog

    Kemdrum yog in kundli

    काफी दिनों तक ज्‍योतिष के अध्‍ययन और मनन में रत होने के बाद भी सटीक भविष्‍यवाणियां करने में विफल रहे कुछ लोगों से अक्‍सर हमारी मुलाकात हो जाती है , जो अपनी तरह हमें भी ज्‍योतिष का अध्‍ययन छोडने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ज्‍योतिष के परीक्षित माने जाने वाले सिद्धांत भी बिल्‍कुल गलत है और तर्क के साथ ही साथ भविष्‍यवाणी करने के लिए भी खरे नहीं उतरते। इसलिए इस विषय पर समय जाया करना बिल्‍कुल व्‍यर्थ है। हालांकि उनका कहना भी पूरी तरह गलत नहीं , जिस तरह एक हाथी के अलग अलग भागों को छूकर कह रहे सभी अंधे लोगों के विचार में से किसी को भी झूठा नहीं ठहराया जा सकता , पर सही दृष्टिवाला व्‍यक्ति ही बता सकता है कि अंधे गलत नहीं कह रहे हैं। 

    ज्‍योतिष के विराट स्‍वरूप को पूरी तरह समझ पाने में कोई सफल नहीं हो सकते हैं , सो ये धारणा तो स्‍वाभाविक है। ज्‍योतिष के हर अंश को अलग अलग विद्वानों द्वारा विभिन्‍न प्रकार से व्‍याख्‍यायित किया गया है , इसमें भी सच्‍चाई ही है , इसे भी नहीं माना जा सकता। जिस तरह समय के साथ धर्म के क्षेत्र में अनेक ऋषि मुनियों के उत्‍तराधिकारियों द्वारा उनके कहे को गलत ढंग से प्रचारित किया गया है , वैसा ही ज्‍योतिष के क्षेत्र में भी हुआ है और सारे नियमों को सही मान लेने से हमारे निष्‍कर्ष भ्रमोत्‍पादक हो जाते हैं।

    Kemdrum or daridra yog in astrology

    इसी सिलसिले में कुछ दिन पूर्व ज्‍योतिषीय योग के बारे में चर्चा करते हुए मैने गजकेशरी योग की प्रामाणिकता पर सवाल खडे किए थे। इसी प्रकार योग के रूप में खास चर्चित अमला योग में भी 80 प्रतिशत से अधिक जातक जन्‍म ले सकते हैं। इस प्रकार अनेक योगों की चर्चा ज्‍योतिष में ढंग से नहीं की जा सकी है , जिससं लोग गुमराह होते रहते हैं। इसी प्रकार का एक योग केमद्रुम योग भी है , माना जाता है कि चंद्रमा के दोनो ओर कोई भी ग्रह न हो , तो केमद्रुम योग बन जाता है, मैं इतने दिनों से लोगों की जन्‍मकुंडलियां देख रही हूं , यह योग बिल्‍कुल सामान्‍य तौर पर मिल जाया करता है , बिल्‍कुल अपवाद के तौर पर एक दो जगहों पर ही कोई अनिष्‍ट होता मुझे दिखा है , पर ज्‍योतिष में इसके फल के बारे में लिखा गया है .....

    Kemadruma yoga bhanga

    Kemdrum yog in hindi

    केमद्रुम योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति गंदा और हमेशा दु:खी होता है। अपने गलत कार्यों के कारण ही वह जीवनभर परेशान रहता है। आर्थिक दृष्टि से वह गरीब होता है और आजिविका के लिए दर दर भटकता रहता है। ऐसा व्‍यक्ति हमेशा दूसरों पर ही निर्भर रहता है। पारिवारिक सुख की दृष्टि से भी यह सामान्‍य होता है और संतान द्वारा कष्‍ट प्राप्‍त करता है , उसे स्‍त्री भी चिडचिडे स्‍वभाव की मिली है , पर ऐसे व्‍यक्ति दीर्घायु होते हैं। चाहे धनाढ्य कुल में जातक का जन्‍म हुआ हो या सामान्‍य कुल में , मूर्खतापूर्ण कार्यों के कारण दरिद्र जीवन बिताने को मजबूर होता है।

    केमद्रुम योग बडा घातक माना जाता है ....... 

    योगे केमद्रुमे प्राप्‍ते यस्मिन् कस्मिश्‍च जातके। 

    राजयोगा विनश्‍यंति हरि दृष्‍टवा यथा द्विया:।।

    Kemadruma yoga bhanga

    अर्थात् किसी के जन्‍म समय में यदि केमद्रुम योग हो तथा उसकी जन्‍मकुंडली में राजयोग भी हो तो वह विफल हो जाता है। लेकिन समय के साथ साथ इस योग में किसी अनिष्‍ट के न होते देख ज्‍योतिषी इसमें अपवाद जोडते चले गए हैं, जिससे केमद्रुम भंग योग माना जाता है...... 
    जब चंद्रमा सभी ग्रहों से देखा जाता हो। 
    यदि चंद्रमा शुभ स्‍थान में हो। 
    यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्‍त हो। 
    यदि पूर्ण चंद्रमा लग्‍न में हो। 
    यद चंद्रमा दसवें भाव में उच्‍च का हो। 
    केन्‍द्र में चंद्रमा पूर्ण बली हो।

    योगकारक ग्रह

    Kemadruma yoga bhanga or cancellation 

    पर राजयोग को समाप्‍त करने में समर्थ केमद्रुम योग के इतने सामान्‍य ढंग के अपवाद हों , यह मेरे बुद्धि को संतुष्ट नहीं करता। सच तो यह है कि केमद्रुम योग कोई योग ही नहीं , जिससे कोई अनिष्‍ट होता है। ज्‍योतिष के इन्‍हीं कपोल कल्पित सिद्धांतों या हमारे पूर्वजों द्वारा ग्रंथों की सही व्‍याख्‍या न किए जाने से से ज्‍योतिष के अध्‍येताओं को ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाती है और वे ज्‍योतिष को मानने तक से इंकार करते हैं। आज भी सभी ज्‍योतिषियों को परंपरागत सिद्धांतों को गंभीर प्रयोग और परीक्षण के दौर से गुजारकर सटीक ढंग से व्‍याख्‍या किए जाने हेतु एकजुट होने की आवश्‍यकता है , ताकि ज्‍योतिष की विवादास्‍पदता समाप्‍त की जा सके और हम सटीक भविष्‍यवाणियां करने में सफल हो पाएं .

    अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

    कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

      सबके जान-माल को सुरक्षित रखें !

      bhukamp se sambandhit question

      १२ मई को फेसबुक के अपने ग्रुप में मैंने एक पोस्ट लिखी थी ------
      गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार अगले २४ घंटे में कई ग्रहों की स्थितिक शक्ति बहुत अधिक रहेगी। इसलिए विश्व में कहीं भी एक बड़ा भूकंप आ सकता है। पिछले एक महीने से जिन देशों में, जिन शहरों में भूकंप अधिक आ रहे हैं, वहां अधिक सतर्कता की आवश्यकता है ! इस मामले में पाबला जी के इस लेख में दिए गए कुछ एप्प्स आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं ! https://bspabla.com/%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA/खासकरhttps://play.google.com/store/apps/details?id=kr.sira.vibration

      bhukamp latest news

      विश्वभर के भूकंप का डाटा संग्रह करनेवाले वेबसाइट में आप १२-१३ मई को भूकंप की बढ़ी हुई संख्या की तुलना आगे-पीछे की तिथियों से कर सकते हैं -----



      7 मई

      Summary: 183 quakes M2+, 93 quakes M3+, 43 quakes M4+, 2 quakes M5+, 1 quake M6+ (322 total)

      8 May

      Summary: 209 quakes M2+, 107 quakes M3+, 33 quakes M4+, 4 quakes M5+ (353 total)

      9 May

      Summary: 191 quakes M2+, 119 quakes M3+, 36 quakes M4+, 5 quakes M5+ (351 total)

      10 May

      Summary: 195 quakes M2+, 111 quakes M3+, 31 quakes M4+, 3 quakes M5+ (340 total)

      11 may

      Summary: 206 quakes M2+, 130 quakes M3+, 36 quakes M4+, 1 quake M5+ (373 total)

      12 may

      Summary: 230 quakes M2+, 124 quakes M3+, 33 quakes M4+, 2 quakes M5+ (389 total)

      13 may

      Summary: 189 quakes M2+, 108 quakes M3+, 34 quakes M4+, 3 quakes M5+ (334 total)

      bhukamp news today



      KATHMANDU: A moderate earthquake of 5.3-magnitude rocked central Nepal late last night, sending panic-stricken people out of their homes and bringing back awful memories of the devastating quake of 2015 that killed over 9,000 people in the Himalayan nation.

      bhukamp kab aayega

      सवाल अब यह है कि क्या ग्रहीय दृष्टि से अब बड़े भूकंप की आशंका समाप्त हो गयी है ?


      तो जवाब यह है कि भले ही कई ग्रहों की स्थैतिक शक्ति के बढ़ने से भूकंप का योग उस दिन बन रहा था, पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के हिसाब से भूकंप में चन्द्रमा की भी भूमिका को देखा गया है। उस दृष्टि से अगले २४ घंटे में भी एक बड़े भूकंप की आशंका मानी जा सकती है। इसमें किसी भी देश के लिए रात्रि १२ बजे से २ बजे तक का समय सबसे गड़बड़ है। भारत से छह घंटे पूर्व जहाँ सूर्यास्त होता है, उन देशों के आसपास की आशंका भी अधिक लग रही है। होनी तो तय है, पर आईये ईश्वर से प्रार्थना करें, सबके जान-माल को सुरक्षित रखें !

       bhukamp latest news

      14 May से १६ मई तक  फिर भूकम्पों की संख्या बढ़ी है -----
       १४ मई -----
      Summary: 188 quakes M2+, 131 quakes M3+, 38 quakes M4+, 1 quake M5+ (358 total)
      १५ मई ----
      Summary: 307 quakes M2+, 145 quakes M3+, 46 quakes M4+, 3 quakes M5+, 1 quake M6+ (502 total)
      १६ मई ----

      Summary: 379 quakes M2+, 133 quakes M3+, 31 quakes M4+, 3 quakes M5+ (546 total)
      १७ मई ----
      Summary: 315 quakes M2+, 123 quakes M3+, 35 quakes M4+, 3 quakes M5+ (476 total)



      कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

        फलित ज्योतिषः सांकेतिक विज्ञान

         Jyotish learning in Hindi

        How to Learn jyotish in hindi

        फलित ज्योतिष ग्रहों का मानवजीवन पर पड़नेवाले प्रभाव का अध्ययन करता है। भारत ऋषियों, मुनियों, विचारकों, गणितज्ञों और वैज्ञानिकों का देश रहा है। ज्योतिष के साथ ही साथ यहां अनेक विद्याओं का जन्म हुआ। उसके बाद पूरे विश्व में इसका प्रचार और प्रसार हुआ। पाश्चात्य देश अभी भी कई प्रकार की विद्या का जनक भारत को ही मानते हैं। ज्योतिष और गणित के क्षेत्र में विश्व को भारत का बड़ा योगदान मिला है। प्राचीन भारत में जब हर प्रकार के वैज्ञानिक साधनों का अभाव था , ज्योतिष का जितना भी विकास हुआ , हम भारतवासियों के लिए गर्व की बात है।

        गणित के क्षेत्र में ब्रह्मांड का 12 भागों में विभाजन, सभी राशियों का नामकरण, नवों ग्रहों का अधिकार क्षेत्र के साथ ही साथ सौर वर्ष , चंद्रवर्ष , सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण जैसी घटनाओं का घटीपल तक ज्ञात कर लेना निस्संदेह उस युग के लिए बहुत बड़ी बात थी। फलित ज्योतिष के क्षेत्र में जन्मपत्री का निर्माण तथा अन्य ज्योतिषीय भविष्यवाणियां होती थी , जिसमें शतप्रतिशत न सही , लेकिन कुछ हद तक सत्यता अवश्य होती थी, यही कारण था कि प्राचीन राजा महाराजाओं के पास एक ज्योतिषी अवश्य रखे जाते थे , जो राजघराने में उत्पन्न बच्चों की जन्मपत्रियों का निर्माण ,अन्य भविष्यवाणियों की गणना तथा अनेक राजकार्यों के लिए मुहूर्त्त का निर्धारण करते थे।

        Learning jyotish shastra in Hindi

        भारतवर्ष में आज भी कुंडली बनाने , मुहूर्त्त निकालने तथा वरवधू की कुंडली मिलाने के लिए ज्योतिषियों की जरूरत पड़ती है , लेकिन आज यह विडम्बना ही है कि फलित ज्योतिष महलों से निकलकर सड़कों पर आ पड़ा है। आज अनेक ज्योतिषियों को सड़कों पर कुछ ज्योतिषीय पुस्तकों के साथ देखा जा सकता है , जो उसी के सहारे आतेजाते राहगीरों का कुछ पैसे ऐंठ लेते हैं।यही कारण है कि इतने वर्षों बाद भी इस क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ। फलित ज्योतिष जैसे विषय से आज जनता का विश्वास ही उठ गया है। इसका मुख्य कारण ज्योतिष का परंपरागत व्यवसाय के रूप में सिमटकर रह जाना है। वे लम्बेलम्बे खर्चवाले अनुष्ठानों और पूजापाठ के द्वारा बिगड़े ग्रहों को तो शांत करने में असफल रहते हैं, पर इससे परेशान लोग और परेशान होते हैं।ज्योतिषी ज्योतिष की आड़ में अपने पैसे की हवस को पूरा करना चाहते हैं , इस कारण समझदार लोग अपने को ज्योतिषियों के चंगुल में फंसने से बचाना चाहते हैं।

        चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

        मनुष्य का जीवन दुख और सुख से मिलकर बना है। प्राचीनकाल की अनेक कहानियों और आधुनिक जीवन के अनेक उदाहरणों से स्पष्ट है कि मनुष्य का जीवन सुख और दुख दोनों का अनुभव करने के लिए है। इसमें ग्रहों का विशेष प्रभाव पड़ता है। हमने अपने अध्ययन में पाया है कि ग्रहों के अनुसार ही मनुष्य के सामने विशेष काल में विशेष परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं , जिसका सामना उसे करना पड़ता है। किन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि मनुष्य की मेहनत का कोई मूल्य नहीं है। ग्रह वास्तव में मनुष्य के स्वभाव , बनावट और परिस्थितियों को नियंत्रित करता है , पर वह व्यक्ति की मेहनत , बदलते युग , बढ़ते स्तर और माहौल को नहीं नियंत्रित कर सकता , उसमें भले ही कमी और बेशी ले आवे।

        लग्नकुंडली

        Learn Jyotish in Hindi

        विश्व में प्रति सेकण्ड एक बच्चा जन्म लेता है , इस प्रकार प्रति मिनट 60 , प्रति घंटे 3600 और एक दिन में 86400 बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से 7200 बच्चों की कुंडली बिल्कुल एक जैसी होती है , लेकिन उनमें से सभी बच्चे एक सी उंचाई हासिल नहीं करते। उंचाई हासिल करने के लिए मेहनत और परिस्थिति दोनो ही बड़ी चीज होती है। बहुत से ज्योतिषी किसी जन्मकुंडली में गौतम बुद्ध , राजा रामचंद्र , कृष्णजी , इंदिरा गांधी और महात्मा गांधी या किसी अन्य महान पुरूष का कोई एक योग देखकर ही कह उठते हैं-----.'अरे , तुम्हें तो राजा बनना है' या 'तुम्हारी तो 50 लाख की लाटरी लगनेवाली है' इस प्रकार की भविष्यवाणी ग्राहकों को खुश करनेवाली एक चाल है। एक योग में पैदा होनेवाले सभी बच्चों में कोई मजदूर , तो कोई कलर्क , कोई आफिसर तो कोई व्यवसायी और कोई मंत्री के घर जन्म लेता है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में आर्थिक , शैक्षणिक और अन्य वातावरण ग्रह से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

        Learn Jyotish vidya in Hindi

        बदलते युग के साथ भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन होता है। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत संतान पक्ष है , तो वह मातृप्रधान युग में सामान्य व्यक्ति के लिए या किसी भी युग में एक वेश्या के लिए लड़की की अधिकता का संकेत देती है , पर पितृप्रधान युग में वही योग लड़के की अधिकता देगी। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग है , तो वह प्राचीनकाल में घोड़े , हाथी आदि का संकेतक था , पर आज स्कूटर मोटरसाइकिल और कार का संकेत देता है। किसी जन्मकुंडली मे असाध्य रोग से ग्रसित होने का योग हो तो वह किसी युग में व्यक्ति को टीबी का मरीज बनाती थी , उसके बाद कैंसर का और अभी वही योग उसे एड्स का मरीज बना देती है। यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में उत्तम विद्या का योग है , तो वह प्राचीनकाल मे किसी प्रकार के विद्या की जानकारी देता था , बाद में बी ए ,एम ए की और अब वह विद्यार्थियों को प्रोफेशनल कोर्स करवा रहा है।

        Learn Jyotish shastra in Hindi

        वातावरण में परिवर्तन भी ग्रह के प्रभाव को परिवर्तित करता है। किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है, ताकि बड़े होकर वे परिवार की आमदनी बढ़ाएं। किन्तु एक आफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू की बढ़ोत्तरी करेगा। किसी जन्मपत्री में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी , बड़े व्यवसायी के लिए ऐय्याश और एक आफिसर के बेटे के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा। किसी किसान के पुत्र की जन्मकुंडली में उत्तम विद्या का योग होने से वह ग्रेज्युएट हो सकता है , पर एक आफिसर के पुत्र का वही उत्तम योग उसे आई ए एस बना सकता है। किसी किसान के लिए उत्तम मकान का योग उसे पक्के का दो मंजिला मकान ही दे सकता है , पर एक बड़े व्यवसायी का वही योग उसे एक शानदार बंगला देगा। किसी कुंडली में बाहरी स्थान से संपर्क का योग किसी ग्रामीण को शहरी क्षेत्र का , शहरी व्यक्ति के लिए महानगर का , तथा महानगर के व्यक्ति के लिए विदेश का भ्रमण करवा सकता है। किसी कुंडली में ऋणग्रस्तता का योग एक साधारण व्यक्ति को 500-1000 का तथा बड़े व्यवसायी को करोड़ो का ऋणी बना सकता है।

        अलग अलग देश और प्रदेश के अनुसार भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन आता है। किसी विकसित देश में किसी महिला का प्रतिष्ठा का योग उसे प्रतिष्ठित नौकरी देगा , किन्तु भारत में वही योग उस महिला को अच्छा घर वर ही प्रदान कर सकता है। इसी प्रकार किसी महिला की जन्मकुंडली में दृष्ट हल्का कमजोर पति पक्ष भारत में सिर्फ परेशानी उपस्थित करेगा , जबकि अमेरिका जैसे देश में वह तलाक देने या दिलानेवाला होगा।

        Vedic astrology learning online

        इसके अतिरिक्त ग्रह मौसम से संबंधित वातावरण को भी प्रभावित करते हैं। बादल , वर्षा , बाढ़ ,तूफान या भूकम्प का आना भी ग्रह के अनुसार ही होता है। किसी दो ग्रह के विशेष संबंध के अनुसार ही किसी प्रकार के मौसमीय परिवर्तन की संभावना बनती है। ग्रह बाजार और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। कीमतों में वृद्धि तथा मुद्रास्फिति पर भी ग्रहो का पूरा प्रभाव पड़ता है।

        इस प्रकार देखा जाए , तो ग्रह सभी क्षेत्रो में अपना प्रभाव डालते हैं।आज भले ही हम अपने को विज्ञान के युग का समझकर ज्यैतिष पर हंसे या उसे नकारें , पर सत्य तो यह है कि यह पूर्ण तौर पर एक सांकेतिक विज्ञान है और यह मनुष्य के स्वभाव , बनावट और परिस्थितियों तक को बताता है।यहां तक कि ग्रह मानव मन और मस्तिष्क तक का नियंत्रक है। यह मानव मस्तिष्क को वैसा व्यवसाय , वैसी नौकरी या वैसा ही घर वर चुनने को प्ररित करता है , जैसा उसे अपनी जन्मपत्री के अनुसार मिलना चाहिए।

        योगकारक ग्रह

        learning Vedic astrology step by step

        लेकिन यह विज्ञान 90 प्रतिशत परंपरागत और अवैज्ञानिक सिद्धांतों के जाल में फंसा हुआ है। ज्योतिषी पुराने पुराने नियमो के अनुसार ही अभी भी चल रहे हैं। उनके पास कोई नया खोज नहीं है , इसलिए इतने वर्षों बाद भी इसमें कोई नयापन नहीं आ सका है। वे एक नियम की स्थापना कर भी लें , तो उसमें अपवाद पर अपवाद जोड़ते चले जाते हैं। यह सत्य है कि फलित ज्योतिष का विकास अभी पूर्ण तौर पर नही हुआ है , इसमें शत.प्रतिशत भविष्यवाणी करना असंभव है , पर 90 प्रतिशत तो सही भविष्यवाणी की ही जा सकती है। लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि हम अपने को फलित ज्योतिष का जानकार बताने में शर्म का अनुभव करते हैं , क्योंकि समाज के विद्वान वर्ग इसे हेय दृष्टि से देखते है।

        इस क्षेत्र का विकास तब ही होगा , जब पढ़े लिखे लोगों का ध्यान इस क्षेत्र में आएगा तथा वे अपना कुछ समय इस प्राचीन गौरवपूर्ण विज्ञान को समर्पित कर पाएंगे। विश्वविद्यालय को भी इस क्षेत्र में शोधकार्य करनेवालों को सम्मानित करना होगा , जिस दिन ऐसा हुआ, ज्योतिष विज्ञान की दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति शुरू हो जाएगी। इसके बिना हमारा इतने दिनों का प्रयास अधूरा है।

        'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!

        कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

          संभाब्‍यता के नियम से ग्रहयोगों की पुष्टि

           

          Jyotish yogas

          Janam kundli yog

          पुस्‍तकें पढने की परंपरा कितनी भी कम होती क्‍यूं न दिखाई पडे , पढनेवाले लोगों के हाथ में कभी कभी फुर्सत के क्षणों में पुस्‍तकें आ ही जाती हैं। बहुत दिनों बाद इधर काफी दिनों पहले खरीदी गयी एक पुस्‍तक 'ज्‍योतिष के विभिन्‍न योग' को पढने का मौका मिला। कुंडली में दिखाई देनेवाले कुल 125 योगों की इसमें चर्चा है। गजकेशरी योग से लेकर दरिद्र योग तक , दत्‍तक पुत्र योग से लेकर मातृत्‍यक्‍त योग तक , पूर्णायु या शताधिक आयुर्योग से लेकर अमितमायु योग तक , सर्पदंशयोग से दुर्मरण योग तक , महालक्ष्‍मी और सरस्‍वती योग से लेकर दरिद्र योग तक तथा सुरपति योग से लेकर भिक्षुक योग तक। एक नजर देखने पर पुस्‍तक बडी ही रोचक लगी , मुझे लगा कि इसके अध्‍ययन कर लेने से मेरी भविष्‍यवाणियों में एक नया आयाम जुड जाएगा, पर ज्‍यों ज्‍यों मैं गंभीरता से आगे बढती गयी, निराशा ही हाथ आयी। 

          Bhagya yog in kundli

          तब मुझे उन दिनों की याद आ गयी , जब पिताजी के द्वारा ज्‍योतिष की जानकारी के बाद इसमें मेरी रूचि इतनी बढ गयी थी कि इस विषय पर दिन रात कुछ न कुछ पढने का मन होता , लेकिन मेरे लिए घर पर ज्‍योतिष के ढेर सारी पुस्‍तकों में से एक का चयन कर पाना कठिन होता। इस विषय में पिताजी से राय लेना चाहती , तो वे कहते कि ज्‍योतिष की किसी भी पुस्‍तक में कुछ बातें तो ज्ञानवर्द्धक होती है , पर कुछ बातें बिल्‍कुल गुमराह करनेवाली होती हैं।

          उनका कहना था कि ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में वर्णित योगों को ढूंढने के लिए मैने बडे बडे महापुरूषों की कितनी कुंडलियों को देखने में दिन रात एक कर डाला , पर वे योग वहां नहीं मिले , जबकि हमारे मुहल्‍ले में जीवन भर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले हिसाब किताब भर पढाई करने वाले व्‍यक्ति की कुंडली में एक बडा राजयोग दिखाई पड गया। उनका कहना था कि उन्‍होने पंद्रह वर्षों तक मेहनत करके किसी फसलवाले खेत से एक एक घास को चुनकर अलग कर दिया है और वे ज्‍योतिष की बिल्‍कुल स्‍वच्‍छ फसल मुझे प्रदान कर रहे हैं , फिर मुझे पुन: फसल और घास के मध्‍य भटकने की क्‍या आवश्‍यकता ?

          Jyotish yogas

          Gajkesari yog

          योग वाली जिस पुस्‍तक की आज मैं बात कर रही हूं , उसमें पहले ही स्‍थान पर गजकेशरी योग के बारे में लिखा है। चंद्रमा से केन्‍द्र में बृहस्‍पति स्थित हो , तो गजकेशरी योग होता है। वैसे यह ज्‍योतिष का एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण येग माना जाता है , पर हम जैसे गणित को जाननेवालों की यही दिक्‍कत है , किसी बात को ज्‍यों का त्‍यों स्‍वीकार नहीं कर पाते। किसी भी कुंडली में किसी भी ग्रह को बैठने के लिए चंद्रमा से आगे ग्‍यारह भाव होते हैं , ऐसा ही बृहस्‍पति के लिए भी है। केन्‍द्र में होने का मतलब है कि उसमें से चार स्‍थानों में बैठकर यह जातक के लिए गजकेशरी योग उपस्थित कर सकता है। संभाब्‍यता के नियम के अनुसार किसी कुडली में इस योग के बनने की संभावना 4/11 हो जाती है। अब इस योग पर मेरा विश्‍वास करना नामुमकिन है , क्‍यूंकि कुल जनसंख्‍या का 4/11 भाग इस योग में कैसे आ सकता है , जैसा कि इस पुस्‍तक में इस योग के फल के बारे में लिखा है ......

          Raj yog

          इस योग में जन्‍म लेनेवाला जातक अनेक मित्रों , प्रशंसकों और संबंधियों से घिरा रहता है और उनके द्वारा सराहा जाता है। स्‍वभाव से नम्र , विवेकवाण और सद्गुणी होता है। कृषि कार्यों से इसे विशेष लाभ होता है तथा वह नगरपालिकाध्‍यक्ष या मेयर बन जाता है। तेजस्‍वी, मेधावी, गुणज्ञ तथा राज्‍य पक्ष में यह प्रबल उन्‍नति करने वाला होता है। स्‍पष्‍टत: गजकेशरी योग में जन्‍म लेनेवाला जातक जीवन में उच्‍च स्थिति प्राप्‍त कर पूर्ण सुख भोगता है तथा मृत्‍यु के बाद भी उसकी यशगाथा अक्षुण्‍ण रहती है।

          'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!

          कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।