गत्यात्मक ज्योतिष का ग्राफिकल कांसेप्ट

 

Graphical Concept in Astrology

ज्‍योतिष के प्रति आम लोगों की मान्‍यता ठीक नहीं, जब कहीं से कोई उपाय नहीं नजर आता है, तब लोग ज्‍योतिषी के पास जाते हैं जबकि हमारे रिसर्च के बाद कदम कदम पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष आपको सलाह दे सकता है ! दस वर्ष पहले बडे परेशान हालत में मिले थे ये मुझसे, जन्‍मकालीन ग्रहों के आधार पर यह ग्राफ खींचा गया था, उस वक्‍त बस दो महीने की ग्रहीय समस्‍या थी, बताने पर उनके मन की परेशानी दूर हो गयी ! 

दो महीने बाद वो समस्‍या भी समाप्‍त हो गया था ! ग्राफ उन्‍हें दिया था या नहीं याद नहीं, पर देखिए ग्राफ कितना अच्‍छा है, 2015 तक जीवन का हर काम आसानी से हो जाएगा ! पर 2015 के बाद इनका ग्राफ देखिए ! यदि सालभर के अंदर ये हमसे मिले तो समस्‍या से बचाने के लिए कुछ सलाह दी जा सकती है, पर सालभर बाद खुद समस्‍या उपस्थित करके मिलेंगे तो उनकी समस्‍या कैसे दूर होगी ?

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ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों में अंतर का कारण कार्य और कारण में पारस्परिक संबंध की कमी होना है। ग्रह-शक्ति निकालने के लिए मानक-सूत्र का अभाव है। कुल 10-12 सूत्र हैं ,सभी ज्योतिषी अलग अलग सूत्र को महत्वपूर्ण मानते हैं। दशाकाल निर्धारण का एक प्रामाणिक सूत्र है , पर उसमें एक साथ जातक के चार-चार दशा चलते रहतें हैं - एक महादशा, दूसरी अंतर्दशा, तीसरी प्रत्यंतर दशा और चौथी सूक्ष्म महादशा।

इन्हे भी देखें -

गत्यात्मक ज्योतिष का संक्षिप्त परिचय और इसके जनक

'वक्‍त की ताकत' को देखते हुए गत्यात्मक ज्योतिष ने दिए जीने के १० सूत्र ……।

इतने नियमों को यदि कम्प्यूटर में भी डाल दिया जाए , तो वह भी सही परिणाम नहीं दे पाता है , तो अलग अलग पंडितों की भविष्यवाणी में अंतर होना तो स्वाभाविक है। सभी ज्योतिषी अलग अलग दशा को महत्वपूर्ण मान लें तो सबके कथन में अंतर तो आएगा ही । एक मानक सूत्र के कारण 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सभी जानकार 1981 से लेकर आजतक एक जैसी भविष्‍यवाणी करते हैं !

चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

एक बार पापाजी के परिचित हर प्रकार की सांसारिक सुख सफलता प्राप्‍त करने वाले इलाके के सुप्रसिद्ध व्‍यक्ति पापाजी के पास पहुंचे, अपना जन्‍मविवरण दिया तो पापाजी ने उनका जीवनग्राफ खींचकर दिखाया ! 42 वर्ष की उम्र तक ऊंचाई में रहने के बाद ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा था, उसे देखकर वे अपनी समस्‍याओं की चर्चा करने लगे कि किस तरह 42वें वर्ष के बाद ही उनका काम बिगडने लगा था !

पापाजी ने आश्‍चर्य से इस परिवर्तन का कारण पूछा क्‍योंकि जिला स्‍तर से लेकर केन्‍द्र सरकार तक सब तो उनके साथ यहां तक कि उनके हाथ में होते थे ! उन्‍होने पन्‍ने में खींचे गए ग्राफ की ओर इशारा करते हुए कहा कि जबतक ऊपर वाला सरकार हमारे साथ था सब मेरे साथ थे ! जब ऊपरवाली सरकार हमारे साथ नहीं तो किसी का साथ नहीं मिल पा रहा !

सही कहा गया है कि हमारा सब दांवपेंच हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाती है जब समय हमारे प्रतिकूल हो जाता है ! बडे से बडे दिग्‍गज भी प्रतिकूल समय में हार मानने लगते हैं ! पहले से समय की जानकारी हो तो हम अनुकूल क्रियाकलाप और व्यवहार बनाकर रखते हैं। 

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर 4 तरह के ग्राफ, चार्ट सहित सटीक समय-युक्त भविष्यवाणियों के 15 पन्नों की जन्मकुण्डली को प्राप्त करने के लिए संपर्क करें - 8292466723 , gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

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गत्यात्मक ज्योतिष उपाय की पुस्तक

 

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गत्यात्मक ज्योतिष’ मानता है कि मनुष्य के समक्ष उपस्थित होनेवाली शारीरिक, मानसिक या अन्य प्रकार की कमजोरी का एक कारण उसके जन्मकाल के कमजोर ग्रह हैं और उस ग्रह के प्रभाव को मानव पर पड़ने से रोककर ही उस समस्या को कम किया जा सकता है। ज्योतिष अचूक उपाय के लिए निम्न रास्ते हैं -

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1. समय-नियोजन – अंधेरे में चलनेवाले लगभग सभी राहगीर अपने गंतब्य पर पहुंच ही जाते हैं। बिना घड़ी पहने परीक्षार्थी परीक्षा दे ही सकते हैं। बिना कैलेण्डर के लोग वर्ष पूरा कर ही लेते हैं। किन्तु टॉर्च, घड़ी और कैलेण्डर के साथ चलनेवाले लोगों को ही यह अहसास हो सकता है कि उनका रास्ता कितना आसान रहा। वे पूरी अवधि में चिंतामुक्त रहें।

इसी प्रकार का सहयोग ‘गत्यात्मक ज्योतिष’ आपको प्रदान करता है। ग्रहों के बुरे प्रभाव को परिवर्तित कर पाना यानि बुरे को अच्छे में तथा अच्छे को बुरे में बदल पाना असंभव है, किन्तु ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए या अच्छे प्रभाव को और बढ़ा पाने के लिए परामर्श अवश्य दी जा सकती है।

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2. प्रभावी अंगूठी या लॉकेट – अमावस्या के दिन बिल्कुल कमजोर रहने वाला चंद्रमा पूर्णिमा के दिन अपनी पूरी शक्ति में आ जाता है। आप अपनी मन:स्थिति को अच्छी तरह गौर करें, पूर्णिमा और अमावस्या के वक्त आपको अवश्य अंतर दिखाई देगा। पूर्णिमा के दिन चांदी को पूर्ण तौर पर गलाकर एक छल्ला या लॉकेट तैयार कर पहनने से उनमे चंद्रमा की सकारात्मक शक्ति आती है, जिसका पहननेवाले पर अच्छा प्रभाव पडता है, जिससे व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक क्षमता में वृद्धि होती है ।

ये अंगूठियॉ उस मुहूर्त्त में बनवाने से और प्रभावशाली बन जाती है, जब कई ग्रहों का शुभ प्रभाव पृथ्वी के उस स्थान पर पड़ रहा हो, जिस स्थान पर वह अंगूठी बनवायी जा रही हो। दो घंटे के उस विशेष लग्न का चुनाव कर अंगूठी को अधिक प्रभावशाली बनाया जाता है। ऐसा ही मुहूर्त हम निकालकर अपने क्लाइंट्स को देते हैं !

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3. रंगो का चुनाव – यह तथ्य सर्वविदित है कि विभिन्न पदार्थों में रंगों की विभिन्नता का कारण किरणों को अवशोषित और उत्सर्जित करने की शक्ति है। इस आधार पर सफेद रंग की वस्तुओं का चंद्र, हरे रंग की वस्तुओं का बुध, लाल रंग की वस्तुओं का मंगल, चमकीले सफेद रंग की वस्तुओं का शुक्र, तप्त लाल रंग की वस्तुओं का सूर्य, पीले रंग की वस्तुओं का बृहस्पति और काले रंग की वस्तुओं का शनि के साथ संबंध होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

‘गत्यात्मक ज्योतिष’ ग्रहों के प्रभाव को कम या अधिक करने के लिए कलर थेरेपी के महत्व को स्वीकार करता है। रंगो का उपयोग आप विभिन्न रंग के रत्न के साथ ही साथ वस्त्र धारण से लेकर अपने सामानों और घरों की पुताई तक और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों को लगाकर प्राप्त कर सकते हैं।

4. संगति का प्रभाव – हम संगति के महत्व के बारे में हमेशा ही कुछ न कुछ पढ़ते आ रहें हैं। यहॉ तक कहा गया है -----`संगत से गुण होत हैं, संगत से गुण जात´। गत्यात्मक ज्योतिष भी संगति के महत्व को स्वीकार करता है। एक कमजोर ग्रह या कमजोर भाववाले व्यक्ति को मित्रता, संगति, व्यापार या विवाह वैसे लोगों से करनी चाहिए, जिनका वह ग्रह या वह भाव मजबूत हो।

यदि एक बालक का जन्म अमावस्या के दिन हुआ हो, तो उन कमजोरियों के कारण, जिनका चंद्रमा स्वामी है, बचपन में बालक का मनोवैज्ञानिक विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है और बच्चे का स्वभाव कुछ दब्बू किस्म का हो जाता है, उसकी इस स्थिति को ठीक करने के लिए बालक की संगति पर ध्यान देना होगा। पूर्णिमा के आसपास जन्म लेने वाले बच्चों की उच्छृंखलता को देखकर उनके बाल मन का मनोवैज्ञानिक विकास भी कुछ अच्छा हो जाएगा। ऐसा ही अन्य ग्रहों और भावों के साथ भी होता है।

5. दान का महत्व – इसके अलावे ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए हमारे धर्मशास्त्रों में हर तिथि पर्व पर स्नानादि के पश्चात् दान करने के बारे में बताया गया है। अपनी कुंडली के अनुसार ही उसमें जो ग्रह कमजोर हो, उसको मजबूत बनाने के लिए दान करना चाहिए। जातक का चंद्रमा कमजोर हो, तो अनाथाश्रम को दान करना चाहिए, खासकर 12 वर्ष से कम उम्र के अभावग्रस्त और जरुरतमंद बच्चों को दिए जानेवाले दान से उनका काफी भला होगा।

Jyotish books PDF - गत्यात्मक ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव को दूर करने से सम्बंधित उपायों के बारे में प्रकाशित पुस्तक को पढ़ने के लिए अमेज़ॉन के किंडल में  इस लिंक पर क्लिक करें !

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अन्धविश्वास के साथ गरीब लोगों की मजबूरी

 

अन्धविश्वास ही नहीं गरीब लोगों की मजबूरी भी है  (is ojha origin of evil )

हमारी घरेलू सहयिका का पति दो महीने से बीमार चल रहा है , घर में पैसों का आना बंद हो गया है , जो थोड़े पैसे थे वो डॉक्टर दवा के चक्कर में निकल गए , मैं प्रतिदिन उसका हालचाल पूछती तो जबाब निराशाजनक ही मिलता , २४ से ४८ घंटे में एक बार बुखार आना मानो तय हो गया था, हिसाब से अधिक खर्च हो जाने के कारण वह डॉक्टर के पास जाने की स्थिति में नहीं थी , सिम्पटम से मुझे अंदाजा हो रहा था कि १७ अगस्त के बाद समस्या समाप्त हो जानी चाहिए , मैने उससे धैर्य रखने को कहा ! 

पर पति की ऐसी हालत देखकर उसे चैन न था, तीन दिन पहले उसने दो काम किए , पहला हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर दिए जलाकर मन्नत माग आयी कि पति ठीक हो जाएं तो आकर नारियल फोड़ेगी , दूसरा एक ओझा के यहां जाकर तंत्र मंत्र करवा आयी, आज चौथा दिन है, बुखार नहीं चढ़ा अबतक , जबतक हम जनसामान्य के लिए हर प्रकार की मेडिकल सुविधा की व्यवस्था नहीं कर देते , किसी के इस तरह की आस्था को नहीं खत्म कर सकते , मै उससे यह नही कह पायी कि तुम्हारी आस्था अंधविश्वास है.

मैं नरेन्द्र दाभोलकर जी के उसी बात का समर्थन करती हूं जो अंधविश्वास के खिलाफ है, क्योंकि हम लगभग हर माह ही पढ़ते है गाँवों में कैसे डायन आदि के शक में ह्त्या हो जाती है ! पर जबतक सरकारी अस्‍पतालों में मरीज के इलाज की पूरी व्‍यवस्‍था नहीं रहेगी,  मंदिरों , मस्जिदों के चक्‍कर लगाना , ओझाओं के पास जाना गरीब लोगों की मजबूरी है !

 उनके पास प्राइवेट अस्‍पतालों में इलाज कराने के पैसे नहीं होते और सारे ओझा गलत नहीं होते ! गांवों में मनोवैज्ञानिक तौर पर सपोर्ट करने वाले बहुत सारे ओझा है,  जिनका सफाया भी तबतक नहीं होना चाहिए जबतक कि इलाज की अच्‍छी सुविधाएं सरकारी अस्‍पतालों में उपलब्‍ध न हो ! शरीर के अंदर मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता से बीमारी को ठीक करने की शक्ति तो ओझा दे ही देते हैं !सर्टिफाइड डॉक्‍टरों की तरह खर्च का तनाव देकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को समाप्‍त नहीं करते !

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    कोरोना को लेकर घृणा का भाव

     

    Coronavirus problems in society

    अभी कुछ दिन पहले ही हमारी कॉलोनी में कोरोना के मामले आने शुरू हुए हैं ! अखबार में खबर तो पढ़ने को मिलती हैं,  पर संक्रमित का नाम छुपा दिया जाता हैं !  मैं कुछ दिनों से सोच रही थी कि प्रशासन के द्वारा नाम क्यों छुपाया जा रहा हैं ! यदि नाम बताया जाता तो सुविधा होती,  कॉलोनी के लोग उससे दूरी बनाकर रहते,  क्योंकि लॉक डाउन से लेकर अभी तक हमारी कॉलोनी में न तो मास्क और न ही सोशल डिस्टैन्सिंग का ख्याल रखा जा रहा था !

     आज एक पोस्ट मिली,  जिससे मालूम हुआ कि गाँव देहातों में कोरोना मरीजो को घृणात्मक तरीके जा देखा जा रहा हैं ! शायद  इसलिए ही प्रशासन ने नाम छुपाने का निश्चय किया होगा ! आश्चर्य की बात हैं कि एक एक मोहल्ले में सरकार के लोग बैठे हुए हैं,  इतने राजनीतिक पार्टी के लोग भी हर जगह मौजूद हैं ! फिर भी कोरोना से सम्बंधित भ्रम का उन्मूलन 5 महीनों में नहीं हो पाया !

    5 महीनों में भी लोगो को समझ में नहीं आ रहा कि कोरोना से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए !  कुछ इमरजेंसी ड्यूटी करनेवालों को छोड़ दिया जाये तो अन्य भी कुछ लोग बेवजह बिना मास्क लगाए बिना सोशल डिस्टैन्सिंग के घूमते, होटलों में खाते पीते और कोरोना को आमंत्रण देते मिलेंगे ! वास्तव में कोरोना उन्ही की लापरवाही से बढ़ रही हैं ! इसमें कोई शक नहीं कि सबसे पहले तो इन्ही में से कुछ लोग कोरोना के शिकार बनते हैं ! इनके कारण ही धीरे धीरे कोरोना संक्रमण सबमे फैलता हैं ! 

    कोरोना को समेट पाने की कोशिश में अब कामयाबी मिलनी मुश्किल हैं ! क्योंकि अभी समाज में कोरोना बहुत अधिक फ़ैल चुका हैं !  इसलिए कभी भी कोई भी कोरोना का शिकार हो सकता हैं !  दक्षिण एशिया के दक्षिण में वैसे भी कोरोना की मारक क्षमता कम देखी जा रही हैं !  इसके बावजूद आप सावधानी बरतें,  कोरोना मरीजो से आवश्यक दूरी तो बनानी ही होगी ! पर घृणात्मक व्यवहार उचित नहीं हैं ! 

    95% से 97% मरीजों पर कोरोना कोई असर नहीं डालता,  वे अपनी देखभाल करने में समर्थ होते हैं,  वहाँ जाकर कोई खुद को संक्रमित कर ले,  यह कहाँ का न्याय हैं? आजकल सबों के पास फ़ोन की सुविधा हैं,  फ़ोन करके किसी से सामान मंगवा लेना चाहिए !  सबसे दूरी तो बनाये रखनी पड़ेगी ही !  बाकी के 3% से 5% गंभीर मरीजों को अस्पताल ही जाना पड़ता हैं,  वहाँ भी परिवार के किसी सदस्य की कोई आवश्यकता नहीं,  डॉक्टर आपको अंदर जाने ही नहीं देंगे ! 

    ईश्वर की इच्छा के हिसाब से कोरोना के कुछ मरीजों का निधन हो जाता हैं तो कुछ एक महीने में ठीक हो ही जाते हैं ! शुरुआत में लोगों को अनुभव की कमी थी,  पर 5 महीनों में बहुत कुछ समझ में आ गया हैं ! अभी भी सावधान रहने की जरूरत तो हैं,  पर कोरोना को लेकर मोहल्ले,  गाँव और देशवासियों से घृणा करने की जगह कहाँ हैं?

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      महाभारत का कौन सा चरित्र आपको पसंद है ?

      Which Mahabharata character are you?

      महाभारत की कहानी हैं कि कर्ण ने कृष्ण जी से पूछा कि मेरा कसूर क्या हैं, जो मुझे जीवन में मिला ! कृष्ण जी ने बोला कि आपने सिर्फ अपनी सोची, दुनिया में लाखों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने को गलती नहीं की, फिर भी झेलते हैं ! आपको मैं भी दिखाई नहीं दे रहा, जिसने जन्म से पहले जेल मिल गया और जन्म के बाद चुनौतियाँ ही चुनौतियाँ बिना किसी पर दोषारोपण किये डटकर मुकाबला किया मैंने !

      मेरी अपनी जाति में भी एक ओर करोडपति अरबपति मौजूद हैं और किसी सेठ के यहां 2000/- प्रतिमाह से लेकर अनलिमिटेड वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी भी ! मेरे अपने प्रदेश में भी एक अोर करोडपति अरबपति मौजूद हैं और किसी सेठ के यहां 2000/- प्रतिमाह से अनलिमिटेड वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी भी ! अपने देश में भी एक अोर करोडपति अरबपति मौजूद हैं और किसी सेठ के यहां 2000/- प्रतिमाह से अनलिमिटेड वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी भी ! पूरी दुनिया में भी एक ओर करोडपति अरबपति मौजूद हैं और किसी सेठ के यहां 2000/- प्रतिमाह से लेकर अनलिमिटेड वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी भी !

      Which mahabharata character are you



      इन्हे भी देखें -

      इसका कारण यह नहीं कि आज के करोडपति अरबपतियों ने सबका शोषण किया, वरन् यह कि उनके पूर्वजों ने आज के कर्मचारियों के पूर्वजों की की तुलना में सपने पहले देखे और उन्‍हे पूरा किया और अपनी आने वाली पीढी को इस लायक बनाया कि वे कर्मचारियों को 2000/- प्रतिमाह से लेकर अनलिमिटेड वेतन पर काम दे सके ! उनसे द्वेष रखने की बजाए कर्मचारियों को भी सपने देखने पडेंगे, ताकि उनके बच्‍चे भी करोडपति अरबपति बन सके और कर्मचारियों को 2000/- प्रतिमाह से लेकर अनलिमिटेड वेतन पर काम दे सकें !

      हमारी संस्‍कृति तोडना नहीं जोडना सीखलाती है, किसी भी शुभ अवसर में छोटी छोटी बूंदियों को जोडकर लड्डू बनाया जाता है, बूंदियों के मध्‍य इसका स्‍वाद बढाने वाली चीजें स्‍वीकार्य हैं, स्‍वाद घटाने वाली चीजें नहीं डाली जाती ! यही कारण हैं कि कर्मकांड के कारण किसी भी शुभ अवसर पर समाज के हर वर्ग की उपस्थिति की आवश्यकता पड़ती हैं ! यदि दुनिया में कुछ ऐसे ऊंचे सपने देखने वाले लोग नहीं हो तो आनेवाली पीढी भूख से बेहाल होकर मरती रहेगी ! काश अमीरों से द्वेष रखने वाले इस बात को समझ पाते !

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