कबीर के दोहे धर्म पर

 

कबीर के दोहे धर्म पर

(Kabir k dohe in Hindi)

आज के  युग में भी कबीरदास जी के चिंतन के सभी कायल हैं। उनके दोहे सर्वकालिक और सार्वभौमिक माने जा सकते हैं। जड़ धर्म पर उन्होंने जमकर चोट की है और  अपने दोहो में धर्म का व्यावहारिक रूप सामने रखा है। 

Kabir ke dohe dharm par


 कस्तूरी  कुंडली  बसै  मृग  ढूँढ़ै  बन  माहि। 

ऐसे  घट  घट  राम  हैं  दुनिया  देखत नाहिं।

जिस तरह हिरन के अपने शरीर में ही कस्तूरी होता है , पर उसकी सुगंध को ढूंढता हुआ पुरे जंगल भटकता है , उसी प्रकार ईश्वर हमारे साथ हैं , पर हम उसे मंदिरों और मस्जिदों में ढूंढते फिरते हैं ।

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,

कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

कोई व्यक्ति हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता रहता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता। कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ दे और मन के मोतियों को बदलो या फेरो।

जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं नाहीं ।

प्रेम गली अति सांकरी जामें दो न समाहीं ।

मन में अहंकार था तो प्रभु साथ नहीं थे , मन का अहंकार  समाप्त हुआ तो प्रभु मिले। प्रेम की गली इतनी पतली संकरी होती है कि उसमे अहम् या परम एक ही रह सकता है ! परम की प्राप्ति के लिए अहम् का विसर्जन आवश्यक है।

कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ।

कबीर दास जी कहते हैं लोग अंधे और मूर्ख हैं जो गुरु की महिमा को नहीं समझ पाते। ईश्वर आपसे रूठ गया तो गुरु का सहारा है लेकिन अगर गुरु आपसे रूठ गया तो दुनियां में कहीं आपका सहारा नहीं है।

लंबा मारग दूरि घर, बिकट पंथ बहु मार।

कहौ संतों क्यूं पाइए, दुर्लभ हरि दीदार।

रास्ता लम्बा और भयंकर है , चोर और ठग भरे पड़े हैं। हम उनमें पड़कर हम भरमाए रहते हैं – बहुत से आकर्षण हमें अपनी ओर खींचते रहते हैं, ईश्वर का दीदार नहीं हो पाता। 

धर्म किये धन ना घटे, नदी न घट्ट नीर।

अपनी आखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर।

धर्म परोपकार, दान सेवा करने से धन नहीं घटना, देखो नदी सदैव बहती रहती है, परन्तु उसका जल घटना नहीं। धर्म करके स्वयं देख लो, कभी भी धन की धारा नहीं कम होगी। 

जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप ।

जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ।

कबीर दास जी कहते हैं कि दया और धर्म ,  लोभ और पाप , क्रोध और सर्वनाश साथ साथ होते है,  लेकिन जहाँ क्षमा है वहाँ ईश्वर का वास होता है।

पतिबरता मैली भली गले कांच की पोत ।

सब सखियाँ में यों दिपै ज्यों सूरज की जोत ।

पतिव्रता स्त्री तन से मैली भी हो भी अच्छी है।  उसके गले में केवल कांच के मोती की माला भी हो तो वह अपनी सब सखियों के मध्य सूर्य के तेज के समान चमकती है !

मन के हारे हार है मन के जीते जीत ।

कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत ।

जय पराजय केवल मन की भावनाएं हैं, मनुष्य मन में हार गया तो पराजय है और उसने मन को जीत लिया तो वह विजेता है। ईश्वर को भी मन के विश्वास से ही पा सकते हैं। 

अपनी आखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर।

मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

 ज्ञान का महत्व धर्म से कही ऊपर है इसलिए किसी भी सज्जन के धर्म को किनारे रख कर उसके ज्ञान को महत्व देना चाहिए। जिस प्रकार मुसीबत में तलवार काम आता है , उसको ढकने वाला म्यान नहीं , उसी प्रकार विकट परिस्थिती में सज्जन का ज्ञान काम आता है, उसका जाती या धर्म नहीं । 

अमेज़ॉन के किंडल में विद्या सागर महथा जी की फलित  ज्योतिष  :  कितना  सच  कितना  झूठ  को  पढ़ने  के  लिए   इस लिंक पर क्लिक करें !

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    धर्म और ज्‍योतिष को बदनाम न करो बाबा

    धर्म और ज्‍योतिष को बदनाम न करो बाबा

    अपने रिसर्च के क्रम में गत्यात्मक ज्योतिष ने पाया कि दुनियाभर में आज धर्म के नाम पर चल रहा है , वह धर्म है ही नहीं। धर्म , आध्यात्म और अन्धविश्वास  में एक बारीक अंतर होता है।  धर्म और आध्यात्म को बिलकुल अलग ढंग से परिभाषित किया जा सकता है। इस तरह गत्यात्मक ज्योतिष ही आपका आध्यात्मिक गुरु बन सकता है।  समाज के लोगों से विनती है कि वे धर्म के नाम पर उलूल जूलूल स्वीकार न करें। गत्यात्मक ज्योतिष के द्वारा बनाये गए नियमों से चलें। इसलिए समाज में धर्म के नाम पर अन्धविश्वास को परोसनेवाले से भी हमारी विनती रही कि कृपया वे ऐसा न करें , समाज में धर्म को सही ढंग से परिभाषित करें। 

    दुनिया भर के खासकर भारत में गली गली , मुहल्‍ले मुहल्‍ले विचरण करने वाले बाबाओं , तुम अपने शहर में न जाने कितने अपराध करते हो , पर काफी दिनों तक पुलिस की लापरवाही या उनसे मिलीभगत से तुम पकडे नहीं जाते , इस उत्‍साह से बडी बडी गलतियां करने लगते हो , फिर जब तुमपर शिकंजे कसे जाने लगते हैं , तो शहर से भागना और पुलिस से बचना ही तुम्‍हारा एक लक्ष्‍य हो जाता है , बचने का सबसे बडा रास्‍ता तुम्‍हें बाबाजी बनने में दिखाई देता है , बडी मूंछ और दाढी के कारण लोगों के लिए तुम्‍हारे चेहरे को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है , बाबा का रूप धारण कर लेने से जनता की आस्‍था का भी तुम नाजायज फायदा उठा लेते हो , यदि किसी की आस्‍था तुमपर नहीं बन रही होती , तो डराना और धमकाना तो तुम्‍हारा स्‍वभाव है, इसलिए इस राह में चलकर आराम से अपनी महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप पैसे का इंतजाम तो तुम कर लेते हो !

    babaji


    बाबा बनने के बाद तो तुम्‍हारा जीवन और रंगीन बन जाता है , श्‍मशान सिद्ध कर चुके हो तुम , यह कहकर भक्‍तों के सम्‍मुख भी शराब पीने से तुम कोई परहेज नहीं करते , कमाख्‍या मंदिर में सिद्धि प्राप्‍त कर चुके हो , इसलिए मांस से भी कोई परहेज की आवश्‍यकता नहीं , महिलाओं को मां मानते हो , इसलिए उनसे घिरे होने में भी तुम्‍हें दिक्‍कत नहीं ,  कन्‍याओं से सेवा करवाकर तुम उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद दे देते हो , हत्‍या और लूटपाट के पाप के साथ तुम लोगों के कल्‍याण का दावा कर लेते हो , महात्‍मा होने के बावजूद भविष्‍यवाणी करने का रिस्‍क नहीं लेते , उपाय की पूरी व्‍यवस्‍था कर देते हो , एक शहर में तुम्‍हें रहना नहीं , इसलिए साख बनाए रखने की कोई चिंता नहीं , लोगों से पैसों की बरसात करवा लेते हो तुम , इस तरह अपराधी के नाम से भी जो सुख सुविधा नहीं मिलती , वो बाबा बनकर तुम्‍हें मिल जाती है !

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         तुमसे नाम पूछा जाता है तो अपने को हिंदुस्‍तानी बताते हो , गांव , जिला या प्रदेश पूछा जाता है तो हिंदुस्‍तान कहते हो , मानो हम सब देशद्रोही हैं और तुम सच्‍चे देशभक्‍त , महान आत्‍माओं के जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक की हर घटना इतिहास में दर्ज होती है , अपना नाम , अपना गांव , अपना प्रदेश क्‍यूं छिपाते हो , वहीं से तो स्‍पष्‍ट हो जाता है कि तुम अपने जीवन का कोई भाग छुपा रहे हो , तुम इतिहास की किताबों में अपना नाम क्‍यूं नहीं दर्ज करवाना चाहते ,  अपने भयानक सच को सामने न लाकर अपने बाबा के स्‍वरूप को सामने रखकर तुम जनता के आस्‍था के साथ खिलवाड करते हो , उनके मनोवैज्ञानिक कमजोरी का नाजायज फायदा उठाते हो , अपने स्‍वार्थ में अंधे होकर कुछ भी करो तुम , पर धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा , मेरी प्रार्थना है तुमसे 

    गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में

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      खगोलशास्‍त्री भास्‍कराचार्य और पुत्री लीलावती

       

      खगोलशास्‍त्री भास्‍कराचार्य और पुत्री लीलावती

      ब्‍यूटी पार्लर आरंभ करने जा रही मेरी भांजी ने शायद पंडित या ज्‍योतिषी को भगवान ही समझ लिया , तभी तो उसने अपनी दुकान खोलने के लिए मुझे एक ऐसा मुहूर्त्‍त देखने को कहा , जिसमें खोलने पर उसकी दुकान में घाटे का कोई सवाल ही नहीं हो। ज्‍योतिष की सहायता से कोई दुकान खोलने या न खोलने या देर सवेर करने की सलाह दी जा सकती है , पर शकुन और मुहूर्त्‍त पर तो गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष बिल्‍कुल विश्‍वास नहीं करता , कई दिन पूर्व इसपर पापा जी के द्वारा एक पोस्‍ट भी किया जा चुका है , मुझे इस सोंच पर अचंभा हुआ।


      उसने मुझे ही समझाते हुए कहा कि उसके शहर में एक पंडित है , जो ऐसा मुहूर्त्‍त निकाल‍कर देते हैं , जिससे आपके फर्म में घाटे की कोई गुंजाइश नहीं। पढे लिखे लोग भी कभी कभी ऐसे भ्रम में कैसे पड जाते हैं , जो अव्‍यवहारिक हो। ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव के रहस्‍य को हम ढूंढ भी लें , किसी के भाग्‍य को समझने में सफलता भी प्राप्‍त कर लें , पर इसे बदलने में सफलता प्राप्‍त करना संभव है भला ? इसी संदर्भ में मुझे विद्वान भास्‍कराचार्य और उनकी पुत्री लीलावती की कथा याद आ गयी , जिसे मैने उसे भी समझाया और आज आपको सुनाने जा रही हूं ...

      Bhaskaracharya


      भास्कराचार्य प्राचीन भारत के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री थे। उनका जन्‍म और पालन पोषण ही एक ऐसे घर में हुआ था , जहां स लोग ज्‍योतिषी थे। इनका जन्म 1114 ई0 में हुआ था। भास्कराचार्य उज्जैन में स्थित वेधशाला के प्रमुख थे. यह वेधशाला प्राचीन भारत में गणित और खगोल शास्त्र का अग्रणी केंद्र था। लीलावती भास्कराचार्य की पुत्री का नाम था। जब लीलावती का जन्‍म हुआ , तो उसकी जन्‍मकुंडली देखकर या उसके जन्‍म के समय आसमान में ग्रहों की खास स्थिति देखकर भास्‍कराचार्य परेशान हो गए।

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      उसकी कुंडली में वैधब्‍य योग था, वह योग बडा प्रबल था और उसके घटित होने की शत प्रतिशत संभावना थी। वे दिन रात किसी ऐसे उपाय की सोंच में थे जिससे कि उसके वैधब्‍य योग को काटा जा सके। देखते ही देखते लीलावती सयानी हो गयी , विवाह योग्‍य होने पर उसका विवाह आवश्‍यक था , पर पिता उसके विधवा रूप की कल्‍पना कर ही कांप जाते। अंत में चिंतन मनन कर उन्‍होने एक उपाय निकाल ही लिया।


      उस वर्ष विवाह का एक ऐसा विशेष मुहूर्त्‍त आने वाला था , जहां किसी भी कन्‍या का विवाह किए जाने से उसके अखंड सौभाग्‍यवती रहने की संभावना थी।भास्‍कराचार्य ने उसी मुहूर्त्‍त में लीलावती का ब्‍याह करने का निश्‍चय किया। मुहूर्त्‍त देखने के लिए उस समय घडी तो होती नहीं थी , आकाश में ग्र्रहों नक्षत्रों की स्थिति से ही समय का आकलन किया जाता था । ब्‍याह की पूरी तैयारी की गयी , लेकिन ऐन मौके पर कोई अति आवश्‍यक कार्य निकल आया। भास्‍कराचार्य के पास हर क्षण का हिसाब किताब हुआ करता था , पर उनके जाने से शुभ मुहूर्त्‍त में ब्‍याह होना मुश्किल था।

      इसलिए काम पर जाने से पहले उन्‍होने एक यंत्र बनाया , एक बरतन में अपनी गणना के अनुसार जल डाला और उसके प्रवाह के लिए एक छिद्र बनाया। उस बरतन के पूरे जल के बह जाने के तुरंत बाद उस विवाह योग को शुरू होना था , परिवार के सब लोगों को समझाकर वे अपने काम पर चल पडें। पर बरतन के ढक्‍कन को उठाकर बार बार जल के स्‍तर को देखने के क्रम में लीलावती के गले के माले का एक मोती या कुछ और बरतन में गिर पडा और उससे जल का प्रवाह रूक गया। जल के प्रवाह में रूकावट आने से जल पूरा बह न सका और देखते ही देखते विवाह का मुहूर्त्‍त निकल गया। पिता के लौटने तक तो बहुत देर हो चुकी थी , मजबूरन किसी और मुहूर्त्‍त मे उसका विवाह करवाना पडा।


      इस कहानी से सीख मिलती है कि सचमुच प्रकृति के नियमों को कोई नहीं बदल सकता। फिर वहीं हुआ , जो लीलावती की जन्‍मकुंडली में लिखा था, विवाह के एक वर्ष के अंदर ही उसके पति की मृत्‍यु हो गयी। लीलावती को अपने पिताजी के ज्ञान पर और ज्‍योतिष पर विश्‍वास होना ही था। वह पिता के साथ ही गणित और ज्‍योतिष के अध्‍ययन में जुट गयी। लीलावती के प्रश्‍नों का जबाब देने के क्रम में ही "सिद्धान्त शिरोमणि" नामक एक विशाल ग्रन्थ लिखा गया , जिसके चार भाग हैं (१) लीलावती (२) बीजगणित (३) ग्रह गणिताध्याय और (४) गोलाध्याय।

       ‘लीलावती’ में बड़े ही सरल और काव्यात्मक तरीके से गणित और खगोल शास्त्र के सूत्रों को समझाया गया है। यहां तक कि आजकल हम कहते हैं कि न्यूटन ने ही सर्वप्रथम गुरुत्वाकर्षण की खोज की, परन्तु उसके 550 वर्ष पूर्व भास्कराचार्य ने पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को विस्तार में समझा दिया था।

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        🏡 Fourth House Astrology in Hindi | चतुर्थ भाव से सुख‑शांति का रहस्य 🌙✨

         

        🏡 Fourth House Astrology in Hindi | चतुर्थ भाव से सुख‑शांति का रहस्य 🌙✨ 


        भूमिका: चतुर्थ भाव क्या दर्शाता है?

        ज्योतिष में जन्मकुंडली के 12 भाव मानव जीवन के 12 महत्वपूर्ण पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें चतुर्थ भाव (Fourth House in Astrology) को जीवन का सुख‑केन्द्र माना गया है। यह भाव माता, मातृभूमि, घर, भूमि, चल‑अचल संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति और आंतरिक स्थायित्व से संबंधित होता है।

        इसी कारण प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने चतुर्थ भाव को व्यक्ति के आंतरिक संतुलन और जीवन में टिकाव का प्रमुख संकेतक माना।

        पारंपरिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव का महत्व 

        फलित ज्योतिष के अनुसार चतुर्थ भाव से निम्न विषयों का विचार किया जाता है:

        • माता और मातृसुख

        • घर, मकान और निवास

        • भूमि, खेत, फैक्ट्री, अचल संपत्ति

        • वाहन और सुविधा साधन

        • सुख प्रदान करने वाली छोटी बड़ी वस्तुएँ 

        • मानसिक शांति और स्थायित्व

        इसी आधार पर योगकारक ग्रहों का विज्ञान ग्रंथ में चतुर्थ भाव के स्वामी या इसमें स्थित ग्रहों को +2 अंक प्रदान किए गए हैं।

         गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि से चतुर्थ भाव 

        गत्यात्मक ज्योतिष मानता है कि किसी भाव का वास्तविक फल केवल योगकारकता से नहीं, बल्कि उसकी गत्यात्मक (Dynamic) और स्थैतिक (Static) शक्ति से निर्धारित होता है।

        यदि चतुर्थ भाव में स्थित ग्रह:

        • ऊर्जावान और संतुलित हों → जातक को स्थायी सुख, मानसिक शांति और सुरक्षित वातावरण मिलता है।

        • कमजोर या बाधित हों → घर, माता या संपत्ति होते हुए भी असंतोष और तनाव बना रहता है।

        ❌ परिमाणात्मक भविष्यवाणी क्यों संभव नहीं? 

        फलित ज्योतिष के द्वारा यह बताना संभव नहीं है कि:

        • मकान कितने मंज़िला होंगे

        • माता का रंग‑रूप या कद‑काठी कैसी होगी

        • वाहन कौन‑सा होगा (कार, ट्रैक्टर या बैलगाड़ी)

        • भूमि या संपत्ति किस स्थान की होगी

        क्योंकि ये सभी बातें युग, समाज, अर्थव्यवस्था और परिवारिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करती हैं, न कि केवल ग्रहों पर।

        🧠 गुणात्मक दृष्टिकोण: 

        स्थायित्व ही असली सुख चतुर्थ भाव का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है — स्थायित्व (Stability)।

        इतिहास पर दृष्टि डालें:

        • किसी युग में गुफा ही सबसे सुखद घर थी

        • कुछ जातियाँ ऋतु के अनुसार स्थान बदलने को विवश थीं

        • आज पक्का मकान भी कभी‑कभी तनाव का कारण बन जाता है

        • इसलिए सुख का अर्थ संसाधनों की संख्या नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली मानसिक शांति है।

        माता और चतुर्थ भाव का संबंध 

        माता से संबंध अच्छे हों तो जीवन में स्वाभाविक सुख‑शांति बनी रहती है।

        गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार:

        • जैविक माता होते हुए भी विचारों का टकराव कष्ट दे सकता है

        • सौतेली माता भी प्रेम और सुरक्षा दे सकती है

        इसलिए ज्योतिष माता के रूप नहीं, बल्कि मातृसुख की अनुभूति को मापता है।

        संपत्ति और वाहन: सुविधा या बोझ? 

        एक किसान के लिए बैलगाड़ी सुखद है, जबकि शहर में वही असुविधा बन सकती है। इसी प्रकार:

        • महँगी कार भी खर्च और तनाव बढ़ा सकती है

        • छोटा घर भी संतोष दे सकता है

        चतुर्थ भाव यह बताता है कि आपकी संपत्ति सहयोगी है या तनावकारी।

        समाज में स्तर और समय‑अंतराल

         फलित ज्योतिष द्वारा यह जाना जा सकता है कि:

        • संपत्ति से समाज में आपका क्या स्तर है

        • किस आयु में सुख बढ़ेगा या घटेगा

        • संपत्ति से जुड़े विषय कब अनुकूल या प्रतिकूल होंगे

        यह सब गत्यात्मक दशा‑काल के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है।

        ज्योतिष: एक सांकेतिक विज्ञान 

        ज्योतिष को यदि शाब्दिक रूप से लिया जाए तो भ्रम होता है।

        उदाहरण:

        • प्राचीन काल में मजबूत वाहन = हाथी, घोड़ा

        • आधुनिक युग में मजबूत वाहन  = बाइक, कार, ट्रैक्टर

        अमेरिका में काफी दिनों से लगभग हर व्यक्ति के पास वाहन है, अब भारतवर्ष में भी सबसे पास है । क्या सबका जन्म एक ही लग्न में हुआ? नहीं। यही प्रमाण है कि ज्योतिष संकेत देता है, वस्तु नहीं।

        निष्कर्ष 

        कुंडली का चौथा भाव  केवल मकान और वाहन की बात नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि जीवन में आप कितने स्थिर और मानसिक रूप से संतुलित हैं। गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार चतुर्थ भाव को समझना, वास्तविक सुख‑शांति को समझना है।

        ❓ FAQs – Google People Also Ask 

        Q1. चतुर्थ भाव किसका कारक है? 

        माता, घर, भूमि, वाहन, सुख‑शांति और मानसिक स्थायित्व।

        Q2. क्या चतुर्थ भाव कमजोर हो तो घर नहीं मिलता? 

        घर मिल सकता है, लेकिन संतोष और स्थायित्व की कमी रह सकती है।

        Q3. चतुर्थ भाव से माता का सुख कैसे देखें?

         चतुर्थ भाव की गत्यात्मक शक्ति और उसके स्वामी से मातृसुख देखा जाता है।

        Q4. क्या संपत्ति का समय बताया जा सकता है? 

        हाँ, गत्यात्मक दशा‑पद्धति से संपत्ति संबंधी समय‑अंतराल जाना जा सकता है।


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          ज्योतिष : पढ़ाई के बारे में

           

          क्या कहता है ज्योतिष : पढ़ाई के बारे में

          Education astrology in hindi   

          ज्योतिष में कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं। पढ़ाई और ज्योतिष फलित ज्योतिष मानव जीवन के पॉचवें पक्ष के रुप में बुद्धि, ज्ञान और संतान की चर्चा करता है, जिसके कारण प्रकृति में सभी पशुओं से मनुष्य का जीवन अलग है । यहाँ तक कि दो मनुष्यों के जीवन में अंतर लानेवाला यही भाव है। 

          यही कारण है कि योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक लेख में पांचवें भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को +6 अंक दिए गए हैं। लेकिन योगकारकता के हिसाब से अधिक ही सही पर गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी कमजोर या महत्वपूर्ण हो सकता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने ज्योतिष गणित सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 

          padhai ke bare me

          Ladka hoga ya ladki jyotish

          किन्तु इसके अंतर्गत किसी जातक को प्राप्त होने वाले ज्ञान या संतान पक्ष की व्याख्या नहीं की जा सकती। कोई व्यक्ति किस तरह के गुणों से युक्त है ? वह कितनी डिग्रियाँ प्राप्त कर चुका है ? वह किस क्षेत्र का विशेषज्ञ है ? उसके कितनी संताने हैं ? कितने लड़के या कितनी लड़कियॉ हैं ? संतान को कितनी डिग्रियाँ प्राप्त हो चुकी हैं ? संतान विवाहित हैं या अविवाहित ? इन सब प्रश्नो का जवाब कदापि नहीं दिया जा सकता, जिसका कारण स्पष्ट है। इसलिए यह पढ़ाई के बारे में कुछ भी नहीं बता सकता।

          विकसित प्रदेशों या परिवारों में जहॉ बच्चे स्कूली पढ़ाई करते हैं, अविकसित प्रदेशों या परिवारों के बच्चे अभी भी परंपरागत शिक्षाएं ही ले रहे होते हैं, जबकि दोनो तरह के बच्चों की जन्मकुंडली एक सी हो सकती हैं। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सामान्य परिवार के बच्चे किसी प्रकार की नौकरी या व्यवसाय में संलग्न होते हैं, जबकि अच्छे परिवार के बच्चे उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर निकलते हैं। इस तरह युवावस्था में प्रवेश करते ही अपने-अपने परिवार के स्तर के हिसाब से ही सभी जातक रोजगार में संलग्न हो जाते हैं । 

          padhai ke bare me

          पढ़ाई के बारे में जानकारी 

          ज्योतिष के अनुसार पढ़ाई के बारे में रोचक तथ्य - वैसा ही पुन: उनके बच्चों के साथ भी होता है ? क्या वास्तव में जन्मकुंडली के हिसाब से ही उनका जन्म वैसे परिवारों में होता है ? नहीं । इसलिए किसी भी व्यक्ति की जन्मकुंडली से उसके क्षेत्र या उससे संबंधित डिग्री प्राप्त करने के बारे में कुछ नहीं बतलाया जा सकता। आज प्रोफेशनल डिग्रियों के बिना मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पद प्राप्त नहीं किया जा सकता है, जो कि उच्चस्तरीय परिवारों के बच्चों को आराम से मिल जा रही है। क्या निम्न स्तर के परिवार के एक प्रतिशत बच्चे का जन्म उस अवधि में नहीं होता है, जो इन्हें इन डिग्रियों से युक्त करे ?

            चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

           किन्तु बुद्धि, ज्ञान या संतान से संबंधित कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी भी परिस्थिति या परिवेश की मुहंताज नहीं, ये बातें हैं, जातक की आई क्यू या ध्यान संकेन्द्रण से संबंधित। हम अकसरहा किसी व्यक्ति के प्रकृतिप्रदत्त बुद्धि या प्रतिभा की बातें करते हैं, इसका पता जन्मकुंडली देखकर लगाया जा सकता है। कोई व्यक्ति बुद्धिमान है या नहीं ? उसमें सीखने की प्रवृत्ति है या नहीं ? अपनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा है या नहीं ? किसी ज्ञान को सीखने में वह आनंद का अनुभव करता है या कष्ट का ? अपने ज्ञान को प्राप्त करने में या संतान पक्ष के मामलों में उसका ध्यान संकेंद्रित है या नहीं ? अपने बुद्धि, ज्ञान या संतान पक्ष से संबंधित मामलों में वह कितना महत्वाकांक्षी है ? उसे ज्ञानप्राप्ति में सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं या और बाधाएं आ रही हैं ? 

          पढ़ाई और ज्योतिष

          इन सबकी चर्चा जन्मकुंडली देखकर की जा सकती है। ये बात अलग है कि बुद्धि और आई क्यू की मजबूती के बावजूद कोई गरीब परिवार का बच्चा उतनी उंचाई हासिल न कर सके, जितना कि औसत दर्जे के बुिद्ध और आई क्यू से युक्त अमीर परिवार का बच्चा।में पहले भी एक लेख में बता चुकी हूँ कि किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है, ताकि वे बड़े होकर परिवार की आमदनी बढ़ाएं, किन्तु एक ऑफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू को बढ़ाएगा। किसी जन्मपत्र में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी, बड़े व्यवसायी के लिए ऐयाश और एक ऑफिसर के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा। पढ़ाई के लिए मंत्र  है , मेहनत करके ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है।

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