हस्त रेखा की जानकारी

 हस्त रेखा की जानकारी

Hastrekha ki jankari

हस्तरेखा शास्त्र में रेखाओं और हाथों में बने चिन्हों को देखकर भविष्य या जीवन के बारे में  मूल्यांकन किया जा सकता है, पर अक्सर इन रेखाओं में बदलाव होता रहता है, इसलिए भविष्य को लेकर इसकी सटीकता में कुछ संदेह रह जाता है।  क्योंकि मनुष्य के जीवन में कर्मों का भी प्रभाव है, इसलिए हाथ की रेखाओं के समय-समय पर बदलने को मनुष्य के कर्मों से जोड़ा जाता है ।  चूँकि हर प्रकार की मेहनत  दाहिने हाथ से की जाती है, माना जाता है कि बायाँ  हाथ जन्म का और दाहिना हाथ कर्म का होता है। पुरुष प्रधान सभ्यता में भाग्य को बदलने वाली मेहनत पुरुष ही किया करते थे, इसलिए पुरुषों का ही दाहिना हाथ देखा जाता है।  आज महिलायें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, फिर भी अधिकांश पंडित आज भी महिलाओं के बाये हाथ की रेखा देखने की ही दलील देते हैं, जो उचित नहीं है। आज के प्रगतिशील युग में महिलाओं के भी दायाँ हाथ देखना चाहिए। 

हस्त रेखा की जानकारी

ऊपर के चित्र में आप देख रहे होंगे कि हाथ की कौन सी रेखाएँ किस बारे में हमें जानकारी देती है, कौन सी अँगुली किस ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।  रेखाओं के बारे में आप यह समझ सकते हैं की सभी रेखाएं जितनी लम्बी हो, जितनी पुष्ट हों, उतनी अच्छी मानी जाती हैं।  रेखाएं टूटी फूटी हों तो अच्छी नहीं मानी जाती , रेखाओं में क्रॉस लाइन अच्छे नहीं माने जाते।  इसके अलावा हस्तरेखा की जानकारी के लिए हाथो की बनावट, आकृति,अंगुलियां की लम्बाई, अंगूठे की बनावट, अंगुलीयो का झुकाव, अंगुलीयो के बीच मे रंद्र ,हाथो का रंग ---- इन सबको देखा जाता है। जिन व्यक्तियों की हथेली बड़ी होती है वह किसी भी काम को बहुत ही अच्छे ढ़ंग से करते हैं।

कई तरह के निशानों की भी हस्त रेखा में भूमिका है - त्रिशूल का निशान भाग्यशाली लोगों के हाथ में होता है. ऐसे निशान हों तो समझ लेना चाहिए कि भविष्य में मान-सम्मान मिलने वाला है. रथ का निशान होने पर किसी राजा की तरह ही भोग विलास की प्राप्ति होती है. ये निशान बहुत कम लोगों के हाथ में होता है। जिन लोगों की हथेली पर बड़े आकार का त्रिभुज बनता है तो  व्यक्ति मन से बहुत ही कोमल स्वभाव का होता है। अगर किसी व्यक्ति की हथेली मेंगहराई होती है, ऐसे व्यक्तियों को भाग्य का साथ बहुत ही कम मिलता है। हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र में इस तरह की हथेलियों को शुभ नहीं माना जाता।

 इसी प्रकार के कई संकेत हमें हथेलियों से प्राप्त होते हैं , प्रकृति एवं प्रवृत्ति बताई जा सकती है, पर ज्योतिष शाश्त्र की तरह भविष्यवाणियों में समय के साथ सम्बन्ध बताना मुश्किल होता है।  गत्यात्मक ज्योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी कहते हैं, ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर भविष्यवाणी करना खुले आसमान की तरह व्यापक है, जबकि हथेली से भविष्यवाणी करना बंद मुट्ठी की तरह ही संकुचित।  इसलिए हमें ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन को बढ़ावा देना चाहिए। 

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2022 में विवाह का शुभ मुहूर्त कब है ?

 

Vivah ka shubh muhurt 2022

2022 में विवाह का शुभ मुहूर्त कब है ?

पिछले दिनों एक पोस्ट में मैंने आपलोगों को 2022   में होनेवाले सभी विवाह के मुहूर्त की जानकारी दी थी। कुछ पाठकों का प्रश्न था कि गत्यात्मक ज्योतिष के हिसाब से इनमे से किन दिनों का मुहूर्त काफी अच्छा और किन दिनों का मुहूर्त सामान्य है, मुहूर्त है तो गड़बड़ की संभावना कम ही मानी जाएगी। हमने ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति के हिसाब से सभी मुहूर्तों को कसा और आपलोगों के लिए यह लेख प्रस्तुत है। 

vivah ka shubh muhurt 2022

जनवरी 2022  के मुहूर्त (shadi muhurt in January , 2022 )

जनवरी में 22 , 23 , 24 , 25 और 30 को विवाह का योग था।  गत्यात्मक ज्योतिषीय दृष्टि से इन तिथियों में कई ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति कम थी , इसलिए योग अच्छा नहीं माना जा सकता है। इस समय होनेवाले विवाह कार्यक्रमों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहीं।

फरवरी 2022  के मुहूर्त (shadi muhurt in February , 2022 )

फरवरी में 5 -6 , 9-10 , 18 -19 को पंचांग में शादी के शुभ मुहूर्त हैं। गत्यात्मक दृष्टि से  भी ग्रहों को गत्यात्मक शक्ति मिलने से यह समय अच्छा माना जा सत्ता है। 5-6 फरवरी को सामान्य तौर पर अच्छी तिथि है, सिंह राशिवालों के लिए यह योग उतना अच्छा नहीं रहेगा। 9 , 10 फरवरी को भीअच्छी तिथि है , बस तुला राशिवालों तथा मेष, वृष, तुला और वृश्चिक लग्न वालों की शादी में हलकी बाधा आ सकती है, 18 , 19 फरवरी को सबके लिए समय अच्छा है, पर मकर राशिवाले तथा कर्क , सिंह , धनु और मीन लग्न वालेअधिक अच्छा महसूस करेंगे। 

अप्रैल 2022 के मुहूर्त (shadi muhurt in  April  , 2022)

पंचांग के अनुसार अप्रैल में सबसे पहला मुहूर्त  19 से 23  अप्रैल का है , उसके बाद ३० अप्रैल की एक तिथि है।  19 से 23 अप्रैल तक की तिथियों में अधिकांश ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति अच्छी है , इसलिए सामान्य तौर पर ये तिथियां अच्छी रहेगी , 19-20 की तिथियाँ  मिथुन राशि वालों के लिए बहुत अच्छी ,धनु , कुम्भ और मीन लग्नवालों के लिए बहुत अच्छी होंगी, मेष राशिवालों के लिए कुछ गड़बड़ हो सकती है।  21-22-23  की तिथि भी सामान्य तौर पर अच्छी है, कर्क राशिवालों के लिए अधिक अच्छी रहेगी, वृष राशिवाले इन तिथियों 30 अप्रैल का मुहूर्त अधिकांश लोगों के लिए कुछ समस्याएँ उपस्थित करनेवाला होगा, खासकर कन्या राशि में जन्म लेने वाले या सितम्बर-अक्टूबर में जन्म लेने वालों के लिए कुछ तकलीफदेह रह सकता है। 

मई 2022 के मुहूर्त (shadi muhurt in May , 2022)

पंचांग के अनुसार मई 2022 में 2-3-4 , 9-10-11-12 और 17 -18 -20 -26 -31 विवाह की महत्वपूर्ण तिथियाँ हैं। ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति अच्छी होने के कारण ये सभी तिथियां सुखद हैं। तुला राशिवालों को छोड़कर , अक्टूबर -नवंबर में जन्म लेनेवालों को छोड़कर बाकी के लिए 2-3-4 की तिथियाँ अच्छी हैं। मकर राशिवालों , अगस्त-सितंबर में जन्म लेनेवालों , मेष , मिथुन, कन्या और वृश्चिक लग्नवालों को छोड़कर बाकी लोगों के लिए 9-10-11-12 की तिथियां अच्छी रहेंगी। 17-18 पूर्णिमा के आसपास का समय होगा ,गत्यात्मक दृष्टि से कोई ग्रह कमजोर नहीं , इसलिए ये तिथियां दो-चार प्रतिशत लोगों को छोड़कर बाकि के लिए आनंददायक होंगी। 20 मई की तिथि योग के हिसाब से उतनी अच्छी नहीं है, मिथुन और तुला राशिवालों , धनु औरमीन लग्नवालों के लिए खास गड़बड़ है।  26 मई सिंह राशिवालों, 31 मई तुला राशिवालों को छोड़कर अधिकांश के लिए अच्छा ही रहेगा। 

जून 2022  के मुहूर्त (Shadi muhurt in June 2022 )

पंचांग के अनुसार जून 2022 में 5-6 , 11-12-13-14 , 21-26 जून विवाह के मुहूर्त निकाले गए हैं। लगभग सभी ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति अच्छी होने के कारण सिर्फ धनु रशियालों को छोड़कर अधिकांश के लिए 5-6 जून को भी विवाह सुखद रहेगा ।  11 -12 -13 -14 जून को भी अधिकांश ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति सम्पन्नता के कारण विवाह का योग सुखद रहेगा, सिर्फ मेष और मीन राशिवाले , मेष, वृश्चिक, धनु, कुम्भ और मीन लग्नवालों तथा अक्टूबर के आसपास जन्म लेनेवालों के लिए विवह का योग उतना सुखद नहीं दिखेगा। 21 जून सिंह राशिवालों और 26 जून तुला राशिवालों को छोड़कर बाकी सबके लिए अच्छे रहेंगे। 

जुलाई 2022  के मुहूर्त (Shadi muhurt in July  2022 )

पंचांग के अनुसार जुलाई  2022 में 3 और  6-7-8-9 जुलाई को विवाह के मुहूर्त हैं। ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति की दृष्टि से ये तिथियां भी शादी के लिए अधिकांश के लिए उपयुक्त हैं, 3 जुलाई का दिन सिंह और मकर राशिवालों के लिए तथा मिथुन और कन्या लग्नवालों के लिए अच्छा नहीं रहेगा, बाकी के लिए ठीक हैं। 6-7 जुलाई कुम्भ राशिवालों, वृष और तुला लग्नवालों के लिए को छोड़कर अधिकांश के लिए अच्छा रहेगा। 8-9 जुलाई अधिकांश के लिए सुखद है, खासकर वृष राशिवालों , मिथुन और कन्या लग्नवालों के लिए बहुत अच्छा रहेगा , पर मीन राशिवालों, धनु, कुम्भ और मीन लग्नवालों के लिए सुखद नहीं रहेगा। 

जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------


नवंबर 2022 के मुहूर्त (Shadi muhurt in November 2022 )

पंचांग के अनुसार नवम्बर में 26 नवंबर विवाह मुहूर्त की एकमात्र तिथि है।  ग्रहों की स्थिति और उनकी गत्यात्मक शक्ति को देखा जाये तो यह लग्न भी अच्छा है , जिनका कर्क राशि हो, उनके लिए खास सुखद , वृष और तुला लग्न हो, उनके लिए भी अच्छा है।  वृष राशि वालों के लिए यह लग्न कुछ कष्टकर हो सकता है। 

दिसंबर 2022  के मुहूर्त (Shadi muhurt in December 2022 )

दिसंबर के मुहूर्त की सभी तिथियाँ 2 , 8 -9 और 14 है। गत्यात्मक दृष्टि से मंगल की स्थिति इस महीने कुछ कमजोर है।  इसलिएवृष और तुला लग्न वालों को थोड़ी परेशानी बनी रहेगी, लेकिन बाकी ग्रह अच्छे हैं।  सिंह राशि वालों को और अप्रैल मई में जन्म लेने वालों को छोड़ दिया जाये तो अधिकांश के लिए लग्न अच्छा रहेगा। 8-9 दिसंबर का लग्न गत्यात्मक दृष्टि से अच्छा नहीं , वृष लग्न हो या तुला लग्न , शादी इस तिथि को न करें।  तुला राशि वाले भी इस लग्न में विवाह न करें।  


अगले पोस्ट में 'विवाह आवश्यक में' में दी गयी तिथियों की गत्यात्मक दृष्टि से समीक्षा करूंगी। 

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें!


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Shubh vivah date 2022

Shubh vivah date 2022

2022 ka Vivah calendar
Shubh vivah date 2022

जनवरी
22 जनवरी  - माघ कृ चतुर्थी - शनिवार 
23 जनवरी - माघ कृ पंचमी - रविवार 
24 जनवरी - माघ कृ षष्ठी - सोमवार 
25 जनवरी - माघ कृ सप्तमी - मंगलवार 
26 जनवरी - माघ कृ नवमी - बुधवार 
30 जनवरी - माघ कृ त्रयोदशी - रविवार 
फरवरी
5 फरवरी - माघ शु पंचमी - शनिवार 
6 फरवरी - माघ शु षष्ठी - रविवार 
9 फरवरी - माघ शु अष्टमी - बुधवार 
10 फरवरी - माघ शु नवमी - गुरुवार 
18 फरवरी - फाल्गुन कृ द्वितीया - शुक्रवार 
19 फरवरी - फाल्गुन कृ तृतीया - शनिवार  
अप्रैल 
19 अप्रैल - बैशाख कृ द्वितीया - मंगलवार 
20 अप्रैल - बैशाख कृ चतुर्थी - बुधवार 
21 अप्रैल - बैशाख कृ पंचमी - गुरुवार 
22 अप्रैल - बैशाख कृ षष्ठी - शुक्रवार 
23 अप्रैल - बैशाख कृ सप्तमी - शनिवार 
28 अप्रैल - बैशाख कृ त्रयोदशी -गुरुवार  
मई
2 मई - बैशाख शु द्वितीया - सोमवार 
3 मई - बैशाख शु तृतीया - मंगलवार 
4 मई - बैशाख शु चतुर्थी - बुधवार 
9 मई - बैशाख शु अष्टमी - सोमवार 
10 मई - बैशाख शु नवमी - मंगलवार 
11 मई - बैशाख शु दशमी - बुधवार 
12 मई - बैशाख शु एकादशी - गुरुवार 
17 मई - ज्येष्ठ कृ प्रथमा - मंगलवार 
18 मई - ज्येष्ठ कृ तृतीया - बुधवार 
20 मई - ज्येष्ठ कृ पंचमी - शुक्रवार 
26 मई - ज्येष्ठ कृ एकादशी - गुरुवार 
31 मई - ज्येष्ठ शु प्रथमा - मंगलवार 
जून
5  जून - ज्येष्ठ शु षष्ठी - रविवार 
6 जून - ज्येष्ठ शु षष्ठी - सोमवार 
11 जून - ज्येष्ठ शु एकादशी - रविवार 
12 जून - ज्येष्ठ शु त्रयोदशी - रविवार 
13 जून - ज्येष्ठ शु चतुर्दशी - सोमवार 
14 जून - ज्येष्ठ शु पूर्णिमा - मंगलवार 
21 जून - आषाढ़ कृ अष्टमी - मंगलवार 
26 जून - आषाढ़ कृ त्रयोदशी - रविवार 
जुलाई
3 जुलाई - आषाढ़ शु चतुर्थी - रविवार 
6 जुलाई - आषाढ़ शु सप्तमी - बुधवार 
7 जुलाई - आषाढ़ शु अष्टमी - गुरुवार 
8 जुलाई - आषाढ़ शु नवमी - शुक्रवार 
9 जुलाई - आषाढ़ शु दशमी - शनिवार 
नवम्बर
26 नवंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु तृतीया - शनिवार 
दिसंबर 
2 दिसंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु दशमी - शुक्रवार 
8 दिसंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु पूर्णिमा - गुरुवार 
9 दिसंबर - पौष कृ प्रथमा - शुक्रवार 
14 दिसंबर - पौष कृ षष्ठी - बुधवार 

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(Shubh vivah date 2022)आवश्यक में

जनवरी 
15 जनवरी - पौष शु त्रयोदशी - शनिवार 
20 जनवरी - माघ कृ द्वितीय - गुरुवार 
21 जनवरी - माघ कृ तृतीया - शुक्रवार 
27 जनवरी - माघ कृ दशमी - गुरुवार 
28 जनवरी - माघ कृ एकादशी - शुक्रवार 
29 जनवरी - माघ कृ द्वादशी - शनिवार 
फरवरी 
4 फरवरी - माघ शु चतुर्थी - शुक्रवार 
11 फरवरी - माघ शु दशमी - शुक्रवार 
16 फरवरी - माघ शु पूर्णिमा - बुधवार 
17 फरवरी - फाल्गुन कृ प्रथमा - गुरुवार 
अप्रैल 
17 अप्रैल - बैशाख कृ प्रथमा - रविवार 
27 अप्रैल - बैशाख कृ द्वादशी - बुधवार 
28 अप्रैल - बैशाख कृ त्रयोदशी - गुरुवार 
मई 
13  मई - बैशाख शु द्वादशी - शुक्रवार 
14 मई - बैशाख शु त्रयोदशी - शनिवार 
15 मई - बैशाख शु चतुर्दशी - रविवार 
16 मई - बैशाख शु पूर्णिमा - सोमवार 
24 मई - ज्येष्ठ कृ नवमी - मंगलवार 
25  मई - ज्येष्ठ कृ दशमी - बुधवार 
जून 
8 जून - ज्येष्ठ शु अष्टमी - बुधवार 
9 जून - ज्येष्ठ शु नवमी - गुरुवार 
10 जून - ज्येष्ठ शु दशमी - शुक्रवार 
15 जून - आषाढ़ कृ प्रथमा - बुधवार 
16 जून - आषाढ़ कृ द्वितीया - गुरुवार 
17 जून - आषाढ़ कृष्ण तृतीया - शुक्रवार 
22 जून - आषाढ़ कृ नवमी - बुधवार 
जुलाई 
4 जुलाई - आषाढ़ शु पंचमी - सोमवार 
5 जुलाई - आषाढ़ शु षष्ठी - मंगलवार 
6 जुलाई - आषाढ़ शु सप्तमी - बुधवार 
नवंबर 
27 नवंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु चतुर्थी - रविवार 
28  नवंबर - मार्गशीर्ष (अगहन)  शु पंचमी - सोमवार 
दिसंबर 
3 दिसंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु एकादशी  - शनिवार  
7 दिसंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु चतुर्दशी - बुधवार 
8 दिसंबर - मार्गशीर्ष (अगहन) शु पूर्णिमा - गुरुवार 
13 दिसंबर - पौष कृ पंचमी - मंगलवार 

उपरोक्त सभी मुहूर्त में से कौन सी तिथि किन लग्न और किन राशिवालों के लिए गत्यात्मक दृष्टि से अधिक उपयुक्त होगी, इसकी चर्चा आनेवाले लेख में की जाएगी। (Shubh vivah date 2022)

सिर्फ चन्द्रमा और मंगल ही नहीं, 'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर वर-वधू के जन्मकालीन सभी ग्रहों के आधार पर किये जानेवाले कुंडली मिलान के लिए संपर्क करें -8292466723 ,  gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

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जन्मकुंडली को देखकर अपनी तिथि का अंदाजा कैसे लगाएं ?

जन्मकुंडली को देखकर अपनी तिथि का अंदाजा कैसे लगाएं ?

Tithi kundli in hindi

Tithi kundli in hindi

अभीतक के वीडियो देखकर आपने जन्मकुंडली को देखकर अपना लग्न, चंद्र राशि, सूर्य राशि के अतिरिक्त मोटे तौर पर अपने जन्म का महीना और  समय निकालना सीखा।  आपको शायद ही यह बात पता हो कि जन्मकुंडली में सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति को देखकर आप मोठे तौर पर हिंदी महीने की तिथि भी निकाल सकते हैं।  

जन्‍मकुंडली में कोई भी लग्न या कोई भी राशि क्यों न हो , सूर्य और चंद्र एक साथ हो , तो वह अमावस्‍या या उसके आसपास का दिन होता है। सूर्य और चंद्र एक साथ मेष राशि में हो तो वह 15  अप्रैल से 15  मई के मध्य की अमावस होगी ,  सूर्य और चंद्र एक साथ वृष राशि में हो तो वह 15 मई  से 15 जून के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ मिथुन राशि में हो तो वह 15 जून  से 15 जुलाई  के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ कर्क राशि में हो तो वह 15 जुलाई  से 15 अगस्त के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ सिंह राशि में हो तो वह 15 अगस्त  से 15 सितम्बर के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ कन्या राशि में हो तो वह 15 सितम्बर  से 15 अक्टूबर  के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ तुला राशि में हो तो वह 15 अक्टूबर  से 15 नवंबर के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ वृश्चिक  राशि में हो तो वह 15 नवंबर से 15 दिसंबर के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ धनु राशि में हो तो वह 15 दिसंबर  से 15 जनवरी  के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ मकर राशि में हो तो वह 15 जनवरी से 15 फरवरी के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ कुम्भ राशि में हो तो वह 15 फरवरी  से 15 मार्च के मध्य की अमावस होगी,  सूर्य और चंद्र एक साथ मीन  राशि में हो तो वह 15 मार्च  से 15 अप्रैल  के मध्य की अमावस होगी। 

इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली में सूर्य और चंद्र आमने सामने हो , तो वह पूर्णिमा या उसके आस पास का दिन होता है।  सूर्य मेष राशि में और चंद्र तुला राशि में हो तो वह 15  अप्रैल से 15  मई के मध्य की पूर्णिमा  होगी ,  सूर्य वृष राशि में और चंद्र  वृश्चिक  राशि में हो तो वह 15 मई  से 15 जून के मध्य की पूर्णिमा  होगी,  सूर्य मिथुन राशि में और चंद्र  धनु  राशि में हो  तो वह 15 जून  से 15 जुलाई  के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य कर्क राशि में और चंद्र मकर  राशि में हो  तो वह 15 जुलाई  से 15 अगस्त के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य सिंह राशि में और चंद्र कुम्भ  राशि में हो तो वह 15 अगस्त  से 15 सितम्बर के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य कन्या राशि में और चंद्र मीन  राशि में हो  तो वह 15 सितम्बर  से 15 अक्टूबर  के मध्य की पूर्णिमा  होगी,  सूर्य तुला राशि में और चंद्र मेष  राशि में हो हो तो वह 15 अक्टूबर  से 15 नवंबर के मध्य की पूर्णिमा  होगी,  सूर्य वृश्चिक  राशि में और चंद्र वृष  राशि में हो  तो वह 15 नवंबर से 15 दिसंबर के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य धनु राशि में और चंद्र मिथुन  राशि में हो  तो वह 15 दिसंबर  से 15 जनवरी  के मध्य की पूर्णिमा  होगी,  सूर्य मकर राशि और चंद्र कर्क राशि में  वह 15 जनवरी से 15 फरवरी के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य कुम्भ राशि में और चंद्र सिंह  राशि में हो  तो वह 15 फरवरी  से 15 मार्च के मध्य की पूर्णिमा होगी,  सूर्य मीन  राशि में और चंद्र कन्या राशि में हो हो तो वह 15 मार्च  से 15 अप्रैल  के मध्य की अमावस होगी। 

जन्‍मकुंडली में सूर्य से दूर होते हुए चंद्रमा को देखकर शुक्‍ल पक्ष की विभिन्‍न तिथियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।  सूर्य से एक खाने बाद रहने वाले चंद्र से तृतीया के आसपास , सूर्य से दो खाने बाद रहने वाले चंद्र से पंचमी के आसपास , सूर्य से तीन खाने बाद रहने वाले चंद्र से अष्‍टमी के असपास , सूर्य से चार खाने बाद रहने वाले चंद्र से दशमी के आसपास , सूर्य से पांच खाने बाद रहने वाले चंद्र से त्रयोदशी के आसपास और सूर्य के सामने रहने वाले चंद्रमा से पूर्णिमा के आसपास की तिथि में बालक का जन्‍म समझा जा सकता है।

इस तरह जन्‍मकुंडली में सूर्य की ओर प्रवृत्‍त होते चंद्रमा को देखकर आप कृष्‍ण पक्ष की विभिन्‍न तिथियों का आकलन कर सकते हैं । सूर्य से पांच खाने पहले रहनेवाले चंद्र से तृतीया के आसपास , सूर्य से चार खाने पहले रहने वाले चंद्र से पंचमी के आसपास , सूर्य से तीन खाने पहले रहने वाले चंद्र से अष्‍टमी के आसपास , सूर्य से दो खाने पहले रहने वाले चंद्र से दशमी के आसपास , सूर्य से एक खाने पहले रहनेवाले चंद्र से त्रयोदशी के आसपास और सूर्य के साथ रहने वाले चंद्र से अमावस्‍या के आसपास की तिथि में बालक का जन्‍म समझा जा सकता है।


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गत्यात्मक ज्योतिष एप्प को कैसे इनस्टॉल करें ?

jyotish rashifal apps

गत्यात्मक ज्योतिष एप्प को कैसे इनस्टॉल करें ?

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इस वीडियो के द्वारा हम आपको यह बताएँगे कि हमारे गत्यात्मक ज्योतिष एप्प को आप कैसे इनस्टॉल कर सकते हैं। एप्प इनस्टॉल करने के लिए पहला स्टेप यह होगा की आप प्लेस्टोरे में जाकर 'Gatyatmak Jyotish' सर्च करे और हमारे लोगो वाले आइकॉन जैसे हमारे एप्प को अपने सेल फ़ोन में इनस्टॉल करें।  यदि आपके पास पहले से ही हमारे एप्प का लिंक मिला हो तो उससे भी आप एप्प को इनस्टॉल कर सकते हैं। एप्प इनस्टॉल करने के दौरान आपको इंग्लिश और हिंदी में से किसी एक भाषा का चुनाव करना होता है। 

वैसे एप्प इनस्टॉल करने के बाद भी आप अपनी सुविधानुसार अपनी भाषा कभी भी चेंज कर सकते हैं। इसके बाद डिवाइस लोकेशन के लिए Allow  पर क्लिक करें। अब आपके सामने जो विंडो खुलेगी , उसमे आप लॉगिन की बजाय signup पर क्लिक करें। एक फॉर्म खुलेगा , जिसमे सावधानीपूर्वक सारे  डिटेल्स भर दें। आप साल पर क्लिक करेंगे तो सभी साल की लिस्ट आएगी, जिसमे से स्क्रॉल करके आप अपने जन्म के साल को सेलेक्ट कर सकते हैं। , महीना और दिन सही डालें, अन्यथा परिणाम  सत्य नहीं मिल पायेगा।  यदि आपके पास promocode हो तो उसे भी भर दें ताकि आपको कुछ पॉइंट्स मिल सके, जिसका उपयोग आप गत्यात्मक ज्योतिष की सेवा प्राप्त करने में कर  सकते हैं।

 सबमिट करने के बाद 'user registered successfully , Please verify Email first ' का मैसेज आएगा।  २ मिनट के अंदर आपके रजिस्टर्ड ईमेल में एक ईमेल आएगा, ईमेल में जाकर आप वेरीफाई पर जैसे ही क्लिक करेंगे , आपका काम ख़त्म, आपको 24 से 48  घंटे के अंदर रिजल्ट मिलेंगे , ऐसा मेसेज मिलेगा। एक दो दिन के इंतज़ार के बाद आपको प्रोफाइल एक्टिवेटिड मिलेगी , आप इस एप्प का उपयोग कर पाएंगे।  

यदि यह एप्प आपको पसंद आये तो आप एप्प के मेनू के शेयर ऑप्शन में जाकर अपने परिवार और मित्रों के साथ इस एप्प को अवश्य साझा करें। आपके द्वारा भेजे गए लिंक से कोई भी इन्सटॉलमेंट होती है, तो आपको गत्यात्मक पॉइंट्स मिलेंगे, जिससे आप हमारी सेवाएं प्राप्त कर  सकते हैं, हमारी पुस्तकें खरीद सकते हैं।  मेनू  के rateus ऑप्शन में जाकर आप इस एप्प की रेटिंग अवश्य करें , बहुमूल्य टिपण्णी अवश्य दें। आप सभी जानते हैं कि किसी भी एप्प की शुरूआती रेटिंग और टिपण्णी बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी आधार पर नए यूजर इस एप्प को इनस्टॉल करते हैं। 


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