हिन्दू काल गणना

 

Hindu calendar vikram samvat

Year according to hindu calendar

प्राचीन काल से ही लोगों को यह समझ में आ गया था कि आसमान के ग्रह नक्षत्रों की चाल एक समान है , इसलिए ‘समय’ की जानकारी के लिए इसे सटीक आधार के रूप में मान्‍यता दी गयी। आसमान में सूर्य की स्थिति के आधार पर ग्रामीण दिन के प्रहर के और नक्षत्रों और तारों की स्थिति के आधार पर रात के प्रहर का आकलन करते थे। इसी प्रकार चंद्रमा के आकार को देखकर महीने के दिनों की गिनती करते थे। इस विषय पर पिछले दिन मैने पोस्‍ट लिखा था और अधिकमास की गणनाका कारण बतलाया था , तो कुछ पाठकों को ऐसा महसूस हुआ कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर अधिक वैज्ञानिक हैं और इसी कारण हमें अपने पंचांग को उसके अनुरूप बनाने के लिए 13 महीने का एक कैलेण्‍डर बनाना पडता है। 

Hindi calendar of 2021


उन पाठकों को मैं जानकारी देना चाहूंगी कि अंग्रेजी कैलेण्‍डर का यह 2009 वां वर्ष चल रहा है , जबकि हमारे भारतीय विक्रमी संवत् का 2066 वां वर्ष चल रहा है । यानि कैलेण्‍डर के रूप में भी देखा जाए तो हम अंग्रेजी कैलेण्‍डर से 57 वर्ष आगे चल रहे हैं और गणना के ख्‍याल से देखा जाए तो हम और भी कितने आगे रहे होंगे , इसका अनुमान भी करना मुश्किल है । वैसे जो भी हो , सभी ग्रहों की चाल को देखते हुए इस प्रकार के कैलेण्‍डर को भले ही आमजनों के मध्‍य लोकप्रियता न मिल पायी हो , पर हमारे ऋषि महर्षियों के विलक्षण प्रतिभा को तो सिद्ध कर ही देती है । हमारे ऋषि मुनियों को सौर वर्ष और चंद्र वर्ष दोनो की जानकारी थी , तभी तो वे इस प्रकार का समायोजन कर सके थे। 

Months according to hindu calendar

अंग्रेजी कैलेण्‍डरों का सौरवर्ष सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्‍वी पर आधारित है , 1 जनवरी को इस पथ पर पृथ्‍वी जहां पर स्थित होती है , वहां से वर्ष की शुरूआत की जाती है , जबकि 31 दिसम्‍बर को अंत। इसके विपरीत, हमारा सौर वर्ष का आकलन पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए आसमान के 360 डिग्री में चलते हुए सूर्य पर आधारित था। इस 360 डिग्री को 12 भागों में यानि 30-30 डिग्री में विभाजित कर उसमें सूर्य की स्थिति के आधार पर एक सौर मास का आकलन होता था। इसका आरंभ सूर्य के मेष राशि में प्रवेश यानि 14 अप्रैल से शुरू होकर 13 अप्रैल को समाप्‍त होता है । हमारे देश में अनेक त्‍यौहार लोहडी , बैशाखी , मकर संक्रांति आदि सूर्य के खास राशि प्रवेश के आधार पर भी मनाए जाते रहे हैं।

 Hindu calendar days

इस प्रकार हमारे पंचांग के अनुसार की गयी यह गणना जटिल होने के बावजूद अधिक वैज्ञानिक मानी जा सकती है। यदि किसी व्‍यक्ति का अपना जन्‍म अंग्रेजी तिथि और जन्‍म समय बताए तो उससे आप सिर्फ उसके जन्‍म के समय के ऋतु को जान सकते हैं , पर वह हमारे पंचांगों के अनुसार अपनी जन्‍म तिथि और जन्‍मसमय बतलाए , तो आप न सिर्फ मौसम , वरन रात के अंधेरे-उजाले का भी अनुमान लगा सकते हैं , इसी प्रकार अंग्रेजी त्‍यौहारों की चर्चा हो , तो हमें सिर्फ उस मौसम की ही जानकारी मिल सकती है , पर हिन्‍दी त्‍यौहारों की चर्चा हो रही है तो सूर्य के साथ ही साथ चंद्रमा की भी स्थिति हमारी समझ में आ जाती है।

Year according to hindu calendar

प्रतिदिन का पंचांग देखने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था इस ब्लॉग में की गयी है। 

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    कोरोना वायरस से पूरे भारतवर्ष को बचाने के लिए एहतियात बरतें !

    Precautions of coronavirus in hindi


    लोगों का जीवन जबतक है तो व्यक्तिगत समस्याएँ भी साथ हैं। लेकिन लोगों का जीवन बना रहता है, समस्याएं साथ छोड़ती हैं।  दुनिया जबतक रहेगी, सामूहिक समस्याएं आती ही रहेंगी। लेकिन सामूहिक प्रयास से दुनिया बनी रहेगी, समस्याएँ साथ छोड़ेंगी। यदा-कदा झेली गयी पुरानी समस्याओं को झेलने में हमारा अनुभव काम आता है, पर अकस्मात् आ जानेवाली समस्याएं हमारा मनोबल तोड़ती हैं। जबतक किसी समस्या का उपाय नहीं ढूंढा जा सका है, हम एहतियात बरतते हैं। समस्याएँ कम से कम फैले, इसकी कोशिश में रहते हैं। कोरोना भारत में दूसरे स्टेज पर पहुँच चुका है। ( precautions of coronavirus in hindi )यदि इस स्टेज पर रूक जाये तो अच्छा, नहीं तो तीसरे स्टेज को सँभालने के लिए हमारे देश की मेडिकल व्यवस्था बिलकुल सक्षम नहीं। मेडिकल साइंस में इन्फेक्शन से बचने के लिए कुछ उपाय हैं, जिनका पालन करके हम कोरोना जैसे वायरस से बच सकते हैं। इसी क्रम में एक फैसला 22 मार्च को पूरा भारत बंद रखने का आया है। 

    precautions of coronavirus in hindi

    Coronavirus precaution in Hindi 


    वैसे तो पहले भी कई पार्टियाँ या किसी विरोध में सभी पार्टियाँ मिलकर भी भारत बंद करवाती आयी हैं। सबके कार्यकर्ता हर शहर, हर गाँव को बंद रखते आ रहा है। पर आज तो खुद पर नियंत्रण रखकर अपने घर में बंद रखने का फैसला है।  किसी कार्यकर्ता को भी घर से बाहर निकलना नहीं है, क्योंकि वायरस को समूल नष्ट करना है। कलतक मुझे विश्वास नहीं था कि भारत की मनमौजी जनता किसी नियम का पालन करेगी।  पर सुबह यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि सडकों पर सन्नाटा पसरा है, एक दो गांवों से भी खबर मिली कि वहां भी बंद चल रहा है। आप सुखी हों या दुखी, जीवन जीने की तमन्ना तो सबको होती है। अभी तो अपने परिवार, अपने देश को कोरोना वायरस से बचने के लिए खुद पर नियंत्रण करना है, लोग क्यों न माने ? छिटपुट लोग निकले हैं बाहर, वैसे उन्हें भी आज के बंद की पूरी तैयारी कल ही कर लेनी चाहिए थी।

    Coronavirus Precaution in India 

    इसके अलावा सरकार ने एक निर्णय वातावरण में ५ मिनट तक कम्पन पैदा करने का किया है। इसके लिए देशभर में 05:00 से 05:05 तक एक साथ सभी देशवासियों को घर के बाहर निकलकर कुछ न कुछ बजाना है। कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं कि इससे कुछ नहीं होनेवाला।  मैं भी संशय में ही हूँ कि इससे अंतर आएगा।  पर मैं चिंतन कर रही हूँ कि इस पांच मिनट की आवाज से हमारा क्या बिगड़ेगा ? ध्वनि प्रदूषण की बात इसलिए बेमानी है कि सड़कों पर चल रही लाखों गाड़ियाँ बंद हैं, जो इससे अधिक प्रदुषण फैला रही थी। और यदि ध्वनी प्रदुषण से हमें ख़तरा है तो छोटे से विरस को क्यों नुक्सान नहीं पहुँच सकता ? मैं तो हमेशा यह मानती आयी हूँ कि किसी के द्वारा दी जा रही सलाह से मुझे फ़ायदा क्या होगा, उससे पहले देखना चाहिए कि इसका नुक्सान क्या होगा ? यदि नुक्सान नहीं तो आराम से बात मान लेनी चाहिए, क्योंकि सलाह ऐसे समय दी जा रही है, जब हम कोरोना से बचने का कोई उपाय नहीं देख रहे। ज्योतिष को भी बहुसंख्यक ने विज्ञान का दर्जा नहीं दिया, लेकिन हमलोग पा रहे हैं कि इसमें शोध की कमी है, वैज्ञानिकता की नहीं। इसी तरह ध्वनि के विज्ञान को हम बहुसंख्यक नहीं मानते, पर यह विज्ञान हो सकता है। 

    coronavirus & Jyotish 

    हमारे देश में आज के बाद कई ग्रहीय परिवर्तन हो रहे हैं। अलग अलग स्थानों में अलग अलग ढंग से नए साल की शुरुआत होने वाली है। गत्यात्मक ज्योतिष के हिसाब से ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होने वाली है। योनि कुल मिलाकर कई वातावरण हमारे पक्ष में हैं। तापमान में परिवर्तन का भी कुछ फ़ायदा हमें मिल सकता है। ऐसे में हमें अपने कर्म पर भी ध्यान संकेन्द्रण करना पड़ेगा।  दिनभर घर के अंदर ही व्यतीत करने हैं।  शाम को 5 मिनट घंटी बजाकर  वातावरण में कम्पन पैदा करके भी वायरस को ख़त्म करने की दिशा में काम करें, क्योंकि यदि कोरोना वायरस तीसरे स्टेज पर पहुँच गया तो हमारे देश में कितना नुक्सान होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बेहतर होगा कि हम  इसपर काबू पा लें। 

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      ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान (ओशो)

      Osho Jyotish Vigyan

      बहुत ही विवादास्‍पद विषय है ज्‍योतिष .. कुछ इसे विज्ञान मानते हैं .. तो कुछ धर्म से जोडकर देखते हैं .. कुछ अविकसित मानते हैं .. तो कुछ पूरा अंधविश्‍वास ही .. ओशों के शब्‍दों में जानिए .. आखिर क्‍या है ज्‍योतिष ??

      ज्‍योतिष के बारे में लिखे गए ओशो के आलेख में से कुछ महत्‍वपूर्ण पंक्तियां ......

      ऋग्वेद में, पंचानबे हजार वर्ष पूर्व ग्रह-नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी, उसका उल्लेख है। इसी आधार पर लोकमान्य तिलक ने यह तय किया था कि ज्योतिष नब्बे हजार वर्ष से ज्यादा पुराने तो निश्चित ही होनेचाहिए।

      जीसस से छह हजार वर्ष पहले सुमेरियंस की यह धारणा कि पृथ्वी पर जो भी बीमारी पैदा होती है, जोभी महामारी पैदा होती है, वह सब नक्षत्रों से संबंधित है। अब तो इसके लिए वैज्ञानिक आधार मिल गएहैं।
      osho jyotish vigyan

      जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों के बीच जो संगीत की व्यवस्था होती है वह उस मनुष्य के प्राथमिक, सरलतम, संवेदनशील चित्त पर अंकित हो जाती है। वही उसे जीवन भर स्वस्थ और अस्वस्थ करती है।

      कास्मिक केमिस्ट्री कहती है कि पूरा ब्रह्मांड एक शरीर है। उसमें कोई भी चीज अलग-अलग नहीं है, सब संयुक्त है। इसलिए कोई तारा कितनी ही दूर क्यों न हो, वह भी जब बदलता है तो हमारे हृदय की गति को बदल जाता है।

      ज्योतिष कोई नया विज्ञान नहीं है जिसे विकसित होना है, बल्कि कोई विज्ञान है जो पूरी तरह विकसित हुआ था और फिर जिस सभ्यता ने उसे विकसित किया वह खो गई। और सभ्यताएं रोज आती हैं और खो जाती हैं। फिर उनके द्वारा विकसित चीजें भी अपने मौलिक आधार खो देती हैं, सूत्र भूल जाते हैं, उनकी आधारशिलाएं खो जाती हैं।

      हम जानते हैं कि चांद से समुद्र प्रभावित होता है। लेकिन हमें खयाल नहीं है कि समुद्र में पानी और नमक का जो अनुपात है वही आदमी के शरीर में पानी और नमक का अनुपात है--दि सेम प्रपोर्शन। और आदमी के शरीर में पैंसठ प्रतिशत पानी है; और नमक और पानी का वही अनुपात है जो अरब की खाड़ी में है। अगर समुद्र का पानी प्रभावित होता है चांद से तो आदमी के शरीर के भीतर का पानी क्यों प्रभावित नहीं होगा?

      अमावस के दिन दुनिया में सबसे कम लोग पागल होते हैं, पूर्णिमा के दिन सर्वाधिक। चांद के बढ़ने के साथ अनुपात पागलों का बढ़ना शुरू होता है। पूर्णिमा के दिन पागलखानों में सर्वाधिक लोग प्रवेश करते हैं और अमावस के दिन पागलखानों से सर्वाधिक लोग बाहर जाते हैं। अब तो इसके स्टेटिसटिक्स उपलब्ध हैं।

      पक्षी एक-डेढ़ महीने, दो महीने पहले पता करते हैं कि अब बर्फ कब गिरेगी। और हजारों प्रयोग करके देख लिया गया है कि जिस दिन पक्षी उड़ते हैं, हर पक्षी की जाति का निश्चित दिन है। हर वर्ष बदल जाता है वह निश्चित दिन, क्योंकि बर्फ का कोई ठिकाना नहीं है। लेकिन हर पक्षी का तय है कि वह बर्फ गिरने के एक महीने पहले उड़ेगा, तो हर वर्ष वह एक महीने पहले उड़ता है।

      जापान में एक चिड़िया होती है जो भूकंप आने के चौबीस घंटे पहले गांव खाली कर देती है। साधारण गांव की चिड़िया है। उस गांव के लोग समझ जाते हैं कि भाग जाओ। चौबीस घंटे का वक्त है, वह चिड़िया हट
      गई है, गांव में दिखाई नहीं पड़ती। इस चिड़िया को कैसे पता चलता होगा?


      मनुष्य अकेला प्राणी है जगत में जिसके पास बहुत सी चीजें हैं जो उसने बुद्धिमानी में खो दी हैं; और बहुत सी चीजें जो उसके पास नहीं थीं उसने बुद्धिमानी में उनको पैदा करके खतरा मोल ले लिया है। जो है उसे खो दिया है, जो नहीं है उसे बना लिया है।

      असल में वही चीज अंधविश्वास मालूम पड़ने लगती है जिसके पीछे हम वैज्ञानिक कारण बताने में असमर्थ हो जाएं। वैसे ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक है। ज्योतिष कहता यही है कि इस जगत में जो भी घटित होता है उसके कारण हैं। हमें ज्ञात न हों, यह हो सकता है। आज तक आप जो हैं वह बीते हुए कल का जोड़ है। ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक चिंतन है।

      भविष्य एकदम अनिश्चित नहीं है। हमारा ज्ञान अनिश्चित है। हमारा अज्ञान भारी है। भविष्य में हमें कुछ दिखाई नहीं पड़ता। हम अंधे हैं। भविष्य का हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता। नहीं दिखाई पड़ता है इसलिए हम कहते हैं कि निश्चित नहीं है। लेकिन भविष्य में दिखाई पड़ने लगे...और ज्योतिष भविष्य में देखने की प्रक्रिया है!


      विज्ञान बहुत धीमी गति से चलता है। जब तक तथ्य पूरी तरह सिद्ध न हो जाएं तब तक इंच भी आगे सरकना उचित नहीं है। प्रोफेट्स, पैगंबर तो छलांगें भर लेते हैं। वे हजारों-लाखों साल बाद जो तय होगी, उसको कह देते हैं। विज्ञान तो एक-एक इंच सरकता है।

      स्विस पैरासेलीसस नाम का एक चिकित्सक, उसने एक बहुत अनूठी मान्यता स्थापित की। और वह मान्यता आज नहीं कल सारे मेडिकल साइंस को बदलने वाली सिद्ध होगी। अब तक उस मान्यता पर बहुत जोर नहीं दिया जा सका, क्योंकि ज्योतिष तिरस्कृत विषय है--सर्वाधिक पुराना, लेकिनसर्वाधिक तिरस्कृत, यद्यपि सर्वाधिक मान्य भी।
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        जनता कर्फ्यू को सफल बनाये --------

        Corona third stage


        बचपन की एक घटना की याद आ रही है। हमारे पड़ोस में मिटटी, लकड़ी और खपड़े के घर में एक कमरे में आग लग गयी। जबतक गाँव, मोहल्ले वाले पहुँचते कुछ ज्वलनशील पदार्थो के कारण उस कमरे की आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। गाँव में नियम था कि यदि किसी के घर में आग लगी, तो सभी रस्सी बाल्टी लेकर दौड़ते, लड़के चैन बना लेते, एक हाथ से दूसरे हाथ होते हुए सैकड़ों बाल्टी पानी आग पर डाल दिया जाता था। लेकिन उस दिन गाँव के बुजुर्ग समझ गए कि यह आग पानी से बुझने वाली नहीं। किसी किसी के खेत में डीज़ल से चलने वाला पंप था भी, तो उसे यहाँ स्थापित करना कठिन था। उस कमरे को अलग थलग करने विचार करके बुजुर्गों के निर्देश से सभी वापस अपने घर दौड़े और लकड़ी को काटने के लिए आरी और टाँगी लेकर आये। 10 लड़के ऊपर चढ़े और छप्पर को सहारा दे रहे 10 लकड़ियों को काट डाला। पूरा छप्पर एक साथ कमरे की आग में गिर गया आग उसी कमरे तक सिमटकर रह गयी पूरा घर बच गया।

        Chain of crackers

        दीपावली में बच्चों को १०-२०-५० पटाखे की चेन बनाकर जलाते हुए आप सबों ने देखा होगा। छोटे छोटे पटाखे एक साथ जोड़कर बच्चे एक को जलाते हैं, पर धीरे धीरे पटाखे एक-एक करते हुए सबको अपनी चपेट में ले लेते हैं। 5 मिनट तक बच्चे ताली बजाते या खुश होते हुए अपना मनोरंजन करते हैं। ऐसे ही कुछ दिनों पहले यूरोपीय देशों में से किसी डॉक्टर ने यह तस्वीर भेजी। माचिस की तीली एक एक जलते हुए आगे बढ़ती जाती है, जैसे ही एक माचिस की तीली हट जाती है। 


        corona third stage -

        Matches example


        ये तीनो उदहारण में तो चेन की बात हुई, हमने घर को काटकर अलग कर दिया, दोनों ओर घर होता तब भी इसे काटकर अलग कर सकते थे। यदि पटाखों को रोकना हो तो एक जगह से काटकर किसे भी समय रोक सकते हैं। माचिस के तीली में से एक को हटाकर आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। पर अंदाजा लगाइये कि यदि उस घर के चारो ओर घर होता, एक पटाखे के चारो ओर पटाखे लगाते हुए जलाया जाता, या माचिस की तीली के चारो और तीली होती तो पहले ही लेवल पर आग की ताकत को रोकने के लिए हमारी मेहनत कईगुणी होती। और यदि ऐसी घटना 1 से बढ़ते हुए 5 -10 लेवल तक चली जाये तो हमारे लिए आग पर विजय पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।

        Era of fast communication

        हमारी खुशनसीबी है की इस समय संचार माध्यम बहुत दुरुस्त है। विश्व के किसी कोने में हो रही घटना की जानकारी हमें मिल जाती है। हमारी खुशनसीबी है कि इस वायरस का जन्म भारत में नहीं हुआ है और हमें कई देशों के अनुभव का लाभ मिल रहा है। हमारी खुशनसीबी है कि हमारी सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और तमाम स्कूल, कॉलेज और ऑफिसों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गयी हैं। बहुत जरूरी जगहों पर ही लोगों को आवागमन करना पड़ रहा है। उनके लिए भी सुविधाएँ और कोरोना से बचाव के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दो सप्ताह से ही कुछ लोग जागरूक होकर इसपर पोस्ट लिख रहे हैं, आप सबों को जानकारी मिल ही गयी होगी। आईये, अब हम अपनों के लिए, देश के लिए २२ मार्च को जनता कर्फ्यू को सफल बनाये, इससे हमें वैसी परेशानी नहीं आएगी, जैसा तीसरे सप्ताह में अन्य देशों को आयी। इसके पीछे कारण यह होगा कि इससे लगभग 30 घंटे सारा हिन्दुस्तान अपने घरों में कैद रहेगा। सार्वजनिक जगहों के वायरस समाप्त मिलेंगे। जिनको बीमारी हो चुकी है, वे अस्पताल में पहुँचते रहेंगे। पर कोई नया चपेट में नहीं आएगा। 


        हमारी संस्कृति में भाग्य और कर्म दोनों को महत्व दिया गया है। कई दिन पहले हमारे ब्लॉग में लिखे गए  पोस्ट  में

        लिखा गया था कि 22 मार्च के बाद कोरोना का प्रभाव कम हो जायेगा। corona third stage में जाने से पहले सरकार ने भी घोषणा की है, हमलोग जनता कर्फ्यू को सफल बनाये।


        मेरी पुस्तक 'मेरी कोरोना डायरी' का एक अंश ! पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए नीचे लिंक हैं ! आमेज़न के किंडल पर यह मात्र 100/- रुपये में उपलब्ध हैं :-----



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          🔥 Third House Astrology in Hindi | तृतीय भाव का रहस्य 🪐

          🔥 Third House Astrology in Hindi | तृतीय भाव का रहस्य 🪐

          भूमिका : Third House क्या दर्शाता है? 

          वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली जीवन का दर्पण होती है, जिसमें कुल 12 भाव होते हैं। प्रत्येक भाव जीवन के किसी न किसी महत्वपूर्ण पक्ष को दर्शाता है। कुंडली का तीसरा भाव (Third House in Astrology) व्यक्ति के पराक्रम, साहस, प्रयास, छोटे भाई-बहन, मित्र, संचार क्षमता और आत्मबल से जुड़ा हुआ है।

          परंपरागत ज्योतिष जहाँ तृतीय भाव को मुख्यतः साहस और भाई-बहनों तक सीमित मानता है, वहीं गत्यात्मक ज्योतिष इस भाव को व्यक्ति की आंतरिक शक्ति और सक्रिय ऊर्जा का केंद्र मानता है।

          🔍 तृतीय भाव का महत्व

           गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार तृतीय भाव से निम्न विषय देखे जाते हैं:

          • पराक्रम और साहस

          • बाहुबल और मेहनत

          • छोटे भाई-बहन

          • मित्र और सहयोगी

          • संचार कौशल (Communication Skills)

          • नौकर-चाकर और सहायक

          योगकारक ग्रहों का विज्ञान में तृतीय भाव के स्वामी या इसमें स्थित ग्रहों को -2 अंक दिए गए हैं। लेकिन यह अंक केवल योगकारकता के आधार पर हैं, न कि गत्यात्मक शक्ति के।

           गत्यात्मक ज्योतिष की दृष्टि से तृतीय भाव 

          गत्यात्मक ज्योतिष मानता है कि तृतीय भाव से जातक की सक्रियता (Activeness), संघर्ष करने की क्षमता, और सहयोग प्राप्त करने की शक्ति को आँका जाना चाहिए।

          यदि इस भाव में ग्रह:

          • गत्यात्मक और स्थैतिक रूप से मजबूत हों → जातक अत्यंत साहसी, कर्मठ और आत्मनिर्भर होता है।

          • कमजोर या अवरुद्ध हों → प्रयास करने के बावजूद सहयोग की कमी, मानसिक थकावट और आत्मविश्वास में गिरावट देखी जाती है।

          ❌ भाई-बहनों की संख्या बताना क्यों असंभव है? 

          यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि किसी भी कुंडली को देखकर भाई-बहनों की संख्या बताना संभव नहीं। इसका मुख्य कारण सामाजिक और सरकारी नीतियाँ हैं।

          उदाहरण के लिए:

          • चीन में एक समय "एक बच्चा नीति" लागू थी। 

          • भारत में परिवार नियोजन के कारण बच्चों की संख्या घटी। 

          क्या इन सब के कारण ग्रहों की चाल बदल गई? नहीं। कुंडलियाँ आज भी वैसी ही बनती हैं जैसी हजारों वर्ष पहले बनती थीं। इसलिए संख्या नहीं, संबंध की गुणवत्ता देखी जानी चाहिए।

          🤝 भाई-बहन और सहयोग का गुणात्मक विश्लेषण 

          तृतीय भाव से हम यह जान सकते हैं:

          • भाई-बहनों से सुख मिलता है या तनाव?

          • विचारों का तालमेल है या मतभेद?

          • जरूरत के समय सहयोग मिलता है या नहीं?

          • संबंधों को सुधारने की क्षमता है या नहीं?

          गत्यात्मक दशा पद्धति के अनुसार यह भी बताया जा सकता है कि किस उम्र में ये प्रभाव अधिक सक्रिय होंगे।

           पराक्रम और प्रयास का जीवन में महत्व 

          आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल भाग्य नहीं, बल्कि प्रयास और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है। तृतीय भाव मजबूत हो तो:

          • व्यक्ति जोखिम लेने से नहीं डरता

          • नए कार्यों की शुरुआत करता है

          • संचार और नेटवर्किंग में आगे रहता है

          • कमजोर तृतीय भाव व्यक्ति को अवसरों से दूर कर सकता है।

          तृतीय भाव और संचार कौशल 

          Third House व्यक्ति की भाषा, लेखन, बोलने की शैली और सोशल इंटरैक्शन को भी दर्शाता है।

          • मजबूत ग्रह → प्रभावशाली वक्ता, लेखक, पत्रकार

          • कमजोर ग्रह → संकोच, गलतफहमी, संवाद में रुकावट

          निष्कर्ष 

           कुंडली का तीसरा भाव केवल भाई-बहनों तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के साहस, प्रयास, संचार और आत्मबल का वास्तविक संकेतक है। गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार यदि इस भाव की शक्ति को सही ढंग से समझा जाए, तो व्यक्ति अपने जीवन की दिशा स्वयं बदल सकता है।

          ❓ FAQs – Google People Also Ask 

          Q1. तृतीय भाव किसका कारक है? 

          तृतीय भाव पराक्रम, साहस, प्रयास, छोटे भाई-बहन और संचार का कारक है।

          Q2. क्या तृतीय भाव कमजोर हो तो सफलता नहीं मिलती?

           नहीं। कमजोर तृतीय भाव संघर्ष बढ़ा सकता है, लेकिन गत्यात्मक दशा में सुधार संभव है।

          Q3. तृतीय भाव में कौन से ग्रह अच्छे माने जाते हैं? 

          मंगल, बुध और सूर्य यदि गत्यात्मक रूप से मजबूत हों तो अच्छे फल देते हैं।

          Q4. क्या तृतीय भाव से करियर देखा जा सकता है? 

          हाँ, विशेषकर मीडिया, लेखन, सेल्स, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़े करियर।

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