कोरोना वायरस से पूरे भारतवर्ष को बचाने के लिए एहतियात बरतें ! - Gatyatmak Jyotish

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Sunday, 22 March 2020

कोरोना वायरस से पूरे भारतवर्ष को बचाने के लिए एहतियात बरतें !

Precautions of coronavirus in hindi


लोगों का जीवन जबतक है तो व्यक्तिगत समस्याएँ भी साथ हैं। लेकिन लोगों का जीवन बना रहता है, समस्याएं साथ छोड़ती हैं।  दुनिया जबतक रहेगी, सामूहिक समस्याएं आती ही रहेंगी। लेकिन सामूहिक प्रयास से दुनिया बनी रहेगी, समस्याएँ साथ छोड़ेंगी। यदा-कदा झेली गयी पुरानी समस्याओं को झेलने में हमारा अनुभव काम आता है, पर अकस्मात् आ जानेवाली समस्याएं हमारा मनोबल तोड़ती हैं। जबतक किसी समस्या का उपाय नहीं ढूंढा जा सका है, हम एहतियात बरतते हैं। समस्याएँ कम से कम फैले, इसकी कोशिश में रहते हैं। कोरोना भारत में दूसरे स्टेज पर पहुँच चुका है। ( precautions of coronavirus in hindi )यदि इस स्टेज पर रूक जाये तो अच्छा, नहीं तो तीसरे स्टेज को सँभालने के लिए हमारे देश की मेडिकल व्यवस्था बिलकुल सक्षम नहीं। मेडिकल साइंस में इन्फेक्शन से बचने के लिए कुछ उपाय हैं, जिनका पालन करके हम कोरोना जैसे वायरस से बच सकते हैं। इसी क्रम में एक फैसला 22 मार्च को पूरा भारत बंद रखने का आया है। 

precautions of coronavirus in hindi

Coronavirus precaution in Hindi 


वैसे तो पहले भी कई पार्टियाँ या किसी विरोध में सभी पार्टियाँ मिलकर भी भारत बंद करवाती आयी हैं। सबके कार्यकर्ता हर शहर, हर गाँव को बंद रखते आ रहा है। पर आज तो खुद पर नियंत्रण रखकर अपने घर में बंद रखने का फैसला है।  किसी कार्यकर्ता को भी घर से बाहर निकलना नहीं है, क्योंकि वायरस को समूल नष्ट करना है। कलतक मुझे विश्वास नहीं था कि भारत की मनमौजी जनता किसी नियम का पालन करेगी।  पर सुबह यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि सडकों पर सन्नाटा पसरा है, एक दो गांवों से भी खबर मिली कि वहां भी बंद चल रहा है। आप सुखी हों या दुखी, जीवन जीने की तमन्ना तो सबको होती है। अभी तो अपने परिवार, अपने देश को कोरोना वायरस से बचने के लिए खुद पर नियंत्रण करना है, लोग क्यों न माने ? छिटपुट लोग निकले हैं बाहर, वैसे उन्हें भी आज के बंद की पूरी तैयारी कल ही कर लेनी चाहिए थी।

Coronavirus Precaution in India 

इसके अलावा सरकार ने एक निर्णय वातावरण में ५ मिनट तक कम्पन पैदा करने का किया है। इसके लिए देशभर में 05:00 से 05:05 तक एक साथ सभी देशवासियों को घर के बाहर निकलकर कुछ न कुछ बजाना है। कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं कि इससे कुछ नहीं होनेवाला।  मैं भी संशय में ही हूँ कि इससे अंतर आएगा।  पर मैं चिंतन कर रही हूँ कि इस पांच मिनट की आवाज से हमारा क्या बिगड़ेगा ? ध्वनि प्रदूषण की बात इसलिए बेमानी है कि सड़कों पर चल रही लाखों गाड़ियाँ बंद हैं, जो इससे अधिक प्रदुषण फैला रही थी। और यदि ध्वनी प्रदुषण से हमें ख़तरा है तो छोटे से विरस को क्यों नुक्सान नहीं पहुँच सकता ? मैं तो हमेशा यह मानती आयी हूँ कि किसी के द्वारा दी जा रही सलाह से मुझे फ़ायदा क्या होगा, उससे पहले देखना चाहिए कि इसका नुक्सान क्या होगा ? यदि नुक्सान नहीं तो आराम से बात मान लेनी चाहिए, क्योंकि सलाह ऐसे समय दी जा रही है, जब हम कोरोना से बचने का कोई उपाय नहीं देख रहे। ज्योतिष को भी बहुसंख्यक ने विज्ञान का दर्जा नहीं दिया, लेकिन हमलोग पा रहे हैं कि इसमें शोध की कमी है, वैज्ञानिकता की नहीं। इसी तरह ध्वनि के विज्ञान को हम बहुसंख्यक नहीं मानते, पर यह विज्ञान हो सकता है। 

coronavirus & Jyotish 

हमारे देश में आज के बाद कई ग्रहीय परिवर्तन हो रहे हैं। अलग अलग स्थानों में अलग अलग ढंग से नए साल की शुरुआत होने वाली है। गत्यात्मक ज्योतिष के हिसाब से ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होने वाली है। योनि कुल मिलाकर कई वातावरण हमारे पक्ष में हैं। तापमान में परिवर्तन का भी कुछ फ़ायदा हमें मिल सकता है। ऐसे में हमें अपने कर्म पर भी ध्यान संकेन्द्रण करना पड़ेगा।  दिनभर घर के अंदर ही व्यतीत करने हैं।  शाम को 5 मिनट घंटी बजाकर  वातावरण में कम्पन पैदा करके भी वायरस को ख़त्म करने की दिशा में काम करें, क्योंकि यदि कोरोना वायरस तीसरे स्टेज पर पहुँच गया तो हमारे देश में कितना नुक्सान होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बेहतर होगा कि हम  इसपर काबू पा लें। 

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (23-03-2020) को    "घोर संक्रमित काल"   ( चर्चा अंक -3649)      पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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आप अपने घर में रहें। शासन के निर्देशों का पालन करें।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
दूसरों के व्लॉगों पर भी टिप्पणी दिया करो।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

Onkar said...

सामयिक प्रस्तुति

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

जीवन है तो समस्याएँ भी हैं ! उनके बिना जीवन भी कैसा ! पर उनसे भागना नहीं सामना करना ही एकमात्र उपाय रहा है और रहेगा। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें !

मन की वीणा said...

सार्थक चिंतन परक सामायिक लेखन ।