कुंडली का तीसरा भाव यानि भाई-बंधु-बांधव

The third house in astrology


वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली का बहुत अधिक महत्व है , इसमें कुल 12 भाव होते हैं। हर भाव से जीवन के भिन्न भिन्न सन्दर्भों को देखा जाता है। ज्योतिष में कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं। परंपरागत ज्योतिष में जन्मकुंडली का तीसरा भाव का महत्व इस दृष्टि से है कि इससे पराक्रम, बाहुबल, छोटे भाई-बहन, नौकर-चाकर, मित्रता, भुजा, परिश्रम आदि का विचार किया जाता है।

गत्यात्मक ज्योतिष भी मानता है कि इस भाव से जातक के हर प्रकार की शक्ति, उनको सहयोग देनेवाले मामलों को देखा जा सकता है।  योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक में तीसरे भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को -2  अंक दिए गए हैं। लेकिन योगकारकता के हिसाब से कम ही सही पर गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने ज्योतिष गणित सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 



third house in astrology

What is the 3rd house

कुंडली का तीसरा भाव

यहॉ भी फलित ज्योतिष एक सीमा में बंधा हुआ है। किसी भी जन्मकुंडली को देखकर भाई-बहनों की संख्या को बतला पाना बिल्कुल असंभव है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार के दबाब से चीन में माता-पिता को एक ही बच्चे को जन्म दे पाने की विवशता है। इस तरह चीन के किसी भी युवा या बच्चे के एक भी भाई-बहन नहीं हैं । क्या आप सोंच सकते हैं , चीन के सभी बच्चों का जन्म दुनिया के अन्य देशों में जन्म लेनेवाले बच्चों से अलग समय में हुआ होगा , नहीं , ऐसा कदापि नहीं हो सकता।

अपने देश में ही कुछ समय पूर्व के समय को देखें , जब परिवार नियोजन लोकप्रिय नहीं था , तो एक एक व्यक्ति के बारह पंद्रह भाई-बहन हुआ करते थे , बाद में चार छह , उसके बाद एक दो और अब हालत देखिए , एक भाई-बहन भी बच्चों के नहीं हैं , क्या भचक्र के ग्रहों में कोई बदलाव आया है ? जाहिर है , नहीं , इसलिए आज भी जन्मकुडली वैसी ही बन रही है , जैसी हजारों वर्ष पहले बनती थीं। फिर जन्मकुंडली देखकर भला कैसे बतलाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति के कितने भाई या बहन हैं .

3rd house Astrology in Hindi

कुंडली का तीसरा भाव

वास्तव में जन्मपत्री से भाई-बहनों या भाई बहन जैसों के सुख-दुख या अन्य व्यवहार के बारे में बताया जा सकता है। किसी व्यक्ति को भाई-बहनों या भाई-बहन सदृश लोगों से सुख मिलता है या नहीं ? उनसे विचारों का तालमेल है या नहीं ? उससे संबंधित जवाबदेही हे या नहीं ? उस जवाबदेही को निभा पाने में वह समर्थ है या नहीं ? क्या उसके भाई-बहन के मामले काफी तनाव देनेवाले हैं ?

यदि हॉ , तो वह उसे सुधारने की कोशिश करता है या नहीं ? यदि करता है , तो उसका सकारात्मक परिणाम मिलता है या नकारात्मक ? किसी जातक को समय पर भाई-बहन बंधु-बांधव काम आते हैं या नहीं ? इन सब बातों के साथ ही साथ इस बात की भी चर्चा की जा सकती है कि किस उम्र में उपरोक्त मामलों का सर्वाधिक प्रभाव बना रहेगा।

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संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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