स्वप्न में सर्प दिखने का फल

 

Snake in dream Hindu Astrology in Hindi

रोजमर्रा के कार्यों में हम दिनभर उलझे हुए किसी न तरह के घटनाओं, विचारों और चिंतन में खोये होते हैं और रात होते ही नींद के आगोश में चले जाते हैं। नींद में डूबने के बाद भी घटनाएँ , विचार और चिंतन हमारा पीछा नहीं छोड़ती और सपने के रूप में चलचित्र की तरह चलकर हमारे नींद को खलल पहुँचाती है। दिनभर की घटनाओ को सुलझाने में तो हम अपने हिसाब से क्रियाकलाप कर पाते हैं, पर सपने कभी हमारी  इच्छा के साथ और कभी हमारी इच्छा के विरुद्ध भी चलते रहते हैं। स्वप्न को लेकर मानववैज्ञानिकों बहुत अध्ययन किया है, पर वे भी किसी सत्य तक नहीं पहुँच सके। वैज्ञानिक मानने लगे कि सपने इंसान की दबी इच्छाओं और विचारों का प्रतीक होते हैं। 

Snake in dream Hindu Astrology in Hindi

Sapne me saap dekhna kya hota hai

सपने देखने के बाद कभी हमारी ख़ुशी बढ़ती है और कभी हम दुखी हो जाते हैं। हमारे नियन्त्रण में जो बातें नहीं होती, उसे ही हम प्रकृति का रहस्य मान लेते हैं , इसी कारण नींद में आनेवाले सपनों को हम भविष्य में आनेवाले खुशियों या दुःख के लिए प्रकृति की ओर से दिया सन्देश मानते हैं। इस दृष्टि से  लोगों ने भविष्य को समझने के लिए भी सपनों का विश्लेषण करना शुरू किया। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में सर्पों का दिखना निम्न प्रकार के प्रभाव डालता है------------

जिनकी कुंडली में कालसर्प योग या पितृदोष होता है, उन्हें सपने में अक्सर सांप दिखाई देते हैं, खासकर  उन्हें पानी में तैरता हुआ साँप दिखाई देता है। आपको सपने में दिखाई दे कि सांप आपको दौड़ा रहा है तो समझ लीजिए कि असल जिंदगी में भी आप किसी बात से भयभीत हैं सपने में उड़ता हुआ सांप देखना भी अच्छा नहीं माना जाता , यह बीमारी और आर्थिक परेशानियां का संकेत देता है। सपने में बहुत सारे सांप दिखाई देने पर भारी आर्थिक हानि होनी की संभावना रहती हैं। सांप आपका पीछा करते हुए दिखाई दे तो इसे बड़ी दुर्घटना घटना का संकेत माना जाता है। आपको सांप ने डस लिया है तो आप या आपका कोई किसी भयंकर बीमारी से घिर सकते हैं। 

लेकिन फिर भी अधिकांश मामलों में सपने में साँप देखना शुभ का प्रतीक भी है, चलते-फिरते सांप को विचरण करते देखने का अर्थ भविष्य में धनलाभ होना माना जाता है। यदि आप सपने में काला नाग देखते है तो इसका मतलब सम्मान प्राप्त होगा और अगर आपने जोड़े में सर्प को देखा है तो आपको प्रेम की प्राप्ति होने वाली है। अगर आपने मरा हुआ सांप देख लिया तो इसका अर्थ यह है कि आपके सारे कष्ट अब खत्म होने वाले हैं। सपने (Dream) में अगर आप खुद को सांप के साथ खेलता हुए देखते हैं तो ये आपके आने वाले समय में शुभ समाचार का संकेत हो सकता हैं। 

sapne me kala saap dekhna kaisa hota hai

भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करने वालों की इच्छा होती है कि उन्हें एक बार भगवान शिव के दर्शन जरूर हो । माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए माध्यम के रूम में सपनों को चुना है। भक्तजन को वे अपने प्रिय सांप और नंदी के जरिए सपनों में दर्शन देते हैं। इसलिए सर्प के दर्शन को लोग भगवान् शंकर से जोड़कर खुश हो जाते हैं। साँप पालनेवाले लोगों तथा उसके इर्द गिर्द जीवनयापन करने वाले लोगों में भी सर्प के सपनो से कोई भी उपस्थित नहीं होता, इसलिए यह सामान्य होता है। 

इस तरह देखा जाये तो हम सपनो का अर्थ मनोविज्ञान से भी जोड़ सकते हैं। सर्प के जिस सपने से हमें ख़ुशी , उसका अर्थ सकारात्मक माना गया है, सर्प के जिस सपने से  हमें कष्ट होता है, उसका अर्थ ऋणात्मक माना गया है। मनोवैज्ञानिक भी यही कहते हैं कि सपने मन का आईना होते हैं, सपने देखने के बाद आपकी मनःस्थिति प्रभावित होती है, जो आपके क्रियाकलापों को प्रभावित करती है और उसी के हिसाब से आपका भविष्य तय होता है। 

ब्रम्ह मूहूर्त यानि 4 या 5 बजे नींद हल्की होती है इसलिए सपने मस्तिष्क को अधिक प्रभावित करता है, रात के सपने मस्तिष्क को कम प्रभावित करते हैं। इसलिए माना जाता है कि भोर के सपनो का प्रभाव हमपर अधिक पड़ता है, रात के ऐसे सपनो का प्रभाव हमपर कम पड़ता है। कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है कि सपनो से आप ऋणात्मक रूप में प्रभावित न हों, मस्तिष्क में आयी ऋणात्मकता से हमारे क्रियाकलाप ऋणात्मक होते हैँ, जिससे भविष्य कमजोर बनती है। सपनो को लेकर सकारात्मक बने रहें, यह भविष्य को मजबूत बनाएगी। 

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    2021 में धन-कोष , साख , परिवार ??

     

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    1. धन-लाभ की नियमितता होनी चाहिए। धन-कोष की स्थिति अच्छी बनी होनी चाहिए। पारिवारिक माहौल अच्छा होना चाहिए। इन मामलों को लेकर निश्चिंती जैसा वातावरण होना चाहिए।
    2. धन-कोष की स्थिति गड़बड़ रह सकती है। पारिवारिक स्तर कमजोर पड़ सकता है। चिंताजनक माहौल बन सकता है। कमजोरी दूर करने का प्रयास बेकार हो सकता है।
    ऊपर लिखे गए दोनों तरह  पूर्वानुमान सामान्य से कुछ अच्छी और सामान्य से कुछ बुरी स्थिति की जानकारी देता है इसमें बहुत बड़ी बात नहीं होतीजबतक धन-कोष साख परिवार का प्रतिनिधित्व करनेवाले आपके जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों और आपके ये मामले सेंसिटिव न चल रहे हों। लेकिन जब ऐसे पूर्वानुमान लिखे गए हों ---------

    1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित सफलताख़ुशी या आनंददायक वातावरण मिलना चाहिए। इसे प्राप्त करने के लिए इन मामलों में पूरा ध्यान बना रहना चाहिए। इस दिशा में किया जानेवाला मेहनत भी फलदायी होना चाहिए। धन कमाने की ओर पूरा ध्यान बना होना चाहिए। धन से सम्बंधित जिम्मेदारियां बढ़नी चाहिए। जमा धन की वृद्धि होनी चाहिए। धन की मजबूती के लिए कार्यक्रम भी बनना चाहिए। संपन्न लोगों से गंभीर विचार विमर्श होना चाहिए।
    2. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित असफलता कष्ट या दवाबभरा वातावरण उपस्थित हो सकता है जिसको सुधारने के लिए इन मामलों पर पूरा ध्यान बना रह सकता है। यह किनके लिए कितना प्रभावी होगा इसे स्पष्टतः समझने और सटीक निर्णय लेने के लिए कभी-कभी हमारा कंसल्टेशन लेना जरूरी महसूस हो सकता है। धन की कमजोर हुई स्थिति की ओर ध्यान जा सकता है। इनको संभालने या मजबूती देने के लिए कोशिश चल सकती है। पर पारिवारिक स्थिति को मजबूत न बना पाने की मजबूरी से समझौता करना पड़ सकता है।

    ऐसे दोनों पूर्वानुमान बहुत ही अच्छी और बहुत ही बुरी स्थिति के संकेतक हैं। हम सामान्य बोलचाल में भी इसे किसी का फॉर्म में होना और किसी का फॉर्म में न होना कहते हैं। इसलिए ऐसी भविष्यवाणियों के पहले अतिरिक्त तैयारी की जरूरत है।

    कभी कभी सामान्य पूर्वानुमान में ऐसी बातें लिखी मिलेंगी -----


    1. कुछ क्रियाशील ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से संबंधित जिम्मेदारी बढ़नी चाहिए। इन मामलों में या तो स्वयं बदलाव होना चाहिए या परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बननी चाहिए कि इनमे मजबूती या बदलाव लाए जाएँ।
    देखने में यह पूर्वानुमान बिलकुल सामान्य लग रहापर यह समय-अंतराल भी बड़े परिवर्तन देता है। पर यह पॉजिटिव होगा या नेगेटिवइसे बतलाना अभी के समय में एप्प के लिए मुश्किल होता हैइसलिए इसे यूँ ही छोड़ दिया गया है।

    कहीं-कहीं धन-कोष साख परिवार के ऋणात्मक के साथ भी वाक्य जोड़ा गया है जो ऋणात्मकता के तीव्रता को बढ़ाता है ------


    1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में मनोनुकूल माहौल के नहीं बनने से या असफलता प्राप्त होने से कुछ निराशा सी बन सकती हैं। इन मामलों के माहौल को बदलने की कोशिशें भी बेकार हो सकती हैं।
    लेकिन  इस तरह के  वाक्यों के रहने से बाधाएं बहुत मामूली रहेंगी -----


    1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में सम्बन्ध की गड़बड़ी या इससे सम्बंधित किसी कार्य के आगे न बढ़ने जैसी थोड़ी बाधा आ सकती हैं। पर उसके बाद माहौल अनुकूल होना चाहिए।
    किसी समय में ऐसे वाक्य हों तो -----


    1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों की कुछ कमजोरी बनी रह सकती हैं । ऐसे समय में कोई बड़ा कदम उठाने से झंझट बढ़ सकते हैं।
    इन मामलों में जबतक जरूरी न होकोई काम न शुरू करें।

    किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----

    1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ये सारे मामले कठिनाई या असफलता उपस्थित कर किसी मामले से सम्बंधित वातावरण को ऋणात्मक बना सकते हैं जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बुरा पड सकता है।

    इसके अतिरिक्त भविष्यवाणियों में किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----


    1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों के द्वारा सुख या सफलता मिलने से किसी मामले से सम्बंधित वातावरण सकारात्मक दिखाई देना चाहिए जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव अच्छा पड़ना चाहिए।

    कल के भाई-बहनसहपाठी-सहकर्मी  मामलों में ऐसी ही चर्चा  होगी।

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    हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत से जुडी पुस्‍तक

     

    Blogging in Hindi मीनिंग

    Blogging in Hindi meaning

    जब भी ऑनलाइन काम में कुछ स्कोप तलाश करने की बारी आती है, ब्लॉग का नाम अवश्य सुनाने को मिलता है। ब्लॉग एक डायरी की तरह होता है, जिसमे आप अपने विचारों, भावनाओं, चित्रों, वीडियो आदि को दुनिया से शेयर कर सकते हैं। ब्लॉग लिखने के लिए कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान और किसी भी भाषा में अभिव्यक्ति की कला भी चाहिए। ब्लॉग लिखने के अभी बहुत सारे मंच हैं  , जहाँ हज़ारो ब्लॉगर विभिन्न विषयों पर ब्लॉग्गिंग कर  रहे हैं। आजकल ब्लॉग्गिंग से पैसों की भी कमाई के रास्ते खुले हैं। 

    हमने 2006 से ही ज्योतिष को लेकर खूब ब्लॉग्गिंग की, मैंने ज्योतिष जैसे विषय पर खूब लिखा और ब्लॉग्गिंग के कारण ही गत्यात्मक ज्योतिष को अच्छी पहचान मिली है। यदि ब्लॉग्गिंग न होता तो समाज में ज्योतिष की इस विधा को प्रचारित प्रसारित करना बहुत मुश्किल था। उस समय पूरे विश्व में हिंदी के 200-400 ब्लोग्गेर्स रहे होंगे, जिनमे जान-पहचान और आपसी सहयोग हुआ करता था। उसी समय का यह संस्मरण है। 

    मेरा मायका बोकारो जिले में ही है , इसलिए आसपास ही लगभग सारे रिश्‍तेदार हैं , हमेशा कहीं न कहीं से न सिर्फ निमंत्रण मिलता है , हमारी उपस्थिति की उम्‍मीद भी की जाती है, सो हर जगह रस्‍म अदायगी के लिए भी मुझे ही जाना होता है। अकेले टैक्‍सी में भी जाना मुझे बोरिंग लगता है , बोकारो का स्‍टेशन भी शहर से 8 कि मी की दूरी पर है , इसलिए स्‍टेशन जाना , क्‍यू में खडे होकर टिकट लेना और ट्रेन पकडना भी कठिनाई भरा ही है , जबकि सुबह फोन करके किसी बस वाले से एक सीट रखवा लिया जाए , तो आराम से घर से निकलकर टहलते हुए अधिकतम 300 मीटर  के अंदर स्थित बस स्‍टैण्‍ड में जाकर आज के आरामदेह बसों में बैठ जाने पर तीन चार घंटे में गंतब्‍य पर पहुंचना काफी आसान है। इसलिए मुझे झारखंड के अंदर 150 से 200 कि मी के अंदर तक के इस सफर के लिए टैक्‍सी या ट्रेन से अधिक सुविधाजनक बस ही लगता है।

    एक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए पिछले महीने जाकर बस पर बैठी ही थी कि ढेर सारी पुस्‍तके हाथ में लिए एक किशोर पुस्‍तक विक्रेता मेरी ओर बढा। मेरे नजदीक आकर उसने अपने दाहिने हाथ में रखी एक पुस्‍तक आगे बढायी और मुझसे कहा 'इसे ले लीजिए .. इसमें मेहंदी की डिजाइने हैं' जबतक मैने 'ना' में सर हिलाया , तबतक मेरी त्‍वचा से वह मेरी उम्र का सही अंदाजा लगा चुका था। वह क्षणभर भी देरी किए बिना विभिन्‍न देवताओं की आरती की पुस्‍तक निकालकर मुझे दिखाने लगा। ट्रेन में पत्र पत्रिकाएं पढी भी जा सकती हैं , पर बस के हिलने डुलने में आंख्‍ा कहां स्थिर रह पाता है , मुझे विवाह में भी जाना था , पुस्‍तके लेकर क्‍या करती , मैने मना कर दिया। पर उस किशोर पुस्‍तक विक्रेता के मनोविज्ञान समझने की कला ने मुझे खासा आकर्षित किया। इतनी कम उम्र में भी उसे पता है कि किस उम्र में किस तरह के लोगों को किस तरह की पुस्‍तकें चाहिए।

    Blogging Hindi me

    बस चल चुकी थी और हमेशा की तरह मैं चिंतन में मग्‍न थी। उम्र बढने या परिस्थितियां बदलने के साथ साथ सोंच कितनी बदल जाती है। पत्र पत्रिकाएं या हल्‍की फुल्‍की पुस्‍तकें पढने में मेरी सदा से रूचि रही है , पिताजी के एक मित्र ने पत्र पत्रिकाओं की दुकान खोली थी। पिताजी जब भी बाजार जाते और तीन चार पत्रिकाएं ले आते थे , दूसरे या तीसरे दिन जाकर पुरानी पत्रिकाओं को वापस करते और नई पत्रिकाएं ले आते थे। हम सभी भाई बहन अपनी अपनी रूचि के अनुसार एक एक पत्रिका लेकर बैठ जाते। कोई खेल से संबंधित तो कोई बाल पत्रिका तो कोई साहित्यिक। कुछ दिनों तक तो साहित्‍य की पुस्‍तकों में से कहानी , कविताएं पढना मुझे अच्‍छा लगा , पर उसके बाद धीरे धीरे मेरी रूचि सिलाई-बुनाई-कढाई की ओर चली गयी । फिर तो सीधा महिलाओं की पत्रिकाओं में से नए फैशन के कपडे या बुनाई के नए नए पैटर्न देखती और सलाई या क्रोशिए में मेरे हाथ तबतक चलते , जबतक वो पैटर्न उतर नहीं जाते।

    पर ग्रेज्‍युएशन की पढाई करते वक्‍त कैरियर के प्रति गंभीर होने लगी , तब प्रतियोगिता के लिए आनेवाले पत्र पत्रिकाओं में मेरी रूचि बढने लगी, फिर तो कुछ वर्ष खूब हिसाब किताब किए , जीके , आई क्‍यू और अंकगणितीय योग्‍यता को मजबूत बनाने की कोशिश की , पर फिर नौकरी करनेवाली कई महिलाओं की घर गृहस्‍थी को अव्‍यवस्थित देखकर मेरी नौकरी करने की इच्‍छा ही समाप्‍त हो गयी। कैरियर के लिए  कॉलेज की प्रोफेसर के अलावे अपने लिए कोई और विकल्‍प नहीं दिखा और दूसरी नौकरी के लिए मैने कोशिश ही नहीं की। व्‍याख्‍याता बनने के लिए उस समय सिर्फ मास्‍टर डिग्री लेनी आवश्‍यक थी , सो ले ली । प्राइवेट कॉलेजों के ऑफर भी आए तो बच्‍चों की जबाबदेही के कारण टालमटोल कर दिया और सरकारी कॉलेजों में तो आजतक इसकी न तो वेकेंसी निकली और न मैं व्‍याख्‍याता बन सकी। जो भी हो, उसके बाद प्रतियोगिता के लिए भी पढाई लिखाई तो बंद हो ही गया।

    विवाह के बाद ससुराल पहुंची , तो वहां के संयुक्‍त परिवार में अच्‍छे खाने पीने की प्रशंसा करने वालों की बडी संख्‍या को देखते हुए परिवार के लिए नई नई रेसिपी बनाने में ही कुछ दिनों तक व्‍यस्‍त रही , इस समय पत्र पत्रिकाओं में मुख्‍य रूप से विभिन्‍न प्रकार की रेसिपी को पढना ही मुख्‍य लक्ष्‍य बना रहा। पर दो चार वर्षो में ही मेरी महत्‍वाकांक्षी मन और दिमाग में मेरे जीवन को व्‍यर्थ होते देख 'कुछ' करने की ओर मेरा ध्‍यान आकर्षित किया। जब भी मैके आती , बच्‍चों को घरवालों के भरोसे छोडकर पिताजी के साथ ज्‍योतिष सीखते और उसमें लम्‍बी लम्‍बी सार्थक बहस करते हुए मैने इसे ही अपने जीवन का लक्ष्‍य बनाया । इसके बाद मेरे घर में ज्‍योतिष की पत्रिकाएं आने लगी और मेरा ध्‍यान उसके लिए नए नए आलेख लिखने में लगा रहा । दो तीन वर्षों में ही उन आलेखों को संकलित करते हुए 'अजय बुक सर्विस' ने एक पुस्‍तक ही प्रकाशित कर डाली।

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    पुस्‍तक के प्रकाशन के बाद दो तीन वर्ष बच्‍चों को सही दिशा देने की कोशिश में फिर इधर उधर से ध्‍यान हट गया, क्‍यूंकि मेरे विचार से उनके बेहतर मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक विकास पर ध्‍यान देना आवश्‍यक था। लेकिन जब दो तीन वर्षों में बच्‍चों ने अपनी व्‍यक्तिगत जिम्‍मेदारियां स्‍वयं पर ले ली , तो फुर्सत मिलते ही ज्‍योतिष के इस नए सिद्धांत को कंप्‍यूटराइज करने का विचार मन में आया। कंप्‍यूटर प्रोफेशनलों से बात करने पर उन्‍हें यह प्रोग्राम बनाना कुछ कठिन लगा, तो मैने खुद ही कंप्‍यूटर के प्रोग्रामिंग सीखने का फैसला किया। संस्‍थान में दाखिला लेने के बाद मैं कंप्‍यूटर की पत्रिकाओं में भी रूचि लेने लगी थी और तबतक इसके सिद्धांतो को समझती रही , जबतक अपना सॉफ्टवेयर कंप्‍लीट न हो पाया। ये सब तैयारियां मैं एक लक्ष्‍य को लेकर कर रही थी , पर उस लक्ष्‍य के लिए घर से दूर निकल पाने में अभी भी समय बाकी था। एक तो ग्रहों के अनुसार भी मैं अपने अनुकूल समय का इंतजार कर रही थी , ताकि इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में बडी बाधा न आए, दूसरे बच्‍चों के भी बारहवीं पास कर घर से निकलने देने तक उनपर एक निगाह बनाए रखने की इच्‍छा से मैने अपने कार्यक्रमों को कुछ दिनों तक टाल दिया।

    उसके बाद के दो तीन वर्ष शेयर बाजार पर ग्रहों के प्रभाव के अध्‍ययन करने में गुजरे। इस दौरान नियमित तौर पर इससे जुडे समाचारों को देखना और पढना जारी रहा। 'दलाल स्‍ट्रीट' भी मेरे पास आती रही। फिर भी समय कुछ अधिक था मेरे पास , कंप्‍यूटर की जानकारी मुझे थी ही , बचे दो तीन वर्षों के समय को बेवजह बर्वाद न होने देने के लिए मैं हिन्‍दी ब्‍लागिंग से जुड गयी और तत्‍काल इसके माध्‍यम से ही अपनी 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के बारे में पाठकों को जानकारी देने का काम शुरू किया। एक वर्ष वर्डप्रेस पर लिखा , फिर मैं ब्‍लॉगस्‍पॉट पर लिखने लगी। यह एक अलग तरह की दुनिया है , जहां लेखक और पाठक के रिश्‍ते बढते हुए धीरे धीरे बहुत आत्‍मीय हो जाते हैं। औरों की तरह मैं भी इससे गंभीरता से जुडती चली गयी और आज इसके अलावे हर कार्य गौण है। अब आगे की जीवनयात्रा में रूचि किस दिशा जाएगी , यह तो समय ही बताएगा , पर आज तो यही स्थिति है कि यदि उस पुस्‍तक विक्रेता किशोर के हाथ में हिन्‍दी ब्‍लागिंग से जुडी दस पुस्‍तकें भी होती , तो मैं सबको खरीद लेती ।

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      धार्मिक ग्रंथों के पात्र और घटनाएं वास्‍तविक ?

       

      About Mahabharat in Hindi

      हमारे धार्मिक ग्रंथों के प्रति हिन्‍दुओं में अटूट श्रद्धा है, पर इसके बावजूद कुछ बातें अक्‍सर विवादास्‍पद बनी रहती हैं। वेदों और पुराणों में लिखी ऋचाएं तो सामान्‍य लोगों को पूरी तरह समझ में आने से ही रही , इसलिए वे बहस का मुद्दा नहीं बन पाती , पर 'रामायण' और 'महाभारत' जैसे ग्रंथ या अन्‍य धार्मिक पुस्‍तकें अपनी सहज भाषा और सुलभता के कारण हमेशा ही किसी न किसी प्रकार के विवाद में बने होते हैं। कभी इन ग्रंथों के पात्रों और घटनाओं के काल्‍पनिक और वास्‍तविक होने को लेकर विवाद बनता है , तो कभी इनमें सीमा से अधिक अतिशयोक्ति भी लोगों का विश्‍वास डिगाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करती है। घटनाओं का क्रम देखकर ही 'रामायण' और 'महाभारत' की कहानी मुझे कभी भी काल्‍पनिक नहीं लगी , साथ ही घटनाओं के साथ साथ ग्रहों नक्षत्रों की स्थिति का सटीक विवरण और रामचंद्र जी और कृष्‍ण जी की जन्‍मकुंडली इस घटना के पात्रों के वास्‍तविक होने की पुष्टि कर देती है। पर इन ग्रंथों में कहीं कहीं पर वर्णन सहज विश्‍वास के लायक नहीं है , यह मैं भी मानती हूं।

      पर इसे एक अलग कोण से भी देखा और समझा जा सकता है , जिसकी प्रेरणा मुझे हमारे पडोसी श्री श्रद्धानंद पांडेय जी के द्वारा लिखा गया एक आलेख 'क्‍या हनुमान जी एक बंदर थे ?' से मिली। वैसे तो वे साइंस के ही विद्यार्थी रहे हैं , पर जाति से ब्राह्मण होने या फिर अपने शौक के कारण, विज्ञान के अलावे हर तरह के ग्रंथों को पढना भी उनसे नहीं छूटता। प्राचीन ग्रंथों को सीधा न नकारते हुए वे तर्क से उन खामियों का कारण ढूंढते हैं , जो अक्‍सर एक वैज्ञानिक मस्तिष्‍क में कौंधते हैं । एक घटना का उदाहरण देते हुए उन्‍होने इस आलेख की शुरूआत की है , जिसमें उनका चार वर्ष का पुत्र कई दिनों से 'सिंह अंकल' के आने की सूचना सुनकर अपने पापा के जंगल वाले सिंह दोस्‍त का इंतजार कर रहा था और 'सिंह अंकल' के आने पर उन्‍हें अपनी कल्‍पना के अनुरूप न पाकर उनके मिलकर भी असंतुष्‍ट था। उनका कहना था कि इस प्रकार की गलतफहमी कई पीढीयों तक कहानी सुनते सुनते आराम से हो सकती है।

      पौराणिक कथा का अर्थ


      उनके आलेख को पढने के बाद उनकी बातों से असहमत हुआ ही नहीं जा सकता। हो सकता है , प्राचीन काल में शब्‍द कम रहे हों , क्‍यूंकि ग्रहों को जो नाम दिया गया , वही सप्‍ताह के दिनों का भी दिया गया है। नक्षत्रों का जो नाम है , वहीं हिन्‍दी के महीनों का नाम है। जानवरों को जो नाम दिए गए , वही मनुष्‍य की विभिन्‍न जातियों को दिए गए थे। खासकर अभी भी आदिवासियों की जाति तो पशुओं के नाम पर देखी जाती है। उनका कहना है हनुमान मनुष्‍य ही रहे होंगे , पर जाति के कारण हनुमान के रूप में ऐसे प्रसिद्ध हो गए हों कि बाद में उनकी कल्‍पना हनुमान के रूप में ही कर ली गयी हो। इसी तरह 'देव' 'मनुष्‍य' और 'दैत्‍य' के रूप में वर्णित सारे चरित्र मनुष्‍य हो सकते हैं। रामायण में वर्णित अन्‍य लोगों को भी पशु ही समझ लिया गया हो , तो वर्णन में गलतफहमी होना स्‍वाभाविक है।

       मैने पहले भी सुना है कि यदि दस बीस लोगों का एक घेरा बना लिया जाए और किसी के कान में फुसफुसाकर एक कोई बात सुनाए , वह दूसरे को और दूसरा तीसरे को सुनाता चला जाए , तो दसवें या बीसवें व्‍यक्ति के पास पहुंचने पर उस बात के अर्थ का अनर्थ होना तय है। महाभारत की कहानी में धृतराष्‍ट्र को अंधा बताया गया है , पर इस दृष्टि से सोंचती हूं तो मुझे नहीं लगता है कि वे अंधे रहे होंगे। मेरे विचार से किसी चीज का अधिक मोह लोगों को अंधा बना देता है। महाभारत की पूरी कहानी में धृतराष्‍ट्र का चरित्र पुत्रमोह में अंधा दिखता है , जनता को उससे नाराजगी रही होगी , इसी कारण कहानी में अंधा अंधा कहते सुनते लोगों ने उसे अंधा मान लिया होगा।  

      धृतराष्‍ट्र तो मोह में अंधे थे ही , लेकिन राजमहल में इतनी घटनाएं घटती रहीं और उनकी रानी गांधारी को भी कुछ नजर नहीं आया। अब कहानी में एक वाक्‍य जोड दें कि धृतराष्‍ट्र तो अंधा था ही , गांधारी ने भी आंख में पट्टी बांध रखी थी। इस प्रकार से कई पीढी चलने पर कहानी को एक अलग मोड लेना ही था , क्‍यूंकि प्रश्‍न उठना ही है , दोनो अंधे कैसे ? औरतों के पतिप्रेम और त्‍याग की भावना को देखते हुए कारण बताया जाएगा , 'गांधारी ने जब देखा कि उसके पति 'कुछ नहीं' देख सकते हैं , तो उसने भी 'कुछ नहीं' देखने के लिए आंखो पर पट्टी बांध ली। 

      बस इसी तरह पीढी दर पीढी एक के बाद एक कुछ गलत तथ्‍य जुटते चले गए होंगे, जिनपर हम आज विश्‍वास नहीं कर पाते। पर इसमें कुछ न कुछ वास्‍तविकता होने से तो इंकार नहीं किया जा सकता है।

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        कुंडली से किसी व्‍यक्ति के विभिन्‍न पहलुओं, भविष्‍य का अनुमान

         

        Jyotish 12 bhav

        (jyotish aur bhav)

        गणित ज्‍योतिष में आसमान के पूरब से पश्चिम की ओर जाती गोलाकार 360 डिग्री की पट्टी को बारह भागों में बांट दिया जाता है। इन बारह भागों को हम राशि कहते हैं , इन राशियों में व्‍यक्ति के जन्‍म के समय जो राशि उदित होती है , उसे लग्‍न राशि कहते हैं।  

        Jyotish 12 bhav

        प्रथम भाव ज्योतिष (Jyotish me pahla bhav)

        • लग्‍नराशि जन्‍मकुंडली का प्रथम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की शारीरिक स्थिति या उसके आत्‍मविश्‍वास के बारे मे अनुमान किया जाता है। बचपन में स्वास्थ्य तथा बड़े होने पर व्यक्तिगत गुणों से व्यक्तित्व बनता है और आत्मविश्वास में वृद्धि या कमी होती है.
        •  इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का द्वितीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की आर्थिक या पारिवारिक स्थिति के बारे में अनुमान किया जाता है। बचपन में पारिवारिक स्थिति, बड़े होने पर अपनी हैसियत इससे देखी जाती है.
        •  इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का तृतीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाई बहन की स्थिति या शक्ति के बारे में अनुमान किया जाता है।बचपन में इससे अपने भाई बहन तथा बड़े होने पर साथ देनेवाले या अनुसरनकर्ता भी इसी भाव से देखे जाते हैँ.

        चतुर्थ भाव ज्योतिष (Jyotish me chautha bhav)

          •  इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का चतुर्थ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की माता की स्थिति या हर प्रकार की संपत्ति के बारे मे अनुमान किया जाता है। सुख शान्ति प्रदान करने के लिए बचपन में माँ की गोद, बड़े होने पर अपनी संपत्ति और स्थायित्व इस भाव से देखे जाते हैँ.

          पंचम भाव ज्योतिष (Pancham bhav jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का पंचम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की बुद्धि की स्थिति या संतान के बारे मे अनुमान किया जाता है। बचपन में आईक्यू और बड़े होने पर पढ़ाई, लिखाई, संतान की स्थिति इसी से देखी जाती है.

          षष्ठ भाव ज्योतिष (Shashth bhav Jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का षष्‍ठ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की रोग प्रतिरोधक या बड़े होने पर किसी प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति या प्रभाव के बारे मे अनुमान किया जाता है। 

          सप्तम भाव ज्योतिष (Saptam bhav jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का सप्‍तम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के पारिवारिक सुख और बड़े होने पर दाम्‍पत्‍य जीवन की स्थिति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

          अष्टम भाव ज्योतिष (Ashtam bhav in jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का अष्‍टम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की जीवतता या बड़े होने के बाद जीवनशैली या उम्र के बारे मे अनुमान किया जाता है।

          नवम भाव ज्योतिष (Bhagya bhav jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का नवम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाग्‍य की स्थिति या बड़े होने के बाद धर्म के प्रति उसके दृष्टिकोण के बारे मे अनुमान किया जाता है।

          दशम भाव ज्योतिष (Jyotish dasham bhav)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का दशम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के पिता और बड़े होने के बाद पद प्रतिष्‍ठा की स्थिति या उसके सामाजिक और राजनीतिक स्थिति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

          एकादश भाव ज्योतिष (Ekadash bhav Jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का एकादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के लाभ बड़े होने के बाद उसके प्रति संतोष या लक्ष्‍य के बारे मे अनुमान किया जाता है।

          द्वादश भाव ज्योतिष (Dwadash bhav Jyotish)

          • इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का द्वादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के खर्च या बाहरी संदर्भों की स्थिति या विदेश यात्रा के बारे मे भी अनुमान किया जाता है।

              यूं तो परंपरागत ज्‍योतिष में बालक के विभिन्‍न संदर्भों के बारे में अनुमान करने के लिए ग्रहों की शक्तियों को निकालने के कई सूत्र दिए गए हैं , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष उनकी सहायता नहीं लेता और विभिन्‍न भावों के स्‍वामी ग्रह या उन भावों में स्थित ग्रहों की 'गत्‍यात्‍मक शक्ति' और 'स्‍थैतिक शक्ति' के द्वारा इसका आकलन करता है । ज्योतिष के क्षेत्र में नया प्रयोग है, जो काफी सटीक है।  

              जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

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