कुंडली का दूसरा भाव यानि धन

Second house in jyotish


वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं। हर भाव से जीवन के भिन्न भिन्न सन्दर्भों को देखा जाता है। जातक के जन्म के वक्त चल रहे लग्न के बाद जो राशि उदित होती है, वही जातक का दुसरा भाव कहलाती है। उस राशि के राशीश और उस राशि में कितने सारे ग्रह उदित हो रहे थे, उसी के आधार पर जन्मकुंडली के दूसरे भाव के बारे में हमें जानकारी मिलती है। ज्योतिष में जन्मकुंडली का दूसरे भाव का भी विशेष महत्व होता है। क्योंकि परंपरागत ज्योतिष के अनुसार यह भाव धन और परिवार से सम्बंधित है। हर युग में धन और परिवार के स्तर का महत्व बना हुआ है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' का भी यही मानना है। किसी जातक के धन-परिवार की स्थिति को देखने के लिए इसी भाव का उपयोग किया जाना चाहिए।

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Second house effect

लेकिन जन्मकुंडली के द्वारा किसी के धन के परिमाणात्मक पहलू को नहीं बतलाया जा सकता। किसी भी कुंडली को देखकर जातक सहस्रपति है या हजारपति , लखपति है या करोड़पति , इस बात का जवाब दे पाना मुश्किल ही नहीं, असंभव ही है। इसका कारण भी वही है , युग , समाज , प्रदेश और देश का प्रभाव। किसी विकसित देश और अविकसित देश में एक ही दिन एक ही लग्न में जन्म लेनेवाले एक जैसे कुंडली प्राप्त करनेवाले बच्चों के आर्थिक स्तर में काफी अंतर देखा जा सकता है। देश की बात छोड़ भी दी जाए , तो एक ही देश में एक समय में किसी मंत्री के पुत्र के जन्म के समय ही एक सामान्य कृषक के पुत्र का भी जन्म हो सकता है , जबकि दोनो के आर्थिक स्तर में काफी फर्क होगा। इसी प्रकार दो युगों में भी आर्थिक स्तर और नीतियो के अंतर को भी नकारा नहीं जा सकता। यहॉ कोई प्रश्न नहीं किया जा सकता , क्योंकि शरीर की तरह ही जातक के आर्थिक स्तर का कोई निश्चित स्वरुप नहीं होगा।

Second house in kundli

किन्तु शरीर की तरह ही धन के गुणात्मक पहलू की चर्चा करना काफी आसान है , वास्तव में हर युग और प्रदेश में धन का अर्थ वह साधन है , जिसके द्वारा अपनी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। मनुष्य की आवश्यकताएं समाज , परिवार और अपनी मानसिक बनावट के अनुसार घटती बढ़ती हैं। यदि जन्मकुंडली में धन की स्थिति सुखद हो , तो मंत्री का पुत्र भी अपनी धन की स्थिति से संतुष्ट हो सकता है और सामान्य कृषक का पुत्र भी। किन्तु यदि धन की स्थिति गड़बड़ होगी , तो मंत्री के पुत्र को भी अपने स्तर के अनुरुप निर्वाह करने में धन से असंतुष्टी बनी रहेंगी और ऐसा ही कृषक के पुत्र के साथ भी हो सकता है। धन के मामले में लापरवाही का योग होगा , तो दोनो ही लापरवाह हो सकते हैं। इसी प्रकार धन कमाने में दोनो का ही ध्यानसंकेन्द्रण हो सकता है । इसमें सफलता और असफलता दोनो को ही मिल सकती है , परंतु चूंकि यहॉ शुरुआत में ही स्तर का बड़ा फर्क है , इसलिए अंत में भी स्तर का बना रहना स्वाभाविक है और इस कारण पूरे जीवन धन कमाने की प्रबल इच्छा , कार्यक्षमता और सफलता के बावजूद भी हो सकता है , एक किसान का पुत्र उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए , जहॉ से एक मंत्री के पुत्र ने अपनी यात्रा आरंभ की थी , लेकिन इसके बावजूद धन के प्रति दोनों के दृष्टिकोण , कार्यप्रणाली और और सफलता-असफलता के एक जैसे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता , जिसके कारण अपने-अपने क्षेत्र में दोनों ही महत्वपूर्ण बनें रहेंगे।

Second house in birth chart 

इस तरह जन्मकुंडली देखकर धन के बारे में यह बतलाया जा सकता है कि जातक धन के मामले में भाग्यशाली है या नहीं ? धनविषयक कार्यक्रमों में वह गंभीरता रखता है या निश्चिंती ? यदि निश्चिंती है , तो इसका कोई भयावह परिणाम दिखाई पड़ने की संभावना है या नहीं ? यदि वह गंभीरता रखता है , तो उसका सकारात्मक फल प्राप्त करेगा या नहीं ? यदि धन के मामले में उसकी स्थिति दयनीय है , तो उसमें सुधार आएगा या नहीं ? न सिर्फ इन सब प्रश्नों के उत्तर दे पाना ही संभव है , वरन् यह भी बतलाना संभव है कि ये बातें किस उम्र में अधिक फलदायी बनें रहेंगे।




कुंडली का दूसरा भाव यानि धन कुंडली का दूसरा भाव यानि धन Reviewed by संगीता पुरी on March 17, 2020 Rating: 5

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