ज्योतिष में ascendant क्या होता है?

 

 Ascendant meaning in astrology in Hindi


सामान्य बोलचाल की भाषा में Ascendant का अर्थ चढ़ाव या आगे की ओर अग्रसर होना है! ज्योतिष में Ascendent का शाब्दिक अर्थ लग्न होता है! पूर्व में आप एक लेख हिंदी में जोडिएक का अर्थ में पढ़ चुके हैं कि आसमान में मौजूद 30 -30  डिग्री की कुल 12 राशियों में से लग्न वह राशि होती है, जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय आसमान में पूर्वी क्षितिज पर उदित होती है! जन्मसमय के अभाव में किसी जातक का लग्न नहीं निकला जा सकता, इस कारण जन्मसमय न होने की स्थिति में भविष्य का आकलण चंद्रकुंडली और ग्रहों की शक्ति के आधार पर खींचे गए जीवन ग्राफ से की जाती है। 

ज्योतिष शास्त्र में लग्न-राशि को जातक के व्यक्तित्व के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। यह कुंडली का प्रथम भाव होता है , जिससे जातक के शरीर, व्यक्तित्व , आत्मविश्वास आदि का पता चलता है। इस राशि का स्वामी लग्नेश और इस भाव में मौजूद ग्रहों की शक्ति से ही किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आकलन किया जा सकता है। किसी भी कुंडली में लग्न की स्थिति सबसे ऊपर होती  है। यदि लग्न में ही चंद्र की स्थिति हो तो जातक की एक ही लग्नकुंडली और चंद्रकुंडली  होती है। 

Ascendant meaning in astrology in Hindi

Ascendant planet meaning in hindi

चूँकि सूर्य 15 अप्रैल से 15 मई के मध्य सबसे पहली राशि मेष में होता है , इसलिए इस दौरान  सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मेष होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद वृष  लग्न, चार घंटे बाद मिथुन , छह घंटे बाद कर्क , आठ घंटे बाद सिंह - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  15 मई से 15 जून के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न वृष होता है , लग्न में सूर्य होता है , अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मिथुन लग्न, चार घंटे बाद कर्क , छह घंटे बाद सिंह , आठ घंटे बाद कन्या  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

15 जून  से 15 जुलाई के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मिथुन होता है , लग्न में सूर्य होता है , अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कर्क  लग्न, चार घंटे बाद सिंह  , छह घंटे बाद कन्या  , आठ घंटे बाद तुला - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 जुलाई से 15 अगस्त के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कर्क होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद सिंह लग्न, चार घंटे बाद कन्या , छह घंटे बाद तुला , आठ घंटे बाद वृश्चिक  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   

Ascendent in Hindi Astrology

 15 अगस्त से 15 सितम्बर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न सिंह होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कन्या  लग्न, चार घंटे बाद तुला , छह घंटे बाद वृश्चिक, आठ घंटे बाद धनु   - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   15 सितम्बर से 15 अक्टूबर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कन्या  होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद तुला लग्न, चार घंटे बाद वृश्चिक  , छह घंटे बाद धनु , आठ घंटे बाद मकर - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

लग्नकुंडली

 15 अक्टूबर  से 15 नवंबर  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न तुला  होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद वृश्चिक लग्न, चार घंटे बाद धनु , छह घंटे बाद मकर , आठ घंटे बाद कुम्भ  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   15 नवंबर से 15 दिसंबर के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न वृश्चिक होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इसी महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद धनु  लग्न, चार घंटे बाद मकर , छह घंटे बाद कुम्भ , आठ घंटे बाद मीन - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।  

Ascendent in Hindi Astrology

15 दिसंबर  से 15 जनवरी के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न धनु होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मकर लग्न, चार घंटे बाद कुम्भ  , छह घंटे बाद मीन  , आठ घंटे बाद मेष - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 जनवरी  से 15 फरवरी  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मकर होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद कुम्भ  लग्न, चार घंटे बाद मीन , छह घंटे बाद मेष , आठ घंटे बाद वृष  - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।     

15 फरवरी से 15 मार्च  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न कुम्भ होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मीन लग्न, चार घंटे बाद मेष , छह घंटे बाद वृष , आठ घंटे बाद मिथुन   - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है। 15 मार्च से 15 अप्रैल  के दौरान सूर्योदय के आसपास जन्म लेने वाले बच्चे का लग्न मीन होता है , लग्न में सूर्य होता है, अमावस के दिन चन्द्रमा भी साथ में होता है। बुध और शुक्र के भी लग्न के आसपास होने की संभावना रहती है।  इस महीने में सूर्योदय के लगभग दो घंटे बाद मेष लग्न, चार घंटे बाद वृष, छह घंटे बाद मिथुन  , आठ घंटे बाद कर्क - इसी प्रकार लग्न  बढ़ता  जाता है।   


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    कुंडली के छठे भाव की परिभाषा

     

    6th house in Astrology in Hindi

    ज्योतिष में लग्न निर्धारण के बाद कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं।  मानव जीवन के छठे पक्ष के रुप में जीवन में आनेवाले हर प्रकार के झंझट और उसे हल करने की क्षमता को महत्वपूर्ण माना गया है । कुंडली में मनुष्य का छठा भाव किसी प्रकार के झंझट से संबंधित होता है। ये झंझट कई प्रकार की हो सकतीं हैं। बचपन में शरीर में किसी प्रकार की बीमारी झंझट का अहसास देती है। बड़े होने के बाद रोग , ऋण और शत्रु -- तीन प्रकार के झंझटों से इंसान को जूझना पड़ सकता है।

    यही कारण है कि योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक में छठे भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को -3 अंक दिए गए हैं। लेकिन योगकारकता के हिसाब से कम ही सही पर गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने गणित ज्योतिष के अद्भुत गत्यात्मक सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 

    6th house in Astrology in Hindi

    परंपरागत ज्योतिष में छठे भाव को लेकर ऋणात्मक चिंतन का कारण भी स्पष्ट है। इन तीनों संदभो को हम प्राचीन काल के अनुसार देखे तो हम पाएंगे कि इन तीनों ही स्थितियों में मनुष्य का जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण हो जाता था। यदि वह किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हो जाता था तो उसका अच्छी तरह इलाज नहीं हो पाता था। उसकी मौत लगभग निश्चित ही होती थीं। इलाज के बाद भी वह जीवनभर कमजोर ही बना होता था। स्वास्थ्य की कमजोरी उसके जीवन को विकास नहीं दे पाती थी ,क्योंकि उस समय सफलता प्राप्त करने के लिए शारीरिक मजबूती का विशेष महत्व था।

    इस कारण सबकी ही तरह इन सबकी भी वस्तुनिष्ठ विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति के जीवन में कैसे झंझट आएंगे ? रोगग्रस्तता होगी तो कौन सी होगी ? ऋणग्रस्तता होगी तो कितने की होगी ? शत्रुता किससे होगी ? ग्रहों के हिसाब से अन्य भावों की कमजोरी या मजबूती को , छठे भाव के स्वामी या उनमे स्थित ग्रहों को देखते हुए भले ही देखते हुए भले ही झंझट के किस्म का और उससे जीत का आकलन किया जा सकता है , पर परिमाणात्मक आकलन तो संभव ही नहीं है।

    Loan due to 6th house weakness

    इसी प्रकार ऋणग्रस्तता प्राचीन समाज के लिए अभिशाप थी। लोग जो कुछ भी खेत में उगा लेतें , खाकर अपना भरण-पोषण करते। अन्य किसी जरुरत के लिए वे वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग करते। किन्तु अन्य किसी जरुरत के लिए कभी उन्हें ऋण लेने की आवश्यकता पड़ गयी तो उन्हें महाजन के पास जाना होता था । ऐसी हालत में उनके चंगुल में इनकी कई पीढ़ियॉ फंस जाती थी , क्योंकि उस समय ऋण लेने में ब्याज की दर बहुत अधिक होती थी । चक्रवृद्धि ब्याज के रुप में मूलधन बढ़ता ही जाता था और चाहकर भी कोई इस चंगुल से निकल नहीं पाता था , कभी कभी कई पीढियां इस दलदल में फंसी रह जाती थी।

    योगकारक ग्रह

    Enemy due to 6th house weakness

    इसी प्रकार उस समय शत्रु की स्थिति भी बहुत बुरी होती थीं। आज की तरह कमाई के लिए लोग अलग-अलग साघनों पर निर्भर नहीं रहते थे। साथ ही मिल-बैठकर किसी समस्या का समाधान नहीं निकाला जाता था। किसी व्यक्ति से शत्रुता बढ़ाना गंभीर स्थिति में पहुंचना होता था। मार-पीट में लोग फंसे ही रह जाते थे और जीवनभर की कमाई मुकदमों में चल जाती थी। यही कारण हैं कि प्राचीनकाल में लोग रोग,ऋण शत्रु जैसे झंझटों में पड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए हमारे पुराने ज्योतिषियों ने भी इन भावों में ग्रहों की स्थिति को बुरा माना होगा।

    positivity of 6th house astrology

    किन्तु आज समाज की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है। काफी असाध्य रोगों पर काबू पाया जा चुका है। इन रोगों से ग्रसित होने पर झंझट भले ही बढ़े , किन्तु जान संकट में नहीं पड़ती है। इसलिए छठे भाव में ग्रहों की स्थिति अच्छी हो तो उसे बुरा नहीं समझना चाहिए। गत्यात्मक दशा पद्धति के अनुसार यदि ग्रह छठे भाव में गतिज और स्थैतिक उर्जा से संपन्न हो तो जातक किसी भी प्रकार के झंझट को सुलझाने की शक्ति रखता है। वह सफल डॉक्टर होकर रोगी का उपचार कर सकता है ,न्यायाधीश होकर झगड़ों को सुलझा सकता है और प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी हो सकता है।


    आधुनिक युग में ऋणग्रस्तता की परिभाषा भी बदल गयी है। आज किसी भी व्यवसायी को उचित दर पर ऋण प्राप्त हो जाता है। यदि वह सही व्यवस्थापक हो तो अपनी पूंजी से कई गुणा अधिक पूंजी प्राप्त कर उसका प्रवाह कर सकता है। इस प्रकार उसकी कमाई ब्याज-दर से बहुत अधिक होती है और व्यवसायी अपने व्यवसाय में निरंतर वृद्धि महसूस करता है। इसलिए अभी ऋणग्रस्तता की मात्रा से व्यक्ति के स्तर की पहचान होती है। जो 50000 के ऋण से ग्रस्त है वह छोटा व्यवसायी तथा जो 5000000 के ऋण से ग्रस्त है वह बड़ा व्यवसायी है ।

    6th house in astrology in Hindi

    इसलिए कहा जा सकता है कि छठे भाव में स्थित गत्यात्मक और स्थैतिक शक्तिसंपन्न ग्रह जातक के सफल व्यवसायी और प्रभावशाली व्यक्ति होने की सूचना देते हैं। छठा भाव प्रतियोगिता से संबंधित भी होता है इस कारण प्रतियोगिता में भी सफलता की उम्मीद ऐसे ग्रहों से की जा सकती है। हॉ यदि ग्रह गत्यात्मक या स्थैतिक दृष्टि से कमजोर हो तो अवश्य कोई बीमारी या कुछ झंझटों में फंसे होने की स्थिति बन सकती है। ऐसा केवल उस ग्रह के दशाकाल में ही होता है जो छठे भाव मे कमजोर होकर विद्यमान होते हैं।

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      सायन और निरयण क्या है?

       

      Zodiac meaning in Hindi in Astrology

      पृथ्वी पर रहते हुए हम जब आसमान को निहारते हैं , आसमान में मौजूद तारे, ग्रह-नक्षत्र, सूर्य, चंद्र पूर्व दिशा से उदित होते हुए पश्चिम की ओर अस्त होते दिखाई देते हैं।  पृथ्वी के अपने अक्ष में पश्चिम से पूर्व की ओर की घूर्णन गति के कारण हमें ऐसा प्रतीत होता है। आसमान के पूर्व से पश्चिम की ओर जाती गोल 360 डिग्री की यह  चौड़ी पट्टी  ही भचक्र या राशिचक्र कहलाती है। 

       Zodiac signs hindi and english

      इस राशिचक्र को ही अंग्रेजी में Zodiac  कहा जाता है।  Zodiac को 30 -30  डिग्री के 12  भागों बाँटा गया है, जिन्हे 12  राशि कहा जाता है।  इनके नाम क्रमशः मेष (Aries) , वृष (Taurus) , मिथुन(Gemini) , कर्क(Cancer) , सिंह(Leo) , कन्या(Virgo) , तुला(Libra) , वृश्चिक(Scorpio) , धनु(Sagittarius), मकर(Capricorn) , कुम्भ(Aquarius) और मीन(Pisces) हैं। 0 से 30 डिग्री के मेष से शुरू करते हुए 330  से 360  डिग्री के मीन राशि में राशिचक्र का अंत हो जाता है। 

      Zodiac meaning in Hindi

      Astrology zodiac signs in Hindi

       हालाँकि भचक्र के आरम्भ को लेकर  भारतीय और पाश्चात्य विद्वानों में मतभिन्नता है , भारतीय ज्योतिषी निरयण अंश को मानते हैं और १५ अप्रैल को सूर्य आसमान के जिस विन्दु पर होता है , उसे राशिचक्र का शुरूआती  डिग्री मानते हैं , जबकि पाश्चात्य विद्वानों के हिसाब से २२ मार्च  को सूर्य जिस विन्दु पर होता है , वह राशिचक्र का शुरूआती विन्दु है। 

      Zodiac signs in Hindi by date of birth

      यही  कारण है कि सूर्य के आधार पर अपना Zodiac Sign निश्चित करने में लोगों को असुविधा होती है।  भारतीय पंडितों के हिसाब से १५ अप्रैल  से १५ मई  तक जन्म लेने वाले लोग मेष राशि में , १५ मई से १५ जून  तक जन्म लेने वाले लोग वृषभ राशि में , उसके बाद के एक-एक महीने में क्रमशः मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु, मकर , कुम्भ और मीन राशि में आ जाते हैं। जबकि पाश्चात्य ज्योतिषियों के हिसाब से  22 मार्च से 22 अप्रैल तक जन्मलेने वाले मेष राशि में  आ जाते हैं, पुनः 22 अप्रैल के बाद जन्म लेनेवाले वृष, उसके बाद के महीने में क्रमशः मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर और कुम्भ सूर्य राशि में। 

      Zodiac sign by name

      जोडिएक की जिस राशि में चन्द्रमा मौजूद होता है , उसके नक्षत्रों के आधार पर हमारे नाम रखे जाते हैं। यदि उस आधार पर हमारा नाम रखा गया हो तो नाम के आधार पर हम अपना जोडिएक sign निश्चित कर सकते हैं।  पर बिना किसी ग्रहीय स्थिति को देखे यूँ ही नाम रख दिया गया हो तो आप नाम के आधार पर अपना जोडिएक sign निश्चित नहीं कर सकते हैं। 


      Zodiac sign Lagna

      ज़ोडियक में और जो राशि सबसे महत्वपूर्ण है, वह किसी व्यक्ति का लग्न है। इस लेख में  लग्न के बारे में जानकारी दी गयी है। 

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        कबीर के दोहे धर्म पर

         

        कबीर के दोहे धर्म पर

        (Kabir k dohe in Hindi)

        आज के  युग में भी कबीरदास जी के चिंतन के सभी कायल हैं। उनके दोहे सर्वकालिक और सार्वभौमिक माने जा सकते हैं। जड़ धर्म पर उन्होंने जमकर चोट की है और  अपने दोहो में धर्म का व्यावहारिक रूप सामने रखा है। 

        Kabir ke dohe dharm par


         कस्तूरी  कुंडली  बसै  मृग  ढूँढ़ै  बन  माहि। 

        ऐसे  घट  घट  राम  हैं  दुनिया  देखत नाहिं।

        जिस तरह हिरन के अपने शरीर में ही कस्तूरी होता है , पर उसकी सुगंध को ढूंढता हुआ पुरे जंगल भटकता है , उसी प्रकार ईश्वर हमारे साथ हैं , पर हम उसे मंदिरों और मस्जिदों में ढूंढते फिरते हैं ।

        माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,

        कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

        कोई व्यक्ति हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता रहता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता। कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ दे और मन के मोतियों को बदलो या फेरो।

        जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं नाहीं ।

        प्रेम गली अति सांकरी जामें दो न समाहीं ।

        मन में अहंकार था तो प्रभु साथ नहीं थे , मन का अहंकार  समाप्त हुआ तो प्रभु मिले। प्रेम की गली इतनी पतली संकरी होती है कि उसमे अहम् या परम एक ही रह सकता है ! परम की प्राप्ति के लिए अहम् का विसर्जन आवश्यक है।

        कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।

        हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ।

        कबीर दास जी कहते हैं लोग अंधे और मूर्ख हैं जो गुरु की महिमा को नहीं समझ पाते। ईश्वर आपसे रूठ गया तो गुरु का सहारा है लेकिन अगर गुरु आपसे रूठ गया तो दुनियां में कहीं आपका सहारा नहीं है।

        लंबा मारग दूरि घर, बिकट पंथ बहु मार।

        कहौ संतों क्यूं पाइए, दुर्लभ हरि दीदार।

        रास्ता लम्बा और भयंकर है , चोर और ठग भरे पड़े हैं। हम उनमें पड़कर हम भरमाए रहते हैं – बहुत से आकर्षण हमें अपनी ओर खींचते रहते हैं, ईश्वर का दीदार नहीं हो पाता। 

        धर्म किये धन ना घटे, नदी न घट्ट नीर।

        अपनी आखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर।

        धर्म परोपकार, दान सेवा करने से धन नहीं घटना, देखो नदी सदैव बहती रहती है, परन्तु उसका जल घटना नहीं। धर्म करके स्वयं देख लो, कभी भी धन की धारा नहीं कम होगी। 

        जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप ।

        जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ।

        कबीर दास जी कहते हैं कि दया और धर्म ,  लोभ और पाप , क्रोध और सर्वनाश साथ साथ होते है,  लेकिन जहाँ क्षमा है वहाँ ईश्वर का वास होता है।

        पतिबरता मैली भली गले कांच की पोत ।

        सब सखियाँ में यों दिपै ज्यों सूरज की जोत ।

        पतिव्रता स्त्री तन से मैली भी हो भी अच्छी है।  उसके गले में केवल कांच के मोती की माला भी हो तो वह अपनी सब सखियों के मध्य सूर्य के तेज के समान चमकती है !

        मन के हारे हार है मन के जीते जीत ।

        कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत ।

        जय पराजय केवल मन की भावनाएं हैं, मनुष्य मन में हार गया तो पराजय है और उसने मन को जीत लिया तो वह विजेता है। ईश्वर को भी मन के विश्वास से ही पा सकते हैं। 

        अपनी आखों देखिले, यों कथि कहहिं कबीर।

        मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

         ज्ञान का महत्व धर्म से कही ऊपर है इसलिए किसी भी सज्जन के धर्म को किनारे रख कर उसके ज्ञान को महत्व देना चाहिए। जिस प्रकार मुसीबत में तलवार काम आता है , उसको ढकने वाला म्यान नहीं , उसी प्रकार विकट परिस्थिती में सज्जन का ज्ञान काम आता है, उसका जाती या धर्म नहीं । 

        अमेज़ॉन के किंडल में विद्या सागर महथा जी की फलित  ज्योतिष  :  कितना  सच  कितना  झूठ  को  पढ़ने  के  लिए   इस लिंक पर क्लिक करें !

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          धर्म और ज्‍योतिष को बदनाम न करो बाबा

          धर्म और ज्‍योतिष को बदनाम न करो बाबा

          अपने रिसर्च के क्रम में गत्यात्मक ज्योतिष ने पाया कि दुनियाभर में आज धर्म के नाम पर चल रहा है , वह धर्म है ही नहीं। धर्म , आध्यात्म और अन्धविश्वास  में एक बारीक अंतर होता है।  धर्म और आध्यात्म को बिलकुल अलग ढंग से परिभाषित किया जा सकता है। इस तरह गत्यात्मक ज्योतिष ही आपका आध्यात्मिक गुरु बन सकता है।  समाज के लोगों से विनती है कि वे धर्म के नाम पर उलूल जूलूल स्वीकार न करें। गत्यात्मक ज्योतिष के द्वारा बनाये गए नियमों से चलें। इसलिए समाज में धर्म के नाम पर अन्धविश्वास को परोसनेवाले से भी हमारी विनती रही कि कृपया वे ऐसा न करें , समाज में धर्म को सही ढंग से परिभाषित करें। 

          दुनिया भर के खासकर भारत में गली गली , मुहल्‍ले मुहल्‍ले विचरण करने वाले बाबाओं , तुम अपने शहर में न जाने कितने अपराध करते हो , पर काफी दिनों तक पुलिस की लापरवाही या उनसे मिलीभगत से तुम पकडे नहीं जाते , इस उत्‍साह से बडी बडी गलतियां करने लगते हो , फिर जब तुमपर शिकंजे कसे जाने लगते हैं , तो शहर से भागना और पुलिस से बचना ही तुम्‍हारा एक लक्ष्‍य हो जाता है , बचने का सबसे बडा रास्‍ता तुम्‍हें बाबाजी बनने में दिखाई देता है , बडी मूंछ और दाढी के कारण लोगों के लिए तुम्‍हारे चेहरे को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है , बाबा का रूप धारण कर लेने से जनता की आस्‍था का भी तुम नाजायज फायदा उठा लेते हो , यदि किसी की आस्‍था तुमपर नहीं बन रही होती , तो डराना और धमकाना तो तुम्‍हारा स्‍वभाव है, इसलिए इस राह में चलकर आराम से अपनी महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप पैसे का इंतजाम तो तुम कर लेते हो !

          babaji


          बाबा बनने के बाद तो तुम्‍हारा जीवन और रंगीन बन जाता है , श्‍मशान सिद्ध कर चुके हो तुम , यह कहकर भक्‍तों के सम्‍मुख भी शराब पीने से तुम कोई परहेज नहीं करते , कमाख्‍या मंदिर में सिद्धि प्राप्‍त कर चुके हो , इसलिए मांस से भी कोई परहेज की आवश्‍यकता नहीं , महिलाओं को मां मानते हो , इसलिए उनसे घिरे होने में भी तुम्‍हें दिक्‍कत नहीं ,  कन्‍याओं से सेवा करवाकर तुम उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद दे देते हो , हत्‍या और लूटपाट के पाप के साथ तुम लोगों के कल्‍याण का दावा कर लेते हो , महात्‍मा होने के बावजूद भविष्‍यवाणी करने का रिस्‍क नहीं लेते , उपाय की पूरी व्‍यवस्‍था कर देते हो , एक शहर में तुम्‍हें रहना नहीं , इसलिए साख बनाए रखने की कोई चिंता नहीं , लोगों से पैसों की बरसात करवा लेते हो तुम , इस तरह अपराधी के नाम से भी जो सुख सुविधा नहीं मिलती , वो बाबा बनकर तुम्‍हें मिल जाती है !

          चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

               तुमसे नाम पूछा जाता है तो अपने को हिंदुस्‍तानी बताते हो , गांव , जिला या प्रदेश पूछा जाता है तो हिंदुस्‍तान कहते हो , मानो हम सब देशद्रोही हैं और तुम सच्‍चे देशभक्‍त , महान आत्‍माओं के जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक की हर घटना इतिहास में दर्ज होती है , अपना नाम , अपना गांव , अपना प्रदेश क्‍यूं छिपाते हो , वहीं से तो स्‍पष्‍ट हो जाता है कि तुम अपने जीवन का कोई भाग छुपा रहे हो , तुम इतिहास की किताबों में अपना नाम क्‍यूं नहीं दर्ज करवाना चाहते ,  अपने भयानक सच को सामने न लाकर अपने बाबा के स्‍वरूप को सामने रखकर तुम जनता के आस्‍था के साथ खिलवाड करते हो , उनके मनोवैज्ञानिक कमजोरी का नाजायज फायदा उठाते हो , अपने स्‍वार्थ में अंधे होकर कुछ भी करो तुम , पर धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा , मेरी प्रार्थना है तुमसे 

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