समय की प्रकृति पर लिखे गए रहीम के दोहे

 Rahim ke dohe in Hindi

समय की प्रकृति पर लिखे गए रहीम के दोहे
Rahim ke dohe in hindi


मध्यकालीन कवि अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ानाँ यानि रहीम का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न था। वे कवि के साथ साथ बहुभाषाविद, आश्रयदाता, दानवीर, कलाप्रेमी, एवं विद्वान थे। सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। जन्म से एक मुसलमान होते हुए भी हिंदू जीवन के अंतर्मन में बैठकर रहीम ने जो मार्मिक तथ्य अंकित किये थे, उनकी विशाल हृदयता का परिचय देती हैं। रहीम ने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण तथा गीता जैसे ग्रंथों के कथानकों को उदाहरण के लिए चुना है। उन्होंने मानव जीवन पर ग्रहों के प्रभाव के बारे में तो नहीं लिखा है, पर 'समय' का महत्व, जीवन में आनेवाले सुख-दुःख का वर्णन उनके कई दोहों में मौजूद हैं --------

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा , इसलिए धैर्य बनाये रखें , समय आने पर ही फल मिलता है।

समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात.
सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात.

उपयुक्त समय आने पर वृक्ष में फल लगता है। झड़ने का समय आने पर वह झड़ जाता है. सदा किसी की अवस्था एक जैसी नहीं रहती, इसलिए दुःख के समय पछताना व्यर्थ है.

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह।
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह।।

जैसे पृथ्वी पर बारिश, गर्मी और सर्दी पड़ती है और पृथ्वी सभी ऋतुओं को सहन करती है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में आनेवाले हर परिवर्तन , सुख और दुःख सहन करना सीखना चाहिए।
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगा कब ॥

समय के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता, इसलिए जो कल करना है उसे आज करो और और जो आज करना है उसे अभी करो , पलभर में कुछ भी हो सकता है, फिर तुम क्या कर पाओगे !!

रहिमन चुप ही बैठिए देखि दिनन के फेर
जब नीक दिन आईहें बनत न लगीहें देर

जब ख़राब समय होता है तो चुप ही बैठना ठीक रहता है। जैसे ही अच्छा समय आता है, काम बनते देर नहीं लगती । इस कारण हमेशा अपने सही समय का इन्तजार करें।

नीज कर क्रिया रहीम कही सीधी भावी के हाथ
पांसे अपने हाथ में देव न अपने हाथ

अपने हाथ में सिर्फ कर्म होता है परिणाम नहीं , पासे हमारे हाथ में होते हैं, हम उसे फेकते हैं, पर उसमे कौन सा नंबर आएगा , वह हमारे हाथ में नहीं होता।

राम न जाते हरिण संग से न रावण साथ
जो रहीम भावी कतहूँ होत आपने हाथ


राम यदि हिरण के साथ नहीं जाते तो राम-रावण युद्ध नहीं होता , पर भवितव्यता तो होनी ही थी।

विपत्ति भये धन न रहे रहे जो लाख करोड़
नभ तारे छिपी जात हैं ज्यों रहीम ये भोर

विपत्ति का समय शुरू होते ही आपका लाखो करोड़ों समाप्त हो जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भोर होते ही टिमटिमाते सितारे गायब हो जाए हैं।

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय.
हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय.

जीवन में थोड़े समय का कष्ट ठीक ही है, क्योंकि इसी समय हमें मालूम होता है कि संसार में कौन हमारा हितैषी है और कौन नहीं।

दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय।
जो सुख में सुमिरन करें, तो दुःख काहे होय।।

दुःख और सुख जीवन का हिस्सा है। दुःख में तो प्रभु को सब याद करते है, लेकिन सुख में कोई नहीं करता। यदि सुख में प्रभु को याद किया जाये , तो दुःख नहीं आएगा ।

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    जो होना है वह होगा ,फिर ग्राफ देखने से क्या फायदा ?

     Astrology in Hindi horoscope

    जो होना है वह होगा ,फिर ग्राफ देखने से क्या फायदा ?

    astrology in hindi horoscope


    जो होना है वह होगा ,फिर ग्राफ देखने से क्या फायदा ? इस प्रकार की सोंच यथास्थितिवाद का परिचायक है .अगर आदिकाल का मानव ऐसा ही सोंचता तो वहां से टस से मस नही होता हर काल के मानव ने हर समय प्राकृतिक नियमों को समझने की कोशिश की और हर जानकारी का उसने फायदा उठाया ,अपने जीवन को बेहतर बनाता चला गया .अगर इस तरह की बात नही होती तो आज हम इस वैज्ञानिक युग मे नही होते ,आदिकाल के मानव की तरह ही असभ्य होते .

    मनुष्य जड श्रृष्टि की उपज है तो श्रृष्टि इसके जीवन के पालन पोषण और विकास के लिये ,संरक्षण के लिये प्राकृत अवस्था मे सब कुछ उपलब्ध कराती है,हवा पानी कन्द मूल फल फूल आदि .लेकिन मनुष्य जड पदार्थों से निर्मित केवल जड पदार्थ का संयोग ही नही अपितु इसके अन्दर मन बुद्धि ,विवेक ,आत्मा का निवास भी है इसमे जीवंतता है .प्रकृति से प्राप्त तत्वों ,इसके गुण दोष को समझते हुये उसका बेहतर उपयोग सुख सुविधा के लिये करते हैं .जो होना है उसके हवाले अपने आपको नही छोड देते .

    रेलयान ,सैटेलाइट ,कम्प्यूटर ,दूरदर्शन ,मोबाइल ,जीवन रक्षक दवाईयां आदि प्रकृति ने नही मनुष्य की सोंच अपनी आवश्यकतानुसार अपने सुख दुख के लिये बनाया है . जबतक हम किसी के गुन स्वभाव की जानकारी प्राप्त नही कर लेते ,उससे हम डरते हैं .किसी के रौद्र रूप या भयानक स्वरूप को देखते हैं ,उससे हम भयभीत होते हैं ,जबतक कोई शक्ति हमारे लिये अतुलनीय समझ से परे होता है ,वह हमारे लिये देवता बन जाता है .पहले जल देवता थे ,अग्नि देवता ,पवन देवता थे .जब इसके स्वभाव से परीचित हो गये ,इनका उपयोग करना सीख गये ,ये हमारे मित्र बन गये .जंगल मे लगी भयंकर आग को देख मनुष्य भयभीत हुआ ,पवन देवता के 300-400 किलोमीटर की रफ्तार और उसकी वजह से उत्पन्न तबाही से पवन को देवता कहा गया होगा .केदारनाथ मे अकस्मात मन्दाकिनी मे बाढ आई .कुछ ही मिनटों मे 15-20 हज़ार लोग लापता हो गये – इस घटना को लोग जिस तरह से देखें –तीर्थस्थल था सभी तीर्थयात्री थे ,भगवान के दर्शन के लिये गये थे ,फिर ऐसा क्यों हुआ ?

    कोई देवता का प्रकोप ,जल देवता का प्रकोप या नदी के स्वाभाविक बहाव के रास्ते को संकीर्ण कर देना .मनुष्य रोज एक भूल करता है और उससे सीखता है . जबतक हम सही कारणों की तलाश नही कर पाते हैं ,वह भय का कारण बना रहता है .महामारी और छुआछूत की बीमारी को भी देवता का प्रकोप समझ लेता है .कल तक चेचक की बीमारी को भी माता का प्रकोप समझा जाता था ,दवादारू और डॉक्टरी सलाह से अधिक माता की पूजा पाठ मे ध्यान दिया जाता था .

    जबतक आप किसी प्रकार की समस्याओं से ग्रसित नही होते ,तबतक आप यही कहते हैं कि जो होना होगा वो होगा ही तो भविष्य की जानकारी से क्या फायदा ,ग्राफ देखने से क्या फायदा ,लेकिन जैसे ही आप संकट से घिर जाते हैं ,आपकी छटपटाहट शुरू हो जाती है ,इस प्रकार का समय कबतक चलेगा ,? इसका अंत भी है या नही ? मन्दिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे हर जगह जाकर अपनी पीडा के निवारण के लिये न जाने कितने तरह की प्रार्थना करते हैं ,भगवान से कितने तरह की रिश्वतखोरी की बात करते हैं .मनौती पूरा होने के ऐवज मे चढावे की प्रतिज्ञा करते हैं .लेकिन कोई कोई तो यहां तक कहते हैं कि काश ,बुरे समय की पूर्व जानकारी मुझे होती ,तो मै इस तरह की घटना घटने ही नही देता ..

    इस सम्बन्ध मे मुझे एक घटना याद आती है .एक दिन मेरे पास एक सज्जन आये .मै उनसे बिल्कुल अपरीचित था .वे अपनी कुंडली लेकर आये थे .वे उम्र के उस पडाव से तत्काल गुज़र रहे थे .जिस दिशा मे उनका ग्राफ जा रहा था ,किसी बडी घटना की वजह से उनका सब कुछ बर्बाद होनेवाला था .मैने कहा ,आवेश मे आकर आपने कुछ ऐसा कार्य किया है जिससे सम्भवत: आपका बहुत बडा नुकसान हो चुका है और उससे उबरने की भले ही कोशिश करें ,उबरना मुश्किल होगा .वह व्यक्ति रोने लगा .पूछा ,कोई उपाय है ,मैने कहा ,कोई उपाय नही ,कम से कम 24 वर्षों तक इस कष्ट से उबरना मुश्किल होगा .पुन: वह फूट-फूटकर रोने लगा .जाते वक़्त कहा ,काश तीन चार महीने पहले आपसे भेंट होती तो इस तरह का काम तैश मे आकर नही करता .वह व्यक्ति तीन-चार महीने पहले उसके खेत मे दखलअन्दाज़ी करनेवाले ,फसल काटनेवाले तीन चार व्यक्तियों को अपने बन्दूक से भून डाला था .

    कर्म करने का अधिकार सभी को मिला हुआ है ,किसी भी विवाद को सुलझाने के सौ तरीके होते हैं बुरा समय 24 वर्श का था ,समझौता किए गये किसी तरीके मे किसी न किसी प्रकार का कष्ट होता है ,लेकिन जिस तरीके को उस व्यक्ति ने अपनाया था ,उसका प्रतिफल तीव्रतर कष्ट के रूप मे उपस्थित होना ही था . गत्यात्मक ज्योतिष के हिसाब से खुद को समझकर तदनुरूप काम करके जो अच्छा होना है, उसको दुगुना चौगुना तक बढ़ा तथा जो बुरा होना है, उसको दुगुना चौगुना तक घटा सकते हैँ, ठीक उसी तरह जिस तरह किसी बीज के फसल को उचित देखभाल से!

    गत्यात्मक ग्राफ अपने आपमे बहुत तरह का सन्देश देता है .अपने जीवन यात्रा की सम्यक जानकारी चाहते हैं ,उनके लिये इस ग्राफ की संवेदनशीलता को समझना अनिवार्य होगा .इससे बहुत सारी गम्भीर घटनाओं को अपनी सूझ बूझ से परिमार्जित कर सकते हैं ,गम्भीरता के स्वरूप का रूपांतरण कर सकते हैं ,घटना की तीव्रता को कम कर सकते हैं .ग्राफ को समझना अन्धेरे से उजाले की ओर जाना है .गत्यात्मक ग्राफ की खोज हो गई है तो इस प्राकृतिक पूर्व सूचना का लाभ भी हमे अवश्य मिलेगा .अच्छे या बुरे समय को देखते हुए अपने सोंच विचार मे परिवर्तन करने की जरूरत है .....

    (गत्यात्मक ज्योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी के कलम से )

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    'स' से शुरू होनेवाले हिंदू लड़कों के नाम

     Hindu baby boy names starting with s


    Hindu baby boy names starting with s


    जानिए, आपके लिए कैसा रहेगा 2025 ?


    1. संकल्प (दृढ संकल्प) sankalp (Resolution)

    2. संकुल (पूर्ण) sankul (Completed)

    3. संकेत (इशारा) sanket (hint)

    4. संक्रम (आगे बढना) sankram (progressive)

    5. संख्यान (गिनती) sankhyan (Numeral)

    6. सारंग (रंगीन) saarang (Color)

    7. सारांश (निचोड) saaraansh (Summary)

    8. सार्थक (अर्थ वाला) saarthak (Meaningful)

    9. संग्रह (जमा करना) sangrah (accumulate)

    10. संचय (इकट्ठा करना) sanchay (accumulate)

    11. संचित (संचय किया हुआ) sanchit (accumulate)

    12. संज्ञात (जाना हुआ) sangyaat ( known)

    13. सन्देश (समाचार) sandesh (message)

    14. सन्दल (चन्दन) sandal (sandal)

    15. सन्दीप्त (प्रकाशित) sandeept (published)

    16. सम्पर्क (मेल) sampark (mail)

    17. सम्बल (सहारा) sambal (support)

    18. संवाद (चर्चा) samwad ((discussion)

    19. संस्कार (शुद्धि) sanskar (purification)

    20. सक्षम (समर्थवान) saksham (able)

    21. सगुण (गुणयुक्त) sagun (virtuous)

    22. सघन (घना) saghan (dense)

    23. सचित (ज्ञानयुक्त) sachit (knowledgable)

    24. सचेत (सावधान) sachet (careful)

    25. सचेष्ट (चेष्टायुक्त) sachesht (trier)

    26. सच्चित (सत और चित दोनो से युक्त ब्रम्हा) sachchit (true soul)

    27. सजल (जल से युक्त) sajal (containing water)

    28. सत्यांश (सत्य का अंश) satyansh (part of truth)

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      डायरी में लिखे गए कुछ कोट्स

       My diary quotes in Hindi

      गत्यात्मक ज्योतिष के जनक मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी की डायरी में लिखे गए कुछ कोट्स 

      My diary quotes in Hindi


      1. सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के नक्षत्र मंडल और पाउडर के कण की तरह बिखरे टिमटिमाते अनंत सूर्य देखने में स्थिर और अचल प्रतीत होते हैं, उसकी स्थिरता और अचलता के बावजूद उसके हर सूर्य तथा उसके सदस्यों में स्पंदन, थिरकन और तांडव के बीच एक लय होता है. अणु की आतंरिक बनावट इलेक्ट्रोन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन से है, अणु अपनी जगह स्थिर है लेकिन उसके सूक्ष्म विभाग में निरंतर स्पंदन है.
      2. बालपन चन्द्रमा का, विद्यार्थी जीवन बुध का, युवावस्था मंगल का, प्रारंभिक प्रौढ़ावस्था शुक्र का, प्रौढ़ावस्था सूर्य के अधीन होगा, प्रत्येक का काल 12 -12 वर्षों का होगा. इसके बाद का आधा जीवन बृहस्पति, शनि, युरेनस, नेप्च्यून, प्लूटो का होगा. इस सिद्धांत का प्रतिपादन मैंने 36 वर्ष की उम्र में किया. इसके बाद मेरे मन-मस्तिष्क में यह बात कौंधने लगी- सबका बचपन, किशोरावस्था,युवावस्था ................वृद्धावस्था एक जैसा क्यों नहीं होता?
      3. गांव मे एक बुजुर्ग के मुख से सुना –आदमी की दस दशायें होती हैं ,किसी की दशा पर हंसिये नही ,न जाने ग्रह कब किस दशा से किसको गुज़रने के लिये मज़बूर कर दे .संयोग से सौरमण्डल मे सूर्य को लेकर दस ग्रह या आखाशीय पिण्ड हैं .मै राहू केतु को कोई ग्रह नही मानता .
      4. जो होना है वह होगा ,फिर ग्राफ देखने से क्या फायदा ? इस प्रकार की सोंच यथास्थितिवाद का परिचायक है .अगर आदिकाल का मानव ऐसा ही सोंचता तो वहां से टस से मस नही होता हर काल के मानव ने हर समय प्राकृतिक नियमों को समझने की कोशिश की और हर जानकारी का उसने फायदा उठाया ,अपने जीवन को बेहतर बनाता चला गया .अगर इस तरह की बात नही होती तो आज हम इस वैज्ञानिक युग मे नही होते ,आदिकाल के मानव की तरह ही असभ्य होते .
      5. रास्ते में कोई मिले , फ़ोन पर बात करना शुरू करे, सबसे पहले हाल चाल पूछता है ,मतलब हालात कैसे हैं ? किस स्थिति मे हो ? कैसी चाल है ? तरह –तरह के उत्तर हो सकते हैं .सबकुछ ठीक है , हाल का मतलब मतलब स्थिति और चाल का मतलब गति - दोनो ठीक हैं .बहुत ठीक नही है , किसी तरह से चल रहा है , मतलब सामान्य गति से चल रहा है . कुछ भी ठीक नही चल रहा है , दस वर्ष पहले जहां था , वहीं हूं , यथास्थिति बनी हुई है या सबकुछ उल्टा चल रहा है ,मतलब आगे बढने की बजाय हम पीछे जा रहे हैं .
      6. इस तरह हालचाल का सीधा उत्तर मिला - तेज गति , सामान्य गति , यथास्थिति या उल्टी गति . संयोग से देखिये , सूर्य चन्द्रमा को छोडकर जितने भी ग्रह हैं , सभी की गतियां भी मूलत: चार प्रकार की हैं , मतलब हुआ , जैसी ग्रह की स्थिति वैसी आपकी गति . इसलिए जन्मकुंडली मे ग्रहों की स्थिति और गति दोनों को देख जाना चाहिए! यहीं से गत्यात्मक दशा पद्धति की उत्पत्ति होती है .
      7. मेरे बचपन का प्रतिनिधि चन्द्रमा कमजोर था, तो मेरी मनोवैज्ञानिक शक्ति के विकास क्रम में तरह तरह की मानसिक-शारीरिक कठिनाइयां आईं. इसके बाद बुध के समरूपगामी होने से विद्यार्थी जीवन में तीक्ष्ण बुद्धिवाला गणित और विज्ञान के गाम्भीर्य को समझने वाला मैं बन गया किन्तु मंगल की वक्रता ने फिर मुझे मायूस किया.
      8. वक्र ग्रह जातक से आत्म निरीक्षण कराता है, संवेदनशील, मानवता का पक्षधर, प्रकृति प्रेमी, ऐकांतिक और एक भक्त की तरह बनाता है. जिन भावों का स्वामी होता है उसके अस्तितत्व को बनाये रखने का मोह उत्पन्न करता है. मंगल के काल में पिताजी और भाइयों से बढ़कर मेरे लिए कोई नहीं था. मुझे अपने अच्छे-बुरे की कोई चिंता नहीं थी.
      9. शुक्र का काल आते ही 1975 से 1981 के बीच हर प्रकार के उपलब्धियों से संयुक्त कर दिया. आवश्यक संसाधन स्वयं आकर उपस्थित हो गए. शुक्र ने मुझे पूर्ण आश्वस्त कर दिया कि मनुष्य के सोच-विचार, परिस्थितियां, निर्णय-शक्ति, कार्यक्रम और कार्य करने की क्षमता में भी निरंतर एक थिरकन या लयात्मक परिवर्तन होता है जो ग्रहों की गति के सापेक्ष अच्छा या बुरा होता है.
      10. मिथुन राशि पंचम भाव में समरूपगामी बुध की राशि में समरूपगामी सूर्य तथा शीघ्र गति का शुक्र स्थित है. शुक्र ने भाग्य, संयोग की ताकत से बुद्धि बल का सहारा लेते हुए ज्योतिष विद्या को ज्योतिष विज्ञान बना दिया, सूर्य ने मुझे बहुत अच्छी गृहस्थी दी जो हर तरह से मेरे चिंतन-मनन के अनुकूल था.
      11. मुझे संतुष्टि इस बात की है कि मैंने जीवन के अधिकांश क्षणों का सदुपयोग करके ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय को वैज्ञानिक आधार देने में सफलता पाई है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में यह लोगों के बीच ग्राह्य होगा और इसे समुचित मान्यता मिलेगी।
      12. हम जिस सौर मंडल के अंतर्गत हैं उसके प्रत्येक सदस्य से हमारा गतिज सम्बन्ध बन जाता है और ये समस्त अवयव हमारे विकास क्रम में शैशव अवस्था से वृद्धावस्था तक अपनी गतियों के अनुसार विभिन्न परिस्थितियों का निर्माण करते चले जाते हैं. ग्रहों की मूल स्थिति जो हमारे जन्म काल में होती है, वही हमारी प्रकृति होती है और जीवन के शेष काल में उसकी विभिन्न गतियां जो हमारे सोच विचार को प्रभावित करती है वह हमारी प्रवृत्ति होती है.

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      कुंडली के साथ गत्यात्मक ग्राफ की अनिवार्यता क्यों?

       कुंडली के साथ गत्यात्मक ग्राफ की अनिवार्यता क्यों?


      श्री विद्या सागर महथा जी का जवाब -- 'परंपरागत ज्योतिष' में किसी व्यक्ति के जन्मकाल के समय ग्रहों की आकाशीय स्थिति के अनुसार उसके 12 भावों की आम व्याख्या या प्रारम्भिक परिचर्चा की जाती है। चूंकि इससे फलाफल के काल की स्पष्टता नहीं हो पाती अतः बुद्धिजीवी वर्ग या वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों की नजर में इस विषय की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहता है।

      किसी भी विषय का आधार सही हो तो  उसके विकास की क्रमिक प्रक्रिया इसे परिशोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। बुद्धिजीवी वर्ग के प्रश्नों के समुचित उत्तर के लिए कुंडली के साथ गत्यात्मक पद्धति पर आधारित दो प्रकार के ग्राफ जीवन सापेक्ष उनके अनुभव का तर्कसम्मत सहसंबंध समझ पाने का मौके देते हैैं। हर व्यक्ति के जीवन में सफलता और संघर्ष के प्रायः अलग अलग काल होते हैं। हजारों जन्म विवरण पर प्रयोग करने के बाद गत्यात्मक सिद्धांत आधारित ग्राफ किसी भी व्यक्ति के जीवन यात्रा एवं अलग - अलग काल में होने वाले उतार चढ़ाव को दर्शाने में सक्षम साबित हुआ है।



       निदृष्ट संख्या के अभाव में ग्राफ की कल्पना कभी नहीं  की जा सकती, ग्रहों की परिमाणात्मक गतिज और स्थैतिक ऊर्जा ग्राफ ही इस परिकल्पना का आधार है।  किसी भी जातक की ऊर्जा का मूल उसी में समाहित होता है जो व्यक्ति के शरीर में ग्रन्थियों के रूप में स्थित होता है। किसी भी शरीर के विकास क्रम के अनुसार कोई बच्चा पहले बाल्यकाल फिर किशोरावस्था, युवावस्था, प्रारम्भिक प्रौढ़ावस्था, प्रौढ़ावस्था, प्रारम्भिक वृद्धावस्था, वृद्धावस्था और अतिवृद्धावस्था के कई स्टेज से गुजरता है। ग्रहों की विशेषताओं के अनुसार कब किस ग्रह का काल आयेगा, इसकी खोज मैंने सन् 1975 में ही कर ली थी और इससे संबंधित एक लेख जयपुर से निकलने वाली ज्योतिष पत्रिका 'ज्योतिष मार्तण्ड' के जुलाई 1975 के अंक में प्रकाशित किया गया था।

      हर ग्रह के काल के मध्य में उस ग्रह की गत्यात्मक शक्ति का परिमाण गत्यात्मक ग्राफ का मूल है जो किसी के भी जीवन यात्रा के उतार चढ़ाव को चित्रित करने में सक्षम है। केवल जन्मकुंडली किसी के जीवन की सटीक व्याख्या नहीं कर सकती जबतक ग्रहों की शक्ति का आकलन नहीं किया जा सके। अतः सिर्फ कुंडली बनाने के बजाय गत्यात्मक ग्राफ संयुक्त कुंडली बनवाने की आवश्यकता है जिससे लोगों को उनके जीवन के उतार/चढ़ाव और अनुकूल/प्रतिकूल परिस्थितियों की सटीक जानकारी मिल सके। बाल्यकाल से जीवन के अंतिम क्षणों तक के काल की नैसर्गिक यात्रा के आपके व्यक्तिगत अनुभव को गत्यात्मक ज्योतिष ग्राफ के द्वारा  यथावत महसूस करने का मौका मिलेगा। 

      गत्यात्मक ज्योतिष में काल विभाजन का प्रारम्भ क्रमशः चन्दमा, बुध, मंगल, शुक्र, सूर्य, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेप्च्यून तथा प्लूटो को  मान लिया गया है। प्रत्येक ग्रह के काल विभाजन का मान 12 वर्ष का है। अबतक लगभग एक लाख ग्राफ बन चुके हैं और आश्चर्यजनक रूप से सार्थक परिणाम देखने को मिला है। अतः ज्योतिष प्रेमियों के लिए गत्यात्मक ग्राफ प्राप्त करना आज की आवश्यकता है। सभी ग्रहों या आकाशीय पिंडों की गत्यात्मक और स्थैतिक ऊर्जा निकालने का सूत्र पिंड- मात्रा निरपेक्ष केवल ग्रह और सूर्य के द्वारा पृथ्वी पर बनने वाला कोण होता है। स्मरण रहे ग्रह दशा कोण पर ही गति या आकाशीय पिंडों की शक्ति परिलक्षित होती है। अपवाद के रूप में सांख्यिकीय डेविएशन की चर्चा की जाए तो स्टैंडर्ड डेविएशन लगभग नगण्य है।

      नई खोज पर आधारित गत्यात्मक ज्योतिष से जीवन के उतार/चढ़ाव और अनुकूल/प्रतिकूल परिस्थितियों का गत्यात्मक ग्राफ प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति गत्यात्मक ज्योतिष के विशेषज्ञ से नीचे दिये गए फोन पर सम्पर्क कर अपना गत्यात्मक ग्राफ बनवा सकते हैं।

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