2022 में शनि के गोचर का प्रभाव

Saturn transit 2022-2023 predictions

2022-2023 में शनि की चाल का जनसामान्य पर प्रभाव

फलित ज्‍योतिष के ग्रंथों के अनुसार शनि को भयावह ग्रह माना जाता है , जबकि ऐसी कोई बात नहीं है । 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार अन्य ग्रहों की तरह ही शनि भी तबतक जातकों को सुख नहीं देता , जबतक इसकी गत्यात्मक शक्ति अच्छी नहीं हो जाती है।  इसी प्रकार शनि तबतक आपको परेशान नहीं करता , जबतक उसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति कम नहीं हो जाती है। गत्‍यात्‍मक शक्ति कम या अधिक हो जाने पर जातक को शनि के कारण उससे सम्बंधित भावों का सुख या कष्ट मिल जाता है। मैं 2022-23 की शनि की चाल का पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या कर रही हूँ। 16 मई 2022 को शनि सूर्य के साथ 90 डिग्री की कोणात्मक दूरी बनाएगा इस समय शनि और पृथ्वी की दुरी औसत के आस-पास होगी ऐसे समय में शनि काफी क्रियाशील होता है और जनसामान्य को शनि से सम्बंधित कार्यों में उलझने के लिए बाध्य करता है।

 

Saturn transit 2022 predictions

यूं तो कुम्भ राशि में शनि की स्थिति लोगों के सुख और दुख दोनो का कारण बनी हुई होगी , पर 5 जून तक दिन दिन इसकी स्‍थैतिक शक्ति में हो रही वृद्धि कुछ लोगों की मन:स्थिति को सुखद बनाएगी , तो कुछ तनाव झेलने को भी विवश होंगे 2022 मई के मध्य से ही लोग शनि के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे होंगे। चूंकि शनि मकर और कुम्भ राशि का स्वामी है और इसकी स्थिति अभी कुम्भ में है , इसलिए कुम्भ , मकर और कुम्भ राशि से संबंधित कार्यों में ही सुख या दुख की अधिक संभावना रहेगी। 72 से 84 वर्ष की उम्र के अतिवृद्ध , जिनका जन्मकालीन शनि कमजोर है , यानि 1937, 1938 में अगस्त से नवंबर , 1939 , 1940, 1940  में सितम्बर से दिसंबर , 1941 , 1942 में अक्टूबर से दिसंबर , 1943 , 1944  में जनवरी, नवंबर और दिसंबर, 1945 , 1946, 1947  में जनवरी, फरवरी, दिसंबर , 1948 , 1949 जनवरी से मार्च जन्म लेने वालों को शनि की इस स्थिति से तकलीफ होगी। उल्लिखित समय से दूर जन्म लेने वाले पर शनि का शुभ प्रभाव पड़ेगा।

शनि की इस स्थिति के कारण अगस्त 1949 से अगस्त 1951 , सितम्बर 1978 से सितम्बर 1980 , अक्टूबर 2007 से अगस्त 2010  जन्‍म लेनेवाले उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे शनि के कारण 16 मई 2022 से शुरू हुई कार्यक्रमों में बाधा की शुरुआत 5 जून से  होगी। 14 अगस्त तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। 23 अक्टूबर  के बाद  स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और 11 नवंबर 2022 के आसपास अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। शनि के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी। इस तरह 6 महीने तक किसी खास संदर्भ , जिसकी चर्चा लेख के अंतिम अनुच्छेद में की गयी है, की सफलता से इनका उत्‍साह बढा रहेगा।

किन्तु कुम्भ राशि में शनि की इस विशेष स्थिति से अगस्त 1944  से अगस्त 1946 , जून 1974 से जून 1976 , जुलाई 2003 से अगस्त 2005  के मध्य जन्‍म लेनेवाले लोग निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। 11 नवंबर 2022 के आसपास कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पड सकता है। 14 अगस्त के आसपास उनके समक्ष किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। 23 अक्टूबर के बाद निराशाजनक वातावरण में ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और 11 नवंबर 2022  में अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। शनि के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को कष्‍ट पहुंचेगा। इस तरह  6 महीने तक  किसी खास संदर्भ , जिसकी चर्चा लेख के अंतिम अनुच्छेद में की गयी है, की परेशानी बनी रह सकती है।

इसके अलावे गोचर के इस शनि के कारण कन्या राशि वाले पर शुभ प्रभाव तथा कर्क राशि वाले बुरा प्रभाव महसूस करेंगे। काफी हद तक कुम्भ राशि वाले पर भी शनि के इस चाल का अच्‍छा प्रभाव पडेगा। कुछ हद तक सितम्बर-अक्टूबर माह में जन्‍म लेनेवालों के लिए शनि की यह स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली होगी , जबकि जुलाई-अगस्त  माह में जन्‍म लेनेवाले इसके बुरे प्रभाव से युक्‍त हो सकते हैं। यदि ऊपर मौजूद तिथियों या राशि कोई जातक एक साथ शनि के अच्‍छे और बुरे दोनो प्रभाव में आते हों , तो उनपर शनि का मिश्रित प्रभाव पडेगा , यानि कोई कठिनाई आएगी तो उसके समाधान के रास्‍ते भी दिखेंगे।

शनि के इस खास चाल के कारण ऊपर मौजूद तिथियों या राशि में जन्‍म लेनेवाले विभिन्‍न लग्‍नवाले भिन्‍न भिनन प्रकार के सुख या दुख से खुद को संयुक्‍त पाएंगे। मेष लग्‍नवाले कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति , लाभ, लक्ष्य, मंजिल के मामले से संबंधित, वृष लग्‍नवाले भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप, कैरियर, पिता , सामाजिक स्थिति, राजनीति  के मामले से संबंधित , मिथुन लग्‍नवाले रूटीन, जीवन-शैली, भाग्य, आध्यात्म, धर्म से सम्बंधित क्रियाकलाप से सम्बंधित मामलों , कर्क लग्‍नवाले प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी, रूटीन, जीवन-शैली से संबंधित , सिंह लग्‍नवाले रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव, प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी  से सम्बंधित , कन्या लग्‍नवाले पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी, रोग, ऋण और शत्रु जैसे झंझटों से जूझने की शक्ति, प्रभाव से सम्बंधित , तुला लग्‍नवाले कन्या माता , संपत्ति, वाहन, सुख प्रदान करने वाली वस्तु, पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी,आदि मामले , वृश्चिक लग्‍नवाले भाई-बहन, सहपाठी-सहकर्मी, माता , संपत्ति, वाहन, सुख प्रदान करने वाली वस्तु आदि के मामले , धनु लग्‍नवाले भाई-बहन, सहपाठी-सहकर्मी, धन-कोष , साख , परिवार के मामले , मकर लग्‍नवाले स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, धन-कोष , साख , परिवार आदि मामलेकुम्भ लग्नवाले लाभ, लक्ष्य, मंजिल, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध , स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्धके मामले , मीन लग्‍नवाले लाभ, लक्ष्य, मंजिल, खर्च-शक्ति, बाह्य-सम्बन्ध  की मजबूती या कमजोरी से खुद को सुखी या दुखी महसूस करेंगे।




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शोध से तैयार की गयी कुंडली

 

Astrology in Hindi kundali

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विडंबना ही है कि जो निरीक्षण, परीक्षण के बाद मिले तथ्य को जांचकर किसी बात को विज्ञान मानते है, वही बिना निरीक्षण, परीक्षण और तथ्य को जांचे बिना ज्योतिष को अंधविश्वास कहते हैं! किसी ने कहा कि विज्ञान के जिस नियम को हम समझ नहीं पाते उसे चमत्कार कहते हैं, इसमें एक पंक्ति मैं जोडना चाहती हूं कि विज्ञान के जिस नियम को हम नहीं समझ पाते उसे अंधविश्वास भी कहते हैं।

इस तरह अंधविश्‍वास का मूल कारण अज्ञानता है , जिन प्रश्‍नों का उत्‍तर विज्ञान नहीं ढूंढ पाया है , उसका जबाब ढूंढने की जनसामान्‍य की जिज्ञासा स्‍वाभाविक है और उसी का फायदा धर्म के नाम पर समाज के कुछ लोग उठाते आ रहे हैं। ज्योतिष अन्धविश्वास नहीं है, जन्मकुंडली तो आप पूरी दुनिया में कहीं से बनवा सकते हैं, पर हमारे यहाँ जो खासियत है , वो पुरे जीवन के उतार-चढ़ाव का ग्राफ और विभिन्न मामलों के सुख -दुःख का चार्ट है, जिससे स्पष्टतः समझ में आता है की आपका समय किस वक्त कैसा रहेगा।

Horoscope by date of birth in Hindi

जन्मसमय न होने की स्थिति में सिर्फ जन्मतिथि से ही जन्मकुंडली बनायीं और भविष्य का आकलन किया जा सकता है।  उसके लिए 'गत्यात्मक ज्योतिष' ने एक खास पद्धति विक्सित की है , जिसके बारे में जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।  

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पिछले लेख में मैने लोगों को जानकारी दी थी कि जन्‍म कालीन ग्रहों का प्रभाव मनुष्‍य के जीवन के विभिन्‍न संदर्भों के सुख दुख , उसकी जीवनशैली , उसके जीवन के उतार चढाव पर पडता है और विभिन्‍न प्रकार के ग्राफों के सहारे इसे स्‍पष्‍ट बताया जा सकता है। इसी के आधार पर हम किसी को परिस्थिति के हिसाब से चलने की सलाह देते हैं । सॉफ्टवेयर को पूरा अपडेट कर दिया गया है , ताकि छोटे बच्‍चों की जन्‍मकुंडली और ग्राफ भी खींचे जा सके और उनके हमारे सॉफ्टवेयर से लोगों की जन्‍म कुंडली बनने काबारे में भी अभिभावकों को जानकारी दी जा सके। हमारे सॉफ्टवेयर से निकलने वाली कुंडली का एक नमूना , जिसमें

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ग्राफ और समययुक्‍त भविष्‍यवाणियों को मिलाकर कुल 16 पृष्‍ठों का समावेश है , इस पोस्‍ट में पेश है कुछ पन्ने ....


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कुंडली के इस पेज में आप सभी ग्रहों की स्थिति के साथ के साथ ही प्रतिशत में गत्यात्मक शक्ति और स्थैतिक शक्ति की चर्चा हुई है।  जिन ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति अधिक होगी, जीवन में उन मामलों से सम्बंधित आराम और सुख प्राप्त होगा।  जिन ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति कम होगी, जीवन में उन मामलों से सम्बंधित कष्ट और दुःख मिलेंगे। ग्रहों की स्थितिक शक्ति अधिक होने जीवन में उन मामलों का स्तर बना होता है।

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यह ग्राफ ग्रहों की उन्ही गत्यात्मक शक्तियों के आधार पर खिंचा जाता है, जो पहले पन्ने पर लिखे होते हैं।  इस ग्राफ को देखकर आप समझ पाएंगे कि गत्यात्मक शक्ति से ग्रहों के कमजोर और मजबूत होने का प्रभाव पुरे जीवन में किस कालखंड में अधिक आएगा। 


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यह ग्राफ ग्रहों की उन्ही स्थैतिक शक्तियों के आधार पर खिंचा जाता है, जो पहले पन्ने पर लिखे होते हैं।  इस ग्राफ को देखकर भी आप समझ पाएंगे कि स्थैतिक शक्ति से ग्रहों के कमजोर और मजबूत होने का प्रभाव पुरे जीवन में किस कालखंड में अधिक आएगा। 


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यह पाई चार्ट भी यह ग्राफ ग्रहों की उन्ही गत्यात्मक शक्तियों के आधार पर बनाया जाता है, जो पहले पन्ने पर लिखे होते हैं।  इस चार्ट से जीवन के विभिन्न मामलों के सुख दुःख को आप समझ पाते हैं। 

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जीवन के सात कालखंड को भी पूर्वार्ध और उत्तरार्ध लिखकर छह-छह वर्ष के १४ भाग में बांटा गया है।  इसी प्रकार कुंडली के १२ भावों में समेटे हुए जीवन के १२ मामलों के सुख दुःख को इस टेबल में समझा दिया गया है। जीवन के किन छह वर्षों में किन मामलों के सुख और किन मामलों के दुःख आएंगे, इसका इसमें स्पष्तः पता चल रहा है। ज्योतिष के सारे वस्तुनिष्ठ सवालों के जायब देने में ये ४ पन्ने पूर्ण तौर पर सक्षम हैं। बाकी विषयनिष्ठ चर्चा १०-१२ पन्नो में की जाती है।  वैज्ञानिक ढंग से बननेवाली इस कुण्डली के जैसा कांसेप्ट आज विश्व में कहीं नहीं मिलेगा, जो हमारे नियमित ५० साल के रिसर्च का परिणाम है।  कुंडली के साथ आपको कब क्या करना चाहिए, यह भी बताया गया है।  

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अंग्रेजी में जन्मकुंडली बनवाने पर ग्राफ  के सारे पन्ने  मिलेंगे।  भविष्यफल के पन्ने कुछ कम मिल सकते हैं। 

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आप सिर्फ लड़केवालों, लड़कीवालों को भेजने के लिए बनाई जानेवाली कुंडली या कुंडली मैचिंग के लिए भी संपर्क कर सकते हैं। 

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जन्म लेने वाले बच्चों के लिए छोटी सी कुण्डली बनती  है, बच्चे के 5 साल का होने पर हमारे द्वारा वैज्ञानिक शोध से तैयार करवायी  जाने वाली कुंडली विस्तार से बनवाएं। 

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समाज में जबतक ज्‍योतिष को विज्ञान के रूप में समझने की कोशिश नहीं की जाएगी , ज्‍योतिष से कोई लाभ प्राप्‍त करना नामुमकिन है। पर यह विडंबना ही है कि आजतक ज्‍योतिष को चमत्‍कार समझा जाता रहा है।

'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर 4 तरह के ग्राफ, चार्ट सहित सटीक समय-युक्त भविष्यवाणियों के 15 पन्नों की जन्मकुण्डली को प्राप्त करने के लिए संपर्क करें - gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

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    ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान (ओशो) ---- 2

    Astrology in hindi meaning

    बहुत विवादास्‍पद है ज्‍योतिष .. कोई इसे विज्ञान मानते हैं .. तो कोई धर्म से जोडकर देखते हैं .. कोई अविकसित मानते हैं .. तो कोई पूरा अंधविश्‍वास .. ओशों के शब्‍दों में जानिए ( jyotish vigyan osho ).. आखिर क्‍या है ज्‍योतिष ??
    पहला भाग पढ़ने के लिए यहाँ  क्लिक करें ----- 

    ज्‍योतिष के बारे में लिखे गए ओशो के आलेख में से कुछ महत्‍वपूर्ण पंक्तियां ......

    ऋग्वेद में, पंचानबे हजार वर्ष पूर्व ग्रह-नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी, उसका उल्लेख है। इसी आधार परलोकमान्य तिलक ने यह तय किया था कि ( jyotish vigyan osho )ज्योतिष नब्बे हजार वर्ष से ज्यादा पुराने तो निश्चित ही होनेचाहिए।

    जीसस से छह हजार वर्ष पहले सुमेरियंस की यह धारणा कि पृथ्वी पर जो भी बीमारी पैदा होती है, जोभी महामारी पैदा होती है, वह सब नक्षत्रों से संबंधित है। अब तो इसके लिए वैज्ञानिक आधार मिल गएहैं।

    वैवाहिक मामलों पर ये लेख भी आपको पसंद आएंगे --- 

     Osho in Hindi Quotes on Jyotish

    जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों के बीच जो संगीत की व्यवस्था होती है वह उस मनुष्य के प्राथमिक, सरलतम, संवेदनशील चित्त पर अंकित हो जाती है। वही उसे जीवन भर स्वस्थ और अस्वस्थ करती है।

    कास्मिक केमिस्ट्री कहती है कि पूरा ब्रह्मांड एक शरीर है। उसमें कोई भी चीज अलग-अलग नहीं है, सब संयुक्त है। इसलिए कोई तारा कितनी ही दूर क्यों न हो, वह भी जब बदलता है तो हमारे हृदय की गति को बदल जाता है।

    ज्योतिष कोई नया विज्ञान नहीं है जिसे विकसित होना है, बल्कि कोई विज्ञान है जो पूरी तरह विकसित हुआ था और फिर जिस सभ्यता ने उसे विकसित किया वह खो गई। और सभ्यताएं रोज आती हैं और खो जाती हैं। फिर उनके द्वारा विकसित चीजें भी अपने मौलिक आधार खो देती हैं, सूत्र भूल जाते हैं, उनकी आधारशिलाएं खो जाती हैं।

     Jyotish Osho quotes in Hindi

    हम जानते हैं कि चांद से समुद्र प्रभावित होता है। लेकिन हमें खयाल नहीं है कि समुद्र में पानी और नमक का जो अनुपात है वही आदमी के शरीर में पानी और नमक का अनुपात है--दि सेम प्रपोर्शन। और आदमी के शरीर में पैंसठ प्रतिशत पानी है; और नमक और पानी का वही अनुपात है जो अरब की खाड़ी में है। अगर समुद्र का पानी प्रभावित होता है चांद से तो आदमी के शरीर के भीतर का पानी क्यों प्रभावित नहीं होगा?

    अमावस के दिन दुनिया में सबसे कम लोग पागल होते हैं, पूर्णिमा के दिन सर्वाधिक। चांद के बढ़ने के साथ अनुपात पागलों का बढ़ना शुरू होता है। पूर्णिमा के दिन पागलखानों में सर्वाधिक लोग प्रवेश करते हैं और अमावस के दिन पागलखानों से सर्वाधिक लोग बाहर जाते हैं। अब तो इसके स्टेटिसटिक्स उपलब्ध हैं।
     
    Jyotish Vigyan Osho


    आदमी ने अभी जो-जो व्यवस्था की है वह बचकानी मालूम पड़ती है। ये पक्षी एक-डेढ़ महीने, दो महीने पहले पता करते हैं कि अब बर्फ कब गिरेगी। और हजारों प्रयोग करके देख लिया गया है कि जिस दिन पक्षी उड़ते हैं, हर पक्षी की जाति का निश्चित दिन है। हर वर्ष बदल जाता है वह निश्चित दिन, क्योंकि बर्फ का कोई ठिकाना नहीं है। लेकिन हर पक्षी का तय है कि वह बर्फ गिरने के एक महीने पहले उड़ेगा, तो हर वर्ष वह एक महीने पहले उड़ता है।

     Osho Quotation in Hindi in Astrology


    जापान में एक चिड़िया होती है जो भूकंप आने के चौबीस घंटे पहले गांव खाली कर देती है। साधारण गांव की चिड़िया है। उस गांव के लोग समझ जाते हैं कि भाग जाओ। चौबीस घंटे का वक्त है, वह चिड़िया हट
    गई है, गांव में दिखाई नहीं पड़ती। इस चिड़िया को कैसे पता चलता होगा?

    मनुष्य अकेला प्राणी है जगत में जिसके पास बहुत सी चीजें हैं जो उसने बुद्धिमानी में खो दी हैं; और बहुत सी चीजें जो उसके पास नहीं थीं उसने बुद्धिमानी में उनको पैदा करके खतरा मोल ले लिया है। जो है उसे खो दिया है, जो नहीं है उसे बना लिया है।


    असल में वही चीज अंधविश्वास मालूम पड़ने लगती है जिसके पीछे हम वैज्ञानिक कारण बताने में असमर्थ हो जाएं। वैसे ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक है। और विज्ञान का अर्थ ही होता है कि कॉज और एफेक्ट के बीच, कार्य और कारण के बीच संबंध की तलाश!ज्योतिष कहता यही है कि इस जगत में जो भी घटित होता है उसके कारण हैं। हमें ज्ञात न हों, यह हो सकता है। ज्योतिष यह कहता है कि भविष्य जो भी होगा वह अतीत से विच्छिन्न नहीं हो सकता, उससे जुड़ा हुआ होगा। आप कल जो भी होंगे वह आज का ही जोड़ होगा। आज तक आप जो हैं वह बीते हुए कल का जोड़ है। ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक चिंतन है।

    Jyotish Quotes by Osho in Hindi


    भविष्य एकदम अनिश्चित नहीं है। हमारा ज्ञान अनिश्चित है। हमारा अज्ञान भारी है। भविष्य में हमें कुछ दिखाई नहीं पड़ता। हम अंधे हैं। भविष्य का हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता। नहीं दिखाई पड़ता है इसलिए हम कहते हैं कि निश्चित नहीं है। लेकिन भविष्य में दिखाई पड़ने लगे...और ज्योतिष भविष्य में देखने की प्रक्रिया है!

    पर विज्ञान बहुत धीमी गति से चलता है। और ठीक है, वैज्ञानिक होने के लिए उतनी धीमी गति ठीक है। जब तक तथ्य पूरी तरह सिद्ध न हो जाएं तब तक इंच भी आगे सरकना उचित नहीं है। प्रोफेट्स, पैगंबर तो छलांगें भर लेते हैं। वे हजारों-लाखों साल बाद जो तय होगी, उसको कह देते हैं। विज्ञान तो एक-एक इंच सरकता है। और प्राइमरी स्कूल के बच्चे के दिमाग में जो बात आ सके, वही बात! वह बात नहीं जो कि प्रोफेट्स और विज़नरीज़, सपने देखने वाले लोग जो दूर-दूर की चीजें देख लेते हैं उनकी समझ में आ सके, उतनी बात। नहीं, उससे विज्ञान का उतना प्रयोजन नहीं है।

    उसकेबाद स्विस पैरासेलीसस नाम का एक चिकित्सक, उसने एक बहुत अनूठी मान्यता स्थापित की। औरवह मान्यता आज नहीं कल सारे मेडिकल साइंस को बदलने वाली सिद्ध होगी। अब तक उस मान्यतापर बहुत जोर नहीं दिया जा सका, क्योंकि ज्योतिष तिरस्कृत विषय है--सर्वाधिक पुराना, लेकिनसर्वाधिक तिरस्कृत, यद्यपि सर्वाधिक मान्य भी।

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      Most accurate daily horoscope

      Tomorrow Astrology in Hindi

      When you click on the annual forecast link of our app, you will see predictions concerned with wealth, credit, family, etc. on the 2nd number in the dropdown. ( money horoscope free )After taking a subscription, you will get various types of written sentences regarding your wealth, credit, family giving several time intervals for the whole two years:------


      1. You are likely to see a monetary gain leading to a position of overall financial strength.
      2. Your financial position will seem weak, and any effort to bolster it will be in vain.


      Both the above forecasts give information about some good to normal and some bad to the normal situation, it is not a big matter, unless your natal planets representing wealth, credit, the family are weak and your case is not sensitive.

      Tomorrow Astrology in Hindi

      But when such predictions are written as:-------

      1. You will be focused on earning more money and will seek means and company to enable riches in life. Due to the effects of auspicious planets, there may arise a situation of success and pleasure related to these aspects. To avail of such opportunity, your mind likely to be concentrated. Your efforts are likely to be fruitful in such away.
      2. You will find and seek to resolve money-related issues. You will have a hard time dealing with your family though. Due to some inauspicious planets' adverse situation or pressure related to these aspects likely to let to over-concentration to cop up the same need to take precautions, Consultation may be required from us to understand it clearly during this period. 


      Both such forecasts are indicative of very good and very bad conditions. Normally, we also call it being someone's in form and someone's not in form. Therefore additional preparation is needed before such predictions.

      Sometimes such things will be written in the general forecast as:------

      1. Due to the effect of some active planets, responsibilities concerning these matters likely to increase. These things should be either strong automatically or circumstances are likely to be created in such a way to make a program for strengthening or changing in these matters.


      This forecast seems to be quite normal, but this time interval also gives big changes. But it will be positive or negative, it is difficult for the app to tell it in the present time, so it is left out.

      Sometimes 1 sentence has also been added with negative of wealth, credit, family, which increases the intensity of forecast as:-------

      1. Due to the effects of some inauspicious planets, there may occur some disturbances like work not progressing properly. But thereafter circumstances should to be favorable.

      But disturbance of any matter in such sentences will be very minor as:-------

      1. Due to the effects of some inauspicious planets, there may occur some disturbances like work not progressing properly. But thereafter circumstances should be favorable.


      If there are such sentences at any time as:------

      1. Due to the effects of some inauspicious planets, there may be existing some weakness concerning these matters. Some complications may increase if any big decisive step is taken at such a sensitive time.

      In these cases unless necessary, do not start any work.

      At some point such sentences might be seen:-----

      1. Due to the effects of inauspicious planets, these matters may make your environment negative related to any matter and cause some bad psychological effects by creating weakness or failure.


      In addition, such predictions may contain such sentences at any time as:------
      1. Due to the effect of some auspicious planet, there should be positive effect related any matter because of their pleasure and success and there must be its good psychological effect.


      A similar discussion will be held tomorrow regarding siblings, colleagues, peers matters.



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      अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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        किशोरावस्था का प्रतीक ग्रह : बुध

        किशोरावस्था का प्रतीक ग्रह : बुध

        Mercury planet astrology hindi

        बुध सौरमंडल का एक प्रमुख ग्रह है और मानव जीवन को प्रभावित करने में इसका बहुत बड़ा हाथ होता है। चंद्रमा के पश्चात यह पृथ्वी से निकटतम ग्रह है। सौरमंडल में बुध की स्थिति पृथ्वी और सूर्य के मध्य में है, इसलिए किसी भी जन्म कुंडली में बुध सूर्य के साथ साथ ही होता है। यह सूर्य से अधिकतम 24 डिग्री से 27 डिग्री की दूरी पर ही रह सकता है। बुध का प्रभाव मनुष्य पर 12 वर्ष की उम्र के बाद ही देखा जाता है। 12 वर्ष से 24 वर्ष तक का समय मनुष्य की किशोरावस्था का होता है। इस उम्र में मनुष्य पर बुध के पड़ने वाले प्रभाव को नहीं नकारा जा सकता।

        बुध की शक्ति का आकलन हम उसकी गति और पृथ्वी से उसकी दूरी के आधार पर आसानी से कर सकते हैं। पृथ्वी को स्थिर मानते हुए पृथ्वी के सापेक्ष बुध ग्रह की गति में कमी बेसी होती रहती है। यही बुध की शक्ति का निर्धारण करती है। बुध की गति यदि प्रतिदिन 2 डिग्री के आसपास हो और सूर्य से उसकी कोणात्मक दूरी जीरो डिग्री हो तो बुध पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी यानी लगभग 21 करोड किलोमीटर पर स्थित होता है। इस समय उसकी गत्यात्मक शक्ति सर्वाधिक होती है। यदि बुध की गति वक्र हो और सूर्य से उसकी कोणात्मक दूरी 0 डिग्री हो तो बुध पृथ्वी से न्यूनतम दूरी यानी लगभग 9 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित होता है। इस समय इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य होती है। यदि बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री के लगभग हो और सूर्य से उसकी कोणात्मक दूरी 27 डिग्री लगभग हो तो बुद्ध पृथ्वी से औसत दूरी पर यानि लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर होता है। इस समय इसकी गत्यात्मक शक्ति सामान्य होती है।

        बुध ग्रह विद्या, विवेक, बुद्धि आदि गुणों का ग्रह माना जाता है। इसलिए जिन जातकों का बुध मजबूत होता है, वह उपर्युक्त गुणों से युक्त माने जाते हैं। विलोमतः जिन जातकों का बुध कमजोर होता है, उसमें उपर्युक्त गुणों का अभाव पाया जाता है। जिन जातकों का बुध मजबूत होता है, वे किशोरावस्था यानी 12 से 24 वर्ष की उम्र तक भरपूर सुख सुविधा और लाभ प्राप्त करते हैं। वे मनमौजी तथा लापरवाह प्रभाव के होते हैं, उच्छृंखल वातावरण में पलते हैं, हाजिर जवाब होते हैं तथा किसी प्रकार की चिंता उनके मन में नहीं होती। वे अनायास सफलता प्राप्त करते हैं तथा १८वा वर्ष उनके लिए विशेष सुख-सफलता देने वाला होता है। 

        जिन जातकों का बुध सामान्य होता है, वे अपनी किशोरावस्था में बहुत मेहनती होते हैं, मन लगाकर पढ़ाई करते हैं, अध्ययन मन में गंभीरता रखते हैं और मेहनत पर ही विश्वास करते हैं। जिन जातकों का बुध कमजोर होता है अपने वातावरण में सुख और सुविधा की कमी पाते हैं, मन लगाकर पढ़ने के बावजूद वे अपने परीक्षा के परिणाम में कमी पाते हैं, जो उनकी मनः स्थिति को प्रभावित करती है। वे पराधीन व्यवस्था में किसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए दूसरों का मुंह जोहने को विवश रहते हैं, विशेषकर 18वा वर्ष उन्हें विशेष तनाव और कष्ट देने वाला होता है। 18 वर्ष की उम्र के पश्चात ही इनमें संघर्ष करने की क्षमता आती है।

        यदि बुध मजबूत हो और मिथुन या कन्या राशि में अधिकांश ग्रह कमजोर हो तो जातक अपनी किशोरावस्था में अत्यधिक रुकावटें प्राप्त करता है। कई ओर उनका ध्यान बंटा हुआ होता है और वह बहुआयामी ज्ञान प्राप्त करता है। यदि बुध कमजोर हो तो मिथुन और कन्या राशि में अधिकांश मजबूत स्थिति में हो तो जातक खराब परिस्थिति में भी अनेक प्रकार का प्रोत्साहन प्राप्त करता है, जिससे उसके आत्मबल में वृद्धि होती है। ऐसे बच्चे अनेक प्रकार के अनुभव रखते हैं तथा कम उम्र के बावजूद अनुभवी होते हैं।

        बुध जिस भाव का स्वामी होता है और उसकी जिस जिस भाव में स्थिति होती है, उसकी राशि के दूसरे भाव तथा इस भाव के राशि के साथ स्थित होता है उन सभी भावों से संबंधित सुख या कष्ट का जातक को अनुभव होता है। वह अपनी किशोरावस्था में इस प्रकार के सुख या कष्ट प्राप्त करता है। इसे उदाहरणों की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है -

        चार्ट नंबर 1 इंदिरा गांधी का है। इनका बुध सूर्य से 9 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन १ डिग्री से अधिक की गति में है, इस प्रकार यह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर है। यह एकादश और द्वितीय भाव का स्वामी होकर चतुर्थ भाव में स्थित है। इसका दूसरा भाव नवम है। बुध के साथ लग्न भावाधिपति सूर्य स्थित है। इसलिए श्रीमती इंदिरा गांधी ने शरीर, व्यक्तित्व, बुद्धि, मंजिल, लाभ, धन, कुटुंब से संबंधित सफलता प्राप्त की। इन्हे 12 वर्ष से 24 वर्ष तक इन भावों से संबंधित अनायास सफलता मिली।

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        चार्ट नंबर 2 श्री सुनील मनोहर गावस्कर का है। इनका बुध सूर्य से लगभग 20 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन 1 डिग्री की गति के लगभग है। इस प्रकार बुध पृथ्वी से औसत दूरी पर है। इसलिए गावस्कर इस उम्र में बहुत मेहनती रहे। यह नवम भावाधिपति षष्ठ भाव में स्वक्षेत्री है। इसके साथ अष्टम भाव अधिपति सूर्य भी स्थित है। साथ ही साथ मात्र 7 डिग्री की दूरी पर मंगल चतुर्थ और एकादश भाव अधिपति भी है। इसलिए उन्होंने स्थायित्व, मातृ पक्ष, प्रतियोगिता, भाग्य और लाभ से संबंधित सफलता कम उम्र में ही प्राप्त की।
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        चार्ट नंबर 23 के के बिरला का है। इसका बुध सूर्य से लगभग 15 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन डेढ़ डिग्री की गति में है। इस प्रकार से बुध पृथ्वी से सामान्य से अधिक दूरी पर है। यह नवम और द्वादश भावाधिपति द्वितीय भाव में स्थित है, जिसका दुसरा भाव सप्तम है। इसलिए उन्होंने 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र में भाग्य, खर्च, बाहरी संबंध,धन और परिवार से संबंधित सफलता प्राप्त की।
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        चार्ट नंबर 24 एक महिला का है इनका बुध सूर्य से जीरो डिग्री की दूरी पर 2 डिग्री प्रतिदिन की गति में है। यह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित है इसलिए यह मजबूत है। यह पंचम और अष्टम भावाधिपति है और पंचम भाव में स्थित होने से स्वक्षेत्री है। साथ ही यह सप्तम भावेश सूर्य तथा चतुर्थ और नवम भावाधिपति शुक्र के साथ स्थित है। इसलिए इस महिला का 12 से 24 वर्ष का समय बहुत ही अच्छा रहा। उसने पढ़ाई लिखाई से संबंधित, भाग्य, मातृ पक्ष तथा स्थायित्व से संबंधित सब प्रकार की सफलता प्राप्त की। यह बहुत कम देर के लिए ही पढ़ती थी, लेकिन इसके बावजूद सभी परीक्षाएं पास करती थी। इनकी प्रतिभा को देखते हुए इसका विवाह बहुत अच्छे परिवार में इसी अवधि में हुआ।
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        चार्ट नंबर 26 संजय दत्त का है। इसमें बुध सूर्य से लगभग 12 डिग्री की दूरी पर वक्र गति में है। इस प्रकार बुध पृथ्वी से सामान्य से कम दूरी पर है। यह अष्टम और एकादश भावाधिपति नवम भाव में स्थित है। साथ ही इसमें दशम भाव अधिपति सूर्य भी स्थित है। इसलिए संजय दत्त ने 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र तक लाभ, भाग्य, प्रतिष्ठा आदि की कमी महसूस की तथा इनका जीवन जीने का ढंग बहुत बुरा हो गया। 24 वर्ष की उम्र में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
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        चार्ट नंबर 27 श्री लाल बहादुर शास्त्री का है। इनका बुध सूर्य 17 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन 1 डिग्री से कम की गति में है। यह अष्टम और एकादश भाव अधिपति दशम भाव में स्थित है। मंगल बुध के साथ ही स्थित है, इसलिए इन्होंने 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र तक शरीर, झंझट, प्रतिष्ठा और लाभ की कमी महसूस की। इनके जीवन जीने के ढंग पर लाभ की कमी का बुरा प्रभाव पड़ा। सन 1927 इन के लिए बहुत बुरा रहा।
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        चार्ट नंबर 28 एक ऐसी महिला का है, जिनका विवाह बहुत ही कम उम्र में कर दिया गया इनका बुध सूर्य से 21 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन 1 डिग्री से कम की गति में है। बुध सप्तम और दशम भाव अधिपति अष्टम भाव में स्थित है। जिसका दूसरा भाव एकादश है। वह पति या उसके परिवार वालों के व्यवहार को ससुराल में बिल्कुल बर्दाश्त ना कर सकी और अपने पिता के घर आने को बाध्य हुई। इस प्रकार झंझट, परिवार, लाभ और प्रतिष्ठा से संबंधित समस्या इस महिला के समक्ष 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र में ही उपस्थित हुई।
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        चार्ट नंबर 29 एक अन्य महिला का है। उनका विवाह भी 16 वर्ष की अवस्था में हुआ था। उनका बुध सूर्य से 26 डिग्री की दूरी पर प्रतिदिन 1 डिग्री से कम की गति में है। साथ ही यह अधिक मजबूत शनि की राशि में स्थित है इसलिए यह सापेक्षिक कमजोर हुआ। यह द्वितीय और एकादश भावाधिपति है और षष्ठ भाव में स्थित है। इसका दूसरा भाव सप्तम राशि है। साथ ही बुध के साथ चतुर्थ और नवम भावाधिपति मंगल भी स्थित है। इसलिए यह महिला जातक 12 वर्ष से 24 वर्ष की उम्र में ही आर्थिक, पारिवारिक, दांपत्य से संबंधित लाभ की कमी, झंझट तथा दुर्भाग्य से संबंधित कमजोरी को महसूस किया। 1985 में इनका अपने पति से तलाक हुआ।
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        चार्ट नंबर 30 एक व्यक्ति का है जिसका बुध सूर्य से मात्र 5 डिग्री के कोणत्मक दूरी का वक्र स्थिति में है। इसलिए इस समय बुध ग्रह पृथ्वी से बहुत निकट था। साथ ही यह मजबूत शुक्र के भाव में स्थित है, इसलिए यह सापेक्षिक कमजोर हुआ। यह सप्तम और दशम भाव अधिपति एकादश भाव में स्थित है, जिसके राशीश का दूसरा भाग षष्ठ है। यह किशोर एक लड़की के प्यार में अपनी किशोरावस्था में ही पड़ गया, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा एवं लाभ में कमी और झंझट दिखाई पड़ा। साथ ही नवम भावाधिपति सूर्य तथा पंचम और द्वादश भावाधिपति मंगल भी थे, इसलिए और पढ़ाई लिखाई से संबंधित हानि और दुर्भाग्य का अनुभव करता रहा।
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        बुध मजबूत रहने से बालक का पालन पोषण अत्यंत ही सुखद वातावरण में होता है। इसलिए किशोर बहुत जिद्दी और अभिभावक के नियंत्रण में नहीं रहने वाले हो जाते हैं। साथ ही इस उम्र में सही गलत की कोई पहचान नहीं होने के कारण कभी-कभी ऐसे बच्चे गलत संगति में भी देखे जाते हैं और कोई ऐसा काम कर बैठते हैं, जिससे सभी परेशान रहते हैं। लेकिन उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। किंतु इसके विपरीत बुध कमजोर रहने से किशोर अपने अभिभावक के नियंत्रण में रहते हैं। अपने आप को बंधा बंधा सा महसूस करते हैं। किंतु ऐसे बच्चों को बड़े होने पर अधिक उन्नति या तरक्की करते हुए देखा गया है।