"The Mystery of the Tradition of Understanding the Future from the Sky" - आकाश से भविष्य समझने की परंपरा का रहस्य ✨

"The Mystery of the Tradition of Understanding the Future from the Sky" - आकाश से भविष्य समझने की परंपरा का रहस्य ✨


Gatyatmak Jyotish  observing sun, moon, and stars to predict fate and actions


Table of Contents

  1. परिचय: आंखें और देखना

  2. पूर्वजों का आकाश अवलोकन

  3. सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों का महत्व

  4. मौसम और प्राकृतिक संकेत

  5. व्यक्तिगत अनुभव और सीख

  6. गत्यात्मक ज्योतिष का विज्ञान और व्यावहारिकता

  7. भाग्य, कर्म और ज्योतिष का संतुलन

  8. सारांश और निष्कर्ष

  9. FAQ

परिचय: आंखें और देखना

हम जब अपनी आंखें बंद रखते हैं, तो हमें कुछ दिखाई नहीं देता। देखने के लिए आंखें खुली रहनी चाहिए, और दिशा बदलकर ही हम अपनी ज़रूरत अनुसार वस्तुओं को देख पाते हैं।

  • बाएँ देखने के लिए आंखें बाईं ओर,

  • दाएँ देखने के लिए दाईं ओर,

  • आगे देखने के लिए सामने की ओर,

  • ऊपर देखने के लिए ऊँचाई की ओर।

जैसे हम सीढ़ी चढ़ते समय ऊपर और उतरते समय नीचे देखते हैं, वैसे ही आंखें हमें वर्तमान स्थिति में आवश्यक चीज़ों को देखने में मदद करती हैं।

यह अनुभव हमें यह सिखाता है कि केवल मौजूद चीज़ को देखकर समझना संभव है, और यदि दूरी ज्यादा है तो ऊँचाई से अवलोकन करना पड़ता है।

पूर्वजों का आकाश अवलोकन

हमारे पूर्वजों के पास विज्ञान के आधुनिक साधन नहीं थे। वे भविष्य की जानकारी और मौसम की स्थिति जानने के लिए आसमान की ओर देखते थे।

  • धूल, धुएँ और तूफान: निकट आग या तूफान की सूचना देते थे।

  • पतंग उड़ाना और झंडे लगाना: हवा की दिशा और तीव्रता का अनुमान।

  • सूर्य और चंद्र की स्थिति: समय और अनुकूल कार्य तय करना।

उदाहरण के लिए, यदि खेतों के पौधे सूख रहे थे और बारिश के संकेत नहीं दिख रहे थे, तो बादलों और आसमान की स्थिति देखकर अनुमान लगाया जाता था।

इससे पता चलता है कि हमारे पूर्वजों ने केवल आकाश को देखकर ही कृषि, यात्रा और सामाजिक जीवन के निर्णय किए।

सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों का महत्व

सूर्य और चंद्रमा के उदय और अस्त के क्रम ने दिन, रात और वर्ष की गणना में मदद की।

  • सूर्य की गति ने उत्तरायण और दक्षिणायन के आधार पर मौसम की जानकारी दी।

  • चंद्रमा की स्थिति और आकार ने रात की अवधि और चांदनी के बारे में सटीक संकेत दिए।

  • नक्षत्रों के क्रम ने यात्रा और दिशा तय करने में मार्गदर्शन किया।

मेरी व्यक्तिगत स्मृति में, 12-13 वर्ष की उम्र में मैंने छत पर बैठकर चंद्रमा का उदय देखा और समझा कि प्रत्येक दिन चंद्रमा के उदय में अंतर क्यों आता है।

यह अनुभव ही गत्यात्मक ज्योतिष का प्रारंभिक ज्ञान बना, जिसमें ग्रह, नक्षत्र और सूर्य-चंद्र की गतियाँ व्यक्ति के जीवन पर संभावित प्रभाव को दर्शाती हैं।

मौसम और प्राकृतिक संकेत

पूर्वजों ने आकाश और प्राकृतिक संकेतों का उपयोग केवल भविष्यवाणी के लिए नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए किया।

  • धूप की स्थिति → अनाज और वस्तुएँ सुखाने का समय।

  • बादलों का जमावड़ा → बारिश का अनुमान।

  • हवा की दिशा → यात्रा और पतंग उड़ाने के लिए।

  • धूल और धुएँ → आस-पास आग की सूचना।

इस प्रकार, आकाश को देखकर उन्होंने अपने दैनिक जीवन, खेती और यात्रा के लिए निर्णय लिया।

व्यक्तिगत अनुभव और सीख

मेरे पिताजी ने गत्यात्मक ज्योतिष का शोध किया। उनके 56 वर्षों के अध्ययन और मेरे 36 वर्षों के अनुभव ने इस प्रणाली को और अधिक व्यावहारिक और प्रमाणिक बनाया।

  • मैंने छत पर बैठकर भाई-बहनों की देखभाल करते समय चंद्रमा का उदय देखा और समय का अनुमान लगाया।

  • सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की घटनाओं को आसमान के अवलोकन से समझा।

  • किताबों और स्कूल में पढ़ाई के बाद भी वास्तविक अनुभव ने ज्योतिष का गहरा ज्ञान दिया।

यह दिखाता है कि ज्योतिष केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि व्यावहारिक अवलोकन और अनुभव पर आधारित विज्ञान है।

गत्यात्मक ज्योतिष का विज्ञान और व्यावहारिकता

गत्यात्मक ज्योतिष केवल ग्रहों की स्थिति नहीं देखती, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव, सामाजिक परिवेश और समय के प्रभाव को जोड़ती है।

  • ग्रहों का अध्ययन → जीवन की संभावनाएँ

  • सूर्य और चंद्रमा → समय और दिशा

  • प्राकृतिक संकेत → मौसम और अनुकूल कार्य

  • अनुभव और अभ्यास → जीवन की योजना

इस प्रणाली में भाग्य और कर्म का संतुलन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

भाग्य, कर्म और ज्योतिष का संतुलन

  • प्रारब्ध (Fate): जन्म से मिली क्षमता और परिस्थितियाँ।

  • कर्म (Actions): मेहनत, सोच और विवेक।

Dynamic Astrology बताती है कि भाग्य केवल संकेत देता है; अंतिम परिणाम कर्म और निर्णयों पर निर्भर होता है।

उदाहरण: जन्म से कमजोर शरीर होने पर सावधानी अपनाकर व्यक्ति अपनी सीमाओं को पार कर सकता है।

सारांश और निष्कर्ष

गत्यात्मक ज्योतिष जीवन में भाग्य और कर्म का संतुलन समझने का विज्ञान है। यह केवल भविष्य बताने के लिए नहीं, बल्कि व्यावहारिक निर्णय, समय प्रबंधन और जीवन की संभावनाएँ बढ़ाने के लिए उपयोगी है।

  • पूर्वजों का अनुभव और आसमान अवलोकन इसकी नींव है।

  • सूर्य, चंद्र और नक्षत्रों के अध्ययन से समय और मौसम की जानकारी।

  • कर्म और निर्णय से प्रारब्ध में सुधार संभव।

FAQ (Google PAA Style)

  1. गत्यात्मक ज्योतिष क्या है?

    • यह ग्रहों, सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों के अध्ययन के साथ कर्म और अनुभव को जोड़कर जीवन की संभावनाएँ दिखाने वाली प्रणाली है।

  2. क्यों पूर्वज आसमान देखते थे?

    • मौसम, दिशा, समय और प्राकृतिक घटनाओं का अनुमान लगाने के लिए।

  3. सूर्य और चंद्रमा का महत्व क्या है?

    • समय, दिशा, दिन-रात, वर्ष की गणना और अनुकूल कार्यों का निर्णय।

  4. Dynamic Astrology का विज्ञानिक आधार क्या है?

    • अनुभव, वर्षों के अवलोकन, ग्रह और नक्षत्र की गतियों का विश्लेषण।

  5. क्या भाग्य बदल सकता है?

    • हाँ, कर्म और निर्णय से प्रारब्ध को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

🔚 निष्कर्ष

यह प्रणाली भविष्यवाणी के लिए मार्गदर्शन देती है, पूर्ण निश्चितता के लिए उसके कर्म भी जिम्मेदार रहते हैं । उदाहरण: किसी किशोर में उच्च बुद्धिमत्ता है, लेकिन शिक्षा और सामाजिक वातावरण सही नहीं है। उसका विकास सीमित रहेगा। गत्यात्मक ज्योतिष बताता है कि परिस्थितियों में सुधार से उसका वास्तविक क्षमता सामने आ सकती है। बिना प्रायोगिक ज्ञान, विज्ञान अधूरा है। गत्यात्मक ज्योतिष यह मानता है कि बिना प्रयोग, बिना आंकड़ों और बिना समझ के कोई भी विधा उपयोगी नहीं बन सकती। ज्योतिष को भी विज्ञान, कला और सांख्यिकी, तीनों के सहसंबंध से आगे बढ़ना होगा। यदि आप Jyotish aur Vigyan को तार्किक दृष्टि से समझना चाहते हैं, हमारे YouTube चैनल से जुड़ें, गत्यात्मक ज्योतिष के लेख पढ़ें, अपने अनुभव comment में साझा करें

👤 Author Bio

लेखिका : संगीता पुरी, गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञा, #100womenachiever selected by Indian Govt. in 2016,  Ph - 8292466723
40+ वर्षों का गत्यात्मक ज्योतिष का अध्ययन,  पारंपरिक और गत्यात्मक ज्योतिष के समन्वय में क्रियाशील । उनका उद्देश्य ज्योतिष को कर्मकांड से निकालकर तार्किक, उपयोगी और आधुनिक दृष्टि देना है। अनुभव आधारित लेखन उनकी विशेषता है।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Disclaimer सहित)

'गत्यात्मक ज्योतिष'  विज्ञान के रूप में  अनुभवजन्य और सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली है, जिसे मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए। यह चिकित्सा का विकल्प नहीं है। गत्यात्मक ज्योतिष को Guidance Tool के रूप में समझें तो बहुत सुविधा होगी।




संगीता पुरी

Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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