क्‍या इस तरह के ग्राफों के बाद भी ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाया जा सकता है ??

गिरीश बिल्‍लौरे 'मुकुल' जी द्वारा लिए गए मेरे इंटरव्‍यू वाले पोस्‍ट में दो प्रकार की ग्राफ की भी चर्चा की गयी है , जो उनके जन्‍म विवरण के आधार पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सिद्धांतों पर आधारित मेरे स्‍वयं के द्वारा विकसित किए गए सॉफ्टवेयर से निकाला गया है। मुकुल जी ने स्‍वीकारा है कि उनके जीवन के सभी पक्षों और उनके जीवन भर के उतार चढाव को दिखाते इन ग्राफों की सत्‍यता 90 प्रतिशत से अधिक मानी जा सकती है। इनके अलावे हिंदी ब्‍लॉग जगत से जुडे कई पाठकों को भी मैने ऐसे ग्राफ भेजे हैं , जिन्‍होने भी इसकी सत्‍यता को स्‍वीकारा है , पर कुछ को ये ग्राफ समझने में दिक्‍कत भी हुई है। मेरे पास जितने लोगों ने जन्‍म विवरण भेजे हैं , उनका काम काफी दिनों से पडा है , उनको भी क्रमश: ये ग्राफ भेज रही हूं। सबो को अलग अलग न समझाना पडे , इसी कारण मै इन ग्राफो का विश्‍लेषण इस पोस्‍ट में करने जा रही हूं।

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सूत्रों के आधार पर मैने  'प्रीडेस्‍टीनेशन' नामक अपना साफ्टवेयर विकसित किया है , जिसमें इनपुट के तौर पर किसी की जन्‍मतिथि , जन्‍म समय और जन्‍म स्‍थान डाला जाए , तो कुल मिलाकर पंद्रह पन्‍नों में उसकी जन्‍मकुंडली , विभिन्‍न प्रकार के चार ग्राफ और आपके ग्राफ के अनुसार ही घटनेवाली सामान्‍य बातों का जिक्र होता है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की धारणा है कि 'प्रीडेस्‍टीनेशन' यानि 'पहले से तय' सबकुछ नहीं होता , मनुष्‍य की कुछ विशेषताएं , विशेष संदर्भों का सुख दुख और जीवन में आने वाले कुछ उतार चढाव ही 'पहले से तय' होते हैं। मनुष्‍य की उन विशेषताओं ,विशेष संदर्भों के सुख दुख और जीवन में आने वाले नियत उतार चढावों को पहचान लेने के कारण ही 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को सिर्फ सांकेतिक विज्ञान कहा जा सकता है। इसके अतिरिक्‍त मनुष्‍य अपने जीवन में बहुत कुछ युग के हिसाब से और बहुत कुछ अपनी मेहनत से भी प्राप्‍त कर सकता है। यही कारण है कि भविष्‍यवाणियों वाले पन्‍नों पर अनुभव  के आधार पर प्रतिदिन कुछ न कुछ बदलाव हो रहे हैं और युग युगांतर तक थोडा बहुत चलेगा ,क्‍यूंकि समय और परिस्थिति के अनुसार ग्रहों के प्रभाव की तीव्रता घटती बढती रहती है। मेरे सॉफ्टवेयर से निकलने वाले चारो ग्राफ निम्‍न प्रकार के होते हैं ......


इस ग्राफ में काली रेखा आपकी सुखात्‍मक और दुखात्‍मक परिस्थितियों और आपके मनोभावों को दर्शाता है , जिसका आपके रहन सहन और स्‍तर से कोई संबंध नहीं होता। यह मात्र आपके आराम दायक और मनोनुकूल माहौल को दर्शाता है , यह जिन वर्षों में ऊपर जाएगा , आपकी परिस्थितियां सुखद बनी रहेंगी , इसके विपरीत जिन वर्षों में नीचे जाएगा , परिस्थितियों में कुछ कष्‍ट आता जाएगा। जिन वर्षों में लाल रेखा काली रेखा से ऊपर जाएगी , आप परिस्थितियों से संतुष्‍ट रहेंगे तथा जिन वर्षों में लाल रेखा काली रेखा से नीचे जाएगी , आप परिस्थितियों से असंतुष्‍ट रहेंगे।

दूसरा ग्राफ आपकी महत्‍वाकांक्षा , आपके स्‍तर और आपकी सफलता को दर्शाता है। इस ग्राफ में काली रेखा जिन वर्षों में नीचे रहेगी , आपकी महत्‍वाकांक्षा और उसके अनुसार आपकी कार्यक्षमता कम होगी , लेकिन जिन वर्षों में काली रेखा ऊपर जाएगी , दायित्‍वों का बोध होने के साथ ही साथ आपकी महत्‍वाकांक्षा और कार्यक्षमता बढती जाएगी। काली रेखा से लाल रेखा के ऊपर होने का अर्थ है कि आप अपनी महत्‍वाकांक्षा और कार्यक्षमता से अधिक सफलता प्राप्‍त कर रहे हैं , जिन वर्षो में काली रेखा से लाल रेखा नीचे हो , उन वर्षों में आप अनुमान से कम सफलता प्राप्‍त करेंगे। आश्‍चर्य की बात तो ये है कि पहले और दूसरे प्रकार के ग्राफ के लिए सिर्फ आपके जन्‍म तिथि की आवश्‍यकता पडती है। पर तीसरे और चौथें प्रकार के ग्राफ के लिए जन्‍म तिथि के साथ ही साथ जन्‍म समय और जन्‍मस्‍थान की भी आवश्‍यकता पडती है। 


तीसरा ग्राफ आपकी महत्‍वाकांक्षा के संदर्भों को दिखलाता है , आप किस मामले में कितना महत्‍वाकांक्षी हैं और उस संदर्भ के लिए अपनी कितनी ऊर्जा लगाते हैं। महत्‍वाकांक्षा और कार्यक्षमता के अनुरूप सफलता पाने से आप संतुष्‍ट रहा करते हैं या महत्‍वाकांक्षा और कार्यक्षमता के अनुरूप सफलता न प्राप्‍त कर पाने से असंतुष्‍ट , इसका अंदाजा भी इस ग्राफ से हो जाता है।


चौथा ग्राफ आपके सुखदायक संदर्भों को दिखलाता है , प्रकृति ने आपको किन संदर्भों की कितनी सुख सफलता दी है। इनको अनायास ढंग से पाने या कष्‍ट झेलने के बाद भी आप इनसे संतुष्‍ट रहते हैं या असंतुष्‍ट बने हुए हैं , इसका अंदाजा इस ग्राफ से मिल जाता है।

अपने जन्‍म के समय आसमान में स्थित ग्रहों के प्रभाव को दर्शाते ये चारो ग्राफ किसी को भी आत्‍म ज्ञान करवाने में सफल हैं , हर व्‍यक्ति अपने अनुकूल समय और संदर्भों पर अपनी अधिक से अधिक ऊर्जा लगाकर और प्रतिकूल समय और संदर्भों की उपेक्षा कर शांतिपूर्ण जीवन जीने में सफल हो सकते हैं । यदि आपकी उम्र भी 25 वर्ष से अधिक की है और आप चारो प्रकार के ग्राफ पाने की चाहत रखते हैं , अपने जीवन को समझना चाहते हैं , तो अपने जन्‍म विवरण हमें ईमेल के द्वारा भेज दें। जिन्‍होने अपना जन्‍म विवरण पहले भेजा है , वे भी दुबारा याद करा दें , तो उन्‍हें चारो ग्राफ भेजे जा सकते हैं। लेकिन सिर्फ अपना जन्‍म विवरण ही भेजें , किसी दूसरे का नहीं । मेरा दावा है कि इन ग्राफो को प्राप्‍त करने बाद ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता के प्रति किसी को संदेह नहीं रह जाएगा।


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14 comments

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2/15/2010 05:51:00 pm ×

सांख्यिकी स्वयं में विज्ञान नहीं है बल्कि किसी आंकड़े को प्रस्तुत करने का एक तरीका मात्र है -ध्यान रखें !
आप फलित ज्योतिष को विज्ञान साबित करने पर क्यों तुली हुयी हैं?? -यह उस तरह का ही हास्यास्पद प्रयास है जैसे की मैं विज्ञान को फलित ज्योतिष साबित करने में तिल -ताड़ एक कर दूं !

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2/15/2010 06:01:00 pm ×

अरविंद मिश्राजी,

मैने विज्ञान तो पढा ही है .. और अर्थशास्‍त्र में भी एम ए किया है .. इसलिए मैं सांख्यिकी को भी समझती हूं .. आपने 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को बिना समझे इसे सांख्यिकी कैसे कह दिया .. क्‍या आपका विज्ञान इसी प्रकार बिना समझे बूझे किसी को कुछ भी कहने की इजाजत देता है .. गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के जानकार बता सकते हैं कि यह सांख्यिकी नहीं है.. और इसे विज्ञान साबित करने का मेरा प्रयास हास्‍यास्‍पद नहीं है .. ज्‍योतिष के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त होकर मेरे आलेख पर आपकी इस प्रकार की टिप्‍पणी ही मुझे अधिक हास्‍यास्‍पद नजर आ रही है !!

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Unknown
admin
2/15/2010 06:24:00 pm ×

बहुत अच्छा प्रयास ।

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2/15/2010 08:21:00 pm ×

ग्राफ वाली बात तो दिलचस्प लगी।

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2/15/2010 09:01:00 pm ×

सांख्यिकी किसी बात को समझाने का या किसी आंकड़ा को सही ढंग से रखने का साधन तो है ही. फिर गत्यात्मक ज्योतिष को सांख्यिकी कहना उचित नहीं है. यहाँ तो किसी बात को समझाने के लिए सांख्यिकी का सहारा लिया गया है. प्रश्न है कि ज्योतिष शास्त्र को विज्ञान की श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं. तो मैं तो कहूँगा कि इसमें क्यों दिमाग ख़राब करना है. हमें तो यह देखना चाहिए कि ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जो कहा जा रहा है वह सही है या नहीं. यदि विज्ञान का भी कोई बात गलत होती है तो उसे भी हम गलत कह सकते हैं. फिर जब राजनीति शास्त्र को हम विज्ञान (Political Science) कह सकते हैं तो ज्योतिष शास्त्र को विज्ञान क्यों नहीं कह सकते हैं?
मेरी बातों से किसी को तकलीफ हुयी होगी तो इसके लिए क्षमा चाहता हूँ.

आपका
महेश

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2/15/2010 09:14:00 pm ×

बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट...

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2/15/2010 09:14:00 pm ×

बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट...

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2/15/2010 09:18:00 pm ×

अब तो शक की गु़ञ्जाइश ही नही है!

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2/15/2010 11:40:00 pm ×

संगीता जी आप की बात से सहमत है, ओर यह ग्राफ़ वाली बात आप ने बहुत खुल कर समझाई आप का धन्यवाद

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2/16/2010 01:23:00 am ×

चलिये मैं कल ईमेल करता हूं.

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2/16/2010 12:04:00 pm ×

ग्राफ के माध्यम से बहुत बड़ी mathmatical calculation का अच्छे से interpretation किया जा सकता है .आपका प्रयास सराहनीय है .ज्योतिष के आपके इस योग दान का बहुत लोगों को लाभ मिलेगा .

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2/16/2010 12:15:00 pm ×

सुंदर और तार्किक. एक लाभान्वित मैं भी हूँ. ये ग्राफ सत्यता के बहुत करीब हैं. हालाँकि इनसे कोई सटीक जानकारी नहीं मिलती और इस लिए यह वस्तुनिष्ठ हो जाते हैं, जिनकी सत्यता इसे समझने वाले के दृष्टिकोण पर निर्भर हो जाती है. पर मुझे आशा है की संगीता जी जल्दी ही कोई बेहतर समाधान निकाल कर अधिक सटीक एवं संतोष जनक समाधान प्रस्तुत कर सकेंगी, जो आलोचक वर्ग के दृष्टिकोण को बदल सकेगा. ...... मेरी अग्रिम शुभकामनायें .....

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2/16/2010 08:53:00 pm ×

व्याख्या के लिए आभार हो जी

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6/22/2010 06:16:00 pm ×

कई वर्ष पूर्व गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर आपकी लिखी पुस्‍तक पढने को मिली थी। इस समय मेरे पास उपलब्‍ध भी है। उसे पढकर कुछ और जानने की इच्‍छा हुई थी तब व्‍यस्‍तता अधिक थी इसलिए सम्‍पर्क नहीं कर सका। पर इसपर अब और पढने का इच्‍छुक हूं। इन्‍टरनेट पर आपका उसी नाम का ब्‍लॉग मिला तो थोडा बहुत पढा। लेकिन कुछ आलेख पर बिन्‍दी बिन्‍दी पढने को दिखी कुछ पढे गए। आज फिर आपका ब्‍लॉग सामने आ गया तो इस लेख को पढकर टिप्‍पणी लिख रहा हूं। आपका प्रयास सराहनीय है। आप प्रयास करती रहें आपको विरोधों के बावजूद मंजिल मिल ही जाएगी। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष और ग्राफ प्रशंसनीय प्रयास है। इसके लिए आप धन्‍यवाद की पात्र हैं।

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