50 वर्षों से अधिक समय से चल रहा रिसर्च 'गत्यात्मक दशा पद्धति' और 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली'

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'गत्यात्मक ज्योतिष' के जनक हमारे पिताजी श्री विद्यासागर महथा जी के द्वारा 50 वर्षों से अधिक समय से चल रहे रिसर्च ने 'गत्यात्मक दशा पद्धति' और 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' को जन्म दिया है। धीरे धीरे हम कई परिवार के सदस्यों ने भी इस कार्य में योगदान किया।  लोगों द्वारा 'गत्यात्मक दशा पद्धति' आधारित कई तरह के जीवन-ग्राफ्स और चार्ट्स पर सटीकता की मुहर तो काफी पहले ही लग गयी थी, जिनके आधार पर जीवन की स्थायी सुख-दुःख और जीवन-यात्रा की चर्चा की जा सकती है।

'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' द्वारा जातकों के मध्य कई तरह के संयोग-दुर्योग की भविष्वाणियों की चर्चा और उसकी सटीकता हमारा आत्मविश्वास बढ़ा चुकी थी। पर एक एप्प के माध्यम से विभिन्न यूजर तक उनके सभी मामलों के सकारात्मक, ऋणात्मक और सामान्य समय पहुंचा पाना बहुत चुनौती भरा काम था। पिछले साल जुलाई-अगस्त में जैसे ही एप्प का काम पूर्ण हुआ, 150 लोगों के मोबाइल में इसे टेस्ट किया गया। चार महीने तक सही रिपोर्ट मिलने के बाद दिसंबर में 1500 लोगों ने इसे डाउनलोड किया। दो महीने में 15000 लोगों तक इसे पहुंचा पाने का लक्ष्य रखा है। आप भी एप्प के रिजल्ट पर नजर बनाये रखें। कहीं भी विपरीत रिजल्ट दिखाई दे तो सूचित करें।

विपरीत रिजल्ट आपके द्वारा गलत डिटेल डाले जाने, हमारे द्वारा कुछ मैन्युअल काम में गलती होने या एप्प के प्रोग्रामिंग में हुई भूल में से किसी एक का परिणाम हो सकते है। जबकि मिसिंग रिजल्ट यानि एप्प में जिसकी चर्चा नहीं की गयी है, उसका घटित हो जाना संभव है, क्योंकि गत्यात्मक गोचर सिद्धांत के ८० प्रतिशत फॉर्मूले की चर्चा इस एप्प में की गयी है, २०% मिसिंग है। आप सबों के अनुभव के आधार पर ही हमारा काम आगे बढ़ता जा रहा है, सहयोग बनाये रखें।



गत्यात्मक ज्योतिष क्या है ?

'गत्यात्मक ज्योतिष' टीम से मुलाक़ात करें।

50 वर्षों से अधिक समय से चल रहा रिसर्च 'गत्यात्मक दशा पद्धति' और 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' 50 वर्षों से अधिक समय से चल रहा रिसर्च 'गत्यात्मक दशा पद्धति' और 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' Reviewed by संगीता पुरी on January 28, 2020 Rating: 5

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (29-01-2020) को   "तान वीणा की माता सुना दीजिए"  (चर्चा अंक - 3595)    पर भी होगी। 
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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