'सूप दूषे चलनी को जिसमें 72 छेद'

 hindi diwas par nibandh

'सूप दूषे चलनी को जिसमें 72 छेद' 

प्रत्येक देश और उसके प्राचीन धर्म,  भाषा,  ज्ञान विज्ञान,  चिंतन शैली,  चिकित्‍सा प्रणाली  में कुछ खामियां होती हैं और इसे स्‍वीकार किया जाना चाहिए ! सबको आधुनिकतम बनाते जाने का नाम ही प्रगतिशीलता हैं ! धर्म ईश्‍वर को प्राप्‍त करने के लिए खास देश , काल और परिस्थिति के हिसाब से बनाई गई जीवनशैली है !

ईश्‍वर को हम सबकी आत्‍मा के सुख का प्रतीक भी मान सकते हैं,  क्‍योंकि परमात्‍मा का निवास प्रकृति के प्रत्‍येक जड चेतन में माना गया है ! इसलिए उसकी रक्षा के लिए बनाया गया हैं,  साथ ही धर्म में परिस्थितिजन्‍य और समयानुकूल बदलाव को स्‍वीकृति भी दी गई है ! 

धर्म को न मानने वाले यानि नास्तिक व्‍यक्ति धर्म की अवहेलना करते हुए अच्‍छे नियमों के समूह  यानि संविधान के माध्‍यम से ही प्रकृति की रक्षा कर लेते हैं,   तो उसकी भी स्‍वीकृति ईश्‍वर या मानव समाज दे सकता है !

लेकिन जब एक धर्म के अंधभक्‍त लोग दूसरे धर्म की कमियां निकालने लगते हैं तो स्थिति हास्‍यास्‍पद हो जाती है,  कहावत याद आ जाती है -  सूप दूषे चलनी को जिसमें 72 छेद ! भला किस धर्म में अवांछनीय तत्व नहीं ! अंधविश्वास नहीं ! 

अपने देश,  अपने धर्म,  अपनी भाषा, अपने ज्ञान विज्ञान, अपनी चिंतन शैली, अपनी चिकित्‍सा प्रणाली के नष्‍ट भ्रष्‍ट किए जाने का जिन्‍हें अफसोस नहीं, वही इनकी तुलना उन भाषा, उन विज्ञानों, उन चिकित्‍सा प्रणालियों से यदा कदा करते रहते हैं , जिनके विकास के लिए पूरा विश्‍व खर्च कर रहा है ! 

अपनी मां और भाई बहन गरीब हो तो अमीर मां की गोद में बैठ कर अमीर भाई बहन बना लेना कोई बहादुरी का काम तो नहीं,  बहादुरी तो अपनी मां और भाई बंधु को अमीर बनाने में है ! अपने देश की व्‍यवस्‍था सुधारिए और इसपर गर्व कीजिए ! 

 आप विश्व की चाहे कोई भी भाषा पढ़ते और लिखते हों,  अपनी सोंच को अपने ज्ञान को अपने विचारों को अपने अनुभवों को अपनी मातृभाषा में भी  अभिव्‍यक्ति दें ! आनेवाली पीढी को दूसरी भाषा में अध्‍ययन की आवश्‍यकता नहीं रहेगी, हिंदी दिवस की शुभकामनाएं !

'सूप दूषे चलनी को जिसमें 72 छेद' 'सूप दूषे चलनी को जिसमें 72 छेद' Reviewed by संगीता पुरी on सितंबर 14, 2020 Rating: 5

1 टिप्पणी:

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सही और सटीक।

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