कम समय में प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

 

कम समय में प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

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गत्यात्मक ज्योतिष को अच्छी तरह समझने के लिए ज्योतिष के बेसिक्स का ज्ञान आवश्यक है। आज एक बार फिर से पहली कड़ी और  पिछली कडी को आगे बढा रही हूं। हमारा सामना अक्‍सर कुछ वैसे लोगों से होता है , जो ऐसे तो कभी ग्रहों या ज्‍योतिष पर विश्‍वास नहीं करते , पर जब कभी लंबे समय तक चलने वाली किसी विपत्ति में फंसते हैं , ज्‍योतिष पर अंधविश्‍वास ही करने लगते हैं। ऐसी हालत में उनकी परेशानियां दुगुनी तिगुणी बढने लगती है ,अपनी समस्‍याओं में त्‍वरित सुधार लाने के लिए वे उस समय हम जैसों की अच्‍छी सलाह भी नहीं मानते।

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ज्ञान हर प्रकार के भ्रम का उन्‍मूलन करती है , ज्‍योतिष को जानने के बाद आप स्‍वयं सही निर्णय ले सकते हैं। यही सोंचकर मै अधिक से अधिक लोगों को खेल खेल में ज्‍योतिष सीखलाने की बात सोंच रही हूं , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्‍य सफलता देगा। वैसे लोगों को मेरी मदद हो जाएगी, जो सोचते हैँ कि ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

 ज्योतिष में में पृथ्‍वी के सापेक्ष पूरे भचक्र का अवलोकण किया जाता है , साथ ही सूर्य के उदाहरण से समझने में सफलता मिली कि विभिन्‍न पिंड पृथ्‍वी सापेक्ष अपनी स्थिति के अनुरूप ही पृथ्‍वी पर प्रभाव डालते हैं।

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पहले ही लेख में चर्चा की गयी है कि पृथ्‍वी को स्थिर मानकर पूरे आसमान के 360 डिग्री को 12 भागों में बांटने से 30 - 30 डिग्री की 12 राशियां बनती है। आमान के 0 डिग्री से 30 डिग्री तक को मेष , 30 डिग्री से 60 डिग्री तक को वृष , 60 डिग्री से 90 डिग्री तक को मिथुन , 90 डिग्री से 120 डिग्री तक को कर्क , 120 डिग्री से 150 डिग्री तक को सिंह , 150 से 180 डिग्री तक को कन्‍या , 180 से 210 डिग्री तक को तुला , 210 से 240 डिग्री तक को वृश्चिक , 240 से 270 डिग्री तक को धनु , 270 डिग्री से 300 डिग्री तक को मकर , 300 से 330 डिग्री तक को कुंभ तथा 330 से 360 डिग्री तक को मीन कहा जाता है।

 

योगकारक ग्रह

हमारे ऋषि महर्षियों द्वारा आसमान के 0 डिग्री एक आधार को लेकर निश्चित किया गया था , पर कुछ ज्‍योतिष विरोधी हमारे ऋषि महर्षियों द्वारा आसमान के अध्‍ययन के लिए किए गए इस विभाजन को भी अवास्‍तविक मानते हैं , पर मेरे अनुसार यह विभाजन ठीक उसी प्रकार किया गया है , जिस प्रकार पृथ्‍वी के अध्‍ययन के लिए हमने आक्षांस और देशांतर रेखाएं खींची हैं।


जिस प्रकार भूमध्‍य रेखा से ही 0 डिग्री की गणना की जानी सटीक है तथा देशांतर रेखाओं  की शुरूआत और अंत दोनो ध्रुवों पर करना आवश्‍यक है , उसी प्रकार आसमान में किसी खास विंदू से 0 डिग्री शुरू कर चारो ओर घुमाते हुए 360 डिग्री तक पहुंचाया गया है , हालांकि यह विंदू भी ज्‍योतिष में विवादास्‍पद बना हुआ है , जिसका कोई औचित्‍य नहीं। पृथ्‍वी की घूर्णन गति के कारण 24 घंटों में ये बारहों राशियां पूरब से उदित होती हुई पश्चिम में अस्‍त होती जाती है।
 

यूं तो ये बारहों राशियां और इनमें स्थित ग्रह हमारे लिए महत्‍वपूर्ण हैं , पर तीन राशियां सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण होती हैं। पहली, जिस राशि में बालक के जन्‍म के समय सूर्य होता है , वो उसकी सूर्य राशि कहलाती है। दूसरी, जिस राशि में बालक के जन्‍म के समय चंद्रमा होता है , वो उसकी चंद्र राशि कहलाती है। तीसरी, जिस राशि का उदय बालक के जन्‍म के समय पूर्वी क्षितिज पर होता है, वह बालक की लग्‍न राशि कलाती है।


एक महीने तक सूर्य एक ही राशि में होता है , इसलिए एक महीने के अंदर जन्‍म लेने वाले सभी लोग एक सूर्य राशि में आ जाते हैं। ढाई दिनों तक चंद्रमा एक ही राशि में होता है , इस दौरान जन्‍म लेने वाले सभी लोग एक ही चंद्र राशि में आते हैं। दो घंटे तक एक ही लग्‍न उदित होती रहती है , इस दौरान जन्‍म लेने वाले सभी बच्‍चे एक ही लग्‍न राशि में आ जाते हैं। हमारे लेखों को पढ़कर ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त करें, कही भटकने और पूछने की आवश्यकता ही नहीं कि 
ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

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    ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति

     

    ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति 

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    मैंने ज्योतिष ब्लॉग लिखना शुरू किया ताकि मैं दुनिया को इस बात की जानकारी दे सकूँ कि ज्योतिष के क्षेत्र में नया वैज्ञानिक शोध हो चूका है, जिससे भविष्य की सटीक जानकारी दी जा सकती है। अधिकाँश ज्योतिष प्रेमियों के मन में यही होता है कि किसी ज्योतिषी के लिए जन्मकुंडली ही भविष्यफल बताने के लिए पर्याप्त है। उस जन्मकुंडली के लग्न, राशि, १२ खानो और उसमे स्थित ग्रहों को देखकर ज्योतिषी किसी भी प्रश्न का जवाब दे सकता है।

    यह भ्रम हम ज्योतिषियों का ही पैदा किया हुआ ही है, क्योंकि महान बनने के क्रम में हम कुछ भूलें करते जाते हैं। पूजा, पाठ और रत्न धारण के लिए पैसे कमाने के चक्कर में अपने पास आये हर क्लाइंट्स में भय को जन्म देने के लिए उसकी जन्मकुंडली में दृष्टि डालते ही ऋणात्मक चर्चा शुरू कर देते हैं। क्लाइंट को महसूस होता है कि जन्मकुंडली में दृष्टि डालते साथ ज्योतिषियों को सबकुछ पता चल जाता होगा।

    यदि परंपरागत ज्योतिष के हिसाब से किसी जन्मकुंडली को समझना हो तो जीनपर्यन्त दिखाई देनेवाले कुछ मामलों के बारे में कुछ जानकारी दी भी जा सकती है, क्योंकि वहां ग्रहों की शक्ति का निर्णय ग्रहों की स्थिति, दृष्टि आदि पर ही निर्भर करती है, जो जन्मपत्री में स्पष्ट दिखाई देता है । पर किसी भी ग्रह के कारण किसी भी भाव की गड़बड़ी कब आएगी, इसे समझने के लिए दशा-महादशा की गणना तो करनी ही होती है। बिना दशा महादशा के आप समय के बारे में कुछ भी नहीं कह सकते।
    गयात्मक ज्योतिष की जो जन्मकुंडली बनती है, उसमे पहले पन्ने में ही जन्मकुंडली के साथ सभी ग्रहों की गत्यात्मक, स्थैतिक, धनात्मक और ऋणात्मक शक्ति की चर्चा होती है। उन शक्तियों के आधार पर ही पुरे जीवन के लिए गत्यात्मक ग्राफ्स खींचे जाते हैं, जिनमे विभिन्न भावों के गुण दोषों की चर्चा की जाती है। ग्रहों की इन शक्तियों को देखे बिना गत्यात्मक ज्योतिष भविष्य के बारे में कुछ भी फल निकालने में असमर्थ होता है। गत्यात्मक ज्योतिष जन्मकुंडली का पहला पन्ना इस प्रकार का होता है __

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    इस कुंडली में चन्द्रमा को औसत गत्यात्मक शक्ति प्राप्त हुई है, पर स्थैतिक शक्ति 91% है। अभी तक हमारे लेखों को पढ़कर आप समझ गए होंगे कि गत्यात्मक शक्ति सहजता देता है, जबकि स्थैतिक शक्ति पहचान। इस जन्मकुंडली के जातक को दशम भाव का स्वामी चन्द्रमा पिता, करियर या प्रतिष्ठा के मामलों में सुख से अधिक स्तर या पहचान देनेवाला और व्यव भाव में ऋणात्मक होने के कारण खर्च का दायित्व भी देनेवाला है। यदि हम आगे बुध की दोनों शक्ति को देखें तो ये बिलकुल सामान्य हैं , इसलिए इसके भाग्य और खर्च के मामले सामान्य होंगे, बुध सकारात्मक शक्ति संपन्न है, इसलिए इन मामलों में अधिक तनाव की वजह नहीं दिखती । मंगल की गत्यात्मक शक्ति कमजोर जबकि स्थैतिक शक्ति सामान्य है, इसलिए धन और परिवार के मामले भी जीवन में कमजोरी रहेगी, इन मामलों में पहचान सामान्य तौर की होगी।

    शुक्र की गत्यात्मक और स्थैतिक स्थिति के हिसाब से स्वास्थय और जीवनशैली तथा सूर्य की गत्यात्मक शक्ति के हिसाब से लाभ के मामलों में सहजता और पहचान औसत से अच्छी दिखाई दे रही है। जातक के बृहस्पति को चन्द्रमा की तरह ही गत्यात्मक रूप से औसत लेकिन स्थैतिक रूप में ९०% की शक्ति प्राप्त हो रही है, इसलिए भाई-बंधू और प्रभाव के मामलों में जातक बहुत ही पहचान वाला बना रहेगा। पुनः शनि गत्यात्मक तौर पर कमजोर रहेगा, इस कारण संतान पक्ष और स्थायित्व को लेकर तनाव की बात होगी। इस जातक का जीवन सुख के ख्याल से कमजोर और महत्वाकांक्षा के ख्याल से मजबूत रहेगा। जातक के पुरे जीवन का ग्राफ और गत्यात्मक जन्मकुंडली इसी गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति से बनायीं जाती है।

    जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें ------


    संक्षिप्त परिचय
    गत्यात्मक जीवन ग्राफ
    जीवन के 10 सूत्र
    ज्योतिष और आध्यात्म
    ज्योतिष से आध्यात्मिक ज्ञान

    गोचर के ग्रहों के आधार पर आनेवाली अस्थायी समस्या के लिए भी हम ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को देखे बिना कुछ नहीं बता सकते।

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        फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ

         

        फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ

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        हर घर में रखी और पढी जाने लायक इस पुस्‍तक ‘फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ’ के लेखक श्री विद्या सागर महथा जी हैं। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को स्‍थापित करने का पूरा श्रेय अपने माता पिता को देते हुए ये लिखते हैं कि ‘‘मेरी माताजी सदैव भाग्य और भगवान पर भरोसा करती थी। मेरे पिताजी निडर और न्यायप्रिय थे। दोनों के व्यक्तित्व का संयुक्त प्रभाव मुझपर पड़ा।’’ ज्‍योतिष के प्रति पूर्ण विश्‍वास रखते हुए भी इन्‍होने प्रस्‍तावना या भूमिका लिखने के क्रम में उन सैकडों कमजोर मुद्दों को एक साथ उठाया है, जो विवादास्‍पद हैं .

        ज्योतिष और अन्य विधाएं 

        जैसे ‘‘ज्योतिष और अन्य विधाएं परंपरागत ढंग से जिन रहस्यों का उद्घाटन करते हैं, उनके कुछ अंश सत्य तो कुछ भ्रमित करनेवाली पहेली जैसे होते हैं।’’ इस पूरी किताब में कई तरह के प्रश्‍नों के जबाब देने की कोशिश की है। इस पुस्‍तक के लिए परम दार्शनिक गोंडलगच्‍छ शिरोमणी श्री श्री जयंत मुनिजी महाराज के मंगल संदेश ‘‘यह महाग्रंथ व्यापक होकर विश्व को एक सही संदेश दे सके ऐसा ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करके हम पुनः आशीर्वाद प्रदान कर रहे है।’’ को प्रकाशित करने के साथ साथ ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के कुछ प्रेमियों के आर्शीवचन, प्रोत्‍साहन और प्रशंसा के पत्रों को भी ससम्‍मान स्‍थान दिया गया है।

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        प्रश्नकुंडली योग, शकुन, मुहूर्त्‍त हो या नजर का असर 

        चाहे समाज में प्रचलित ‘वार’ से फलित कथन हो या यात्रा करने का योग, शकुन, मुहूर्त्‍त हो या नजर का असर जैसे अंधविश्‍वास हो, इस पुस्‍तक में इन्‍होने जमकर चोट की है, इन पंक्तियों को देखें ... 

        ‘‘मैने शेविंग के लिए मंगलवार का दिन इसलिए चयन किया क्योंकि इस दिन अंधविश्वास के चक्कर में पड़ने से लोगों की भीड़ तुम्हारे पास नहीं होती और इसलिए तुम फुर्सत में होते हो।’’

        ‘‘न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत एक प्रतिक्रिया होती है। यदि यह प्रकृति का नियम है, तो समय के छोटे से अंतराल में भी, जिसे हम बुरा या अशुभ फल प्रदान करनेवाला कहते हैं, किसी न किसी का कल्याण हो रहा होता है।’’

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        हस्‍तरेखा, हस्‍ताक्षर विज्ञान, न्‍यूमरोलोजी

        हां, हस्‍तरेखा, हस्‍ताक्षर विज्ञान, न्‍यूमरोलोजी आदि से चारित्रिक विशेषताएं या अन्‍य कुछ जानकारियां मिल सकती हैं, वास्‍तुशास्‍त्र भवन निर्माण की तकनीक हो सकती है, प्रश्‍नकुंडली में कुछ वास्‍तविकता हो सकती हैं, पर ज्‍योतिषियों को अपनी सीमा में ही भविष्‍यवाणी करनी चाहिए, ये विधाएं ज्‍योतिष के समानांतर नहीं हो सकती। इनकी पंक्तियां देखिए........
        ‘‘वास्तुशास्त्र में उल्लिखित सभी नियमों या सूत्रों का प्रतिपादन जिस काल में हुआ था, उस काल के लिए वे प्रासंगिक थे, किन्तु आज विश्व बदल गया है, संपूर्ण परिवेश भिन्न है, आवश्यकताएं बदली हुई हैं, इसलिए मकान या आवास के निर्माण की बातें भी वर्तमान युग के अनुरुप ही होना चाहिए।’’

        राहु, केतु, कुंडली मेलापक, राजयोग और विंशोत्‍तरी पद्धति 

        इस पुस्‍तक के माध्‍यम से उन्‍होने अपनी चिंता जतायी है कि ज्‍योतिष में भी तो कई अवैज्ञानिक तथ्‍य भी इसी प्रकार शामिल हो गए हैं कि सही और गलत में अंतर करना भी मुश्किल हो गया है। राहु, केतु, कुंडली मेलापक, राजयोग और विंशोत्‍तरी पद्धति जैसे सभी अवैज्ञानिक तथ्‍यों का इस पुस्‍तक में विरोध किया गया है। इन पंक्तियों को देखें .... 

        ‘‘अधिकांश राजयोगों की गाणितिक व्याख्या के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि इस प्रकार के योग बहुत सारे कुंडलियों में भरे पड़े हैं, जिनका कोई विशेष अर्थ नहीं है।’’

        ‘‘कल्पना कीजिए, ज्योतिषीय गणना में महादशावाला ग्रह काफी अच्छा फल प्रदान करनेवाला है, अंतर्दशा का ग्रह बहुत बुरा फल प्रदान करने की सूचना दे रहा है। प्रत्यंतर दशा का ग्रह सामान्य अच्छा और सूक्ष्म महादशा का ग्रह सामान्य बुरा फल देने का संकेत कर रहा हो, इन परिस्थितियों में किसी के साथ अच्छी से अच्छी और किसी के साथ बुरी से बुरी या कुछ भी घटित हो जाए, हेड हो जाए या टेल, किसी भी ज्योतिषी के लिए अपनी बात, अपनी व्याख्या, अपनी भविष्यवाणी को सही ठहरा पाने का पर्याप्त अवसर मिल जाता है।’’

        भविष्‍य को देखने की एक संपूर्ण विधा 

        पर साथ ही साथ भविष्‍य को देखने की एक संपूर्ण विधा के तौर पर ज्‍योतिष में बहुत बडी संभावना से भी इंकार नहीं करते, पर ज्‍योतिष के प्रति समाज की भी जबाबदेही होती है। इस पुस्‍तक में रिसर्च से जुडे सामाजिक कल्‍याण की चाहत रखनेवाले एक सच्‍चे ज्‍योतिषी को महत्‍व के साथ साथ साधन दिए जाने की बात भी कही गई है, इनका मानना है कि ऐसा नहीं होने से ज्‍योतिषी ठगी का सहारा लेते हैं।ज्‍योतिष की सभी त्रुटियों को मानते हुए भी इसकी सत्‍यता से इन्‍होने इंकार नहीं किया है। ....

        ‘‘भविष्य की जानकारी के लिए फलित ज्योतिष के सिवा कोई दूसरी विद्या सहायक नहीं हो सकती और किसी व्यक्ति का यह बड़ा सौभाग्य है कि इसकी जानकारी उसे होती है, किन्तु किसी भी हालत में वह सर्वज्ञ नहीं हो सकता।’’

        इन्‍होने अपने द्वारा प्रतिपादित ग्रहशक्ति के ‘गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति’ के रहस्‍य को भी समझाया है। ग्रहों की शक्ति के निर्धारण के लिए उसकी गति को ज्‍योतिषियों को आवश्‍यक मानते हुए ये लिखते हैं ... 

        ‘‘यदि हम ज्योतिषियों से पूछा जाए कि ग्रह-शक्ति की तीव्रता को मापने के लिए हमारे पास कौन सा वैज्ञानिक सूत्र या उपकरण है तो मैं समझता हूँ कि इस प्रश्न का उत्तर देना काफी कठिन होगा, लेकिन जबतक इस प्रश्न का सही उत्तर नहीं मिलेगा, फलित ज्योतिष अनुमान का विषय बना रहेगा।’’

        ‘गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति’ का परिचय 

        ग्रहों की शक्ति के रहस्‍य की जानकारी के बाद विंशोत्‍तरी दशा पद्धति से भिन्‍न इन्‍होने अपने द्वारा स्‍थापित ‘गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति’ की चर्चा की है, ज्‍योतिष का सहसंबंध हर विज्ञान से बनाने की आवश्‍यकता है, तभी इसका विकास होगा। इन्‍होने इस पुस्‍तक में अपनी खोज ‘गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति’ का परिचय आसमान की विभिन्‍न स्थिति के ग्रहों के सापेक्ष चित्र बनाकर समझाया है। इनकी पंक्तियां देखिए ....

        ‘‘हम सभी यह जानते हैं कि बाल्यावस्था या शैशवकाल कुल मिलाकर भोलेपन का काल होता है और उसके भोलेपन का कारण निश्चित रुप से चंद्रमा होता है।’’

        घडी की तरह समय की जानकारी

        वास्‍तव में, बुरे ग्रहों का प्रभाव क्‍या है, कैसे पडता है हमपर और इसका इलाज है या घडी की तरह समय की जानकारी पहले से मिल जाए तो खतरे के पूर्व जानकारी का लाभ हमें मिल जाता है, ज्‍योतिष के महत्‍व की चर्चा करते हुए ये लिखते हैं ....

        ‘‘प्रकृति के नियमों के अनुसार ही हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क में विद्युत तरंगें बदलती रहती है और इसी के अनुरुप परिवेश में सुख-दुःख, संयोग-वियोग सब होता रहता है।‘’

        ज्‍योतिष का आध्‍यात्‍म से संबंध 

        अंत में ज्‍योतिष का आध्‍यात्‍म से क्‍या संबंध है , इसकी विवेचना की गयी है ....

        ‘‘परम शक्ति का बोध ही परमानंद है। जो लोग बुरे समय की महज अग्रिम जानकारी को आत्मविश्वास की हानि के रुप में लेते हैं, वे अप्रत्याशित रुप से प्रतिकूल घटना के उपस्थित हो जाने पर अपना संतुलन कैसे बना पाते होंगे ? यह सोचनेवाली बात है।’’

        ज्‍योतिषियों से माफी

        बिल्‍कुल अंतिम पाठ में उन ज्‍योतिषियों से माफी मांगी गई है , जिनकी भावनाओं को इस पुस्‍तक से ठेस पहुंच सकती है ...

        ‘‘ग्रहों के प्रभाव से संबंधित इस नए रहस्य की खोज के बाद मैं प्रबुद्ध ज्योतिषियों से विनम्र निवेदन करना चाहूँगा कि एक ज्योतिषी होकर भी मैने फलित ज्योतिष की कमजोरियों को केवल स्वीकार ही नहीं किया, वरन् आम जनता के समक्ष फलित ज्योतिष की वास्तविकता को यथावत रखने की चेष्टा की है।’’ 

        ऐसा इसलिए क्‍योंकि भारतवर्ष में ज्‍योतिष के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कम लोग हैं, अधिकांश का आस्‍थावान चिंतन है , वे हमारे ऋषि महर्षियों को भगवान और ज्‍योतिष को धर्मशास्‍त्र समझती है, जबकि श्री विद्या सागर महथा जी ऋषिमुनियों को वैज्ञानिक तथा ज्‍योतिष शास्‍त्र को विज्ञान मानते हैं, जिसमें समयानुकूल बदलाव की आवश्‍यकता है।

        आस्‍था से विज्ञान तक का सफर

        इस प्रकार ज्‍योतिष विशेषज्ञों के साथ ही साथ आम पाठकों के लिए भी पठनीय श्री विद्या सागर महथा जी की यह पुस्‍तक ‘फलित ज्‍योतिष सच या झूठ’ आस्‍थावान लोगों के लिए आस्‍था से विज्ञान तक का सफर तय करवाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोणवालों के लिए तो इसके हर पाठ में विज्ञान ही है। समाज में मौजूद हर तरह के भ्रमों और तथ्‍यों की चर्चा करते हुए इन्‍हें 31 शीर्षकों के अंतर्गत 208 पन्‍नों और 72228 शब्‍दों में बिल्‍कुल सरल भाषा में लिखा गया है। राहु और केतु को ग्रह न मानते हुए चंद्र से शनि तक के आसमान के 7 ग्रहों के 21 प्रकार की स्थिति और उसके फलाफल को चित्र द्वारा समझाया गया है, ताकि इस पुस्‍तक को समझने के लिए ज्‍योतिषीय ज्ञान की आवश्‍यकता न पडे।

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          योगकारक ग्रहों का फलाफल

           योगकारक ग्रहों का फलाफल

          yogakaraka planet for all ascendants

          16 फरवरी 2012 को पोस्‍ट किए गए लेख में विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए योगकारक और अयोगकारक ग्रहों का फलाफल तय करने की चर्चा की गयी थी। चंद्र कुंडली देखना कैसे सीखें  ?

          yogakaraka planet for all ascendants

          Yogkarak grah for Aries

           इस हिसाब से मेष लग्‍नवालों की चंद्रमा को +2 , बुध को -5 , मंगल को +4 , शुक्र को +4 , सूर्य को +6 , बृहस्‍पति को +7 तथा शनि को 0 अंक मिलते हैं यानि बृहस्पति > सूर्य >मंगल >शुक्र >चन्द्रमा >शनि >बुध ,  इसलिए यदि और कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो सुख प्राप्ति के मामलों में मेष लग्‍नवालों की भाग्‍य , खर्च और बाहरी संदर्भों की स्थिति सर्वाधिक अच्‍छी होती है , उसके बाद बुद्धि , ज्ञान और संतान का स्‍थान होता है , उसके बाद शरीर , व्‍यक्तित्‍व , स्‍वास्‍थ्‍य , आत्‍मविश्‍वास , जीवन शैली , धन , कोष , घर गृहस्‍थी और ससुराल पक्ष का वातावरण होता है , वाहन समेत हर प्रकार की संपत्ति की भी स्थिति अच्‍छी होती है , पिता , समाज , प्रतिष्‍ठा , कर्मक्षेत्र की सफलता और अन्‍य प्रकार के लाभ का नं उसके बाद होता है , बुध के ऋणात्‍मक होने से भाई , बहन बंधु बांधव और सहयोगी से संबंधित जबाबदेही या किसी प्रकार के झंझट की उपस्थिति की संभावना बनती है।

          Yogkarak grah for Taurus

          इसी प्रकार वृष लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को -2 अंक मिलते हैं , बुध को +7 अंक , मंगल को +3 , शुक्र को +2 , सूर्य को +2 , बृहस्‍पति को -5 तथा शनि को +11 अंक मिलते हैं यानि शनि > बुध >मंगल >शुक्र >सूर्य >चन्द्रमा > बृहस्पति ,  इसलिए यदि और कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो सुख प्राप्ति के मामलों में वृष लग्‍नवालों का भाग्‍य , पिता , प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण की स्थिति सबसे अच्‍छी होती है , उसके बाद इनकी धन , कोष , बुद्धि , ज्ञान , संतान का स्‍थान होता है , इसके बाद घर , गृहस्‍थी , खर्च और बाहरी संदर्भ , उसके बाद स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास , झंझट के लडने की शक्ति , वाहन समेत हर प्रकार की संपत्ति के मामले होते हैं , चंद्रमा के कारण भाई बहन , बंधु बांधवों के सुख में थोडी कमी और बृहस्‍पति के कारण सबसे कमजोर इनकी जीवन शैली और लाभ होता है।

          Yogkarak grah for Gemini

          इसी प्रकार मिथुन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +1 अंक मिलते हैं , बुध को +7 अंक , मंगल को -7 , शुक्र को +6 अंक मिलते हैं। इसी प्रकार सूर्य को -2 , बृहस्‍पति को +7 तथा शनि को +6 अंक मिलते हैं यानी बृहस्पति > बुध > शनि >शुक्र >चन्द्रमा >सूर्य > मंगल  , इसलिए यदि और कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो सुख प्राप्ति के मामलों में मिथुन लग्‍नवालों के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास , हर प्रकार की संपत्ति , घर गृहस्‍थी का वातावरण , पिता पक्ष और पद प्रतिष्‍ठा की स्थिति अच्‍छी होती है , उसके बाद बुद्धि , ज्ञान , संतान , खर्च , बाहरी संदर्भ , भाग्‍य और जीवन शैली का स्‍थान भी पक्ष में ही होता है , धन की स्थिति भी सकारात्‍मक होती है , पर भाई , बहन , बंधु बांधव की स्थिति थोडी गडबड तथा किसी प्रकार के झंझट की उपस्थित की संभावना और लाभ की कमजोरी बनी रहती है।

          Yogkarak grah for Cancer

          इसी प्रकार कर्क लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +5 अंक मिलते हैं , बुध को -2 अंक , मंगल को +10 , शुक्र को -2 , सूर्य को +1 , बृहस्‍पति को +4 तथा शनि को +2 अंक मिलते हैं यानि मंगल > चंद्र > बृहस्पति > शनि > सूर्य > बुध > शुक्र ,  इसलिए यदि और कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो सुख प्राप्ति के मामलों में कर्क लग्‍न वालों के बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता , समाज , पद ,प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण को सर्वाधिक बढिया माना जा सकता है। उसके बाद उनके शरीर , व्‍यक्तित्‍व और आत्‍मविश्‍वास की स्थिति होती है , इसके बाद भाग्‍य और हर प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति , फिर घर , गृहस्‍थी और जीवनशैली को भी सकारात्‍मक माना जा सकता है। इनका भाई , बहन , बंधु बांधव , खर्च , बाहरी संदर्भ , माता पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति या लाभ से संबंधित मामले कुछ कमजोर होते हैं।

          Yogkarak grah for Leo

          इसी प्रकार सिंह लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को 0 , बुध को -3 अंक , मंगल को +9 , शुक्र को +2 , सूर्य को +5 , बृहस्‍पति को +5 , तथा शनि को 0 अंक मिलते हैं यानि मंगल > बृहस्पति > सूर्य > शुक्र > शनि > चंद्र > बुध , इसलिए यदि और कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो सुख प्राप्ति के मामलों में सिंह लग्‍न वालों का भाग्‍य और हर प्रकार की संपत्ति की स्थिति बहुत अच्‍छी होती है। उसके बाद इनके शरीर , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍म विश्‍वास , बुद्धि , ज्ञान , संतान और जीवन शैली को स्‍थान दिया जा सकता है , भाई , बहन , बंधु ,बांधव , पद प्रतिष्‍ठा की स्थिति भी अच्‍छी होती हैं , खर्च , बाहरी संदर्भ , घर गृहस्‍थी और किसी प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति भी होती है , पर बुध के ऋणात्‍मक होने से धन के मामले काफी सुखद नहीं रह पाते।

          Yogkarak grah for Virgoइसी प्रकार कन्‍या लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को -4 अंक , बुध को +9 अंक , मंगल को -3 , शुक्र को +8 , सूर्य को 0 , बृहस्‍पति को +5 तथा शनि को +3 अंक मिलते हैं यानि  बुध > शुक्र > बृहस्पति > शनि > सूर्य > मंगल > चंद्र , इसलिए यदि अन्‍य कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो कन्‍या लग्‍न वालों के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास , पिता पक्ष , सामाजिक राजनीतिक पक्ष और प्रतिष्‍ठा संबंधी मामले काफी सुखद होते हैं। इनके भाग्‍य और धन की स्थिति भी अच्‍छी होती है , घर गृहस्‍थी , पारिवारिक मामले और हर प्रकार की संपत्ति के मामले भी सुखद होते हैं , संतान पक्ष , प्रभाव और हर प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति भी सामान्‍य तौर पर अच्‍छी होती है , खर्च के मामले भी सामान्‍य होते हैं , पर लाभ के मामले ऋणात्‍मक महसूस होते हैं , भाई बहन बंधु बांधवों से भी इन्‍हें सहयोग कम मिलता है।

          Yogkarak grah for Libra

          इसी प्रकार तुला लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +4 अंक , बुध को +7 अंक , मंगल को +4 , शुक्र को +4 अंक , सूर्य को -4 , बृहस्‍पति को -5 तथा शनि को +8 अंक मिलते हैं यानी शनि >बुध > मंगल > चंद्र > शुक्र >सूर्य > बृहस्पति  , इस कारण यदि अन्‍य कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो तुला लग्‍नवाले सुख के मामलों में बुद्धि , ज्ञान , हर प्रकार की संपत्ति और संतान की स्थिति को सर्वाधिक मजबूत पाते हैं। इनके भाग्‍य और खर्च की स्थिति भी काफी सुखद होती है , स्‍वास्‍थ्‍य , जीवन शैली , पिता , समाज , प्रतिष्‍ठा , धन , कोष और घर गृहस्‍थी का वातावरण भी अच्‍छा होता है , पर लाभ के मामले कष्‍टकर होते हैं , भाई बहन , बंधु बांधव और प्रभाव की स्थिति भी ऋणात्‍मक होती है। 

          Yogkarak grah for Scoropio

          इसी प्रकार वृश्चिक लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +7 अंक , बुध को -5 अंक , मंगल को +2 , शुक्र को+3 अंक , सूर्य को +4 अंक, बृहस्‍पति को +7 अंक तथा शनि को 0 अंक मिलते हैं यानि बृहस्पति > चन्द्रमा > सूर्य > शुक्र > मंगल > शनि > बुध  , इसलिए यदि कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो वृश्चिक लग्‍नवाले भाग्‍य , धन , बुद्धि , ज्ञान और संतान के मामले में सर्वाधिक सुखद वातावरण प्राप्‍त करते हैं , पिता पक्ष , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक वातावरण भी सुखद होता है , इनकी घर गृहस्‍थी और खर्च का वातावरण भी सुखद बनी होतीं है , भाई बंधु , हर प्रकार की संपत्‍ित के मामले भी अच्‍छे होते हैं , पर जीवनशैली कुछ कष्‍टकर होती है , इन्‍हें लाभ से कुछ समझौता करना पडता है।

          Yogkarak grah for Sagittarius

          इसी प्रकार धनु लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को -1 अंक , बुध को +7 अंक , मंगल को +6 , शुक्र को -7 अंक , सूर्य को +7 , बृहस्‍पति को +7 तथा शनि को -1 अंक मिलते हैं यानि बृहस्पति > सूर्य > बुध > मंगल > शनि > चंद्र > शुक्र , इसलिए यदि कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो तो धनु लग्‍न वालों का सबसे सुखद संदर्भ पिता , घर गृहस्‍‍थी का वातावरण और सामाजिक वातावरण होता है , शरीर , व्‍यक्तित्‍व , माता पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , भाग्‍य , बुद्धि , ज्ञान , संतान और खर्च की स्थिति भी मनोनुकूल बने होते है , पर धन कोष , भाई बहन , बंधु बांधव की स्थिति और जीवन शैली कुछ कमजोर होता है , शुक्र के अधिक ऋणात्‍मक होने से जीवन में कई प्रकार के झंझट की उपस्थिति और लाभ की कमी की संभावना बनी रहती है।

          Yogkarak grah for Capricorn

          इसी प्रकार मकर लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +3 अंक , बुध को +4 अंक , मंगल को -2 , शुक्र को+10 अंक , सूर्य को -1 , बृहस्‍पति को -2 तथा शनि को  +6 अंक मिलते हैं यानि शुक्र > शनि > बुध > चंद्र > सूर्य > मंगल > बृहस्पति  ,  इस कारण यदि कोई ज्‍योतिषीय बडा कारण न हो तो मकर लग्‍न वालों के लिए सर्वाधिक सुखद संदर्भ बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता , कैरियर और सामाजिक वातावरण होता है। शरीर , व्‍यक्तित्‍व और धन की स्थिति भी सुखद होती है , भाग्‍य , घर गृहस्‍थी का वातावरण , प्रभाव और हर प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति भी अच्‍छी होती है , पर ये जीवन शैली को लेकर हल्‍की कमजोरी महसूस करते हैं , माता पक्ष और किसी प्रकार की संपत्ति से संबंधित लाभ में कमी होती है , भाई , बंधु और खर्च के मामले भी कुछ दबाबपूर्ण होते हैं।

          Yogkarak grah for Aquarius

          इसी प्रकार कुंभ लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को -3 अंक , बुध को +5 अंक , मंगल को +2 , शुक्र को +9 , सूर्य को +3 , बृहस्‍पति को -3 तथा शनि +5 अंक मिलते हैं यानि शुक्र > शनि > बुध > सूर्य > मंगल > बृहस्पति > चंद्र , इसलिए यदि ज्‍योतिषीय कारण न हो तो माता पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और भाग्‍य के मामले में कुंभ लग्‍नवालों की स्थिति सर्वाधिक सुखद होती है , इनके शरीर , व्‍यक्तित्‍व , खर्च और बाहरी संदर्भ के मामले भी सुखद होते हैं , बुद्धि , ज्ञान , संतान और जीवन शैली के मामले भी अच्‍छे होते हैं , घर गृहस्‍थी का वातावरण सुखद होता है , उसके बाद इनके जीवन में भाई , बहन , बंधु बांधव , पिता और प्रतिष्‍ठा से संबंधित मामलों का सुख आता है , पर किसी प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति कम होती है , धन और लाभ का वातवरण भी कमजोर बना होता है।

          Yogkarak grah for Pisces

          इसी प्रकार मीन लग्‍नवालों की जन्‍मकुंडली में चंद्रमा को +6 अंक , बुध को +5 अंक , मंगल को +8 , शुक्र को -3 , सूर्य को -3 , बृहस्‍पति को +9 तथा शनि को -4 अंक मिलते हैं यानि  बृहस्पति >मंगल > चन्द्रमा > बुध > शुक्र > सूर्य > शनि  , इसलिए यदि कोई बडा ज्‍योतिषीय कारण न हो , तो मीन लग्‍न वाले शरीर , व्‍यक्तित्‍व , हर प्रकार की संपत्ति , धन और भाग्‍य के मामले में सर्वाधिक सुख प्राप्‍त करते हैं , इनका बुद्धि , ज्ञान , संतान , घर गृहस्‍थी और पद प्रतिष्‍ठा का वातावरण भी सुखद होता है , पर भाई , बहन , बंधु , बांधव , जीवन शैली , झंझट से जूझने की शक्ति कुछ कमजोर बनी होती है , लाभ और खर्च के मामले सर्वाधिक कमजोर होते हैं।

          उपरोक्‍त लेख ग्रहों के स्‍वामित्‍व के आधार पर लिखा गया है , योग कारक और अयोग कारक ग्रहों के निर्णय में जन्‍मकुंडली में जिस भाव में ग्रह की उपस्थिति हो , इसके अंक को भी जोडा जाना चाहिए , जिससे ग्रहों की शक्ति का उपयुक्‍त निर्णय हो सकता है। इसके बाद ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति के आधार पर ग्रहों की शक्ति का निर्णय करना उचित है । अपनी अपनी शक्ति के हिसाब से ही सभी ग्रह अपने प्रतिफलन काल में प्रभाव डालते हैं। 

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            गत्यात्मक ज्योतिष के अचूक उपाय

             

            गत्यात्मक ज्योतिष के अचूक उपाय

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            जीवन को देखने और समझने का सबका नजरिया भिन्‍न भिन्‍न होता है , कुछ लोग उथली मानसिकता के साथ इसे देखते हैं तो कुछ गहरी समझ के साथ। जो गहराई से जीवन के रहस्‍यों को समझने की कोशिश करते हैं , उन्‍हें हम दूरदर्शी और अनुभवी मानते हैं और उनकी सोंच के साथ चलने की कोशिश भी करते हैं।

            प्रत्‍येक परिवार में एक दो व्‍यक्ति , समाज में कुछ अनुभवी लोग आनेवाली पीढी को रास्‍ता दिखाने में काम करते हैं। कुछ तो इतने अनुभवी और ज्ञानी होते हैं , जिनकी परिवार या समाज की किसी समस्‍या को गहराई से समझते हुए उसके निराकरण का भरपूर उपाय करते है , ताकि आने वाली पीढी को उस समस्‍या का सामना न करना पडे। इस तरह छोटे छोटे स्‍तर पर ऐसे बहुत सारे अनुसंधान होते रहते हैं।
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            किसी भी विज्ञान को विकसित करने के लिए युगों तक न जाने कितने विद्वानों ने काम किया होता है। वर्षों तक प्रकृति में बिखरे ज्ञान को व्‍यवस्थित करने के बाद एक विज्ञान का जन्‍म होता है , जिसके प्रयोग से मानव जाति लाभान्वित होती है।  लाभ ही न हो तो किसी विज्ञान का कोई महत्‍व नहीं होता। विज्ञान के विकसित होने से पूरे राष्‍ट्र , नए युग के लिए जीने के लिए एक नई सोंच , नया ढंग आता है।

            जानिए, आपके लिए कैसा रहेगा 2025 ?

             

            सामने आती है , ऐसी जीवन शैली , जो आपको बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती है। पर किसी के अनुभव से या विज्ञान से लाभ प्राप्‍त करने के लिए उसपर विश्‍वास करना आवश्‍यक होता है , उसके द्वारा बनाए गए नियमों को अपने जीवन में लागू करना होता है , बिना विश्‍वास किए उसके कथनानुसार हम नहीं चल पाएंगे।

            चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

            इतने वर्षों से ज्‍योतिष के नि:स्‍वार्थ अध्‍ययन और ग्रहों के जड और चेतन पर पडने वाले प्रभाव के खुलासे के बाद आज के युग के अनुरूप 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को विकसित कर लेने के पश्‍चात् कुछ दिनों से ज्‍योतिष को मानवोपयोगी बनाने के बारे में निरंतर चिंतन चल रहा है।

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            ग्रहों के बुरे प्रभाव को पूर्णतया दूर करने में तो हमें सफलता नहीं मिल सकती , पर ग्रहों के अच्‍छे प्रभाव को  बढाया और बुरे प्रभाव को घटाया जा सकता है। इसके अलावे ग्रहों के प्रभाव की जानकारी के बाद जीवन के प्रति मानव जाति की सोंच में एक बडा परिवर्तन आ सकता है । 

            इसके लिए सबसे पहले ज्‍योतिष पर विश्‍वास करना होगा, ऐसी जीवन शैली विकसित करनी होगी , जिसके द्वारा हम ग्रहों के बुरे प्रभाव में आकर भी निश्चिंत रह सकें। समाज किसी सफलता और असफलता का श्रेय मनुष्‍य के साथ साथ उसके भाग्‍य को भी दे दे, तो काफी समस्‍या हल हो सकती है। कोई व्‍यक्ति निश्चिंत होकर अपनी रूचि के काम तो कर सकता है , वह सफलता की उम्‍मीद में किसी प्रकार का समझौता तो नहीं करेगा।

            हम बीमारी में किसी भी पैथी की कोई दवा भी लेते हैं , तो हमारे भीतर की भावना असर करती है। हम जितने ही विश्‍वास के साथ डॉक्‍टर के दिए हुए दवा या सुझाव को ग्रहण करते हैं , हमें उतना ही अधिक फायदा नजर आता है। यहां तक कि यदि डॉक्‍टर पर विश्‍वास हो , तो उसका स्‍पर्श ही रोगी को ठीक करने में समर्थ है। चूंकि एलोपैथी पर हमें पूरा विश्‍वास है , किसी खास शारीरिक मानसिक हालातों में यदि डॉक्‍टर की सलाह न हो , तो हम बच्‍चे को गर्भ में भी आने न देंगे। 

            यदि सबकुछ सामान्‍य हो , तब भी किसी बच्‍चे के गर्भ में आते ही हम उस हिसाब से बच्‍चे की देख रेख शुरू कर देते हैं। लोगों की यही भावना ज्‍योतिष के प्रति भी तो होनी चाहिए, शुरूआत से ही ग्रहों के हिसाब से उसकी देख भाल , रूचि के काम करने देने की छूट होनी चाहिए। सफलता में अति उत्‍साह और असफलता में नैराश्‍य को जन्‍म देने से बचना चाहिए। अच्‍छी परिस्थितियों का इंतजार किया जाना चाहिए।

            पर ऐसा नहीं है , ज्‍योतिष को हम विज्ञान नहीं मानते , इसलिए हमारे जीवन शैली में इसका कोई स्‍थान नहीं है। जिनका शुरूआती जीवन असफल होता है , वो ग्रहों के प्रभाव को कुछ हद तक मानते भी हैं , पर जिनका जीवन सामान्‍य होता है , जबतक सामान्‍य बना रहता है , इसका कोई महत्‍व नहीं समझते। जिनके जीवन में सफलता आती रहती है , वे इसका श्रेय अपनी मेहनत को देते हैं। 

            जैसे ही असफलता की शुरूआत होती है , ज्‍योतिषी के पास सबसे पहले वही पहुंचते हैं , मानो एक ज्‍योतिषी तुरंत चमत्‍कार ही कर देगा। मैने ग्रहों के बुरे प्रभाव  को कम या दूर करने से संबंधित  बहुत लिखा हैं , सबमें ग्रहों के अनुरूप अपनी जीवन शैली को ढालने के बारे में ही समझाया है, किसी चमत्‍कार की बात नहीं लिखी गयी है। 

            समाज में जबतक ज्‍योतिष को विज्ञान के रूप में समझने की कोशिश नहीं की जाएगी , ज्‍योतिष से कोई लाभ प्राप्‍त करना नामुमकिन है। पर यह विडंबना ही है कि आजतक ज्‍योतिष को चमत्‍कार समझा जाता रहा है।

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              गत्यात्मक ज्योतिष की पुस्तकें


              गत्यात्मक ज्योतिष की पुस्तकें 

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              विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में मेरे और पिताजी के लेखों को देखते हुए 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को जानने की इच्‍छा रखने वाले अनेक पाठकों के पत्र मुझे मिलते रहे हैं। उनकी इच्‍छा को ध्‍यान में रखते हुए 1991 से ही विभिन्‍न ज्‍योतिषीय पत्र पत्रिकाओं में मेरे आलेख प्रकाशित होने शुरू हो गए और दिसंबर 1996 मे ही मेरी पुस्‍तक ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष: ग्रहों का प्रभाव’ प्रकाशित होकर आ गयी थी । पर मेरे द्वारा पत्र पत्रिकाओं में ज्‍योतिष से संबंधित जितने भी लेख छपे , वो सामान्‍य पाठकों के लिए न होकर ज्‍योतिषियों के लिए थे। यहां तक कि मेरी पुस्‍तक भी उन पाठकों के लिए थी ,जो पहले से ज्‍योतिष का ज्ञान रखते थे। इसे पाठकों का इतना समर्थन प्राप्‍त हुआ था कि प्रकाशक को शीघ्र ही 1999 में इसका दूसरा संस्‍करण प्रकाशित करना पडा।

              कुछ वर्ष पूर्व ही प्रकाशक महोदय का पत्र तीसरे संस्‍करण के लिए भी मिला था , जिसकी स्‍वीकृति मैने उन्‍हें नहीं दी थी। इसलिए छह महीने पूर्व तक यत्र तत्र बाजार में मेरी पुस्‍तकें उपलब्‍ध थी , पर इधर बाजार में मेरी पुस्‍तक नहीं मिल रही है। इसलिए आम पाठकों को यह जानकारी दे दूं कि मेरे पास इस पुस्‍तक की प्रतियां उपलब्‍ध हैं ...

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              150 पृष्‍ठों वाली बाजार में आयी मेरी इस पुस्‍तक को पढने के बाद बहुत पाठकों की ओर से बहुत अच्‍छी प्रतिक्रियाएं आयी। सबों का प्रस्‍तुतिकरण मुश्किल है , दो प्रतिक्रियाओं का पत्र आपके सम्‍मुख हैं ......

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              इसके अलावे हमारी एक और पुस्‍तक प्रकाशित हो चुकी है......

              ज्योतिष की पुस्तकें


              हर घर में रखने और पढने लायक इस पुस्‍तक ‘फलित ज्‍योतिष कितना सच कितना झूठ’ के लेखक श्री विद्या सागर महथा जी हैं। ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को स्‍थापित करने का पूरा श्रेय अपने माता पिता को देते हुए ये लिखते हैं, ‘‘मेरी माताजी सदैव भाग्य और भगवान पर भरोसा करती थी। मेरे पिताजी निडर और न्यायप्रिय थे। दोनों के व्यक्तित्व का संयुक्त प्रभाव मुझपर पड़ा।’’ 

              ज्‍योतिष के प्रति पूर्ण विश्‍वास रखते हुए भी इन्‍होने प्रस्‍तावना या भूमिका लिखने के क्रम में उन सैकडों कमजोर मुद्दों को एक साथ उठाया है, जो विवादास्‍पद हैं , जैसे ‘‘ज्योतिष और अन्य विधाएं परंपरागत ढंग से जिन रहस्यों का उद्घाटन करते हैं, उनके कुछ अंश सत्य तो कुछ भ्रमित करनेवाली पहेली जैसे होते हैं।’’ 

              इस पुस्‍तक के लिए परम दार्शनिक गोंडलगच्‍छ शिरोमणी श्री श्री जयंत मुनिजी महाराज के मंगल संदेश ‘‘यह महाग्रंथ व्यापक होकर विश्व को एक सही संदेश दे सके ऐसा ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करके हम पुनः आशीर्वाद प्रदान कर रहे है।’’ को प्रकाशित करने के साथ साथ ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के कुछ प्रेमियों के आर्शीवचन, प्रोत्‍साहन और प्रशंसा के पत्रों को भी ससम्‍मान स्‍थान दिया गया है।

              ज्‍योतिष विशेषज्ञों के साथ ही साथ आम पाठकों के लिए भी पठनीय श्री विद्या सागर महथा जी की यह पुस्‍तक ‘फलित ज्‍योतिष सच या झूठ’ आस्‍थावान लोगों के लिए आस्‍था से विज्ञान तक का सफर तय करवाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोणवालों के लिए तो इसके हर पाठ में विज्ञान ही है। समाज में मौजूद हर तरह के भ्रमों और तथ्‍यों की चर्चा करते हुए इन्‍हें 31 शीर्षकों के अंतर्गत 208 पन्‍नों और 72228 शब्‍दों में बिल्‍कुल सरल भाषा में rखा गया है। राहु और केतु को ग्रह न मानते हुए चंद्र से शनि तक के आसमान के 7 ग्रहों के 21 प्रकार की स्थिति और उसके फलाफल को चित्र द्वारा समझाया गया है, ताकि इस पुस्‍तक को समझने के लिए ज्‍योतिषीय ज्ञान की आवश्‍यकता न पडे।

              चाहे समाज में प्रचलित ‘वार’ से फलित कथन हो या यात्रा करने का योग, शकुन, मुहूर्त्‍त हो या नजर का असर जैसे अंधविश्‍वास हो, इस पुस्‍तक में इन्‍होने जमकर चोट की है ... ‘‘मैने मंगलवार का दिन इसलिए चयन किया क्योंकि इस दिन अंधविश्वास के चक्कर में पड़ने से लोगों की भीड़ तुम्हारे पास नहीं होती और इसलिए तुम फुर्सत में होते हो।’’

              हस्‍तरेखा, हस्‍ताक्षर विज्ञान, न्‍यूमरोलोजी, वास्‍तुशास्‍त्र, प्रश्‍नकुंडली जैसी विधाएं ज्‍योतिष के समानांतर नहीं हो सकती ........ ‘‘वास्तुशास्त्र में उल्लिखित सभी नियमों या सूत्रों का प्रतिपादन जिस काल में हुआ था, उस काल के लिए वे प्रासंगिक थे’

              राहु, केतु, कुंडली मेलापक, राजयोग और विंशोत्‍तरी पद्धति जैसे सभी अवैज्ञानिक तथ्‍यों का इस पुस्‍तक में विरोध किया गया है ....

              ‘‘अधिकांश राजयोगों की गाणितिक व्याख्या के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि इस प्रकार के योग बहुत सारे कुंडलियों में भरे पड़े हैं, जिनका कोई विशेष अर्थ नहीं है।’’

              इन्‍होने इस पुस्‍तक में अपनी खोज ‘गत्‍यात्‍मक दशा पद्धति’ का परिचय आसमान की विभिन्‍न स्थिति के ग्रहों के सापेक्ष चित्र बनाकर समझाया है .... ‘‘हम सभी यह जानते हैं कि बाल्यावस्था या शैशवकाल कुल मिलाकर भोलेपन का काल होता है और उसके भोलेपन का कारण निश्चित रुप से चंद्रमा होता है।’’

              वास्‍तव में, बुरे ग्रहों का प्रभाव क्‍या है, कैसे पडता है हमपर , ज्‍योतिष के महत्‍व की चर्चा करते हुए ये लिखते हैं ....‘‘प्रकृति के नियमों के अनुसार ही हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क में विद्युत तरंगें बदलती रहती है और इसी के अनुरुप परिवेश में सुख-दुःख, संयोग-वियोग सब होता रहता है।‘’

              अंत में ज्‍योतिष का आध्‍यात्‍म से क्‍या संबंध है , इसकी विवेचना की गयी है ....‘‘परम शक्ति का बोध ही परमानंद है। जो लोग बुरे समय की महज अग्रिम जानकारी को आत्मविश्वास की हानि के रुप में लेते हैं, वे अप्रत्याशित रुप से प्रतिकूल घटना के उपस्थित हो जाने पर अपना संतुलन कैसे बना पाते होंगे ? यह सोचनेवाली बात है।

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              Name : Amar Jyoti
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              Branch : Rajouri Garden

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              कुंडली मिलान आवश्यक नहीं

               Online Jyotish Kundali matching

              आए दिन हमारी भेंट ऐसे अभिभावकों से होती है, जो अपने बेटे या बेटी के विवाह न हो पाने से बहुत परेशान हैं। उनकी विवाह योग्य संतानें पढ़ी-लिखी है ,पर पॉच-सात वर्ष से उपयुक्त वर या वधू की तलाश कर रहें हैं ,कहीं भी सफलता हाथ नहीं आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण किसी संतान का मंगली होना है और मंगली पार्टनर न होने से वे कई जगह बात बढ़ा भी नहीं पाते। 

              अगर पार्टनर मंगली मिल भी जाए तो कई जगहों पर लड़के-लड़कियों के गुण न मिल पाने से भी समस्या बनी ही रह जाती है। ये समस्या समाज में बहुतायत में है और सिर्फ कन्या के ही अभिभावक नहीं , वर के अभिभावक भी ऐसी समस्याओं से समान रुप से जूझ रहे हैं । लड़का-लड़की या परिवार के पूर्ण रुप से जंचने के बावजूद भी मंगला-मंगली और गुण-मिलान टेबल pdf  के चक्कर में संबंध जोड़ना संभव नहीं हो पाता है। 

              Kundali milan in hindi by birth date

              पुराने युग में शादी-विवाह एक गुड्डे या गुड़िया की खेल की तरह था। सिर्फ पारिवारिक पृश्ठभूमि का ध्यान रखते हुए किसी भी लड़की का हाथ किसी भी लड़के को सौंप दिया जाता था । कम उम्र में शादी होने के कारण लड़के-लड़कियों कें व्यक्तित्व ,आचरण या व्यवहार का कोई महत्व नहीं था। इस कारण बड़े होने के बाद कभी-कभी लड़के-लड़कियों के विचारों में टकराव होने की संभावना बनी रहती थी । इसी कारण अभिभावक शादी करने से पूर्व ज्योतिषियों से सलाह लेना आवश्यक समझने लगें और इस तरह कुंडली मिलाने की प्रथा की शुरुआत हुई।

               कुंडली machinके अवैज्ञानिक तरीके के कारण समाज में वैवाहिक मतभेदों में कोई कमी नहीं आई ,साथ ही दुर्घटनाओं के कारण भी जातक के वैवाहिक सुख में बाधाएं उपस्थित होती ही रहीं , लेकिन फिर भी ( गुण मिलान टेबल pdf  ) के अनुसार कुंडली मिलाना वर्तमान युग में भी एक आवश्यक कार्य समझा जाता है यद्यपि कुंडली मिलाना आज किसी समस्या का समाधान न होकर स्वयं एक समस्या बन गया है।

              Marriage matching online Jyotish

              Kundali milan in hindi by mangal

              ज्योतिष की पुस्तकों के अनुसार किसी भी लड़के या लड़की की जन्मकुंडली में लग्न भाव , व्यय भाव , चतुर्थ भाव , सप्तम भाव या अश्टम भाव में मंगल स्थित हो तो उन्हें मांगलीक कहा जाता है। परंपरागत ज्योतिष में ऐसे मंगल का प्रभाव बहुत ही खराब माना जाता है। यदि पति मंगला हो तो पत्नी का नाश तथा पत्नी मंगल हो तो पति का नाश होता है । 

              संभावनावाद की दृष्टि से इस बात में कोई वैज्ञानिकता नहीं है। किसी कुंडली में बारह भाव होते हैं और पॉच भाव में मंगल की स्थिति को अनिष्‍टकर बताया गया है। इस तरह समूह का 5/12 भाग यानि लगभग 41 प्रतिशत लोग मांगलिक होते है ,लेकिन अगर समाज में ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जाए जिनके पति या पत्नियां मर गयी हों ,तो हम पाएंगे कि उनकी संख्या हजारों में भी एक नहीं है।

              चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

              Janm Kundali milan in marriage

              मंगला-मंगली के अतिरिक्त ज्योतिष की पुस्तकों में कुंडली मिलाने के लिए एक गुण मिलान टेबल पीडीऍफ़  का उपयोग किया जाता है। इस सारणी से केवल चंद्रमा के नक्षत्र-चरण के आधार पर लड़के और लड़कियों के मिलनेवाले गुण को निकाला जाता है। यह विधि भी पूर्णतया अवैज्ञानिक है। किसी भी लड़के या लड़की के स्वभाव , व्यक्तित्व और भविष्‍य का निर्धारण सिर्फ चंद्रमा ही नहीं ,वरन् अन्य सभी ग्रह भी करतें हैं । इसलिए दो जन्मकुंडलियों के कुंडली-मेलापक द्वारा गुण निकालने की प्रथा बिल्‍कुल गलत है। 

              इस संबंध में एक उदाहरण का उल्लेख किया जा सकता है। मेरे पिताजी के एक ब्राह्मण मित्र ने , जो स्वयं ज्योतिषी हैं और जिनका जन्म पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ था , पुष्‍य नक्षत्र में स्थित चंद्रमावाली लड़की को ही अपनी जीवनसंगिनी बनाया , क्योंकि ऐसा करने से कुंडली मेलापक तालिका के अनुसार उन्हें सर्वाधिक 35 अंक प्राप्त हो रहे थें । इतना करने के बावजूद उन्हें अपनी पत्नी से एक दिन भी नहीं बनी ।

              किसी कारणवश वे तलाक तो नहीं ले पाए परंतु उनका मतभेद इतना गहरा बना रहा कि एक ही घर में रहते हुए भी आपस में बातचीत भीं बंद रहा। इसका अर्थ यह नहीं कि ज्‍योतिष विज्ञान ही झूठा है , ग्रहों का प्रभाव मनुष्‍य पर नहीं पड़ता है।दरअसल मेरे पिताजी के उस मित्र की कुंडली में स्‍त्री पक्ष या घर-गृहस्थी के सुख में कुछ कमी थी ,इसलिए विवाह के बावजूद उन्हें सुख नहीं प्राप्त हो सका।

              लेकिन आप चाहें तो इस वेबसाइट में जाकर अपने बच्चों की जन्मकुंडली मैच कर सकते हैं -----

               online Jyotish Kundali matching

              वैवाहिक मामले 

              Janam kundli match for marriage in Hindi

              एक सज्जन अपनी पुत्री की तुला लग्‍न की कुंडली लेकर मेरे पास आएं। सप्तम भावाधिपति मंगल अतिवक्र होकर अष्‍टमभाव में स्थित था , ऐसी स्थिति में लड़की पूरी युवावस्था यानि 24 वर्ष से 48 वर्ष तक पति के सुख में कमी और घर-गृहस्‍थी में बाधा महसूस कर सकती थी , यह सोंचकर मैने उस लड़की को नौकरी कर अपने पैरों पर खड़े होने की सलाह दी ,लेकिन अभिभावक तो लड़की की शादी करके ही निश्चिंत होना चाहते हैं ,उन्होनें दूसरे ज्योतिषी से संपर्क किया , जिसने अच्छी तरह कुंडली मिलवाकर अच्‍छे मुहूर्त में उसका विवाह करवा दिया। 

              मात्र दो वर्ष के बाद ही एक एक्सीडेंट में उसके पति की मृत्यु हो गयी और वह लड़की अभी विधवा का जीवन व्यतीत कर रही हैं। मेरे पिताजी एक ज्योतिषी हैं पर उन्होने अपने सारे बच्चों की शादी में कुंडली मेलापक की कोई चर्चार सकता है , यदि नही तो वह किसी जोड़े को बनने से भी नहीं रोक सकता। 

               Kundli matching in hindi online

              आज घर-धर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के होने से मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा घर-बैठे मिल जाने से यह और बड़ी समस्या बन गयी है। किन्ही भी दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना का नहीं की । क्या कोई पंडित 10 पुरुष और 10 स्त्रियो की कुंडली में से वर और कन्या की कुंडली को अलग कफी आसान हो गया है , पर इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं ।

               इसी तरह love marriage hone ke sanket ko भी जन्मकुंडली के ग्रहों में ढूंढा जाता है , जो वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है। उन दो बायोडाटा को डालकर देखने से ,जिनकी बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और जिनकी काफी अच्छी निभ रही है या जिनकी कुंडली मिलाकर शादी हुई है और जिनकी नहीं निभ रही है , कम्प्यूटर और उसमें डाले गए इस प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। एक ज्योतिषी होने के नाते मेरा कर्तब्य है कि मै अभिभावकों को उचित राय दूं। परिचित परिवार और परिचित लड़के , खासकर प्रेम विवाह करने जा रहे जोड़ों को कुंडली मिलाने की जरूरत नहीं है।

              'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर सिर्फ चन्द्रमा और मंगल ही नहीं, वर-वधू के जन्मकालीन सभी ग्रहों के आधार पर किये जानेवाले कुंडली मिलान के लिए संपर्क करें -8292466723 ,  gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

              कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।