भारत में ज्योतिष का अध्ययन

Astrology Hindi

लोगों को भविष्य को लेकर दिलचस्पी बनी रहती है, इसलिए भविष्य के विश्लेषण की अनेक विधियां प्रचलित हैं , पर एस्ट्रोलॉजी, यानि ज्योतिष, भविष्य को समझने की सबसे सटीक और वैज्ञानिक विधि है। एस्ट्रोलॉजी आसमान के ग्रहों-नक्षत्रों का अध्ययनकरते हुए उनका पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा करता है। यह काल-गणना का शास्त्र है, विभिन्न समयांतराल में ग्रहों के अच्छे या बुरे प्रभाव की चर्चा करता है।

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भारतवर्ष में वैदिककालीन ग्रंथो में ही एस्ट्रोलॉजी की चर्चा है, इसका महत्व इस बात से सिद्ध होता है कि ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता था। राजा-महाराजाओं के दरबार में ज्योतिषियों को शामिल रखने की जो परम्परा थी, वह अभी तक चल ही रही है। यहाँ अधिकांश शुभ कार्य मुहूर्त देखकर ही किये जाते हैं। भारत में ज्योतिष का अध्ययन लगभग 8 हज़ार सालों से चल रहा है, इसलिए विद्वान मानते हैं कि ज्योतिष शास्त्र का उदय भारत में ही हुआ था।

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बहुत लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि ज्योतिष के ग्रन्थ हिन्दुओं के होते हैं, इसलिए यह हिन्दुओं से सम्बन्ध रखता है।  पर ऐसी कोई बात नहीं, यह एक विज्ञान है और विज्ञान के सभी नियमों का धर्म  से कोई सम्बन्ध नहीं होता। हमारे पास सभी धर्मों के लोग आते हैं और अपनी जन्मकुंडली विश्लेषित करवाते हैं।

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Astrology Hindi by date of birth

जिस समय बच्चे का जन्म होता है, उस वक्त का दिन और समय नोट कर लिया जाता है और बाद में पंडितों से जन्मकुंडली बनवायी जाती है। बच्चे के जन्म के पूरे दिन की चंद्रकुंडली एक समान होती है, जन्म-समय न होने की स्थिति में चंद्र कुंडली से भी भविष्यफल निकाला जा सकता है। पर जन्म-समय हो तो बच्चे की लग्नकुंडली बन जाती है।

 लग्नकुंडली

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पंडित एस्ट्रोलॉजी के द्वारा जो जन्मकुण्डली बनाते है, वह मुख्यतया जन्मकालीन तिथि और समय में ग्रहों की गति और स्थिति पर आधारित होती है। जन्मांग चक्र में १२ खाने आसमान के ३६० डिग्री को १२ भाग में बांटकर निकाले जाते।  इन १२ भागों में उस समय जहाँ जो ग्रह मौजूद होते हैं, वही उस ग्रह को रखा जाता है।

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कुंडली में ग्रहों की स्थिति को देखकर भविष्यफल कहा जाता है।  कुंडली के १२ खाने जीवन के १२ सन्दर्भों के बारे में जानकारी देते हैं।  जिस भाव का स्वामी या उसमे मौजूद ग्रह मजबूत हों, तो जीवन के वे मामले मजबूत होते हैं, यदि किसी भाव का स्वामी और उसमे ग्रह कमजोर हो तो जीवन के वे  कमजोर हो जाते हैं। इन ग्रहों का प्रतिफलन जीवन के किस काल में होगा, इसकी जानकारी भी जन्मकुंडली से हो जाती है।

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अनिश्चितता के इस युग में सबको अपना भविष्य जानने की इच्छा होती है। ज्योतिष आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आप किसी भी शहर में रहते हों, आपके आसपास कोई न कोई ज्योतिषी मिल ही जायेंगे। लेकिन जन्मकुंडली बनाने का काम कोई भी ज्योतिषी कर सकता है, पर फलित कथन के लिए ज्योतिषी को अनुभवी होने की आवश्यकता होती है। भविष्य का निर्णय करते ज्योतिषी के पास पहुंचना चाहिए। कुछ  उपाय के नाम पर लूट भी मचा रखी है, इसलिए लोग ज्योतिषियों के पास जाने से डरते हैं।

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आज के ऑनलाइन युग में किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श लेना मुश्किल नहीं रह गया है। आज अपने क्लाइंट्स को ईमेल से रिपोर्ट भेजने और फ़ोन से बात करने की सुविधा बहुत सारे ज्योतिषियों ने दे रखी है। आप दूसरे देश और शहर के ज्योतिषियों से भी कुंडली-विमर्श  करवाकर कंसल्टेशन ले सकते हैं। हमारे यहाँ पूरे जीवन के उतार चढ़ाव का स्पष्ट ग्राफ, जीवन के सभी मामलों के पाई चार्ट के साथ साथ विस्तार में भविष्यफल लिखकर दिया जाता है। ऐसा जीवन ग्राफ पूरे विश्व में कहीं भी उपलब्ध नहीं है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' की सेवा लेने के लिए भी आप 8292466723b ,  gatyatmakjyotishapp@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

योगकारक ग्रह

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अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : किना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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    युग क्यों बदलते हैं ?

    1 yuga is equal to how many years

    हमारे पञ्चाङ्ग की गणना में सारे ग्रहों की स्थिति की चर्चा रहती है, जो अभी आसमान में चल रहे हैं। पर हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार धरती का एक वर्ष देवताओं के एक दिन-रात के बराबर है। जिसमें उत्तरायण दिन व दक्षिणायन रात मानी जाती है। दरअसल, एक सूर्य संक्रान्ति से दूसरी सूर्य संक्रान्ति की अवधि सौर मास कहलाती है। ऐसे ही 30 दिन-रात मिलकर देवताओं का एक माह और 12 महीनो का एक दिव्य वर्ष कहलाता है।

    Yuga cycle

    इसी आधार पर चार युगों की मानव सौर वर्षों में अवधि के बारे में इस तरह की चर्चा की गयी है -सतयुग 4800 (दिव्य वर्ष) 17,28,000 (सौर वर्ष)
    त्रेतायुग 3600 (दिव्य वर्ष) 12,96,100 (सौर वर्ष)
    द्वापरयुग 2400 (दिव्य वर्ष) 8,64,000 (सौर वर्ष)
    कलियुग 1200 (दिव्य वर्ष) 4,32,000 (सौर वर्ष)
    कलियुग के 4,32,000 साल लंबे कलियुग को शुरू हुए तकरीबन 6000 वर्ष ही गुजरे हैं, अभी लम्बा समय व्यतीत करना है। कलियुग में हमेशा लोगों का धर्म से भटकाव होता है और धर्म-प्रवृत्त करने के लिए प्रकृति को कोशिश करनी पड़ती है। 

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    कलियुग को समाप्त होने में बहुत समय है, अभी लोगों को धर्म की और प्रवृत्त करने के लिए इस दुनिया में समय समय पर किसी न किसी रूप में एक तूफ़ान आया करता है, तूफ़ान शांत होने पर ही पता चलेगा कि इसने क्या क्या ले डुबोया ? सौ वर्षों की एक सदी में कभी-कभी ही कोरोना जैसी त्रासदी आया करती हैं, जो कभी भूगोल, कभी इतिहास और कभी सभ्यता-संस्कृति तक बदल देती हैं। अभी सबसे बड़े तूफ़ान के रूप में कोरोना जारी है, चारो और अफरा तफरी का माहौल है। दूसरे देशों में तो लाशें बिछती देख ली है हमने, ईश्वर से ही प्रार्थना है, हिन्दुस्तान में ऐसा तांडव न मचाये। कोरोना के पहले की बातें २०-२५ वर्षों बाद बच्चों को सुनाये जायेंगे तो वे ऐसे ही आश्चर्य के साथ सुनेंगे, जैसा हम आजादी के पहले की कहानियों को सुनते आये हैं। बचपन से एक कहावत सुनते आ रहे हैं - 'हर अति का अंत इति से होता है' , प्रकृति के पास हर बात का इलाज है। देख रही हूँ कि कोरोना के बाद वही सारी बातें बदलने वाली हैं, जिन मामलों में हमने अति कर दी थी, जो क्षेत्र अपना लक्ष्य भूलकर पैसे कमाने की मशीन बन गए थे -----

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    १) कला के माध्यम से लोगों को सीख देने और उनका मनोरंजन करनेवाला 'सिनेमा जगत' अपने लक्ष्य से दूर पैसे कमाने की मशीन बन गया था। समाज को खासकर युवा वर्ग को सीख देने में में सिनेमा की क्या भूमिका हो सकती है, इसे न सोचकर लोग क्या देखना चाहते हैं, इसी पर फोकस किया। कोरोना के बाद इस उद्योग को बड़ी मार पड़ने वाली है, शायद इन्हे आनेवाले दिनों में टीवी चैनल और इंटरनेट के माध्यम से विकल्प ढूँढना होगा। मध्यम वर्ग का इस क्षेत्र में किया जानेवाला खर्च बचेगा, मध्यम वर्ग कड़ी निगाह रखे, ताकि वे वही परोस पाए, जो हमारे बच्चों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बना सके। 

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    २) खेल की शुरुआत बच्चों को नियमों से बाँधने और हर प्रतिस्पर्धा में खेल भावना विकसित कराने के लिए हुई थी, ताकि वे बड़े होकर हर हार- जीत को स्वाभाविक ढंग से ले। पर हमारे देश के खेल क्रिकेट ने पैसे कमाने के लिए हर भावना समाप्त कर दी, आनेवाले समय किसी भी खेल में स्टेडियम में भीड़ नहीं दिखने वाली। यदि कभी कहीं खेल होता भी है, टीवी चैनल और इंटरनेट के माध्यम से विकल्प ढूँढना होगा। मध्यम वर्ग का इस क्षेत्र में किया जानेवाला खर्च बचेगा, कोरोना का टीका आने के बाद ही यह क्षेत्र कुछ संभल सकता है। 

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    ३ ) देशभर में जितने भी घूमने के स्थल हैं, प्राचीनकाल में सबको धर्मस्थल के रूप में विकसित किया गया था, ताकि धर्म के बहाने से सबको दुनिया की खूबसूरती दिखाई जा सके। अपने बाल-बच्चों की जिम्मेदारियां समाप्त करने के बाद घूमने-फिरने के लिए समय निश्चित किया गया था, ताकि किसी दुर्घटना में कोई गुजर भी जाये तो बच्चों को दिक्कत न हो। सभी गांव से उपयुक्त ऋतु में बसें जाती, स्वावलम्बी बसें, जिसमे दो-चार नवयुवक होतें, खाने-पीने का या बनाने का सामान होता। बस रोक रोक कर लोग खाते-पीते और अपने लक्ष्य की और बढ़ जाते, फिर वाप्पस गाँव आ जाते। पर पर्यटन को आज इतना महत्व दिया गया था कि छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी माता-पिता हर रिस्क लेने को तैयार हो गए थे। बेवजह होने वाली इस खर्चे से भी मध्यम वर्ग मुक्त हुआ। 

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    ४ ) चलते मुसाफिरों के लिए सेवा भावना के तहत तैयार किया जाने वाला सराय, लोगो के दान से मुफ्त पानी पिलाने और मामूली खर्च में रहने-खाने की व्यवस्था किया करता था। यह आज बड़े-बड़े होटल के रूप में 'कुछ भी' परोसकर पैसे कमाने की मशीन बन गया था। उच्च वर्ग की बात तो छोड़िए, माध्यम वर्ग भी इनके चक्कर में पड़ अपनी रसोई को कभी-कभार ही उपयोग करने लगा था। कोरोना के बाद इस इंडस्ट्री को भी भारी मार पड़नेवाली है, माध्यम वर्ग अपनी रसोई में हमारी दादी-नानी की तरह हर पकवान बनाने की व्यवस्था करें। पानी बेचनेवालों का स्कोप भी अब न्यूनतम हो गया। 

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    ५) कभी आपने विचार किया है, जन्मदिन, शादी- विवाह में और मौत के समय लोगों के इकट्ठे होने का प्रयोजन क्या रहा होगा ? सुख-दुःख में परिवार, समाज के साथ रहना या आनेवाले अच्छे-बुरे समय के लिए इन घटनाओं का गवाह बनना, बस इतना ही। लेकिन पिछले १०-२० वर्षों में इन आयोजनों की चकाचौंध ने सामान्य हैसियत रखनेवालों की नींद उड़ा दी थी, वे अपने बच्चों की शादी और माता-पिता का क्रियाकर्म कैसे करें ? कोरोना के बाद निश्चित ही इस इंडस्ट्री को भी बड़ी मार पड़ेगी। मध्यम वर्ग ५-१० लोगों के मध्य मंदिर में शादी-विवाह की शुरुआत कर समाज में आदर्श स्थापित करे, ताकि मध्यम वर्ग के पैसों की बचत हो सके। 

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    ६) धर्म का क्षेत्र भी अपने लक्ष्य को भूलकर पैसे कमाने की मशीन बन गया था। मंदिर, मस्जिद, चर्च,गुरूद्वारे में दिया जानेवाला चढ़ावा जनता के लिए होता है, जनता- पीने और रहने की व्यवस्था उनकी होनी चाहिए थी। पर नहीं चढ़ावा उनका, रहने-खाने- व्यवस्था आप खुद करो, गुरूद्वारे को छोड़कर धर्म की सही परिभाषा कहीं नहीं दिखी। कई तरह के टिकट रखकर भक्तो से भेदभाव, ईश्वर को भी देखा नहीं गया, ईश्वर से भी सहा नहीं गया। आनेवाले दिनों में धर्म हमारे घर में मानी जानेवाली चीज हो जाएगी, हो भी जानी चाहिए। धर्म के क्षेत्र में किये जानेवाले किसी भी आडम्बर के प्रति समाज अभी से सचेत हो जाये, इस क्षेत्र की भी कमाई बंद हो जानी चाहिए। 

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    ७ ) परिवार क्या होता है, बच्चों पर कितना ध्यान दें, बड़े-बूढ़े क्या चाहते हैं, लोग ये सब भी भूलकर पैसे कमाने की मशीन बन गए थे। साफ़-सफाई के वे नियम, जो देश में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता आ रहा था, दादी-नानी से हम खुद सीखते आ रहे थे, उसे आज की पीढ़ी ने ढकोसला मान लिया था। बाहर से आनेवाले जूत्ते, कपडे हमारी रसोई तक पहुँच रहे थे, लोग हाथ धोना भूल चुके थे, किससे कितनी दूरी रखनी चाहिए, ये सब भूल चुके थे। वास्तव में आज की पीढ़ी, जो स्वावलम्बन भूल चुकी थी, उसे कोरोना ने स्वावलम्बी होना सिखाया है। आलस्य के वशीभूत सभी कार्य नौकरानियों से कराने वाले आज अपने हाथों से खाना बना रहे हैं, कपडे धो रहे हैं, बर्तन धो रहे हैं। 

    Education system

    ८) १०-१५ वर्षों में पढ़ाई-लिखाई में जो परिवर्तन आया, वो भी प्राकृतिक नहीं था। बच्चे पैसेवाले लाइन को चुनने में और संस्थान नंबर वाले बच्चों को चुनने में व्यस्त थे। परीक्षाओं में नंबर लाने का टेंशन इतना हो गया था कि बच्चों को पढ़ाई के अलावा कुछ काम करने की फुर्सत मिले। कोरोना वायरस ने सिखला दिया है कि पढाई लिखाई के साथ स्वावलम्बन कितना आवश्यक है। १ या २ बच्चे को जन्म देकर उनके जीवन-शैली की ऐसी-तैसी कर देने वाले माँ-पापा को भी कोरोना ने बड़ा झटका दिया है, उन्हें सुपर चाइल्ड बनाने सपना टूट गया है। 

    Majdooron ka shahar prem

    ८ ) इधर हाल-फिलहाल गाँव में खेती-बारी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे थे। सारे देश के ब्लॉकों में स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र अपने वेतन का भार तो हम जैसे आयकर दाताओं पर डाल रहे हैं, पर उनका गाँव की कृषि में कोई योगदान है, मुझे नहीं दिखा। बचपन में जिस गाँव के खेत-बारी को हरा-भरा देख चुकी हूँ, वर्षों से उसे उजाड़ देखकर बड़ा कष्ट पहुंचा। यदि कोई खेती में दिलचस्पी ले भी तो मजदूर नहीं मिलते, शहरों की चकाचौंध में समर्थ युवा निकल चुके हैं। असमर्थों को खाने के लिए मुफ्त अनाज मिल ही रहा था। लगभग सभी गाँवों में एक सी स्थिति थी, शहरों को अनाज की आपूर्ति करनेवाले गाँव में भी जरूरत की वस्तुएँ शहरों से आ रही थी। कोरोना के बाद जिस हिसाब से मजदूर गांव वापस आ रहे हैं, शायद गाँवों में खेती-बारी, पशु-पालन आदि में तेजी आये। अनाज के नाम पर शरीर में जा रहे कई तरह के रसायनों से लोगों को मुक्ति मिलेगी। 

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    ९ ) सभी जगहों पर बेवजह हो रही भीड़ प्रकृति को प्रदूषित भी कर रही थी। हम आनेवाली पीढ़ी को शुद्ध भूमि, जल और वायु दे पाएंगे, तो यह कोरोना का हमारे लिए वरदान ही होगा। कोई संस्था या कोई सरकार ऐसा नहीं कर सकती थी। यदि हमारे बजट का अधिकांश खर्च कम हो जाये तो हम कम पैसों में भी घर में खा-पीकर रह सकते हैं। भ्रष्टाचार भी इन उलूल-जुलूल खर्चों के लिए ही किया जाता है। समाज के सभी लोग जिम्मेदार बने, जरूरी चीजों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करें, उलूल-जुलूल मांगे सामने न रखें। संयम से जीएँ, प्रकृति जो भी करती है, हमारे भले के लिए करती है। देश की जनता नियमों से रहे तो कोरोना के बाद हमारी यात्रा अधिक शांतिपूर्ण और सुखद होगी। 

    Schools & hospitals

    १० ) कई इंडस्ट्री और भी होंगे, जो अपने मूल उद्देश्य को भूलकर पैसे कमाने की मशीन बन चुके हैं, इनमें स्कूल और एक अस्पताल भी है। इनको भी मार पड़नी चाहिए, मध्यम वर्ग के पास पैसे कम होंगे तो ऐसा हो सकता है। समाज से मेरा निवेदन होगा कि सभी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने भेजे और सभी जिम्मेदार होकर समय समय पर वहां की व्यवस्था चेक करें। यदि कोई कमजोरी हो तो उसको दूर करने की करवाएं। ऐसा ही सरकारी अस्पतालों में भी किया जाये। इससे भी मध्यम वर्ग का पैसा बचेगा। एक बात तो मई बार-बार कहूंगी, व्यर्थ के चकाचौंध और प्रकृति ने हमारी जीवनशैली को बदलने का मौका दिया है तो इसे जरूर बदलें।

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      मीन लग्न कुंडली विश्लेषण

      Meen Lagna ki kundli in hindi

      मीन लग्न में चन्द्रमा का प्रभाव

      (Meen Lagna me Chandra)

      आसमान के 3...30 डिग्री से 360 डिग्री तक के भाग का नामकरण मीन राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मीन माना जाता है। मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ यही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की बुद्धि तीक्ष्‍ण होती है  , इन्‍हें संतान पक्ष का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , जो मन को खुश रखता है। जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर बुद्धि और सूझ बूझ की कमी और संतान पक्ष के सुख में कमी इनके मन को दुखी करते हैं। 'गत्यात्मक ज्योतिष' चन्द्रमा की शक्ति का निर्णय इसके आकार के आधार पर करता है। अमावस के चन्द्रमा को शुन्य, दोनों अष्टमी के चन्द्रमा को 50 और पूर्णिमा के चन्द्रमा को 100 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है। 

      मीन लग्न में सूर्य का प्रभाव

      (Meen Lagna ki kundli me surya)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु या अन्‍य प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मीन लग्‍न के जातक किसी प्रकार के झंझट को हल कर प्रभाव बढाने में विशेष दिलचस्‍पी रखते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनके झंझट को हल करने का तरीका उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें हर प्रकार के झंझट से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' में सूर्य को हर वक्त 50 प्रतिशत गत्यात्मक शक्ति दी जाती है, पर यह जिस ग्रह की राशि में होता है, उससे इन्हे गत्यात्मक शक्ति प्रभावित होकर थोड़ी धनात्मक या ऋणात्मक हो जाती  है। 

      Meen Lagna ki kundli in hindi

      मीन लग्न में मंगल का प्रभाव

      (Meen Lagna ki kundli me Mangal)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के धन की स्थिति को मजबूत बनाने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है , किसी प्रकार के संयोग से संसाधन प्राप्‍त करते तथा किसी दुर्योग से संसाधनहीन होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर भाग्‍य के साथ देने से इनका धन कोष मजबूत बना रहता हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमजोरी धन कोष को कमजोर बनाती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' मंगल की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में मंगल सूर्य के निकट हो तो मंगल को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और मंगल आमने सामने हो तो मंगल काफी कमजोर होता है। 

      'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' पर आधारित प्रतिदिन, प्रतिमाह और प्रतिवर्ष जीवन के हर मामले के भविष्यफल को समझने के लिए इस एप्प को इनस्टॉल करें !

      मीन लग्न में  शुक्र का प्रभाव

      (Meen Lagna ki kundli me Shukra)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍नवालों की जीवनशैली का भाई बहन बंधु बांधव का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मीन लग्‍नवाले भाई , बहन , बंधु और बांधव का सुख प्राप्‍त करते हैं , उनकी जीवनशैली को सुखमय बनाने में भाई बंधु की भमिका होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो भाई बहन बंधु बांधव से संबंधित जबाबदेहियों के कारण उनकी जीवनशैली कमजोर दिखाई पडती है,  इनसे सहयोग की कमी से तनावग्रस्‍त रहते हैं।  'गत्यात्मक ज्योतिष' शुक्र की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो शुक्र को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही शुक्र वक्री होता है तेजी से घटती हुई गत्यात्मक शक्ति शुन्य हो जाती है। 

      मीन लग्न में बुध का प्रभाव

      (Meen Lagna me Budh)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और घर गृहस्‍थी का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी का उनकी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंध बना होता हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को मातृ पक्ष का भरपूर सहयोग मिलता है , हर प्रकार की संपत्ति इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण को सुखमय बनाती हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर जातक का मातृ पक्ष के विचारों से तालमेल नहीं होता , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट का कारण बनकर घर गृहस्‍थी के माहौल को बिगाडती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' बुध की शक्ति का निर्णय उसकी गति से करता है, बुध की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक हो तो बुध को अधिक गत्यात्मक शक्ति मिलती है, प्रतिदिन 1 डिग्री हो तो 50 प्रतिशत , यदि गति 1 डिग्री से कम होने लगती है तो गत्यात्मक शक्ति भी कम होने लगती  है, जैसे ही बुध वक्री होता है तेजी से घटती हुई इसकी गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। 

      मीन लग्न में बृहस्पति का प्रभाव 

      (Meen lagna ki Kundli mein Brihaspati)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , पिता पक्ष , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने घटाने में पिता की भूमिका बनती है , उनके व्‍यक्तित्‍व का समाज में एक पहचान बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मीन लग्‍न के जातक को पिता का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , प्रकृति की ओर से स्‍वस्‍थ शरीर प्राप्‍त करते हैं , अपने आत्‍मविश्‍वास से समाज में अच्‍छी पहचान बनती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मीन लग्‍नवाले जातक को पिता का सहयोग नहीं मिलता , स्‍वास्‍‍थ्‍य की गडबडी भी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है और उनकी पहचान में बाधा उपस्थित करती है।  'गत्यात्मक ज्योतिष' गुरु की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में गुरु सूर्य के निकट हो तो गुरु को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और गुरु आमने सामने हो तो गुरु काफी कमजोर होता है। 

      मीन लग्न में शनि का प्रभाव 

      (Meen Lagna me Shani)

      मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि एकादश और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के लाभ और खर्च में बडा संबंध होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को नियमित लाभ होता रहता है , जिससे खर्च की दिक्‍कत नहीं आती , हर प्रकार के संबंधों का निर्वाह भी ये आसानी से कर लेते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मीन लग्‍नवालों के लाभ में कमी खर्चशक्ति को कमजोर बनाती है , बाह्य संदर्भों को कमजोर करने में सहायक होती है।   'गत्यात्मक ज्योतिष' शनि की शक्ति का निर्णय इसके सूर्य के निकट होने या दूर होने से करता है, जन्मकुंडली में शनि सूर्य के निकट हो तो  शनि को अधिकतम गत्यात्मक शक्ति मिलती है, सूर्य से जितना दूर होता है, शक्ति घटती जाती है, सूर्य और  शनि आमने सामने हो तो शनि काफी कमजोर होता है। 

      ज्योतिष में सभी लग्न की कुंडलियों के बारे में पढ़ने के लिए  यहाँ क्लिक कर सकते हैं।  लेकिन ग्रह कमजोर है या मजबूत, इसका पता आंशिक तौर पर हमारे योगकारक ग्रहों का प्रभाव  लेख से मालूम हो सकता है, पर ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी के लिए हमारे केंद्र से जन्मकुंडली बनवाना आवश्यक है!

      यदि आप जानना चाहते हों कि आपके सभी ग्रह कितने-कितने गत्यात्मक शक्ति संपन्न हैं, तो अपनी जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान हमें 8292466723 पर व्हाट्सप्प करें, इसके लिए 250/- सेवा-शुल्क  निर्धारित किया गया है।  


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        ज्योतिष में केमद्रुम योग

         

        Kemadrum Yog

        Kemdrum yog in kundli

        काफी दिनों तक ज्‍योतिष के अध्‍ययन और मनन में रत होने के बाद भी सटीक भविष्‍यवाणियां करने में विफल रहे कुछ लोगों से अक्‍सर हमारी मुलाकात हो जाती है , जो अपनी तरह हमें भी ज्‍योतिष का अध्‍ययन छोडने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ज्‍योतिष के परीक्षित माने जाने वाले सिद्धांत भी बिल्‍कुल गलत है और तर्क के साथ ही साथ भविष्‍यवाणी करने के लिए भी खरे नहीं उतरते। इसलिए इस विषय पर समय जाया करना बिल्‍कुल व्‍यर्थ है। हालांकि उनका कहना भी पूरी तरह गलत नहीं , जिस तरह एक हाथी के अलग अलग भागों को छूकर कह रहे सभी अंधे लोगों के विचार में से किसी को भी झूठा नहीं ठहराया जा सकता , पर सही दृष्टिवाला व्‍यक्ति ही बता सकता है कि अंधे गलत नहीं कह रहे हैं। 

        ज्‍योतिष के विराट स्‍वरूप को पूरी तरह समझ पाने में कोई सफल नहीं हो सकते हैं , सो ये धारणा तो स्‍वाभाविक है। ज्‍योतिष के हर अंश को अलग अलग विद्वानों द्वारा विभिन्‍न प्रकार से व्‍याख्‍यायित किया गया है , इसमें भी सच्‍चाई ही है , इसे भी नहीं माना जा सकता। जिस तरह समय के साथ धर्म के क्षेत्र में अनेक ऋषि मुनियों के उत्‍तराधिकारियों द्वारा उनके कहे को गलत ढंग से प्रचारित किया गया है , वैसा ही ज्‍योतिष के क्षेत्र में भी हुआ है और सारे नियमों को सही मान लेने से हमारे निष्‍कर्ष भ्रमोत्‍पादक हो जाते हैं।

        Kemdrum or daridra yog in astrology

        इसी सिलसिले में कुछ दिन पूर्व ज्‍योतिषीय योग के बारे में चर्चा करते हुए मैने गजकेशरी योग की प्रामाणिकता पर सवाल खडे किए थे। इसी प्रकार योग के रूप में खास चर्चित अमला योग में भी 80 प्रतिशत से अधिक जातक जन्‍म ले सकते हैं। इस प्रकार अनेक योगों की चर्चा ज्‍योतिष में ढंग से नहीं की जा सकी है , जिससं लोग गुमराह होते रहते हैं। इसी प्रकार का एक योग केमद्रुम योग भी है , माना जाता है कि चंद्रमा के दोनो ओर कोई भी ग्रह न हो , तो केमद्रुम योग बन जाता है, मैं इतने दिनों से लोगों की जन्‍मकुंडलियां देख रही हूं , यह योग बिल्‍कुल सामान्‍य तौर पर मिल जाया करता है , बिल्‍कुल अपवाद के तौर पर एक दो जगहों पर ही कोई अनिष्‍ट होता मुझे दिखा है , पर ज्‍योतिष में इसके फल के बारे में लिखा गया है .....

        Kemadruma yoga bhanga

        Kemdrum yog in hindi

        केमद्रुम योग में जन्‍म लेनेवाला व्‍यक्ति गंदा और हमेशा दु:खी होता है। अपने गलत कार्यों के कारण ही वह जीवनभर परेशान रहता है। आर्थिक दृष्टि से वह गरीब होता है और आजिविका के लिए दर दर भटकता रहता है। ऐसा व्‍यक्ति हमेशा दूसरों पर ही निर्भर रहता है। पारिवारिक सुख की दृष्टि से भी यह सामान्‍य होता है और संतान द्वारा कष्‍ट प्राप्‍त करता है , उसे स्‍त्री भी चिडचिडे स्‍वभाव की मिली है , पर ऐसे व्‍यक्ति दीर्घायु होते हैं। चाहे धनाढ्य कुल में जातक का जन्‍म हुआ हो या सामान्‍य कुल में , मूर्खतापूर्ण कार्यों के कारण दरिद्र जीवन बिताने को मजबूर होता है।

        केमद्रुम योग बडा घातक माना जाता है ....... 

        योगे केमद्रुमे प्राप्‍ते यस्मिन् कस्मिश्‍च जातके। 

        राजयोगा विनश्‍यंति हरि दृष्‍टवा यथा द्विया:।।

        Kemadruma yoga bhanga

        अर्थात् किसी के जन्‍म समय में यदि केमद्रुम योग हो तथा उसकी जन्‍मकुंडली में राजयोग भी हो तो वह विफल हो जाता है। लेकिन समय के साथ साथ इस योग में किसी अनिष्‍ट के न होते देख ज्‍योतिषी इसमें अपवाद जोडते चले गए हैं, जिससे केमद्रुम भंग योग माना जाता है...... 
        जब चंद्रमा सभी ग्रहों से देखा जाता हो। 
        यदि चंद्रमा शुभ स्‍थान में हो। 
        यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्‍त हो। 
        यदि पूर्ण चंद्रमा लग्‍न में हो। 
        यद चंद्रमा दसवें भाव में उच्‍च का हो। 
        केन्‍द्र में चंद्रमा पूर्ण बली हो।

        योगकारक ग्रह

        Kemadruma yoga bhanga or cancellation 

        पर राजयोग को समाप्‍त करने में समर्थ केमद्रुम योग के इतने सामान्‍य ढंग के अपवाद हों , यह मेरे बुद्धि को संतुष्ट नहीं करता। सच तो यह है कि केमद्रुम योग कोई योग ही नहीं , जिससे कोई अनिष्‍ट होता है। ज्‍योतिष के इन्‍हीं कपोल कल्पित सिद्धांतों या हमारे पूर्वजों द्वारा ग्रंथों की सही व्‍याख्‍या न किए जाने से से ज्‍योतिष के अध्‍येताओं को ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाती है और वे ज्‍योतिष को मानने तक से इंकार करते हैं। आज भी सभी ज्‍योतिषियों को परंपरागत सिद्धांतों को गंभीर प्रयोग और परीक्षण के दौर से गुजारकर सटीक ढंग से व्‍याख्‍या किए जाने हेतु एकजुट होने की आवश्‍यकता है , ताकि ज्‍योतिष की विवादास्‍पदता समाप्‍त की जा सके और हम सटीक भविष्‍यवाणियां करने में सफल हो पाएं .

        अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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          सबके जान-माल को सुरक्षित रखें !

          bhukamp se sambandhit question

          १२ मई को फेसबुक के अपने ग्रुप में मैंने एक पोस्ट लिखी थी ------
          गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार अगले २४ घंटे में कई ग्रहों की स्थितिक शक्ति बहुत अधिक रहेगी। इसलिए विश्व में कहीं भी एक बड़ा भूकंप आ सकता है। पिछले एक महीने से जिन देशों में, जिन शहरों में भूकंप अधिक आ रहे हैं, वहां अधिक सतर्कता की आवश्यकता है ! इस मामले में पाबला जी के इस लेख में दिए गए कुछ एप्प्स आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं ! https://bspabla.com/%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA/खासकरhttps://play.google.com/store/apps/details?id=kr.sira.vibration

          bhukamp latest news

          विश्वभर के भूकंप का डाटा संग्रह करनेवाले वेबसाइट में आप १२-१३ मई को भूकंप की बढ़ी हुई संख्या की तुलना आगे-पीछे की तिथियों से कर सकते हैं -----



          7 मई

          Summary: 183 quakes M2+, 93 quakes M3+, 43 quakes M4+, 2 quakes M5+, 1 quake M6+ (322 total)

          8 May

          Summary: 209 quakes M2+, 107 quakes M3+, 33 quakes M4+, 4 quakes M5+ (353 total)

          9 May

          Summary: 191 quakes M2+, 119 quakes M3+, 36 quakes M4+, 5 quakes M5+ (351 total)

          10 May

          Summary: 195 quakes M2+, 111 quakes M3+, 31 quakes M4+, 3 quakes M5+ (340 total)

          11 may

          Summary: 206 quakes M2+, 130 quakes M3+, 36 quakes M4+, 1 quake M5+ (373 total)

          12 may

          Summary: 230 quakes M2+, 124 quakes M3+, 33 quakes M4+, 2 quakes M5+ (389 total)

          13 may

          Summary: 189 quakes M2+, 108 quakes M3+, 34 quakes M4+, 3 quakes M5+ (334 total)

          bhukamp news today



          KATHMANDU: A moderate earthquake of 5.3-magnitude rocked central Nepal late last night, sending panic-stricken people out of their homes and bringing back awful memories of the devastating quake of 2015 that killed over 9,000 people in the Himalayan nation.

          bhukamp kab aayega

          सवाल अब यह है कि क्या ग्रहीय दृष्टि से अब बड़े भूकंप की आशंका समाप्त हो गयी है ?


          तो जवाब यह है कि भले ही कई ग्रहों की स्थैतिक शक्ति के बढ़ने से भूकंप का योग उस दिन बन रहा था, पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' के हिसाब से भूकंप में चन्द्रमा की भी भूमिका को देखा गया है। उस दृष्टि से अगले २४ घंटे में भी एक बड़े भूकंप की आशंका मानी जा सकती है। इसमें किसी भी देश के लिए रात्रि १२ बजे से २ बजे तक का समय सबसे गड़बड़ है। भारत से छह घंटे पूर्व जहाँ सूर्यास्त होता है, उन देशों के आसपास की आशंका भी अधिक लग रही है। होनी तो तय है, पर आईये ईश्वर से प्रार्थना करें, सबके जान-माल को सुरक्षित रखें !

           bhukamp latest news

          14 May से १६ मई तक  फिर भूकम्पों की संख्या बढ़ी है -----
           १४ मई -----
          Summary: 188 quakes M2+, 131 quakes M3+, 38 quakes M4+, 1 quake M5+ (358 total)
          १५ मई ----
          Summary: 307 quakes M2+, 145 quakes M3+, 46 quakes M4+, 3 quakes M5+, 1 quake M6+ (502 total)
          १६ मई ----

          Summary: 379 quakes M2+, 133 quakes M3+, 31 quakes M4+, 3 quakes M5+ (546 total)
          १७ मई ----
          Summary: 315 quakes M2+, 123 quakes M3+, 35 quakes M4+, 3 quakes M5+ (476 total)



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