हिंदी और अंग्रेजी में प्रतिदिन का भविष्यफल

Horoscope daily in Hindi and English

5000 यूजर के मध्य दो साल से प्लेस्टोर में टेस्टिंग हो रहे और चल रहे हमारे निःशुल्क एप्प में अब पेमेंट गेटवे एक्टिवेट कर दिया गया है। अब आप दो दिन का ही परिणाम निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं, आगे के भविष्यफल को जानने के लिए आपको 400/- या एप्प को शेयर करके गत्यात्मक पॉइंट प्राप्त करने के बाद 200/- चुकाने होंगे। प्लेस्टोर में मौजूद एप्प में पूरा अपडेट दो-चार दिनों में आनेवाला है, जिसके बाद नए लोगों को लॉगिन करने या पासवर्ड रिसेट करने में कोई परेशानी, जो कभी-कभार आ जाती थी, नहीं आएंगी। 

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Daily horoscope today in Hindi

वैसे एप्प में गत्यात्मक गोचर प्रणाली के 10% रिजल्ट को शामिल नहीं किया जा सका है , और 10% को सामान्य लिख दिया गया है, जहाँ एप्प को समझाने में दिक्कत आयी है कि रिजल्ट नेगेटिव आना चाहिए या पॉजिटिव। पर 80% रिजल्ट आपके अनुरूप होंगे। गत्यात्मक ज्योतिष पर भरोसा रखनेवाले तो प्रतिदिन इस रिजल्ट को देखते हैं, आप पुरे साल में पॉजिटिव या नेगेटिव घटना घट जाने के बाद तो देख ही सकते हैं।

इस बात का खेद है कि एप अभी तक सिर्फ एंड्राइड वालों के लिए ही बन पाया है,  IOS वालों को अभीतक नहीं मिल पायेगा। जो यूजर उपयोग कर रहे हैं, वे इस परिणाम से काफी संतुष्ट हैं, एप्प की रेटिंग और रिव्यु इस गवाही दे रहे हैं। आप भी हमारे एप्प का उपयोग कीजिए, एप्प के डेली रिजल्ट में इस प्रतिदिन का भविष्यफल इस प्रकार का दिखता है,अभी किसी यूजर का अप्रैल महीने का भविष्यफल निकाली हूँ, कंप्यूटर के चौड़े स्क्रीन या गूगल ड्राइव पर खोलकर आप इसे देख सकते हैँ! 


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जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

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    गत्यात्मक चिंतन : जीवन के अच्छे विचार

    गत्यात्मक चिंतन : जीवन के अच्छे विचार

    पुराणमित्येव न साधु सर्वं न चापि काव्यं नवमित्यवद्यम्।
    सन्तः परीक्ष्यान्यतरद्भजन्ते मूढः परप्रत्ययनेयबुद्धिः॥

    जीवन के अच्छे विचार


    अर्थ- हर चीज केवल इसलिए अच्छा नहीं हो सकता है, कि वह पुराना है. और न हर चीज इसलिए गलत है कि वह नया है , संत साधु के लोग परीक्षा करके देखते हैं कि दोनो में से कौन कौन सी बातें ग्राह्य है .---

    हमारे 'गत्यात्मक चिंतन' नामक ब्लॉग से लिए गए जीवन के कुछ अच्छे विचार आपके लिए प्रस्तुत हैं :----
    • एक - एक परिवार की, एक - एक जाति की, एक - एक धर्म की, एक - एक मुहल्ले की , एक - एक शहर की, एक - एक क्षेत्र की, एक - एक देश की अलग अलग विशेषताएं होती है , जो वहां जन्म लेने वाले बच्चे में कुछ तो आनुवंशिक तौर पर आती है और कुछ उसके अपने संसाधनों और संस्कार देने वाले गुरुओं के अनुरूप बन जाती है । इस पहचान को दर्शाने में कोई बुराई नहीं ,  क्षेत्रीय पहचान और गुणों की विविधता को राष्ट्रीय मजबूती बननी चाहिए , न कि कमजोरी । मानवतावादी तो हमे होना ही चाहिए ,भारतवर्ष के लिए विभिन्नता में एकता का कॉन्सेप्ट पुराना है और यह स्थाई भाव होना चाहिए .
    • उम्‍मीद के समाप्‍त होने के समय कष्‍ट और आशंका के समाप्‍त होने के समय खुशी होती है .. बाकी समय तो बिल्‍कुल सामान्‍य होता है। 
    • जिस दिन हमारे देश के विद्वान हमारी भाषाओं में अपने ज्ञान को किताबों और भाषणों की शक्‍ल में अभिव्‍यक्ति देने लगेंगे .. हमारे बच्‍चों को अंग्रेजी माध्‍यम में पढने की जरूरत नहीं पडेगी
    • आनेवाले पुश्‍त के लिए आर्थिक आधार मजबूत करने से अधिक अच्‍छा उन्‍हें शारीरिक , बौद्धिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाना है
    • किसी भी देश में लोकतंत्र स्‍थापित करने से पहले देशवासियों की मानसिक , शैक्षणिक , नैतिक और चारित्रिक मजबूती आवश्‍यक है ... अन्‍यथा लोकतंत्र का कबाडा होने में देर नहीं लगती !!
    • परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती ...समस्या तभी बनती है जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता। 
    • हर दिमाग के बीज को एक विशाल वृक्ष बनाने में हर कोई मदद करे , ताकि हमारे चारो ओर विशाल ही विशाल वृक्ष नजर आए , सभी अपनी अपनी विशेषताओं की घनी पत्तियों से छांव , सुगंधित पुष्‍पों से वातावरण में सुगंध और मीठे फलों से लोगों को असीम तृप्ति प्रदान करे।
    • संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि हमारी महत्‍वाकांक्षा ऐसी होनी चाहिए , जिससे प्रकृति की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए , इसके सारे जीव जंतुओं का कल्‍याण करते हुए मनुष्‍य के जीवन को अधिक से अधिक सुख सुविधा संपन्‍न बनाए !
    • महत्‍वाकांक्षा ऐसी कभी नहीं होनी चाहिए , जो प्रकृति को तहस नहस करते हुए , सारे जीव जंतुओं का विनाश करते हुए अपनी मानव जाति के हित तक की चिंता न करते हुए सिर्फ अपने जीवन को अधिक सुख सुविधा संपन्‍न बनाएं ।
    • विचारों से दोस्‍ती या दुश्‍मनी होनी चाहिए, व्‍यक्ति से नही! आजकल समान रूचि, समान पेशा, समान स्वभाव वाले ही आपस में विवाह करना चाहते हैँ, ताकि उनमे सामंजस्य बना रहे, पर पति और पत्नी के दो विचार उनके बच्चों को आनेवाली पीढ़ी को संतुलित बनाते हैं। 
    • भारतवर्ष में श्रम विभाजन को बहुत अधिक महत्व दिया गया है, इतना अधिक कि यहाँ हर प्रकार के कार्य को सिद्ध करने वाले अलग अलग देवी देवता तक हैं. ऐसे में अलग अलग कार्य के लिए बनाये गए यहाँ की जाति व्यवस्था पर ऊँगली उठाना कहाँ तक न्यायसंगत है ?
    • कोई जब किसी का बुरा करने की सोंचते हैं तो सामने वाले का जितना बुरा होता है उससे 100 गुणा उसका अपना बुरा होता है।
    • सामनेवाला तो और सतर्क होता जाता है और अपने विकास पर ध्‍यान संकेन्द्रित करता है ।
    • थोडा बुरा होने से उसकी तरक्‍की में कोई अंतर नहीं पडता , लेकिन दूसरे का बुरा सोचने वाले कंगाल हो जाते हैं ।
    • इसलिए तो किसी भी आध्‍यात्मिक गुरू ने हिंसा की बात स्‍वीकार ही नहीं की, जबतक बुरे और अन्‍याय करने वाले हमसे अधिक समर्थ न हो जाएं।
    • छोटा या बडा तकनीकी ज्ञान और उसका स्‍वतंत्र रूप से उपयोग ही हर तबके के मानव को उसका अधिकार दिला सकता है ! सबकुछ सहकर भी दूसरों की नौकरी चाकरी वही करता है, जो स्‍वयं कुछ करने के काबिल नहीं !
    • किसी के जीवनभर को ध्‍यान से देखा जाए , तो हमें पता चलेगा कि सुख और दुख जीवन के अभिन्‍न अंग हैं। पूरे जीवन में बहुत जगहों पर ऐसा समय आता है , जब हमारे सम्‍मुख आगे बढने का रास्‍ता ही समाप्‍त दिखता है। वैसी स्थिति में बडा तनाव होता है , पर जहां ऐसी स्थिति आती है , वहीं से हमारे सामने एक नहीं , कई नए रास्‍ते दिखते हैं ।
    • जिस दिन अपने अधिकारों का अनुचित पालन करने से बचेंगे लोग, जिस दिन अपने कर्तव्यों का समुचित पालन करेंगे लोग, उसी दिन से दुनिया शांतिपूर्ण ढंग से जीएगी ! क्योंकि किसी के द्वारा भी गलत परम्परा की शुरुआत बहुसंख्यक को उसी रास्ते पर ले जाती हैं !
    • हमारी संस्‍कृति तोडना नहीं जोडना सीखलाती है, किसी भी शुभ अवसर में छोटी छोटी बूंदियों को जोडकर लड्डू बनाया जाता है, बूंदियों के मध्‍य इसका स्‍वाद बढाने वाली चीजें स्‍वीकार्य हैं, स्‍वाद घटाने वाली चीजें नहीं डाली जाती !
    • सनातन धर्म लचीला होता है और हमें इसका लचीलापन बने रहने देना चाहिए ! भारत में जाति ओर धर्म से जुडी सभी समस्‍याएं सामयिक होती हैं ! समय उनका हल भी अपने आप ढूंढता है ! इसी प्रकार अन्‍य खामियां भी समय के साथ आयी हैं, समय के साथ जाएंगी भी, बस किसी की परवाह न करके सोंच को मजबूत रखने की आवश्‍यकता है। 
    • यत्र तत्र घट रही घटनाओं से जाहिर है कि हमारी नई पीढी गुमराह है ! ऐसे में शिक्षकों का दायित्‍व बहुत बढ जाता है ! पर आज के शिक्षकों में भी यह काबिलियत नहीं कि वो भटके हुए छात्रों को दिशा दें ! स्‍वतंत्रता के बाद समाज के सर्वाधिक प्रतिभाशाली लोग शिक्षण के क्षेत्र में काम करते थे ! पढना और पढाना उनकी पसंद हुआ करती थी ! पर धीरे धीरे ऐसा वातावरण बना कि शिक्षा के क्षेत्र में कैरियर पढे लिखे लोगों के लिए अंतिम विकल्‍प बन गया ! व्‍यवस्‍था को इस ढंग से सुधारने की आवश्‍यकता है ताकि‍ आनेवाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट प्रतिभा आएं, जो छात्रो के सिर्फ प्रोफेशनल ज्ञान देने में ही नहीं वरन् उनके नैतिक और चारित्रिक गुणों को भी बढाने में मदद करें !
    • किसी मनोकामना के पूरी होने के लिए प्रार्थना करते वक्‍त कभी भी उसके बदले में कुछ ले लेने की बात मुंह से न निकाले। यह समझते हुए कि अभी आयी समस्‍या के अतिरिक्‍त अन्‍य बातों का कोई महत्‍व नहीं , लोग अक्‍सर भावावेश में कह बैठते हैं ' मेरा यह काम कर दो , चाहे बदले में कुछ भी ले लो' ऐसे में कभी कभी उस सफलता की बडी कीमत चुकानी पडती है। 

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      ज्योतिष और सुखी वैवाहिक जीवन का राज

      ज्योतिष और सुखी वैवाहिक जीवन का राज 

      ज्योतिष में लग्न निर्धारण के बाद कुंडली के विभिन्न भावों का बहुत महत्व है। इस ब्लॉग के कुंडली भाव सेक्शन में आप सभी भावों के बारे में पढ़ रहे हैं।  मानव जीवन के सातवें पक्ष के रुप में घर गृहस्थी को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। जन्मकुंडली में मनुष्य का छठा भाव ही उसके पारिवारिक और दांपत्य जीवन की व्याख्या करता है। विवाह से पूर्व प्रेम संबंधों और विवाह के बाद वैवाहिक सुख या कष्ट को समझने में इस भाव की ही भूमिका है। 

      यही कारण है कि योगकारक ग्रहों का विज्ञान नामक में सातवे भाव के स्वामी या उसमे मौजूद ग्रहों को +3  अंक दिए गए हैं। योगकारकता के हिसाब से तथा  गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के हिसाब से यह भाव भी महत्वपूर्ण या ऋणात्मक होता है। गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति को समझने के लिए  गत्यात्मक ज्योतिष ने गणित ज्योतिष के अद्भुत गत्यात्मक सूत्र दिए हैं। उसी आधार पर गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली देखने का तरीका भी बताया है। 

      Sukhi vaivahik jivan ka raj

      परंपरागत ज्योतिष में सातवें भाव को लेकर धनात्मक चिंतन का कारण भी स्पष्ट है। भारतीय जीवनशैली में घर-गृहस्थी का बहुत महत्व है, पारिवारिक सुख सफलता का राज हमारे इस भाव के भाग्य या दुर्भाग्य में छुपा हुआ है। चूँकि पति-पत्नी का साथ दिन रात का होता है, आपसी समझ अच्छी हो तो जीवन स्वर्ग सा और समझ बुरी हो तो जीवन नरक सा दीखता है। वर्तमान ही नहीं भविष्य को भी खुशहाल बनाने में आपसी प्रेम ही , विचारों का तालमेल ही सहयोगी होता है। 


      बाकि भावों की तरह ही इन सबकी भी वस्तुनिष्ठ विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति के जीवन में कैसे पति या पत्नी आएंगे ? वो गोरा होगा या काला ? गोरी होगी या काली ? लंबा होगा या नाटा ? लम्बी होगी या नाटी ? नौकरी पेशा होगा या व्यवसाय में संलग्न ? नौकरी पेशा होगी या व्यवसाय करती हुई ? पूर्व दिशा में होगा या पश्चिम ? इन बातों की जानकारी कतई नहीं दी जा सकती। 

      Sukhi vaivahik jivan ka raj 

      फिर प्रश्न उठता है कि आखिर जन्मकुंडली देखकर किसी के वैवाहिक जीवन के बारे में क्या बतया जा सकता है? तो इसका जवाब यही होगा कि सातवें भाव को लेकर ग्रहों के प्रभाव से जुडी बातें देश काल और परिस्थिति का मोहताज न हो, वे बातें बताई जा सकती हैं। ये बातें  हैं - पति या पत्नी से मिलने वाला सुख-दुःख, उनकी आदतों से होनेवाला सुख/होनेवाली तकलीफें, आपसी समझ या उसका अभाव -- ये सारी बातें ही हमारे दांपत्य जीवन को प्रभावित करती हैं, चाहे आप ग्रामीण क्षेत्र में हों , शहरी क्षेत्र में या विदेश में। 

      'फलित ज्योतिष : सांकेतिक विज्ञान' नामक अपने आलेख में मैं लिख चुकी हूँ कि अलग अलग देश और प्रदेश के अनुसार भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन आता है। किसी विकसित देश में किसी महिला का प्रतिष्ठा का योग उसे प्रतिष्ठित नौकरी देगा , किन्तु भारत में वही योग उस महिला को अच्छा घर वर ही प्रदान कर सकता है। इसी प्रकार किसी महिला की जन्मकुंडली में दृष्ट हल्का कमजोर पति पक्ष भारत में सिर्फ परेशानी उपस्थित करेगा , जबकि अमेरिका जैसे देश में वह तलाक देने या दिलानेवाला होगा।

      लोग पूछा करते हैं, कैसा रहेगा मिथुन राशि का वैवाहिक जीवन, कर्क राशि का वैवाहिक जीवन, वृश्चिक राशि का वैवाहिक जीवन, मीन राशि का वैवाहिक जीवन कैसा होता है, आदि आदि। ये सही प्रश्न नहीं है। वास्तव में ज्योतिष वैवाहिक जीवन के सुख या कष्ट के बारे में ही जानकारी देता है, लेकिन लग्न या राशि ही नहीं , सातवे भाव के स्वामी या उस भाव में स्थित ग्रहों को समझना आवश्यक है। 

      जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

      'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित धारणा पर संगीता पुरी की ई-पुस्तकों को प्राप्त करने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें!

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        2021 के शुभ शादी मुहूर्त

        Shadi Muhurat in 2021

        पिछले दिनों एक पोस्ट में मैंने आपलोगों को 2021  में होनेवाले सभी विवाह के मुहूर्त की जानकारी दी थी। कुछ पाठकों का प्रश्न था कि गत्यात्मक ज्योतिष के हिसाब से इनमे से किन दिनों का मुहूर्त काफी अच्छा और किन दिनों का मुहूर्त सामान्य है, मुहूर्त है तो गड़बड़ की संभावना कम ही मानी जाएगी। हमने ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति के हिसाब से सभी मुहूर्तों को कसा और आपलोगों के लिए यह लेख प्रस्तुत है। 

        Shadi Muhurat in 2021

        अप्रैल 2021 के मुहूर्त (shadi muhurt in 2021 April)

        2021 में सबसे पहल मुहूर्त  24 और 25 अप्रैल का है , इन दोनों तिथियों कोअधिकांश ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति अच्छी है , इसलिए सामान्य तौर पर यह तिथि अच्छी रहेगी , एक-दो ग्रहों के कारण 10 -20  प्रतिशत लोग या बातें ऋणात्मक ढंग से प्रभावित हो सकती हैं, सितम्बर-अक्टूबर में जन्म लेनेवाले इस तिथि को खास प्रभावित हो सकते हैं। इसकी तुलना में 26-27 अप्रैल का समय कुछ अच्छा रहेगा, सिर्फ मीन राशिवालों के लिए कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं। 30 अप्रैल का मुहूर्त अधिकांश लोगों के लिए सकारात्मक रहेगा , 5-10 % ही बुरे तौर पर प्रभावित होंगे। 

        मई 2021 के मुहूर्त (Shadi muhurt in 2021 May)

        30 अप्रैल की तरह ही 1,3, 7 और 8 मई का मुहूर्त अधिकांश लोगों के लिए सकारात्मक रहेगा , 5-10 % ही बुरे तौर पर प्रभावित होंगे। १५, २१ और २२ की तिथियां भी गत्यात्मक दृष्टि से अच्छी रहेंगी , लेकिन २४ मई के दिन २०-३० प्रतिशत लोगों की मनःस्थिति के ऋणात्मक होने की संभावना है, खासकर धनु और मीन लग्नवाले तथा  तुला राशि वाले  इस समय शादी विवाह न ही करें तो अच्छा रहेगा। 

        जून-जुलाई 2021 के मुहूर्त (Shadi muhurt in 2021 June-July)

        जून की सभी तिथियां 4 , 5 , 19 और 30 गत्यात्मक दृष्टि से अच्छी हैं, तुला राशि वाले को छोड़कर अधिकाँश व्यक्ति इस शादी विवाह के दौरान सुखमय माहौल प्राप्त करेंगे। ०१-०२-१५ जुलाई की तिथियां भी अधिकांश लोगों के लिए सुखकारी होंगी, मिथुन, कर्क, सिंह  और कन्या लग्नवालों , खासकर इनमे कर्क और सिंह राशिवालों के लिए कुछ तकलीफदेह हो सकती हैं। 

        नवंबर 2021 के मुहूर्त (Shadi muhurt in 2021 November)

        नवंबर के शुरूआती मुहूर्त १९-२० नवंबर को भचक्र में शुक्र ग्रह की स्थिति गड़बड़ है।  इसलिए यह दिन लग्न के लिए हल्का कमजोर माना जा सकता है। मेष और वृश्चिक लग्नवालों के वैवाहिक मामलों के लिए खास ऋणात्मक रहेगा, खासकर यदि उनकी राशि तुला या वृष हो तो माहौल कष्टकर बनेगा। २१ नवंबर को बुध ग्रह की सकारात्मक स्थिति बनेगी , इस दिन का मुहूर्त धनु और मीन लग्नवालों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। २८, २९ और ३० नवंबर को भी ग्रहों की स्थिति बहुत अच्छी है और ५-१० प्रतिशत लोगों को छोड़कर अधिकांश की मनःस्थिति सुखद रहेगी।  

        दिसंबर 2021 के मुहूर्त (Shadi muhurt in 2021 December)

        दिसंबर के मुहूर्त की सभी तिथियाँ ०१, ०६, ०७, ११, १२, १३ गत्यात्मक दृष्टि से  ग्रहों की शुभता लिए हुई हैं , बहुत कम लोगों पर ही ये ऋणात्मक प्रभाव डाल सकती हैं , मेष और वृश्चिक लग्न तथा मेष और मिथुन राशि में जन्म लेने वाले इस समय विवाह न करें तो अधिक अच्छा रहेगा, कुछ समस्याएं दिखाई देंगी। 

        जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

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          2021 में प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी

          Love Horoscope in Hindi Today

          जब आप हमारे एप्प के वार्षिक पूर्वानुमान लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपको DROPDOWN में सातवें नंबर पर प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी आदि से सम्बंधित भविष्यवाणियाँ दिखाई देंगी (Love Horoscope in Hindi Today। निःशुल्क सब्सक्रिप्शन लेने के बाद आप यहाँ आपके प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी आदि मामलों में  कई तरह की बातें पूरे दो साल तक के लिए कई समय-अंतराल देकर लिखी हुई होंगी।


          Love Horoscope in Hindi Today


          1. घर-गृहस्थी का माहौल मनोनुकूल होना चाहिए। घरेलू वातावरण सुखमय बना रहना चाहिए। प्रेम संबंधों में भी सहजता बनी होनी चाहिए। दाम्पत्य जीवन खुशनुमा बना होना चाहिए। ससुराल पक्ष के लोगों से भी सहयोग मिलना चाहिए।
          2. पारिवारिक मामले गड़बड़ बने रह सकते हैं । दाम्पत्य जीवन कष्टप्रद हो सकता है। प्रेम-संबंधों में भी समस्या आ सकती है। ससुराल पक्ष का वातावरण अच्छा नहीं दिखाई पड़ सकता है।
          ऊपर लिखे गए दोनों तरह  पूर्वानुमान सामान्य से कुछ अच्छी और सामान्य से कुछ बुरी स्थिति की जानकारी देता है , इसमें बहुत बड़ी बात नहीं होती, जबतक प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी का प्रतिनिधित्व करनेवाले आपके जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों और आपके ये मामले सेंसिटिव न चल रहे हों। लेकिन जब ऐसे पूर्वानुमान लिखे गए हों ---------


          1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित सफलता, ख़ुशी या आनंददायक वातावरण मिलना चाहिए। इसे प्राप्त करने के लिए इन मामलों में पूरा ध्यान बना रहना चाहिए। इस दिशा में किया जानेवाला मेहनत भी फलदायी होना चाहिए। घर-गृहस्थी के महत्वपूर्ण काम होने चाहिए। प्रेम संबंधों में गंभीरता आनी चाहिए। स्तरीय परिवारों से वैवाहिक सम्बन्ध के मामले आगे बढ़ने चाहिए। ससुराल पक्ष की कुछ सकारात्मक जिम्मेदारियां भी सामने आनी चाहिए।
          2. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से सम्बंधित असफलता , कष्ट या दवाबभरा वातावरण उपस्थित हो सकता है , जिसको सुधारने के लिए इन मामलों पर पूरा ध्यान बना रह सकता है। यह किनके लिए कितना प्रभावी होगा , इसे स्पष्टतः समझने और सटीक निर्णय लेने के लिए कभी-कभी हमारा कंसल्टेशन लेना जरूरी महसूस हो सकता है। पारिवारिक मामलों में बड़ी समस्या उपस्थित हो सकती है। इनसे निबटने के लिए माथापच्ची जारी रह सकती है। प्रेम-संबंधों में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है। वैवाहिक मामलों में भी बात आगे बढ़ने में बाधा आ सकती है।

          ऐसे दोनों पूर्वानुमान बहुत ही अच्छी और बहुत ही बुरी स्थिति के संकेतक हैं। हम सामान्य बोलचाल में भी इसे किसी का फॉर्म में होना और किसी का फॉर्म में न होना कहते हैं। इसलिए ऐसी भविष्यवाणियों के पहले अतिरिक्त तैयारी की जरूरत है।


          कभी कभी सामान्य पूर्वानुमान में ऐसी बातें लिखी मिलेंगी -----


          1. कुछ क्रियाशील ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों से संबंधित जिम्मेदारी बढ़नी चाहिए। इन मामलों में या तो स्वयं बदलाव होना चाहिए या परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बननी चाहिए कि इनमे मजबूती या बदलाव लाए जाएँ।
          देखने में यह पूर्वानुमान बिलकुल सामान्य लग रहा, पर यह समय-अंतराल भी बड़े परिवर्तन देता है। पर यह पॉजिटिव होगा या नेगेटिव, इसे बतलाना अभी के समय में एप्प के लिए मुश्किल होता है, इसलिए इसे यूँ ही छोड़ दिया गया है।

          कहीं-कहीं प्रेम-सम्बन्ध, दांपत्य-जीवन, घर-गृहस्थी के ऋणात्मक के साथ भी 1 वाक्य जोड़ा गया है , जो ऋणात्मकता के तीव्रता को बढ़ाता है ------


          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में मनोनुकूल माहौल के नहीं बनने से या असफलता प्राप्त होने से कुछ निराशा सी बन सकती हैं। इन मामलों के माहौल को बदलने की कोशिशें भी बेकार हो सकती हैं।
          लेकिन  इस तरह के  वाक्यों के रहने से बाधाएं बहुत मामूली रहेंगी -----


          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों में सम्बन्ध की गड़बड़ी या इससे सम्बंधित किसी कार्य के आगे न बढ़ने जैसी थोड़ी बाधा आ सकती हैं। पर उसके बाद माहौल अनुकूल होना चाहिए।
          किसी समय में ऐसे वाक्य हों तो -----


          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों की कुछ कमजोरी बनी रह सकती हैं । ऐसे समय में कोई बड़ा कदम उठाने से झंझट बढ़ सकते हैं।
          इन मामलों में जबतक जरूरी न हो, कोई काम न शुरू करें।

          किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----

          1. कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव से ये सारे मामले कठिनाई या असफलता उपस्थित कर किसी मामले से सम्बंधित वातावरण को ऋणात्मक बना सकते हैं , जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बुरा पड सकता है।

          इसके अतिरिक्त भविष्यवाणियों में किसी समय में ऐसे वाक्य हो सकते हैं  -----


          1. कुछ शुभ-ग्रहों के प्रभाव से इन मामलों के द्वारा सुख या सफलता मिलने से किसी मामले से सम्बंधित वातावरण सकारात्मक दिखाई देना चाहिए , जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव अच्छा पड़ना चाहिए।

          कल के रूटीन, जीवन-शैली  मामलों में ऐसी ही चर्चा  होगी।


          जयोतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------


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