हिन्दी में व्हाट्सप्प के लिए एस्ट्रोलॉजी स्टेटस

 

Astrology status for WhatsApp in Hindi

गत्यात्मक ज्योतिष के विकास के बाद ज्योतिष शास्त्र के बारे में निम्न बातें कही जा सकती हैं :------

  • भगवान दरअसल ब्रह्मांडीय महाशक्ति है, जिसे ज्योतिष शास्त्र के द्वारा ही समझा जा सकता है। 
  • जिस समय कल्प , व्याकरण , छन्द , निरुक्त आदि महज कुछ ही विधा थी , फलित ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता था।
  • लोगों को भविष्य को लेकर दिलचस्पी बनी रहती है, इसलिए भविष्य के विश्लेषण की अनेक विधियां प्रचलित हैं , पर एस्ट्रोलॉजी, यानि ज्योतिष, भविष्य को समझने की सबसे सटीक और वैज्ञानिक विधि है। 
  • सभी विधाएं भूतकाल और वर्तमान काल की जानकारी दे सकती है , भविष्य की सटीक जानकारी के लिए एकमात्र विधा फलित ज्योतिष ही है ।
  • पृथ्वी से ग्रह की दूरी के बदलने से गति में बदलाव आता है और गति के बदलने से विद्युत-चुम्बकीय परिवेश में स्वतः ही बदलाव आता है।
  • भौतिक विज्ञान में उल्लिखित सभी प्रकार की शक्तियां ही वस्तुतः ग्रहों की शक्तियां हैं।
  • हर व्यक्ति बदले हुए कोण से ब्रह्म की प्रतिछाया या प्रतीक है। ग्रह इस शरीर में ब्रह्म में ग्रंथि के रुप में होते हैं। वे समय-समय पर अपना फल प्रस्तुत करते हैं।
  • हमें जन्म के बाद और जीवनपर्यंत जिन परिस्थितियों का सामना करना पडता है , वह हमारा प्रारब्ध है , पर हम अपने सोंच , अपनी मेहनत और अपने क्रियाकलापों के द्वारा जो प्राप्त करते हैं , वह परिणाम होता है।
  • लोग समझते हैं कि ज्‍योतिष लोगों को काम न करने और आलसी बनने की सलाह देता है, जबकि सत्‍य यह है कि ज्‍योतिष हमें सही दिशा में काम करने की सलाह देता है !
  • जिस तरह एक बीज की बनावट को समझने के बाद उसकी खेती ओर उसका उपयोग करने में आपको आसानी होती है, उसी तरह अपनी और अपने बच्‍चों की जीवनशैली को समझने से आपको भविष्‍य के लिए कार्यक्रम बनाने में आसानी होती है !
  • कोई ज्‍योतिषी ठगी का काम करता हे तो उसमें ज्‍योतिष शास्‍त्र का क्‍या दोष? ठीक उसी तरह जैसे कोई डॉक्‍टर पैसे कमाने के लिए किसी की किडनी निकाल ले तो उसमें मेडिकल साइंस का क्‍या दोष ?
  • जन्‍मकुंडली की गणना से अपनी या किसी और की मृत्‍यु की भविष्‍यवाणी की तिथि बतला देना उसी प्रकार की अतिशयोक्ति है, जैसा एक डॉक्‍टर के द्वारा अमरत्‍व की दवा खिलाने का दावा हो सकता है। 
  • जन्मकुंडली से भविष्यवाणी करने की विधा को लेकर हंसा जा सकता है, इसलिए नहीं कि यह विज्ञान नहीं ! वरन इसलिए कि हम सभी ज्योतिषियों के मध्य एकता नहीं है !
  • हम सारे मनुष्य देखने में एक समान होते हुए भी अलग अलग प्रकार के बीज हैं , मनुष्य की कुंडली के ग्रहों को देखकर उसकी प्रकृति के बारे में , उसके विकास के बारे में , उसकी जीवन यात्रा के बारे में वैसी ही भविष्यवाणी की जा सकती है।
  • सही कहा गया है कि हमारा सब दांवपेंच हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाती है जब समय हमारे प्रतिकूल हो जाता है ! बडे से बडे दिग्गज भी प्रतिकूल समय में हार मानने लगते हैं !
  • किसी के जन्म कालीन ग्रहों के आधार पर जीवन ग्राफ खीचने की पद्धति विकसित करने वाले हमारे पिताजी का मानना है कि सबके जीवन में धनात्मक और ऋणात्मक समय बारी बारी से आते है ! धनात्मक समय का जितना सार्थक उपयोग किया जाए, ऋणात्मक समय में उतनी कम तकलीफ होगी !
  •  धनात्मक समय का जितना दुरूपयोग किया जाए, ऋणात्मक में मिलने वाली तकलीफ उतनी ही बडी होगी ! ऋणात्मक समय को जितने शांतचित्त से झेला जाए, धनात्मक में उतनी सफलता मिलेगी ! ऋणात्मक समय को बिना झेले अनुभवहीनता में व्यतीत करेंगे तो धनात्मक समय में कैसे सफलता मिलेगी।
  • गत्यात्मक ज्योतिष की घड़ी को जिसने भी समझ लिया, वह अधिक से अधिक काम कर सकता है। उसकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। उसे इस बात की पूरी जानकारी हो जाती है कि किस मौके पर कौन सा काम किया जाना चाहिए।

  • जन्म कालीन ग्रहों की गति और स्थिति से हर व्यक्ति विभिन्न शक्तियों और स्वभाव से संयुक्त है। उसकी कार्यशैली, संसाधन और गंतव्य भिन्न भिन्न हो सकते हैं, किन्तु एक ही सृष्टि होने की वजह से एक दूसरे का पूरक होना उसका सर्वोत्तम उपयोग है।

अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

कृपया कमेंट बॉक्स में बताएँ कि यह लेख आपको कैसा लगा? यदि पसंद आया तो अपने मित्रों परिचितों को अवश्य शेयर करे, ताकि ज्योतिष से सम्बंधित वैज्ञानिक जानकारी जन-जन तक पहुंचे। नीचे के फेसबुक, ट्विटर और अन्य बटन आपको इस लेख को शेयर करने में मदद करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.