ज्‍योतिष हकीकत का नहीं ... सिर्फ संभावनाओं का विज्ञान है !!

ग्रहों के क्रिकेट मैच पर पडनेवाले प्रभाव को दिखाने के लिए मैं कई दिनों से मैच के एक दिन पहले ही ग्रहीय आधार पर मैच का विश्‍लेषण करती आ रही हूं। कुछ लोगों के लिए ज्‍योतिष तो मजाक का विषय है ही , मेरे पोस्‍ट पर प्रकाश गोविंद जी की टिप्‍पणी देखिए ...
ज्योतिष का एक ही सफल मन्त्र है :
भविष्य वाणी इस तरह से गोल-मोल करो कि जो भी परिणाम आये वो ऐसा लगे कि अरे मैंने यही तो कहा था न :)


प्रवीण शाह जी वैसे तो अक्‍सर मुझे प्रोत्‍साहित किया करते हैं , पर मेरा कल का आलेख इन्‍हें भी मजाक लगा , तभी इन्‍होने भी ऐसी टिप्‍पणी की ...
मेरी भविष्यवाणी है कि पहले आस्ट्रेलिया खेलेगा, दूसरी पारी भारत की होगी, सामान्य मुकाबला होगा और जीत भारत के हाथ नहीं लगती दिखती है...
इस भविष्यवाणी के सच होने की संभावना ५०% है...

अब मेरे आलेख का यह अंश देखें .....
कल मोहाली के पंजाब क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले चौथे एकदिवसीय मैच में शुरूआत के दो घंटे बिल्‍कुल सामान्‍य रहेंगे , पर लगभग चार बजे के बाद भारतीय टीम बहुत ही अच्‍छा खेलेगी।

लगभग 20 ओवर तक एक विकेट के नुकसान पर लगभग 5 के औसत रनरेट से आराम से खेलते हुए आस्‍ट्रेलिया 4 बजे के बाद अचानक ही दो और विकेट खो बैठता है और कुछ ही देर में रनरेट गिरकर साढे चार पर पहुंच जाता है। काफी कोशिश कर वे थोडी देर में रनरेट को बढा अवश्‍य ही लें , पर उनपर दबाब पडने की बात से इंकार तो नहीं किया जा सकता। पहले डेढ घंटे में एक विकेट और दूसरे डेढ घंटे में चार विकेट का नुकसान आस्‍ट्रेलिया के लिए सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता। 6 बजे तक भी धडाधड विकेट्स का गिरना जारी रहा और चार बॉल खेले बिना ही आस्‍ट्रेलिया का मैच समाप्‍त हो गया।
अब पहले मैच के दिन प्रकाशित मेरे आलेख का अंश देखें ....
वैसे इस दिन बिल्‍कुल शुरूआत का समय यानि 3 बजे के बाद के दो घंटे भारत के पक्ष में दिखते हैं

और उस दिन ठीक तीन बजे के बाद धडाधड रन बनाकर भारत अपनी बडी हार से खुद को बचा लेता है।

उसके दूसरे दिन मेरे आलेख का अंश देखें ....
भारत की शुरूआत बहुत ही अच्‍छी रहेगी और लगभग दो घंटे तक भारत काफी अच्‍छा खेलेगा , जिसके कारण अंत अंत तक सामान्‍य खेलते हुए भी पहली पारी में इसकी स्थिति बहुत ही मजबूत बन जाएगी।
दूसरी पारी में भी भारत की मजबूत स्थिति के कारण आस्‍ट्रेलिया किसी समय भारत पर दबाब बनाता नहीं दिखेगा । पर बिल्‍कुल आराम से खेलते हुए भी कछुए की चाल की तरह उसकी स्थिति भी मजबूत हो जाएगी और अंतिम एक घंटे में भारत पर दबाब पडने की शुरूआत होगी।

सचमुच भारत बडा स्‍कोर खडा करता है और आस्‍ट्रेलिया कछुए की चाल में खेलता है।

तीसरे दिन के मैच में मेरे आलेख का अंश देखें ....
दूसरी पारी के आरंभ में भी भारतीय टीम की गंभीरता काफी बनी रहेगी और इस कारण आस्‍ट्रेलियन टीम का शुरूआती अनुभव अच्‍छा नहीं रहेगा और दो घंटे उनसे अधिक की उम्‍मीद नहीं की जा सकती! पर उसके बाद के दो घंटे में ग्रहीय बाधा के गुजर जाने से खेल में अवश्‍य सुधार आना चाहिए! उसमें इतनी कामयाब हो जाए कि भारतीय टीम को हरा सके , ऐसा मुझे तो नहीं दिखता।


और इस दिन भी आस्‍ट्रेलिया की टीम भारतीय टीम को नहीं हरा पाती।

यदि ये सब गोल मोल बातें हैं , तो साफ सुथरी बातें किसे कहते है , यह मैं प्रकाश गोविन्‍द जी से जानना चाहती हूं।

वैसे यह बात सही है कि ज्‍योतिष सिर्फ संभावनाओं की चर्चा करता है , हकीकत का नहीं। हकीकत यह है कि इसी सप्‍ताह शेयर बाजार से संबंधित मेरी भविष्‍यवाणी बिल्‍कुल उलट हुई है , पर इसका दोष मैं ग्रहों को नहीं , खुदको दिया करती हूं। मैं पिछले एक वर्ष से शेयर बाजार से संबंधित साप्‍ताहिक भविष्‍यवाणी कर रही हूं और मात्र दो बार बडे स्‍तर पर चूक हुई है , इस लिंकमें इसे आप देख सकते हैं।

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26 comments

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Rajeysha
admin
11/02/2009 06:09:00 pm ×

ज्‍योति‍ष यह बताता है कि‍ हमारे अंदाजों की औकात क्‍या है। वैसे ज्‍योति‍ष के खेल को भी हम यदि‍ अपनी चेतना से खेलें तो शायद ज्‍यादा उत्‍साहवर्धक परि‍णाम मि‍लें।

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11/02/2009 06:19:00 pm ×

ज्योतिष समय बिताने और अपने खोए आत्मविश्वास को जगाने के लिए अच्छा साधन है।

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11/02/2009 07:41:00 pm ×

दिनेशराय द्विवेदी जी,
मेरे पास समय की अधिकता नहीं .. जिसे व्‍यतीत करने के लिए ज्‍योतिष का अध्‍ययन करूं .. साथ ही मेरा आत्‍मविश्‍वास भी कभी कम नहीं होता .. जिसे पाने के लिए मैं ज्‍योतिष का अध्‍ययन करूं .. ईश्‍वर की दया है।

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Unknown
admin
11/02/2009 08:21:00 pm ×

संगीता जी ज्योतिष विवाद्स्प्द विषय रहा है,और रहेगा बाबजूद आपकी सटीक भविष्यवाणीयों के,अब जब लोग ग्रहों की चाल और वोह भी गत्यातमक ज्योतिष के अधयन नहीं करना चाहते और इसके बाबजुद लोग इमपलस के बशीभूत हो कर के इस प्रकार की टिप्पणी करते रहेगें,अभी कुछ देर पहले मैने,इमपलसिव व्यवहार के बारे में लिखा है,आपको मेरा वोह लेख स्नेह परिवार पड़ कर सब समझ आ जायेगा,आप बस निर्बाध रूप से बिना विचलित हुए लिखतीं रहें ।

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11/02/2009 08:29:00 pm ×

’यह पोस्ट बहस का मुद्दा बन सकती है’-बाबा समीरानन्द की भविष्यवाणी.

अरे रे, नाराज मत होईये. मजाक कर रहा हूँ.


ज्योतिष मार्गदर्शक है, मंजिल नहीं.

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11/02/2009 09:12:00 pm ×

सम्भावनाओं का विज्ञान तो ठीक, पर इण्टरप्रेटेशन करने वाले की प्रकृति पर निर्भर करता है, तब झमेला खड़ा होता है।
सम्भावनाओं का ही विज्ञान हो तो कम्प्यूटर को बेहतर बताना चाहिये।

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11/02/2009 09:28:00 pm ×

बिल्कुल सही बात कही आपने मन में उपजे जिज्ञासा को शांत करने के लिए ज्योतिष्श से बढ़िया उपाय कुछ और हो ही नही सकता ..

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11/02/2009 10:33:00 pm ×

समीर लाल जी ,
एक ज्‍योतिषी को नाराज होने का कोई हक ही दुनिया ने नहीं दिया है .. कोई चाहे कितनी भी गाली दे दे .. भला मै नाराज कैसे होउं।

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11/02/2009 10:44:00 pm ×

ज्ञानदत्‍त पांडेय जी,
एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को लेकर आप अलग अलग डाक्‍टर के पास या अलग अलग अस्‍पताल में जाएं .. वहां भी मामला इण्टरप्रेटेशन करने वाले की प्रकृति पर निर्भर करेगा .. सबकी बातें एक जैसी नहीं होंगी .. इसी प्रकार 'परंपरागत ज्‍योतिष' के सारे फार्मूले काफी जटिल हैं .. इसलिए दिक्‍कत आती है .. पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सिद्धांत बहुत सरल .. इसमें कुछ बातें सर्दी खांसी के इलाज की तरह ही आसानी से बतायी जा सकती हैं .. तो कुछ बातें कैंसर और एड्स की तरह ही जटिल होने अभी उसमें रिसर्च की आवश्‍यकता है .. मतलब यही कि भविष्‍य को जानने के लिए आधार सही मिल चुका है और हर क्षेत्र में संभावनाएं दिखाई पडती हैं !!

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11/02/2009 10:58:00 pm ×

आदरणीय संगीता जी
पहले भी हमारा कई बार इस सम्बन्ध में विवाद हो चुका है ! यह सिर्फ अटकल शास्त्र है और कुछ नहीं !

आपने आज के मैच के सम्बन्ध में जो भी भविष्यवाणी की वो इतनी गोल-मोल थी कि परिणाम जो भी होता ... आप की जय तय थी ! भक्तगण तो यहाँ तैयार बैठे ही रहते हैं जय बोलने के लिए ! यहाँ क्या पूरे भारत में ही ऐसों की कमी नहीं है !

आपने पहले के मैच के सम्बन्ध में जो भविष्यवाणी की मेरे हिसाब से वो भी गलत थी ! सचिन तेंदुलकर के बारे में कुछ भविष्यवाणी करने का क्या साहस नहीं था आपमें ? बता देतीं कि आज उनके 17000 रन पूरे होंगे कि नहीं ?


मैं तो कहता हूँ कि बल्कि चैलेन्ज करता हूँ कि आप और दुनिया के सारे ज्योतिष एक साथ मिलकर भी किसी भी क्रिकेट मैच के सिर्फ दो खिलाड़ियों का सही स्कोर पहले से बता दें ... तो तत्काल खोपडी घुटा कर आपकी शरण में आ जाऊँगा !
है मंजूर ?

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11/02/2009 11:01:00 pm ×

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"मेरी भविष्यवाणी है कि पहले आस्ट्रेलिया खेलेगा, दूसरी पारी भारत की होगी, सामान्य मुकाबला होगा और जीत भारत के हाथ नहीं लगती दिखती है..."

संगीता जी,
देखिये मेरी भविष्यवाणी ५०% नहीं १०१% सत्य रही है।
आपके आलेख को मजाक समझने की धृष्टता तो मैं स्वप्न में भी नहीं कर सकता। बस आपको पढ़ते हुऐ एकाएक ईम्पल्स सी हुई कि कल शायद कुछ ऐसा होगा और लिख दिया...
विनय जी कुछ बता रहे हैं impulsive behaviour के बारे में...चलता हूँ उन्हें पढ़ना जो है।

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11/02/2009 11:02:00 pm ×

आपकी यह बात बहुत अच्छी लगी :
"एक ज्‍योतिषी को नाराज होने का कोई हक ही दुनिया ने नहीं दिया है .. कोई चाहे कितनी भी गाली दे दे .. भला मै नाराज कैसे होउं।"

यह इकलौती बात आपको अवश्य बहुत बड़ा बनाती है !

शुभ कामनाएं

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Unknown
admin
11/02/2009 11:28:00 pm ×

आपके शीर्षक से ९० प्रतिशत सहमत। १० प्रतिशत इसे विज्ञान कहने के काट लिए हैं।

अन्यथा नहीं लें, आप लगी रहें। भई गोस्वामी जी कह गये हैं,‘जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी..’।

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11/02/2009 11:45:00 pm ×

अन्य शास्त्रों की तरह ज्योतिष भी एक शास्त्र हैं ,मैं समझता हूँ कि कोई भी का ज्ञान का गहन अध्ययन किया जाए तो उसमें हर्ज क्या है ? भारत वर्ष में ज्योतिष एक बहुत पुरानी ज्ञान हैं ,लोगों ने इस ज्ञान को भी आज पेट पालने का साधन मात्र बना लिया हैं । समुद्र में गोता लगाने से मोती अवश्य ही प्राप्त होगी ... संगीता जी ! आप गोता लगाते रहिए और हमारे लिए मोती चुनकर लाईए .. यह मात्र सम्भावना नहीं हैं ...निश्चित भी है 1

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11/02/2009 11:49:00 pm ×

अन्य शास्त्रों की तरह ज्योतिष भी एक शास्त्र हैं ,मैं समझता हूँ कि कोई भी का ज्ञान का गहन अध्ययन किया जाए तो उसमें हर्ज क्या है ? भारत वर्ष में ज्योतिष एक बहुत पुरानी ज्ञान हैं ,लोगों ने इस ज्ञान को भी आज पेट पालने का साधन मात्र बना लिया हैं । समुद्र में गोता लगाने से मोती अवश्य ही प्राप्त होगी ... संगीता जी ! आप गोता लगाते रहिए और हमारे लिए मोती चुनकर लाईए .. यह मात्र सम्भावना नहीं हैं ...निश्चित भी है 1

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11/02/2009 11:52:00 pm ×

अन्य शास्त्रों की तरह ज्योतिष भी एक शास्त्र हैं ,मैं समझता हूँ कि कोई भी का ज्ञान का गहन अध्ययन किया जाए तो उसमें हर्ज क्या है ? भारत वर्ष में ज्योतिष एक बहुत पुरानी ज्ञान हैं ,लोगों ने इस ज्ञान को भी आज पेट पालने का साधन मात्र बना लिया हैं । समुद्र में गोता लगाने से मोती अवश्य ही प्राप्त होगी ... संगीता जी ! आप गोता लगाते रहिए और हमारे लिए मोती चुनकर लाईए .. यह मात्र सम्भावना नहीं हैं ...निश्चित भी है 1

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11/03/2009 12:01:00 am ×

संगीता जी छोडिये इन सब बातो को , मस्त रहे आप को खुशी होती है आप की लगन ओर मेहनतभी रंग लाती है, लोग खुद समझ जायेगे.
धन्यवाद

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11/03/2009 12:22:00 am ×

आप आगे बढ़ रही हैं, यह हर्ष का विषय है...

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11/03/2009 06:36:00 am ×

सही विवेचना.... साधुवाद..

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11/03/2009 09:35:00 am ×

संगीता जी आप संवेदन शील है. अच्छी इन्सान हैं. विवाद आपके व्यक्तित्व को लेकर नहीं, विवाद ज्योतिष पर है. मेरी राय में जो गुजर गया और जो आना है,दोनों का ही अस्तित्व नहीं है. केवल वर्तमान हमारे हाथ में होता है. हम भूत और भविष्य के भंवर में खोकर वर्तमान के आनंद को भूल जाते है...

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11/03/2009 10:24:00 am ×

प्रकाश गोविंद जी ,
मैं जब बार बार कह रही हूं कि ज्‍योतिष हकीकत का विज्ञान है ही नहीं .. सिर्फ संभावनाओं का है .. जिसका समय के साथ तालमेल बनाया जा सकता है .. और आप इसके माध्‍यम से हकीकत जानने की कोशिश करना चाहते हैं .. आपका चैलेंज मुझे कैसे मंजूर हो सकता है!!

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11/03/2009 10:33:00 am ×

रामकुमार अंकुश जी,
यदि भूत का कोई महत्‍व नहीं .. तो यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढाई क्‍यूं नहीं बंद कर दी जाती .. भविष्‍य का कोई महत्‍व नहीं तो भविष्‍य के कार्यक्रम बनाने लोग बंद क्‍यूं नहीं कर देते .. वास्‍तव में भूत और भविष्‍य से नहीं .. ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडने वाले प्रभाव से सबको आपत्ति है .. जबकि समुद्र में आनेवाले ज्‍वार भाटे पर चंद्रमा के प्रभाव के अतिरिक्‍त और कोई कारण वैज्ञानिकों को अभी तक समझ में नहीं आया .. पर हम भारतीयों की खासियत है .. पूरी दुनिया जिधर दौड लगाएंगी .. हम आधुनिक बनने के लिए उधर ही दौड लगा लेंगे .. अंदर से कितने भी अंधविश्‍वासी क्‍यूं न रहें !!

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11/03/2009 11:30:00 am ×

अगर १००% भविष्य वाणी खरी उतर जाए तो भी मुद्दा बहस का ही रहता है की ये संजोग है इसके अलावा कुछ नहीं, पर ज्योतिष विद्या की अगर महता नहीं होती तो अनगिनत लोग इसके पीछे लगे ना रहते !!!

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Unknown
admin
11/03/2009 02:18:00 pm ×

संगीता जी,

मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ कि ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है। विज्ञान सम्भावनाओं की खोज या आविष्कार नहीं करता वरन सत्य तक ही पहुँचता है। ज्योतिष भी विज्ञान है। ज्योतिष का सीधा सम्बन्ध गणित से है और गणित के परिणाम सम्भावनाएँ नहीं होतीं। हमारे प्राचीन विद्वानों ने ज्योतिष तथा गणित की गणना करके पृथ्वी से सूर्य तथा अन्य ग्रहों की जो दूरी बताई है वे आज सत्य सिद्ध हो रही हैं।

हमारे प्राचीन ज्योतिष के साथ विडम्बना यह है कि विद्वानों ने इस गुप्त रखना चाहा। इसके साथ अलग-अलग लोगों के अलग-अलग सिद्धांत जुड़ते चले गये।

हमारा ज्योतिष पश्चिम के ज्योतिष की तरह निरयन ज्योतिष नहीं वरन सयन ज्योतिष है। किन्तु सही अयनांश कौन सा है आज इस पर भी विभिन्न मत हैं। लहरी अलग अयनांश बताते हैं, कृष्णमूर्ति अलग, रमन अलग, उज्जैन वाले पण्डित अलग तो वाराणसी वाले पण्डित अलग। कोई भाव को महत्वपूर्ण बताता है तो कोई भावसन्धि को। मेरे कहने का तात्पर्य है कि यह विद्या लुप्त सी हो चुकी है।

अन्त में यह कहना चाहूँगा कि मेरी इस टिप्पणी से यह तात्पर्य न निकाला जाये कि मैं किसी प्रकार की आलोचना कर रहा हूँ या गलती निकाल रहा हूँ या किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहा हूँ। ज्योतिष हमारे पूर्वजों की देन है और मैं इसे पूर्ण सम्मान की दृष्टि से ही देखता हूँ। मैं इसे विज्ञान मानता हूँ और विज्ञान कभी सम्भावनाओं का नहीं होता सिर्फ सत्य का ही होता है।

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11/03/2009 03:31:00 pm ×

अवधिया जी,
धन्‍यवाद .. ज्‍योतिष ग्रहों के जड चेतन पर प्रभाव का अध्‍ययन करता है .. जो कि निश्चित नहीं माना जा सकता .. क्‍यूंकि यदि उन्‍हें निश्चित मान लिया जाए तो फिर मनुष्‍य की मेहनत का कोई मूल्‍य नहीं रह जाएगा .. एक एक चीज निश्चित हो जाएगी .. वास्‍तव में, वर्ष , महीने दिन और घंटे तक की ग्रहस्थिति को देखते हुए उसके सापेक्ष .. ज्‍योतिष के द्वारा जनसामान्‍य के सामने उपस्थित परिस्थितियों की चर्चा की जा सकती है .. और उसके आधार पर कई प्रकार की संभावनाएं निकाली जा सकती हैं .. जिन्‍हें सामने लाया जा सकता है !!

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11/03/2009 07:56:00 pm ×

sangeeta ji ko namaskaar
jaisa ki grah nakshatro se pata chal hi jaata hain ki bhavishya ke garb me kya hain fir bhi jyotish sambhavnao ko batata zarur hain lekin usme pramaanikta bhi hoti hain vaise shayad hi koi aisi vastu ho jisme vivad na ho yaha tak ki swayam vigyan me bhi vivad bana rahta hain
dhanyavaad

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