शक्तिशाली ग्रह लाखों किमी तक की दूरी को प्रभावित कर सकते हैं !!

September 19, 2010
ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्‍वी के जड चेतन पर पड सकता है , इसे लेकर लोगों के मन में बडा संशय बना होता है। इतने दिनों  से ज्‍योतिष के अध्‍ययन के बाद पृथ्‍वी में घटनेवाली घटनाओं का ग्रहों से संबंध और ग्रहों के हिसाब से लोगों के जीवन को प्रभावित होते देखकर हमें अब संशय तो नहीं , पर आश्‍चर्य अवश्‍य होता है। भाग्‍य और भगवान तो आस्‍था की बातें हैं , पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' हमेशा ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले वैज्ञानिक प्रभाव की ही चर्चा करता है।

पिछले आलेख में मैने लिखा था कि 16 सितंबर के आसपास का ग्रहयोग पृथ्‍वी के मौसम को प्रभावित करनेवाला है , इस दौरान भारत ही नहीं , कई देशों में कई तूफान और भूकम्‍प तक आए। भारत में इस दौरान बारिश का मौसम था , इसलिए इसके अछूते होने का तो प्रश्‍न ही नहीं था। आसमान में सुदूर स्थित ग्रह की गति मौसम पर प्रभाव डालते हैं , यह तो काफी दिनों से हमने महसूस किया है , पर अचानक चक्रवात बनने , आंधी तूफान आने और बादलों के इकट्ठे होने की वजह ग्रह कैसे हो सकता है , इसके बारे में पहली बार पिताजी से रोचक जानकारी मिली।

उन्‍होने बताया कि एक तेज गति की ट्रेन कुछ मीटर तक की हवाओं को अपने साथ लेकर चलती है। यदि सामने की दिशा से भी कोई ट्रेन आ रही हो , तो वह भी अपने साथ कुछ मीटर तक की हवा को लेकर चल सकती है। यदि आमने और सामने के ट्रेन की गति में अंतर हो , तो जिस ट्रेन की गति तेज होगी , उसकी ओर हवा को रूख होता जाएगा । यदि कुछ देर के लिए दोनो ट्रेनों को समान गति से चलाया जाए तो भौतिकी के नियम के हिसाब से ही दोनो की गति के कारण उनके मध्‍य चक्रवात बनता दिखाई दे सकता है।

एक ट्रेन की तुलना में ग्रह लाखों गुणा शक्तिशाली हैं , और अपनी तेज गति के कारण वे लाखों किमी तक की दूरी  को प्रभावित कर सकते हैं। पर किसी भी ग्रह का अपना वायुमंडल तो अपने ग्रह की गति के सापेक्ष घूमता होता है , उसके बाद शून्‍य में किसी भी शक्ति के प्रभाव को स्‍पष्‍ट देखना मुश्किल है। इसलिए आसमान में गतिशील किसी भी दो ग्रहों की सापेक्षिक गति का प्रभाव पृथ्‍वी या दूसरे ग्रह के वायुमंडल पर पडता है। और इस कारण अचानक दो चार दिनों के लिए तेज हवाएं , आंधी , तूफान और बादलों के इकट्ठे होने से तेज बारिश आदि की संभावना बन जाती है।

मेरे पिताजी का मानना है कि हमारे जैसे एक ज्‍योतिषी के पास आज के वैज्ञानिक युग के अनुरूप संसाधन नहीं मौजूद होते , इसलिए तिथि की जानकारी होते हुए भी ग्रहों के द्वारा प्रभावित होनेवाले पृथ्‍वी के खास हिस्‍से को इंगित नहीं किया जा सकता है। पर यदि मौसम विभाग के वैज्ञानिक ज्‍योतिषी के साथ मिलकर इन तथ्‍यों की ओर ध्‍यान दें तो उन्‍हें आशातीत सफलता मिल सकती है। विज्ञान की पढाई के बाद ज्‍योतिष के अध्‍ययन , चिंतन और रिसर्च में अपना पूरा जीवन व्‍यतीत करने के बाद इस प्रकार के कई तथ्‍यों का उल्‍लेख अपने लेखों में किया है , जिसके द्वारा पृथ्‍वी के मौसम पर ग्रहों के पडनेवाले प्रभाव का उल्‍लेख है।

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17 Komentar
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एक अत्यन्त जटिल विषय पर सरल और रोचक शैली में समझाया है आपने......

सचमुच उपयोगी और अभिनव आलेख !

बधाई इस उत्तम पोस्ट के लिए......

Balas
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क्वांटम कण ग्रेवीतौन के कारण गृह और तारे न केवल लाखों किलोमीटर तक बल्कि सैंकड़ों पारसेक तक आसपास के पिंडों को प्रभावित कर सकते हैं.

Balas
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बहुत अच्छी जानकारी परसों रात हमारे यहाँ भी भुचाल आया था मगर बच गये। अब आगे सितारे क्या कहते है? इन्तज़ार रहेगा। धन्यवाद।

Balas
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ओरों की तो छोड़ें, सूर्य चन्द्र तो साक्षात प्रमाण हैं।

Balas
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ग्रहों की महिमा तो परमात्मा ही जानता है।
--
हम लोग तो केवल आकलन कर सकते हैं!

Balas
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बहुत सरल और रोचक शैली में आपने गूढ विषय को समझाया है।बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

काव्य के हेतु (कारण अथवा साधन), परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

Balas
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बहुत अच्छी जानकारी ...वैज्ञानिक रूप से कही है ..

Balas
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शानदार प्रस्तुति.. एक कम छुये गये विषय पर..

Balas
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काफी जानकारी भरा आलेख है...
शुक्रिया !

Balas
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mere liye mahatvpurn jankari hai ....
Dhanyvad.

Balas
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mere liye mahatvpurn jankari hai ....
Dhanyvad.

Balas
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सच कहा आपने ..१६ सितम्बर के आस पास हमारे पहाड़ पर तो जैसे आपदा आ ही गयी ।

Balas
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बहुत अच्छी मौलिक जानकारी ।

Balas
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aapne jyotish aur mousam vibhag ke beech samnvay ka achchha mudda uthaya. musibat to yahi hai hindustan me samnvay kahi nhi hai.veklpik chikitsa paddtiyo se samnvay kar allopathy wale ilaj kare to anek asmay mauto ko tala ja skata hai.
suresh tamrakar

Balas
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एक अर्थशाश्त्री होकर विज्ञानं की इतनी सटीक जानकारी प्रशंसनीय है। आप निश्चित रूप से उन ज्योतिषियों में से नहीं प्रतीत होती जो विज्ञानं को नकारने की हठ पकडे रहते हैं, इसकी वजह शायद यही है की आपने ज्योतिष का गहन और सतत अध्ययन किया है। विज्ञानं और ज्योतिष को जोड़ने की आपकी सकारात्मक कोशिश सराहनीय है, आशा करता हूँ कि आप इस प्रयास में अवश्य सफल होगी, मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं। आपने मेरे ब्लॉग पर आकर मेरा प्रोत्साहन बढाया उसके लिए शुक्रिया। आशा है आगे भी आप अपने बहुमूल्य समय में से कुछ क्षण अवश्य मेरे ब्लॉग को दे पाएंगी।

Balas
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कितना जटिल विषय और कितनी आसान भाषा अच्छा भी लगा और समझ भी आ गया
आभार

Balas
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aadaraniy sangita ji namaskar aapka bichar aur lekh ke bare me jana bahut hi achchha laga hm sb bhi to prakriti ke ansh hai hm sab bhi jaise tare aakash mandal me ghum raha hai bhatak rahe hai hm sb bhi is duniya me kisi n kisi tarah bhatak hi rahe hai
arganikbhagyoday.blogspot.com

Balas