बोर्ड की परीक्षाओं में परिणाम संतोषजनक !

YEAR PREDICTION 2020
----------------------------------------------------------------------------------------------------
चंद्र-राशि, सूर्य-राशि या लग्न-राशि नहीं, 
अपने जन्मकालीन सभी ग्रहों पर आधारित सटीक दैनिक और वार्षिक भविष्यफल के लिए
-----------------------------------------------------------------------------------------------------
Search Gatyatmak Jyotish in playstore , Download our app , SignUp & Login
----------------------------------------------------------------------------------------------------
नोट - दिसंबर 2020 तक के लिए निःशुल्क सदस्यता की अवधि लगभग समाप्त होनेवाली है।
----------------------------------------------------------------------------------------------------



6 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

जानकारी देने के लिए शुक्रिया!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

हम तो बचे हैं.

मनोज कुमार ने कहा…

ज्ञानप्रद विवेचन।

Neeraj Rohilla ने कहा…

वाकई????
ग्रहों के प्रभाव से प्रश्नपत्र कठिन हो जाते हैं?

मुझे लगता है ग्रहों के प्रभाव के ज्यादा ये बाते माने रखेंगी।

१) अगर प्रश्नपत्र बनाने वाले/वाली ने समय से नाश्ता किया है तो प्रश्नपत्र आसान होगा।
२) अगर घर से स्कूल आते समय टैफ़िक जाम कम मिला तो प्रश्नपत्र आसान होगा।
३) यदि प्रश्नपत्र बनाने वाले/वाली के पति/पत्नी/(कुंवारे होने पर प्रेमी) ने उससे झगडा नहीं किया है तो प्रश्नपत्र आसान होगा।

वाकई, पहले क्रिकेट, शेयर बाजार और परीक्षाओं के प्रश्नपतत्रों पर भी ग्रहों की गतियों का क्या प्रभाव पडेगा आप डंके की चोट पर बता रही हैं। और साथ ही पूरे विश्वास के साथ कि आपकी विधि फ़लित ज्योतिष से श्रेष्ठ है।

संगीता जी, आपकी प्रविष्टियों पर मैने हमेशा वही लिखा है जो महसूस किया है क्योंकि पता है कि आप इसे केवल पोस्ट के सन्दर्भ में ही लेंगी। लेकिन एक बार पुर्नविचार करके देखें कि आप किस दिशा में बढ रही हैं।

आभार,

संगीता पुरी ने कहा…

नीरज रोहिल्‍ला जी,
पहले क्रिकेट, शेयर बाजार और परीक्षाओं के प्रश्नपतत्रों .. ऐसा नहीं है, मैं आरंभ से ही हर विषय पर लिखती आ रही हूं .. हो सकता है, आपका ध्‍यान अब गया हो!!

जरूरी नहीं कि हम तनाव में होते हैं .. तभी सारी परिस्थितियां गडबड मिलती है .. कभी भी अचानक हमारे सामने अनुकूल और प्रतिकूल वातावरण दिखाई पड सकता है .. कभी 12,कभी 6, तो कभी ढाई वर्ष के लिए .. तो कभी दो चार महीने और कभी दो घंटों के लिए ग्रहों के प्रभाव से ऐसा हो सकता है .. और मैं इसी बात की चर्चा अपने ब्‍लॉग पर करती हूं!!

किसी भी विषय पर बातचीत तभी संभव होती है या बढ पाती है .. जब दोनो पक्षों को उस विषय की जानकारी हो .. मैं ज्‍योतिष के अज्ञानियों के साथ कितना भी तर्क कर लूं .. उन्‍हे संतुष्‍ट नहीं कर सकती .. क्‍यूंकि ज्‍योतिष पर न विश्‍वास करने वाले ज्‍योतिष पर विश्‍वास करने वालों से अधिक अंधविश्‍वासी हैं .. इसलिए उनसे बात करना बेकार है!!

जहां तक मेरी संतुष्टि का सवाल है .. मैं दिन प्रतिदिन अपने लक्ष्‍य की ओर बढ रही हूं .. और निकट ही वो दिन दिखाई दे रहा है .. जब ज्‍योतिष को एक विज्ञान के रूप में साबित कर पाऊंगी !!

विष्णु बैरागी ने कहा…

संकट और संकट में ही निदान की सूचना - दोनों एक साथ।