बच्चों के नक्षत्र आधारित नाम से भविष्य फल

Astrology in hindi by name

प्राचीन काल में अभिभावक पढ़े लिखे नहीं होते थे, इसलिए बच्चों का जन्मसमय उन्हें याद नहीं रहता था। पूरी कुंडली खो भी जाये तो बच्चे की राशि और नक्षत्र याद रहे, इसलिए पंडित बच्चों के नक्षत्र आधारित नाम रख दिया करते थे। निम्न राशियों के नक्षत्रों के विभिन्न चरणों के लिए अक्षरों से नाम की शुरुआत होती थी :------

मेष राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी मंगल होता है ।

वृष राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी स्वामी  शुक्र होता है।
मिथुन राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी  बुध होता है।
कर्क राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी चंद्रमा होता है।
सिंह राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी सूर्य होता है।
कन्या राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बुध होता है।
तुला राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी शुक्र होता है।
वृश्चिक राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी मंगल होता है।
धनु राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बृहस्पति होता है।
मकर राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी शनि होता है।
कुंभ राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी  शनि होता है।
मीन राशि के बच्चों के नाम के लिए प्रथम अक्षर  दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची लिए जाते थे, इस राशि का स्वामी बृहस्पति होता है।
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बाद में जरूरत पड़ने पर या रूचि होने पर जन्म की राशि और नक्षत्र के आधार पर ही पंडित उनके बारे में भविष्यवाणी या उपाय करते होंगे। इसका अर्थ है क़ि प्राचीन काल में ऋषियों ने जन्म-नक्षत्र को बहुत महत्व दिया था, चंद्र यानि मन के हिसाब से ही परिस्थिति को बताया जाता रहा होगा।   प्राचीनकाल में जीवन सरल भी था, इसलिए इसका कोई औचित्य हो, पर आज के समय में तो एक नक्षत्र को देखकर जीवन के बारे में बता पाना असंभव है।


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