कोरोना काल की शादी

 कोरोना काल की शादी 

पिछले साल ही फरवरी माह में ही हम दोनों परिवारों ने 11 दिसंबर को बेटे-बहू की शादी तय कर दी थी! उस वक्त विदेशों से कोरोना की खबर मिल रही थी और महानगर में रहनेवाले जागरूक इसको लेकर सावधानी बरत रहे थे, लेकिन हम जैसे छोटे शहरों में रहने वाले बिल्कुल बेपरवाह थे! हालांकि ग्रहीय स्थिति को देखते हुए मैं ज़ब भी बोलती कि हमें शादी की शॉपिंग मार्च-अप्रैल में पूरी कर लेनी चाहिए, आगे 2020 का समय अच्छा नहीं तो परिवार में सब चौँक जाते!

 लेकिन 22 मार्च के लॉक डाउन ने हमें शॉपिंग का भी मौक़ा नहीं दिया और दिन प्रतिदिन कोरोना को लेकर वातावरण हमारे देश में भी भयावह होता गया! हमारे कुछ निकटतम लोगों तक कोरोना का इन्फेक्शन, उससे माहभर की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी और कुछ की मौत की खबर भी हमतक पहुंची! अक्टूबर तक वातावरण की भयावहता को देखकर लगा कि हमें शादी की तिथि बढ़ानी होगी! पर नवंबर में कोरोना के प्रति लोगों में बढ़ती रोग प्रतिरोधक क्षमता और छिटपुट मामले हमारी निराशा को कम करते गए और हमने 11 दिसंबर को शादी होने देने का निश्चय किया!

कोरोना के प्रति जागरूकता पर मैंने पिछले साल इतनी पोस्ट लिखी थी, इसपर मेरी एक पुस्तक 'कोरोना डायरी' भी किंडल पर मौजूद है, और हमारे ही आयोजन से कोई गलती न हो जाये, चिंता काफ़ी हो रही थी!  सबसे पहले तो हमने सोचा कि हम दोनों भाइयों (जो साथ रहते हैँ )के परिवार के 8 लोग , दो -तीन मित्र के परिवार ही बरात में जाएँ और शादी संपन्न करवाकर वापस लौट जाएँ! पर परिवार की कुछ महिलाएं और बच्चों के उत्साह को देखते हुए कुछ नजदीकी लोगों को शादी में शामिल करने की सहमति बनी! वैसे भी मार्च से सभी घरों में बंद नीरस जीवन जी रहे थे, सबके मनोरंजन का एक अच्छा मौका आया था! दो रिश्तेदार और दो मित्र से कार्यक्रम पांच रिश्तेदारों के और पांच मित्र के परिवार तक पहुंचा!

यह फैसला लेना आसान नहीं था, गेस्ट हमारे घर सुरक्षित पहुंचे, सुरक्षित रहें और सुरक्षित वापस जाएँ, इसकी अच्छी व्यवस्था रखनी थी! सुनती आ रही हूँ, किसी को भी यश बड़ा मुश्किल से मिलता है अपयश आसानी से! सबको बस या ट्रैन से आने जाने की मनाही हुई, दूरवाले फ्लाइट से और नजदीक वाले कार से पहुंचे और लौटें, यह तय किया गया! दिल्ली मुम्बई से आनेवाले को 10 दिन पूर्व यानि 27 नवंबर को  बुलाया गया ताकि वो क्वेरेंटीन में रह सकें! बहुत सावधानी से शोपिंग की गयी!  सेनेटाइजर प्रचुर मात्रा में रखा गया! भरपूर मास्क के साथ  टेम्परेचर गन और ऑक्सीमीटर तक मंगवाया गया! सबको होम्योपैथी की दवा, नाश्ते के बाद विटामिन c और गिलोय, काढ़े की व्यवस्था रखी गयी! गरम खाने और गरम पानी का उपयोग होता रहा! सूखी मिठाइयाँ उपयोग के तीन दिन पूर्व मंगवाई जाती रही! रसगुल्ले वगैरह हल्दीराम के उपयोग किए गए! 

कार्ड छपने के बाद भी उसको बांटने में दिक्कत आ रही थी, क्योंकि रोज प्रोग्राम बदल रहा था! शादी तो विवाह भवन में होना था लेकिन हमारे घर के सभी कार्यक्रम के लिए लॉन के फूल पत्ते हटाकर पंडाल डालकर सजावट कर तैयार किया गया! पहले तो सब कार्यक्रम के साथ रिसेप्शन भी अपने अहाते में ही होना तय हुआ, पर शादी की तिथि नजदीक आते आते थोड़ी बेफिक्री आती गयी और गेस्ट लिस्ट बढ़ती गयी और लगभग सभी नजदीकी मित्रों के परिवार को रिसेप्शन में शामिल कर लिया गया, जो अपने अहाते में संभव नहीं था, इसलिए अलग वेन्यू लिया गया! 

इस तरह 7 दिसंबर से 14 दिसंबर तक  कोई न कोई कार्यक्रम चलता रहा! उसके बाद सभी गेस्ट निकल गए, 23 तक पूरा घर खाली हो गया! शादी के एक महीने पहले से शादी के एक सप्ताह बाद तक भी ईश्वर से प्रार्थना करती रही, ध्यान लगा रहा कि सब सुरक्षित रहे और अभी तक सब समाचार शुभ है, आप सबों की शुभकामनाओं से आगे भी ऐसा ही चलेगा!

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3 टिप्‍पणियां:

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बेटे बहु और आप पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाई। विवाह कार्यक्रम आनंदमय और सफल रहा कोरोनाकाल में, यह बड़ी उपलब्धि है। शुभकामनाएँ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (17-01-2021) को   "सीधी करता मार जो, वो होता है वीर"  (चर्चा अंक-3949)    पर भी होगी। 
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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हार्दिक मंगल कामनाओं के साथ-    
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सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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