हिन्दू पंचांग 2021 विवाह मुहूर्त

हिन्दू पंचांग 2021 विवाह मुहूर्त



हिन्दू पंचांग 2021 विवाह मुहूर्त

Marriage dates in 2021 hindu calendar

2021 के  विवाह मुहूर्त्त शुद्ध और आवश्यक में 


अप्रैल 2021 

  • 24 अप्रैल - चैत्र शुक्ल द्वादशी , शनिवार
  • 25 अप्रैल - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी , रविवार
  • 26 अप्रैल - चैत्र शक्ल चतुर्दशी , सोमवार
  • 27 अप्रैल - चैत्र कृष्ण पक्ष , प्रथमा
  • 30 अप्रैल - बैशाख कृष्ण पक्ष , चतुर्थी

मई 2021 

  • 1 मई - बैशाख कृष्ण पक्ष , पंचमी
  • 3 मई - बैशाख कृष्ण पक्ष , सप्तमी
  • 7 मई - बैशाख कृष्ण पक्ष, एकादशी
  • 8 मई - बैशाख कृष्ण पक्ष द्वादशी
  • 15 मई - बैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया 
  • 21 मई - बैशाख शुक्ल पक्ष नवमी 
  • 22 मई - बैशाख शुक्ल पक्ष दशमी 
  • 24 मई - बैशाख शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

जून 2021 

  • 4 जून - ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष दशमी 
  • 5 जून - ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी 
  • 19 जून - ज्येष्ठ  शुक्ल पक्ष नवमी 
  • 30 जून -आषाढ़ कृष्ण पक्ष पंचमी 
Panchang 2021 marriage dates

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जुलाई 2021 

  • 1 जुलाई - आषाढ़ कृष्ण पक्ष सप्तमी 
  • 2 जुलाई - आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी 
  • 15 जुलाई - आषाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी

नवंबर 2021 

  • 19 नवंबर - कार्तिक शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 
  • 20 नवंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष प्रथमा 
  • 21 नवंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वितीया 
  • 28 नवंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष नवमी 
  • 29 नवंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष दशमी 
  • 30 नवंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी 

दिसंबर 2021 

  • 1 दिसंबर - मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वादशी  
  • 6 दिसंबर - मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष तृतीया  
  • 7 दिसंबर - मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष चतुर्थी 
  • 11 दिसंबर - मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष अष्टमी   
  • 12 दिसंबर - मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष नवमी 
  • 13 दिसंबर - मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी  

Best wedding dates 2021 hindu astrology 

( आवश्यक में विवाह मुहूर्त )

  • 18 जनवरी - पौष शुक्ल पंचमी 
  • 22 अप्रैल - चैत्र शुक्ल दशमी 
  • 24 अप्रैल - चैत्र शुक्ल द्वादशी 
  • 25 अप्रैल - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 
  • 26 अप्रैल -चैत्र शुक्ल चतुर्दशी 
  • 27 अप्रैल - चैत्र पूर्णिमा 
  • 28 अप्रैल - बैशाख कृष्ण द्वितीया 
  • 29 अप्रैल - बैशाख कृष्ण तृतीया 
  • 1 मई - बैशाख कृष्ण पंचमी 
  • 2 मई - बैशाख कृष्ण षष्ठी  
  • 7  मई - बैशाख कृष्ण एकादशी
  • 8 मई - बैशाख कृष्ण द्वादशी 
  • 9 मई - बैशाख कृष्ण त्रयोदशी   
  • 13 मई - बैशाख शुक्ल द्वितीया 
  • 14 मई - बैशाख शुक्ल द्वितीया 
  • 21 मई - बैशाख शुक्ल नवमी 
  • 22 मई - बैशाख शुक्ल दशमी  
  • 23 मई - बैशाख शुक्ल एकादशी 
  • 24 मई - बैशाख शुक्ल द्वादशी 
  • 26 मई - बैशाख पूर्णिमा  
  • 28 मई - ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया 
  • 29 मई - ज्येष्ठ कृष्ण तृतीया  
  • 30 मई - ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी 
  • 3 जून - ज्येष्ठ कृष्ण नवमी 

(Marriage dates in 2021 Hindu calendar)

उपरोक्त सभी मुहूर्त में से कौन सी तिथि किन लग्न और किन राशिवालों के लिए गत्यात्मक दृष्टि से अधिक उपयुक्त होगी, इसकी चर्चा इस लेख में की गयी है। 

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    आज का राशिफल दिखाएँ !

     

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    hindu panchang Rashifal in Hindi

    अभी तक ज्‍योतिष के पूर्ण विकास न होने के बावजूद भी यह प्रश्न ज्योतिष में अक्सर उपस्थित होते हैं, आज का राशिफल सभी राशियों का today ?। ज्योतिष में रिसर्च कम होने का मुख्य कारण इसे विज्ञान न माना जाना रहा। दूसरों ने कह दिया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, ज्‍योतिष अंधविश्‍वास है तो हम आंख, कान सब मूंदे इसे गलत मानते जा रहे हैं, किसी के कुछ कहने का हमपर कोई असर ही नहीं हो रहा।

    वो तो भला हो हमारे पूर्वजों का, जिन्‍होने हमारी सामाजिक व्‍यवस्‍था इतनी चुस्‍त दुरूस्‍त बनायी थी, प्राचीन ज्ञान और परंपरा को संभाले जाने के लिए इतने सशक्‍त प्रयास हुए थे कि बुद्धिजीवी वर्ग के द्वारा लाख चाहते हुए भी उसे तोडा नहीं जा सका। 50-55 सालों तक रिसर्च करके हमारे परिवार ने 'गत्यात्मक ज्योतिष' जैसी विधा से आज के ज़माने के अनुकूल बनाकर ज्योतिष को प्रतिष्ठापित करने का पूरा प्रयास किया है। अब आप हमसे आराम से पूछ सकते हैं - 

    Rashifal in Hindi mai

    Law of Nature

    प्रकृति में से हजारो लाखों करोडो नियम ढूंढे जा चुके और प्रतिदिन लाखों शोध इस बात को स्‍पष्‍ट कर रहे हैं कि इस दुनिया में कोई भी कार्य बिना नियम के नहीं होता है। एक एक बीज में निहित उर्जा जिस ढंग से पौधों , फूलों और और फलों के माध्‍यम से प्रस्‍फुटित होती है, उसे हम उसके बीज को देखकर पहले ही अनुमान लगा लेते हैं। इसके बावजूद इस दुनिया में होनेवाली हर दुखद और सुखद घटनाओं को हम अपने कर्म से जोड देते हैं , जबकि कई जगहों पर हम कर्म से विपरीत फल की प्राप्ति होते देखते हैं। तब फिर हम इसे संयोग या दुर्योग से जोड देते हैं, अज्ञानता में और कर भी क्‍या सकते हैं ? 

    लेकिन जब इस पूरी दुनिया में संयोग और दुर्योग का खेल कहीं देखने को नहीं मिलता, तो फिर हमारे जीवन में कैसे आ सकता है, जरूर इसके पीछे कुछ रहस्‍य है। इस कार्य में सबका साथ बिल्‍कुल आवश्‍यक है , तभी बडे स्‍तर पर सफलता हाथ आ सकती है। प्रकृति के नियमों से ही को देखकर ही 'Aaj ka rashifal '  ब्लॉग के द्वारा देते हुए हम आज की सभी राशियों का राशिफल और अंग्रेजी में निकालते आ रहे हैं। ब्लागस्पाट पर Aaj ka rashifal com  प्रयास रहा है। हमारे एप्प ने सुविधा दे दी है , आज का राशिफल सभी राशियों का today ?

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      कोरोना काल की शादी

       

       कोरोना काल की शादी 

      पिछले साल ही फरवरी माह में ही हम दोनों परिवारों ने 11 दिसंबर को बेटे-बहू की शादी तय कर दी थी! उस वक्त विदेशों से कोरोना की खबर मिल रही थी और महानगर में रहनेवाले जागरूक इसको लेकर सावधानी बरत रहे थे, लेकिन हम जैसे छोटे शहरों में रहने वाले बिल्कुल बेपरवाह थे! हालांकि ग्रहीय स्थिति को देखते हुए मैं ज़ब भी बोलती कि हमें शादी की शॉपिंग मार्च-अप्रैल में पूरी कर लेनी चाहिए, आगे 2020 का समय अच्छा नहीं तो परिवार में सब चौँक जाते!

       लेकिन 22 मार्च के लॉक डाउन ने हमें शॉपिंग का भी मौक़ा नहीं दिया और दिन प्रतिदिन कोरोना को लेकर वातावरण हमारे देश में भी भयावह होता गया! हमारे कुछ निकटतम लोगों तक कोरोना का इन्फेक्शन, उससे माहभर की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी और कुछ की मौत की खबर भी हमतक पहुंची! अक्टूबर तक वातावरण की भयावहता को देखकर लगा कि हमें शादी की तिथि बढ़ानी होगी! पर नवंबर में कोरोना के प्रति लोगों में बढ़ती रोग प्रतिरोधक क्षमता और छिटपुट मामले हमारी निराशा को कम करते गए और हमने 11 दिसंबर को शादी होने देने का निश्चय किया!

      कोरोना के प्रति जागरूकता पर मैंने पिछले साल इतनी पोस्ट लिखी थी, इसपर मेरी एक पुस्तक 'कोरोना डायरी' भी किंडल पर मौजूद है, और हमारे ही आयोजन से कोई गलती न हो जाये, चिंता काफ़ी हो रही थी!  सबसे पहले तो हमने सोचा कि हम दोनों भाइयों (जो साथ रहते हैँ )के परिवार के 8 लोग , दो -तीन मित्र के परिवार ही बरात में जाएँ और शादी संपन्न करवाकर वापस लौट जाएँ! पर परिवार की कुछ महिलाएं और बच्चों के उत्साह को देखते हुए कुछ नजदीकी लोगों को शादी में शामिल करने की सहमति बनी! वैसे भी मार्च से सभी घरों में बंद नीरस जीवन जी रहे थे, सबके मनोरंजन का एक अच्छा मौका आया था! दो रिश्तेदार और दो मित्र से कार्यक्रम पांच रिश्तेदारों के और पांच मित्र के परिवार तक पहुंचा!

      यह फैसला लेना आसान नहीं था, गेस्ट हमारे घर सुरक्षित पहुंचे, सुरक्षित रहें और सुरक्षित वापस जाएँ, इसकी अच्छी व्यवस्था रखनी थी! सुनती आ रही हूँ, किसी को भी यश बड़ा मुश्किल से मिलता है अपयश आसानी से! सबको बस या ट्रैन से आने जाने की मनाही हुई, दूरवाले फ्लाइट से और नजदीक वाले कार से पहुंचे और लौटें, यह तय किया गया! दिल्ली मुम्बई से आनेवाले को 10 दिन पूर्व यानि 27 नवंबर को  बुलाया गया ताकि वो क्वेरेंटीन में रह सकें! बहुत सावधानी से शोपिंग की गयी!  सेनेटाइजर प्रचुर मात्रा में रखा गया! भरपूर मास्क के साथ  टेम्परेचर गन और ऑक्सीमीटर तक मंगवाया गया! सबको होम्योपैथी की दवा, नाश्ते के बाद विटामिन c और गिलोय, काढ़े की व्यवस्था रखी गयी! गरम खाने और गरम पानी का उपयोग होता रहा! सूखी मिठाइयाँ उपयोग के तीन दिन पूर्व मंगवाई जाती रही! रसगुल्ले वगैरह हल्दीराम के उपयोग किए गए! 

      कार्ड छपने के बाद भी उसको बांटने में दिक्कत आ रही थी, क्योंकि रोज प्रोग्राम बदल रहा था! शादी तो विवाह भवन में होना था लेकिन हमारे घर के सभी कार्यक्रम के लिए लॉन के फूल पत्ते हटाकर पंडाल डालकर सजावट कर तैयार किया गया! पहले तो सब कार्यक्रम के साथ रिसेप्शन भी अपने अहाते में ही होना तय हुआ, पर शादी की तिथि नजदीक आते आते थोड़ी बेफिक्री आती गयी और गेस्ट लिस्ट बढ़ती गयी और लगभग सभी नजदीकी मित्रों के परिवार को रिसेप्शन में शामिल कर लिया गया, जो अपने अहाते में संभव नहीं था, इसलिए अलग वेन्यू लिया गया! 

      इस तरह 7 दिसंबर से 14 दिसंबर तक  कोई न कोई कार्यक्रम चलता रहा! उसके बाद सभी गेस्ट निकल गए, 23 तक पूरा घर खाली हो गया! शादी के एक महीने पहले से शादी के एक सप्ताह बाद तक भी ईश्वर से प्रार्थना करती रही, ध्यान लगा रहा कि सब सुरक्षित रहे और अभी तक सब समाचार शुभ है, आप सबों की शुभकामनाओं से आगे भी ऐसा ही चलेगा!

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        प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे - 2

         

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        गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च के बादज्योतिष को जन-जन तक समझना-समझाना आवश्यक महसूस होता है।  कल के लेख में मैने समझाया था कि सबों की नजर अपने को स्थिर मानकर ही परिस्थितियों का अवलोकन करती है। इसलिए हमलोग असमान का अवलोकण पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए करते हैं , इसलिए ज्‍योतिष के इस महत्‍वपूर्ण आधार को गलत साबित करना सही नहीं है। बात अवलोकन तक तो ठीक मानी जा सकती है , पर हमारे अवलोकण से उन राशियों या ग्रहों नक्षत्रों का पृथ्‍वी के जड चेतन पर प्रभाव भी पड जाए , यह तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण वालों को तर्कसम्‍मत नहीं लगता। और ज्‍योतिष  तो पृथ्‍वी के सापेक्ष ही सभी राशियों और ग्रहों  के स्‍थान परिवर्तन की चर्चा करता है और उसके हमपर प्रभाव पर बल देता है। जाहिर है , अधिकांश पाठक इस बात को भी स्‍वीकार नहीं कर पाते। 

        पर इसके लिए भी मेरे अपने तर्क हैं। हमारे सौरमंडल का एक तारा सूर्य लगभग अचल है , हालांकि इधर के कुछ वर्षों में उसकी गति के बारे में भी जानकारी मिली है , पर यह गति बहुत अधिक नहीं है और वास्‍तव में यह पृथ्‍वी की गति के सापेक्ष ही परिवर्तनशील दिखाई देता है। ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में सूर्य प्रतिदिन एक डिग्री खिसक जाता है , जबकि राशि के हिसाब से प्रतिमाह एक नई राशि में प्रवेश करता है।

          चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप (jyotish whatsapp group link) में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

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        पृथ्‍वी की वार्षिक गति के सापेक्ष ही पंचांगों में सूर्य की स्थिति में प्रतिदिन परिवर्तन देखा जाता है , जबकि दिन भर के 24 घंटों में  सूर्य की स्थिति में कोणिक परिवर्तन पृथ्‍वी की दैनिक गति के कारण ही होता है।

        सूर्य की ये दोनो गतियां अवास्‍तविक मानी जा सकती हैं , पर इसके फलस्‍वरूप पृथ्‍वी पर दिन भर के 24 घंटों और वर्षभर के 365 दिनों के सूर्य के अलग अलग प्रभाव को स्‍पष्‍टतया देखा जा सकता है। 

        भृगुसंहिता के बारे में 

        पृथ्‍वी की वार्षिक गति के कारण सूर्य की स्थिति में होनेवाले परिवर्तन का प्रभाव हम देख पाते हैं। सूर्य तो 12 महीने के 365 दिनों तक एक ही स्‍थान पर है , पर उसके द्वारा पृथ्‍वी के विभिन्‍न हिस्‍सों में कभी सर्दी तो कभी गर्मी .. इस मौसम परिवर्तन का कारण पृथ्‍वी के कारण उसकी सापेक्षिक गति ही तो है।

        इसी प्रकार पृथ्‍वी की दैनिक गति के कारण सूर्य की स्थिति में होने वाले परिवर्तन को भी हम सहज ही महसूस कर सकते हैं। सवेरे का सूरज , दोपहर का सूरज और शाम के सूरज की गरमी का अंतर सबको पता है यानि कि अवलोकण के समय सूर्य जहां दिखाई देता है , वैसा ही प्रभाव दिखाता है।

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        अब चूंकि सूर्य का प्रभाव स्‍पष्‍ट है , इसमें हमारा विश्‍वास हैं , अन्‍य ग्रहों का प्रभाव स्‍पष्‍ट नहीं है , इसलिए इसे अंधविश्‍वास मान लेते है। पर एक सूर्य के उदाहरण से ही पृथ्‍वी के सापेक्ष पूरे आसमान और ग्रहों की स्थिति का प्रभाव भी स्‍पष्‍ट हो जाता है।

        सापेक्षिक गति के कारण होनेवाले इस एक उदाहरण के बाद ज्‍योतिष के इस आधार में कोई कमी निकालना बेतुकी बात होगी। पृथ्‍वी को स्थिर मानते हुए आसमान को 12 भागों में बांटा जाना और उसमें स्थित ग्रह नक्षत्र के प्रभाव की चर्चा करना पूर्ण तौर पर विज्ञान माना जा सकता है , जिसकी चर्चा लगातार होगी .

        ग्रहो नक्षत्रों की गति में साम्यता की वजह से ही इसे काल निर्धारण का सशक्त माध्यम समझा गया और सभी जगहों पर काल की छोटी से बड़ी इकाई ग्रह नक्षत्रों के चाल पर ही निर्भर है! जल्द ही वीडियो के द्वारा अपनी बातों को समझाने का प्रयास करूंगी! 

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          प्रैक्टिकली ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे - 1

           

          Jyotish sikhe in hindi

          विषय प्रवेश - मेरे द्वारा पत्र पत्रिकाओं में ज्‍योतिष से संबंधित जितने भी लेख छपे , वो सामान्‍य पाठकों के लिए न होकर ज्‍योतिषियों के लिए थे। यहां तक कि मेरी पुस्‍तक भी उन पाठकों के लिए थी , जो पहले से ज्‍योतिष का ज्ञान रखते थे। यही कारण है कि मैं ब्‍लॉग के पाठकों के लिए जनोपयोगी लेख लिखा करती हूं। इधर कुछ वर्षों से ज्‍योतिष में प्रवेश करने के लिए एक पुस्‍तक की मांग बहुत सारे पाठकों द्वारा की जा रही है , क्‍यूंकि इसके बिना वे मेरी प्रकाशित पुस्‍तक को समझने में समर्थ नहीं हैं।

          वैसे तो ज्‍योतिष में प्रवेश करने के लिए बाजार में पुस्‍तकों की कमी नहीं , जिसका रेफरेंस मैं अपने पाठकों को देती आ रही हूं , पर अधिक वैज्ञानिक ढंग से पाठकों को ज्‍योतिष की जानकारी दी जा सके , इसलिए मैं खेल खेल में वैज्ञानिक ढंग से ज्‍योतिष की सामान्य जानकारी देने के लिए यह कोर्स तैयार किया, जिसका पीडीऍफ़ आप सबों के साथ साझा करूंगी! आप सबों का साथ मिले तो दुनिया के जान-जान तक ज्योतिषीय ज्ञान पहुंचाने का मेरा प्रयास अवश्‍य सफल होगा।

          Aao jyotish sikhe in hindi

          कोई भी कुंडली खोलकर आप जातक के जन्म के वक्त विभिन्न दिशाओ में मौजूद ग्रहों को समझ सकते हैँ!

          राशि परिचय - हमारे लिए हमारी यह धरती कितनी भी बडी क्‍यूं न हो , पर इतने बडे ब्रह्मांड में इसकी स्थिति एक विंदू से अधिक नहीं है और इसके चारो ओर फैला है विस्‍तृत आसमान। हमारे ऋषि महर्षियों ने पृथ्‍वी को एक विंदू के रूप में मानते हुए 360 डिग्री में फैले आसमान को 30-30 डिग्री के 12 भागों में बांटा था। इन्‍ही 12 भागों को राशि कहा जाता है , जिनका नामकरण मेष , वृष , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्‍या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ और मीन के रूप में किया गया है। यह ज्‍योतिष का एक मुख्‍य आधार है और इन्‍हीं राशियों तथा उनमें अनंत की दूरी तक स्थित ग्रहों के आधार पर ज्‍योतिष के सिद्धांतों की सहायता से भविष्‍यवाणियां की जाती है।

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          पर हमेशा से जो ज्‍योतिष विरोधी हैं , वे ज्‍योतिष के इस मुख्‍य आधार को ही गलत सिद्ध करने की चेष्‍टा करते हैं। वे बेतुका तर्क करते हैं कि ज्‍योतिष पृथ्‍वी को अचल मानते हुए अपना अध्‍ययन शुरू करता है , जबकि पृथ्‍वी सूर्य के चारो ओर चक्‍कर लगाती है। विरोधी यह मानने की भूल करते हैं कि फलित ज्‍योतिष का विकास उस वक्‍त हुआ , जब लोगों को यह मालूम था कि पृथ्‍वी स्थिर है और सूर्य तथा अन्‍य तारे उसके चारो ओर चक्‍कर लगाती है।

          लग्नकुंडली

          हमारे ऋषि मुनियों पर यह इल्‍जाम लगाना बिल्‍कुल गलत है कि उन्‍हे सत्‍य की जानकारी नहीं थी। जब उनके द्वारा विकसित किए गए सिद्धांतों के आधार पर विभिन्‍न ग्रहों और खगोलिय स्थिति का एक एक घटी पल निकालना संभव हो चुका है , तब उनके बारे में कोई पूर्वाग्रह पालना उचित नहीं।

          Kaise Jyotish sikhe in Hindi

          सापेक्षिक गति की अवधारणा - इस विषय पर मेरे अपने कुछ तर्क हैं। हमारी अपनी नजर या दृष्टि हमारे शरीर को स्थिर मानकर ही आसपास की परिस्थितियों या दृश्‍यों का अवलोकण करती है, चाहे हमारा शरीर गतिशील ही क्‍यूं न हो। हम सडक पर किसी के साथ चल रहे हों और उसकी गति अधिक हो जाए तो हम अपने को पीछे मानने लगते हैं , यह जानते हुए कि हम पीछे नहीं हैं, अपने घर से काफी आगे बढ चुके हैं। विपरीत स्थिति में हम उसे पीछे मानेंगे , इसका अर्थ यह है कि हम अपने शरीर को स्थिर मानते हुए ही आसपास का जायजा लेते हैं। इसलिए तो भौतिक विज्ञान में भी सापेक्षिक गति की अवधारणा है।

          किसी भी वस्‍तु की सापेक्षिक गति हमारी इसी सोंच का परिणाम है। इसी प्रकार हम गाडी में बैठे हों तो न सिर्फ पेड पौधों को गतिशील देख आश्‍चर्यित होते हैं , वरन् यह भी कह बैते हैं कि ‘अमुक शहर , अमुक गांव या अमुक मुहल्‍ला आ गया’, जबकि वो शहर , गांव या मुहल्‍लावहां पहले से होता है। इसी नियम के तहत् जब हमें ब्रह्मांड और आकाश में बिखरे अगणित तारों का अध्‍ययन करना होता है , तो हम पृथ्‍वी को स्थिर और आसमान के सभी राशियों और ग्रहों तारों को गतिशील मान लेते हैं , जो अज्ञानता नहीं मानी जा सकती है।



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