गत्‍यात्‍मक क्यों है ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’

 

फलित ज्योतिष सूत्र

‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ सिर्फ नाम से ही गत्‍यात्‍मक नहीं है , इसका नामकरण ऐसा किया गया है क्‍योंकि इसके द्वारा भविष्‍यवाणी करने का मुख्‍य आधार ग्रहों की गति ही है। सौरमंडल में भले ही सूर्य स्थिर हो और पृथ्‍वी उसकी परिक्रमा करती हो , पर फलित ज्‍योतिष पृथ्‍वी को स्थिर मानकर उसके सापेक्ष ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करता है। पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से उसके सापेक्ष ग्रहों की गति में प्रतिदिन भिन्‍नता देखी जाती है, यहीं से हमें फलित ज्योतिष सूत्र मिले। यूं तो गणित ज्‍योतिष के सूर्य सिद्धांत में ग्रहों की इन गतियों की विभिन्‍नता की चर्चा हुई है , पर इसके अनुसार फलित पर प्रभाव पडने की चर्चा कहीं नहीं हुई। फलित पर ग्रहों की विभिन्‍न ग्रहों की गतियों का भिन्‍न भिन्‍न तरह के प्रभाव को देखते हुए ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष द्वारा’ ग्रह गति का निम्‍न प्रकार से वर्गीकरण और फलित ज्योतिष सूत्र दिया गया है ....

falit jyotish sutra

1. अति‍शीघ्री गति ... गत्यात्मक ज्योतिष के फलित ज्योतिष सूत्र के अनुसार ग्रह वास्‍तविक तौर पर पृथ्‍वी से अधिक दूरी पर तथा सूर्य से कम की कोणात्‍मक दूरी पर हो तो ग्रह अतिशीघ्री स्थिति में होते हैं। बुध सूर्य से 0 डिग्री से 9 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा 2 डिग्री प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री की कोणिक दूरी पर तथा प्रतिदिन 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो अतिशीघ्री अवस्‍था में होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से 0 डिग्री से 30 डिग्री के मध्‍य हो तो अतिशीघ्री होते हैं।

2. शीघ्री गति ... अतिशीघ्री की तुलना में जब ग्रहों की कोणात्‍मक दूरी सूर्य से और इनकी गति सामान्‍य से कुछ अधिक हो , तो ग्रह शीघ्री कहे जाते हैं। बुध सूर्य से 9 डिग्री से 24 डिग्री की दूरी पर तथा 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो , शुक्र 15 डिग्री से 40 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर और 1 डिग्री से अधिक प्रतिदिन की गति में हो तो शीघ्री अवस्‍था का होता है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि की दूरी सूर्य से 30 डिग्री से 75 डिग्री के मध्‍य हो तो ये शीघ्री अवस्‍था के होते हें।

3. सामान्‍य गति ... इस समय ग्रह पृथ्‍वी से औसत दूरी पर होते हैं । सूर्य से बुध की कोणात्‍मक दूरी लगभग 27 डिग्री और शुक्र की सूर्य से कोणात्‍मक दूरी 45 डिग्री होती है , जबकि मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 90 डिग्री की दूरी पर सामान्‍य गति में होते हैं।

4. मंदगति ... विभिन्‍न ग्रह वक्री होने के पूर्व और मार्गी होने से पश्‍चात् इस दशा से गुजरते हैं। बुध 10.12 दिन पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने से 10;12 दिन पश्‍चात तक मंद गति में होता है। शुक्र वक्री होने से डेढ महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से डेढ महाने बाद तक मंद गति में होता है। बृहस्‍पति वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है। मंगल वक्री होने से दो महीने पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से दो महीने बाद तक मंद गति में होता है। शनि वक्री होने से एक महीना पूर्व से वक्री होने तक तथा मार्गी होने के दिन से एक महीने बाद तक मंद गति में होता है।

5. वक्री गति .... पृथ्‍वी से सापेक्षिक गति कम होने से ग्रह वक्री गति में देखे जाते हैं। इस समय पृथ्‍वी से ग्रहों की वास्‍तविक दूरी बहुत कम होने लगती है। बुध सूर्य से 18 कोणात्‍मक डिग्री की दूरी पर और शुक्र सूर्य से लगभग 30 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर स्थित हो तो वे वक्री होते हें। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 120 डिग्री की कोणात्‍मक दूरी पर वक्री स्थिति में आते हैं।

6. अतिवक्री गति ... इस समय ग्रहों की वास्‍तविक दूरी पृथ्‍वी से निकटतम होती है। वक्री स्थिति में सूर्य से 0 से 9 डिग्री के मध्‍य बुध और वक्री स्थिति में सूर्य से 0 डिग्री से 15 डिग्री के मध्‍य शुक्र हो तो ऐसी स्थिति बनती है। मंगल , बृहस्‍पति और शनि सूर्य से 150 डिग्री से 180 डिग्री की दूरी पर अतिवक्री अवस्‍था में होते हैं।

इस तरह फलित ज्योतिष सूत्र के अनुसार ग्रहों की इन भिन्‍न भिन्‍न गति के कारण उनकी गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति का आकलन और उसके जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा अगले पोस्‍ट में की जाएगी।

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    गणित के जवाब में ‘=’ ‘>’ ‘<’ ‘=<’ ‘=>’

    ज्योतिष शास्त्र

    इसमें कोई शक नहीं कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ब्‍लागिंग की मदद से अपनी पहचान बना पाने में कामयाबी प्राप्‍त करता जा रहा है , पर कुछ दिनों से पाठकों द्वारा इसके द्वारा ज्‍योतिष शास्त्र के विज्ञान कहे जाने के विरोध में कुछ आवाजें भी उठ रही हैं। वैसे तो सबसे पहले मसीजीवी जी ने ज्‍योतिष शास्त्र को विज्ञान कहे जाने पर आपत्ति जतायी थी , पर अभी हाल में ज्ञानदत्‍त पांडेय जी के द्वारा यह प्रश्‍न उठाया गया तो मुझे काफी खुशी हुई , क्‍योंकि उनकी सकारात्‍मक टिप्‍पणियां हमेशा ही मेरा उत्‍साह बढाती आयी है। उनके बाद एक दो और पाठक भी इसी प्रकार के प्रश्‍न करते मिले हैं। आज उन सबके द्वारा उठाए गए प्रश्‍न का तर्कसंगत जवाब देना मैं उचित समझ रही हूं और शायद पहली बार हो रही इस प्रकार की सकारात्‍मक चर्चा करते हुए मुझे काफी खुशी भी हो रही है। मैं चाहूंगी कि इस प्रकार के और प्रश्‍न भी सामने आएं , मैं सबकी जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास करूंगी।

    Ganit vishay

    सबसे पहले गणित विषय को ही लें। गणित में हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ ही नहीं होता है। इसमें किसी समीकरण का उत्‍तर ‘लगभग’ में होने के साथ ही साथ ‘>’ और ‘<’ या ‘=<’ और ‘=>’ में भी हो सकता है। कोई समीकरण ‘लिमिट’ में भी अपना जवाब देती है । सभी समीकरण एक सीधी रेखा का ही ग्राफ नहीं बनाती , पाराबोला और हाइपरबोला भी बना सकती है। गणित के संभावनावाद का सिद्धांत संभावना की भी चर्चा करता है। और चूंकि भौतिकी जैसा पूर्ण विज्ञान के भी सभी नियम गणित पर ही आधारित होते हैं , तो भला इसके भी हर प्रश्‍न का जवाब ‘=’ में कैसे दिया जा सकता है ? और बाकी विज्ञान जो भौतिकी की तरह पूर्ण विज्ञान न हो तो उसके प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में देना तो और भी मुश्किल है।

    jyotish shastra kya hai

    Signs of maths

    एलोपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘=’ में दिया जा सकता है , पर सबका दे पाना असंभव है , बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘लगभग’ और बहुत से प्रश्‍नों का जवाब ‘संभावनावाद’ के नियमों के अनुसार दिया जा सकता है। पहले एक ही लक्षण देखकर चार प्रकार के बीमारी की संभावना व्‍यक्‍त की जाती है , जिससे पहले डाक्‍टरों को अक्‍सर दुविधा हो जाया करती थी , आज जरूर विभिन्‍न प्रकार के टेस्‍टों ने डाक्‍टरों का काम आसान कर दिया है , तो क्‍या पहले मेडिकल साइंस विज्ञान नहीं था ? अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिलने के बावजूद मौसम विज्ञान कहा जाता है , क्‍योंकि इस क्षेत्र में बेहतर भविष्‍यवाणी कर पाने की संभावनाएं दिखाई पड रही है। क्‍या भूगर्भ विज्ञान की भूगर्भ के बारे में की गयी गणना बिल्‍कुल सटीक रहती है ? नहीं , फिर भी उसे भूगर्भ विज्ञान कहा जाता है। संक्षेप में , हम यही कह सकते हें कि जरूरी नहीं कि वैज्ञानिक सिद्धांत हमें सत्‍य की ही जानकारी दे , जिन सिद्धांतो की सहायता से हमें सत्‍य के निकट आने में भी सहायता मिल जाए , उसे विज्ञान कहा जाता है।

    Jyotish science

    यदि ज्‍योतिष शास्‍त्र के नियमों की बात करें , तो इसके कुछ नियम बिल्‍कुल सत्‍य हैं , मौसम से संबंधित जिस सिद्धांत के बारे में कल चर्चा हुई , वह बिल्‍कुल सत्‍य है। ऐसा इसलिए है , क्‍योंकि इस नियम को स्‍थापित करने में ग्रहों को छोडकर सिर्फ भौगोलिक तत्‍वों का ही प्रभाव पडता है। र ज्‍योतिष के कुछ नियम सत्‍य के निकट भी होते हैं , और कुछ के बारे में तो सिर्फ संभावना ही व्‍यक्‍त की जा सकती है। ऐसा इसलिए होता है , क्‍योंकि उन नियमों पर सामाजिक , राजनीतिक , भौगोलिक या अन्‍य बहुत से कारकों का प्रभाव देखा जाता है । पर इसका अर्थ यह नहीं है कि ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान नहीं है।

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      इस दुनिया में सबकुछ नियम से होता है

       Meaning of astrology in Hindi

      इतने लंबे विकास के क्रम के बावजूद मानव जीवन में मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर लोगों के मन में भय के उपस्थित होने के कारण समाज में कई प्रकार की बुरी मान्‍यताएं , बुरी प्रथाएं आती जाती रही , ये तो विभिन्‍न उदाहरणों और कहानियों द्वारा हमारे सामने रखी जाती हैं , जिसे दूर करने के लिए समय समय पर हमारे समाजसेवियों ने संघर्ष भी किया , कई दूर भी हुईं , फिर भी आज भी कई मान्‍यताएं अच्‍छे और बुरे रूप में समाज में मौजूद हैं , इसे स्‍वीकारने में मुझे कोई आपत्ति नहीं। 

      आज अन्‍य क्षेत्रों की तरह ही ज्‍योतिष जैसा पवित्र विषय भी बहुत सारे स्‍वार्थी लोगों के द्वारा अपने स्‍वार्थ की पूर्ति का एक साधन बन गया है , एक तो यहां सच्‍चे अध्‍येताओं की कमी भी है , जो  हैं भी तो उनके सामने कई प्रकार के प्रश्‍न मुहं बाए खडे हैं , समाधान की कोई जगह नहीं , इसके कारण आज के युग के हर विज्ञान के समानांतर इसमें अध्‍ययन नहीं हो पा रहा , जिससे इसकी कुछ कमियों को स्‍वीकारने में मुझे परहेज नहीं , पर हमारे वैदिककालीन ग्रंथों में चर्चित वेदों को नेत्र कहा जानेवाला ज्‍योतिष अंधविश्‍वास कैसे हो गया , यह आजतक तो मेरी समझ में नहीं आया।

      Meaning of Science of Astrology in Hindi

      जिस प्रकार एक ज्‍योतिषी किसी प्रयोगशाला में प्रयोग कर ग्रहों के प्रभाव को प्रमाणित करने में असमर्थ हैं , उसी प्रकार वैज्ञानिक भी ये स्‍पष्‍ट नहीं कर पाते कि ग्रहों का प्रभाव जड चेतन पर नहीं पडता है , यही कारण है कि लोगों की भ्रांति नहीं दूर हो पाती। जब किसी प्रकार की भ्रांति दूर ही न की जा सके , तो फिर पत्र पत्रिकाओं में या टी वी चैनलों में ज्‍योतिष के कार्यक्रमों का जनसाधारण के लिए कोई उपयोग नहीं रह जाता। 

      हां , पाठकों के भ्रम के कारण , कि शायद इस बार कोई निष्‍कर्ष निकलकर सामने आए , चैनलों को उनके उद्देश्‍य के अनुरूप विज्ञापन के द्वारा बडे लाभ की व्‍यवस्‍था अवश्‍य हो जाती है। मीडिया को ही क्‍या दोष दिया जाए , आजतक सरकार या जनता ने भी कभी ज्‍योतिष की परीक्षा के लिए सार्थक कदम नहीं उठाए हैं, ज्‍योतिष की विवादास्‍पद स्थिति के यही सारे कारण है ।

      Meaning of astrology in Hindi

      Life-graph of any person 

      हम सभी जानते हैं कि विदेशी आक्रमण के दौरान हमारे ज्ञान विज्ञान को बडे पैमाने पर नष्‍ट किया गया। आधे अधूरे ज्ञान को विकसित होने के लिए न तो कभी सरकार द्वारा कोशिश की गयी और न ही आम जनता द्वारा । अधकचरे ज्ञान के सहारे एक ज्‍योतिषी अपनी पूरी शक्ति का उपयोग भले ही कर ले , पर आज के युग के अनुरूप संसाधनों के अभाव को तो महसूस करता ही है। ज्‍योतिष को विज्ञान सिद्ध नहीं कर पाने में उसके सामने बहुत अधिक विवशताएं मानी जा सकती हैं , पर ग्रहों के प्रभाव को तो साबित कर ही सकता है , लेकिन उसे समझने के लिए वैज्ञानिकों के पास जो नजरिया होना चाहिए , वो नहीं होता। ज्‍योतिष जैसे विषय की बातचीत के क्रम में वे अपना वैज्ञानिक नजरिया तक भूल जाते हैं।

      Vigyan ka bhram in Hindi 

      एक टी वी कार्यक्रम में प्रो यशपाल जी (विज्ञान में उनके महत्‍वपूर्ण योगदान के लिए मैं उनकी बहुत इज्‍जत करती हूं) का कहना था कि जीवनभर उन्‍हें ज्‍योतिषियो की आवश्‍यकता नहीं पडी , इसलिए उनका कोई महत्‍व नहीं है , ग्रहों के प्रभाव को वे नहीं मानते। एक वैज्ञानिक की इन बातों की तुलना मेरे गांव के उस वृद्धा से की जा सकती है , जो हमें सर्दी खांसी होने पर डॉक्‍टर के पास जाते देखकर हंसा करती थी और हमारे समझाने पर कहा करती थी कि इतनी लंबी उम्र में उन्‍हे डॉक्‍टर की कभी आवश्‍यकता नहीं पडी। अन्‍य वैज्ञानिकों का भी मानना है कि ग्रहों के जितने प्रभाव को उन्‍होने ढूंढा है , उतने को ही वे मानते हैं , जब कोई और ढूंढा जाएगा तब फिर मानेंगे , अभी नहीं मान सकते। ये बात भी वैसी ही हास्‍यास्‍पद है , हमारे प्राचीन ज्ञान विज्ञान के कसौटी पर खरे उतरने के बाद भी उनके द्वारा ऐसी बाते कहा जाना विद्वता भरी भाषा तो नहीं कही जाएगी।

      ज्योतिष पर ओशो के विचार 

      ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान - 1

      Meaning of Rule of nature in Hindi

      इस दुनिया में जो भी हो रहा है , किसी खास नियम के तहत् ही हो रहा है। प्रकृति में से हजारो लाखों करोडो नियम ढूंढे जा चुके और प्रतिदिन लाखों शोध इस बात को स्‍पष्‍ट कर रहे हैं कि इस दुनिया में कोई भी कार्य बिना नियम के नहीं होता है। एक एक बीज में निहित उर्जा जिस ढंग से पौधों , फूलों और और फलों के माध्‍यम से प्रस्‍फुटित होती है , उसे हम उसके बीज को देखकर पहले ही अनुमान लगा लेते हैं। पर कोई व्‍यक्ति अमीर के घर पैदा हुआ , कोई  गरीब के घर , कोई बडी आई क्‍यू के साथ इस दुनिया में आया और किसी में आई क्‍यू की कमी हुई , कोई सुखद पीरस्थितियों में जी रहा है तो कोई दुखद , किसी को दाम्‍पत्‍य का सुख , किसी को इससे कष्‍टकर समझौता या फिर किसी का जीवन साथी समझौते के भी काबिल नहीं। इन सारी बातों का हम अनुमान क्‍यूं नहीं लगा पाते ? क्‍या ये काम बिना नियम के हो रहे हैं ?

      Meaning of Bhagya ya karm in Hindi 

      यदि हम ऐसा सोंचते हैं , तो यह भी हमारी अल्‍प बुद्धि ही मानी जाएगी । इस दुनिया में होनेवाली हर दुखद और सुखद घटनाओं को हम अपने कर्म से जोड देते हैं , जबकि कई जगहों पर हम कर्म से विपरीत फल की प्राप्ति होते देखते हैं। तब फिर हम इसे संयोग या दुर्योग से जोड देते हैं , अज्ञानता में और कर भी क्‍या सकते हैं ? लेकिन जब इस पूरी दुनिया में संयोग और दुर्योग का खेल कहीं देखने को नहीं मिलता , तो फिर हमारे जीवन में कैसे आ सकता है , जरूर इसके पीछे कुछ रहस्‍य है और बजाए इसे अस्‍वीकार करने के इसके रहस्‍य को ढूंढे जाने की आवश्‍यकता है । इस कार्य में सबका साथ बिल्‍कुल आवश्‍यक है , तभी बडे स्‍तर पर सफलता हाथ आ सकती है।

       Meaning of astrology in Hindi

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        क्या ज्योतिष को विकासशील नहीं होना चाहिए ??

        Astrology in hindi

        ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास , एक बड़ा प्रश्न , वो भी अनुत्तरित , क्योंकि इसके सही आधार की नासमझी के कारण जहां कुछ लोग इसका तिरस्कार करते हैं , वहीं दूसरी ओर अतिशय भाग्यवादिता से ग्रसित लोग किंकर्तब्यविमूढ़ावस्था को प्राप्त कर इसका अंधानुसरण करते हैं। दोनो ही स्थितियों में फलित ज्योतिष रहस्यमय और विचित्र हो जाता है। पहले वर्ग के लोगों का कहना है कि भला करोड़ों मील दूर स्थित ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं , वहीं दूसरे वर्ग के लोगों को आकाशीय पिंड की जानकारी से कोई मतलब ही नहीं , मतलब अपने भाग्य की जानकारी से है। 

        इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने अनजाने काफी नुकसान है रहा है। एक भारतीय प्राचीन विद्या को हमारे देश में उचित स्थान नहीं मिल रहा है। ज्योतिष के पक्ष और विपक्ष में बहुत सारी बातें हो चुकी हैं , सबके अपने.अपने तर्क हैं , इसलिए किसी की जीत या हार हो ही नहीं सकती। बेहतर होगा कि बुद्धिजीवी वर्ग हर प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर ज्योतिषियों की बात सुनें , उनपर विचार करें।

        Undeveloped, developing and developed

        प्रकृति के नियम के अनुसार प्रत्येक निर्माण--चाहे वह कला का हो , विज्ञान का या फिर धर्म का हो या संस्कृति का---------- अविकसित , विकासशील और विकसीत तीनों ही दौर से गुजरते हैं। न सिर्फ वैयक्तिक और सामाजिक संदर्भों में ही , वरन् प्राकृतिक वस्तुओं का निर्माण भी इन तीनों ही दौर से गुजरकर ही परिपक्वता प्राप्त करता है। इस सामान्य से नियम के तहत् ज्योतिष को भी इन तीनों ही दौर से गुजरना आवश्यक था। यदि वैदिक काल में ज्योतिष के गणित पक्ष की तुलना में फलित पक्ष कुछ कमजोर रह गया था तो क्या आनेवाले दौर में इसे विकसित बनाने की चेष्टा नहीं की जानी चाहिए थी। परंतु किसी भी युग में ऐसा नहीं किया गया। ज्योतिष को अंधविश्वास समझते हुए लगभग हर युग में इसे उपेक्षित किया गया। यह कारण मेरी समझ में आजतक नहीं आया कि क्यों हमेशा से ही भूत पढ़नेवालों को विद्वान और भविष्य पढ़नेवाले को उपहास का पात्र समझा जाता रहा।

        Astrology in hindi

        Developing science

        आज भले ही कुछ ज्योतिषी इसे विकसीत बनाने की चेष्टा में जी.जान से लगे हों , सरकारी , अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी ---. किसी भी संस्था का कोई सहयोग न प्राप्त कर पाते हुए लाख बाधाओं का सामना करते हुए ज्योतिष को विकासशील बनाए बिना विकसीत विज्ञान की श्रेणी में रख पाना संभव नहीं है। मै मानती हूं कि ज्योतिष विज्ञान के प्रति कुछ लोगों की न सिर्फ आस्था , वरण् भ्रांतियों को देखते हुए इसमें लाभ कमाने के इच्छुक लोगों का बहुतायत में प्रवेश अवश्य हुआ है , जिनका फलित ज्योतिष के विकास से कुछ लेना.देना नहीं है , पर उनके कारण कुछ समर्पित ज्योतिषियों के कार्य में बाधाओं का आना तो अच्छी बात नहीं है , जो कई सामाजिक भ्रांतियों को समाज से दूर करने के इच्छुक हैं।

        Astha aur vigyan  

        जब कुछ ज्योतिषी आस्था की बात करते हुए ज्योतिष को विज्ञान के ऊपर मान लेते हैं , यह मान लेते हें कि जहां से विज्ञान का अंत होता है , वहां से ज्योतिष आरंभ होता है , तो यह बात बुद्धिजीवियों के गले से नहीं उतरती।वे कार्य.कारण में स्पष्ट संबंध दिखानेवाले विज्ञान की तरह ही ज्योतिष को देखना चाहते हैं। पर जब उन्हें एक विज्ञान के रूप में ज्योतिषीय तथ्यों से परिचित करवाया जाता है , तॅ वे यहां चमत्कार की उम्मीद लगा बैठते हैं। उन्हें शत्.प्रतिशत् सही भविष्यवाणी चाहिए। क्या एक डाक्टर हर मरीज का इलाज करना सिर्फ इसलिए छोड़ दे , क्योंकि वह कैंसर और एड्स के मरीजों का इलाज नहीं कर सकता ?

        Effect of planets (Astrology in hindi )

        जब हम ज्योतिषी स्वयं यह मान रहे हैं कि ग्रह.नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्वी के जड़.चेतन के साथ.साथ मानवजीवन पर अवश्य पड़ता है और इस प्रकार मानवजीवन को प्रभावित करने में एक बड़ा अंश विज्ञान के नियम का ही होता है , परंतु साथ ही साथ मानवजीवन को प्रभावित करनें में छोटा अंश तो सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक और देश काल परिस्थिति का भी होता है। फिर ज्योतिष की भाविष्यवाणियों के शत.प्रतिशत सही होने की बात आ ही नहीं सकती। इसी कारण आजतक ज्योतिष को अविकसित विज्ञान की श्रेणी में ही छोड़ दिया जाता रहा है , विकासशील विज्ञान की श्रेणी में भी नहीं आने दिया जाता , फिर भला यह विकसित विज्ञान किस प्रकार बन पाए ?

        Difference of undeveloped, developing and developed

        एक अविकसित प्रदेश के विद्यार्थी की योग्यता को जांचने के लिए आप शत्.प्रतिशत् परीक्षा परिणाम की उम्मीद करें , तो यह आपकी भूल होगी। सामान्य परीक्षा परिणाम के बावजूद वह योग्य हो सकता है , क्योंकि उसने उस परिवार और विद्यालय में अपना समय काटा है , जो साधनविहीन है। विकासशील क्षेत्र के अग्रणी विद्यालय या विकासशील परिवार के विद्यार्थी की योग्यता को आंकने के लिए आप शत.प्रतिशत परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं , क्योंकि हर साधन की मौजूदगी में उसने विद्याध्ययन किया है।

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          गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ज्‍योतिष से भिन्‍न ?

           

          Kundli astrology in hindi

          मुझे अक्‍सर पाठको के प्रश्‍न मिलते हैं कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष क्‍या है ? यह एक अलग शास्‍त्र है क्‍या ? आज उन सबों की जिज्ञासा या शंका का समाधान करना ही आवश्‍यक समझूंगी। सबसे पहले तो आप सबो को इस बात की जानकारी दे दूं कि गत्यात्मक ज्योतिष अपने समय को जानने समझने की वैज्ञानिक पद्धति है। इसे एक विज्ञान के तौर पर विकसित किया गया है, पर इसे शास्त्र नहीं कहा जा सकता, क्योंकि किसी भी शास्‍त्र का जन्‍म एक दो लोगों के अध्‍ययन से नहीं होता। कई पीढी और अनकानेक लोगों के सहयोग से ही एक शास्‍त्र का जन्‍म संभव है। 

          गणित ज्योतिष (Astronomy) की पढ़ाई के बाद फलित ज्योतिष के सम्पूर्ण ग्रंथों का अध्ययन करने के क्रम में गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के जनक श्री विद्या सागर महथा जी को महसूस हुआ कि आज के प्रगतिशील युग में ज्योतिष को भी प्रगतिशील होने की आवश्यकता है। इसलिए ज्योतिष का समयानुसार बदलाव आवश्यक आवश्यक है।  इन्होने परंपरागत ज्‍योतिष को मथकर उसके सार तत्‍व को निकाला भी नहीं है , वरन् उसे ज्‍यों का त्‍यों जड और तने के रूप में सुरक्षित रखकर 'गत्यात्मक ज्योतिष' को विकसित करने की कोशिश की ।

          What is Kundli Astrology in Hindi

          भारत में ज्योतिष का अध्ययन बहुत पुराना है। परंपरागत ज्‍योतिष का जो जड है , वो है हमारे पूजनीय ऋषि , महर्षियों की निरंतर की गयी मेहनत , जिसके फलस्‍वरूप प्राचीन काल से ही खगोल शास्‍त्र का इतना विकास हो सका था। उसी जड के आधार पर फलित ज्‍योतिष का पौध विकसित किया गया , जो पूर्ण तौर पर पल्‍लवित और पुष्पित होकर बडा वृक्ष बन अपनी सुगंधि बिखेरने लगा। 

          ऋषि , महर्षियों की मेहनत से तैयार किया गया इस वृक्ष का तना इतना मजबूत है कि सैकडों वर्षों से विभिन्‍न ज्‍योतिषियों के द्वारा जितनी भी विचारधाराएं आयी , सबको थामे रखने के काबिल बना रहा और सभी टहनियां तरह तरह के फल फूल और पत्‍ते देकर इस एक वृक्ष को विविधता से परिपूर्ण बनाता रहा। पुन: टहनियों में से भी टहनियां निकली और यह तना सबको संभालने के काबिल बना रहा। हमारी ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ भी एक अलग प्रकार की विचारधारा लेकर इस वृक्ष की एक टहनी के रूप में शोभायमान है।

          Ganit jyotish in Kundli and astrology in Hindi

          पूरे विश्‍व में गणित ज्‍योतिष को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है । वैसे पाश्‍चात्‍य ज्‍योतिष हमारे निरयन अंश को नहीं मानकर सायन अंश को ही मानता है , जबकि भारत में प्रचलित निरयन ही ग्रहों की वास्‍तविक स्थिति है। इस गणित ज्‍योतिष के बाद फलित ज्‍योतिष का भाग आता है , जिसमें भी पूरे ब्रह्मांड के 30-30 डिग्री का विभाजन , उसका स्‍वामित्‍व , ग्रहों की मैत्री और शत्रुता , विभिन्‍न भावों के बंटवारे को लेकर पूरे विश्‍व में किसी प्रकार का विवाद नहीं है। पर जैसे ही फलित कथन में हम आगे बढते है , विवाद शुरू हो जाता है , कोई एक तो कोई दूसरी पद्धति को भविष्‍यवाणी के लिए सही मानने लगता है। ये थोडी तकनीकी बात हो गयी , आम भाषा में मै इसे समझाती हूं।


          Kundli astrology in hindi

          Kundli astrology in Hindi and Zodiac status

          पृथ्‍वी को स्थिर मान लेने से पूरब से उदित होती , पश्चिम कर ओर जाकर पश्चिम में अस्‍त होती एक पट्टी मान ली गयी है , जो पृथ्‍वी के चारों ओर घूमती रहती है और इसी पट्टी के सहारे सारे ग्रह भी पृथ्‍वी के चारों ओर चक्‍कर लगाते हैं। चूकि यह पट्टी वृत्‍ताकार है और पृथ्‍वी इसके केन्‍द्र में है , इसके 360 डिग्री को 12 भागों में बांट दिया जाता है तो 30-30 डिग्री की एक राशि निकलती है , जिसे मेष(0 से 30 डिग्री तक), वृष(30 से 60 डिग्री तक), मिथुन(60 से 90 डिग्री तक), कर्क(90 से 120 डिग्री तक), सिंह(120 से 150 डिग्री तक), कन्‍या(150 से 180 डिग्री तक), तुला(180 से 210 डिग्री तक), वृश्चिक(210 से 240 डिग्री तक), धनु(240 से 270 डिग्री तक), मकर(270 से 300 डिग्री तक), कुंभ(300 से 330 डिग्री तक)और मीन(330 से 360 डिग्री तक)कहा जाता है। इसमें से मेष और वृश्चिक को मंगल के स्‍वामित्‍व में ,वृष और तुला को शुक्र के स्‍वामित्‍व में , मिथुन और कन्‍या को बुध के स्‍वामित्‍व में , कर्क को चंद्रमा के स्‍वामित्‍व में , सिंह को सूर्य के स्‍वामित्‍व में , धनु और मीन को बृहस्‍पति के स्‍वामित्‍व में तथा मकर और कुंभ को शनि के स्‍वामित्‍व में दिया गया है। इन राशियों में से किसी बच्‍चे के जन्‍म के समय जिस राशि का उदय होता रहता है , वह बच्‍चे का लग्‍न कहलाता है।

          All houses in Kundli Astrology in Hindi

          परंपरागत ज्‍योतिष के अनुसार लग्‍न और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के शरीर विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के धन विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के भाई बंधु विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के माता और हर प्रकार की संपत्ति विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के बुद्धि ज्ञान विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवालेग्रहों से उस बच्‍चे के झंझट से जूझने की क्षमता विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के पति पत्‍नी और घर गृहस्‍थी विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के जीवनशैली विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के भाग्‍य और धर्म विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के पिता और सामाजिक प्रतिष्‍ठा विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के लाभ और लक्ष्‍य विषयक , उसके बाद वाली राशि और उसके साथ उदय होनेवाले ग्रहों से उस बच्‍चे के खर्च और बाहरी संदर्भों के विषय में भविष्‍यवाणी की जाती है। इन मुद्दों पर भी सारी दुनिया के साथ ही साथ गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष भी एकमत है। 

          पर इन सारे मुद्दो जिनकी चर्चा उपर गयी है ,के बारे में भविष्‍यवाणी करते वक्‍त ग्रहों की शक्ति निकालनी आवश्‍यक है , उसमें प्राचीन काल से अभी तक पूरे विश्‍व के साथ साथ भारतवर्ष के भी विद्वान एकमत नहीं दिखे। उसके लिए ज्‍योतिष शास्‍त्र में समय समय पर अनेकानेक सूत्र दिए गए हैं , इससे किसी सूत्र का उपयोग करके अपने ग्रहों को कमजोर और मजबूत दिखाना आपके बाएं हाथ का खेल बन जाता है।

          ज्योतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

          Various dasha kal in Kundli astrology in Hindi

          इसके अलावे ग्रह आपके जीवन में किस वक्‍त प्रभावी होगा , इस बात पर भी दुनिया के विद्वान एकमत नहीं हैं। इसके लिए भी दस बारह पद्धतियां है , ज्‍योतिष में नया प्रवेश करनेवाले अपने जीवन में घटी घटनाओं के आधार पर किसी एक सिद्धांत को प्रभावी मान लेते हैं। इसलिए समय समय पर इसमें बहुत सारी टहनियां जन्‍म लेती जा रही है। इसमें सबसे मोटी टहनी विंशोत्‍तरी पद्धति की है और बहुत छोटी बडी टहनियां इनको आधार मानती हैं , नए ज्‍योतिषी इसमें से किसी टहनी पर चढ जाया करते हैं। पुराने ज्‍योतिषी हर टहनी पर चढचढकर फल पाने की आशा रखते हैं , पर इसमें उलझकर रह जाते हैं। 

          ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को ग्रहों की शक्ति और उसके प्रतिफलन काल के लिए कोई मानक सूत्र न होना ज्‍योतिष की सबसे बडी कमजोरी लगती है और इसने ग्रहों की शक्ति और उसका प्रतिफलनकाल निकालने के अलग सूत्र का उपयोग करना आरंभ किया, जिसकी चर्चा 1975 से ही कई ज्योतिषीय पत्रिकाओं में होती रही।  दिसम्बर 2010 में 'फ्यूचर समाचार' में भी इस पद्धति के बारे में एक बड़ा आलेख प्रकाशित किया गया था। इस तरह विंशोत्‍तरी पद्धति के बगल से इसने भी एक शाखा का विकास कर लिया है। इस पद्धति की सटीकता के बारे में अपना दृष्टिकोण रखना और भविष्‍यवाणियां करना आवश्‍यक है , सटीकता के बारे में तो आप पाठक ही कुछ कह सकते हैं । इतना ही नहीं, ग्रहों के बुरे प्रभाव को रोकने और अच्छे प्रभाव को बढ़ने के लिए गत्यात्मक ज्योतिष के अचूक उपाय भी बताये हैं। 

          Today Kundli astrology in hindi 



          इसी प्रकार गोचर के ग्रहों के प्रभाव पर भी एक सूत्र 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली 'विकसित  की गयी है। प्लेस्टोरे में मौजूद हमारा एप्प में दिन-प्रतिदिन के रिजल्ट और वर्षफल गत्यात्मक गोचर प्रणाली से ही निकाले जाते हैं , जो हमारे एप्प को डाउनलोड करनेवाले हज़ारो लोगों के लिए उनके मोबाइल में उनका अपना भविष्यफल बताता हैं। जब गोचर के ग्रहों का प्रभाव सामान्य होता है , तो इस एप्प की सटीकता पर संदेह हो सकता है , पर जैसे ही आपके गोचर के ग्रहों का अच्छा या बुरा प्रभाव पढ़ना शुरू होता है , इस एप्प की सटीकता पर विश्वास बन जाता है। आप भी इस एप्प को इनस्टॉल और गत्यात्मक ज्योतिष के सिद्धांतों की परख कर सकते हैं। 

          'गत्यात्मक ज्योतिष' आधारित सूत्रों पर 4 तरह के ग्राफ, चार्ट सहित सटीक समय-युक्त भविष्यवाणियों के 15 पन्नों की जन्मकुण्डली को प्राप्त करने के लिए संपर्क करें - 8292466723,  gatyatmakjyotishapp@gmail.com 

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            गुण मिलान टेबल/सारणी PDF DOWNLOAD

               गुण मिलान टेबल पीडीऍफ़ डाउनलोड 

            (ONLINE JYOTISH MARRIAGE MATCHING)

            हिन्दू परिवारों में माना जाता है कि ग्रहो और खगोलीय पिंड का हमारे जीवन पर अच्छा खासा प्रभाव पड़ता है, इसलिए वर-वधू के भाग्य की अनुकूलता को देखने के लिए विवाह के पूर्व कुंडली मिलान (MATCH MAKING KUNDALI IN HINDI) आवश्यक माना जाता है , ताकि विवाह के बाद जोड़े का दांपत्य जीवन कुशल-मंगल से कट सके। इस विषय पर पूर्व में भी मेरा एक लेख 'क्या कुंडली मिलाना आवश्यक है ?(KUNDALI MILAN IN MARRIAGE)' विद्वान् पाठकों के मध्य काफी लोकप्रिय हो चुका  है। 

            हिन्दू पंडितों के अनुसार विवाह की प्रक्रिया के शुरुआत में ही अष्टकूट चक्र से वर-वधु की कुंडली मिलाने की परम्परा रही है। दोनों की कुंडली मिलाते वक्त जन्मकुंडली में वर्ण, वश्य , तारा, योनी ,ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी आदि से मिले स्कोर का कम से कम 18  गुणों का मिलना आवश्यक माना जाता है , अधिक से अधिक गुण मिले तो बहुत अच्छा। इसके लिए एक गुण मिलान टेबल (गुण मिलान सारणी ) का सहारा लिया जाता है। 

            गुण मिलान टेबल PDF 

            कृपया गुण मिलान चार्ट को कंप्यूटर पर खोलें और स्क्रीन बड़ा करने के लिए  CTRL और +(PLUS) BUTTON एक साथ PRESS करें !!

            Gun milan table

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            GUN MILAN FOR MARRIAGE

            ज्योतिष के सभी सॉफ्टवेयर कुंडली मिलान की सुविधा ऑनलाइन देते हैं, इसमें कोई गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है। ज्योतिष को नहीं जानने वाले भी इस सॉफ्टवेयर का उपयोग आराम से कर सकते हैं। लेकिन गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार कुंडली मिलान का कार्य इतना भी आसान नहीं है कि आप सिर्फ इस गुण मिलान सारणी से देखकर समझ जाएँ। जब वर-वधु को प्रभावित करने में सभी ग्रहों की भूमिका होती है, तो उनके बीच के समझ को समझने के लिए सिर्फ चन्द्रमा के नक्षत्र और मंगल की स्थिति ही कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं ?

            वर वधू गुण मेलापक सारणी

             (VAR VADHU GUN MILAN SARNI/CHART)

             पंडितों द्वारा कुंडली मिलाने में मंगल दोष की जाँच भी अलग से की जाती है। यदि दोनों कुंडलियों में मंगल संतुलित है, तो माना जाता है कि दंपत्ति को वैवाहिक सुख प्राप्त होंगे। मंगल के दोष को 'गत्यात्मक ज्योतिष'  इसलिए अधिक प्रभावी नहीं मानता , क्योंकि 12 राशि में से 5 राशि में मंगल होने से लोग मांगलिक हो जाते हैं, इस दृष्टि से कुल जनसँख्या के 5 /12 यानि 44% लोग मांगलिक होते हैं। मांगलिक होना बहुत बड़ी बात नहीं, गत्यात्मक दृष्टि से मंगल कमजोर हो तो विवाह में देर अवश्य होती है, यदि खास ग्रहस्थिति के कारण शादी जल्द हुई तो वह भी मुसीबत का कारण बनती है।  

            KUNDALI MILAN BY NAME AND DATE OF BIRTH

            जन्मदिन से कुंडली मिलान, नाम से कुंडली मिलान

            आजतक समाज में ज्योतिष शास्त्र को लेकर बहुत ही भ्रम की स्थिति बनी हुई है, पढ़े-लिखे समझदार अभिभावकों को भी समझ में नहीं आता कि वे करें क्या ? कुछ वर्षों से गत्यात्मक ज्योतिष के रिसर्च वाले तर्कपूर्ण आलेख समाज से भ्रम दूर करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। एक लेख में मैंने स्पष्ट किया था कि जन्मकुंडली के ग्रह लव मैरिज होने के संकेत देते हैं या नहीं ? 

            गत्यात्मक दृष्टि से यह तो तय है कि तालमेल रखनेवाले प्रेमी-प्रेमिका की शादी से पहले गुण मिलान सारणी(GUN MILAN SARNI) से कुंडली मिलाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, दोनों के मध्य निश्छल प्रेम होने के बावजूद बहुत सारे अभिभावक और पंडित उनकी शादी न किये जाने के पक्ष में फैसला करते हैं। हालाँकि जहाँ समस्याएँ आती हैं, वहीँ समाधान भी होता है। गुण नहीं मिलने की स्थिति में पंडित कुछ ज्योतिषीय उपाय की व्यवस्था करवाते हैं।

              KUNDALI MILAN BY NAME (नामांक मिलान) 

              जन्म तिथि न होने की स्थिति में दोनों के नाम से भी मिलान किया जाता है। पंडितों का मानना है कि नाम के पहले अक्षर का महत्व बहुत अधिक होता है। इसलिए शादी से पहले वर-वधु नाम में बदलाव लाकर भी इस समस्या को सुलझा सकते हैं। प्रचलित नाम के उपयोग से या जन्मतिथि के उपयोग से सिर्फ कुंडली मिलान हो सकता है , पंडित मानते हैं कि दोनों के नाम का प्रभाव जीवन पर कुछ जरूर पड़ता है। पर 'गत्यात्मक ज्योतिष' इससे भी इत्तेफाक नहीं रखता कि नाम को बदलकर ही आपस में शादी की जाये। 

              गाँवों में जब किसी के घर बच्चा पैदा होता था तो पंडित को बुलाकर उनकी सलाह से बच्चे का नामकरण किया जाता था । पंडित जन्म के समय के अनुसार चन्द्रमा के नक्षत्र के आधार पर नाम का पहला अक्षर बताते थे, जिससे बच्चे को नाम रखा जाता था, लेकिन आजकल कुंडली का नाम प्रचलित नाम नहीं होता, अभिभावक बिना किसी ज्योतिषी गणना के बच्चे के जन्म से पहले हीं या बाद में नाम रख लेते हैं। इसलिए इस नाम से कुंडली मिलान हमें तर्कसम्मत नहीं लगता । 

              ज्योतिष में हुए नए रिसर्च, गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अवश्य पढ़ें  ------

               MATCH MAKING KUNDALI FREE

              आपसी समायोजन की कमी के भाव और तलाक के बढ़ते मामलों ने आज इतना डर पैदा किया है कि  जिन परिवारों में कुंडली नहीं मिलाई जाती थी, वे भी अब मिलाकर शादी करना चाहते हैं। 21वीं सदी आ गयी है और चतुर्दिक विज्ञान का प्रभाव है। घर-घर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के बाद मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा घर-बैठे मिल जाने से कुंडली मिलान समाधान न होकर और बड़ी समस्या बन गयी है। क्योंकि किन्ही भी दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना काफी आसान हो गया है , पर इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं ।

              तार्किक बात की जाये तो मैं तो यही कहूंगी कि अपने परिवार, मित्र और रिश्तेदार के विवाहित जोड़ो की बायोडाटा लें, जिनकी बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और जिनकी काफी अच्छी निभ रही है या जिनकी कुंडली मिलाकर शादी हुई है और जिनकी नहीं निभ रही है , उन बायोडाटा को सॉफ्टवेयर में डालकर चेक करें। कम्प्यूटर और उसमें डाले गए इस प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। हमने तो यही समझा है, चेक करने के बाद आप भी पाएंगे कि वैवाहिक सुख कुछ तो भाग्य से आता है, कुछ आपसी समझ से आता है। 

              अगर कुंडली न मिले तो क्या करें ? 

              (AGAR KUNDALI NA MILE TO KYA KAREN)

               एक ज्योतिषी होने के नाते मेरा कर्तब्य है कि मै अभिभावकों को उचित राय दूं। मेरा उनसे अनुरोध हे कि वे पुरानी मान्यताओं पर ध्यान दिए बिना , कुंडली मेलापक की चर्चा किए बिना , अपने बच्चों का विवाह उपयुक्त पार्टनर ढूंढ़कर करें । बिना गुण मिलाये भी शादी हो सकती है। किसी मंगला और मंगली की शादी भी सामान्य वर या कन्या से निश्चिंत होकर की जा सकती है, मन में भ्रम न पालें।जिनकी कुंडली में वैवाहिक सुख है, वह मिलेगा ही. कुंडली को देखकर जब सभी भावों के बारे में सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है, तो किसी के वैवाहिक जीवन के बारे में भी बताया जा सकता है कि उनके जीवन में सुख है या नहीं ? 

              निष्कर्ष यही है कि यदि दोनों युवक युवती या दोनों परिवार एक दूसरे को अच्छे से जानते हों , सच्चा प्यार करते हों तो कुंडली न मिलने की स्थिति में विवाह से मुँह न मोड़ें। मतलब यह है कि दोनों पक्षों को सबकुछ पसंद है, दोनों पक्ष पूर्ण रूप से संतुष्ट है तो बेहतर हो कुंडली मिलाने को प्रोसेस ही छोड़ दिया जाये। हमारे यहाँ कहा ही गया है, अनजान सदा कल्याण ! जन्म-कुंडली नहीं मिलने पर भी शादी के बाद आपसी सहयोग के द्वारा आप अपने जीवन को सुखद बना सकते हैं। कोई समस्या आये तो एक दूसरे पर इल्जाम न लगाकर मिलकर समस्या से जुझा और उसका हल किया जा सकता है, मन को हमेशा मजबूत बनाये रखें। 

              अनजान परिवार, अनजान लड़के से रिश्ता करने जा रहे हों तो कुंडली से बहुत कुछ समझने, कुंडली मिलाने की बात हो सकती है, पर इसके लिए जानकार विद्वान् ज्योतिषी से संपर्क किया जाना चाहिए।  हमलोग सिर्फ चन्द्रमा और मंगल को ही नहीं , वैवाहिक सुख के लिए सभी ग्रहों , खासकर सातवे भाव को देखकर निर्णय लेते हैं। इस कार्य में हमारे केंद्र के 'गत्यात्मक ज्योतिष विशेषज्ञ' आपकी मदद कर सकते हैं। हमारे एप्प को डाउनलोड करें और हमसे  8292466723 पर संपर्क करें। 

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                सभी राशियों का साप्ताहिक फल

                SCORPIO RASHI KE BARE ME BATAYIYE



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                गत्यात्मक ज्योतिष एप्प - यह एप्प राशिफल नहीं खास आपके लिए भविष्यफल बताता है - इनस्टॉल करें!

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                गत्यात्मक ज्योतिष के बारे में

                 राशिफल के हिसाब से चाहे स्वास्थ्य का मामला हो या धन का, करियर का मामला हो या संतान पक्ष का - राशि के हिसाब से १/१२ की आबादी पर सकारात्मक और १/१२ की आबादी पर ऋणात्मक प्रभाव देखा ही जायेगा। १०/१२ की स्थिति किसी भी दिन सामान्य रहेगी। 

                यह फल गोचर के ग्रहों पर आधारित है, इसलिए मनःस्थिति पर पूरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन बहुत बड़ी घटना नहीं होती है, जबतक जन्मकालीन ग्रह कमजोर न हों। गृह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए आप सफ़ेद रंग का वस्त्र धारण करें। गोचर पर आधारित  अपने ग्रह-फल को समझने के लिए हमारा गत्यात्मक ज्योतिष एप्प डाउनलोड करें। इसमें आपपर पड़नेवाले एक एक गोचर के ग्रहों का पॉजिटिव- प्रभाव आपको लिखा मिलेगा। 

                 मै इस चैनल पर निःशुल्क ज्योतिष सिखला हूँ , चैनल को सब्सक्राइब करें ,  वीडियोज को देखक्रर ज्योतिष का ज्ञान प्राप्त करें , उन्हें लाइक और शेयर करें , ताकि चैनल की रफ़्तार तेज हो और आपको नयी नयी जानकारिया मिलती रहें। 

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                  मानव-जीवन में नैतिक मूल्यों का पतन न होने दें

                  Moral values meaning in hindi

                  आप सबों ने सुना ही होगा, गेहूँ के साथ घुन पीसता है और फूलों के साथ कीड़े मकोड़े भगवान् को अर्पित किये जाते हैं। आप जिस भी परिवार, समाज, जाति, धर्म, जिला, राज्य, देश - के अंग हैं, उससे आपकी पहचान अलग नहीं होती। आज रामायण सीरियल का प्रसंग है, मिथिला की बालिका सीता जी के दुःख से दुखी है और कह रही है कि वह मिथिला के एक एक दीवाल पर लिखेगी कि मिथिला की बेटियों की शादी अयोध्या में न की जाये। और ऐसा ही हुआ, मिथिला के लोग श्रीराम को ईश्वर का रूप मानकर पूजा तो करते हैं, पर बेटियों की शादी अयोध्या में करना नहीं चाहते। 

                  unity is strength

                  जंगल के पशु समझते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर किसी भी समस्या का समाधान मुश्किल है, सभी बड़ी समस्याओं का मुकाबला मिलजुलकर करते हैं। प्राचीन काल से हम मनुष्यों ने भी प्रकृति की बड़ी बड़ी चुनौतियों से आपस में मिलजुलकर निबटा है। पर इस सदी के आरम्भ में हम भ्रम में आ गए, देश, राज्य, समाज, परिवार को छोड़कर अपने अस्तित्व पर मिथ्याभिमान हो गया। कोरोनावायरस ने फिर ऐसी स्थिति को जन्म दिया है, इसकी चेन को तोड़ने के लिए हमें मिलजुलकर काम करना चाहिए। पर ऐसे समय में भी कुछ स्वार्थभरा काम कर रहे हैं, कई क्षेत्रों में कानून का पालन हो रहा है, कई क्षेत्रों में बिलकुल नहीं। उस क्षेत्र में कुछ गड़बड़ हुई तो आगे चलकर परिणाम सबके लिए घातक होंगे।

                  naitik mulyon ka patan

                  २५-५० साल की मानव की जीवनशैली पर गौर कीजिए, हर काम को पैसे में आंकने की आदत आयी है। सबने खुद को पैसे कमाने की मशीन बना लिया है। डॉक्टर हॉस्पिटल में सामान्य इलाज कर रहे थे, प्राइवेट प्रैक्टिस पर विशेष । शिक्षक स्कूलों में सामान्य पढाई करवा रहे थे, ट्यूशन में विशेष मेहनत करते थे। मजदूर किसी का काम करने में लापरवाही कर रहे थे, ठेका लेने पर पूरी मेहनत करते थे। सरकारी कर्मचारी बिना पैसों के किसी पेपर पर हस्ताक्षर कर दे, यह संभव ही नहीं था। सामान या सेवा की कमी क्या हुई, नंबर सिस्टम की धज्जियाँ उड़ जाती थी। भ्रष्टाचारियों की कमी नहीं, सारे सामान ब्लैक में मिलने शुरू हो जाते थे। हालाँकि ऑनलाइन व्यवस्था होने से बहुत जगहों पर पारदर्शिता आयी, पर पैसों के लिए लोगों को मौके की तलाश रही। इस तरह हर जरूरत को पूरी करने में समर्थ साधन 'पैसा' कब साध्य बन गया, पता भी न चला। समाज में बढ़ती हुई पैसों की जरूरत ने सारे नैतिक मूल्यों को तहस-नहस कर दिया।


                  moral values

                  naitik mulya in hindi


                  नागरिक ही समाज और देश की इकाई होते हैं। ये एकजुट हो जाएँ, तो भ्रष्टाचारियों को अपनी आदत छोड़नी पड़ती है। अच्छे-अच्छे लोगों ने नैतिक मूल्यों स्थापित करने की पहल भी की , पर समाज क्या किया, इसे रोकना छोड़ सभी उनका अंधानुकरण करने लगें। मेहनत तो भारी लगता है, पैसों से सब सुविधाएँ मिल जाती हैं, पैसों के लिए सारे नियम ताक पर रख दिए हमने। हमने विलासिता पूर्ण जीवन जीने के लिए सुविधाएँ एकत्रित कर लीं, बड़े-बूढ़ों की सीख पर बहस करनी शुरू कर दी, उन्हें वृद्धाश्रम तक का रास्ता दिखा दिया। अंत में मिला क्या ? लोगों का एक दूसरे पर विश्वास समाप्त हुआ, समाज अविश्वास के भयानक जाल में घिर गया। सब सुख प्राप्त कर पर्यावरण खराब करके हमने कई तरह की बीमारी को जन्म दिया, बीमारी की वजह से जीभ का स्वाद छोड़कर रोटी-चावल अपनाना पड़ा, रोज जिम जाने की आदत डालनी पडी। मेहनत तो करनी ही पड़ेगी, ईश्वर ने तो गरीब और अमीर में कोई फर्क नहीं बनाया है।

                  moral values in hindi

                  आज कोरोना वाइरस ने हमें सीखा दिया है कि भोजन, वस्त्र, आवास के साथ जीवन जीने के मूल्यों की जानकारी ही हमारी मुख्य आवश्यकता है, जिसके लिए हमारा स्वावलम्बी होना आवश्यक है। विकास को कभी भी विनाश का रास्ता नहीं बनने देना चाहिए। किसी भी युग में किसी भी समाज में यदि असामाजिक तत्व उपस्थित होते हैं तो महात्मा भी होते हैं। समाज की एक इकाई होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य होना चाहिए कि हम तन, मन, धन और दिमाग, जो भी हमारे पास है, लगाकर असामजिक तत्वों को समाप्त करें और समाज को अच्छे विचार देनेवालों का प्रचार-प्रसार करें। नहीं तो गेहूं के साथ घुन पीसते ही रहेंगे, आप चाहकर भी खुद को इससे अलग नहीं कर सकते। अभी भाई समय है, आईये समाज में सकारात्मक विचारों का प्रचार प्रसार करे, नकारात्मक मुद्दों का खात्मा करें।


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                    भविष्य को देखने-समझने-उपाय की विधाएँ

                    Jyotish shastra in Hindi

                    मनुष्य भूतकाल के अनुभव  की परिस्थितियों के हिसाब से  विश्वास नहीं रखता, भविष्य को समझने में  माथापच्ची  है।  आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है, भविष्य को समझने के लिए ज्योतिष शास्त्र के इतने सिद्धांत यूँ  ही नहीं बन गए। 

                    शारीरिक बनावट के आधार पर

                    1. सामुद्रिक विद्या भी भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे की रेखा सहित संपूर्ण शरीर की बनावट का अध्ययन कर व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को बताया जाता है।
                    1. अंगूठे के आधार पर भविष्य-कथन की विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसके अनुसार अँगूठे की छाप लेकर उस पर उभरी रेखाओं का अध्ययन कर बताया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा होगा।
                    1. हस्तरेखा ज्योतिष तो काफी प्रचलित और मान्य है, हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के अलावा, हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि का अध्ययन कर व्यक्ति का भूत और भविष्य बताया जाता है

                    शकुन पद्धति के आधार पर

                    1. टैरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना भविष्य या भाग्य जानने के लिए टैरो कार्ड के जानकार के पास जाता है तो वह जानकार एक कार्ड निकालकर उसमें लिखा उसका भविष्य बताता है।
                    1. आपने  पिंजरे के तोते से कार्ड निकलवाकर भविष्य निकालते भी देखा होगा।
                    1. बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन पर लगी मशीन में भी एक रुपए का सिक्का डालकर भविष्य देखा जाता है।
                    1. किसी मेले में एक कम्प्यूटर भी आपके भविष्य को बताने के लिए तैयार कर  रखा जाता  है।

                    चिन्तनशील विचारक पाठकों, आपके मन में ज्योतिष से सम्बंधित कोई भी प्रश्न उपस्थित हो , सकारात्मक तार्किक बहस के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप में आपका स्वागत है , क्लिक करें !

                    पशु-पक्षी  के आधार पर

                    1. पंच पक्षी सिद्धान्त एक भारतीय पद्धति है,  इसके अंतर्गत आने वाले पाँच पक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। इसमें आपका जन्मविवरण माँगा जाता है, उस आधार पर आपका पक्षी निकाला जाता है, उसी के आधार पर भविष्य बताया जाता है।
                    1. चीनी ज्योतिष पशुओं के नाम - चूहा, बैल, चीता, बिल्ली, ड्रैगन, सर्प, अश्व, बकरी, वानर, मुर्ग, कुत्ता और सुअर - के आधार पर प्रत्येक वर्ष एक पशु के नाम किया जाता है और वह पशु आपके लिए कैसा होगा, देखकर पुरे वर्ष का राशिफल निकाला जाता है।

                    Jyotish Shastra hindi


                    क्षेत्रीय ज्योतिष

                    1. नाड़ी ज्योतिष :- दक्षिण भारत में बहुत अधिक प्रचलित विद्या है, मन जाता है कि ताड़ के पत्तों में सबका भविष्य लिखा होता है। 

                    1. इसके अलावा कई देशों  की अपनी अलग ज्योतिष धारणाएँ हैं, पर्शियन, माया, हेलेनिस्टिक, इस्लामिक, सेल्टिक, बेबिलोनी आदि , जिनके हिसाब से भी भविष्यवाणियाँ की जाती हैं ।

                    जन्मसमय के अभाव में

                    1. अंक विद्या - ने भी बाजार में जगह बनायी। जन्मतिथि के आधार पर ० से ९ तक का मूलांक निकालना और उसके आधार पर भविष्य की जानकारी देना तो पूरी दुनिया को ९ भाग में बाँट देना है, पर सहजता भी कभी कभी लोकप्रिय हो जाती है।
                    1. प्रश्नकुंडली -  इस पद्धति में जिज्ञासु को प्रश्न पूछना होता है, प्रश्न पूछने के समय को आधार मानकर कुंडली बनाई जाती है और पूछे गए प्रश्न का उत्तर निकाला जाता है।

                    उपाय के ज्योतिष (Jyotish shastra Hindi)

                    1. लाल किताब -इसमें भी कुंडली देखने की जरूरत नहीं होती, आपके सभी समस्या के लिए कुछ न कुछ उपाय बता दिया जाता है। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर हाल  इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित किया गया।

                    1. वास्तुशास्त्र  - कुछ दिनों से मकान बनाने के विज्ञान को भाग्य देखने के काम में लाया जाने लगा, भाग्य बनाने के लिए न जाने कितने मकानों को बेवजह  जाने लगा। 
                    1. फेंगशुई के टोटके - भाग्य को बदलने के लिए चीन से कई टोटके आने लगे, देश के अंधविश्वासियों को कुछ फ़ायदा हुआ या नहीं, भारत के बाजार ने चीन को बना दिया। 
                    1. मुहूर्त  - काम के शुरुआत में देखा जाता है,  मान्यता है कि अच्छे मुहूर्त में काम की शुरुआत होने से काम सफल होता है। 
                    1. कर्मकांड - भी ग्रहों के प्रभाव से  बचने की  विधा है।  माना जाता है कि ख़ास देवता के पूजन, खास पेड़ों की पूजा और दीप प्रज्वलन आदि के द्वारा हम ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। 

                    वैदिक ज्योतिष

                    1. जन्मकुंडली - यदि वेद को सबसे पुराना ग्रन्थ माना जाये तो  वैदिक ज्योतिष शास्त्र को भी भविष्य की सबसे पुरानी विधि मानी जानी चाहिए। वेद में ज्योतिष के दो भाग थे - गणित ज्योतिष शास्त्र और फलित ज्योतिष शास्त्र। गणित ज्योतिष में आसमान के ग्रह , नक्षत्रों, उनकी गति का अध्ययन किया जाता था।  इन्ही ग्रहों की चाल का पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव का अध्ययन फलित ज्योतिष में किया जाता था।

                    1.  नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र - जन्मकुंडली के राशि और नक्षत्र के आधार पर बच्चों के नाम रखे जाने की परंपरा थी। जन्मकुंडली नहीं होने की स्थिति में उसी नाम के आधार पर बच्चों का भविष्य देखा जाता था। यहाँ तक की जन्म कुंडली मिलान भी वर-वधु के नक्षत्र से  था। 
                    गत्यात्मक ज्योतिष 
                    आज के आधुनिक जीवनशैली में ज्योतिष को गत्यात्मक बनाने वाली इस विधा ने बुद्धिजीवियों को भी ज्योतिष पर विश्वास दिलाने को तैयार है। यह विधा किसी के भी जन्मतिथि और जन्मसमय से उसके पुरे जीवन के उतार चढ़ाव को समझ जाती है। इसके वैज्ञानिक अंदाज दिन ब दिन लोगों के मध्य लोकप्रिय हो रहे हैं। 

                    अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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                      फलित ज्योतिष : सांकेतिक विज्ञान

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                      पूरे विश्व में लगभग दो घंटे में पैदा होनेवाले बच्चे की संख्या 300 से अधिक होती है , जिनकी जन्मकुंडली एक जैसी होती है। लेकिन उनमें से सभी एक जैसी उंचाई हासिल नहीं करते। उंचाई हासिल करने के लिए परिस्थिति और मेहनत के साथ-साथ प्रेरक तत्वों का भी काफी महत्व है। बहुत से ज्योतिषी किसी जन्मकुंडली में राम , कृष्ण , बुद्ध , महावीर , इंदिरा गॉधी या महात्मा गॉधी जैसों की कुंडली का कोई एक योग दंखकर ही कह उठते हैं–`अरे , तुम्हारी कुंडली में तो —————योग है। यह ग्राहकों को खुश करने की चाल होती है। एक योग में पैदा होनेवाले सभी बच्चों में से कोई मजदूर तो कोई कलर्क , कोई ऑफिसर तो कोई व्यवसायी और कोई मंत्री के घर पैदा होता है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व-निर्माण में आर्थिक , शैक्षणिक और अन्य वातावरण ग्रह से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। 


                      jyotish kya hai

                       jyotish vidya

                      बदलते युग के साथ-साथ ग्रह के प्रभाव में भी परिवर्तन होता है। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत संतान पक्ष है , तो मातृ प्रधान युग के लिए तथा आज के युग में एक वेश्या के लिए लड़की का संकेतक हो सकता है , जबकि पितृप्रधान युग में वही योग लड़के की अधिकता का संकेतक होगा। यदि किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग है , तो वह प्राचीनकाल में घोड़े , हाथी आदि का संकेतक था , किन्तु आज वह स्कूटर , मोटरसाइकिल और कार का संकेतक है। किसी जन्मकुंडली में असाध्य रोग से ग्रस्त होने का योग है , तो वह किसी युग में व्यक्ति को टी बी का मरीज बनाता था , उसके बाद कैंसर का और आज वही योग उसे एड्स का मरीज बना देता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में उत्तम विद्या का योग हो तो वह प्राचीनकाल में किसी प्रकार की विद्या की जानकारी देता था , उसके बाद बी ए और एम ए की डिग्री तथा आज वह एम बी ए और एम सी ए जैसी डिग्री दिलाने में सहायक होता है।

                      jyotish gyan

                      वातावरण में परिवर्तन भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन ले जाता है। किसी किसान या व्यवसायी का उत्तम संतान पक्ष लड़के की संख्या में बढ़ोत्तरी कर सकता है , ताकि वे बड़े होकर परिवार की आमदनी बढ़ाएं , किन्तु एक ऑफिसर के लिए उत्तम संतान का योग संतान के गुणात्मक पहलू की वृद्धि करेगा। किसी जन्मपत्री में कमजोर संतान का योग एक किसान के लिए आलसी , बड़े व्यवसायी के लिए ऐयाश और ऑफिसर के लिए बेरोजगार बेटे का कारण बनेगा। । किसी किसान के पुत्र की कुंडली में उत्तम विद्या का योग होने से वह ग्रज्युएट होगा , किन्तु किसी ऑफिसर के पुत्र का वही उत्तम योग उसे आई ए एस बना सकता है। किसी किसान के लिए उत्तम मकान का योग उसे पकके का दोमंजिला मकान ही दे सकता है , किन्तु एक बड़े व्यवसायी का वही योग उसे एक शानदार बंगला देगा। किसी कुंडली में बाहरी स्थान से संपर्क का योग किसी ग्रामीण को शहरी क्षेत्र का , किसी शहरी व्यक्ति को महानगर का तथा महानगर के व्यक्ति के लिए विदेश के भ्रमण का कारण बन सकता है। किसी कुडली में ऋणग्रस्तता का योग एक साधारण व्यिक्त् को 500-1000 का तथा बड़े व्यवसायी को करोड़ों का ऋणी बना सकता है।

                      jyotish shastra

                      अलग अलग देश और प्रदेश के अनुसार भी ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन आता है। किसी विकसित देश में किसी महिला का प्रतिष्ठा का योग उसे प्रतिष्ठित नौकरी देगा , जबकि भारत के ग्रामीण क्षेत्र की महिला को सिर्फ अच्छा घर-वर ही प्रदान कर सकता है। किसी लड़की की कुंडली में दृष्ट हल्का कमजोर पति पक्ष भारत में सिर्फ परेशानी देनेवाला होगा , जबकि अमेरिका जैसे देश में वह तलाक देने और दिलानेवाला होगा। आज भले ही हम अपने को विज्ञान के युग का समझकर ज्‍योतिष पर हंसे या उसे नकारे , पर वास्‍तव में ज्‍योतिष एक सांकेतिक विज्ञान है और यह मनुष्‍य के स्‍वभाव , बनावट और परिस्थितियों का पूरा पूरा संकेत देता है। ग्रह मानव मन और मस्तिष्‍क तक का नियंत्रक है। यह मानव मस्तिष्‍क को वैसा ही व्‍यवसाय , वैसी ही नौकरी और घरवर चुनने के लिए प्रेरित करता है , जैसा उसे उसकी जन्‍मपत्री के अनुसार मिलना चाहिए ।

                       jyotish software

                      आज इस क्षेत्र में नए नए आविष्‍कार की आवश्‍यकता है। इस क्षेत्र का विकास तब ही होगा , जब कुछ पढे लिखे लोगों का ध्‍यान इस ओर आकर्षित होगा और वे अपना कुछ समय इस प्राचीन गौरवपूर्ण विज्ञान को समर्पित कर पाएंगे । विश्‍वविद्यालय को भी इस क्षेत्र में काम करनेवालों को सम्‍मानित करना पडेगा , जिस दिन ऐसा हुआ ज्‍योतिष विज्ञान की दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति शुरू हो जाएगी । हमने ज्योतिष को आज के युग के अनुरूप विक्सित किया है।  हमारा ज्योतिष सॉफ्टवेयर किसी के पुरे जीवन के उतर-चढ़ाव का ग्राफ खिंच सकता है।  उसके जीवन में विभिन्न मामलों का सुख-दुःख प्रतिशत में बता सकता है। इससे  बढ़कर हमारा एप्प है जो आपके ऊपर प्रतिदिन के ग्रहों का प्रभाव भी बतला सकता है। हमारे इस प्रयास ने ही ज्योतिष को विज्ञान का दर्जा दे दिया है। 

                      अमेज़ॉन के किंडल में गुरूवर विद्या सागर महथा जी की  फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ को पढ़ने के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें !

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