कुंडली देखकर किसी व्‍यक्ति के विभिन्‍न पहलुओं की स्थिति या भविष्‍य का अनुमान हम कैसे लगाते हैं ??

ज्योतिष

गणित ज्‍योतिष में आसमान के पूरब से पश्चिम की ओर जाती गोलाकार 360 डिग्री की पट्टी को बारह भागों में बांट दिया जाता है। इन बारह भागों को हम राशि कहते हैं , इन राशियों में व्‍यक्ति के जन्‍म के समय जो राशि उदित होती है , उसे लग्‍न राशि कहते हैं।

ज्योतिष

लग्‍नराशि जन्‍मकुंडली का प्रथम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की शारीरिक स्थिति या उसके आत्‍मविश्‍वास के बारे मे अनुमान किया जाता है। 

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का द्वितीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की आर्थिक या पारिवारिक स्थिति के बारे में अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का तृतीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाई बहन की स्थिति या शक्ति के बारे में अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का चतुर्थ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की माता की स्थिति या हर प्रकार की संपत्ति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का पंचम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की बुद्धि की स्थिति या संतान के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का षष्‍ठ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की रोग प्रतिरोधक या किसी प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति या प्रभाव के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का सप्‍तम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के दाम्‍पत्‍य जीवन की स्थिति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का अष्‍टम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में


स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की जीवनशैली या उम्र के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का नवम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में


स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाग्‍य की स्थिति या उसके प्रति दृष्टिकोण के बारे मे अनुमान किया जाता

है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का दशम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के पिता और पद प्रतिष्‍ठा की स्थिति या उसके सामाजिक और राजनीतिक स्थिति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का एकादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के लाभ के प्रति संतोष या लक्ष्‍य के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि जन्‍मकुंडली का द्वादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में

स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के खर्च या बाहरी संदर्भों की स्थिति या विदेश यात्रा के बारे मे भी अनुमान किया जाता है।

यूं तो परंपरागत ज्‍योतिष में बालक के विभिन्‍न संदर्भों के बारे में अनुमान करने के लिए ग्रहों की शक्तियों को निकालने के कई सूत्र दिए गए हैं , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष उनकी सहायता नहीं लेता और विभिन्‍न भावों के स्‍वामी ग्रह या उन भावों में स्थित ग्रहों की 'गत्‍यात्‍मक शक्ति' और 'स्‍थैतिक शक्ति' के द्वारा इसका आकलन करता है । ज्योतिष के क्षेत्र में नया प्रयोग है, जो काफी सटीक है।


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कुंडली देखकर किसी व्‍यक्ति के विभिन्‍न पहलुओं की स्थिति या भविष्‍य का अनुमान हम कैसे लगाते हैं ?? कुंडली देखकर किसी व्‍यक्ति के विभिन्‍न पहलुओं की स्थिति या भविष्‍य का अनुमान हम कैसे लगाते हैं ?? Reviewed by संगीता पुरी on December 14, 2009 Rating: 5

15 comments:

Bhawna Kukreti said...

sangeeta ji kya pashchatya jyotish bhinn hota hai ,kyonki apna vivran dene par alag hi rashi batae hain jabki vaidik jyotish alag , grahon ki istithi bhi alag hoti hai , masln 18 june 1977 , 5:15 am, dehradun par vahan ke anusaar rahi "kark" lagn me surya , budh aur guru batata hai aur yahan ke anusaar rashi "mithun ", lagn me surya chandra batata hai hoti hai , kya aap is par bhavishya me kisi lekh me prakaash dalengi

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहुत अच्छा और ज्ञानवर्धक लगा यह लेख.....

डॉ महेश सिन्हा said...

अच्छी जानकारी

Unknown said...

uttam aalekh !

rochak bhi, gyaanvardhak bhi.........

__abhinandan !

निर्मला कपिला said...

बहुत अच्छी जानकारी आगे भी जारी रखिये धन्यवाद्

Murari Pareek said...

ऐसे लेख पढ़कर हम भी थोड़े थोड़े ज्योतिषी बनते जा रहे हैं !!! सुन्दर जानकारी!!!

vandan gupta said...

bahut badhiya jankari

डॉ टी एस दराल said...

ये जानकारी तो अच्छी रही।
आभार।

Anonymous said...

jaankari ke liye abhar.

Vinashaay sharma said...

अच्छी जानकारी ।

दिनेशराय द्विवेदी said...

भाव तो समझ आए। एक के बाद एक आते हैं क्रमानुसार। पर यह कभी समझ नहीं आया कि पहले भाव से शारीरिक स्थिति ही क्यों देखी जाती है? उस से आर्थिक या पारिवारिक स्थिति क्यों नहीं देखी जाती। किसी भी भाव से किसी खास स्थिति को देखने का आधार क्या है। किसी ने यूँ ही निर्धारित कर दिया और फिर सब भेड़ चाल की तरह उस के पीछे चल पड़े या उस का कोई ठोस आधार है?
एक सवाल और मेष राशि का स्वामी मंगल ही क्यों है. वृष का शुक्र ही क्यों और मिथुन का बुध ही क्यों कर्क का चंद्रमा और सिंह का सूर्य क्यों? यह किसने निर्धारित किया? और इस का आधार क्या है?

संगीता पुरी said...

दिनेश राय द्विवेदी जी,
सादर नमस्‍कार।
प्रकृति के रहस्‍य को समझने भर की शक्ति हम रख सकते हैं .. हर क्‍यूं का
जबाब देना बडा मुश्किल है .. जो ऋषि मुनि खगोल शास्‍त्र के इतने सूक्ष्‍म
सिद्धांतों को विकसित कर सकते थे .. भविष्‍यवाणी के लिए नियम बनाते वक्‍त
यूं ही कैसे बना दिया होगा .. आप ऐसा सोंच क्‍यूं लेते हैं ?

मेष राशि का स्वामी मंगल ही क्यों है. वृष का शुक्र ही क्यों और मिथुन का
बुध ही क्यों कर्क का चंद्रमा और सिंह का सूर्य क्यों? यह किसने
निर्धारित किया? और इस का आधार क्या है?
इसे समझाते हुए मैने एक पोस्‍टलिखी थी .. आपने पढा भी था और टिप्‍पणी भी
की थी .. लेकिन आज फिर से पूछ रहे हैं आप !
संगीता पुरी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

जिसका काम उसी को साजे!
दूसरा करे तो मूँगरा बाजे!!

VISHWA BHUSHAN said...

sunder spashteekaran.. kya bilkul sateek bhavishyavani bhi sambhav hai?

kishore ghildiyal said...

bahut hi gyaan vardhak jaankaari di hain aapne

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