गत्यात्मक ज्योतिष, Changing World में Kundli को देखने का नया Scientific दृष्टिकोण

 

गत्यात्मक ज्योतिष, Changing World में Kundli को देखने का नया Scientific दृष्टिकोण 

भूमिका 

 गत्यात्मक ज्योतिष की मूल अवधारणा यह मानती है कि पृथ्वी और इस पर स्थित सभी जड़, चेतन और जीव निरंतर विकासशील हैं। दिन-प्रतिदिन पृथ्वी का स्वरूप, वायुमंडल, तापमान, पर्वत, नदियाँ, वन और यहाँ तक कि चट्टानें भी बदल रही हैं। जब प्रकृति परिवर्तनशील है, तो फिर मनुष्य और उसके भाग्य का विश्लेषण स्थिर नियमों से कैसे किया जा सकता है? इसी प्रश्न को गत्यात्मक ज्योतिष ने चुनौती के रूप में लिया है।

🌱 प्रकृति, परिवर्तन और अस्तित्व का नियम 

पर्यावरण के हजारों-लाखों वर्षों के इतिहास का अध्ययन स्पष्ट करता है कि जो जड़-चेतन अपने वातावरण के अनुरूप स्वयं को बदल लेता है, वही टिक पाता है। जो ऐसा नहीं कर पाता, उसका विनाश निश्चित होता है। यही नियम - 

  • वनस्पति

  • जीव-जंतु

  • मनुष्य

  • और यहाँ तक कि सभ्यताओं

पर समान रूप से लागू होता है।

डायनासोर का विनाश: एक चेतावनी 

करोड़ों वर्ष पूर्व डायनासोर जैसे विशाल जीवों का विनाश इस बात का प्रमाण है कि वे पृथ्वी के बदलते तापमान

और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाल नहीं सके। आकार, शक्ति और संख्या, सब कुछ होते हुए भी अनुकूलन की कमी ने उनका अस्तित्व समाप्त कर दिया।

भेड़ का उदाहरण: जीवंत गत्यात्मकता 

भेड़ ठंडे प्रदेश का प्राणी है। ठंड से बचने के लिए उसके शरीर में -

  • मोटे

  • घने

  • गर्म

 रोएँ होते हैं। यदि उसी भेड़ को गर्म प्रदेश में रखा जाए, तो रोएँ बनने की मात्रा कम हो जाती है ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे, यही गत्यात्मक अनुकूलन है।

 शास्त्र, समाज और युग परिवर्तन 

  • परिवर्तन का प्रभाव केवल जीवों तक सीमित नहीं है। 

  • भाषाओं का साहित्य युग के साथ बदलता है

  • नीतिशास्त्र समयानुसार नीतियाँ बदलता है

  • राजनीतिशास्त्र विभिन्न युगों में अलग सरकारों को महत्व देता है

  • औषधि-शास्त्र निरंतर नई चिकित्सा पद्धतियाँ अपनाता है

आज हर - 

  • आर्थिक

  • सामाजिक

  • मानसिक

स्तर के लिए अलग उपचार प्रणाली उपलब्ध है।

❓ तो फिर ज्योतिष क्यों स्थिर? 

हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी ज्योतिष के अधिकांश नियम आज भी प्राचीन ग्रंथों के अनुवादों तक सीमित हैं जबकि 

  • समाज बदल चुका है

  • मानसिकता बदल चुकी है

  • जीवन-शैली पूरी तरह बदल चुकी है

तो क्या ज्योतिष को भी समय के अनुरूप नहीं बदलना चाहिए? यही प्रश्न गत्यात्मक ज्योतिष का आधार है।

गत्यात्मक ज्योतिष: कुंडली देखने का नया तरीका 

गत्यात्मक ज्योतिष कहता है कि कुंडली को  Static नहीं, Dynamic रूप में देखना चाहिए।

  • कुंडली को स्थैतिक ढंग से नहीं देखना चाहिए

  • ग्रहों का प्रभाव समय के साथ बदलता है

  • भावों का अर्थ युग के अनुसार परिवर्तित होता है

छठा भाव (6th House Astrology): पुरातन

प्राचीन काल में - 

  • रोग

  • ऋण

  • शत्रु

तीनों ही जीवन को लगभग नष्ट कर देते थे। बीमारी = लगभग निश्चित मृत्यु, ऋण = पीढ़ियों तक गुलामी,  शत्रुता = जीवनभर मुकदमे और संघर्ष।  इसलिए ज्योतिष में छठे भाव को अशुभ माना गया।

आधुनिक युग में छठे भाव का नया अर्थ 

आज

  • चिकित्सा विज्ञान अत्यंत उन्नत है

  • ऋण विकास का साधन बन चुका है

  • प्रतियोगिता सफलता का मार्ग है

 गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार यदि छठे भाव में ग्रह गत्यात्मक और स्थैतिक रूप से मजबूत हों, तो जातक - 

  • सफल डॉक्टर

  • न्यायाधीश

  • प्रशासक

  • प्रभावशाली व्यवसायी

बन सकता है।

आठवाँ भाव (8th House Astrology): पुरातन

प्राचीन काल में आठवाँ भाव - 

  • मृत्यु

  • अपंगता

  • जीवन का अंत

माना जाता था। 

आधुनिक युग में आठवें भाव का नया अर्थ 

आज - 

  • कृत्रिम अंग

  • उन्नत सर्जरी

  • आधुनिक उपचार

ने मृत्युतुल्य कष्टों को भी जीवन योग्य बना दिया है।

 गत्यात्मक दृष्टि से आठवाँ भाव 

यदि आठवें भाव में ग्रह मजबूत हों, तो जातक - 

  • नवाचार कर सकता है। 

  • शोधकर्ता बन सकता है। 

  • समाज सुधारक हो सकता है। 

  • जीवन की समस्याओं का समाधान खोज सकता है। 

यदि ग्रह कमजोर हों, तो कष्ट संभव है, पर वह केवल उस ग्रह के दशा-काल में ही प्रभावी होता है।

बारहवाँ भाव (12th House Astrology): खर्च या क्षमता? 

प्राचीन काल में

  • खर्च = संकट

  • बचत = सुरक्षा

  • विदेश भेजना = दंड 

इसलिए 12वें भाव को कष्टकारी माना गया था।

आधुनिक युग में 12वें भाव का अर्थ आज

  • खर्च व्यक्ति की क्रय-शक्ति दिखाता है

  • बड़ा खर्च = बड़ा स्तर

  • निवेश = विकास

  • विदेश जाना = सफलता 

गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार, यदि 12वें भाव में ग्रह मजबूत हों - 

  • बाहरी संबंध सशक्त होते हैं। 

  • अंतरराष्ट्रीय अवसर मिलते हैं। 

  • जीवन स्तर ऊँचा होता है। 

कमजोर ग्रह होने पर - 

  • खर्च को लेकर तनाव

  • असुरक्षा की भावना

देखी जाती है।

निष्कर्ष

समयानुकूल ज्योतिष ही भविष्य है, यदि डायनासोर अनुकूलन न कर पाने से समाप्त हो सकता है। शास्त्र समयानुसार बदल सकते हैं तो ज्योतिष को भी युग के अनुसार विकसित होना ही होगा। गत्यात्मक ज्योतिष यही सिखाता है, कुंडली को समय, समाज और परिस्थिति के साथ जोड़कर देखना। जो बदलता है, वही टिकता है और जो समय के साथ स्वयं को ढाल ले, वही शास्त्र बनता है। गत्यात्मक ज्योतिष उसी परिवर्तनशील सत्य की अभिव्यक्ति है।

❓ FAQs – Google People Also Ask 

🔹 गत्यात्मक ज्योतिष क्या है? 

यह ग्रहों की गति तथा सूर्य और पृथ्वी के सापेक्ष ग्रहों की कोणिक दूरी के आधार पर देखी  जानेवाली गत्यात्मक शक्ति के आधार पर कुंडली देखने की आधुनिक प्रणाली है।

🔹 क्या 6th, 8th और 12th भाव हमेशा अशुभ होते हैं? 

नहीं, गत्यात्मक दृष्टि से मजबूत ग्रह इन भावों में भी सफलता देते हैं।

🔹 क्या यह ज्योतिष प्राचीन ग्रंथों के विरुद्ध है? 

नहीं, यह उनके सिद्धांतों को आधुनिक युग में लागू करने का प्रयास है।

🔹 क्या आम व्यक्ति इसे समझ सकता है?

 हाँ, यह प्रणाली व्यावहारिक और जीवन से जुड़ी हुई है।


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    संगीता पुरी

    Specialist in Gatyatmak Jyotish, latest research in Astrology by Mr Vidya Sagar Mahtha, I write blogs on Astrology. My book published on Gatyatmak Jyotish in a lucid style. I was selected among 100 women achievers in 2016 by the Union Minister of Women and Child Development, Mrs. Menaka Gandhi. In addition, I also had the privilege of being invited by the Hon. President Mr. Pranab Mukherjee for lunch on 22nd January, 2016. I got honoured by the Chief Minister of Uttarakhand Mr. Ramesh Pokhariyal with 'Parikalpana Award' The governor of Jharkhand Mrs. Draupadi Murmu also honoured me with ‘Aparajita Award’ श्री विद्या सागर महथा जी के द्वारा ज्योतिष मे नवीनतम शोध 'गत्यात्मक ज्योतिष' की विशेषज्ञा, इंटरनेट में 15 वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय, सटीक भविष्यवाणियों के लिए पहचान, 'गत्यात्मक ज्योतिष' को परिभाषित करती कई पुस्तकों की लेखिका, 2016 में महिला-बाल-विकास मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी और महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी द्वारा #100womenachievers में शामिल हो चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी के द्वारा 'परिकल्पना-सम्मान' तथा झारखण्ड की गवर्नर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा 'अपराजिता सम्मान' से मुझे सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ। Ph. No. - 8292466723

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